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स्कूलों को चेतावनी: यूनिफॉर्म व जूतों के लिए मजबूरी नहीं, नियम तोड़े तो होगी सख्त कार्रवाई

गुना  सर्दी के मौसम में यूनिफार्म को लेकर बच्चों को होने वाली परेशानी की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। कई स्थानों पर गरीब परिवारों के बच्चे उचित गर्म कपड़े न होने के कारण स्कूलों में रोक-टोक का सामना कर रहे थे। इन परिस्थितियों को देखते हुए लोक शिक्षण संचालनालय ने बड़ा निर्णय लेते हुए ठंड के दौरान स्कूल यूनिफार्म की बाध्यता समाप्त कर दी है, जिससे हजारों बच्चों को राहत मिलेगी।   संचालनालय ने दिया आदेश संचालनालय द्वारा गुना जिला शिक्षा अधिकारियों और जनजातीय कार्य विभाग के संयोजकों को जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि निर्धारित यूनिफार्म न होने की स्थिति में बच्चे किसी भी रंग और डिजाइन के गर्म कपड़े जैसे स्वेटर, जैकेट आदि पहनकर स्कूल आ सकते हैं। किसी भी स्थिति में वि‌द्यालय प्रबंधन या शिक्षक उन्हें कक्षा से बाहर नहीं कर सकते। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि कोई स्कूल यूनिफार्म के नाम पर बच्चों पर अनावश्यक दबाव बनाता है, तो संबंधित संस्था और जिम्मेदार शिक्षकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। यूनिफार्म और जूते उत्तरवाने का नहीं बनाएंगे दबाव संचालनालय ने एक और महत्वपूर्ण समस्या पर भी रोक लगा दी है। कुछ स्कूलों में बच्चों से कक्षा में प्रवेश से पहले जूते-चप्पल उतरवाने की शिकायत मिली थीं, जो ठंड के दिनों में बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जोखिमभरी और अमानवीय मानी गई। अब इन दोनों प्रथाओं अनिवार्य यूनिफार्म और जूते-चप्पल उत्तरवाने पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। सभी स्कूलों को निर्देशित किया गया है कि वह बच्चों के स्वास्थ्य, गरिमा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। निजी स्कूल बच्चों पर ठंड से बचाव को लेकर अलग से स्वेटर और जैकेट पहनकर आने का दबाव बना रहे थे। क्योंकि स्कूलों की मोनोपॉली के तहत ठंड के लिए अलग से ड्रेस लागू की थी। इससे अभिभावकों को आर्थिक बोझ पड़ रहा था। विभाग का यह कदम स्कूलों में समानता, संवेदनशीलता और बच्चों के प्रति सम्मान की संस्कृति को भी मजबूत करेगा। उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर होगी कार्रवाई जिले के सभी निजी और सरकारी स्कूलों को आदेश भेजे जा चुके हैं। यदि किसी स्कूल द्वारा इन निर्देशों का उल्लंघन किया जाता है या यूनिफार्म के अभाव में बच्चे को कक्षा से बाहर करने की शिकायत मिलती है, तो तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाएगी।- राजेश गोयल, डीईओ

25 नवंबर के बाद झारखंड में ठंड का जोर, सनसनाती हवाएं करेंगी कंपकंपा

रांची झारखंड में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। 25 नवंबर से राज्य में कनकनी बढ़ेगी जिससे लोगों को हाल बेहाल होगा। मौसम विभाग के मुताबिक 25 नवंबर से तापमान में गिरावट होगी। मौसम विभाग के मुताबिक झारखंड में कई इलाकों में आंशिक बादल और कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी की संभावना बनी है। हालांकि इसकी संभावना बहुत कम है। अगले 2-3 दिनों तक यही स्थिति बनी रहने की उम्मीद है। इसके बाद 25 नवंबर से तापमान में गिरावट होगी जिससे ठंड बढ़ेगी। तापमान गिरने के साथ ही सनसनाती हवाएं एक बार फिर ठिठुरन बढ़ाएंगी। इस अचानक आने वाले ठंड के अटैक को देखते हुए खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को अपना विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। मौसम विभाग ने अपील की है कि वे मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखें और किसी भी अप्रत्याशित स्थिति के लिए तैयार रहें। फिलहाल, राज्य में किसी बड़े अलर्ट की आवश्यकता नहीं बताई गई है।  

