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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोलेः साम्राज्य आए-गए, पीढ़ियां आईं-गईं, मगर एकमात्र आस्था अडिग थी

सत्य को कोई धूमिल नहीं कर सकता: योगी आदित्यनाथ श्री गुरु तेग बहादुर जी महाराज के 350वें शहीदी दिवस पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश वासियों की ओर से किए श्रद्धासुमन अर्पित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोलेः साम्राज्य आए-गए, पीढ़ियां आईं-गईं, मगर एकमात्र आस्था अडिग थी लखनऊ को गुरु तेग बहादुर जी महाराज का सान्निध्य प्राप्त होना सौभाग्य का विषय: मुख्यमंत्री योगी मुख्यमंत्री योगी बोले, अयोध्या में जब-जब राम जन्मभूमि के लिए संघर्ष हुए तब सिख कभी पीछे नहीं हटे लखनऊ । सिख पंथ के नौवें गुरु तथा हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर जी महाराज के 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। मंगलवार को ऐशबाग के डीएवी कॉलेज में आयोजित विशेष गुरुमति समागम में उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के आगे मत्था टेका और शबद कीर्तन का श्रवण किया। उन्होंने नवम सिख गुरु तेग बहादुर जी महाराज, भाई मति दास जी, भाई सती दास जी व भाई दयाला जी की स्मृति को कोटि-कोटि नमन कर करोड़ों प्रदेशवासियों की ओर से कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि सत्य को कोई धूमिल नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि साम्राज्य आए गए, पीढ़ियां आईं गईं, मगर एकमात्र अडिग थी आस्था और इसी के कारण आज हम अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि मंदिर की पूर्णता, धर्म ध्वजा की स्थापना और इस कार्यक्रम के आयोजन में यहां सम्मिलित हो रहे हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी द्वारा सिरोपा, कृपाण और गुरु साहिब की फोटो देकर सम्मानित किया गया। आज का दिन है प्रेरणा का दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूरा देश इस कार्यक्रम के साथ जुड़ा हुआ है। आज का दिन हम सबके लिए प्रेरणा का दिवस है। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी को इतनी यातना इसलिए दी गई क्योंकि मुगलों ने पूरे भारत का इस्लामीकरण करने की मुहिम चला रखी थी। औरंगजेब जैसा क्रूर बादशाह मनमानी करने पर उतर आया था। तिलक मिटाने और जनेऊ तोड़ने के लिए उसने देशभर में अत्याचार किया। कश्मीर में जब उसके अत्याचार की पराकाष्ठा हो गई और अफगान खान जैसा सिपहसालार वहां अत्याचार करने लगा, तब पंडित कृपाराम जी को जब कहीं शरण नहीं मिली तो वे गुरु महाराज के चरणों में जाकर उनकी याचना करने लगे। गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज उस समय मात्र 9 वर्ष के थे। उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी से कहा कि याचना हो रही है, आप कह रहे हैं किसी बड़े व्यक्ति को बलिदान देना होगा, तो भला आपसे बड़ा कौन है। गुरु तेग बहादुर जी महाराज के बलिदान को किया याद मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी महाराज ने जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई। उन्हें कैद कर लिया गया। भाई मति दास को पहले यातना दी जाती है, उन्हें आरी से चीरा जाता है। भाई सती दास को रुई से लपेटकर आग लगाई जाती है और भाई