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सिपेट के विद्यार्थियों ने किया आईसेक्ट इंडिया के बलशाली पाइप्स फैक्ट्री का औद्योगिक भ्रमण

भोपाल सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सिपेट) के विद्यार्थियों एवं अधिकारियों ने आईसेक्ट इंडिया के बलशाली पाइप्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का औद्योगिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने उत्पादन इकाइयों का अवलोकन कर पाइप निर्माण की आधुनिक प्रक्रियाओं, गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली तथा औद्योगिक संचालन के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। भ्रमण के दौरान विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों, उत्पादन प्रबंधन एवं उद्योगों में कौशल आधारित कार्य संस्कृति के बारे में जानकारी दी। विद्यार्थियों ने उत्पादन प्रक्रिया को नजदीक से समझते हुए उद्योग जगत की वास्तविक कार्यप्रणाली का अनुभव प्राप्त किया। औद्योगिक भ्रमण के उपरांत सिपेट के विद्यार्थियों, अधिकारियों एवं बलशाली बलशाली पाइप आईसेक्ट इंडिया की टीम द्वारा संयुक्त रूप से वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास एवं सतत भविष्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का संकल्प लिया। इस पहल पर आईसेक्ट इंडिया के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने कहा, “शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान एवं वास्तविक औद्योगिक अनुभव प्रदान करने का प्रभावी माध्यम है। ऐसे औद्योगिक भ्रमण विद्यार्थियों को कक्षा में अर्जित ज्ञान को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर देते हैं और उन्हें उद्योगों की अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार करते हैं। हमें प्रसन्नता है कि सिपेट के विद्यार्थियों ने हमारे बलशाली पाइप्स संयंत्र का भ्रमण कर उत्पादन प्रक्रियाओं को समझा। साथ ही वृक्षारोपण जैसी गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित की।” कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों एवं अधिकारियों ने आईसेक्ट इंडिया द्वारा संचालित औद्योगिक गतिविधियों की सराहना की तथा इस भ्रमण को ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी अनुभव बताया।

हल्दीघाटी इतिहास पर सवाल, मोहन भागवत बोले महाराणा प्रताप विजयी रहे

उदयपुर  महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती और हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में उदयपुर के गांधी ग्राउंड में आयोजित 'राष्ट्र चेतना संकल्प सभा' में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने इतिहास को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध में जीत महाराणा प्रताप की ही हुई थी. इतिहासरों की व्याख्या पर सवाल डॉ. भागवत ने इतिहासकारों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध को लेकर वर्षों से जो तथ्य परोसे गए हैं, वे वास्तविक घटनाक्रम से मेल नहीं खाते हैं. उन्होंने तर्क दिया कि जब मुगलकालीन इतिहासकार स्वयं यह स्वीकार करते हैं कि युद्ध में मुगल सेना को पीछे हटना पड़ा था, तो फिर जीत किसकी हुई, इसका उत्तर स्पष्ट है. उन्होंने कहा कि आज के दौर में अकबर की जयंती नहीं मनाई जाती, जबकि महाराणा प्रताप की जयंती पूरे विश्व में श्रद्धा और गौरव के साथ मनाई जाती है. यह इस बात का प्रमाण है कि जनता सही इतिहास को भली-भांति जानती है. स्वाभिमान का प्रतीक है भारत का इतिहास सरसंघचालक ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का इतिहास कभी भी गुलामी का इतिहास नहीं रहा है बल्कि यह आक्रमणकारियों के विरुद्ध निरंतर संघर्ष और स्वाभिमान का इतिहास है. महाराणा प्रताप का संघर्ष केवल उनकी सेना का नहीं, बल्कि पूरे समाज का था. उस समय अकबर के पास संसाधनों और शस्त्रों की विशाल शक्ति थी, फिर भी महाराणा प्रताप ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी स्वतंत्रता से समझौता नहीं किया. महापुरुषों से सुरक्षित है अस्मिता सभा के दौरान उन्होंने बप्पा रावल और ललितादित्य जैसे महान नायकों को नमन करते हुए कहा कि इन्हीं महापुरुषों के त्याग और बलिदान के कारण आज भारत की संस्कृति और अस्मिता सुरक्षित है. डॉ. भागवत ने कहा कि प्रताप का अदम्य साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है. उन्होंने बल देकर कहा कि वास्तविक इतिहास को सामने लाना आवश्यक है ताकि देश का युवा अपने गौरवशाली अतीत से जुड़ सके