28,000 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट: मध्यप्रदेश में जल्द बनेंगी 5 चमचमाती फोर लेन रोड

भोपाल  मध्यप्रदेश में जबलपुर–दमोह और सतना–चित्रकूट सहित 5 प्रमुख सड़कों को फोर लेन बनाने की योजना तैयार की गई है। इस NHAI प्रोजेक्ट के लिए 28 हजार करोड़ रुपये का निवेश तय है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने प्रदेश की पांच प्रमुख सड़कों की डीपीआर तैयार की है। इनमें जबलपुर–दमोह, सतना–चित्रकूट रोड, उज्जैन–झालावाड़, रिंग रोड और ओरछा बायपास शामिल हैं। इसका सीधा असर 10 जिलों के रोज़ाना सफर करने वाले लगभग 7 लाख लोगों पर पड़ेगा। इंदौर और ओरछा जैसे शहरों में अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती थी। फोर लेन बनने से जाम कम होगा। ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और लोगों की यात्रा आसान होगी। वाइल्डलाइफ के लिए स्पेशल कॉरिडोर जहां सड़कें जंगल से गुजरेंगी, वहां साउंडप्रूफ वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बनाए जाएंगे ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा बनी रहे। 2026 तक इन सड़कों के निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। ठेकेदारों को काम पूरा करने के लिए डेढ़ से दो साल का समय मिलेगा। सभी बायपास फोर लेन होंगे और दोनों तरफ सर्विस लेन होंगी, जिससे सवारी और माल ढुलाई दोनों आसान होंगी। इससे आवागमन सुगम और सुरक्षित होगा तथा सफर कम समय में पूरा हो सकेगा।   एक हजार किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य NHAI ने बताया कि मध्यप्रदेश हाईवे के कुल 1000 किलोमीटर सड़कों पर काम प्रगति पर है। इसमें 500 किलोमीटर का ठेका दिया जा चुका है और बाकी सड़कों की डीपीआर अंतिम चरण में है। इस कदम से 10 जिलों के 7 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। इंदौर और ओरछा में जाम और भारी वाहनों की समस्या कम होगी। आगरा–ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का काम जारी है। यह 88 किलोमीटर लंबा हाईवे है, जिसकी लागत 4613 करोड़ रुपये है।

