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ज्यादातर सीटों पर AAP का कब्जा, पंजाब पंचायत चुनाव में कांग्रेस–अकाली को झटका

 चंडीगढ़     पंजाब में जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों के मतों की गिनती के बाद अब तक आए नतीजे जारी किए गए. राज्य चुनाव आयोग ने मंगलवार को तमाम केंद्रों पर मतगणना प्रक्रिया पूरी की. आम आदमी पार्टी ने राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए यह चुनाव लड़ा.  सत्तारूढ़ पार्टी ने जिला परिषद की 177 और ब्लॉक समिति की 2097 घोषित सीटों में से ज्यादातर पर जीत दर्ज की.  विपक्षी दलों कांग्रेस, अकाली दल और बीजेपी को कई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा. प्रशासन ने शांतिपूर्ण मतगणना सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे.Punjab Panchayat Election जिला परिषद में AAP की बड़ी जीत जिला परिषद के कुल 346 जोन के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई थी, जिनमें से 177 के नतीजे घोषित हो चुके हैं. इनमें आम आदमी पार्टी 98 सीटों पर जीती है और 22 सीटों पर उसके उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं. इस तरह AAP के पास कुल 120 सीटें हैं.  वहीं, कांग्रेस को 27 और शिरोमणि अकाली दल को 21 सीटें मिली हैं. बहुजन समाज पार्टी ने 3 सीटें जीती हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी और सीपीआई (एम) का अब तक खाता नहीं खुला है. खडूर साहिब के एक जोन में कोई वैध नामांकन नहीं मिला था. ब्लॉक समिति के नतीजों का गणित ब्लॉक समिति की कुल 2838 सीटों में से 352 पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे और 2486 जोन के लिए मतदान हुआ. अब तक कुल 2097 सीटों के नतीजे आधिकारिक तौर पर घोषित किए गए हैं. इनमें AAP ने 892 सीटों पर जीत और 339 निर्विरोध सीटों के साथ कुल 1231 सीटों पर कब्जा किया है. कांग्रेस को 419 जीत और 3 निर्विरोध सीटों के साथ 422 सीटें मिली हैं. अकाली दल को 253, बीजेपी को 49 और बसपा को 26 सीटें हासिल हुई हैं. निर्दलीय उम्मीदवारों ने कुल 116 सीटें जीती हैं. अंतिम आंकड़ों का इंतजार चुनाव परिणामों की अंतिम तालिका का अभी भी इंतजार किया जा रहा है. मतगणना जारी रहने के कारण बाकी सीटों के नतीजे धीरे-धीरे स्पष्ट हो रहे हैं. अब तक के रुझानों और नतीजों ने पंजाब की राजनीति में AAP के बढ़ते प्रभाव को साफ कर दिया है. बीजेपी और अन्य छोटी पार्टियों के लिए ये नतीजे चुनौतीपूर्ण रहे हैं. 6 निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जिला परिषद में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है. अंतिम आंकड़े घोषित होने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी.

