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दोपहिया वाहन मालिकों के लिए रायपुर में नई रूल्स, आज ही पढ़ें पूरी जानकारी

रायपुर पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने लिया फैसला, सड़क हादसों में लोगों की जान तक जा रही, इसलिए सख्ती, उप मुख्यमंत्री अरुण साव और कलेक्टर को दी सूचना। बिना हेलमेट वाहन चलाने वाले चालकों को अब पंपों से पेट्रोल नहीं मिलेगा। 1 सितंबर से यह फैसला पूरे जिले के पेट्रोल पंपों में लागू होगा। पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने इस संबंध में सख्त फैसला लिया है। एसोसिएशन के सभी सदस्यों ने आपसी सहमति से यह निर्णय लिया है। उनका मानना है कि गाड़ियों में पेट्रोल नहीं मिलेगा तो लोग हेलमेट पहनने के लिए जागरूक होंगे। इसमें प्रशासन और पुलिस वाले भी उनका सहयोग करेंगे। यानी बिना हेलमेट के पेट्रोल पंपों में पेट्रोल लेने पर विवाद करने वालों से अफसर सख्ती से निपटेंगे। जो हंगामा करेंगे उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी। राजधानी पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने खुद आगे आकर यह फैसला लिया है। एसोसिएशन की ओर से शुक्रवार को इसकी लिखित सूचना डिप्टी सीएम अरुण साव और रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह को दी है। एसोसिएशन के सभी सदस्यों का मानना है कि राजधानी में सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। इसमें लोगों की जान जा रही है और गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। इस​ वजह से एसोसिएशन के सभी सदस्यों ने यह फैसला लिया है कि वे बिना हेलमेट लगाए लोगों को पेट्रोल नहीं देंगे। पेट्रोल पंप एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिल धगत ने बताया कि यह अभियान रायपुर शहर ही नहीं बल्कि पूरे जिले में चलाया जाएगा। एसोसिएशन ने सभी लोगों से अपील कि है कि वे दोपहिया चलाते समय हेलमेट जरूर लगाए। बिना हेलमेट से पेट्रोल नहीं देने का नियम कुछ साल पहले भी लागू ​किया गया था। लेकिन सख्ती नहीं होने की वजह से लोगों ने इस नियम को नहीं माना। दरअसल, बिना हेलमेट के पेट्रोल की बिक्री नहीं करने पर पंपों की बिक्री प्रभावित हो रही थी। इतना ही नहीं लोग उधार में हेलमेट लेकर पेट्रोल डलवा लेते थे। अधिकतर बार लोग हेलमेट वाले लोगों से हेलमेट मांगकर पेट्रोल डलवाते फिर उन्हें वापस कर देते। सख्ती नहीं होने की वजह से नियम की धज्जियां उड़ रही थी। इस वजह से इस बार पेट्रोल पंप संचालकों को खुद आगे किया गया है। उनसे कहा गया है​ कि वे ही सख्ती करें। यही वजह है कि प्रशासन ने इस बार आदेश न जारी कर एसोसिएशन वालों से ही लिखित में लिया है कि वे बिना हेलमेट के लोगों को पेट्रोल नहीं देंगे।