रामनगरी में बड़ा उत्सव: पीएम मोदी करेंगे ध्वजारोहण समारोह में विशेष उपस्थिति

अयोध्या रामनगरी अयोध्या एक बार फिर अपने भव्य और ऐतिहासिक उत्सव के लिए पूरी तरह तैयार है। 25 नवंबर को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में ध्वजारोहण समारोह होने वाला है और इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद शामिल होंगे। वे राम मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराएंगे। वहीं, कार्यक्रम को लेकर पूरे मंदिर परिसर और शहर में तैयारियों का उत्साह देखने लायक है। संत समाज में भी इस अवसर को लेकर खासा उत्साह है। कई संतों ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राम मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराया जाना करोड़ों राम भक्तों के लिए गर्व का पल है। उनका मानना है कि पीएम मोदी के प्रयासों से अयोध्या का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गौरव नई ऊंचाई पर पहुंचा है। यहां हुए विकास कार्य लोगों की सोच से परे हैं और लोग बेहद खुश हैं।  जगत गुरु परमहंस आचार्य जी महाराज ने खास बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अयोध्या को सिर्फ निखारा ही नहीं, बल्कि इसे त्रेतायुग जैसा स्वरूप दिया है। जो लोग आज अयोध्या आ रहे हैं, उन्हें और जो पहले आते थे, उन्हें इसका अंतर साफ दिखाई दे रहा है। वेदों, पुराणों और शास्त्रों में जैसे अयोध्या का वर्णन है, उसी तरह अब वास्तविक अयोध्या दिख रही है। यह जगह केवल भगवान श्रीराम की जन्मभूमि ही नहीं, बल्कि मानवता और सभ्यता का केंद्र भी है। उन्होंने बताया कि प्रभु श्रीराम ने अपने जीवन में हमें भाईचारे, प्रेम, पिता-पुत्र के संबंध और समाज व देश के प्रति जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया। राम मंदिर का भूमि पूजन, शिलान्यास और अब 25 नवंबर को होने वाली धर्मध्वज स्थापना भी प्रधानमंत्री मोदी के हाथों संपन्न हो रही है। इसे लेकर अयोध्यावासी और देश के साधु-संत बहुत उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि इस धर्मध्वज की स्थापना एक तरह से अघोषित रूप में हिंदू राष्ट्र की घोषणा है। हिंदू राष्ट्र का मतलब है रामराज और मानवता की स्थापना। वे बताते हैं कि हिंदुत्व का अर्थ केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व के कल्याण के लिए सोचना है। यही संदेश इस ध्वज स्थापना के माध्यम से दिया जा रहा है। पूरी दुनिया में इसका असर धीरे-धीरे दिखाई देगा। इससे नफरत का माहौल कम होगा और प्रेम, भाईचारे और मानवता की भावना लोगों में मजबूत होगी। यह सिर्फ अयोध्या या भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में सकारात्मक बदलाव लाएगा। एक अन्य संत ने कहा कि नरेंद्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जो अयोध्या कई बार आए हैं। यह काबिल-ए-तारीफ है। संत ने आगे कहा कि हम सब खुश हैं कि उनके कार्यकाल में इतने बड़े और महत्वपूर्ण काम हो रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ऐसे ही और कई पहल जारी रहेंगी। संत ने बताया कि राम मंदिर का भूमि पूजन पीएम मोदी ने किया, इसका उद्घाटन भी उन्होंने किया और अब 25 नवंबर को धर्मध्वज की स्थापना भी उनके हाथों होगी। लोगों में इसे देखने की बेहद उत्सुकता है और पूरा शहर इस ऐतिहासिक पल का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। एक और संत ने बताया कि यह अवसर बहुत ही हर्ष और उल्लास का है। सिर्फ पूरे भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में इसको लेकर खुशी और उत्साह का माहौल है। संतों के अनुसार, इस मौके पर भगवान श्री राम के भव्य मंदिर के सुनहरे शिखर पर ध्वज फहराने वाला क्षण हर किसी के लिए गर्व और आनंद का है। पूरे अयोध्या शहर में सजावट और तैयारियां जोरों पर हैं और भक्तों की भीड़ इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए तैयार है। वहीं, इकबाल अंसारी ने कहा कि पीएम मोदी के प्रयासों की वजह से आज अयोध्या इतनी सुंदर बन गई है। उन्होंने बताया कि अयोध्या में हर धर्म और समुदाय के देवता मौजूद हैं और भगवान राम खुद इस शहर की रक्षा कर रहे हैं। अंसारी का कहना है कि पीएम मोदी बहुत ही भाग्यशाली हैं कि मंदिर के ध्वज फहराने का मौका मिल रहा है। इससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता। यह शहर गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक है।

मात्रा 2005 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट: 98 किमी फोरलेन के लिए 56 गांवों की भूमि पर प्रभाव