जाति आधारित गाली: प्राइवेट या पब्लिक, यही तय करेगा SC-ST एक्ट का केस

जयपुर  एससी-एसटी एक्ट यानी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम पर एक अहम फैसला सामने आया है. किसी ने जाति को लेकर गाली प्राइवेट में दी या पब्लिक में, अब इससे मुकदमा तय होगा. जी हां, राजस्थान हाईकोर्ट का मानना है कि अगर किसी की जाति को लेकर गाली प्राइवेट में दी गई है तो उससे एससी-एसटी एक्ट का केस नहीं बनता है. यही कारण है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने SC/ST एक्ट के तहत 31 साल पुरानी सजा रद्द कर दी है.  मामला शोरूम में ऋण से खरीदे वाहन के भुगतान को लेकर जुड़े विवाद से था. दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट के मुताबिक, बंद शोरूम के भीतर हुई कथित जातिसूचक गाली को ‘सार्वजनिक दृष्टि’ में नहीं माना जा सकता. राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलट दिया और इस मामले में याचिककार्ता को बरी कर दिया. कोर्ट ने कहा कि ‘सार्वजनिक दृष्टि’ का मतलब है आम लोगों द्वारा देखा या सुना जाना. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(x) तभी लागू होती है जब अपमानजनक शब्द आम लोगों की नजर में या सुनाई में बोले जाएं. हाईकोर्ट ने घटना शोरूम के अंदर होने और स्वतंत्र गवाह न होने की पुष्टि की. क्योंकि यह मामला व्यावसायिक विवाद से जुड़ा है, इसलिए इस पर SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(x) लागू नहीं होगा. क्या है मामला? मामला 31 साल पुराना है. मामले की शुरुआत 1994 में हुई. तब जोधपुर के एक शोरूम में व्यावसायिक विवाद के दौरान जातिसूचक गाली देने का आरोप लगा. शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति से संबंधित रखता था. उसने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे जाति के आधार पर अपमानित किया. विवाद की जड़ एक वाहन की खरीद से जुड़ी थी. शिकायतकर्ता ने शोरूम से ऋण पर एक वाहन खरीदा था, मकगर भुगतान में देरी हो गई. इसी कारण शोरूम मालिक ने वाहन को जब्त करने की कोशिश की. इस दौरान शोरूम के अंदर दोनों पक्षों के बीच बहस हुई, और आरोप है कि आरोपी ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया. शिकायतकर्ता ने दावा किया कि यह अपमान SC/ST एक्ट के तहत आता है, क्योंकि यह उन्हें सार्वजनिक रूप से नीचा दिखाने का प्रयास था. ट्रायल कोर्ट का फैसला क्या था ट्रायल कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के बाद 1994 में आरोपी को दोषी ठहराया. कोर्ट ने SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(x) के तहत सजा सुनाई, जिसमें जाति के आधार पर अपमान करने पर दंड का प्रावधान है. ट्रायल कोर्ट का मानना था कि शोरूम एक व्यावसायिक स्थान है, जहां लोग आते-जाते रहते हैं, इसलिए यह घटना सार्वजनिक दृष्टि में आती है. आरोपी को जेल की सजा और जुर्माना लगाया गया. हालांकि, आरोपी ने इस फैसले के खिलाफ अपील की, और मामला हाईकोर्ट पहुंचा. अपील में आरोपी की ओर से तर्क दिया गया कि घटना बंद शोरूम के अंदर हुई थी, जहां कोई बाहरी व्यक्ति मौजूद नहीं था. यह एक निजी विवाद था, न कि सार्वजनिक अपमान. क्या है एससी-एसटी एक्ट एससी-एसटी एक्ट का पूरा नाम है अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम. यह 1989 में बना एक कानून है. इसका मकसद दलितों और आदिवासियों को जाति के आधार पर होने वाले अपमान, हिंसा और अत्याचार से बचाना है. अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर इन समुदायों के व्यक्ति को जातिसूचक गाली देता है, मारता है या उनकी संपत्ति नुकसान पहुंचाता है, तो उसके खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान है. यह कानून पीड़ितों को तुरंत न्याय और सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है.