जमीन की नापी अब पड़ेगी महंगी, बिहार सरकार ने मापी शुल्क में की बड़ी बढ़ोतरी

सुपौल. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा रैयती जमीन की मापी शुल्क में हाल ही में की गई वृद्धि का असर अब आम भू-धारकों की जेब पर पड़ने लगा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन की मापी कराने के लिए लोगों को पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी होगी। विभाग ने मापी शुल्क की नई दरें निर्धारित कर दी हैं, जिसके तहत सामान्य और तत्काल मापी दोनों के लिए शुल्क में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। जानकारी के अनुसार, पहले रैयत अपेक्षाकृत कम शुल्क देकर अपनी जमीन की मापी करा लेते थे, लेकिन अब उन्हें लगभग दोगुना शुल्क अदा करना पड़ेगा। विभाग का कहना है कि नई शुल्क व्यवस्था से भूमि मापी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जा सकेगा। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, नई दरों के तहत शहरी क्षेत्रों में स्थित रैयती भूमि की सामान्य मापी के लिए प्रति खेसरा 2000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि अधिकतम शुल्क 8000 रुपये रखा गया है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में रैयती भूमि की मापी के लिए प्रति खेसरा 1000 रुपये शुल्क तय किया है तथा अधिकतम शुल्क 4000 रुपये निर्धारित किया गया है। विभाग ने तत्काल मापी की सुविधा के लिए भी अलग शुल्क निर्धारित किया है। नई व्यवस्था के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में तत्काल मापी कराने के लिए प्रति खेसरा 4000 रुपये शुल्क देना होगा, जबकि अधिकतम शुल्क 16 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल मापी के लिए प्रति खेसरा 2000 रुपये शुल्क देय होगा और इसके लिए अधिकतम शुल्क 8000 रुपये तय किया गया है। स्थानीय स्तर पर नई शुल्क दरों को लेकर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कई भू-धारकों का कहना है कि भूमि विवादों के निपटारे, दाखिल-खारिज, बंटवारे एवं अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए मापी आवश्यक होती है। ऐसे में शुल्क बढ़ने से आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि यदि बढ़े हुए शुल्क के बदले समय पर और पारदर्शी तरीके से मापी कार्य पूरा होता है तो इससे लोगों को लाभ भी मिलेगा। नई शुल्क दरें राज्यभर में लागू – विभाग द्वारा निर्धारित नई शुल्क दरें राज्यभर में लागू की गई हैं। शुल्क संशोधन का उद्देश्य भूमि मापी सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाना है। भू-धारकों से अपील की कि वे निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए ऑनलाइन आवेदन करें तथा किसी भी प्रकार की असुविधा होने पर संबंधित राजस्व कार्यालय से संपर्क करें। – राकेश कुमार, राजस्व पदाधिकारी

प्री-मानसून मेंटेनेंस पूरा करने पर जोर, बिजली हादसों से बचाव की तैयारी

जयपुर मानसून के दौरान विद्युत अभियंताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने के साथ ही विद्युत हादसे रोकने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। चेयरमैन डिस्कॉम्स एवं जयपुर विद्युत वितरण निगम की प्रबंध निदेशक सुश्री आरती डोगरा ने बुधवार को विद्युत भवन में अभियंताओं से कहा कि प्री-मानसून मेंटिनेंस के सभी कार्य शीघ्र पूर्ण कर लिए जाएं। बैठक में चेयरमैन डिस्कॉम्स ने कहा कि किसी भी प्रकार के शॉर्ट सर्किट अथवा करंट लीकेज से जनहानि एवं पशुधन के जान की रक्षा करना सभी के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में विद्युत तंत्र का समुचित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए। डिस्कॉम्स चेयरमैन ने कहा कि भारी बारिश या तेज हवा से बिजली की लाइनें प्रभावित न हों। इसके लिए लाइनों के समीप से पेड़ों की टहनियों की छंटाई की जाए। टेढ़े एवं जर्जर पोल अविलम्ब बदलें और झूलते तारों को तुरंत कसा जाए। विद्युत पोल एवं वितरण ट्रांसफार्मर की अर्थिंग की जांच करने के साथ ही जलभराव वाले क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर्स के आसपास फेंसिंग की जाए ताकि किसी प्रकार के हादसों की गुंजाइश न रहे। उन्होंने ग्रिड सब स्टेशनों में ट्रांसफॉर्मरों के ऑयल लेवल मेंटेन करने और उसमें नमी को रोकने के लिए सभी आवश्यक तकनीकी इंतजाम सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। रहें 24 घंटे एक्टिव, फॉल्ट रिपेयरिंग टीम रहें तैनात डिस्कॉम्स चेयरमैन ने कहा कि फॉल्ट या ट्रिपिंग की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए सब-डिवीजन स्तर पर फॉल्ट रेक्टिफिकेशन टीम एक्टिव रहें। आवश्यक मैटेरियल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। बैठक में निदेशक तकनीकी श्री आरके शर्मा, जयपुर शहर वृत्त उत्तर एवं दक्षिण के अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, ओएंडएम तथा एचटीएम के सहायक अभियंता मौजूद रहे।

पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, आदमपुर एयरपोर्ट के नामकरण का नोटिफिकेशन जारी

जालंधर. केंद्र सरकार ने पंजाब के दोआबा क्षेत्र को एक बड़ी सौगात देते हुए जालंधर स्थित आदमपुर हवाई अड्डे का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर श्री गुरु रविदास महाराज जी हवाई अड्डा कर दिया है। इस संबंध में 12 जून को केंद्र सरकार द्वारा नोटिफिकेशन जारी कर दी गई, जिसके साथ ही नाम परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हो गई। इस ऐतिहासिक नामकरण का डिजिटल उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान समाज सुधारक श्री गुरु रविदास महाराज के 649वें प्रकाश पर्व के पावन अवसर पर किया। इस मौके पर उन्होंने नई नामपट्टिका का अनावरण कर गुरु रविदास जी के सामाजिक योगदान को नमन किया। केंद्र सरकार का यह फैसला दोआबा क्षेत्र की धार्मिक भावनाओं और समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। जालंधर और होशियारपुर समेत पूरे दोआबा क्षेत्र के लिए आदमपुर हवाई अड्डा लंबे समय से हवाई सेवाओं का प्रमुख केंद्र रहा है। अब यह हवाई अड्डा संत गुरु रविदास महाराज जी के नाम से जाना जाएगा, जो सामाजिक समानता और मानवता के संदेश के प्रतीक हैं। सरकारी नोटिफिकेशन जारी होने के बाद इस निर्णय पर अंतिम मुहर लग गई है। नाम परिवर्तन की घोषणा के बाद पंजाब ही नहीं, बल्कि देश-विदेश में रहने वाले गुरु रविदास जी के अनुयायियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रवासी भारतीयों (NRI) ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक और सम्मानजनक कदम बताया है। विशेष रूप से दोआबा क्षेत्र में इस निर्णय को सांस्कृतिक पहचान और गौरव से जोड़कर देखा जा रहा है। लोगों का मानना है कि आदमपुर हवाई अड्डा का नया नाम आने वाली पीढ़ियों को गुरु रविदास जी की शिक्षाओं और मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सेजबहार फेस-1 में अवैध निर्माण पर कार्रवाई, मंडल ने हटाया अतिक्रमण