बाढ़ का कहर: पंजाब के 8 जिले चपेट में, हालात बिगड़े

पंजाब  पंजाब में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। सतलुज, रावी और घग्गर नदियों का जलस्तर बढ़ने से अब तक 8 जिले बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। बता दें कि, घरों में पानी भरने के बावजूद कई लोग अपने घर छोड़कर नहीं जा रहे, प्रशासन द्वारा उन्हें वहीं पर खाना पहुंचाया जा रहा है। वहीं अमृतसर में रावी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है जोकि अजनाला की तरफ बढ़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ रामदास इलाके के लोग घरों के ऊपर टैंट लगा कर रहने को मजबूर होरहे हैं।   अमृतसर व फाजिल्का सबसे प्रभावित अमृतसर के अजनाला इलाके में पानी हरड़ कलां गांव तक पहुंच गया है। प्रशासन ने यहां बचाव कार्यों को तेज किया है। वहीं, फाजिल्का में सतलुज नदी उफान पर है और सरहदी गांव के पास पुल के ऊपर से पानी बहना शुरू हो गया है। पठानकोट, फिरोजपुर, अमृतसर, तरनतारन, फाजिल्का, सुलतानपुर (कपूरथला) व होशियारपुर में हालात सबके ज्यादा खराब हैं। गौरतलब है कि, फाजिल्का जिले में सतलुज उफान पर है। सरहदी गांव में नदी पर बने पुल के ऊपर से पानी बहना शुरू हो गया है। इस दौरान स्पेशल DGP अर्पित शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया है कि, सेना के 20 हेलिकॉप्टर रेस्क्यू में लगाए गए हैं।    पटियाला में खेतों में घुसा पानी चंडीगढ़ की सुखना लेक से छोड़े गए पानी का असर पंजाब-हरियाणा बॉर्डर तक पहुंच गया है। घग्गर नदी ओवरफ्लो होने से पटियाला जिले के कई गांवों की खेती-बाड़ी वाली जमीन पानी में डूब गई है। खजूर मंडी, तिवाना, साधनपुर और सरसेनी गांवों के लोग 2023 की बाढ़ को याद कर चिंतित हैं। रेलवे ने रद्द की 47 ट्रेनें रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पंजाब और जम्मू से होकर गुजरने वाली 47 ट्रेनों को रद्द कर दिया है। इससे पंजाब, हरियाणा और जम्मू जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं आपको बता दें कि, इस मुश्किल समय में पंजाबी गायक सतिंदर सरताज ने अमृतसर डीसी को राशन और जरूरी सामग्री भेजी, ताकि पीड़ित परिवारों की मदद की जा सके। इतने लोगों की हुई मौत पंजाब में बाढ़ कहर के बीच हुई मौतों का सरकारी आंकड़ा सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है। 3 अभी भी लापता हैं। वहीं इस संबंधी जानकारी देते हुए एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि अब तक बाढ़ में फंसे 7689 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। इस बाढ़ की चपेट में पंजाब के 1018 गांव आ चुके हैं। उधर, पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब परिसर से पानी निकालने का काम जारी है। हाल ही में यहाँ 10 फीट तक पानी भर गया था। पंजाब की सीएम मरियम नवाज शरीफ के आदेश पर बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाया जा रहा है। आपको ये भी बता दें कि, 30 अगस्त यानि आज पंजाब के कई जिलों में बारिश को लेकर ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है। पंजाब के पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर में ऑरेंज अलर्ट और गुरदासपुर, नवांशहर, मोहाली, फतेहगढ़ साहिब और पटियाला में येलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके साथ ही 31 अगस्त और 1 सितंबर को पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर, फतेहगढ़ साहिब और मोहाली में येलो अलर्ट जारी किया गया है।

हड़ताल पर NHM स्टाफ? अब वेतन न मिलने की चेतावनी जारी

रायपुर नियमितीकरण सहित अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशभर के एनएचएम कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग का कामकाज प्रभावित हो रहा है। वहीं, अब स्वास्थ्य विभाग ने एनएचएम कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने फैसला किया है। साथ ही विभाग ने हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों को नो वर्क नो पेमेंट का नोटिस जारी किया है। बता दें कि इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा था कि एनएचएम कर्मचारियों की कई मांगों पर सहमति दी जा चुकी है। मिली जानकारी के अनुसार हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलेगा। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि संविदाकर्मी के काम नहीं करने पर पेमेंट नहीं मिलता है। एनएचएम कर्मचारी कई दिनों से लापता हैं, इसलिए विभाग ने नो वर्क नो पेमेंट का नोटिस जारी किया है। बता दें कि एनएचएम कर्मचारियों की मांगो को पूरा किए जाने के संबंध में हेल्थ मिनिस्टर जायसवाल ने कहा कि, एनएचएम कर्मियो के लिए 22% वेतन वृद्धि, ट्रांसफर नीति बनाने की सहमति और 30 दिनों के चिकित्सकीय अवकाश जैसी मांगों पर सहमति दी जा चुकी है। जहाँ तक एनएचएम कर्मियों के नियमितीकरण का सवाल है तो यह मांग भारत सरकार की सहमति से पूरी हो पाएगी। इस तरह स्वास्थ्य मंत्री ने रेग्यूलाइजेशन का गेंद केंद्र के पाले में डाल दिया है।

सियासी घमासान: बघेल बोले- ‘BJP को वोट देने पैदा करेंगे बच्चे?’ चंद्राकर ने दिया जवाब

