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अनुसूचित जाति के मेधावी विद्यार्थियों के लिए ‘श्रेष्ठ योजना’ हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए देश के श्रेष्ठ निजी आवासीय विद्यालयों में मिलेगा प्रवेश अवसर रायपुर अनुसूचित जाति के मेधावी विद्यार्थियों को देश के सर्वश्रेष्ठ निजी आवासीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार की “श्रेष्ठ योजना” (Scheme for Residential Education for Students in High Schools in Targeted Areas – SHRESHTA) के तहत आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर 2025, शाम 5 बजे निर्धारित की गई है। इस योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा के माध्यम से कक्षा 9 और 11 में प्रवेश के लिए 3000 नए विद्यार्थियों का चयन किया जाता है, जो कक्षा 12वीं तक की शिक्षा पूरी करते हैं। स्कूलों का आबंटन योग्यता और विद्यार्थियों की प्राथमिकता के आधार पर आनलाइन काउंसिलिंग के माध्यम से किया जाता है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वर्ष 2022-23 से संचालित यह योजना राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों के माध्यम से अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को कक्षा 9वीं एवं 11वीं में प्रवेश का अवसर प्रदान करती है। इसके लिए राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा “राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा (श्रेष्ठ)” (NETS) का आयोजन किया जाता है। आगामी परीक्षा दिसंबर 2025 में संभावित है। श्रेष्ठ योजना के अंतर्गत प्रत्येक वर्ष सर्वोत्तम निजी आवासीय विद्यालयों का चयन का मापदंड ऐसे विद्यालय हैं जो न्यूनतम पाँच वर्षों से सतत रूप से संचालित हों, पिछले तीन वर्षों में कक्षा 10वीं एवं 12वीं की परीक्षाओं में कम से कम 75 प्रतिशत या उससे अधिक उत्तीर्णता दर प्राप्त कर चुके हों, तथा जिनके पास कक्षा 9वीं और 11वीं में अतिरिक्त रूप से कम से कम 10 अनुसूचित जाति विद्यार्थियों को समायोजित करने हेतु आवश्यक एवं उपयुक्त बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध हों। इस योजना के अंतर्गत चुने गए विद्यार्थियों को शिक्षण एवं छात्रावास शुल्क का पूरा व्यय भारत सरकार द्वारा वहन किया जाता है। विद्यार्थियों को किसी प्रकार का शुल्क या अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होता। साथ ही, शैक्षणिक समायोजन में सहायता हेतु ‘ब्रिज कोर्स’ के लिए वार्षिक शुल्क का 10% तक का प्रावधान है। योजना अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन NTA की वेबसाइट पर किया जा सकता है। आवेदन सुधार हेतु विंडो 1 से 2 नवंबर 2025 तक खुली रहेगी। विस्तृत दिशा-निर्देश एवं सार्वजनिक सूचना https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s388a839f2f6f1427879fc33ee4acf4f66/uploads/2025/10/202510101384621454.pdf पर उपलब्ध हैं। राज्य शासन ने सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि वे अपने जिलों में स्कूलों, वेबसाइटों और सोशल मीडिया के माध्यम से इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें, ताकि पात्र विद्यार्थी समय पर आवेदन कर सकें और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के इस अवसर का लाभ उठा सकें।

छत्तीसगढ़ में पहली बार ‘सूर्यकिरण एरोबैटिक शो’, वायुसेना के जांबाज भरेंगे आसमान में रंगीन उड़ानें