निजी ऐप्स के हाइपर लोकल AQI मानकों पर भरोसा न करें, जनता से अपील

लखनऊ का AQI (वायु गुणवत्ता इंडेक्स) 174 निजी ऐप्स का हाइपर लोकल मानक अपनाने से फैल रहा भ्रम जनता से अपील: भ्रामक खबरों से रहें सावधान लखनऊ  लखनऊ का AQI (वायु गुणवत्ता इंडेक्स) 174 है जो हवा की मॉडरेट क्वालिटी को प्रमाणित करता है। सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफार्म पर  AQI से संबंधित भ्रामक आंकड़े प्रचारित और प्रसारित किए जा रहे हैं जो वायु गुणवत्ता बताने वाले निजी एप से लिए गए हैं।  अधिकतर विदेशी प्लेटफॉर्म US-EPA मानकों का उपयोग करते हैं, जबकि भारत में National Air Quality Index (NAQI) का पालन किया जाता है। दोनों के मापदंड अलग-अलग हैं। साथ ही सरकारी स्टेशन (जैसे लालबाग, तालकटोरा, अलीगंज) प्रमाणित और कैलिब्रेटेड उपकरणों का उपयोग करते हैं। निजी संस्थाएं अक्सर सैटेलाइट डेटा या अनकैलिब्रेटेड सेंसर का प्रयोग करती हैं, जिनमें त्रुटि की संभावना अधिक होती है। सीपीसीबी का डेटा 24 घंटे के औसत पर आधारित सीपीसीबी द्वारा जारी AQI आंकड़े पिछले 24 घंटों के औसत वैज्ञानिक मूल्यांकन पर आधारित होते हैं, जिससे शहर की वास्तविक और समग्र वायु गुणवत्ता की स्थिति सामने आती है। इसके विपरीत, कई निजी ऐप्स क्षणिक और स्थानीय धूल और कणों को दिखाते हैं, जो किसी एक चौराहे, ट्रैफिक जाम या सीमित गतिविधि के कारण हो सकते हैं और पूरे शहर की स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करते। तकनीकी अंतर से पैदा होता है भ्रम वायु गुणवत्ता मापने की तकनीक और मानकों में अंतर के कारण निजी ऐप्स पर दिखाई देने वाले आंकड़े अक्सर भ्रामक हो जाते हैं। सीपीसीबी का मॉडल भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित किया गया है, जबकि अधिकतर निजी ऐप विदेशी परिस्थितियों पर आधारित होते हैं, जो भारत की भौगोलिक, मौसमी और पर्यावरणीय स्थितियों को सही तरीके से आंकने में सक्षम नहीं हैं। धूल और धुएं में अंतर नहीं कर पाते निजी ऐप्स विशेषज्ञों के अनुसार कई निजी ऐप धूल कण और धुएं के बीच अंतर नहीं कर पाते। भारतीय शहरों में धूल की मात्रा स्वाभाविक रूप से अधिक होती है, लेकिन विदेशी मॉडल इसे सीधे प्रदूषण मान लेते हैं। इसी कारण AQI को वास्तविकता से अधिक दिखाया जाता है और अनावश्यक डर का माहौल बनता है। एक ही शहर के लिए अलग-अलग आंकड़े, भरोसेमंद नहीं निजी डेटा यह भी सामने आया है कि निजी ऐप्स एक ही शहर के अलग अलग इलाकों के लिए अलग अलग AQI दिखाते हैं, जो समग्र शहरी स्थिति नहीं बताते। ऐसे आंकड़े न तो प्रमाणिक होते हैं और न ही किसी आधिकारिक एजेंसी द्वारा सत्यापित, जिससे आमजन में भ्रम और चिंता फैलती है। भ्रामक आंकड़ों से फैलाई जा रही चिंता निराधार निजी ऐप के आधार पर फैलाया जा रहा डर तथ्यहीन और निराधार है। लखनऊ की वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है, स्थिति नियंत्रण में है और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। नागरिकों से अनुरोध है कि केवल सीपीसीबी और सरकारी स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें।

जनकल्याण के लिए जो कहा, वही करके दिखाया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनकल्याण के लिए जो कहा, वही करके दिखाया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव कथनी नहीं करनी में विश्वास: मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जनकल्याण संदेश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जनकल्याण के लिए जो बात कही गई, उस पर अमल भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में नागरिकों की समृद्धि के लिए दो वर्ष में किए गए विशेष कार्यों और अर्जित उपलब्धियों की बिंदुवार जानकारी बुधवार को मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में दिए गए संबोधन में सदन में प्रस्तुत की। इन में प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार है:-     पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल जी की जन्म वर्षगांठ पर आगामी 25 दिसम्बर को ग्वालियर में उद्योग वर्ष के समापन अवसर पर 2 लाख करोड़ के निवेश से विभिन्न इकाईयों के भूमि पूजन का कार्य हो रहा है।     मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजस्थान के क्षेत्रों में संयुक्त चीता कॉरीडोर बनाने की पहल। गांधी सागर और नौरादेही में भी चीते बसाएंगे।     शिवपुरी में 9वें टाइगर रिजर्व पार्क की शुरूआत।     रीजनल औद्योगिक कॉन्क्लेव के साथ ही रेडिमेड और खिलौना निर्माण इकाईयों में कार्य करने वालों को प्रोत्साहन राशि।     आने वाले समय में सेटेलाइट के माध्यम से किसानों के खेतों और खसरा खतोनी की जानकारी प्राप्त कर घर बैठे खाद पहुंचाने का संकल्प।     स्वास्थ्य क्षेत्र में चिकित्सा अधिकारियों सहित अन्य पदों पर लगभग 42 हजार नियुक्तियों की स्वीकृति।     वर्ष 1956 में प्रदेश में 5 मेडिकल कॉलेज थे। गत डेढ़ वर्ष में 6 नए कॉलेज प्रारंभ, पीपीपी मोड पर 14 कॉलेजों के लिए निविदा की कार्यवाही। दिसम्बर 2025 में 4 मेडिकल कॉलेजों का भूमि पूजन निर्धारित। प्रदेश में 52 मेडिकल कॉलेज हो जाएंगे। सभी जिलों में कॉलेज होगा।     प्रत्येक संभाग में वन्य प्राणी संग्रहालय और रेस्क्यू सेंटर प्रारंभ करने की पहल।     राजधानी भोपाल में बड़ी झील में शिकारों से पर्यटकों और नागरिकों को कश्मीर का सुखद अहसास।     इंदौर में मेट्रो प्रारंभ। भोपाल में मेट्रो ट्रेन संचालन शीघ्र।     प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जन्म वर्षगांठ 17 सितम्बर को धार जिले में पीएम मित्रपार्क की आधारशीला रखी।     प्रदेश में सिकल सेल एनीमिया नियंत्रण की ठोस पहल कर पीढ़ियों को गंभीर जन्मजात रोग से बचाने का प्रयास।     भगोरिया को राष्ट्रीय पर्व की मान्यता दी गई। उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारी में जनजातीय वर्ग की भागीदारी की शुरूआत की। जनजातीय गौरवशाली विभूतियों के सम्मान में जबलपुर, सिंग्रामपुर और पचमढ़ी में मंत्रिपरिषद की बैठकें की गईं।     राज्य में तेज ध्वनि यंत्रों पर नियंत्रण की पहल।     गौ-संरक्षण के राज्य में ठोस प्रयास किए गए।  

