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जबलपुर-ग्वालियर समेत कई जिलों में बरसेंगे बादल, मौसम विभाग ने दी चेतावनी

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक से पहले छतरपुर और छिंदवाड़ा में लू चली। बुधवार को छतरपुर जिले के खजुराहो का पारा 45.0 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ प्रदेश में सबसे गर्म रहा, वहीं नौगांव में भी पारा 44.6 डिग्री दर्ज किया गया। छिंदवाड़ा में दिन का तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री अधिक यानी 40.8 डिग्री रिकॉर्ड हुआ, जिससे लोग लू के थपेड़ों से बेहाल रहे। प्रदेश के पश्चिमी इलाकों में अधिकतम तापमान 34.0 से 43.6 डिग्री और पूर्वी क्षेत्रों में 39.0 से 45.0 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अगले दो दिनों तक प्रदेश के तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इसके बाद पारे में 2 से 3 डिग्री गिरावट की संभावना जताई गई है। सिवनी में 3.0 मिलीमीटर हुई वर्षा और 70 किमी की रफ्तार से चली आंधी मौसम केंद्र के अनुसार बुधवार को सिवनी में 3.0 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, डिंडोरी, कटनी, सतना, मैहर, पन्ना और उमरिया में 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चली और बिजली चमकी। वहीं बैतूल, मंडला, अनूपपुर और शहडोल में 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। शाम होते–होते जबलपुर, छतरपुर, दमोह, उज्जैन, रतलाम सहित कई जिलों में मौसम बदल गया। आज यहां चलेंगी तेज हवाएं, येलो अलर्ट जारी गुरुवार को रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सागर और छतरपुर सहित करीब 34 जिलों में गरज–चमक के साथ वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की आशंका जताई गई है। इसके लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश के चार बड़े शहरों का तापमान शहर अधिकतम न्यूनतम भोपाल 40.4 27.6 इंदौर 38.9 25.4 ग्वालियर 43.1 29.4 जबलपुर 40.5 25.0  

भारत मंडपम में आयोजित बैठक में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भारत मंडपम में आयोजित बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री  मोदी को बधाई देते हुए कहा कि पिछले 12 वर्ष देश के जनजातीय समाज के सम्मान, सशक्तिकरण और विकास के लिए स्वर्णकाल साबित हुए हैं। मुख्यमंत्री  साय ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और प्रभावी रणनीति के कारण छत्तीसगढ़ को दशकों पुरानी नक्सल समस्या से निर्णायक मुक्ति मिली। उन्होंने कहा कि नक्सल हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित जनजातीय समुदाय अब शांति, सुरक्षा और विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। बस्तर में ‘नियद नेल्ला नार’ और ‘बस्तर मुन्ने’ जैसे अभियानों के माध्यम से योजनाओं का सैचुरेशन मोड में क्रियान्वयन किया जा रहा है तथा सुरक्षा शिविरों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने जनजातीय समाज को नई पहचान और सम्मान दिया है। भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिवस को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हो या धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, इन पहलों ने आदिवासी क्षेत्रों के विकास को नई गति दी है। उन्होंने कहा कि देश को पहली जनजातीय महिला राष्ट्रपति के रूप में मती द्रौपदी मुर्मु का नेतृत्व करोड़ों आदिवासियों के सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है।  साय ने कहा कि पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों के दूरस्थ इलाकों तक पहली बार बिजली, सड़क, पेयजल और आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही हैं। वहीं बस्तर में सड़क, रेल और सार्वजनिक परिवहन के विस्तार से कनेक्टिविटी की वर्षों पुरानी चुनौतियां दूर हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। नवा रायपुर में ट्राइबल म्यूजियम तथा शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय संग्रहालय का निर्माण कराया गया है। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों ने दुनिया के सामने बदलते, मुस्कुराते और हिंसा-मुक्त बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत की है। उन्होंने कहा कि पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, लघु वनोपज की रिकॉर्ड खरीदी, किसानों को धान, दलहन और तिलहन का बेहतर मूल्य तथा कृषक उन्नति योजना जैसी पहलें ग्रामीण और जनजातीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही हैं। वहीं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना के माध्यम से राज्य के 2 करोड़ 45 लाख जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने आदिवासियों को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं बनाया, बल्कि उन्हें भारत के विकास का सक्रिय सहभागी बनाया है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।

