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स्व का जागरण: मातृशक्ति ने दिया आत्मविश्वास और सफलता

ग्वालियर  ग्वालियर में मातृशक्ति में स्व का भाव जगाने के लिए संकल्प से सिद्धी का मूल ध्येय सिद्ध किया है महिलाओं के समूह स्वयं सिद्धा ने। यह संस्था महिलाओं में सांस्कृतिक संवर्द्धन और आंतरिक गुणों की पहचान कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा हैं। कोरोना काल में आपदा में अवसर तलाशने के लिए यह संस्था अस्तिव में आई। वर्तमान में संस्था से जुड़कर 350 महिलाएं समाज के नवसृजन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहीं हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह संस्था महिलाओं को स्वयं के उत्पाद निर्मित करने में मदद करने के साथ ही उन्हें बाजार भी उपलब्ध कराती है। इसके बदले में संस्था महिला सदस्यों से कोई कमीशन नही लेती है। इसलिए उत्पादन से लेकर मुनाफे तक सदस्यों का पूर्ण अधिकार होता है। आज समूह की सदस्य आस्ट्रेलिया, जापान, दुबई, इटली,जर्मनी व अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के बीच अपने उत्पाद पहुंचा रही हैं। इन महिलाओं द्वारा निर्मित महाराष्ट्रीयन, गुजराती, पंजाबी व्यंजनों के साथ-साथ हस्तशिल्प उत्पाद इन देशों में काफी पसंद किए जा रहे हैं। स्वयं सिद्धा संस्था की सूत्रधार महिमा तारे ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल में समाज घोर निराशा और हताशा का वातावरण निर्मित था। उस समय नया काम करने की कल्पना करना भी असंभव प्रतीत हो रहा था, क्योंकि बाजार बंद था, नौकरियों पर घनघोर काले बादल छाए हुए थे। कई परिवारों में दो वक्त की रोटी की व्यवस्था करना चुनौती पूर्ण था। जीवन का सरकार पर आश्रित होकर चलना मुश्किल था। ऐसे माहौल में महिलाओं को घर की दहलीज लांघकर स्वयं को सिद्ध करने का संकल्प भी डरावना सा लग रहा था। साहस और हिम्मत के साथ पहला पग किसी तरह से आगे बढ़ाया। श्रीमती तारे कहती हैं कि संस्था का उद्देश्य केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना ही नही हैं, उनका व्यक्तित्व विकास और उनके सपनों को साकार करना मूलध्येय है। आंवले के उत्पादों से की शुरुआत संस्था की महिला सदस्यों को ग्वालियर के राजामाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आंवले की प्रोसेसिंग कर इसके उत्पाद बनाने का अवसर मिला। सदस्यों को यहां आंवले की धुलाई, छंटाई, कटाई, और फिर विभिन्न तरीकों से गूदा, रस या पाउडर तैयार करने का प्रशिक्षण मिला। इससे उन्होंने आंवला कैंडी, अचार, च्यवनप्राश, जूस, या कास्मेटिक उत्पाद बनाना सीखा इसके साथ सभी सदस्यों को उत्पादों के मानकीकरण और पाश्चुरीकरण का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशासन से मिला आर्डर रद हो गया महिमा तारे बताती हैं कि दीपावली से पहले का समय था। पहला आर्डर जिला प्रशासन से स्वल्पहार का मिला। हम लोग उत्साहित थे। प्रत्येक महिला ने 10-10 किलो की मात्रा में व्यंजन तैयार किये। अचानक कोरोना गाइड लाइन के कारण प्रशासन ने आर्डर यह कहकर रद कर दिया कि केवल पैकेज्ड फूड लेने की अनुमति हैं। सभी महिलाएं निराश होकर सारा सामान मेरे घर पर रख गईं। बैजाताल पर स्टाल लगाकर इन व्यंजनों को बेचने का प्रयास किया, पूरे दिन बैठने के बाद कोई सामान नही बिका। निराशा के बीच आशा की किरण दीपावली के रूप में सामने आई और यह सामान हाथों-हाथों बिक गया। महिलाओं को मना करना पड़ा कि दीदी अब कोई आर्डर मत लेना। ऋतुओं के अनुसार तैयार करती है उत्पाद संस्था से जुड़ी महिलाओं के पास पूरे माह कार्य रहता है, क्योंकि महिला सदस्य ऋतुओं के अनुसार उत्पाद तैयार करती हैं, जिससे उनका माल हाथों-हाथों बिक जाता है। महिलाएं अचार, पापड़ नियमित तौर करती हैं। त्योहारों, होली, दीपावली, रक्षाबंधन, नवरात्र पर परंपरागत पकवान बाखरबड़ी, खमण-ढोकला, गुजिया, मठरी, नमकीन, पूरनपोली, गुड की रोटी बनाती हैं। व्यजनों का निर्माण सभी बहनें एक ही रसोई में एक दूसरे का हाथ बांटते हुए करती हैं।  