पूर्व डीजीपी डॉ. प्रशांत कुमार को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया

पूर्व डीजीपी डॉ. प्रशांत कुमार को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की कमान अब पूर्व डीजीपी डॉ. प्रशांत कुमार के हाथों में लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा सेवा चयन प्रक्रिया को मजबूत और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) डॉ. प्रशांत कुमार को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। डॉ. प्रशांत कुमार 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी रहें हैं, जो हाल ही में डीजीपी पद से रिटायर हुए हैं। उनके प्रशासकीय अनुभव को देखते हुए प्रदेश सरकार ने उन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंपी है। डॉ. प्रशांत कुमार ने उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा में  विभिन्न अहम पदों पर अपनी प्रशानिक कुशलता का परिचय दिया है, जिसमें प्रदेश के एडीजी (एल ओ) और कार्यकारी डीजीपी के रूप में राज्य की कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनका प्रशासनिक और शासकीय अनुभव सराहनीय रहा है। शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका से शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने और शिक्षक बहाली को नई गति मिलने की उम्मीद है। डॉ. प्रशांत कुमार की नियुक्ति से न केवल भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित होगी, बल्कि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को भी गति मिलेगी।

सूर्या अपार्टमेंट में स्थापित 15 किलोवाट सोलर संयंत्र से हर माह 20 हजार रुपये तक की हो रही बचत