दयाला को उबलते हुए पानी के देग में डालकर बलिदान कर दिया जाता है। गुरु तेग बहादुर जी महाराज तब भी अपने धर्म-संकल्प से डिगे नहीं, तो उनके साथ कितनी बड़ी क्रूरता बरती गई। जब हम इतिहास के उन क्रूर क्षणों को स्मरण करते हैं तो हमें लगता है कि यातनाएं न केवल गुरु परंपरा ने सही थीं, बल्कि वक्त आने पर उससे टक्कर लेने के लिए खुद को तैयार भी किया था। गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज को जब हम स्मरण करते हैं तो पाते हैं कि मात्र 9 वर्ष की उम्र में जिन्होंने अपने गुरु व पिता को खोया हो, जिनके चारों साहिबजादे सनातन की रक्षा करने के लिए बलिदान हो गए हों, दुनिया में बहुत कम ऐसा उदाहरण देखने को मिलता है। वे एक शहीद पिता के पुत्र हैं तो शहीद पुत्रों के पिता भी हैं। बाबर को जाबर कह गुरु नानक देव जी ने किया था विरोध मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि अयोध्या की पावन धरती पर आपके बीच आया हूं। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अयोध्या आए थे। श्रीरामजन्मभूमि पर भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सनातन के भगवा ध्वज का आरोहण राम मंदिर के शिखर पर एक भव्य समारोह में हुआ है। यही वह भगवा ध्वज है जिसकी रक्षा करने के लिए सिख गुरुओं की परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी बलिदान करती आई है। याद करिए, वर्ष 1510 से लेकर 1515 के बीच प्रथम गुरु नानक देव जी महाराज अयोध्या धाम में श्रीरामजन्मभूमि मंदिर का दर्शन करने जाते हैं। वर्ष 1528 में विदेशी आक्रांता बाबर के सिपहसालार द्वारा मंदिर को तोड़ा गया। उस समय बाबर के अत्याचार को देखते हुए गुरु नानक देव महाराज ने बाबर को जाबर कहकर उसके कुकृत्यों का विरोध किया था। अयोध्या में जब-जब राम जन्मभूमि के लिए संघर्ष हुए, तब सिख गुरुओं, योद्धाओं, संतों, निहंगों, राजाओं व सामान्य नागरिकों ने बलिदान देने में एक क्षण भी नहीं सोचा।  आस्था बनी महायज्ञ की साक्षी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या के बारे में यह बात हम सबको स्मरण रखनी होगी कि जो आस्था 500 वर्षों के बाद श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण के महायज्ञ की साक्षी बनी है, वही आस्था आज इस कार्यक्रम में भी हम सबको देखने को मिल रही है। 350 वर्षों के बाद भी हर सिख, हर सनातनी गुरु तेग बहादुर जी महाराज व सभी शहीदों के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए अपनी आस्था व्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि यही बात मैं आप सबको स्मरण दिलाने के लिए आया हूं। गुरु गोबिंद सिंह के चारों साहिबजादों को जो सम्मान तब मिलना चाहिए था, वह 2020 में मिला। पहले मुख्यमंत्री आवास में कार्यक्रम हुआ और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 26 दिसंबर की तिथि को सदैव के लिए वीर बाल दिवस के रूप में समर्पित करते हुए उन चारों साहिबजादों की स्मृति को जीवंत बना दिया गया है। यह आने वाली पीढ़ी, हर नौजवान व हर युवा को बताता है कि जो भी देश और धर्म के लिए कुछ करेगा, उसके प्रति समाज इसी प्रकार से कृतज्ञता ज्ञापित करेगा। वही कृतज्ञता ज्ञापित करने का अवसर हम सभी के सामने आज का यह दिवस भी है। याहियागंज गुरुद्वारा है गौरवशाली क्षणों का साक्षी मुख्यमंत्री ने कहा कि … Read more