रायपुर छत्तीसगढ़ की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर राजधानी नवा रायपुर का आसमान 5 नवम्बर को एक ऐतिहासिक दृश्य का साक्षी बनेगा। भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम (Suryakiran Aerobatic Team – SKAT) अपने रोमांचकारी करतबों से छत्तीसगढ़ और देशवासियों को गर्व, उत्साह और देशभक्ति की भावना से भर देगी। यह शो रजत जयंती समारोह का सबसे विशेष आकर्षण होगा। छत्तीसगढ़ के आकाश में गूंजेगा भारतीय शौर्य राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर आयोजित यह एरोबैटिक शो छत्तीसगढ़ की प्रगति, उपलब्धियों और आत्मविश्वास का प्रतीक बनेगा। नवा रायपुर के आसमान में जब सूर्यकिरण टीम उड़ान भरेगी, तब ‘बॉम्ब बर्स्ट’, ‘हार्ट-इन-द-स्काई’ और ‘एरोहेड’ जैसी प्रसिद्ध फॉर्मेशन्स पूरे दर्शक समुदाय को रोमांच और गर्व से भर देंगी। सूर्यकिरण टीम का यह प्रदर्शन छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। यह दिखाएगा कि अनुशासन, तकनीक और टीमवर्क से कैसे असंभव को संभव बनाया जा सकता है।  राज्य शासन और भारतीय वायुसेना के संयुक्त प्रयास से आयोजन की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं।  जनसहभागिता से सजेगा रजत जयंती का आकाश रायपुर और आसपास के जिलों से हजारों नागरिक, विद्यार्थी और परिवार इस एरोबैटिक शो को देखने नवा रायपुर पहुँचेंगे। यह छत्तीसगढ़ की जनसहभागिता और राष्ट्रीय गर्व का जीवंत उदाहरण बनेगा। ‘सूर्यकिरण एरोबैटिक शो’ केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि यह भारतीय वायुसेना के शौर्य, सटीकता और समर्पण का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ की रजत जयंती पर गर्व की उड़ान 5 नवम्बर को नवा रायपुर का आसमान गर्व, रोमांच और देशभक्ति के रंगों से भर उठेगा। सूर्यकिरण टीम का यह ऐतिहासिक शो छत्तीसगढ़ की रजत जयंती को यादगार बना देगा और हर दर्शक के मन में भारत के वीर वायुसैनिकों के प्रति सम्मान और गर्व की भावना जगाएगा। उल्लेखनीय है कि 1996 में गठित सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम भारतीय वायुसेना की सटीकता, साहस और तकनीकी दक्षता का प्रतीक है। अपने गठन के बाद से इस टीम ने भारत की हवाई क्षमता और अनुशासन का भव्य प्रदर्शन देश-विदेश के अनेक मंचों पर किया है। सूर्यकिरण टीम एशिया की एकमात्र नौ विमान की एरोबैटिक डिस्प्ले टीम है, जो भारतीय वायुसेना की तकनीकी क्षमता, अनुशासन और समन्वय की मिसाल मानी जाती है। इनके विमानों की उड़ानें इतनी सटीक होती हैं कि कभी-कभी पंखों के बीच की दूरी पाँच मीटर से भी कम रह जाती है — यही वह कौशल है जो भारत को वैश्विक स्तर पर अलग पहचान देता है। स्वदेशी तकनीक से आत्मनिर्भर भारत की उड़ान टीम ने अपनी यात्रा की शुरुआत HJT-16 Kiran Mk-II से की थी। वर्ष 2015 में इसने स्वदेशी तकनीक पर आधारित HAL Hawk Mk-132 Advanced Jet Trainer के साथ नई उड़ान भरी। सूर्यकिरण टीम केवल हवाई करतबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं को भारतीय सशस्त्र बलों में सेवा के लिए प्रेरित करती है। देश और दुनिया में 700 से अधिक प्रदर्शन अब तक सूर्यकिरण टीम ने भारत और विदेशों में 700 से अधिक प्रदर्शन किए हैं। श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, ब्रिटेन और थाईलैंड जैसे देशों में इस टीम ने भारत का गौरव बढ़ाया है। टीम ने सिंगापुर एयर शो, दुबई एयर शो और रॉयल थाई एयर फोर्स की 88वीं वर्षगांठ पर भी शानदार प्रस्तुतियाँ दीं। इन प्रदर्शनों ने भारत की तकनीकी क्षमता और रक्षा सहयोग की भावना को दुनिया के सामने रखा है।  खेल और संस्कृति से जुड़ा गौरवपूर्ण अध्याय 2023 में सूर्यकिरण टीम ने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में क्रिकेट विश्वकप के दौरान अपने शानदार प्रदर्शन से पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित किया था। इस अवसर ने खेल और सैन्य गौरव को एक साथ जोड़ने का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।  “यह छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गौरव का अवसर है कि भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम हमारे रजत जयंती समारोह का हिस्सा बनेगी। छत्तीसगढ़ की रजत जयंती के इस ऐतिहासिक अवसर पर यह शो राज्य के विकास, आत्मविश्वास और राष्ट्रीय गौरव की उड़ान का प्रतीक बनेगा। यह प्रदर्शन न केवल हमारे युवाओं में देशभक्ति और गर्व की भावना को प्रबल करेगा, बल्कि उन्हें राष्ट्रसेवा की प्रेरणा भी देगा। मैं प्रदेशवासियों से आह्वान करता हूँ कि वे इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनें और हमारे वीर वायुसैनिकों के कौशल को सलाम करें।"- मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