पीएम सूर्यघर योजना में लखनऊ की एक रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन में पहली बार सामुदायिक सोलर रूफटॉप संयंत्र की स्थापना सूर्या अपार्टमेंट में स्थापित 15 किलोवाट सोलर संयंत्र से हर माह 20 हजार रुपये तक की हो रही बचत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ऊर्जा नीति को मिल रही मजबूती लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। केंद्र सरकार की पीएम सूर्यघर योजना के तहत लखनऊ की किसी रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) में पहली बार सामुदायिक सोलर रूफटॉप संयंत्र की सफल स्थापना की गई है। गोखले मार्ग स्थित सूर्या अपार्टमेंट आरडब्ल्यूए में लगाए गए 15 किलोवाट क्षमता के सोलर संयंत्र से न केवल बिजली बिल में हर माह ₹20 हजार तक की बचत हो रही है, बल्कि यह पहल योगी सरकार की हरित ऊर्जा नीति को भी मजबूती प्रदान कर रही है। यह लखनऊ की किसी भी आरडब्ल्यूए में पीएम सूर्यघर योजना के अंतर्गत सामुदायिक क्षेत्र के लिए स्थापित पहला सोलर रूफटॉप संयंत्र है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के तहत केंद्र सरकार की पीएम सूर्यघर योजना को प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इसी क्रम में ग्रुप हाउसिंग सोसायटी (GHS) एवं रेजीडेण्ट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के कामन एरिया की विद्युत आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु सोलर रूफटॉप संयंत्रों की स्थापना को बढ़ावा दिया जा रहा है। योजना के अंतर्गत सामुदायिक लाइटिंग, पंखे, वाटर पंप, लिफ्ट आदि के लिए अधिकतम 500 किलोवाट क्षमता तक सोलर रूफटॉप संयंत्र लगाए जाने का प्रावधान है, जिस पर भारत सरकार द्वारा ₹18,000 प्रति किलोवाट की दर से केंद्रानुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के ऊर्जा विभाग एवं डिस्कॉम के सहयोग से आरडब्ल्यूए को इस योजना का लाभ लेने में सुविधा प्रदान की जा रही है।   इस परियोजना पर कुल ₹8.10 लाख की लागत आई, जिसके सापेक्ष आरडब्ल्यूए को ₹2.70 लाख का केंद्रानुदान प्राप्त हुआ। संयंत्र के चालू होने से वर्तमान में विद्युत बिल में ₹15,000 से ₹20,000 प्रति माह तक की बचत हो रही है। इससे सामुदायिक सुविधाओं पर होने वाला खर्च कम होने के साथ-साथ निवासियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना भी संभव हो सका है। यह पहल योगी सरकार की हरित ऊर्जा, आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश और स्वच्छ पर्यावरण की नीति को धरातल पर साकार करती है। यह लखनऊ सहित प्रदेश की अन्य आरडब्ल्यूए एवं ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों के लिए एक प्रेरणास्रोत है। सभी आरडब्ल्यूए से अपील की गई है कि वे योगी सरकार के सहयोग से पीएम सूर्यघर योजना का लाभ उठाते हुए अपने कामन एरिया में सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित करें और हरित ऊर्जा की दिशा में भागीदार बनें।

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 2026 में 124 दिन दफ्तर बंद, 11 लॉन्ग वीकेंड का मौका

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने साल 2026 के लिए छुट्टियों का आधिकारिक कैलेंडर जारी कर दिया है, जिसमें सरकारी दफ्तरों के बंद रहने और खुलने के दिनों की पूरी जानकारी है. साल 2026 में 365 दिनों में से 241 दिन ही सरकारी दफ्तर खुलेंगे, जबकि 124 दिन छुट्टी रहेगी. इसमें से 104 दिन शनिवार-रविवार का रहेगा है. साथ ही 20 गजेटेड हॉलिडे हैं. 12 महीने में 11 बार तीन दिन की सरकारी छुट्टी एक साथ है, जिसमें आराम से टूर प्लान किया जा सकता है. साल 2026 में हरियाणा के सरकारी दफ्तर 52 दिन शनिवार और 52 दिन रविवार मिलाकर कुल 124 दिन बंद रहेंगे. इनमें 20 पब्लिक हॉलिडे शामिल हैं.13 वालंटियर लीव तय की गई है, जिसमें तीन छुट्टी कर्मचारी ले सकते हैं. इसके अलावा एवरेज सीएल 30, ईएल और मेडिकल मिलाकर कर्मचारी 157 दिन घर पर रह सकते हैं, जबकि वह 208 दिन दफ्तर आएंगे. सरकार ने साल 2026 में 21 विशेष दिवस घोषित किए हैं. 11 बार मिलेगी 3-3 दिन की छुट्टी इन दिनों छुट्टी नहीं होगी, बल्कि सरकारी आयोजन होगा. साल में 8 सार्वजनिक अवकाश शनिवार-रविवार को आएंगे. ऐसे में कर्मचारियों की आठ छुट्टियों को नुकसान हो गया है. साल 2026 में दिवाली 8 नवंबर रविवार, जबकि 15 अगस्त को शनिवार पड़ रहा है. 2026 में 11 बार एक साथ तीन-तीन दिन की छुट्टी मिलेगी. जिससे कर्मचारी आराम से तीन का कोई भी प्लान तैयार कर सकते हैं. 26 जनवरी सोमवार को है. ऐसे में इससे पहले शनिवार-रविवार को भी छुट्टी रहेगी. साल 2026 में 124 दिन बंद रहेंगे दफ्तर शहीदी दिवस 23 मार्च यानी सोमवार को है. इससे पहले शनिवार-रविवार को दफ्तर बंद रहेंगे. 31 जुलाई शहीद उधम सिंह जयंती शुक्रवार को है. इसके बाद शनिवार और रविवार की छुट्टी रहेगी. 28 अगस्त शुक्रवार को रक्षाबंधन है. इसके बाद शनिवार रविवार छुट्टी रहेगी. सरकारी कैलेंडर जारी होने से कर्चमारियों के चेहरे पर काफी खुशी है. उन्हें साल में 124 दिन की छुट्टी मिल रही है. इसके अलावा भी वह सीएल, ईएल और मेडिकल मिलाकर कई छुट्टियां ले सकते हैं. बता दें कि सरकार हर साल इन्हीं दिनों सरकारी कैलेंडर जारी करती है, जिसके अनुसार पूरे साल का प्लान तैयार किया जाता है.  