धान खरीद सीजन की शुरुआत, पराली जलाने पर बोले मंत्री – किसान समझदारी दिखा रहे

करनाल हरियाणा की मंडियों में आज से किसानों धान की फसल खरीद शुरू होगी। इसकी जानकारी कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने दी। साथ में किसानों द्वारा धान कटाई के बाद पराली जलाने को लेकर कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को पराली प्रबंधन के लिए सहायता के रूप में ₹1200 की अनुदान राशि प्रदान की जा रही है। पराली जलाने के प्रदूषण फैलता है किसान काफी जागरूक हो चुका है इस बार किस पराली नहीं जलाएगा। करनाल पहुंचे हरियाणा के कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों की मांग पर इस बार हरियाणा में एक सप्ताह पहले ही धान की खरीद मंडियों में कल से शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए मुख्यमंत्री द्वारा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। एक अक्टूबर से शुरू होनी थी धान की खरीद किसानों के लिए सबसे बड़ा तोहफा है। पहले धान की खरीद एक अक्टूबर से शुरू होनी थी. हालातो को देखते हुए अब धान की खरे ई 22 सितंबर से शुरू होगी. उन्होंने कहा प्रदेश की मंडियों में किसानों के लिए सभी तरह के इंतजाम पूरे किए गए हैं किसी भी किसान को कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी। कृषि मंत्री ने किसानों से की ये अपील कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को हमने प्राकृतिक खेती की ओर लेकर जाना है. क्योंकि देश के अंदर कैंसर की बीमारी का काफी प्रकोप बढ़ गया है। अधिक डीएपी यूरिया के कारण ऐसे मामले अधिक हुए हैं। अगर किसान प्रकृति और रासायनिक खेती करेगा तो लोगों का स्वास्थ्य ठीक रहेगा।

लाखों छात्रों के लिए राहत! UP-TET फीस बढ़ोतरी पर CM योगी ने लिया बड़ा कदम

लखनऊ  यूपी-टीईटी (UP-TET) परीक्षा देने की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि परीक्षा का आवेदन शुल्क अब नहीं बढ़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इस बारे में सख्त निर्देश दिए हैं। परीक्षा शुल्क बढ़ाने की थी तैयारी मिली जानकारी के मुताबिक, शिक्षा विभाग ने यूपी-टीईटी का आवेदन शुल्क 600 रुपए से बढ़ाकर 1700 रुपए करने का प्रस्ताव तैयार किया था। अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता, तो दोनों स्तरों (प्राथमिक और उच्च प्राथमिक) की परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को 3400 रुपए देने पड़ते। लेकिन जैसे ही मुख्यमंत्री को इस प्रस्ताव की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत साफ निर्देश दिए कि अभ्यर्थियों पर किसी भी तरह का अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा। योगी जी ने स्पष्ट कहा – 'कोई शुल्क वृद्धि नहीं होगी।' अभ्यर्थियों ने ली राहत की सांस सीएम योगी के फैसले के बाद अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली है। अब यूपी-टीईटी परीक्षा का फॉर्म पुराने शुल्क पर ही भरा जाएगा, यानी कि प्राथमिक स्तर (कक्षा 1–5) – ₹600, उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6–8) – ₹600, दोनों स्तरों के लिए – कुल ₹1200  । 2026 में होगी परीक्षा उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP-TET) अब 29 और 30 जनवरी 2026 को आयोजित की जाएगी। शिक्षा सेवा चयन आयोग ने परीक्षा की तैयारियां शुरू कर दी हैं। परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इसी सिलसिले में आयोग ने आवेदन शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था, जिसे अब मुख्यमंत्री ने खारिज कर दिया है।   क्या है UP-TET परीक्षा? यूपी-टीईटी यानी उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य परीक्षा है। यह परीक्षा दो स्तरों पर होती है:- – प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5 तक) – उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8 तक) योग्यता क्या होनी चाहिए? – बी.एड, डी.एल.एड या संबंधित विषय में स्नातक डिग्री होना जरूरी है। परीक्षा में निम्नलिखित विषय पूछे जाते हैं: – बाल विकास और शिक्षाशास्त्र – हिंदी भाषा – गणित – पर्यावरण अध्ययन (प्राथमिक स्तर) – विज्ञान / सामाजिक विज्ञान (उच्च प्राथमिक स्तर)  

जबलपुर-रायपुर कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा, 150 किमी फोरलेन सड़क का निर्माण जल्द

जबलपुर जबलपुर से रायपुर की सड़क की दशा जल्द बदलेगी। इस सड़क के कुछ हिस्से पर वाहन चालक चलने से घबराते हैं। इस सड़क को अब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण फोरलेन बनाने जा रहा है। सड़क की न सिर्फ चौड़ाई बढ़ेगी बल्कि नए तरह से निर्माण किया जाएगा। जबलपुर से चिल्पी तक करीब 150 किलोमीटर के हिस्से का निर्माण एनएचएआइ करेगा। इस मार्ग के निर्माण में 4500 करोड़ का व्यय होगा। फिलहाल सडक निर्माण के लिए कंसल्टेंसी नियुक्त करने का प्रयास हो रहा है ताकि इसकी डिटेल प्रोजेक्ट बनाकर केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजा जा सके। सब कुछ ठीक रहा तो यह सड़क जो अभी एमपी रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के पास है, इसे वापस एनएचएआइ सड़क का हस्तातंरण करेगा। वन्य जीवों के लिए सुरक्षित मार्ग जबलपुर से चिल्पी के बीच मंडला क्षेत्र में आने वाला कान्हा नेशनल पार्क का कोर एरिया आता है। जहां वन्यजीवों की घनी आबादी विचरण करती है। ऐसे में एनएचएआई मार्ग में जगह-जगह अंडरपास और ओवर ब्रिज का निर्माण करेंगा ताकि वाहन निकलने से वन्य जीवों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो। कई जगह साउंड प्रूफ उपकरण भी लगाए जाएंगे जिससे बंदरों और अन्य जीवों को वाहनों की आवाजाही खलल न पैदा करें। बता दें करीब 25 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर की लागत आ रही है। फोरलेन बनने से बढ़ेगी रफ्तार फिलहाल राष्ट्रीय राजमार्ग 30 जबलपुर से रायपुर के बीच दो लेन है। इस वजह से वाहनों की आवाजाही में थोड़ी परेशानी होती है। मौसम खराब होने पर वाहनों की लंबी कतार सड़क पर लग जाती है। आवागमन भी बाधित होता है। यहां कुछ जगह लैंड स्लाइडिंग की भी समस्या बनी हुई है इसके लिए लगातार एमपीआरडीसी को शिकायत होती है लेकिन वहां से कोई भी राहत नहीं मिल पा रही है। एमपीआरडीसी द्वारा इस सड़क का निर्माण गुणवत्ताहीन तरीके से कराया जा रहा था। वर्षों से यह सड़क बेहद खराब स्थिति में है जिससे आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब इस सड़क को सरकार फोरलेन में तब्दील होगी तो बड़े स्तर पर राहत मिलने की संभावना है। इस सड़क के लिए गडकरी ने मांगी थी माफी जबलपुर मंडला की यह वही सड़क है जिसके लिए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को सड़क की खराब गुणवत्ता के लिए सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी थी। गडकरी 2022 में मध्य प्रदेश दौरे पर आए थे। तब उन्होंने मध्य प्रदेश को छत्तीसगढ़ से जोड़ने वाले नेशनल हाईवे की इस बदहाल सड़क को देखा। उन्होंने शर्मिंदगी महसूस की। सड़क की स्थिति को देखते हुए मंच से ही माफी मांगी थी। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव भी मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने ये बयान सात नवंबर 2022 को मध्य प्रदेश के मंडला में दिया था। गडकरी ने जबलपुर से मंडला के बीच नेशनल हाईवे के टेंडर रद्द कर सड़क के इस हिस्से को फिर से बनवाने के निर्देश दिए थे। बाद में इस मार्ग को सुधारने के लिए 53 करोड़ रुपये की लागत से सुधार का काम हुआ था। 2015 में शुरू हुआ था निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने 251 करोड़ की लागत से जबलपुर से मंडला के बीच इस राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के लिए मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन को निर्माण एजेंसी बनाया था। तीन फेस में बनने वाली इस सड़क का काम साल 2015 में शुरू हुआ था, जिसे दिसंबर 2016 तक पूरा हो जाना था। लेकिन, अब तक हाईवे का निर्माण अधूरा है और जहां हाईवे बना वो घटिया निर्माण से टूट-फूट का शिकार है।  

रेलवे लाया स्पेशल टूर पैकेज: 9 दिन में सात ज्योतिर्लिंग, बजट में पूरी यात्रा!

ग्वालियर त्योहार के सीजन के साथ ही सर्दी के मौसम में इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC Tour Package) द्वारा अगले तीन माह विभिन्न तीर्थ स्थलों की यात्रा के लिए विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। इसमें सितंबर से लेकर दिसंबर माह तक विभिन्न स्थानों से ट्रेनें संचालित की जाएंगी, जिनमें आगरा, ग्वालियर व झांसी से भी टिकट बुकिंग का विकल्प रहेगा। फिलहाल आइआरसीटीसी ने आगरा, ग्वालियर, झांसी स्टेशन से बैठने की सुविधा वाली दो ट्रेनों की घोषणा कर दी है, लेकिन अधिकारियों के अनुसार अभी और भी ट्रेनें तीर्थ स्थलों के लिए संचालित की जाएंगी जिसमें लोग बुकिंग करा सकते हैं। अगली धार्मिक ट्रेन का संचालन पांच नवंबर को आइआरसीटीसी द्वारा अगली धार्मिक ट्रेन का संचालन पांच नवंबर को किया जाएगा। ये गंगासागर-पुरी यात्रा स्पेशल ट्रेन होगी, जो दिल्ली सफदरजंग से शुरू होकर संचालित की जाएगी। इस ट्रेन में दिल्ली के अलावा मथुरा, आगरा, ग्वालियर, झांसी, कानपुर, लखनऊ और अयोध्या स्टेशन से चढ़ने के विकल्प रहेंगे। इस ट्रेन पैकेज में गया में महाबोधि मंदिर एवं विष्णुपद मंदिर, पुरी में जगन्नाथ मंदिर और कोणार्क सूर्य मंदिर, कोलकाता में गंगासागर और कालीघाट काली मंदिर, जसीडीह में बैद्यनाथ धाम, वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर और अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन शामिल रहेंगे। ये नौ रात और 10 दिन की यात्रा रहेगी, जिसमें स्लीपर श्रेणी की 640, थर्ड एसी की 70 और सेकंड एसी की 50 बर्थ मौजूद रहेंगी।   ये टूर भी नौ रात और 10 दिन का इसी प्रकार आगामी 18 नवंबर को सात ज्योतिर्लिंग की यात्रा शुरू होगी। ये ट्रेन योग नगरी ऋषिकेश से चलेगी और इसमें ऋषिकेश, हरिद्वार, मुरादाबाद, बरेली, हरदोई, लखनऊ, कानपुर, उरई, झांसी और ललितपुर स्टेशन से चढ़ने की व्यवस्था रहेगी। ग्वालियर के श्रद्धालु झांसी स्टेशन से ट्रेन में सवार हो सकेंगे। ये ट्रेन ओंकारेश्वर, महाकाल, सोमनाथ, नागेश्वर के साथ ही द्वारिका व भेंट द्वारिका, त्र्यंबकेश्वर, भीमाशंकर, गिरनेश्वर के दर्शन कराएगी। 13 सितंबर को भी रवाना हुई थी ट्रेन, दिसंबर में और संभावनाएं- इसी माह गंगासागर-पुरी यात्रा के लिए भी 13 तारीख को ट्रेन रवाना हुई थी, जिसमें आगरा, ग्वालियर, झांसी, कानपुर, लखनऊ और अयोध्या से बैठने की सुविधा थी। ये टूर भी नौ रात और 10 दिन का था। सर्दी के मौसम में बढ़ता है धार्मिक पर्यटन आइआरसीटीसी के अधिकारियों का कहना है कि सर्दी के मौसम में धार्मिक पर्यटन बढ़ता है। इसके अलावा लोग भी घूमने-फिरने में रुचि लेते हैं, क्योंकि इस मौसम में घूमने में लोगों को ज्यादा समस्या नहीं होती है। इसको देखते हुए दिसंबर माह में भी दो ट्रेनों के संचालन की संभावना है। आइआरसीटीसी की ओर से सितंबर माह में एक ट्रेन संचालित की गई थी। अक्टूबर माह में त्योहार होने के कारण फिलहाल ट्रेन नहीं है। नवंबर माह में दो ट्रेनें रवाना होंगी। दिसंबर में भी धार्मिक स्थलों के लिए ट्रेन संचालित होने की संभावना है। – अजीत सिन्हा, मुख्य क्षेत्रीय अधिकारी, आइआरसीटीसी

कुत्ता-बिल्ली के झगड़े ने पति-पत्नी के रिश्ते में पैदा की दरार, जानें पूरा मामला

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से एक हैरान कर देने वाला तलाक का मामला सामने आया है। यहां एक दंपति तलाक लेने की वजह सिर्फ यह बताई है कि दोनों को एक-दूसरे के पालतू जानवर पसंद नहीं हैं। आपको बता दें कि दंपति की शादी सिर्फ 8 महीने पहले 2024 में हुई थी। पति यूपी का रहने वाला है और पत्नी भोपाल की। दोनों की मुलाकात पालतू जानवरों के हित में आयोजित आंदोलन के दौरान हुई थी। शादी के समय दोनों ने यह तय किया था कि वे एक-दूसरे के पालतू की देखभाल में मदद करेंगे। पालतू जानवरों के कारण तलाक की अर्जी शादी के बाद विवाद तब शुरू हुआ जब पत्नी अपनी बिल्ली को साथ लाईं, जबकि पति के पास पहले से ही दो कुत्ते, मछली और खरगोश थे। महिला ने आरोप लगाते हुए कहा है कि पति के कुत्ते उसकी बिल्ली को डराते हैं और बार-बार भौंकते हैं, तो वहीं इन आरोपों पर पति का कहना है कि महिला की बिल्ली लगातार म्याऊं करती है और उसकी मछलियों को नुकसान पहुंचाती है। इन्हीं विवादों के कारण दोनों ने अलग रहने का निर्णय लिया और तलाक के लिए फैमिली कोर्ट का रुख किया। दोनों को समझाने का प्रयास जारी बता दें कि कोर्ट में काउंसलर शैल अवस्थी दोनों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे मतभेद भुलाकर रिश्ते को बचाएं. पहली काउंसलिंग में पति ने जिद की कि बिल्ली की वजह से वह अपने जानवरों के साथ अलग रहना चाहता है। पत्नी ने कहा कि वह अपनी बिल्ली को उदास नहीं देख सकती। अगली काउंसलिंग दशहरा के बाद होगी, जिसमें फिर से दोनों को समझाने की कोशिश होगी।  

लाइन में लगने से छुटकारा! 2 मिनट में बनेगा तत्काल टिकट

रायबरेली उत्तर प्रदेश के रायबरेली रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा को देखते हुए इंटरनेट की स्पीड बढ़ाई जाएगी। यह फैसला तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान नेटवर्क की धीमी गति की समस्या को दूर करने के लिए लिया गया है, जहां ज्यादा स्पीड वाला एमपीएस सिस्टम स्थापित किया जाएगा। वर्तमान में स्टेशन पर 100 एमबीपीएस की इंटरनेट स्पीड उपलब्ध है, लेकिन तत्काल टिकट बुकिंग के लिए यह पर्याप्त नहीं होती है। स्पीड बढ़ने की वजह से रिजर्वेशन प्रक्रिया आसान होगी और काउंटरों पर लगने वाली भीड़ भी कम होगी। रेलटेल कंपनी इस सुविधा को अन्य स्टेशनों पर भी उपलब्ध कराएगी।   आम थीं नेटवर्क स्लो होने की शिकायतें बता दें कि तत्काल टिकट बुकिंग के समय नेटवर्क स्लो होने की शिकायतें आम थीं। एसी कोच के लिए सुबह 10 से 10:30 बजे और स्लीपर क्लास के लिए 11 से 11:30 बजे तक टिकट बुकिंग होती है। लेकिन धीमे नेटवर्क की वजह से कई बार एक टिकट बनाने में 15 से 20 मिनट तक का समय लग जाता था। ऐसे में काउंटरों पर खड़े यात्रियों को टिकट समय पर नहीं मिल पाते थे। दो रिजर्वेशन काउंटरों पर तो कमजोर नेटवर्क के चलते एक समय में केवल दो से पांच टिकट ही बन पाते थे। एक-दो मिनट में बन जाएगा टिकट अब रेलवे अधिकारियों ने उच्च क्षमता वाला नेटवर्क सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके बाद टिकट बनाने का समय घटकर केवल एक से दो मिनट रह जाएगा। इससे अधिक यात्री समय पर टिकट ले सकेंगे और काउंटरों पर भीड़ भी घटेगी। यात्री कमलकिशोर ने कहा कि नवरात्र और त्योहारी सीजन को देखते हुए विभाग का यह कदम बेहद सराहनीय है। चूंकि स्टेशन से 35 से अधिक जोड़ी ट्रेनों का संचालन होता है, इसलिए बड़ी संख्या में यात्रियों का आवागमन होता है। सीनियर सेक्शन इंजीनियर (टेलीकॉम) संदीप सोनकर के अनुसार, रेलटेल कंपनी द्वारा रायबरेली, बछरावां, ऊंचाहार, डलमऊ और लालगंज स्टेशनों पर यह नया सिस्टम लगाया जाएगा। इसके बाद इसे अन्य स्टेशनों पर भी लागू किया जाएगा।

जोश और संकल्प की दौड़: मैराथन में झलकती हमारी युवा शक्ति

चंडीगढ़ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को कुरुक्षेत्र के द्रोणाचार्य खेल स्टेडियम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित 'नमो युवा रन' मैराथन को झंडी दिखाकर रवाना किया और स्वयं भी युवाओं के साथ मैराथन में हिस्सा लिया। इस मौके पर युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की यह मैराथन हमारी युवा शक्ति की ऊर्जा, जोश और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का प्रतीक है। कौशल विकास और औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग की यह पहल युवाओं के भविष्य को उज्जवल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यह रन केवल 5 किलोमीटर की नहीं, बल्कि देश की तरक्की की दौड़ है जो हर युवा के मन में समर्पण, धैर्य और मेहनत की भावना को जगाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने युवाओं के स्वाभिमान और उनकी योग्यता का सम्मान किया है। योग्यता के आधार पर बिना खर्ची-बिना पर्ची के 1 लाख 80 हजार युवाओं को सरकारी नौकरियां दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे अवसर न केवल हमें एक साथ जोड़ते है, बल्कि हमें एक महान प्रेरणा भी देता है। प्रधानमंत्री की अद्भुत नेतृत्व क्षमता, दूरदर्शिता और देश के प्रति अटूट समर्पण ने हमें एक नए भारत का सपना दिखाया है। हमें उस सपने को साकार करने की प्रेरणा दी है। प्रधानमंत्री ने हमारे सामने 'विकसित भारत' का विजन रखा है। ऐसा विजन जहां हर नागरिक सशक्त हो, जहां हर युवा की रोजगार मिले और जहां हमारी अर्थव्यवस्था विश्व के सामने अपने कदम मजबूती से बढ़ा सके। उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में, 'मेक इन इंडिया', 'लोकल फॉर वोकल', 'डिजिटल इंडिया', 'स्टार्टअप इंडिया' और 'स्किल इंडिया' जैसी पहले देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं। चाहे कोई भी क्षेत्र हो, जब हम एकजुट होकर देश के विकास के लिए काम करते हैं, तभी हमारा राष्ट्र वास्तव में विकसित बनता है। कौशल विकास और युवा सशक्तिकरण भी इसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि युवा अपने स्वास्थ्य और फिटनेस के साथ अपने कौशल विकास पर भी ध्यान दें। हमें 'विकसित भारत-विकसित हरियाणा' के विजन को साकार करने के लिए मिलकर काम करना है। नायब सिंह सैनी ने कहा कि हमारा देश युवा शक्ति का देश है। हमारी सबसे बड़ी संपत्ति हमारे युवा हैं। प्रधानमंत्री ने भी बार-बार युवाओं को आगे आने, कौशल सीखने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया है। आज युवाओं के लिए अवसरों के नये क्षितिज खुल रहे हैं। हमारी सरकार इसके लिए पूरी ताकत के साथ काम कर रही है। स्किल युवाओं की सबसे बड़ी ताकत है। लगातार स्किल में बदलाव करना और कुछ नया सीखना समय की मांग है। आपकी क्षमता ही आपको दूसरों से अलग बनाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा में युवाओं को आधुनिक रोजगारपरक विषयों का शिक्षण व प्रशिक्षण उपलब्ध करवाने के लिए पलवल में श्री विश्वकर्मा कौशल विकास विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी है। 'हरियाणा कौशल विकास मिशन' के तहत 1 लाख 10 हजार युवाओं को कौशल प्रदान किया है, ताकि वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें। उन्होंने कहा कि कौशल प्राप्त युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए उद्योगों को बढ़ावा देना बहुत जरूरी है। इसलिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को गति देने के लिए राज्य में अलग से 'एम.एस.एम.ई. विभाग' का गठन किया है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप और अनुसंधान के लिए भारत दुनियाभर में एक केन्द्र के रूप में उभर रहा है। हरियाणा में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए 'नई स्टार्टअप नीति' बनाई है। इस नीति के तहत युवाओं को आर्थिक व तकनीकी सहायता देकर उन्हें अपना स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में 9 हजार 500 युवा स्टार्टअप स्थापित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया एक ग्लोबल विलेज में बदल गई है। इस समय विदेशों में रोजगार तलाश करने वाले युवाओं की संख्या काफी अधिक है, लेकिन ये युवा कई बार विदेश भेजने का झांसा देने वाले जालसाजों के जाल में फंस जाते हैं। हमने उन्हें विदेशों में शिक्षा व रोजगार दिलाने के लिए 'विदेश सहयोग विभाग' बनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की खेलों में उपलब्धियों का जिक्र होते ही हमारा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। हरियाणा के खिलाड़ियों ने ओलंपिक, कॉमनवेल्थ, एशियाई खेलों और अन्य अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी शारीरिक दक्षता और मानसिक दृढ़ता का लोहा मनवाया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के खिलाड़ियों ने पेरिस ओलंपिक में देश को मिले 6 में से 4 पदक जीतकर हमें गौरवान्वित किया है। कांस्य पदक जीतने वाली हॉकी टीम में भी हरियाणा के 3 खिलाड़ी हैं। मैडल जीतने वाले खिलाड़ियों को 6 करोड़ रुपये तक नकद पुरस्कार देने के साथ-साथ सरकारी नौकरियां भी दी जा रही हैं। अवार्ड पाने वाले खिलाड़ियों को मासिक मानदेय भी दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है। लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी जितनी अधिक होगी, देश व प्रदेश का भविष्य उतना ही उज्ज्वल होगा। इसलिए हमारे युवाओं को राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, ताकि देश को आधुनिक सोच का नया नेतृत्व मिले। राजनीति में आपकी भागीदारी वंशवाद और परिवारवाद की राजनीति को समाप्त कर देगी। 

कारीगरों की मेहनत से सारंगपुर बन रहा है स्वदेशी शक्ति केंद्र : मंत्री टेटवाल

हथकरघा और शिल्पकला से प्रदेश को मिलेगी वैश्विक पहचान भोपाल  कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री( स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए लोकल फ़ॉर वोकल के संदेश ने न केवल देश में स्वदेशी वस्तुओं की खपत को बढ़ाया है, बल्कि उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का मार्ग भी प्रशस्त किया है। इसी दिशा में राजगढ़ जिले के सारंगपुर जैसे कस्बे अपने हुनर और कारीगरी के माध्यम से लगातार प्रगति कर रहे हैं और प्रदेश को समर्थ बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। मंत्री श्री टेटवाल ने सारंगपुर विधानसभा के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण किया और वार्डों में कुटीर उद्योग से जुड़े कारीगरों, बुनकरों और व्यापारियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि सारंगपुर की शिल्पकला और हस्तनिर्मित वस्तुएं आने वाले समय में इस क्षेत्र को वैश्विक पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाएंगी। मंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि सारंगपुर हथकरघा और बुनकरों के कार्यों में निरंतर आगे बढ़ रहा है। यहां तैयार की जा रही सिल्क की साड़ियां पहले से ही कई स्थानों पर प्रसिद्ध हैं। इसी प्रकार ताड़ से बनाई जा रही चटाइयां और अन्य उपयोगी वस्तुएं की भी लोगों के बीच बड़ी मांग हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सारंगपुर के कारीगरों की मेहनत से यहां की पारंपरिक कला और उत्पाद न केवल देश के बाजारों में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी विशेष पहचान बनाएंगे। वोकल फॉर लोकल को जनआंदोलन बनाने की अपील मंत्री श्री टेटवाल ने कारीगरों और व्यापारियों से अपील की कि वे स्वदेशी उत्पादों के निर्माण और उपयोग को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि यदि हम सभी लोकल उत्पादों का अधिक से अधिक इस्तेमाल करेंगे तो इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि प्रदेश और देश की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी। मंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का जो अभियान चलाया जा रहा है, वह तभी सफल होगा जब प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझकर इसमें भागीदार बनेगा। सारंगपुर के कारीगरों का हुनर और समर्पण इस दिशा में एक प्रेरक उदाहरण है, जो यह दर्शाता है कि कैसे एक छोटा सा कस्बा भी लोकल से ग्लोबल पहचान बना सकता है।  

मोदी जन्मदिन पर हरियाणा के कलाकार की अनोखी भेंट, बनाई दुनिया की सबसे खास तस्वीर

जींद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिवस के अवसर पर राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर विकसित भारत के रंग, कला के संग एक अद्वितीय और ऐतिहासिक आयोजन हुआ। इस अवसर पर देशभर से आए नामचीन चित्रकारों ने अपने रंगों और कल्पनाओं से विकसित भारत की जीवंत झलक प्रस्तुत की। यह पेंटिंग विश्व की 10 हजार मीटर सबसे लंबी पेंटिंग का रिकॉर्ड बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है। इस भव्य आयोजन का संयुक्त संचालन त्रिवेणी कला संगम और दिल्ली नगर निगम ने किया। कार्यक्रम का उद्घाटन दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने किया। इस मौके पर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी उपस्थित होकर खुले मन से सोल एंड स्पीरिट आर्ट सोसाइटी के चित्रकारों की प्रशंसा की। उन्होंने विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चित्र की सराहना करते हुए कहा कि कलाकारों ने अपने ब्रश और रंगों से बदलते भारत की ऐसी अनूठी तस्वीर उकेरी है, जो आने वाली पीढिय़ों को सदैव प्रेरित करेगी।  साथ ही कार्यक्रम में हर्षवर्धन शर्मा एडवाइजर, आर्ट एंड कल्चर नई दिल्ली नगर निगम ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति से आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सोल एंड स्पीरिट आर्ट सोसाइटी से जुड़े हरियाणा, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़ और दिल्ली के कलाकारों ने अपनी रचनात्मकता और समर्पण से इस ऐतिहासिक पेंटिंग को आकार दिया। शनिवार को जानकारी देते हुए समिति के अध्यक्ष दीपक कौशिक ने कहा यह आयोजन कलाकारों के लिए किसी कला महाकुंभ से कम नही है। यह केवल एक चित्र नही बल्कि भारत की आत्मा, संस्कृति और उपलब्धियों का दस्तावेज है। पेंटिंग में अयोध्या का राम मंदिर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चित्र, भारतीय कला और संस्कृति, प्राचीन मंदिर स्थापत्य, विज्ञान व रक्षा क्षेत्र की उपलब्धियां, मेक इन इंडिया, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ,  विदेशों में भारत का बढ़ता सम्मान और ऑपरेशन सिंदूर जैसी ऐतिहासिक झलकियाँ दर्शाई गई। इस कार्यशाला में प्रमुख रूप से नवीन मरीचि,  प्रदीप कुमार (मूर्तिकार), अमित, विकास रोहिल्ला, मोहित बब्बर,  राजकुमार, जयश्री, सुमित, डॉ. आदेश खेरीवाल, डॉ. राहुल राठौर, हिमांशु पांचाल, नितिन, सुरेश पांचाल,  निरजा, पूनम, शिवांगी अग्रवाल सहित अनेक कलाकारों ने भाग लिया और कैनवास पर बदलते भारत की नई तस्वीर उकेरी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पेंटिंग केवल एक कला आयोजन नही बल्कि भारत की विकास यात्रा का रंगीन और सजीव दस्तावेज होगी।