भाई-भाई पर खौफनाक हमला: शहडोल में जमीन विवाद में हुई हत्या, विरोध में जनता ने किया चक्का जाम

शहडोल मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में जमीनी विवाद के चलते दो भाइयों की तलवार से हमला कर हत्या कर दी गई, जबकि तीसरा भाई गंभीर रूप से घायल है। पुलिस ने पीड़ित पक्ष की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है। वहीं, इस हत्याकांड के विरोध में बुधवार को लोग सड़कों पर उतर आए हैं और चक्का जाम किया है। मिली जानकारी के अनुसार, बलबेहरा गांव में दो परिवारों के बीच जमीन का विवाद चल रहा था। दोनों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया और मंगलवार की देर रात को इस मामले ने खूनी रूप ले लिया। राकेश तिवारी अपने भाई राहुल के साथ दीया रखने के लिए दुकान पर गया था, तभी दूसरे पक्ष के लोगों ने उन पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। इस हमले की जानकारी मिलने पर उनका बड़ा भाई सतीश भी मौके पर पहुंचा, तो उस पर भी आरोपियों ने हमला बोल दिया। तीनों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां दो की मौत हो गई, जबकि सतीश की हालत गंभीर बनी हुई है और उसका उपचार जारी है। मरने से पहले राहुल ने मोबाइल पर अपना बयान भी रिकॉर्ड किया है, जो पुलिस के हाथ लग गया है। इस घटना के बाद से स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने हाईवे क्रमांक 43 पर बुधवार की दोपहर से चक्का जाम कर दिया है। पीड़ित पक्ष के लोगों की मांग है कि आरोपियों को जल्दी गिरफ्तार किया जाए और सख्त कार्रवाई हो। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, तिवारी और शर्मा परिवारों के बीच जमीन को लेकर पिछले कुछ वर्षों से विवाद चल रहा था। समझौते के लिए चार दिन पहले भी बातचीत हुई, मगर कोई हल नहीं निकला। दीपावली पर्व के मौके पर आरोपियों ने तिवारी परिवार पर हमला बोल दिया। पुलिस आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों में गुस्सा है। लोगों का गुस्सा शांत करने के लिए घटना में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की गोवर्धन पूजा, बोले—‘प्रदेश में हर ओर शांति और समृद्धि फैले’

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय, बगिया (जशपुर) में सपरिवार गोवर्धन पूजा कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री की माता श्रीमती जसमनी देवी साय, धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय एवं परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण की उस प्रेरणादायी लीला की स्मृति है, जिसमें उन्होंने गोकुलवासियों को प्रलयकारी वर्षा और संकट से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाकर सभी को शरण दी थी। यह पर्व हमें बताता है कि जब समाज एकजुट होकर विश्वास और सहयोग के साथ कार्य करता है, तब कोई भी संकट अजेय नहीं रहता। उन्होंने कहा कि गोवर्धन पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि कृतज्ञता, सह-अस्तित्व और प्रकृति-पूजन का प्रतीक है। इस दिन गोवंश की पूजा की जाती है, जो भारतीय संस्कृति की आत्मा — गौ-संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण — को जीवंत रखती है।

इटली से आई पिस्टल और देसी हथियारों के साथ राजस्थान से पकड़ा गया लॉरेंस का शातिर गुर्गा