CM डॉ. यादव के निर्देश पर रायसेन SP को पुलिस मुख्यालय में किया गया अटैच

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर एसपी रायसेन को किया पुलिस मुख्यालय अटैच मुख्यमंत्री ने पुलिस हैडक्वार्टर पहुँचकर वरिष्ठ अधिकारियों की ली बैठक भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार की शाम पुलिस मुख्यालय पहुंचकर वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक ली और कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर हुई आपराधिक घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा की और किसी भी आपराधिक तत्व को न छोड़ने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रायसेन जिले में हुई अपराधिक घटना के मामले में गिरफ़्तारी की कार्यवाही न होने पर अप्रसन्नता ज़ाहिर की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंडीदीप में चक्का जाम पर पुलिस की कार्रवाई पर नाराज़गी ज़ाहिर की। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधीक्षक रायसेन को मुख्यालय अटैच करने के निर्देश और मिसरोद थाना प्रभारी को हटाने के निर्देश दिये। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि आरोपी की तलाश जारी है और शीघ्र उसे गिरफ्तार किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश     पुलिस सड़कों पर उतरे।     किसी अपराधी को छोड़े नहीं, कठोर कार्रवाई करें।     नियमित गश्त और पेट्रोलिंग बढ़ायें।     अपराधियों के प्रति ढिलाई किसी हालत में बर्दाश्त नहीं होगी।     निरीक्षण करें, लापरवाह अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ करें कारवाई। बैठक में मुख्य सचिव  अनुराग जैन और पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाना सहित एडीजी इन्टेलीजेंस, पुलिस कमिश्नर भोपाल और अधिकारी उपस्थित रहे।  

मध्यप्रदेश में शिक्षकों के लिए खुशखबरी! छुट्टियों में 10 दिन का इजाफा, नए नियम नए साल से प्रभावी

भोपाल प्रदेश सरकार कर्मचारियों के हित में जल्द ही तीन बड़े कदम उठाने जा रही है। साढ़े चार लाख से अधिक शिक्षकों को वर्ष में दस दिन का अर्जित अवकाश मिलेगा। वहीं, सेवानिवृत्ति के बाद शत-प्रतिशत अर्जित अवकाश के नकदीकरण की सुविधा भी मिलेगी। सरकारी नौकरी के लिए दो बच्चों की शर्त भी हटाई जा रही है। जनवरी 2026 से यह प्रविधान लागू हो जाएंगे। सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को अभी अर्जित अवकाश की सुविधा नहीं मिलती है। एक वर्ष में 10 दिवस के अर्जित अवकाश ग्रीष्मावकाश मिलने के कारण यह प्रविधान रखा गया था। धीरे-धीरे ग्रीष्मावकाश कम होते गए और अब ये दो माह से घटकर 20-22 दिन ही रह गए हैं। शिक्षक लंबे समय से अर्जित अवकाश का लाभ देने की मांग कर रहे थे। इसे देखते हुए वित्त विभाग ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम 1977 के स्थान पर मध्य प्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम 2025 तैयार किए हैं। इसमें शैक्षणिक संवर्ग को एक वर्ष में 10 दिवस के अर्जित अवकाश की पात्रता दी गई है।   स्वेच्छिक और साप्ताहिक अवकाश के नियम में भी संशोधन इसके साथ ही यह प्रविधान भी किया जा रहा है कि सेवानिवृत्ति के बाद जितने अर्जित अवकाश शेष होंगे, उनका भी नकदीकरण किया जाएगा। पूरे सेवाकाल में पहले 240 दिन के नकदीकरण की सुविधा थी, जिसे बढ़ाकर 300 दिन किया गया है। जटिल प्रक्रिया होने के कारण इसका पूरा लाभ ही नहीं मिल पाता था। उधर, स्वेच्छिक अवकाश और साप्ताहिक अवकाश के नियम में भी संशोधन प्रस्तावित है। अभी शासकीय कार्यालय पांच दिन लगते हैं। शनिवार को अवकाश रहता है। कोरोनाकाल में प्रारंभ हुई इस व्यवस्था के स्थान पर दूसरे और तीसरे शनिवार को कार्यालय लगाने का प्रविधान बहाल किया जा सकता है। 24 साल बाद दो बच्चे की पाबंदी हटेगी उधर, सरकार एक और बड़ा निर्णय यह करने जा रही है कि यदि नौकरी कर रहे किसी अधिकारी-कर्मचारी का तीसरा बच्चा होता है तो उसे अपात्र मानकर सेवा से हटाया नहीं जाएगा। 26 जनवरी 2001 में तीसरा बच्चा होने पर अपात्र मान लेने की शर्त लागू की गई थी। दरअसल, छत्तीसगढ़, राजस्थान सहित अन्य राज्य इस तरह की शर्त को हटा चुके हैं। इस निर्णय से स्कूल, उच्च, चिकित्सा शिक्षा सहित अन्य विभागों के कर्मचारियों को लाभ होगा। जिन पर कार्रवाई हो चुकी, उन्हें राहत नहीं मिलेगी हालांकि जिन पर कार्रवाई हो चुकी है, उन प्रकरणों में कोई राहत नहीं मिलेगी क्योंकि निर्णय को भूतलक्षी प्रभाव से लागू नहीं किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रस्ताव बनाकर मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया है, जिस पर जल्द अंतिम निर्णय होने की संभावना है।