Bastar News: तेंदूपत्ता खरीदी ने रचा इतिहास, 50 हजार संग्राहकों की दूरी बनी चिंता का विषय

जगदलपुर. बस्तर संभाग में इस वर्ष तेंदूपत्ता संग्रहण को लेकर रिकॉर्ड आंकड़े सामने आए हैं। वन विभाग ने दावा किया है कि जगदलपुर सर्किल के चार जिलों में 1 लाख 74 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता खरीदा गया है, जिससे करीब 96 करोड़ रुपये की राशि संग्राहकों तक पहुंची है। हालांकि इन दावों के बीच कई ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं, जो तेंदूपत्ता कारोबार की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र में लगभग 1 लाख 75 हजार संग्राहक पंजीकृत हैं, लेकिन तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में केवल 1 लाख 25 हजार लोग ही शामिल हुए। यानी करीब 50 हजार पंजीकृत संग्राहकों ने इस बार तेंदूपत्ता तोड़ने का काम नहीं किया। इतनी बड़ी संख्या में संग्राहकों के प्रक्रिया से बाहर रहने के पीछे के कारणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर मजदूरी, मौसम और संग्रहण से जुड़ी अन्य चुनौतियों को इसकी एक वजह माना जा रहा है। वन विभाग ने भी माना है कि बेमौसम बारिश का असर संग्रहण पर पड़ा। बारिश के कारण 60 से 70 गांवों में तेंदूपत्ता संग्रहण प्रभावित हुआ। अधिकारियों का कहना है कि यदि मौसम अनुकूल रहता तो खरीदी और संग्रहण का आंकड़ा इससे भी अधिक हो सकता था। इसके अलावा 1702 फड़ों के लक्ष्य के मुकाबले केवल 1600 फड़ों में ही संग्रहण कार्य हो पाया, जिससे कई इलाकों में व्यवस्था संबंधी चुनौतियां भी उजागर हुई हैं। अवैध कारोबार ने भी बढ़ाई प्रशासन की चिंता इस बीच तेंदूपत्ता के अवैध कारोबार ने भी प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। सुकमा-ओडिशा सीमा क्षेत्र में वन विभाग ने 12 अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर लाखों रुपये मूल्य का तेंदूपत्ता जब्त किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तेंदूपत्ता को अवैध रूप से ओडिशा और तेलंगाना की ओर खपाने की कोशिश की जा रही थी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से यह संकेत मिल रहा है कि तेंदूपत्ता व्यापार में तस्करी का नेटवर्क अब भी सक्रिय है। बस्तर में तेंदूपत्ता ग्रामीण और वन आश्रित परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत माना जाता है। ऐसे में रिकॉर्ड खरीदी और करोड़ों रुपये के भुगतान के दावों के बावजूद आधे लाख संग्राहकों का प्रक्रिया से बाहर रहना, मौसम की मार से प्रभावित गांवों की संख्या और तस्करी की घटनाएं कई सवाल खड़े कर रही हैं। जानकारों का मानना है कि केवल रिकॉर्ड आंकड़े सफलता की पूरी तस्वीर नहीं बताते, बल्कि यह भी जरूरी है कि संग्रहण से जुड़े सभी हितग्राहियों की भागीदारी सुनिश्चित हो और अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जाए। अब निगाहें इस बात पर हैं कि वन विभाग और सरकार इन चुनौतियों का समाधान किस तरह करती है, ताकि तेंदूपत्ता कारोबार का लाभ वास्तव में अधिक से अधिक वनवासी परिवारों तक पहुंच सके और रिकॉर्ड खरीदी के दावों के साथ जमीनी स्तर पर भी सफलता दिखाई दे।

84 घंटे तक उग्रवादियों से लोहा लेने वाले मेजर अर्शदीप गिल को मिला कीर्ति चक्र सम्मान