नारनौल राजस्थान पुलिस ने 19 अक्तूबर की रात को कोटपूतली-बहरोड़ जिले से हरियाणा के 25 हजार के इनामी बदमाश संजय जाट को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी महेंद्रगढ़ जिले के नांगल चौधरी क्षेत्र के गांव कालबा का रहने वाला और लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सक्रिय सदस्य है। पुलिस को आरोपी से 12 देसी और विदेशी हथियार मिले हैं। पुलिस पता लगा रही है कि वह इन हथियारों को कहां से और किस वारदात के लिए लाया था या ले जा रहा था। कोटपूतली के एसपी देवेंद्र बिश्नोई ने बताया कि गुप्त सूचना पर घेराबंदी कर बिंजाहेड़ा मोड़ से बदमाश को गिरफ्तार किया गया। संजय की बोलेरो कैंपर से 12 हथियार और गोली-बारूद बरामद हुआ। इनमें एक इटली में बनी बरेटा पिस्टल व 11 देसी पिस्टल हैं, इसके 6 कारतूस और दो मैगजीन के अलावा देसी कट्टे के 5 और पिस्टल के 9 कारतूस शामिल हैं। एसपी ने बताया कि आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। 

15 नवंबर से 5 दिसंबर तक दुनिया भर में होगा गीता उत्सव, भारतीय संस्कृति की अंतरराष्ट्रीय धूम

चंडीगढ़ कुरुक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 15 नवंबर से 5 दिसंबर, 2025 तक मनाया  जाएगा, जिसमें 51 देशों के मिशन इसी  तरह के कार्यक्रम आयोजित करेंगे।  हरियाणा टीम ने सीजीआई, ओसाका  से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक  आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत  अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव और आगामी सूरजकुंड मेले में  जापानी मंडलियों की भागीदारी की  संभावना तलाशने का भी कार्य चल  रहा है।  पिछले दिनों जब सी एम नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार का प्रतिनिधि मंडल जापान गया था तो  जापान के ओसाका स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास के  चंद्रू अप्पार को श्रीमद्भागवत गीता (जापानी संस्करण) की 100 प्रतियाँ भेंट कीं थी।ओसाका विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर  विकास पांडे और कुरुक्षेत्र की रहने वाली निकिता, जो अब टोक्यो में रहती हैं, ने ये प्रतियाँ भेंट कीं थी। इस कार्यक्रम में केबीडी के उपेंद्र सिंघल, मुख्यमंत्री कार्यालय के  पवन चौधरी, एचएसआईआईडीसी के संजय गर्ग, हरियाणा सरकार के विदेश सहयोग विभाग की  हीना बिंदलिश और प्रवासी भारतीयों का प्रतिनिधित्व करने वाले  अजय नरूला ने भाग लिया था। इस बैठक में जापान और अन्य देशों में गीता के शाश्वत संदेश के प्रसार हेतु विचारों का गहन आदान-प्रदान भी हुआ।सीजीआई, ओसाका ने जापानी छात्रों के लिए ऑनलाइन गीता शिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित करने की इच्छा व्यक्त की।         सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से लिया जाएगा सहयोग मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से शोभायात्रा निकली जाएगी। गीता महोत्सव के दौरान स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसके लिए सभी धार्मिक, सामाजिक, अन्य संगठनों और जन भागीदारी के साथ एक विशेष अभियान चलाया जाएगा ताकि कुरुक्षेत्र की पावन धरा स्वच्छ और सुंदर बने।  21 दिनों तक दिखेगा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उल्लास का संग गीता महोत्सव 21 दिन चलेगा और महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम आठ दिन चलेंगे। इस महोत्सव से पहले ही कई कार्यक्रमों का आगाज हो जाएगा। इसमें 4 से 14 नवंबर तक ऑनलाइन गीता क्विज, 15 नवंबर को गीता रन का आयोजन होगा। 15 नवंबर से 5 दिसंबर तक शिल्प और सरस मेला चलेगा तथा रोजाना सायं के समय पुरुषोत्तमपुरा बाग में भजन संध्या और महाआरती का आयोजन होगा। मुख्य कार्यक्रम 24 नवंबर से एक दिसंबर तक हाेंगे महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम 24 नवंबर से 1 दिसंबर तक होंगे। इसमें हरियाणा पवेलियन, पार्टनर स्टेट, पुस्तक मेला, जनसंपर्क विभाग की राज्य स्तरीय प्रदर्शनी, पुरुषोत्तमपुरा बाग में मुख्य मंच पर दिन और सायंकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। 24 नवंबर: गीता यज्ञ, गीता पूजन, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय गीता सेमिनार, सर्वधर्म सम्मेलन, ज्योतिसर व सन्निहित सरोवर पर श्रीमदभगवद गीता और पुरुषोत्तमपुरा बाग में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा।