सुकमा :गोलापल्ली के जंगल में एनकाउंटर, सुरक्षाबलों ने माओवादियों को घेरा

सुकमा  छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में DRG जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ चल रही है। खबर है कि इस दौरान  तीन नक्सली मारे गए हैं, जबकि कुछ घायल भी हुए हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस को सूचना मिली थी कि गोलापल्ली इलाके में भारी संख्या में नक्सली मौजूद हैं। इस आधार पर DRG के जवान जंगल में सर्च ऑपरेशन के लिए गए थे। 18 दिसंबर की सुबह जब जवान उस इलाके में पहुंचे, तो माओवादियों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी। माओवादियों की मौजूदगी की जानकारी के आधार पर जिला सुकमा की डीआरजी(जिला रिजर्व गार्ड) टीम ने गुरुवार की सुबह सर्च आपरेशन शुरू किया था। अभियान के दौरान सुबह से ही सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच रुक-रुक कर फायरिंग हो रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार मुठभेड़ स्थल से हथियारों की बरामदगी हुई है, हालांकि मारे गए माओवादियों की पहचान और बरामद सामग्री का विस्तृत विवरण अभियान पूर्ण होने के बाद जारी किया जाएगा। इस पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग स्वयं सुकमा एसपी किरण चव्हाण कर रहे हैं। क्षेत्र में अतिरिक्त बल तैनात कर सर्च ऑपरेशन को और तेज किया गया है। बता दें कि पिछले दो वर्ष में माओवादियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है, शीर्ष माओवादी नेताओं सहित 500 से अधिक माओवादी मुठभेड़ में मारे गए हैं। इसके जवाब में जवानों ने भी कार्रवाई की और दोनों तरफ से सुबह से ही गोलीबारी जारी है। मारे गए नक्सलियों में एरिया कमेटी मेंबर (ACM) कैडर के होने की संभावना जताई जा रही है। इस कैडर पर 5 लाख रुपए का इनाम रखा गया है। 3 दिसंबर को मुठभेड़ में मारे गए थे 12 नक्सली इससे पहले 3 दिसंबर को दंतेवाड़ा-बीजापुर बॉर्डर पर जवानों ने 12 नक्सलियों को मार गिराया था। इनमें डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM) वेल्ला मोडियम भी मारा गया था। वहीं, इस एनकाउंटर में DRG के 3 जवान शहीद और 2 घायल हुए थे। 16 नवंबर- 3 नक्सली मारे गए थे 16 नवंबर 2025 को भेज्जी-चिंतागुफा के सीमावर्ती क्षेत्र में जवानों ने तीन नक्सलियों को मार गिराया था। इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। जिसके बाद DRG की टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इसी दौरान तुमालपाड़ के जंगल में नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग के बाद जवानों ने भी मोर्चा संभाला। नक्सलियों की गोलियों का जवाब दिया। सुबह से दोनों ओर से रुक-रुककर फायरिंग हुई। इसमें तीन नक्सली मारे गए थे। जवानों ने सर्चिंग के दौरान जंगल से तीनों नक्सलियों के शव बरामद किए गए थे।