 मोहाली  सेक्टर 79 मोहाली के भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी मेजर अर्शदीप सिंह गिल को उनकी असाधारण वीरता और कर्तव्यनिष्ठा के लिए देश के दूसरे सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में प्रदान किया। मेजर अर्शदीप सिंह गिल, जो द आर्मर्ड कोर और 1 असम राइफल्स से संबद्ध हैं, ने मणिपुर में एक चुनौतीपूर्ण और जोखिमपूर्ण सैन्य अभियान के दौरान अद्वितीय साहस, नेतृत्व क्षमता और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। करीब 84 घंटे तक चले ऑपरेशन में उन्होंने अपनी टीम का नेतृत्व करते हुए आतंकवादियों के खिलाफ सफल कार्रवाई को अंजाम दिया और मिशन को सफलता पूर्वक पूरा किया। सेना के सूत्रों के अनुसार, अभियान के दौरान मेजर गिल ने विपरीत परिस्थितियों में भी असाधारण वीरता का प्रदर्शन किया, जिसके लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया। उनकी बहादुरी और समर्पण की देशभर में सराहना हो रही है। मेजर अर्शदीप सिंह गिल की इस उपलब्धि से पंजाब सहित पूरे देश को गौरव की अनुभूति हुई है। उनके सम्मानित होने पर परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है। सेना और सुरक्षा बलों से जुड़े अधिकारियों ने इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बताया है। मेजर गिल की यह उपलब्धि देश सेवा, साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण की एक मिसाल के रूप में देखी जा रही है। ऑपरेशन की बड़ी बातें मणिपुर में उग्रवादियों के खिलाफ यह काउंटर-इंसरजेंसी ऑपरेशन करीब 84 घंटे (साढ़े तीन दिन) तक चला था। खतरनाक और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद मेजर अर्शदीप ने अपनी टीम को आगे रहकर लीड किया और मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। मेजर गिल 'द आर्मर्ड कॉर्प्स' के अधिकारी हैं और फिलहाल '1 असम राइफल्स' के साथ तैनात हैं। पूरे पंजाब में गर्व का माहौल, युवाओं के लिए बने रोल मॉडल सेना के सूत्रों के मुताबिक, मेजर गिल ने बेहद खतरनाक हालातों में भी अद्वितीय पेशेवर कौशल और वीरता दिखाई। उनकी इस बहादुरी से न सिर्फ मोहाली बल्कि पूरे पंजाब और देश का नाम रोशन हुआ है। सम्मान की खबर मिलते ही मेजर अर्शदीप के मोहाली स्थित घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। रक्षा विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने इसे देश के युवाओं के लिए एक प्रेरक मिसाल बताया है। क्या है कीर्ति चक्र? यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। यह सम्मान सेना, नौसेना और वायु सेना के जवानों के अलावा आम नागरिकों को भी असाधारण वीरता या आत्म बलिदान के लिए दिया जाता है। वरीयता में यह 'अशोक चक्र' के बाद आता है।  