यूपी में EV खरीदना हुआ फायदेमंद, सरकार दे रही रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीदारी को बढ़ावा देने के लिए ग्राहकों को एक तगड़ी सौगात दी है. अब यूपी में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदारी और भी किफायती होगी. लखनऊ में धनतेरस और दीपावली पर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) खरीदने वालों को अब रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क वापस मिलेगा. सरकार ने ईवी खरीदारों को अगले दो साल तक इन शुल्कों से छूट देने का फैसला किया है. औद्योगिक विकास विभाग ने 17 अक्टूबर को वित्तीय प्रोत्साहन बढ़ाने का आदेश जारी किया, अब परिवहन विभाग पोर्टल में संशोधन करेगा. इससे पहले भी नीति लागू होने के समय खरीदारों को रिफंड मिल चुका है. 14 अक्टूबर से पहले तक ईवी खरीदने वालों को 10 लाख रुपये तक के वाहन पर 9% और 10 लाख से ऊपर के वाहन पर 11% रोड टैक्स देना पड़ रहा था. दोपहिया वाहन मालिकों से 300 रुपये और चारपहिया वाहन स्वामियों से 600 रुपये पंजीकरण शुल्क लिया गया था. अब फेस्टिवल मे गाड़ी लेने वालो को यह पूरा शुल्क वापस किया जाएगा और भविष्य में भी दो साल तक ईवी पर रोड टैक्स या पंजीकरण शुल्क नहीं देना होगा. नीति लागू होने के समय यानी 13 अक्टूबर 2022 को भी इसी तरह रिफंड की प्रक्रिया अपनाई गई थी. उस समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट ने ईवी नीति को मंजूरी दी थी. किस वाहन पर कितनी सब्सिडी आदेश व पोर्टल अपडेट में समय लगने के बावजूद सभी खरीदारों को छूट का लाभ मिला था. इस बार भी आदेश लागू होने के बाद टैक्स रिफंड प्रक्रिया जल्द शुरू होगी. इस नीति के तहत दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों पर 5 हजार, चारपहिया पर 1 लाख और इलेक्ट्रिक बस पर 20 लाख रुपये की सब्सिडी दी जा रही है. नीति में तय वाहनों की बिक्री पूरी न होने पर जुलाई 2024 में संशोधन हुआ था, अब सब्सिडी 2027 तक सशर्त जारी रहेगी. नीति के तहत 25 हजार चारपहिया, 2 लाख दोपहिया, 400 ई-बस और 1000 ई-गुड्स कैरियर को सब्सिडी दी जानी है. अब तक लगभग 17 हजार चारपहिया ईवी को सब्सिडी मिल चुकी है और त्योहारों में बिक्री बढ़ने से यह संख्या और बढ़ गयी है.

बिलासपुर में भव्य छठघाट की तैयारी, 50 हजार श्रद्धालुओं की उम्मीद, 25 ट्रक मलबा हटाया गया