समृद्ध मध्यप्रदेश विजन@2047 आठ प्रमुख बिंदुओं पर होगा केंद्रित

सुखद, संपन्न मध्यप्रदेश की कल्पना को बिना भेदभाव के खुला दृष्टिकोण रखकर करेंगे साकार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव समृद्ध मध्यप्रदेश विजन@2047 आठ प्रमुख बिंदुओं पर होगा केंद्रित केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित डेडलाइन के पहले किया नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिया समृद्ध मध्यप्रदेश विजन 2047 पर केंद्रित संबोधन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुखद और सम्पन्न मध्यप्रदेश की कल्पना को बिना भेदभाव के खुले दृष्टिकोण के साथ कार्य करते हुए साकार किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मध्यप्रदेश विधान सभा के विशेष सत्र के समापन अवसर पर संबोधित करते हुए कहा कि पक्ष और विपक्ष के साथ नागरिकों के सुझावों और सहयोग के आधार पर प्रदेश के समग्र  विकास के लिए कार्य होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत @2047 के विजन के अनुसार मध्यप्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में क्रियान्वयन किया जाएगा। मध्यप्रदेश, प्रधानमंत्री मोदी के विजन को क्रियान्वित करने के लिए 8 प्रमुख विषयों पर तैयार किए गए दृष्टि-पत्र पर कार्य करेगा। दृष्टि-पत्र के इन 8 विषयों में 300 बिंदु निर्धारित किए गए हैं। आठ प्रमुख विषयों में सतत औद्योगिक विकास, अगली पीढ़ी की उन्नत कृषि, सेवाओं के क्षेत्र में विकास, विश्व स्तरीय शिक्षा और कौशल विकास, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य और पोषण, शहरी और ग्रामीण बुनियादी ढांचा, सुशासन और सुगम नागरिक सेवा और नवीन वित्त पोषण और निवेश शामिल है।  इसके पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदन में अपने संबोधन में प्रदेश में गत 2 वर्ष में अर्जित उपलब्धियों का भी विस्तार से उल्लेख किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्य रूप से राज्य के नागरिकों की समृद्धि के लिए कृषि, महिला सशक्तिकरण, वन्य-प्राणी संरक्षण, सांस्कृतिक अभ्युदय, शासकीय विभागों में पदों पर नियुक्तियां, नक्सलवाद पर केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित डेडलाइन के पूर्व  नियंत्रण की प्रभावी कार्यवाही , शहरी विकास, ग्रामीण विकास, ऊर्जा उत्पादन, सड़कों के निर्माण, स्वास्थ्य क्षेत्र में नई सुविधाओं, जनजातीय नायकों के सम्मान, मजरों-टोलों तक बिजली पहुंचाने, अन्तर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोनाओं के संबंध में विस्तार से जनकारी दी।      

लखपति दीदी मिशन को मिलेगी रफ्तार, सरकार की नई योजना से बदलेगी जीविका दीदियों की तकदीर

पटना  लखपति दीदी योजना बिहार के तहत राज्य की जीविका दीदियों को एक बार फिर बड़ी सौगात मिलने जा रही है। बिहार सरकार अब उन महिलाओं का विशेष सर्वे कराएगी, जिनकी वार्षिक आय 60 हजार रुपये या उससे अधिक है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत पहले ही महिलाओं को 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है और अब सरकार उन्हें “लखपति दीदी” बनाने की दिशा में अगला कदम उठाने जा रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार लखपति दीदी योजना बिहार को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की जा रही है। जीविका से जुड़ी महिलाओं को इस योजना में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की लाभुक महिलाओं को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि चयनित महिलाओं की सालाना आय को बढ़ाकर न्यूनतम एक लाख रुपये तक पहुंचाया जाए। जीविका दीदियों को मिलेगी ट्रेनिंग और तकनीकी सहयोग लखपति दीदी बनाने की योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं होगी। सरकार की ओर से महिलाओं को विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। जो महिलाएं पहले से किसी काम से जुड़ी हैं, उन्हें तकनीकी सहायता, स्किल डेवलपमेंट और बाजार से जोड़ने में भी मदद मिलेगी। लखपति दीदी योजना बिहार से जुड़ेगा महिला रोजगार अभियान लखपति दीदी योजना को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से जोड़कर आगे बढ़ाया जाएगा। इस योजना के तहत पहले ही हजारों महिलाओं को 10-10 हजार रुपये की सहायता दी जा चुकी है। अब इन्हीं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आय बढ़ाने की नई कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। चुनाव से पहले शुरू हुई थी योजना, अब मिलेगा अगला लाभ बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की घोषणा की गई थी। उस दौरान विपक्ष ने इसे लेकर सवाल भी उठाए थे। हालांकि, अब विवादों से आगे बढ़ते हुए सरकार योजना के अगले चरण पर काम कर रही है। जल्द ही 60 हजार रुपये या उससे अधिक आय वाली महिलाओं का सर्वे कराकर उन्हें लखपति दीदी बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।