नल-जल योजना से घर-घर पहुँचा शुद्ध पानी, बढ़ी जीवन की गुणवत्ता

रायपुर                    रोज सुबह उठते ही घर में नल से साफ पानी आते देखने की खुशी क्या होती है, इसे कमली से पूछिए। उप मुख्यमंत्री  अरुण साव को अपने आंगन में लगे नल से आ रहे पानी की धार को दिखाते खुशी से उनकी आंखें डबडबा गईं। जल जीवन मिशन ने कमली जैसी हजारों महिलाओं को अमूल्य खुशियां दी हैं। कभी पीने और निस्तारी के पानी के लिए दिनभर चिंतित रहने वाली इन महिलाओं का जीवन घर में लगे नल ने बदल दिया है।                    उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  अरुण साव अपने चार दिनों के बस्तर प्रवास के दौरान जल जीवन मिशन का काम देखने कमली के भी गांव पहुंचे। कमली के गांव बस्तर जिले के तोकापाल विकासखण्ड के दुगनपाल में उन्होंने कुछ और घरों में भी जाकर नल से पानी आते देखा। जल जीवन मिशन से घर में पानी पहुंचने की खुशी सभी महिलाओं के चेहरे पर दिख रही थी।                    जल जीवन मिशन दूरस्थ गांवों और वनांचलों की महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला रहा है। आधी आबादी के एक बड़े हिस्से को पीने के पानी के लिए रोज जूझना पड़ता था। खासतौर से गर्मियों के दिनों में जब हर साल सिर पर पानी के बर्तन का सफर कुछ सौ मीटरों से कुछ किलोमीटरों में बदल जाता था।                     जीवन के लिए अनिवार्य जरुरत पानी की व्यवस्था गर्मियों में महिलाओं का जीवन दुष्कर बना देती थी। दुगनपाल में भी महिलाओं को रोज गांव के हैंडपंप या कुआं पर जाकर घर के सभी लोगों के लिए पानी का इंतजाम करना पड़ता था। घर में नल लग जाने से अब इस समस्या से निजात मिल गई है। जल जीवन मिशन के काम जैसे-जैसे पूरे होते जा रहे हैं, महिलाओं की बाहर से पानी लाने की चिंता और तकलीफ दूर होते जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में अब तक साढ़े आठ हजार से अधिक योजनाओं को पूर्ण कर संचालन के लिए पंचायतों को सौंपा जा चुका है।                    जल जीवन मिशन महज हर घर तक पेयजल पहुंचाने की योजना नहीं है। यह महिलाओं की दिनचर्या और जीवन में भी बड़ा बदलाव ला रहा है। गांवों में परंपरागत रूप से घर में पेयजल और अन्य जरूरतों के लिए पानी के इंतजाम का जिम्मा महिलाओं पर ही है। घर तक पानी की पहुंच न होने के कारण उन्हें हैंडपंपो, सार्वजनिक नलों, कुंओं या अन्य स्रोतों से रोज पूरे परिवार के लिए जल संग्रहण करना पड़ता है।                      रोजाना का यह श्रमसाध्य और समयसाध्य काम बारिश तथा भीषण गर्मी के दिनों में और कठिन हो जाता है। कई इलाकों में गर्मियों में जलस्रोतों के सूख जाने के कारण दूर-दूर से पानी लाने की मजबूरी रहती है। परिवार के लिए पानी की व्यवस्था हर दिन का संघर्ष बन जाता है। महिलाओं के दिन के कई घंटे इसी काम में निकल जाते हैं।                     जल जीवन मिशन हर घर तक नल से जल पहुंचाने के साथ ही महिलाओं को कई समस्याओं से निजात दिला रहा है। घर तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचने से वे कई चिंताओं से मुक्त हो गई हैं। अब रोज-रोज पानी के लिए बहुत सारा श्रम और समय नहीं लगाना पड़ता। इससे उन्हें घर के दूसरे कामों, बच्चों की परवरिश, खेती-बाड़ी एवं आजीविका के अन्य कार्यों के लिए अधिक समय मिल रहा है और वे इन कार्यों पर अपना ज्यादा ध्यान व समय दे पा रही हैं।                     जल जीवन मिशन से बारहों महीने घर पर ही जलापूर्ति से लगातार बारिश तथा गर्मी के दिनों में बाहर से पानी लाने की मुसीबत दूर हो गई है। गर्मियों में जलस्तर के नीचे चले जाने से तथा बरसात में लगातार बारिश से जल की गुणवत्ता प्रभावित होती है। गुणवत्ताहीन पेयजल से पेट तथा निस्तारी के लिए खराब जल के उपयोग से त्वचा संबंधी रोगों का खतरा रहता है। जल जीवन मिशन ने सेहत के इन खतरों को भी दूर कर दिया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बैठक में शामिल होने दिल्ली पहुंचे

भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक 11 जून को नई दिल्ली में होने जा रही है। बैठक का विषय '2047 तक विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास' रखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस अति महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिए 10 जून को नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की इस बैठक में राज्यों के मुख्यमंत्री और उप राज्यपाल एक साथ मिलकर समावेशी मानव विकास प्रारूप पर चर्चा करेंगे। बैठक मुख्यत: 'मूलभूत मानव पूंजी और भविष्य के लिए तैयार कौशल', 'उत्पादक रोजगार, उद्यमिता और विकेंद्रीकृत विकास', 'स्वास्थ्य, पोषण और कल्याण' एवं 'सभी के लिए समानता और गरिमा' से जुड़े विषयों पर केन्द्रित रहेगी। बैठक में देश भर में उद्यमिता को बढ़ावा देने, कौशल विकास को बढ़ाने और स्थायी रोजगार के अवसर सृजित करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल/प्रशासक, केंद्रीय मंत्री पदेन सदस्य और विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में और नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य और मुख्य कार्यकारी अधिकारी उपस्थित रहेंगे।  

Sirsa News: रेणू भाटिया के बयान पर भड़के स्वास्थ्य कर्मी, नर्सिंग स्टाफ के समर्थन में किया विरोध