रायपुर  छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने सेजबहार फेस-1 कॉलोनी स्थित अपनी भूमि पर किए गए अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए अनधिकृत रूप से निर्मित सड़क को हटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया है। दीनदयाल आवास योजना के अंतर्गत कलेक्टर रायपुर के आदेश से दिनांक 03 फरवरी 2006 के माध्यम से ग्राम सेजबहार एवं ग्राम दतरेंगा की कुल 21.538 हेक्टेयर (लगभग 53.19 एकड़) भूमि मंडल को आवासीय परियोजना विकसित करने हेतु आबंटित की गई थी। इसमें ग्राम सेजबहार के खसरा क्रमांक 162/1 का भाग तथा ग्राम दतरेंगा के खसरा क्रमांक 341/1 एवं 341/3 की भूमि शामिल है। उक्त भूमि पर आवासीय विकास हेतु विकास अनुज्ञा दिनांक 17 मई 2006 को स्वीकृत की गई थी। 1435 एलआईजी भवनों के निर्माण की थी योजना  स्वीकृत ले-आउट के अनुसार परियोजना क्षेत्र में कुल 1435 एलआईजी (लो इनकम ग्रुप) आवासों का निर्माण प्रस्तावित था। स्थल निरीक्षण एवं अभिलेख परीक्षण के दौरान यह पाया गया कि स्वीकृत ले-आउट के अनुसार 1435 भवनों में से 1327 भवनों का निर्माण किया गया था। इसके अतिरिक्त 39 भवन स्वीकृत अभिन्यास से अलग निर्मित पाए गए। इस प्रकार कुल 1366 भवन निर्मित हुए। भूमि विवाद के कारण नहीं बन सके 79 आवास  मंडल द्वारा किए गए निरीक्षण, अभिलेख परीक्षण तथा पूर्व अधिकारियों एवं अभियंताओं से प्राप्त जानकारी के अनुसार कार्य अवधि के दौरान भूमि विवाद की स्थिति उत्पन्न होने के कारण स्वीकृत ले-आउट में दर्शाए गए भवन क्रमांक 1287 से 1345 तथा 1412 से 1431 तक कुल 79 आवासों का निर्माण नहीं हो सका। सातवें चरण के अंतर्गत अनुबंध क्रमांक 41, दिनांक 07 अगस्त 2006 के तहत 192 आवासों के निर्माण का प्रावधान था, जिसके अंतर्गत कुल 193 एलआईजी भवनों का निर्माण किया गया। हालांकि विवादित क्षेत्र में स्थित 79 भवनों का निर्माण न तो किया जा सका और न ही उनका विक्रय किया गया। सीमांकन में सामने आया अतिक्रमण  हाल ही में मंडल द्वारा अपनी लगभग 18 हेक्टेयर भूमि का राजस्व अभिलेखों के आधार पर सीमांकन कराया गया। सीमांकन के दौरान यह तथ्य सामने आया कि एक निजी बिल्डर द्वारा मंडल की भूमि के एक हिस्से पर अवैध रूप से कब्जा कर बिना अनुमति सड़क का निर्माण किया जा रहा है। सीमांकन रिपोर्ट में अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद मंडल ने तत्काल कार्रवाई प्रारंभ की।  मंडल ने हटाई अवैध सड़क  नितेश कश्यप कार्यपालन अभियंता संभाग क्रमांक 3  सेजबहार, रायपुर  के नेतृत्व में मंडल की टीम जिसमें श्री अमृत लाल बरमन सपंदा अधिकारी, श्री हेमंत निषाद सहायक अभियंता, श्रीमती निकिता मिश्रा उपअभियंता, श्री अनुपम राठौर उप अभियंता, श्री पेमेन्द्र ध्रुव, श्री अमय विक्रम तथा श्री कमलेश दास ने मौके पर पहुंचकर अनधिकृत सड़क को हटाया और भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने की कार्रवाई की। भविष्य में विकसित होगी नई आवासीय परियोजना  मंडल के अधिकारियों ने बताया कि संबंधित भूमि मंडल की महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है तथा भविष्य में यहां नई आवासीय परियोजना विकसित करने की योजना है।  मंडल अपनी भूमि एवं परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार के अतिक्रमण के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रखी जाएगी।

छत्तीसगढ़ के पांच नगरों की बदलेगी तस्वीर, रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए HUDCO ने निकाले टेंडर