छतरपुर  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से लखनऊ तक बनाए जा रहे इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत फोरलेन सड़क का निर्माण किया जा रहा है। छतरपुर जिले में इस कॉरिडोर के लिए नेशनल हाईवे-34 को फोरलेन में बदला जा रहा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) जिले की बड़ामलहरा तहसील की सांठिया घाटी से लेकर महाराजपुर तहसील के चौका गांव तक पहले चरण में और दूसरे चरण में चौका गांव से कैमाहा बैरियर तक फोरलेन रोड का निर्माण कर रहा है। छतरपुर जिले में इन दोनों चरणों में मिलाकर कुल मिलाकर 98 किमी. के नेशनल हाईवे 34 के हिस्से को फोरलेन किया जा रहा है जिसमें 2005 करोड़ रूपये लागत आ रही है। इन 56 गांवों की भूमि का अधिग्रहण इस परियोजना में छतरपुर जिले की बड़ामलहरा, छतरपुर, बिजावर और नौगांव तहसीलों के अंतर्गत आने वाले कुल 56 गांवों में भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। इनमें बड़ामलहरा तहसील के भिलवार, गोरा, बमनौराखुर्द, घिनौची, रजपुरा, टौरिया, मौली, मेलवार, किवलाई, अरोल, मवई, रानीखेरा जैसे गांव शामिल हैं। वहीं बिजावर तहसील में निवार, मड़देवरा, दरगुवां, गुलगंज, अनगौर जैसे गांवों से जमीन अधिग्रहण हुआ है। छतरपुर तहसील में पलटा, खैरो, मातगुवां, अतरार, रामगढ़ सहित कई गांव इस सूची में हैं जबकि नौगांव विकासखंड के महाराजपुर तहसील में कुर्राहा, ऊजरा, बेदर और गढ़ीमलहरा जैसे गांवों की भूमि ली जा रही है।   भोपाल-लखनऊ के बीच बन रहा इकोनॉमिक कॉरिडोर भोपाल-लखनऊ इकोनॉमिक कॉरिडोर की लंबाई 526 किमी. है और इसका निर्माण 11300 करोड़ रूपये की लागत से किया जा रहा है। अलग अलग चरणों में ये इकॉनोमिक कॉरिडोर बन रहा है। पहले चरण में उत्तर प्रदेश के कानपुर से करबई तक 112 किलोमीटर, दूसरे चरण में करबई से सागर तक 223 किलोमीटर और तीसरे चरण में मध्यप्रदेश के सागर से राजधानी भोपाल तक 150 किलोमीटर का रोड बन रहा है। भोपाल से लखनऊ इकोनॉमिक कॉरिडोर के एमपी के हिस्से में नया प्रयोग भी किया जा सकता है। यहां एरियल डिस्टेंस के आधार पर रोड बनाई जा सकती है जिससे मोड़ यानि घुमावदार रास्ते कम हो जाएंगे और सफर आसान हो जाएगा।

परीक्षा की तारीखों में बड़ा बदलाव: अब 15 दिन बाद होंगे हाफ इयरली एग्जाम

नर्मदापुरम  एसआईआर कार्य (SIR Survey) के कारण अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के समय में बदलाव किया गया है। शासकीय और निजी स्कूलों में 24 नवंबर से होने वाली अर्द्धवार्षिक परीक्षा अब 15 दिन बाद 8 दिसंबर से शुरु होंगी। तब तक एसआइआर का पहला चरण भी खत्म हो जाएगा। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा शासकीय प्राथमिक माध्यमिक वि‌द्यालयों में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं 24 से 29 नवंबर के बीच होना थी, अब इसे बदल दिया है। राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं 8 दिसंबर से शुरु करने का आदेश जारी कर दिया है।  दो सत्रों में होगी परीक्षा दो सत्रों में होंगी परीक्षा अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं दो सत्रों में होंगी। पहला सत्र सुबह 10 से दोपहर 12.30 बजे तक रहेगा। जिसमें कक्षा 6 वीं से 8 वीं तक की परीक्षाएं होंगी। ये 13 दिसंबर को खत्म होंगी। दोपहर 1.30 से शाम चार बजे तक कक्षा 3 से 5 तक की परीक्षाएं होंगी। ये 12 दिसंबर को खत्म होंगी। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधान अनुसार नि:शक्त विद्यार्थियों को निर्देशानुसार अतिरिक्त समय, लेखक की सुविधा दी जाएगी। एसआईआर के कारण बदली गेट- एपीसी एसआईआर के काम के कारण अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के टाइम टेबल में बदलाव किया गया है। 24 नवंबर से शुरु होने वाली परीक्षाएं 8 दिसंबर से शुरू होंगी। नया टाइम टेबल भी राज्य शिक्षा केंद्र ने जारी कर दिया है। – प्रदीप चौहान, एपीसी कक्षा 3 से 5वीं तक     8 दिसंबर- प्रथम भाषा     9 दिसंबर- गणित     10 दिसंबर- ‌द्वितीय भाषा     11 दिसंबर- विज्ञान     12 दिसंबर- तृतीय भाषा संस्कृत, हिन्दी, उर्दू     13 दिसंबर- सामाजिक विज्ञान