 बिलासपुर   छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में दिवाली के बाद अब आस्था के महापर्व छठ पूजा की धूम मचने वाली है. देश के सबसे बड़े स्थाई छठ घाट के तौर पर मशहूर तोरवा छठ घाट पर तैयारियां ज़ोरों पर हैं. यह घाट करीब 7.5 एकड़ में फैला हुआ है. आयोजन समिति ने बताया है कि इस घाट पर 1 किलोमीटर के एरिया में पूजा और अर्घ्य देने के लिए प्लेटफॉर्म बनाए गए हैं, जहां एक ही समय में 50,000 से ज़्यादा भक्त सूर्य को अर्घ्य दे सकते हैं. बिहार और उत्तर प्रदेश जहां से छठ पूजा की शुरुआत हुई वहां भी इतना बड़ा और स्थाई घाट नहीं है. दिवाली के बाद छठ पूजा की तैयारी, 50 हजार श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में दुर्गा माता की प्रतिमा विसर्जन के बाद अब छठ पूजा की धूम मचने वाली है। आयोजन समिति ने इस महापर्व की तैयारी शुरू कर दी है। यहां देश के सबसे बड़े छठ घाट में एक साथ 50,000 से अधिक लोग सूर्य देव को अर्घ्य देंगे। इस बार यह पर्व 25 नवंबर से 28 नवंबर तक मनाया जाएगा। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश का महापर्व अब छत्तीसगढ़ में भी छठ पूजा मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश का पर्व है, लेकिन पिछले एक दशक में छत्तीसगढ़ में भी इसका उत्साह बढ़ा है। शहर में बसे पूर्वांचल के लोगों के साथ ही स्थानीय लोग भी इस पर्व को मनाने लगे हैं। बिलासपुर का घाट 7 एकड़ में फैला है, जो कि देश में सबसे बड़ा घाट माना जाता है। यहाँ एक किलोमीटर के क्षेत्र में पूजा और अर्घ्य के लिए बेदी बनाई जा रही है। घाट की सफाई में जुटी समिति, मलबा हटाने का काम जारी दुर्गा विसर्जन के दौरान घाट पर इकट्ठे हुए मलबे को हटाने का काम तेजी से जारी है। अब तक 25 ट्रक मलबा निकाल लिया गया है। घाट से निकलने वाले मलबे में लकड़ी के टुकड़े, बांस की बल्लियां, मिट्टी के टूटे हुए बर्तन, रंग-बिरंगे कागज और प्लास्टिक की थैलियां शामिल हैं। इससे न केवल घाट की सफाई प्रभावित हुई है, बल्कि नदी का जल भी प्रदूषित हो रहा है। महापर्व की शुरुआत नहाय खाय से छठ पूजा की शुरुआत 25 अक्टूबर से नहाय खाय के साथ होगी। आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रवीण झा समेत अन्य पदाधिकारी अरपा नदी के तट पर बने छठ घाट की सफाई और रंग-रोगन के काम में जुटे हुए हैं। समिति ने महापर्व के सफल आयोजन के लिए सभी को जिम्मेदारियां सौंपी हैं। छठ घाट का महत्व और श्रद्धालुओं की भागीदारी पर्व मनाने के लिए घाटों, नदियों या तालाबों का विशेष महत्व होता है। यहां डूबते और फिर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हुए श्रद्धालु छठी मैया की पूजा-अर्चना करते हैं। बिलासपुर के छठ घाट का आकार इसे विशेष बनाता है, जो कि बिहार के कई घाटों से भी बड़ा है। साफ-सफाई का काम और घाट का दृश्य घाट में सफाई का काम तेजी से चल रहा है। सफाई मशीनों के साथ कर्मचारी भी इस काम में जुटे हुए हैं। आयोजन समिति ने नगर निगम के साथ मिलकर घाट से मलबा निकालने का कार्य किया