रायपुर. छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (हडको) राज्य के विभिन्न शहरों में पाँच प्रमुख रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की शुरुआत करने जा रहा है। यह पहल छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शहरी विकास, शासकीय परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग तथा आधुनिक नागरिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। इन परियोजनाओं का विकास राज्य की रिडेवलपमेंट नीति के तहत किया जाएगा। इसके लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को नोडल विभाग तथा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को क्रियान्वयन एजेंसी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। रिडेवलपमेंट परियोजनाओं के लिए मंडल द्वारा प्रिलिमिनरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट (पीपीआर) एवं विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किए गए हैं। साथ ही निजी डेवलपर्स के चयन हेतु पारदर्शी निविदा प्रक्रिया तथा परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की व्यवस्था की गई है। मंत्रिपरिषद द्वारा प्रस्तावित परियोजनाओं को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इसके पश्चात 27 मई 2026 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में पाँचों परियोजनाओं के अंतिम स्वरूप पर विस्तृत चर्चा कर उन्हें अनुमोदित किया गया। प्रस्तावित परियोजनाओं का कुल क्षेत्रफल लगभग 19.14 एकड़ है तथा वर्ष 2025-26 की संशोधित गाइडलाइन दरों के अनुसार इनका अनुमानित मूल्य लगभग 250.30 करोड़ रुपये है। ये परियोजनाएं बी.टी.आई. रोड शंकर नगर (रायपुर), क्लब पारा (महासमुंद), कैलाश नगर (राजनांदगांव), कटघोरा (कोरबा) तथा चांदनी चौक फेज-2 (जगदलपुर) में विकसित की जाएंगी। इन पाँचों रिडेवलपमेंट योजनाओं का टेंडर हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा जारी कर दिया गया है। राजधानी रायपुर में प्रस्तावित परियोजना विशेष महत्व रखती है। यह परियोजना शहर के प्रमुख एवं विकसित क्षेत्र शंकर नगर स्थित बी.टी.आई. ग्राउंड के सामने, सिंधु भवन के समीप स्थित है। यह क्षेत्र शैक्षणिक, प्रशासनिक, व्यावसायिक तथा आवासीय गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। परियोजना के विकसित होने से क्षेत्र में आधुनिक अधोसंरचना का विस्तार होगा तथा शासकीय परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। रिडेवलपमेंट मॉडल के तहत जर्जर एवं अनुपयोगी शासकीय परिसंपत्तियों के स्थान पर आधुनिक एवं सुव्यवस्थित अधोसंरचना विकसित की जाएगी। इन परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय भार की आवश्यकता नहीं होगी। शासकीय भूमि के मूल्य का उपयोग ही परियोजनाओं के वित्तीय संसाधन के रूप में किया जाएगा। इससे शासकीय भूमि का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित होने के साथ-साथ राज्य को अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा। यह पहल निजी डेवलपर्स के लिए भी आकर्षक अवसर प्रदान करती है। उन्हें शहरों के प्रमुख क्षेत्रों में स्थित प्राइम लोकेशन वाली भूमि पर परियोजनाएं विकसित करने का अवसर मिलेगा। स्पष्ट नीति, पारदर्शी निविदा प्रक्रिया तथा सरकारी एजेंसी के साथ साझेदारी से परियोजनाओं में विश्वास और स्थिरता सुनिश्चित होगी। आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। रिडेवलपमेंट नीति के माध्यम से अनुपयोगी एवं जर्जर शासकीय परिसंपत्तियों को आधुनिक तथा उपयोगी अधोसंरचना में परिवर्तित किया जाएगा। इससे शहरों की कार्यक्षमता एवं सौंदर्य में वृद्धि होगी तथा सार्वजनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक-निजी सहभागिता के माध्यम से आधुनिक और नागरिक-केंद्रित शहरी विकास को नई गति मिलेगी। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कहा कि मंडल राज्य में रिडेवलपमेंट की नई कार्यसंस्कृति स्थापित कर रहा है। ये परियोजनाएं केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शहरी क्षेत्रों के समग्र कायाकल्प का प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि बी.टी.आई. ग्राउंड, शंकर नगर के सामने प्रस्तावित परियोजना राजधानी रायपुर के लिए एक आदर्श शहरी विकास मॉडल सिद्ध होगी। मंडल गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के साथ इन परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहा है। आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने टीएल बैठक में इन परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए आगामी रिडेवलपमेंट की आठ नई परियोजनाओं का प्रस्ताव शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