25 नवंबर को बंद रहेंगे दफ्तर– गुरु तेग बहादुर जी के शहादत दिवस पर हरियाणा व चंडीगढ़ में छुट्टी

चंडीगढ़  गुरु तेग बहादुर जी के शहादत दिवस के उपलक्ष्य में चंडीगढ़ प्रशासन और हरियाणा सरकार ने 25 नवंबर 2025 (मंगलवार) को अवकाश घोषित कर दिया है। चंडीगढ़ प्रशासन ने वर्ष 2025 की छुट्टियों की अधिसूचना में संशोधन करते हुए इस दिन को पूर्ण सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है, जबकि हरियाणा सरकार ने इसे वैकल्पिक अवकाश के रूप में मानने का फैसला किया है। चंडीगढ़ प्रशासन की नई अधिसूचना के अनुसार प्रशासन के अधीन सभी सरकारी विभाग, बोर्ड, निगम, संस्थान और औद्योगिक प्रतिष्ठान 25 नवंबर को बंद रहेंगे। पहले यह दिन प्रतिबंधित अवकाश की श्रेणी में शामिल था, लेकिन अब इसे सिख इतिहास और धार्मिक महत्व को देखते हुए पूर्ण अवकाश घोषित किया गया है।   उधर, हरियाणा सरकार ने भी श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर 25 नवंबर को राज्य में वैकल्पिक अवकाश घोषित किया है। राज्य सरकार के कर्मचारियों को अपनी सुविधा अनुसार इस अवकाश का लाभ लेने की अनुमति दी गई है। गौरतलब है कि गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान देश और समाज के लिए धार्मिक स्वतंत्रता, साहस और मानवाधिकारों की रक्षा का अद्वितीय उदाहरण माना जाता है। उनके शहादत दिवस पर देशभर में श्रद्धांजलि सभाएं, नगर कीर्तन और सेवा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

माघ मेला 2026: 44 दिनों तक चलेगा आयोजन, श्रद्धालुओं के लिए प्रयागराज में शुरू हुई शटल बस सेवा