रायपुर RSS प्रमुख मोहन भागवत के 3 बच्चे पैदा करने की सलाह को लेकर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने तंज कसा था. उन्होंने कहा था कि देश की जनसंख्या वैसे ही 140 करोड़ से अधिक है, युवा बेरोजगार हैं. उन्हें नौकरी मिल नहीं रही है, तो क्या तोड़फोड़ करने के लिए, गुंडागर्दी करने के लिए, या भारतीय जनता पार्टी को वोट देने के लिए बच्चा पैदा करेंगे ? उनके इस बयान पर अब विधायक अजय चंद्राकर ने पलटवार किया है. विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि 3 बच्चे पैदा करना है या नहीं, यह अपना-अपना विचार है. आज के कांग्रेस के नेता छत्तीसगढ़ के जनहित के मुद्दे भूल चुके हैं. छत्तीसगढ़ में 14 मंत्री बनाने को लेकर कांग्रेस ने हाईकोर्ट का रुख किया है. इसे लेकर  विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि जब हरियाणा में 14 मंत्री बनाए गए, तब कांग्रेस कहा थी? हरियाणा में 14 मंत्री कैसे बने? उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पहले हरियाणा के हाई कमान से पूछना चाहिए. वहीं उन्होंने CM साय के विदेश दौरे को लेकर अजय चंद्राकर ने कहा कि मुख्यमंत्री साय की पहली विदेश यात्रा थी. दक्षिण एशिया के देशों का दौरा हुआ, जो औद्योगिक स्तर पर आगे हैं. जापान छोटा सा देश है, लेकिन अर्थव्यवस्था मजबूत है. इस पहल से छत्तीसगढ़ के आद्यौगिक गतिविधि में गति आएगी और रोजगार बढ़ेगा.

हरियाणा को बड़ी सौगात: करोड़ों की लागत से बनेगी सूरजमुखी तेल मिल

हरियाणा  हरियाणा में पहली सूरजमुखी तेल मिल कुरुक्षेत्र के शाहाबाद में स्थापित होगी। इसके लिए शाहाबाद से 7 KM की दूरी पर स्थित गांव अजराना कलां में 8.97 एकड़ जमीन खरीद के लिए 8.50 करोड़ रुपये की राशि को मंजूरी दे दी गई है।  बता दें कि हैफेड द्वारा स्थापित की जाने वाली सूरजमुखी तेल मिल के लिए उपयुक्त जमीन ढूंढने को जिला प्रबंधक हैफेड कुरुक्षेत्र, कार्यकारी अभियंता (मुख्यालय) हैफेड व जिला प्रशासन के प्रतिनिधि की समिति गठित की गई थी। समिति ने सबसे पहले गांव डीग में जमीन की तलाश की थी लेकिन ग्रामीणों की सहमति नहीं मिलने के कारण बिहोली गांव में जमीन देखी गई। यहां भी मिल स्थापित करने के लिए कोई सहमति नहीं बनी। अब कमेटी ने अजराना कलां में मार्केट कमेटी के सबयार्ड के पास जमीन तलाशी है। इसे खरीदने की मंजूरी मिल गई है।

महापौर ने किया कड़ा आदेश: बंद स्ट्रीट लाइट की समस्या का तुरंत समाधान करें

दुर्ग  छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के स्ट्रीट लाइटों के बंद रहने से अंधेरे की शिकायतों को महापौर अल्का बाघमार ने गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। नगर निगम की मेयर इन काउंसिल की बैठक में उन्होंने अधिकारियों को वार्डों में जाकर बिजली व्यवस्था की जांच व निगरानी के निर्देश दिए। महापौर ने स्पष्ट किया कि निगम कर्मचारी या तो सीधे वार्डों में जाकर प्रकाश व्यवस्था की जांच करें अथवा संबंधित पार्षदों से संपर्क कर आवश्यक जानकारी प्राप्त करें। इससे अंधेरे वाले क्षेत्रों की पहचान कर तत्काल सुधार कार्य किया जा सकेगा। इसके साथ ही उन्होंने सफाई व्यवस्था के लिए यही व्यवस्था अपनाने की बात कही। मेयर इन काउंसिल की बैठक में दिए निर्देश मेयर इन काउंसिल की बैठक महापौर अल्का बाघमार की अध्यक्षता में हुई। बैठक में कमिश्नर सुमित अग्रवाल भी मौजूद थे। बैठक में शहर की सफाई व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था, विकास कार्यों, निर्माण प्रस्तावों और विभागीय योजनाओं की समीक्षा करते हुए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में नया बस स्टैंड परिसर में आवंटित दुकानों को तोड़कर अतिरिक्त निर्माण कर लिए जाने की शिकायत सामने आई है। इस पर निगम प्रशासन ने दुकानदारों से अतिरिक्त निर्माण के एवज में अतिरिक्त प्रीमियम राशि व बिना अनुमति तोडफ़ोड़ पर जुर्माना लगाने का फैसला किया है। नाली और सड़क निर्माण को मंजूरी बैठक में अन्य विभागीय प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई। जिनमें विभिन्न वार्डों में नाली-निर्माण, सड़क मरमत और जनसुविधा से जुड़े मुद्दे शामिल रहे। प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।