रांची का शहरी विकास तेज, पांच फ्लाईओवर से ट्रैफिक व्यवस्था होगी मजबूत

रांची राजधानी रांची में लगातार बढ़ते वाहनों और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए राज्य सरकार और पथ निर्माण विभाग ने पांच नई फ्लाईओवर परियोजनाओं की तैयारी शुरू कर दी है इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद शहर के प्रमुख मार्गों पर जाम की समस्या काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। साथ ही रांची का शहरी स्वरूप और सौंदर्य भी नए स्तर पर पहुंचेगा। अरगोड़ा से चापूटोली तक बनेगा फ्लाईओवर अरगोड़ा चौक से कटहल मोड़ होते हुए चापूटोली तक लगभग 1.75 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर प्रस्तावित है। इसके निर्माण से इस व्यस्त मार्ग पर यातायात का दबाव कम होगा। फ्लाईओवर के नीचे सड़क चौड़ीकरण, ड्रेनेज और सौंदर्यीकरण का भी कार्य किया जाएगा। हरमू में बनेगा तीन किलोमीटर लंबा वन-वे फ्लाईओवर कार्तिक उरांव चौक से एलपीएन शाहदेव चौक तक करीब तीन किलोमीटर लंबा वन-वे फ्लाईओवर बनाया जाएगा। यह परियोजना हरमू, रातू रोड और कांके रोड क्षेत्र में ट्रैफिक को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। फ्लाईओवर के नीचे बिजली और संचार के तारों को भूमिगत किया जाएगा। करमटोली से साइंस सिटी तक एलिवेटेड कारिडोर करमटोली चौक से मोराबादी होते हुए साइंस सिटी तक 2.2 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर प्रस्तावित है। इसके साथ साइंस सिटी से रिंग रोड तक फोरलेन सड़क का भी निर्माण किया जाएगा, जिससे शहर और बाहरी क्षेत्रों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा। स्वर्णरेखा और हरमू नदी किनारे बनेगा रिवर फ्रंट फ्लाईओवर स्वर्णरेखा नदी के दोनों किनारों पर वन-वे फ्लाईओवर और रिवर फ्रंट विकसित करने की योजना है। वहीं हरमू मुक्तिधाम से रेडिसन ब्लू होटल तक हरमू नदी के दोनों किनारों पर लगभग 2.2 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। इन परियोजनाओं से कडरू, अशोक नगर, हिनू और आसपास के क्षेत्रों को राहत मिलेगी। महानगरीय स्वरूप की ओर बढ़ रहा रांची हाल ही में कार्तिक उरांव (सिरमटोली-मेकान) फ्लाईओवर और कांटाटोली फ्लाईओवर जैसी परियोजनाओं ने शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाया है। रातू रोड फ्लाईओवर भी तैयार है। अधिकारियों का मानना है कि प्रस्तावित पांच नए फ्लाईओवर रांची को ट्रैफिक जाम से राहत देने के साथ-साथ एक आधुनिक और सुव्यवस्थित महानगर के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

खेल प्रतिभाओं के लिए खुशखबरी! मुख्यमंत्री की पहल पर पुलिस विभाग में सीधी भर्ती बहाल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की खिलाड़ी हितैषी पहल पुलिस में उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सीधी भर्ती होगी पुनः प्रारंभ ‘मध्यप्रदेश पुलिस (उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नियुक्ति) नियम, 2021’ में किया गया महत्वपूर्ण संशोधन प्रतिवर्ष सीधी भर्ती से 60 पद भरें जायेंगे भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सतत प्रयासों एवं मार्गदर्शन से वर्ष 2021 के बाद उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सीधी भर्ती प्रक्रिया पुनः प्रारंभ की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह पहल खिलाड़ियों के लिए सम्मानजनक रोजगार सुनिश्चित करने के साथ उन्हें अपने खेल प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धात्मक तैयारी को निरंतर जारी रखने में भी सहायक सिद्ध होगी। गृह विभाग ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार ‘मध्यप्रदेश पुलिस (उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नियुक्ति) नियम, 2021’में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। शासकीय राजपत्र में 15 जून 2026 को अधिसूचना प्रकाशित कर दी गई है। संशोधित नियमों में उत्कृष्ट खिलाड़ियों के चयन, पात्रता एवं मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाया गया है। अब मध्यप्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में अवसर प्राप्त होंगे। प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को पुलिस में उप निरीक्षक के 10 एवं आरक्षक के 50 पदों पर सीधी नियुक्ति का अवसर मिलेगा। नए प्रावधानों में खेल कोटे से भर्ती प्रक्रिया नियमित रूप से प्रत्येक वर्ष आयोजित की जाएगी। इससे खिलाड़ियों को स्थायी अवसर उपलब्ध होंगे। खेल संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम है। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने मुख्यमंत्री यादव की इस खिलाड़ी-हितैषी पहल के लिए उनका आभार माना है। संशोधित नियमों की प्रमुख विशेषताएं वार्षिक भर्ती प्रक्रिया में पुलिस मुख्यालय की चयन एवं भर्ती शाखा द्वारा प्रतिवर्ष आरक्षक एवं उप निरीक्षक पदों की रिक्तियां विज्ञापित की जाएंगी। पदक विजेताओं के साथ अब ओलम्पिक, एशियाई एवं राष्ट्रमण्डल खेलों में सहभागिता करने वाले खिलाड़ी भी सीधी भर्ती के लिए पात्र होंगे। उत्कृष्ट खिलाड़ियों को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता एवं शारीरिक मापदंड (ऊंचाई) में पूरी छूट दी जाएगी। साथ ही उन्हें लिखित परीक्षा एवं शारीरिक दक्षता परीक्षण (PET) से भी छूट मिलेगी। उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नियुक्तियां अनारक्षित (सामान्य) श्रेणी में शामिल की जाएंगी। खेल विधाएं केवल वे मान्य होंगी, जो पिछले तीन ओलम्पिक खेलों में शामिल रही हों। मेरिट अंक समान होने की स्थिति में वरिष्ठता का निर्धारण ओलम्पिक, एशियाई खेल, विश्व कप आदि की प्राथमिकता और खिलाड़ी की आयु के आधार पर किया जाएगा। संशोधित नियम, 2026 के अंतर्गत पात्रता मानदंड उप निरीक्षक पद पर केवल उन उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सीधी नियुक्ति दी जाएगी, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता ओलम्पिक खेल, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, विश्व कप/विश्व चैम्पियनशिप में पदक अर्जित किया हो अथवा सहभागिता की हो। इन प्रतियोगिताओं में स्वर्ण, रजत अथवा कांस्य पदक विजेता एवं सहभागिता करने वाले खिलाड़ी पात्र होंगे। आरक्षक पद के लिये राष्ट्रीय खेलों के पदक विजेता और अधिकृत राष्ट्रीय चैम्पियनशिप के पदक विजेता सीधी भर्ती के लिए पात्र होंगे। खिलाड़ी जो उप निरीक्षक पद के लिए निर्धारित पात्रता पूरी करते हैं, वे आरक्षक पद के लिए भी स्वतः पात्र माने जाएंगे। राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ी और अधिकृत राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक अर्जित करने वाले खिलाड़ी आरक्षक पद पर सीधी भर्ती के लिए पात्र होंगे।  

मध्यप्रदेश प्रवास पर राष्ट्रपति मुर्मु, ओंकारेश्वर, श्योपुर, जबलपुर समेत 6 शहरों में रहेंगी व्यस्त

राष्ट्रपति मुर्मु पांच दिवसीय मध्यप्रदेश प्रवास पर  इंदौर, बैतूल, ओंकारेश्वर, जबलपुर, ग्वालियर एवं श्योपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में होंगी शामिल भोपाल राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 18 जून से 22 जून तक पांच दिवसीय मध्यप्रदेश प्रवास पर रहेंगी। इस दौरान वे इंदौर, बैतूल, खंडवा जिले के ओंकारेश्वर मंदिर, जबलपुर, ग्वालियर और श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगी।राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु गुरुवार, 18 जून को इंदौर पहुंचेंगी। इसके पश्चात वे बैतूल में ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित "एम्पावरमेंट ऑफ ट्रायबल सोसायटी बाय स्पिरिचुअल अवेकनिंग" कार्यक्रम में शामिल होंगी। साथ ही ओंकारेश्वर पहुंचकर मंदिर में दर्शन एवं आरती में सम्मिलित होंगी। शुक्रवार, 19 जून को राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु अंतर्राष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के अवसर पर ओंकारेश्वर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगी। शनिवार, 20 जून को राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु जबलपुर पहुंचेंगी। रविवार, 21 जून 2026 को राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगी। इसके पश्चात रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर के 36वें दीक्षांत समारोह में सहभागिता करेंगी। सोमवार, 22 जून 2026 को राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु कूनो नेशनल पार्क का भ्रमण करेंगी। इसके बाद वे ग्वालियर पहुंचकर नई दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगी। राष्ट्रपति के मध्यप्रदेश भ्रमण के लिए मिनिस्टर-इन-वेटिंग नामित राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु के मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के प्रस्तावित भ्रमण के दौरान राज्य शासन ने संबंधित स्थानों पर अगवानी एवं विदाई के लिए मंत्रियों को “मिनिस्टर-इन-वेटिंग” नामित किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार इंदौर में 18 जून को अगवानी के समय जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और 19 जून को विदाई के समय नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को दायित्व सौंपा गया है। बैतूल में 18 जून को लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल अगवानी एवं विदाई करेंगे। खंडवा के ओंकारेश्वर में 18 एवं 19 जून को अगवानी एवं विदाई के समय संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र भावसिंह लोधी को जिम्मेदारी दी गई है। जबलपुर में 20 एवं 21 जून को उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा राष्ट्रपति की अगवानी एवं विदाई करेंगे। इसी प्रकार श्योपुर में 21 एवं 22 जून को नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला और ग्वालियर में 21 एवं 22 जून को जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट को मिनिस्टर-इन-वेटिंग नामित किया गया है।