प्रयागराज  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेले के सभी प्रमुख काम 15 दिन में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। सीएम के प्रयागराज आगमन पर अफसरों ने उन्हें अब तक की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी। इस बार माघ मेला तीन जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी तक चलेगा। यानी मेले की कुल अवधि 44 दिनों की होगी।   मेला क्षेत्र में इस बार 4900 संस्थाओं के आने का अनुमान है। बेहतर भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 2.8 किलोमीटर लंबे घाट बनाए जाएंगे। समतलीकरण का काम 60 फीसदी पूरा हो चुका है। मुख्य मार्गों का चिह्नांकन कर दिया गया है। शौचालयों व टेंटों के लिए काम प्रगति पर है। भूमि आवंटन व बसावट का काम 15 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। माघ मेला में भी शटल बस सेवा की सुविधा महाकुम्भ की तर्ज पर माघ मेला 2026 में भी श्रद्धालुओं के लिए रोडवेज शटल बस सेवा उपलब्ध रहेगी। बाहर से आने वाले श्रद्धालु चारों दिशाओं धूमनगंज, नैनी, झूंसी और फाफामऊ से सीधे मेला क्षेत्र तक पहुंच सकेंगे। इसके लिए अस्थायी बस अड्डों सहित सूबेदारगंज रेलवे स्टेशन से शटल बसों का संचालन किया जाएगा। माघ मेला में 75 इलेक्ट्रिक बसों को इस सेवा में लगाया जाएगा। परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार सिविल लाइंस बस स्टेशन के निर्माणकार्य के चलते यहां से नियमित बस संचालन बंद करने की तैयारी है। ऐसे में शहर से मेला क्षेत्र के बीच आवागमन सुचारु रखने के लिए नए रूट तैयार किए जा रहे हैं। उधर, रेलवे ने भी अपनी कई प्रमुख ट्रेनों का संचालन प्रयागराज जंक्शन की जगह सूबेदारगंज, फाफामऊ और छिवकी स्टेशनों से शुरू कर दिया है। 75 हजार कैमरों में देंगे कनेक्शन इस बार बिजली विभाग 75 हजार शिविरों में कनेक्शन देगा। जबकि 25 हजार एलईडी स्ट्रीट लाइट लागई जाएगी। जिसमें 755 लाइट लगाई जा चुकी है। 500 हाईब्रिड सोलर एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई जाएगी। जिसमे 25 का काम प्रगति पर है। पार्किंग के पास होगी भंडारे की व्यवस्था पार्किंग के पास भंडारों का संचालन कराया जाएगा। जिससे थके हारे श्रद्धालु परेशान न हों। दिशा सूचकों की संख्या और आकार को और अधिक बढ़ाया जाएगा। जिससे श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। वो आसानी से देख सकें। 17 नलकूप और 10 वाटर एटीएम लगाए जाएंगे मेला क्षेत्र में जल निगम नगरीय की ओर से कुल 17 नलकूप लगाए जाएंगे। जिसमें से दो नलकूल स्थापित हो चुके हैं। अफसरों ने बताया कि 10 वाटर एटीएम लगाने का प्रस्ताव है, जिसमें से तीन लगाए जा चुके हैं। एक एसटीपी रहेगी। जिसका काम प्रगति पर है। इस बार माघ मेले में 2.8 किलोमीटर का घाट बनाया जाएगा। 4900 संस्थाएं आएंगी। संगम क्षेत्र में समतलीकरण का कार्य 60 फीसदी पुरा हो चुका है। बिजली के खंभों पर होगा क्यूआर कोड महाकुम्भ की तरह इस बार माघ मेला 2026 में भी बिजली विभाग पूरे क्षेत्र के बिजली खंभों और आरएमयू पर क्यूआर कोड लगा रहा है। इससे श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा। क्यूआर कोड को स्कैन करते ही उसकी सटीक लोकेशन मोबाइल पर दिखाई दे जाएगी। इससे यदि कोई व्यक्ति मेला क्षेत्र में रास्ता भटक जाता है, तो वह कोड स्कैन कर अपनी स्थिति तुरंत जान सकेगा। दूसरा बड़ा लाभ यह होगा कि बिजली से संबंधित किसी खराबी या समस्या की शिकायत भी उसी क्यूआर कोड को स्कैन कर सीधे दर्ज की जा सकेगी। शिकायत मिलते ही विभाग को उस स्थान की लोकेशन मिल जाएगी और टीम तत्काल मौके पर भेजी जा सकेगी। मुख्य अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि इस बार माघ मेला क्षेत्र में कुल 21,917 बिजली खंभे लगाए जा रहे हैं।

दिल्ली में ऑफिस कर्मचारियों के लिए एडवाइजरी जारी, आधे स्टाफ को घर से काम करने की सलाह