है, ताकि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। छठ पूजा कार्यालय की स्थापना दुर्गा पूजा के बाद अब बिलासपुर में छठ महापर्व की तैयारी जोरों पर है। यहां तोरवा स्थित छठ घाट में छठ पूजा कार्यालय की स्थापना की गई है, जहां समिति के पदाधिकारी और सदस्य घाट पर व्यवस्था बनाने के लिए जुटे हुए हैं। इस कार्यालय के माध्यम से सभी व्यवस्थाओं का संचालन किया जाएगा। पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ छठ महापर्व पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की पूरी संभावना है। पिछले साल की तस्वीरों से यह स्पष्ट होता है कि इस पर्व के दौरान अरपा नदी के तट पर भीड़ काफी बढ़ जाती है। लोग उगते सूर्य को अर्घ्य देकर अपने व्रत को पूरा करते हैं। समापन छठ पूजा की तैयारी तेज हो चुकी है और सभी व्यवस्थाएं अंतिम चरण में हैं। बिलासपुर का छठ घाट इस बार और भी सुंदर और व्यवस्थित नजर आएगा, जिससे श्रद्धालुओं को एक अद्भुत अनुभव प्राप्त होगा। सभी भक्तों को इस महापर्व की शुभकामनाएं। नहाय खाय के साथ 25 अक्टूबर से पर्व की शुरुआत शहर में छठ पूजा आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रवीण झा समेत पदाधिकारी अरपा नदी के तट पर बने छठघाट की साफ-सफाई और रंग-रोगन के काम में जुट गए हैं। समिति के पदाधिकारियों ने महापर्व के सफल आयोजन के लिए तैयारियों का निरीक्षण कर सभी को जिम्मेदारियां सौंपी है। 7 एकड़ में बना छठघाट, 50 हजार श्रद्धालु होंगे शामिल पर्व मनाने घाटों, नदी या तालाब के घाटों का विशेष महत्व है। यहां डूबते और फिर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हुए छठी मैया की पूजा-अर्चना की जाती है। छठ पूजा के लिए बिहार में सैकड़ों घाट हैं। बिलासपुर जैसा स्थायी और बड़ा घाट तो पर्व के उद्गम स्थल बिहार में भी नहीं है। छठ मुख्य रूप से बिहार प्रांत का पर्व है। बिलासपुर के तोरवा स्थित छठ घाट साढ़े 7 एकड़ में फैला हुआ है। यहां एक किलोमीटर एरिया में पूजा और अर्घ्य के लिए बेदी बनाई जाती है। जिसमें 50 हजार से अधिक श्रद्धालु एक साथ सूर्य देव को अर्घ्य दे सकते हैं। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के बाद 25 ट्रक निकला मलबा शहर सहित आसपास के क्षेत्रों की दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन के लिए छठघाट में व्यवस्था की गई थी। नदी को गंदा होने से बचाने के लिए यहां कोई अलग से इंतजाम नहीं किया गया था। लोगों ने मनमाने तरीके से नदी में घाट के पास ही प्रतिमा विसर्जन कर दिया, जिससे वहां गंदगी का अंबार लग गया है। जगह-जगह फैली गंदगी से नदी का जल भी प्रदूषित हो रहा है। प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद स्थिति और बदहाल हो गई है। कहीं लकड़ी के टुकड़े, बांस की बल्लियां, मिट्टी के टूटे हुए बर्तन, पानी में भीगे रंग-बिरंगी कागज, प्लास्टिक की थैलियां, मां की प्रतिमाओं पर चढ़ाई गई लाल और हरे रंग की चुनरी पड़ी हुई हैं। आयोजन समिति ने नगर निगम की मदद से घाट से 25 ट्रक मलबा निकलवाया है। अरपा नदी के … Read more