गांवों का विकास पंचायतों की शक्ति से— उप मुख्यमंत्री शुक्ल का बड़ा बयान

भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि किसी भी शासकीय अभियान की सफलता में पंचायत प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से विकास अभियानों में धुरी बनकर सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन, सिंचाई विस्तार, स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण तथा ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में पाइपलाइन, टंकियों एवं फ़िल्टर प्लांटों का तेजी से निर्माण हो रहा है, जिससे ‘नल से जल’ अब एक वास्तविकता बन चुका है। कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में आयोजित 'आत्मनिर्भर पंचायत–समृद्ध मध्यप्रदेश' थीम आधारित तीन दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल शामिल हुए। उन्होंने वॉटरशेड जनभागीदारी कप प्रोत्साहन के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले पंचायत प्रतिनिधियों को पुरस्कृत किया तथा प्रतिनिधियों से संवाद कर उनके सुझाव एवं अपेक्षाओं को सुना। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में एक हैंडपंप लगना भी बड़ी उपलब्धि माना जाता था, लेकिन आज प्रदेश की पंचायतों में पाइपलाइन और जल शोधन संयंत्रों का निर्माण यह दर्शाता है कि विकास की रफ्तार किस दिशा में बढ़ी है। उन्होंने जोर दिया कि पंचायत प्रतिनिधि स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता संबंधी राष्ट्रीय मिशनों में अग्रणी भूमिका निभाएँ। निरोगी काया अभियान, एनीमिया एवं कुपोषण उन्मूलन, टीबी मुक्त भारत अभियान जैसे मिशनों में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था केवल अधिकार का नहीं, बल्कि समन्वय, संवेदनशीलता और कर्तव्य का विषय है। 15वें वित्त आयोग एवं पंचम वित्त आयोग से प्राप्त संसाधनों का उपयोग पारदर्शी एवं योजनाबद्ध ढंग से किया जाए, जिससे पंचायतें आत्मनिर्भर और सक्षम बन सकें। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने आग्रह किया कि जनप्रतिनिधि नियमित बैठकों, स्थायी समितियों, सामाजिक उत्तरदायित्व और जनहित के निर्णयों को प्राथमिकता दें।  