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का संकट गहराता जा रहा है। लगातार नौवें दिन भी दिल्ली की हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में बनी रही जिसके बाद सरकार को कड़े एहतियाती कदम उठाने पड़े हैं। इसी के चलते दिल्ली सरकार ने निजी कंपनियों को कहा है कि उनके 50% कर्मचारी घर से ही काम करें । सरकार ने जारी की वर्क फ्रॉम होम की सलाह इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, दिल्ली सरकार ने निजी कार्यालयों के लिए तत्काल प्रभाव से एक महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। निजी कंपनियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके 50% कर्मचारी घर से काम करें (Work From Home)। यह कदम सड़कों पर वाहनों की आवाजाही को कम करने और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। GRAP-3 और CAQM का कड़ा रुख यह एहतियाती उपाय केंद्र के ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चरण 3 (Stage 3) के तहत आता है। सरकार का यह निर्देश वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के एक औपचारिक निर्देश के बाद आया है। CAQM ने प्रदूषण प्रतिक्रिया ढांचे को और कड़ा करते हुए यह निर्णय लिया है। यह सख्ती सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के उन निर्देशों पर आधारित है जिनमें प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया था। GRAP-3 के तहत सामान्य तौर पर लगाए जाने वाले कुछ अन्य प्रतिबंध: गैर-आवश्यक निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर प्रतिबंध। ईंट भट्टों, हॉट मिक्स प्लांट्स और स्टोन क्रशर के संचालन पर प्रतिबंध। गैर-ज़रूरी ट्रकों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक। लगातार खराब होती हवा ने दिल्ली में स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर दी है जिसके चलते सरकार और पर्यावरण एजेंसियां सख्त कदम उठाने को मजबूर हैं।  

भोपाल में 10 दिन तक रूट डायवर्जन लागू, यात्रियों के लिए जारी हुई खास ट्रैफिक गाइडलाइन

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आगामी 10 दिनों के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की गई है। ये ट्रैपिक डायवर्जन शहर के चुनिंदा मार्गों पर कल से प्रभावी कर दिया जाएगा। दरअसल, शहर में मेट्रो निर्माण कार्य चल रहा है। इसी के चलते सोमवार 24 नवंबर से गुरुवार 4 दिसंबर 2025 तक रात में शहर के रूट डायवर्ट किए जाएंगे। करोंद से लाम्बाखेड़ा रोड (CIAE कैंपस) तक मेट्रो के लिए गार्डर लॉन्चिंग का काम किया जाएगा। ये कार्य 24 नंवबर से शुरु होकर 4 दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हालांकि, क्षेत्र में वाहनों के भारी दबाव को मद्देनजर रखते हुए गार्डर लॉन्चिंग का काम रात से सुबह तक किया जाएगा। ऐसे में रात 11:00 बजे से सुबह 6 बजे के बीच यहां ट्रैफिक डायवर्जन प्रभावी रहेगा। दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए व्यवस्था हल्के वाहनों के लिए नया रूट- दोपहिया, चारपहिया वाहनों के साथ-साथ छोटे वाहन BHMRC अस्पताल के सामने से मित्तल कॉलेज रोड होते हुए राजवंश कॉलोनी से गोकुल मार्केट, मित्तल मार्केट, सेंट जॉर्ज स्कूल होते हुए मित्तल कॉलेज तिराहा होकर आ और जा सकते हैं।   भारी वाहन- बस और ट्रकों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भारी वाहन, जिनमें बसें और ट्रक शामिल हैं। करोंद से लाम्बाखेड़ा जाने वाले भारी वाहन चीपड़ा कला से भानपुर या आचारपुरा मीना चौराहा होते हुए आशाराम बापू तिराहा होकर डायवर्ट मार्ग का उपयोग करेंगे। रात में आवागमन प्रभावित, संबंधित मार्गों पर निर्माण कार्य के कारण मुख्य रोड अस्थायी रूप से बंद रहेगा।   ट्रैफिक डिपार्टमेंट की अपील वहीं, शहर की ट्रैफिक पुलिस ने अपील की है कि, असुविधा से बचने के लिए सभी वाहन चालक निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का पालन करें।