रायपुर स्टेशन पर यात्रियों के लिए नई सुविधाएं: बड़ा होल्डिंग एरिया, सस्ता खाना और हेल्थ पैकेज

रायपुर  दीपावली के बाद, बड़ी संख्या में यात्री अपने घरों और कार्य स्थलों की ओर लौटने के लिए तैयार हैं। साथ ही, छठ पूजा के अवसर पर भी यात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि होने की उम्मीद है। इस स्थिति में, रायपुर रेलवे स्टेशन पर भीड़ को संभालने के लिए आवश्यक तैयारी की गई है। मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) दयानंद ने 21 अक्टूबर को स्टेशन पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया और बताया कि स्टेशन पर यात्री प्रबंधन के लिए विशेष होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए, स्पेशल ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं, ताकि सभी यात्रियों को कंफर्म टिकट मिल सके। इसके साथ ही, स्टेशन पर खाद्य पदार्थों की कीमतें भी कम रखने की कोशिश की गई है, जिससे सभी यात्रियों को उचित दर पर भोजन मिल सके। स्टाफ की संख्या बढ़ाकर 90 से अधिक ऑफिस स्टाफ को ड्यूटी पर तैनात किया गया है। 21 अक्टूबर को खुद मंडल रेल प्रबंधक (DRM) दयानंद रायपुर स्टेशन भी पहुंचे और तैयारियों का जायजा लिया है। उन्होंने बताया क्राउड मैनेजमेंट के स्टेशन पर स्पेशल होल्डिंग एरिया बनाया गया। सबको कंफर्म टिकट मिले लिए इसके लिए स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है। इसके अलावा स्टेशन पर कम दाम में खाने-पीने की चीज उपलब्ध कराने की कोशिश की गई है। 90 से अधिक ऑफिस स्टाफ की शिफ्ट वाइज ड्यूटी लगाई गई है। लोगों के लिए न्यूनतम दरों पर जनता खाना ₹15 में, इकोनॉमी मील ₹20 में, और रेल नीर ₹14 में उपलब्ध है। रायपुर में 6000 स्क्वायर मीटर का होल्डिंग एरिया रेलवे स्टेशनों पर अक्टूबर में अब तक एवरेज फुट-फॉल 60 हजार के करीब रहा है। दुर्ग में इसका आधा है। छठ पर ये संख्या बढ़ेगी। ऐसे में यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्लेटफॉर्म पर अनावश्यक भीड़ को रोकने के लिए होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं। रायपुर स्टेशन पर लगभग 6000 स्क्वायर मीटर (30 x 200 फीट) का विशाल होल्डिंग एरिया बनाया गया है। 1000 से अधिक लोग रुक सकेंगे, 15 रूपए में खाना इस होल्डिंग एरिया में 1000 से अधिक यात्रियों के बैठने की क्षमता है। 600 चेयर की व्यवस्था की गई है। यहां यात्रियों की सुविधा के लिए सीसीटीवी कैमरा, एयर कूलर और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था है। खान-पान के लिए न्यूनतम दरों पर जनता खाना ₹15 में, इकोनॉमी मील ₹20 में, और रेल नीर ₹14 में उपलब्ध है। दुर्ग और दूसरे स्टेशनों पर भी बनाए गए होल्डिंग एरिया ​इसी तरह, दुर्ग स्टेशन पर 1000 स्क्वायर मीटर एरिया का होल्डिंग एरिया (लगभग 1000 यात्री क्षमता और 200 चेयर), भाटापारा रेलवे स्टेशन पर 400 स्क्वायर मीटर एरिया का होल्डिंग एरिया (50 चेयर), और भिलाई पावर हाउस स्टेशन पर 250 स्क्वायर मीटर एरिया का होल्डिंग एरिया (100 चेयर) की व्यवस्था की गई है। इन सभी होल्डिंग एरिया में पानी की सुविधा, टिकट लेने की सुविधा, व्हील चेयर, स्ट्रेचर और सीसीटीवी कैमरा उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि प्लेटफार्म पर किसी भी तरह की भगदड़ न हो।

बलिदान को मिला सम्मान: शहीद एएसपी की पत्नी की डीएसपी पद पर नियुक्ति

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने बलिदानी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) आकाश राव गिरिपूंजे की पत्नी स्नेहा गिरिपूंजे को अनुकंपा के आधार पर उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के पद पर नियुक्त किया है। यह निर्णय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंत्रिमंडल द्वारा पहले ही लिया जा चुका था। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश राव गिरिपूंजे नौ जून को सुकमा जिले में माओवादियों द्वारा किये गये आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विस्फोट की चपेट में आने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गये थे। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री साय ने उनकी मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया था। हाल ही में स्नेहा का एक बयान सामने आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे किसी अन्य विभाग का विकल्प चुन सकती थी, लेकिन उन्होंने पुलिस को सेवा को ही चुना। यह वह विभाग है, जिसे वह सबसे अच्छी तरह समझती हैं। उनका कहना है कि उनके पति ने उन्हें कभी कमजोर नहीं समझा। वह सभी चुनौतियों को स्वीकार कर सकती हैं। उनका कहना है कि वर्दी हमेशा साहेब यानी उनके बलिदानी पति को उनके करीब रखेगी।