सिरसा. जिला नागरिक अस्पताल में नर्सिंग आफिसर्स की गेट मीटिंग आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला प्रधान राजकुमार भारद्वाज ने की। नर्सिंग आफिसर के खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने वाली महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया द्वारा इस्तीफा दिए जाने पर नर्सिंग स्टाफ ने हड़ताल वापस ले ली। राजकुमार भारद्वाज ने कहा कि रेणु भाटिया ने अभद्र टिप्पणी कर नर्सिंग अमले की छवि को सार्वजनिक रूप से धूमिल किया है, इसलिए उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नर्सिंग स्टाफ की वास्तविक ड्यूटी वार्ड में मरीजों की देखभाल की होती है। डाक्टर के साथ हर समय रहना नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी नहीं है। बिना तथ्य और प्रमाण के नर्सिंग स्टाफ को कटघरे में खड़ा करना गलत है। भारद्वाज ने कहा कि जिसने मासूम बच्ची के साथ जघन्य काम किया है, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। इस घटना से न केवल हम बल्कि हमारा समाज भी पूरा आहत है और पीड़िता को त्वरित न्याय मिलना चाहिए। सार्वजनिक माफी पर अड़ा नर्सिंग स्टाफ अगर रेणु भाटिया ने सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं मांगी तो हमें मजबूरन कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। इस मौके पर अमित जिला महासचिव, मुकेश, गायत्री देवी मैट्रन, सीनियर नर्सिंग आफिसर, अनिता, मीना, रानी, पूजा, नरेश, शशि, गीता, सीमा, नर्सिंग आफिसर हरजित, उर्मिल उपस्थित थे। चेयरपर्सन का कार्यकाल तीन साल का था, लेकिन वह साढ़े 4 साल तक इस पद पर रही। हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम 2012 के मौजूदा प्रविधान के अंतर्गत रेनू भाटिया का राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन के तौर पर कार्यकाल नियमानुसार पिछले वर्ष जनवरी, 2025 में ही पूरा हो चुका था। उन्होंने 19 जनवरी 2022 को चेयरपर्सन के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2012 की धारा 4(1) में स्पष्ट प्रविधान है कि आयोग की चेयरपर्सन, वाइस-चेयरपर्सन और सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष से अधिक नहीं हो सकता। इस आधार पर उनका कार्यकाल 18 जनवरी 2025 को पूरा हो गया था। रेणू भाटिया का राजनीतिक सफर वर्ष 2000 में फरीदाबाद में भाजपा टिकट पर पार्षद चुनाव जीती और डिप्टी मेयर भी बनीं। 2010 में पार्षद चुनाव में हार झेलनी पड़ी। हरियाणा भाजपा में प्रदेश प्रवक्ता के पद पर रही। वर्ष 2017 में मनोहर लाल सरकार में महिला आयोग की सदस्य बनीं। मनोहर सरकार ने 19 जनवरी 2022 को महिला आयोग की चेयरपर्सन बनाया। यूं चला घटनाक्रम     29 मई को नाबालिग से दुष्कर्म हुआ।     31 मई को आरोपित डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज हुआ।     1 जून को डॉक्टर की गिरफ्तारी हुई।     6 जून को राज्य महिला आयोग ने अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी किया।     7 जून को राज्य महिला आयोग अध्यक्ष रेनू भाटिया ने अस्पताल का दौरा किया।     8 जून को कुरुक्षेत्र में नर्सों ने मोर्चा खोला और प्रदर्शन किया।     9 जून को सुबह प्रदेश भर में नर्सिंग ऑफसर्स की 2 घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक।     9 जून रात को रेणू भाटिया का इस्तीफा। यह की थी टिप्पणी चेयरपर्सन रेणू भाटिया ने रविवार को निरीक्षण के दौरान खड़ी एक स्टाफ से पूछा था कि क्या आपकी बेटी है। उन्होंने हां कहा तो चेयरपर्सन बोलीं कि उसे किसी अनजान व्यक्ति के साथ अकेला छोड़ सकती है क्या?