यात्रियों के लिए खुशखबरी! एक OTP में हो जाएगी Tatkal टिकट की बुकिंग

भोपाल भारतीय रेलवे ने यात्री तत्काल आरक्षण प्रणाली में बड़े बदलाव की शुरुआत की है। अब आरक्षण काउंटर से भी तत्काल टिकट बनवाने के लिए यात्री के मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाएगा। यह ओटीपी बताने के बाद ही तत्काल टिकट जारी होगा। इसकी प्रायोगिक शुरुआत रानी कमलापति से दिल्ली जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस से हो गई है। यह ट्रेन देश की पहली ऐसी ट्रेन बन गई है जिसमें ओटीपी आधारित आरक्षण शुरू किया गया है। एक ही तत्काल टिकट बुक हो पाएगा रेल अधिकारियों के मुताबिक इस नई व्यवस्था से ऐसे एजेंटों की भीड़ कम होगी जो काउंटर खुलते ही कई टिकटों की बुकिंग करने लगते थे। ये टिकट वे भारी कमिशन पर मजबूर यात्रियों को बेचते। नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक मोबाइल नंबर से एक समय में सिर्फ एक ही तत्काल टिकट बुक हो पाएगा। इससे यात्री की असली पहचान सुनिश्चित होगी। इससे टिकटिंग प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और तत्काल बुकिंग में होने वाला फर्जीवाड़ा रुक जाएगा।   लगभग 130 ट्रेनें होती हैं संचालित अब शताब्दी एक्सप्रेस की कुल 1500 सीटों में से 30 फीसदी यानी 450 सीटें अब ओटीपी-आधारित तत्काल कोटे में शामिल हैं। रानी कमलापति और भोपाल स्टेशन से प्रतिदिन 550-600 तत्काल टिकट बनाए जाते हैं, जबकि इन स्टेशनों से लगभग 130 ट्रेनें संचालित होती हैं और 10-30 फीसदी यात्री तत्काल टिकट पर यात्रा करते हैं। बताया जा रहा कि यह प्रयोग सफल रहा तो देश भर की दूसरी ट्रेनों के आरक्षण में भी ओटीपी प्रणाली लागू की जाएगी। एजेंटों का वर्चस्व बड़ी चुनौती तत्काल टिकट आरक्षण में एजेंटों का वर्चस्व तोड़ना रेलवे के लिए बड़ी चुनौती रही है। तत्काल टिकट काउंटर खुलने से पहले एजेंटों की लंबी लाइन लग जाती थी, जिसकी वजह से आम यात्रियों को टिकट मिलने में दिक्कत होती थी और कई बार उन्हें एजेंटों के जरिए महंगे दाम पर टिकट लेना पड़ता था। अब यात्रियों को प्राथमिकता देने के लिए ऑनलाइन भी एजेंट सुबह 10:00-10:30 बजे तक एसी क्लास और 11:00-11:30 बजे तक नान-एसी क्लास के टिकट बुक नहीं कर सकेंगे। ओटीपी आधारित आरक्षण व्यवस्था लागू होने से कॉल टिकटिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी। टिकटों की अवैध खरीद-फरोख्त पर रोक लगेगी और सामान्य यात्रियों के लिए तत्काल टिकट प्राप्त करना अधिक आसान हो जाएगा। – नवल अग्रवाल, पीआरओ, भोपाल मंडल

दिसंबर ट्रैवल आसान: हरियाणा से राजस्थान के लिए चलेंगी अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें

हरियाणा  उत्तर पश्चिम रेलवे ने हरियाणा से राजस्थान के बीच सफर करने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए दिसंबर माह में तीन नई स्पेशल ट्रेनों का संचालन करने का फैसला किया है। इनमें रेवाड़ी–रींगस के बीच दो और भिवानी–जयपुर के बीच एक स्पेशल ट्रेन शामिल है। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशि किरण ने बताया कि रेवाड़ी–रींगस के बीच चलने वाली एक स्पेशल ट्रेन 15 ट्रिप और दूसरी 13 ट्रिप लगाएगी। वहीं भिवानी–जयपुर के बीच रोज़ाना स्पेशल ट्रेन का संचालन होगा। रेवाड़ी–रींगस स्पेशल ट्रेन सेवाएं गाड़ी संख्या 09633 – रेवाड़ी–रींगस एक्सप्रेस स्पेशल तारीखें: 1, 4, 6, 7, 13, 14, 15, 20, 21, 25, 27, 28, 29, 30, 31 दिसंबर (कुल 15 ट्रिप) समय: रेवाड़ी से रात 10:50 बजे, रींगस आगमन 01:35 बजे   गाड़ी संख्या 09634 – रींगस–रेवाड़ी एक्सप्रेस स्पेशल तारीखें: 2, 5, 7, 8, 14, 15, 16, 21, 22, 26, 28, 29, 30, 31 दिसंबर 2025 और 1 जनवरी 2026 (कुल 15 ट्रिप) समय: रींगस से सुबह 2:20 बजे, रेवाड़ी आगमन 5:20 बजे रैक: 16 डिब्बों वाला DEMU रैक     गाड़ी संख्या 09637 – रेवाड़ी–रींगस स्पेशल तारीखें: 1, 4, 6, 7, 13, 14, 15, 20, 21, 25, 27, 28, 31 दिसंबर 2025 (13 ट्रिप) समय: रेवाड़ी से सुबह 11:45 बजे, रींगस आगमन 2:45 बजे     गाड़ी संख्या 09638 – रींगस–रेवाड़ी स्पेशल तारीखें: 1, 4, 6, 7, 13, 14, 15, 20, 21, 25, 27, 28, 31 दिसंबर 2025 (13 ट्रिप) समय: रींगस से दोपहर 3:05 बजे, रेवाड़ी आगमन 6:20 बजे रैक: 8 साधारण डिब्बे + 2 गार्ड कोच = कुल 10 डिब्बे  

पंजाब में नया ‘कैश गेम’ उजागर: Wedding Season में 10-20 के नोटों की अचानक बढ़ी डिमांड

गुरदासपुर  गुरदासपुर जिले के तहत आने वाले शहरों/कस्बों और गांवों में बैंक कर्मचारियों और दलालों की मिलीभगत से 10-20 रूपये की ब्लैक का गोरख धंधा जोरों पर चल रहा है। शादी समारोह के दौरान दूल्हे/दुल्हन को 10-20 रुपये के नोट हार पहनाने के लिए दलालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। पिछले दिनों जब हरचोवाल, कादियां, श्री हरगोबिंदपुर, काहनूवान, वडाला ग्रंथियां, घुमाण, कलानौर, धालीवाल, कादियां, बटाला, गुरदासपुर, ध्यानपुर, डेरा बाबा नानक, फतेहगढ़ चूडिय़ां, दीनानगर आदि कस्बों के विभिन्न बैंकों में बैंक के उच्च अधिकारियों से 10 और 20 रुपये के नोटों के बंडलों की मांग की गई तो उन्होंने नोटों के बंडल न होने का बहाना बनाकर लोगों को वापिस भेज दिया। जब हमने वहां मौजूद दुकानदारों में दलालों से बात की तो हमें नए दस और बीस रुपये के नोटों की जरूरत थी तो उन्होंने हमें 10 रूपये के एक हजार रुपये के नए नोट देने के बदले 1400 रुपये में देने की मांग की, इस प्रकार हमें बीस रुपये के नोटों का बंडल 2400 से 2500 रुपये में ब्लैक में देने के लिए कहा गया। यह बहुत ही हैरानी की बात है कि अगर ये नोट बैंकों में उपलब्ध नहीं हैं तो शहरों और कस्बों में बैठे दलाल इन नोटों को लोगों को ब्लैक में बेच रहे हैं। इस संबंधी ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी गगनदीप सिंह रियाड़ ने हा कि आर.बी.आई.को बैंक के इस भ्रष्ट धंधे में शामिल कर्मचारियों और दलालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। जो लोग इन नोटों को ब्लैक कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जिस बैंक में दस, बीस और पचास रुपये के नोटों के बंडल सप्लाई किए जाते हैं, उसकी डिटेल्स अंदर ब्लैक बोर्ड पर लिखी जानी चाहिए, जिसे भी शादी समारोह में इन नोटों की ज़रूरत हो, वह शादी का कार्ड सरपंच, किसी सम्मानित व्यक्ति से वेरिफाई करवाए और फिर ये नोट पूरे रेट पर दिए जाने चाहिए। गगनदीप सिंह रियाड़ ने आगे कहा कि, यह बहुत सोचने वाली बात है कि एक समय था जब बैंक में शादी का कार्ड दिखाकर 10, 20, 50 के नोटों के बंडल आसानी से मिल जाते थे। जबकि अब एैसा नही है। हैरानी की बात है कि ये बाजार में नए नोट ब्लैक में खुलेआम बिक रहे हैं। कुछ लोगों ने बैंक अधिकारियों से मिल कर इसे कमाई का साधन बना लिया है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। हर बैंक के मैनेजर को इन नोटों की डिटेल्स सार्वजनिक करने के निर्देश दिए जाने चाहिए। रियाड़ ने पंजाब के डिप्टी कमिश्नरों और बड़े अधिकारियों से मांग है कि इन काले धन्धे को रोकने के लिए हर बैंक को निर्देश दिए जाएं। 

धीरेंद्र शास्त्री की पहल: 300 लड़कियों के विवाह के लिए 1 दिसंबर से रजिस्ट्रेशन, 15 फरवरी को होगा महोत्सव

छतरपुर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. वे अपनी कथाओं, बयानों, यात्रा सहित हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग को लेकर चर्चा में रहते हैं. इस बार धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर एक अच्छी खबर दी है. जहां उन्होंने गरीब बेटियों की शादी कराने की घोषणा करते हुए रजिस्ट्रेशन की तारीख बताई. बागेश्वर् बाबा ने इस आयोजन में जुड़ने की सभी से अपील की. धीरेंद्र शास्त्री कराएंगे 300 बेटियों का विवाह सिद्ध पीठ बागेश्वर धाम में हर साल शिवरात्रि के दिन सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव का आयोजन किया जाता है. इस महोत्सव के माध्यम से उन गरीब बेटियों को परिणय सूत्र में बांधा जाता है, जो बेसहारा, मातृ पितृहीन, अर्थहीन हैं. 15 फरवरी 2026 को होने वाले इस महोत्सव में 300 बेटियों को वैवाहिक बंधन में बांधा जाएगा. 1 दिसंबर से 15 दिसंबर के बीच बेटियों के रजिस्ट्रेशन होंगे. पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव के संबंध में बताया कि "इस साल 300 बेटियों का विवाह करने का निर्णय लिया गया है. विवाह के लिए 1 दिसंबर से शुरु है रजिस्ट्रेशन 1 दिसंबर से 15 दिसंबर के बीच धाम के कार्यालय नंबर-5 में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया चलेगी. इस महोत्सव में उन बेटियों के विवाह किए जाते हैं, जो बेसहारा, अत्यंत निर्धन परिवार, मातृ-पितृ हीन हैं. उन्होंने बताया कि बागेश्वर धाम में आने वाले दान से बेटियों का विवाह किया जाएगा. बागेश्वर बाबा ने कहा कि अगर देशभर के मंदिरों की दान पेटियों से बेटियों का घर बसने लगेगा, तो मानस मंदिर भी घर-घर बनने लगेगा है. इस दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने लोगों से इस आयोजन से जुड़ने की अपील की. लोगों से सही डॉक्यूमेंट्स लाने की अपील उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि जो भी रजिस्ट्रेशन कराने आएगा, वह पूरी तरह से सही दस्तावेज लेकर आए. बागेश्वर धाम की टीम घर-घर जाकर उनकी जांच करेगी. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा जितने ज्यादा से ज्यादा लोगों तक उनकी बात पहुंचेगी, उतने ही जरुरतमंद की मदद होगी. 15 फरवरी को बागेश्वर धाम में बड़ा महोत्सव होगा. जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होने पहुंचेंगे.

अब पुलिसकर्मियों को बाल कटवाने या क्लीन शेव रखने की जरूरत नहीं, छत्तीसगढ़ पुलिस ने किया स्पष्ट

रायपुर  राज्य पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बाल जीरो कट रखने और क्लीन शेव अनिवार्य होने को लेकर फैल रही चर्चाओं पर अब स्थिति स्पष्ट हो गई है। पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) ने आरटीआई के माध्यम से बताया है कि इस संबंध में न तो कोई प्रशासनिक आदेश जारी हुआ है और न ही प्रशासन शाखा या उप शाखा के किसी अभिलेख में ऐसा कोई उल्लेख मौजूद है। इसका अर्थ है कि पुलिसकर्मियों के लिए लंबे बाल या दाढ़ी रखना अनुशासनहीनता की श्रेणी में नहीं आता। यह जानकारी संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान द्वारा लगाए गए आरटीआई आवेदन के जवाब में सामने आई है। जानकारी के अनुसार, दीवान ने 13 अक्टूबर को आवेदन लगाया था, जिस पर 12 नवंबर को एआईजी अंशुमान सिसोदिया ने जवाब दिया। दीवान ने बताया कि वर्ष 1861 से पुलिस व्यवस्था पर अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों का प्रभाव रहा है और कई पुराने, अप्रचलित नियम आज भी व्यवहार में लाए जा रहे हैं। दाढ़ी बढ़ाने पर किया जाता था दंडित उन्होंने आरोप लगाया कि कई पुलिसकर्मियों को केवल बाल जीरो कट न कराने या दाढ़ी बढ़ाने पर अनुशासनहीनता बताकर दंडित किया गया, जबकि संबंधित अधिकारियों को भी इस संबंध में वास्तविक नियमों की जानकारी नहीं थी। दीवान का कहना है कि वर्तमान में कई स्थानों पर हर मंगलवार और शुक्रवार को बाल जीरो कट रखना अनिवार्य बताया जाता है, जिससे जवानों को अनावश्यक अपमान झेलना पड़ता है।  

डेप्युटी CM ने हिड़मा की मां से की लंच मुलाकात, नक्सलियों के नेता ने सरेंडर पर सोचा

सुकमा  माओवादियों के टॉप लीडर माड़वी हिड़मा के एनकाउंटर के बाद नक्सली संगठन में खौफ दिख रहा है। नक्सली संगठनों ने एक बार फिर हथियारबंद युद्ध रोकने के लिए तीन राज्यों के सीएम को लेटर लिखा है। वहीं, दूसरी तरफ एक खूंखार नक्सली के सरेंडर की अटकलें लगाई जा रही है। हिड़मा की मौत के बाद उसका दोस्त माने जाने वाला नक्सली देवा बारसे सरेंडर कर सकता है। देवा के सरेंडर को लेकर दावा किया जा रहा है कि वह सरेंडर के लिए बातचीत कर रहा है। दावा किया जा रहा है कि बटालियन कमांडर देवा बारसे अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण करना चाहता है लेकिन वह कन्फयूज्ड है कि किस राज्य में सरेंडर करे। पिछले दो तीन दिनों से नक्सली देवा के सरेंडर को लेकर खबरें आ रही हैं। हालांकि इसे लेकर अभी तक सुरक्षाबल के जवानों ने कोई अधिकारिक घोषणा नहीं की है। दावा किया गया है कि हिड़मा की मौत के बाद से देवा काफी परेशान है और वह आने वाले दिनों ने सरेंडर कर सुकमा लौटना चाहता है। सरेंडर को लेकर क्यों कन्फयूज्ड है देवा देवा और उनके साथी को लेकर यह कहा जा रहा है कि वह इस बात को लेकर कन्फयूज्ड हो गया है कि वह छत्तीसगढ़ में सरेंडर करे या फिर किसी दूसरे राज्य में। वह किस तरह से सरेंडर करे कि आत्मसमर्पण करने के बाद वह सुरक्षित रह सके और शासन की योजनाओं का लाभ भी ले सके। देवा की मां से मिले थे डेप्युटी सीएम डेप्युटी सीएम विजय शर्मा ने हाल ही में सुकमा जिले के पूवर्ती गांव का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने हिड़मा और देवा के मां से मुलाकात की थी। दोनों की मां से अपील की थी कि नक्सली विचारधारा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट आएं। जिसके बाद देवा और हिड़मा की मां ने अपील की थी कि बेटा जहां भी हो लौट आओ। जंगल में भटकने से कोई फायदा नहीं होगा। इस अपील के 8 दिन बाद ही हिड़मा का एनकाउंटर हो गया था। पूर्वती का रहने वाला है देवा खूंखार नक्सली देवा सुकमा जिले के पूवर्ती का ही रहने वाला है। उसे हिड़मा का खास माना जाता था। कहा जाता है कि हिड़मा से प्रभावित होकर ही वह नक्सली विचारधारा में शामिल हुआ था। लेकिन उसकी मौत के बाद वह टूट गया। छत्तीसगढ़ सरकार ने उसके सिर पर 25 लाख रुपए का इनाम रखा है। हिड़मा की तरह देवा भी AK-47 हमेशा अपने साथ रखता है।