मोहन भागवत का आज बिलासपुर दौरा, काशीनाथ स्मारिका का होगा विमोचन

बिलासपुर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत आज बिलासपुर में रहेंगे। वे यहां पर आरएसएस के पूर्व विभाग संघ चालक और वरिष्ठ समाजसेवी रहे स्व. काशीनाथ गोरे की स्मृतियों को संजोने वाली स्मारिका का विमोचन शाम 6:30 बजे सिम्स सभागार करेंगे। अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह करेंगे। वहीं विशेष अतिथि के तौर पर संघ के मध्यक्षेत्र क्षेत्र संघचालक डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना करेंगे आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रदीप शर्मा और सचिव बृजेन्द्र शुक्ला ने चर्चा में बताया कि यह स्मारिका स्व. गोरे के सामाजिक कार्यों, राष्ट्रसेवा और पारिवारिक संस्मरणों को समर्पित है। समाजसेवा और संगठनात्मक कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाने वाले काशीनाथ गोरे की स्मृतियों को यह स्मारिका जीवंत करेगी। इसमें उनके जीवन के वे प्रसंग भी शामिल किए गए हैं, जो नई पीढ़ी को प्रेरणा देंगे। सरसंघचालक डॉ. भागवत कार्यक्रम के बाद स्व. गोरे के घर भोजन करने जाएंगे। रात्रि विश्राम शहर के संघ कार्यालय में होगा। इससे पहले सुबह 11 बजे से 12 बजे तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह बौद्धिक शिक्षण प्रमुख दीपक विस्पुते सिम्स ऑडिटोरियम में महाविद्यालयीन छात्रों को संबोधित करेंगे।

त्योहार में खलल: उपद्रवियों ने गणेश पंडाल में मचाया बवाल, इलाके में तनाव

जांजगीर-चांपा जिले के कुरदा गांव में असामाजिक तत्वों ने गणेश पंडाल में जमकर उपद्रव किया . नशे में धुत युवकों ने पंडाल पहुंचकर अंदर रखे पूजा सामग्री और साउंड सिस्टम को बाहर फेंक दिया. इसका विरोध करने पर समिति के सदस्यों से मारपीट करते हुए जान से मारने की धमकी दी. आरोप है कि उन्होंने समिति सदस्य राजू महंत से पैसे और गाड़ी लूटने की भी कोशिश की. घटना को लेकर गांव में तनाव की स्थिति बन गई है. सूचना के बाद मौके पर पहुंची चांपा पुलिस स्थिति को नियंत्रित करने में जुट गई. मामले में दो मुख्य आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है. वहीं घटना में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है.