सिलयारी दुष्कर्म मामले पर बाल आयोग सख्त, स्वतः संज्ञान लेकर तलब की रिपोर्ट

रायपुर   रायपुर जिले के धरसींवा थाना क्षेत्र अंतर्गत सिलयारी में 13 वर्षीय नाबालिग बालिका के कथित अपहरण एवं दुष्कर्म प्रकरण को छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान में लिया है। आयोग को इस मामले की जानकारी 04 जून 2026 को सोशल मीडिया एवं समाचार पोर्टल में प्रकाशित खबरों के माध्यम से प्राप्त हुई, जिसके आधार पर प्रकरण पंजीबद्ध किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रारंभिक जांच में बालिका द्वारा अपराध से इंकार किए जाने के कारण प्रकरण को खारिज करने की तैयारी की जा रही थी, किंतु बाद में वायरल वीडियो-ऑडियो एवं पुनः जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया तथा विवेचना में कथित लापरवाही पाए जाने पर संबंधित चौकी प्रभारी को निलंबित किया गया। मामला नाबालिग सुरक्षा, पुलिस विवेचना की गुणवत्ता एवं बाल अधिकारों की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 13(1)(ज) एवं धारा 14 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आयोग ने जिला बाल संरक्षण अधिकारी, रायपुर को पीड़ित बालिका का कथन दर्ज कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने तथा बालिका को उसके अभिभावकों सहित 15 जून 2026 को आयोग के समक्ष उपस्थित कराने के निर्देश दिए हैं। प्रकरण में पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम एवं अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के अनुपालन की भी समीक्षा की जाएगी।

Punjab Police Action: ड्रग माफिया की आर्थिक कमर तोड़ने की तैयारी, 73 हवाला ऑपरेटर दबोचे, 830 करोड़ की संपत्ति जब्त

चंडीगढ़. पंजाब पुलिस ने 'युद्ध नशों विरुद्ध' अभियान के अगले चरण के तहत नशे के कारोबार से जुड़े अवैध हवाला नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए राज्यव्यापी तीन दिवसीय विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन अवैध हवाला संचालकों पर कार्रवाई करना है, जो नशा तस्करी से अर्जित धन के लेन-देन में मदद कर तस्करी नेटवर्क को आर्थिक मजबूती प्रदान करते हैं। पंजाब पुलिस के अनुसार, 'युद्ध नशों विरुद्ध' अभियान के तहत अब तक 73 हवाला संचालकों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 10 करोड़ रुपये की हवाला राशि बरामद की गई है। इसके अलावा वर्ष 2022 से अब तक एनडीपीएस एक्ट की धारा 68एफ के तहत 830 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां फ्रीज की जा चुकी हैं। 1727 प्रस्ताव कार्रवाई के लिए भेजे गए पुलिस ने बताया कि एक मार्च 2025 से अब तक नशा तस्करी से अर्जित 20 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई बरामद की गई है। वहीं, अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने के लिए भेजे गए 1,727 प्रस्तावों की सक्षम प्राधिकरण द्वारा पुष्टि की जा चुकी है। पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नशे के खिलाफ उसकी जीरो टॉलरेंस नीति जारी रहेगी और नशा तस्करी की आर्थिक रीढ़ को तोड़ने के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। पुलिस का कहना है कि नशा तस्करों, हवाला संचालकों, नशे की कमाई और अवैध तरीके से अर्जित संपत्तियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर संगठित नशा कारोबार के वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि नशा मुक्त पंजाब के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

Chhattisgarh Forest Department में प्रशासनिक बदलाव, 4 वरिष्ठ IFS अधिकारियों के तबादले और नई तैनाती

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में वरिष्ठ स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए चार भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों को नई जिम्मेदारी सौंपी है। जारी आदेश के अनुसार प्रधान मुख्य वन संरक्षक (अनुसंधान एवं मूल्यांकन) कोलेन्द्र कुमार को वर्तमान दायित्वों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान रायपुर के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वन विभाग में एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव के तहत ओपी यादव को प्रभारी प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव प्रबंधन एवं जैव विविधता संरक्षण) तथा सह-मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के पद पर पदस्थ किया गया है। वर्ष 2001 बैच की वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी शालिनी रैना को मुख्य कार्यपालन अधिकारी (कैम्पा) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वे वर्तमान में वन मुख्यालय में प्रशासन, समन्वय तथा राजपत्रित-अराजपत्रित कार्मिकों से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं। इसके अलावा माधेश्वर डी. को प्रभारी अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास एवं योजना, बजट, लेखा एवं लेखा परीक्षण) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वे वर्तमान में वन्यजीव प्रबंधन एवं योजना, राज्य जैव विविधता बोर्ड तथा राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण से जुड़े विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं।