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ग्रामसभा का सख्त निर्णय: देवनाला रैयत गांव में शराब बनाने या बेचने पर भारी जुर्माना

पांढुर्णा  तहसील के देवनाला रैयत गांव ने नशा मुक्ति के लिए बड़ा कदम उठाया है। रविवार को हुई ग्रामसभा में गांव के सभी लोगों ने सर्वसम्मति से शराब निर्माण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया। साथ ही इसका उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माने का प्रावधान भी तय किया गया। ग्रामसभा में लिया गया कड़ा निर्णय ग्रामसभा में तय हुआ कि गांव में यदि कोई व्यक्ति शराब बनाएगा या बेचेगा तो उस पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, नशे की हालत में किसी भी व्यक्ति का अपमान करने पर 505 रुपए अर्थदंड भरना होगा। यह निर्णय गांव को नशामुक्त बनाने और सामाजिक समरसता कायम करने के उद्देश्य से लिया गया। ग्रामीणों ने खुद की पहल निर्णय के बाद ग्रामीणों ने एकजुट होकर गांव के आसपास नाले और जंगलों में बने अवैध कच्ची शराब के ठिकानों को खुद ही ध्वस्त कर दिया। इस दौरान गांव के दिनेश उईके, देवराम भलावी, अनिल मर्सकोले, देवीलाल तुमदाम, पूनाजी तड़ाम, सम्पिलाल उईके, गणेश उईके सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने एकमत से संकल्प लिया कि अब गांव में किसी भी प्रकार का नशे का कारोबार नहीं होने दिया जाएगा। पुलिस ने की पहल की सराहना थाना प्रभारी अजय मरकाम ने देवनाला रैयत के इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह निर्णय समाज में जागरूकता और अनुशासन का उदाहरण है। गांव की इस पहल से क्षेत्र के अन्य गांवों को भी प्रेरणा मिलेगी। थाना प्रभारी ने भरोसा दिलाया कि किसी भी समस्या या चुनौती की स्थिति में पुलिस गांव का पूरा सहयोग करेगी। सामाजिक दृष्टि से ऐतिहासिक कदम गांव के बुजुर्गों का कहना है कि नशे ने कई परिवारों को बर्बाद किया है। युवा पीढ़ी गलत राह पर जा रही थी। अब इस प्रतिबंध से गांव में माहौल सुधरेगा और बच्चों का भविष्य सुरक्षित होगा। ग्रामीण महिलाएं भी इस फैसले से काफी खुश हैं। उनका कहना है कि अब घरों में झगड़े और कलह की स्थिति खत्म होगी।  

PM मोदी ने किया PM Mitra Park का शिलान्यास, देशभर की महिलाओं के लिए सशक्त नारी अभियान की सौगात

धार  मध्यप्रदेश के दौरे पर आ रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की महिलाओं और परिवारों को स्वास्थ्य समृद्धि का मंत्र दे सकते हैं। सबकुछ ठीक रहा तो प्रधानमंत्री मध्यप्रदेश से 'सशक्त नारी, समृद्ध अभियान' को हरी झंडी देंगे। लक्ष्य महिलाओं की सेहत की चिंता करना, उनके लिए शारीरिक आहार व पोषण व्यवस्था को मजबूत बनाना और समग्र देखभाल को मजबूत करना होगा, ताकि महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से लड़ने में सक्षम बनाया जा सके। जब महिलाएं स्वस्थ रहेंगी तो स्वाभाविक है कि बच्चे भी तंदुरुस्त होंगे। जब जच्चा-बच्चा दोनों अच्छे होंगे तो आधी से अधिक परेशानियां तो वैसे ही खत्म हो जाएंगी। इस तरह लाखों परिवार संकट से बाहर रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने आगामी मध्यप्रदेश दौरे पर महिलाओं और परिवारों को स्वास्थ्य समृद्धि का मंत्र देने वाले हैं। चर्चा है कि वे यहां से ‘सशक्त नारी, समृद्ध अभियान’ की शुरुआत करेंगे। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं की शारीरिक सेहत, आहार और पोषण व्यवस्था को मजबूत करना है, ताकि वे स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर सकें। जब महिलाएं स्वस्थ होंगी तो बच्चों का विकास भी बेहतर होगा और लाखों परिवारों की परेशानियां कम हो जाएंगी। जच्चा-बच्चा की सेहत में सुधार अपने आप में समाज की मजबूती का आधार बनेगा। पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास भी होगा प्रधानमंत्री मोदी का दौरा 17 सितंबर को प्रस्तावित है। कार्यक्रम की जगह धार जिले के बदनावर को माना जा रहा है। यहीं से वे देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास करेंगे। यह पार्क टेक्सटाइल क्षेत्र में रोजगार और निवेश की नई संभावनाओं को जन्म देगा। खास बात यह है कि यह भारत में बनने वाला पहला ऐसा पार्क होगा जो सबसे पहले तैयार भी होगा। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार और प्रदेश को औद्योगिक बढ़त मिलेगी। पहले भी मध्यप्रदेश से मिले हैं बड़े तोहफे यह पहला मौका नहीं है जब प्रधानमंत्री मोदी मध्यप्रदेश से कोई बड़ा अभियान शुरू करने जा रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने कई राष्ट्रीय कार्यक्रम यहीं से लॉन्च किए थे। उदाहरण के तौर पर, सिकलसेल एनीमिया उन्मूलन अभियान, किसानों के लिए फसल बीमा योजना की सौगात, महिलाओं को सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर, छोटे व्यापारियों के लिए स्वनिधि योजना और नदी जोड़ो अभियान की शुरुआत मध्यप्रदेश की धरती से हुई थी। इन पहलों ने देशभर के लोगों को सीधा लाभ पहुंचाया। महिला सशक्तिकरण के लिए विशेष आह्वान भोपाल के जंबूरी मैदान से प्रधानमंत्री मोदी पहले भी महिलाओं के सर्वांगीण सशक्तिकरण का संदेश दे चुके हैं। यह आयोजन देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर हुआ था। उस समय भी उन्होंने महिलाओं की भूमिका और उनकी ताकत को देश की प्रगति से जोड़ा था। अब एक बार फिर मध्यप्रदेश से नया अभियान शुरू करके वे महिलाओं की सेहत और परिवारों की मजबूती पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इन अभियानों, कार्यक्रमों को दे चुके हरी झंडी मोदी देश को मध्यप्रदेश से पहले भी कई सौगात दे चुके हैं। उन्होंने सिकलसेल एनीमिया के खात्मे की शुरुआत का आह्वान यहीं से किया था। किसानों को फसल बीमा की सौगात, महिलाओं को सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों का तोहफा, स्वनिधि का पहला कार्यक्रम और नदी जोड़ो अभियान की नींव भी इसी धरती से रखी थी। भोपाल के जंबूरी मैदान से मोदी देशभर की महिलाओं को हर दृष्टि से सशक्त बनाने का आह्वान कर चुके हैं। आयोजन देवी अहिल्या बाई की 300वीं जयंती पर किया गया था।

हाई-सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं, MP में लाखों वाहन जोखिम में, फिसड्डी राज्यों की सूची में चौथा

भोपाल  कहने को तो भोपाल प्रदेश की राजधानी है, लेकिन यहां पर नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। भोपाल में पिछले 15 साल में करीब 19 लाख गाड़ियां रजिस्टर्ड हुई हैं, लेकिन अब तक करीब 5 लाख में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) नहीं लग पाया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद विभाग ने इस अभियान को प्राथमिकता में रखते हुए 3 महीने में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। लेकिन लगता नहीं कि यह पूरा हो पाएगा। इस मामले में परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना एचएसआरपी नंबर प्लेट वाले वाहन मालिक अब कोई भी परिवहन संबंधी महत्वपूर्ण कार्य नहीं करा पाएंगे। जिन वाहनों में यह नंबर प्लेट नहीं लगी है उनके पीयूसी, फिटनेस सर्टिफिकेट, आरसी बदलाव, परमिट नवीनीकरण और अन्य सेवाएं ठप हो जाएंगी। यह प्रक्रिया आसान है और ऑनलाइन बुकिंग के बाद तय समय पर नंबर प्लेट लगाई जा सकती है। वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) को लेकर परिवहन विभाग और पुलिस महकमा लगातार प्रयासरत है। लेकिन मप्र के वाहन मालिक हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट लगवाने को राजी नहीं हैं। मध्यप्रदेश में कुल 2.45 करोड़ से अधिक पंजीकृत वाहन हैं, जिनमें से केवल 65.72 लाख वाहनों पर HSRP लगी है। यानी प्रदेश के 1.79 करोड़ से अधिक वाहन (73.24%) अब भी बिना सुरक्षा नंबर प्लेट के सड़क पर दौड़ रहे हैं। सबसे फिसड्डी राज्यों में एमपी चौथे नंबर पर देश में HSRP न लगवा पाने वाले राज्यों में मप्र देश के सबसे फिसड्‌डी राज्यों में चौथे नंबर का प्रदेश है। HSRP लगवाने वाले टॉप स्टेट में जम्मू कश्मीर पहले नंबर पर है। J&K में मात्र 6.63% वाहन ऐसे हैं जिन पर HSRP लगना बाकी है। हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट लगाने में अव्वल राज्यों में टॉप-5 में शामिल है। ये जानकारी लोकसभा में AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी के सवाल के जवाब में दी गई है। एचएसआरपी क्यों जरूरी है परिवहन विभाग का कहना है कि एचएसआरपी नंबर प्लेट हाई-क्वालिटी, टेम्पर-प्रूफ होती है और इसमें एक यूनिक लेजर-कोड होता है, जिससे चोरी या फर्जी नंबर प्लेट लगाने जैसी घटनाओं पर रोक लगती है। साथ ही यह सड़क पर लगे कैमरों से वाहन की सही पहचान में मदद करती है, जिससे ट्रैफिक नियमों का पालन और अपराध नियंत्रण आसान हो जाता है। क्या है हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट? यह एक होलोग्राम स्टिकर है। इस पर वाहन के चेसिस और इंजन के नंबर दर्ज होते हैं। इस खास तरह के स्टिकर को वाहन की नंबर प्लेट पर चिपकाया जाता है। प्लेट पर नंबर उभारकर बनाए जाते हैं, ताकि कोई उनमें छेड़छाड़ न करने पाए। इस पूरी प्लेट को वाहनों की सुरक्षा के लिहाज से तैयार किया गया है। एक बार प्लेट वाहन में फिट हो जाए तो उसे निकालना भी आसान नहीं हो पाता। HSRP नंबर को प्रेशर मशीन की मदद से लिखा जाता है। इस नंबर से वाहन की पूरी कुंडली सामने आ सकती है। राज्य कुल रजिस्टर्ड वाहन HSRP लगे वाहन HSRP बाकी HSRP बाकी% लक्षद्वीप 21497 508 20989 97.64% आंध्र प्रदेश 18486709 2071421 16415288 88.80% केरल 18502182 4709555 13792627 74.55% मध्य प्रदेश 24556837 6572040 17984797 73.24% अंडमान निकोबार द्वीप समूह 178660 50846 127814 71.54%   कैसे करता है काम ? एचएसआरपी नंबर प्लेट एक होलोग्राम स्टिकर है। इस पर वाहन के चेसिस और इंजन के नंबर दर्ज होते हैं। इस खास तरह के स्टिकर को वाहन की नंबर प्लेट पर चिपकाया जाता है। प्लेट पर नंबर उभारकर बनाए जाते हैं, ताकि कोई उनमें छेड़छाड़ न करने पाए। इस पूरी प्लेट को वाहनों की सुरक्षा के लिहाज से तैयार किया गया है। एक बार प्लेट वाहन में फिट हो जाए तो उसे निकालना भी आसान नहीं हो पाता। इसमें HSRP नंबर को प्रेशर मशीन की मदद से लिखा जाता है। इस नंबर से वाहन की पूरी जानकारी सामने आ जाती है। ऐसे करें आवेदन     सबसे पहले ऑटोमोबाइल डीलर्स की संस्था SIAM की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।     “Book HSRP” ऑप्शन पर क्लिक करें, जिससे एचएसआरपी रजिस्ट्रेशन फॉर्म खुलेगा।     फॉर्म में अपना पूरा नाम, ईमेल एड्रेस, स्टेट (मध्य प्रदेश), व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर, मोबाइल नंबर और डिस्ट्रिक्ट भरें।     “I Agree” पर टिक करें और सबमिट करें।     इसके बाद “Select Your Vehicle Type” में अपनी गाड़ी का प्रकार चुनें (जैसे कार/SUV)।     वाहन निर्माता कंपनी (जैसे Tata Motors) चुनें और “Order Your HSRP Now” पर क्लिक करें।     “Fitment Location” में “Dealer Premises” सेलेक्ट करें।     “HSRP Order Type” में “Old Vehicle HSRP Kit” चुनें।     व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर, चेसिस नंबर के आखिरी 5 डिजिट और इंजन नंबर के आखिरी 5 डिजिट भरें।     सिटी और नजदीकी डीलर चुनें।     अपॉइंटमेंट डेट और स्लॉट सेलेक्ट करें।     बिलिंग एड्रेस भरें, मोबाइल नंबर वेरीफाई करें और ऑनलाइन पेमेंट करें।     पेमेंट के बाद तय तारीख पर डीलर के पास जाकर नंबर प्लेट फिट कराएं।     एचएसआरपी की कुल लागत ₹696.20 है (₹540 प्लेट लागत + ₹50 सुविधा शुल्क + ₹16 GST)। भोपाल में 18.5 लाख वाहन रजिस्टर्ड भोपाल जिले में इस वक्त 18.5 लाख वाहन रजिस्टर्ड हैं जिनमें से 40 प्रतिशत के पास अभी भी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं है। ऐसे वाहन मालिक फिलहाल घर बैठे ही सुविधाओं को अपडेट करवा सकते हैं। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (High Security Number Plate) मंगवाने और मोबाइल नंबर को अपडेट करने के लिए आरटीओ के वाहन पोर्टल या सारथी एप के जरिए आवेदन किए जा सकेंगे। ओटीपी के आधार पर मोबाइल नंबर गाड़ी की डिटेल्स के साथ लिंक हो जाएगा। एचएसआरपी नंबर प्लेट नजदीकी डीलर के यहां से फिट करवा सकेंगे। मध्यप्रदेश में 15 साल पुराने वाहन कार-88,529 मोपेड – 20,162 जीप – 21,607 ट्रैक्टर -74,794 आटो रिक्शा – 46,999 गुड्स ट्रक -72, 502 बस – 14,813 टैक्सी -1,098 बाइक -2,08054 स्कूटर -76,188 इसलिए जरूरी मोबाइल नंबर ये मुहिम इसलिए चलाई जा रही है क्योंकि बड़े पैमाने पर व्हीकल रजिस्ट्रेशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस कार्ड में दर्ज नंबर में भिन्नता पाई जा रही थी। ऐसी स्थिति में किसी भी गाड़ी को किसी भी अन्य व्यक्ति के नाम ट्रांसफर आसानी से करवाया जा सकता था। कई ऐसे … Read more

मध्यप्रदेश सरकार की तैयारी, किरायेदारों के अधिकारों को सुरक्षित करेगा नया कानून

भोपाल   किरायेदार और मकान मालिक दोनों को सुरक्षित करने के लिए सरकार मॉडल किराएदारी बिल (Model Tenancy Bill) लागू करने जा रही है। बिल को अंतिम रूप देने के लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने फिर कवायद शुरू की है। विभाग ने संचालनालय से प्रदेश में बनाए बिल के ड्राफ्ट, लागू कानून और केंद्र के मॉडल किराएदारी एक्ट की तुलनात्मक रिपोर्ट मांगी है। नए कानून के ड्राफ्ट में किराएदार और मकान मालिक दोनों के हितों की रक्षा की व्यवस्था है। मकान पर कब्जा होने से रोकने के प्रावधान हैं। एग्रीमेंट खत्म होने पर किराएदार के मकान खाली न करने पर उसे पहले दो माह में दोगुना और तीसरे महीने से चार गुना किराया देना होगा। मकान भी प्रशासन खाली कराएगा। किराएदार की सुरक्षा के लिए मालिक द्वारा घर का नल कनेक्शन, गैस सप्लाई, मार्ग, लिफ्ट, सीढिय़ां, पार्किंग आदि बंद करने पाबंदी लगाई गई है। नगरीय विकास विभाग मॉडल किराएदारी बिल को दे रहा अंतिम रूप नगरीय विकास विभाग मॉडल किराएदारी बिल को अंतिम रूप देने के लिए बैठकें कर रहा है। अफसरों का कहना है, बिल जल्द वरिष्ठ सचिव समिति के पास भेजा जाएगा। वहां से अनुमति के बाद कैबिनेट में पेश होगा। बता दें, अभी प्रदेश में किराएदारी अधिनियम 2010 लागू है। यह सिर्फ शहरी क्षेत्रों तक सीमित है। नया एक्ट ग्रामीण-शहरी, व्यावसायिक सभी प्रॉपर्टी पर लागू होगा। शासकीय, धार्मिक संस्थान, ट्रस्ट या वक्फ बोर्ड के अधीन परिसरों पर लागू नहीं होगा। विवाद सुलझाने कोर्ट जाने की जरूरत नहीं -नए नियमों के तहत किराएदारी विवाद सुलझाने कोर्ट नहीं जाना होगा। – जिले में किराया प्राधिकारी डिप्टी कलेक्टर स्तर के अफसर होंगे। किराया अतिरिक्त कलेक्टर कोर्ट होगा। – अपील के लिए जिला जज की अध्यक्षता में रेंट ट्रिब्यूनल गठित होगा। – किराएदारी की पूरी जानकारी रखने के लिए अलग पोर्टल बनेगा। – मकान मालिक और किराएदार के बीच के एग्रीमेंट की सूचना किराया प्राधिकारी को 60 दिन में देनी होगी। – प्राधिकारी इसे पोर्टल पर अपलोड करेंगे। किराया वृद्धि या मकान खाली करने जैसी सूचना यहीं अपडेट होंगी। विवाद घटेंगे, भरोसा बढ़ेगा मध्यप्रदेश में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 27.7 फीसदी आबादी शहरों में रहती है। यह 40 फीसदी पहुंचने का अनुमान है। लोग बड़ी संख्या में पढ़ाई, नौकरी, व्यापार, बेहतर सुविधा के लिए शहरों में आ रहे हैं। कई लोग किराएदारों के विवाद से बचने के लिए खाली आवास होने के बावजूद किराए पर नहीं देते। लोग अपने कार्यस्थल के पास ही अफॉर्डेबल राशि का भुगतान कर किराए पर आवास लेना चाहते हैं। कई बार मकान मालिक मनमाना किराया मांगते हैं। अभी कानून (Model Tenancy Bill) में इसके प्रावधान नहीं हैं। नए कानून में मकान मालिक अधिकतम दो माह का एडवांस किराया ही ले सकेंगे। मनमानी पर रोक, क्षेत्र के हिसाब से किराया नए एक्ट में जहां मकान मालिक के हितों की रक्षा करने के लिए नए प्रावधान किए गए हैं. वहीं किराए पर दी जाने वाली संपत्तियों पर मनमानी किराया वसूलने से भी रोक लगाई गई है. इसमें क्षेत्र के आधार पर किराया तय किया जाएगा. जिससे किराएदारों को भी राहत मिलेगी और उन्हें मुंहमांगा किराया नहीं चुकाना पड़ेगा. वर्तमान में शहरों में संपत्ति कर के लिए अलग-अलग स्लैब हैं, इसी आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों पर किराए की दर भी निर्धारित की जाएगी. अतिरिक्त निर्माण पर रोक, क्षतिपूर्ति देनी होगी एमटीए के तहत अब किराएदार संबंधित संपत्ति में अतिरिक्त निर्माण नहीं करा सकेगा. यदि वह ऐसा कराता है, तो उसके साथ बेदखली की कार्रवाई भी की जा सकेगी. इसके साथ उसके द्वारा किराए के लिए जमा की गई एडवांस राशि में से ही अतिरिक्त निर्माण को हटाने के साथ मकान को व्यवस्थित किया जाएगा. मकान या दुकान में टूट-फूट होने पर भी यही प्रावधान लागू होंगे. यानि क्षतिपूर्ति किराएदार को चुकानी होगी. एमटीए में एजेंट को मिलेगा कानूनी दर्जा मकान मालिक और किराएदारों के बीच में बड़ा रोल एजेंटो का भी होता है, लेकिन अब तक इनको एक्ट में नहीं लिया गया था, लेकिन नए मॉडल टेनेंसी एक्ट में एजेंटों को भी एक्ट के दायरे में लाया गया है. इनको हर साल अपना पंजीयन कराना होगा. एजेंट संबंधित जिले में कलेक्टर कार्यालय में जाकर अपना पंजीयन करा सकेंगे. इसके लिए एजेंटो को मामूली शुल्क भी चुकाना होगा. ऐसे में अब एजेंटो को भी कानूनी दर्जा मिलेगा. ट्रिब्यूनल के बाद ही सिविल कोर्ट में होगी सुनवाई बता दें कि नए एक्ट के तहत मकान मालिक और किराएदार के बीच आपसी विवाद निपटाने के लिए किराया प्राधिकरण का गठन किया जाएगा. इसकी अध्यक्षता अपर कलेक्टर स्तर के अधिकारी करेंगे. वहीं अलग से एक रेंट कोर्ट भी होगी, जिसमें अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट मामले की सुनवाई करेंगे. इसी प्रकार रेंट ट्रिब्यूनल का गठन किया जाएगा. जिसमें अतिरिक्त जिला न्यायाधीश या जिला न्यायाधीश सुनवाई करेंगे. वहीं रेंट ट्रिब्यूनल में विवाद नहीं सुलझ पाने के बाद ही इसकी सुनवाई सिविल कोर्ट में होगी. ग्रामीण क्षेत्रों की संपत्तियां भी एक्ट के दायरे में साल 2010 में जो किराएदारी का एक्ट बना था. उसमें केवल शहरी क्षेत्रों को लिया गया था, यानि ग्रामीण क्षेत्रों में यह कानून लागू नहीं होता था. लेकिन अब नया कानून शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लागू होगा. खास बात यह है कि अब तक दूतावास, बहु राष्ट्रीय कंपनियां, आयोग और अंतराष्ट्रीय संगठन समेत कुछ संस्थाओं को इस एक्ट से छूट थी, लेकिन अब नए किराएदारी के एक्ट में इन सबको अधिनियम के तहत प्रावधानों का पालन करना होगा. अन्यथा इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. विवाद निपटाने के लिए न्यायालय और ट्रिब्यूनल का गठन नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मध्य प्रदेश में अब तक किराएदारी अधिनियम 2010 का पालन किया जा रहा है. लेकिन इसमें कई विसंगतियां है. ऐसे में अब नए एक्ट एमटीए बनाया गया है. इस एक्ट में कई बातें स्पष्ट हैं, जिससे मकान मालिक और किराएदार के बीच बार-बार विवाद की नौबत नहीं बनेगी. वहीं यदि ऐसा हुआ तो इसके लिए भी एक्ट में न्यायालय और ट्रिब्यूनल का प्रावधान है. यानि कि एक्ट के लागू होते ही मध्य प्रदेश में किराएदारी के विवाद निपटाने के लिए न्यायालय या ट्रिब्यूनल की स्थापना की जाएगी. विधानसभा सत्र में रखा जाएगा मॉडल टेनेंसी एक्ट नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने … Read more

MP में सड़क हादसों की स्थिति चिंताजनक, सावधानी के साथ चलें: आंकड़े बताते गंभीर स्थिति

भोपाल   केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने देशभर में वर्ष 2023 में हुए सड़क हादसों की विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। अगस्त के अंतिम हफ्ते में जारी इस रिपोर्ट से मध्य प्रदेश में सड़कों की बदहाली और सड़क सुरक्षा व्यवस्था की बदइंतजामी खुलकर सामने आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, उक्त अवधि में देश में सबसे ज्यादा सड़क हादसों में तमिल नाडु के बाद मध्य प्रदेश दूसरे नंबर पर रहा। हादसों में सबसे ज्यादा मौत उत्तर प्रदेश और तमिल नाडु में हुईं, जबकि मध्य प्रदेश चौथे नंबर पर रहा। इतना ही नहीं, देश में तेज रफ्तार की वजह से हुए हादसों में मध्य प्रदेश पहले स्थान पर रहा। रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में पूरे देश में चार लाख 80 हजार 583 सड़क हादसे हुए। इनसे एक लाख 72 हजार 890 लोगों की मौत हुई और चार लाख 62 हजार 825 लोग घायल हुए। देश में हुए कुल हादसों में से 14 प्रतिशत हादसे तमिल नाडु, 11.5 प्रतिशत मध्य प्रदेश, 10 प्रतिशत केरल, 9.39 प्रतिशत उप्र और 9 प्रतिशत हादसे कनार्टक में हुए। देश में यही पांच राज्य टाप-फाइव की सूची में शामिल हैं। टाप-पांच राज्य : कहां कितने हादसे     तमिलनाडु – 67 हजार 213     मध्य प्रदेश – 55 हजार 327     केरल – 48 हजार 091     उत्तर प्रदेश – 44 हजार 534     कर्नाटक – 43 हजार 440 सड़क हादसों में मौत : टाप-फाइव राज्य     उप्र – 23 हजार 652     तमिल नाडु – 18 हजार 347     महाराष्ट्र – 15 हजार 366     मप्र – 13 हजार 798     कर्नाटक – 12 हजार 321 नेशनल हाइवे पर हादसे     उत्तर प्रदेश – 8446     तमिलनाडु – 6258     मध्य प्रदेश – 5780 ट्रैफिक नियम तोड़ने के कारण सबसे ज्यादा हादसे मप्र में     रिपोर्ट में सड़क हादसों की अलग-अलग वजहों का भी विश्लेषण किया गया है। सामने आया है कि मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा हादसे ट्रैफिक नियम तोड़ने की वजह से हुए।     प्रदेश में ट्रैफिक नियम न मानने की वजह से 44 हजार 592 हादसे हुए। वहीं तेज रफ्तार की वजह से हुए हादसों में मरने वालों की संख्या मप्र में 11 हजार 380 रही, जो देश में सबसे ज्यादा है।     देश में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में जबलपुर तीसरे नंबर पर है, जहां हादसों में 545 लोगों ने जान गंवाई है। दिल्ली 1457 मौत के साथ पहले नंबर पर है। टाप-10 शहर…जहां सबसे ज्यादा हादसे     दिल्ली – 5834     बेंगलुरु – 4974     जबलपुर – 4205     चेन्नई – 3653     इंदौर – 3566     मल्लपुरम – 3253     हैदराबाद – 2943     जयपुर – 2915     भोपाल – 2906     कोच्चि – 2803 शाम 6 से 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा हादसे, मरने वालों में दो पहिया वाले ज्यादा रिपोर्ट में वर्ष 2020 से लेकर 2023 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। सामने आया कि शाम 6 से रात 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा हादसे हुए। 2023 में इस समयावधि में 99 हजार 945 हादसे हुए हैं। यह कुल हादसों का 20.8 प्रतिशत है। ऐसे हादसों में जान गंवाने वाले सबसे ज्यादा दो पहिया सवार हैं। 2023 में सात हजार 591 दो पहिया सवारों की मौत हुई, जबकि पैदल चलने वालों की संख्या चार हजार 604 के साथ दूसरे नंबर पर है। एक हजार 593 कार सवारों की मौत हुई।

गंगा का जलस्तर बढ़ा, बिजनौर के 50 से ज्यादा गांवों में मंडराया बाढ़ का संकट

बिजनौर  उत्तर प्रदेश के बिजनौर में गंगा नदी की धार ने गंगा बैराज के अपस्ट्रीम में बने तटबंध का कटान शुरू कर दिया है. पिछले दो दिनों से चल रहे इस कटान को अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया, जिसके बाद तटबंध का करीब तीन किलोमीटर हिस्सा गंगा में समा गया है.  लगातार हो रहे इस कटान से आसपास के लोगों में दहशत है. प्रशासन ने नवलपुर गांव को खाली करने का अलर्ट जारी कर दिया है और एसडीआरएफ की टीमें भी जिले में पहुंच गई हैं. सिंचाई विभाग और दिल्ली-पौड़ी नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट की टीमें मिलकर तटबंध को बचाने में जुटी हैं.  प्रशासन और विधायक मौके पर, डीएम ने जारी किया अलर्ट हालात की गंभीरता को देखते हुए डीएम जसजीत कौर ने बताया कि तटबंध का कटान शुरू होने के बाद सभी अधिकारियों को मौके पर भेजा गया है. उन्होंने कहा कि स्थिति थोड़ी नाजुक है, फिर भी प्रयास जारी हैं. तटबंध को बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है.  डीएम ने कहा कि 10 से 12 गांवों में अलर्ट जारी कर दिया गया है और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया है. उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ और टीआरएफ की टीमें भी बुलाई गई हैं जो किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं. देखें वीडियो-  दिन-रात चल रहा है मरम्मत का काम मौके पर मौजूद स्थानीय निवासियों ने बताया कि गंगा लगातार तटबंध को अपने अंदर समाती जा रही है, जिससे लोगों में दहशत बढ़ रही है. तटबंध को बचाने के लिए रात भर काम चल रहा है. बड़े-बड़े पेड़ और बालू से भरे बोरे डालकर कटान रोकने की कोशिश की जा रही है.   उधर, सदर विधायक सूची चौधरी ने भी मौके का मुआयना किया और कहा कि यह प्राकृतिक आपदा है और प्रशासन, ग्रामीण और सिख समाज के लोग मिलकर इसे रोकने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने प्रभारी मंत्री को भी इसकी जानकारी दी है. 

बस्तर में निवेश के नए अवसर, 11 सितंबर को होगा बस्तर इन्वेस्टर कनेक्ट

रायपुर क्षेत्रीय विकास को नई गति देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन का वाणिज्य एवं उद्योग विभाग आगामी 11 सितंबर 2025 को बस्तर में इन्वेस्टर कनेक्ट का आयोजन करने जा रहा है। यह प्रमुख निवेश संवर्धन पहल इससे पहले दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, रायपुर तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टोक्यो, ओसाका और सियोल में सफलतापूर्वक आयोजित की जा चुकी है। इन आयोजनों के माध्यम से नवंबर 2024 से अब तक ₹6.65 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार अब छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट के माध्यम से निवेश संभावनाओं को बस्तर तक ले जा रही है, जो प्रदेश के सबसे गतिशील और संभावनाशील क्षेत्रों में से एक है। बस्तर इन्वेस्टर कनेक्ट राज्य सरकार की छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास नीति 2024–30 के अंतर्गत संतुलित क्षेत्रीय विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस नीति का उद्देश्य रोजगार सृजन, उद्यमिता को बढ़ावा और स्थानीय समुदायों का सशक्तिकरण है। साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि बस्तर की समृद्ध जनजातीय धरोहर और सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण भी हो। छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास नीति 2024–30 के अंतर्गत ₹1000 करोड़ से अधिक निवेश करने वाली अथवा 1000 से अधिक रोजगार सृजित करने वाली परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। इस नीति में औषधि निर्माण, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र उद्योग, आईटी एवं डिजिटल तकनीक, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस व डिफेंस और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। पर्यटन को भी उद्योग का दर्जा प्रदान किया गया है, जिसके तहत बस्तर में होटल, इको-टूरिज़्म, वेलनेस सेंटर, एडवेंचर स्पोर्ट्स और खेल सुविधाओं जैसी परियोजनाओं पर 45 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी। उल्लेखनीय है कि बस्तर के 88 प्रतिशत ब्लॉक ग्रुप-3 श्रेणी में आते हैं, जिससे निवेशकों को अधिकतम नीति लाभ सुनिश्चित हो सकेगा। समावेशन को बढ़ावा देने के लिए इस नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत एससी/एसटी उद्यमियों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी, वहीं नक्सलवाद से प्रभावित परिवारों और व्यक्तियों को भी 10 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा। यह सरकार की सामाजिक पुनर्वास और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एक अभिनव पहल के रूप में, नई औद्योगिक इकाइयों में आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार देने पर पाँच वर्षों तक उनके वेतन पर 40 प्रतिशत सब्सिडी (अधिकतम ₹5 लाख प्रतिवर्ष) उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही, बस्तर में स्टील सेक्टर की इकाइयों को 15 वर्षों तक रॉयल्टी रीइम्बर्समेंट की सुविधा प्रदान की जाएगी, जिससे निवेशकों को दीर्घकालिक भरोसा मिलेगा और औद्योगिक विकास को स्थिरता प्राप्त होगी। सरकार को उम्मीद है कि बस्तर इन्वेस्टर कनेक्ट में देश-विदेश से 200 से अधिक प्रमुख निवेशक, उद्योग जगत के दिग्गज और स्थानीय उद्यमी शामिल होंगे। यह आयोजन सहयोग और विकास का एक उच्च-स्तरीय मंच साबित होगा। इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की भी संभावना है, जो बस्तर की विकास यात्रा में एक ऐतिहासिक पड़ाव सिद्ध होंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार बस्तर के युवाओं को वह कौशल और अवसर देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जिसके वे अधिकारी हैं और जिनसे वे छत्तीसगढ़ की विकास गाथा के सक्रिय सहभागी बन सकेंगे। औद्योगिक नीति की प्रत्येक पहल स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने और समृद्धि को घर-घर तक पहुँचाने के उद्देश्य से सोच-समझकर तैयार की गई है। बस्तर में छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट का आयोजन बस्तर के समग्र विकास को साकार करने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर साबित होगा। यह बस्तर को सतत् और समावेशी विकास का प्रतीक बनाएगा, जिसकी जड़ें क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना में गहराई से जुड़ी हैं। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि अवसरों और लाभों का प्रवाह सीधे स्थानीय जनता तक पहुँचे।

अलवर में बम धमकी का अलर्ट, मिनी सचिवालय को उड़ाने की दी गई चेतावनी

अलवर अलवर शहर के मिनी सचिवालय को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली है। यह धमकी भरा मेल इस बार तमिलनाडु से भेजा गया है। मेल में साफ लिखा गया है कि दोपहर तक मिनी सचिवालय को खाली कर दिया जाए, वरना गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। धमकी मिलते ही प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह अलर्ट हो गए और सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल कड़ा कर दिया गया।   सचिवालय परिसर में मचा हड़कंप धमकी की सूचना मिलते ही सचिवालय परिसर में अफरातफरी मच गई। आनन-फानन में कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। परिसर में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति की गहन जांच की जा रही है। साथ ही आसपास के इलाके को भी सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है।   बम निरोधक दस्ते और पुलिस ने संभाला मोर्चा धमकी को गंभीरता से लेते हुए बम निरोधक दस्ते को मौके पर बुलाया गया। पुलिस की टीमें तलाशी अभियान चला रही हैं और हर कोने की बारीकी से जांच कर रही हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में लापरवाही नहीं बरती जाएगी।   पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां गौरतलब है कि यह तीसरी बार है जब अलवर मिनी सचिवालय को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। इससे पहले भी दो बार इसी तरह के मेल आ चुके हैं, जिनके चलते सचिवालय को खाली कराना पड़ा था। लगातार मिल रही धमकियों ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। साइबर सेल कर रही जांच पुलिस की साइबर सेल इस मेल की जांच में जुट गई है। मेल भेजने वाले का लोकेशन तमिलनाडु से जुड़ा पाया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि धमकी वास्तविक है या फिर अफवाह फैलाने की साजिश। अधिकारी मान रहे हैं कि इस तरह की बार-बार की धमकियां किसी बड़ी योजना का हिस्सा भी हो सकती हैं।   दहशत में शहरवासी, प्रशासन की अपील लगातार धमकियों ने शहरवासियों में दहशत का माहौल बना दिया है। लोग सचिवालय और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सुरक्षा एजेंसियों के साथ सहयोग करें। एडीएम सिटी बीना महावर ने बताया कि जैसे ही धमकी भरे मेल की सूचना मिली, तुरंत सुरक्षा बलों को सक्रिय किया गया और सचिवालय को खाली कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

CM नीतीश का तोहफा: बिहार में महिलाओं के लिए 80 पिंक बस सेवा की शुरुआत

पटना,  बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की महिलाओं को एक बड़ा तोहफा दिया है। उन्होंने महिलाओं के लिए विशेष रूप से चलाई जाने वाली 80 पिंक बसों को हरी झंडी दिखाई। इन बसों में ड्राइवर और कंडक्टर भी महिलाएं होंगी, जिससे महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। यह कार्यक्रम सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सरकारी आवास पर आयोजित किया गया, जहां उन्होंने 1,065 बसों में ई-टिकट सुविधा का भी उद्घाटन किया। इस पहल से बिहार के विभिन्न जिलों में महिलाओं के लिए यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने का प्रयास किया गया है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”आज बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की 1,065 बसों में ई-टिकटिंग सुविधा लागू करने का शुभारंभ किया तथा द्वितीय चरण में नई 80 पिंक बसों का लोकार्पण भी किया। इन बसों में केवल महिलाएं ही यात्रा कर सकती हैं। इन पिंक बसों के परिचालन से महिलाओं का सफर ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक होगा और उन्हें आवागमन में काफी सहूलियत होगी। साथ ही ई-टिकटिंग की व्यवस्था से राज्य के लोगों को विभिन्न जगहों पर यात्रा करने में सुगमता होगी।” बिहार में विशेष तौर पर महिलाओं के लिए पिंक बस चलाई जा रही है। इस बस में सभी तरह की सुविधाएं रहती हैं। बस में कंडक्टर के साथ-साथ कोशिश यह होती है कि इस बस का ड्राइवर भी महिला ही रहे, जिससे सुरक्षा बनी रहे। पिंक बस की कंडक्टर सविता कुमारी ने कहा, “यह सरकार की अच्छी पहल है, इससे महिलाओं को काफी फायदा मिलेगा। बस में महिलाओं के लिए सुरक्षा का विशेष प्रबंध किया गया है। बस में मेडिकल सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है।” कंडक्टर पिंकी कुमारी ने बताया कि महिलाओं की सुरक्षा को देखते हुए बस में तीन कैमरे लगाए गए हैं। दूरदराज जाने वाली महिलाओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। अगर बस में गर्भवती महिला सफर करती है तो उनके लिए अलग से सीट है, साथ ही कंडक्टर भी उनका विशेष ध्यान देंगी। उन्होंने आगे बताया कि महिलाओं से सफर के दौरान फीडबैक भी लिया जाएगा, जिससे सुविधाओं में सुधार लाने में मदद मिलेगी। सभी बसें राज्य के विभिन्न जिलों में चलेंगी, जिन्हें कंट्रोल रूम से मॉनिटर किया जाएगा।  

साय कैबिनेट की पहली बैठक से पहले सियासी घमासान, PCC चीफ बोले- मीटिंग में बस खाते हैं चाय-बिस्किट

रायपुर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने आगामी कैबिनेट मीटिंग समेत कई मुद्दों पर सरकार पर निशाना साधा है. बैज ने कहा कि सरकार 2 सालों से सो रही है. अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ. किसानों के लिए DAP-यूरिया तो मिला नहीं, युवाओं के लिए रोजगार भी नहीं मिला. कर्मचारी सड़कों पर हैं. स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह बदहाल है. क्या इन सब विषय पर बात होगी.? बैज ने कहा कि ये सब कैबिनेट मीटिंग में बैठकर केवल चाय और बिस्किट खाते हैं. कांग्रेस कल बिलासपुर में “वोट चोर गद्दी छोड़” कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है. पीसीसी चीफ दीपक बैज इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बिलासपुर दौरे पर रहेंगे. कार्यक्रम की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट समेत तीनों सह प्रभारी भी शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि पूरे देश में भारतीय लोकतंत्र को बचाने के लिए कांग्रेस लड़ाई लड़ रही है. बीते दिन एक वीडियो सामने आया जिसमें मंत्री केदार कश्यप के बंगले के एक कर्मचारी ने मंत्री पर मारपीट करने का आरोप लगाया और न्याय की मांग की. वीडियो वायरल होते ही प्रदेश की सियासत गर्म हो गई. इस मामले को लेकर आज कांग्रेस मंत्री केदार कश्यप के बंगले का घेराव करने जा रही है. मंत्री को कर्मचारी से माफी मांगनी चाहिए : PCC चीफ इस मामले को लेकर पीसीसी चीफ ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री इसे कांग्रेस का षडयंत्र बता रहे हैं. लेकिन क्या कांग्रेस ने मां की गाली देने बोला था ? मंत्री को कर्मचारी से माफी मांगनी चाहिए. यहां 2 कानून है : पीसीसी चीफ उन्होंने आगे कहा कि सरकार मंत्री के ऊपर कार्यवाही नही करेगी. इसलिए माफी मांग लेना चाहिए. घटना के एक घण्टे पहले और बाद का सीसीटीवी वीडियो जारी करना चाहिए. क्या मुख्यमंत्री उस कर्मचारी से बात की ? दोनों पक्षों को सुनना चाहिए. किसी भी छोटे कर्मचारियों की इतनी हिम्मत नही होती कि ऐसी हरकत करे, यहां दो कानून हैं- बड़े अधिकारी के लिए कुछ और गरीब के लिए कुछ और है. धर्मांतरण सरकार की प्री प्लानिंग : पीसीसी चीफ प्रदेश में धर्मांतरण के बढ़ते मामलों को लेकर PCC चीफ बैज ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि यह सरकार की बड़ी विफलता है. पहले कांग्रेस के ऊपर आरोप लगा रही थी. आज बीजेपी की सरकार में कितनी घटनाएं घट रही.?  मुद्दों का ध्रुवीकरण और राजनीति कर रही सरकार. धर्मांतरण सरकार की प्री प्लानिंग थी.