दिव्यांग भर्ती घोटाले पर सरकार का बड़ा एक्शन, बनेगा ठोस सिस्टम

जयपुर राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में लगातार उजागर हो रही धांधलियों और गड़बड़ियों के बीच राज्य सरकार अब दिव्यांग कोटे से नियुक्त कर्मचारियों की जांच के लिए एक्टिव मोड में आ गई है। सरकार ने सभी विभागों में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों के दस्तावेज और मेडिकल सर्टिफिकेट की दोबारा जांच कराने का निर्णय लिया है। यह जांच अधिकृत मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में बने मेडिकल बोर्ड द्वारा की जाएगी। कार्मिक विभाग के शासन सचिव कृष्णकांत पाठक के अनुसार पहले चरण में पिछले पांच वर्षों में दिव्यांग कोटे से चयनित सभी कर्मचारियों की जांच होगी। इसके बाद पूरे प्रदेश में कार्यरत अन्य दिव्यांग कर्मचारियों की भी मेडिकल जांच और दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। अगर जांच में किसी भी कर्मचारी के दिव्यांगता प्रमाण पत्र या दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कार्मिक विभाग कड़ी कार्रवाई करेगा। इतना ही नहीं संदिग्ध मामलों में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप को भी शिकायत दी जाएगी। इस कदम की पृष्ठभूमि में हाल ही में उजागर हुए पेपर लीक घोटाले और उसके दौरान सामने आए फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र हैं। एसओजी की जांच में सामने आया कि कई अभ्यर्थियों ने फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर सरकारी नौकरियां हासिल कीं। जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में गठित विशेष मेडिकल बोर्ड ने जांच में पाया कि 29 कर्मचारियों में से 24 ने फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी हासिल की थी। इनमें टीचर, एएनएम, स्टेनोग्राफर समेत विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मचारी शामिल थे। सरकार के इस फैसले से साफ है कि अब फर्जीवाड़े के जरिए नौकरी करने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी है, जिससे भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों पर रोक लगाई जा सके।

झटका बनाम हलाल विवाद पर बड़ा कदम, अब दुकान के बाहर लगेगा स्पष्ट बोर्ड

  जयपुर राजधानी जयपुर में अवैध मीट की दुकानों को बंद किया जाएगा। साथ ही जिन दुकानों पर कमर्शियल पट्टे हैं उन्हें अनिवार्य रूप से दुकान के बाहर यह स्पष्ट लिखने के निर्देश दिए गए हैं कि दुकान में झटके का मीट है या हलाल का। जयपुर की महापौर सौम्या गुर्जर ने कहा है कि  अब से केवल उन्हीं दुकानों को मीट बिक्री का लाइसेंस मिलेगा जो कमर्शियल पट्टे पर होंगी व  प्रत्येक दुकान को अपने बाहर बोर्ड लगाकर स्पष्ट करना होगा कि वो 'झटका मीट शॉप' है या 'हलाल मीट शॉप'। उन्होंने कहा कि  शहर में आवासीय कॉलोनियों में अनियंत्रित रूप से मीट की दुकानें खुल संचालय हो रही हैं, जिससे क्षेत्रवासियों को असुविधा होती है। गंदगी और बदबू भी फैलती है, साथ ही झटका और हलाल मीट की दुकान की स्पष्ट जानकारी नहीं होने से जन भावनाएं भी आहत होती हैं। महापौर ने कहा कि लोग चाहते हैं कि किसी की धार्मिक भावना आहत न हो इस वजह से मीट की दुकानों पर झटका और हलाल लिखा हुआ होना चाहिए, ताकि जो जिस तरह का मीट इस्तेमाल करते हैं, उन्हें वही मीट मिले।  उन्होंने बताया कि पूर्व में दिए निर्देशों के बाद कुछ दुकानों पर झटका और हलाल अंकित किया भी गया है, लेकिन जिन पर नहीं लिखा गया है।  सौम्या गुर्जर ने बताया कि पिछले काफी असरे से स्थानीय रिहायशी कॉलोनियों में संचालित मीट की दुकानों का विरोध हो रहा है।  ऐसे स्थान पर दुर्गंध आती है और महिलाओं का निकलना मुश्किल हो जाता है। स्कूल, मंदिर से 100 मीटर दूरी का प्रस्ताव सरकार को भेजा उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां स्कूल या मंदिर है, वहां इस तरह की गतिविधियों को नहीं देखा जा सकता। ऐसे में राज्य सरकार को लिखा गया है कि ऐसी तमाम दुकानें मंदिर और स्कूल से तकरीबन 100 मीटर दूर हो। इस पर राज्य सरकार जनता के हित में ही फैसला लेगी। गौरतलब है कि निगम प्रशासन ने करीब एक साल पहले भी ऐसा ही निर्णय लिया था, लेकिन इसे पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका है। इसे लेकर समय-समय पर सियासी बयानबाजी जरूर सामने आती है। अब निगम ने इस मामले में सख्ती बरतने के संकेत दिए हैं।