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जंगल से गांव तक… कूनो के चीते पहुंचे मानपुर, कुत्ते और लोगों ने किया पीछा

श्योपुर मानपुर क्षेत्र के बालापुरा और काशीपुर गांवों में दो जंगली चीते खेतों, पगडंडियों और गांव की सड़कों पर टहलते दिखाई दिए। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस क्षेत्र में पहले कभी भी चीते नहीं देखे गए थे। वायरल हुए वीडियो में चीतों के पीछे एक कुत्ता और ग्रामीण हाथ में डंडा लिए नजर आ रहे हैं। जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम और ‘चीता मित्र’ गांवों में पहुंच गए हैं। चीता मित्र लगातार निगरानी कर रहे हैं और ग्रामीणों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दोनों चीतों की लोकेशन पर ड्रोन और बीट गार्ड्स के जरिए नजर रखी जा रही है। यदि वे लंबे समय तक गांवों में ठहरते हैं, तो उन्हें सुरक्षित तरीके से वापस कूनो नेशनल पार्क के क्षेत्र में भेजा जाएगा।   ग्रामीणों से अपील चीतों से दूर रहें ग्रामीणों ने प्रशासन से सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि खेतों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों की सुरक्षा के लिए वन विभाग विशेष टीम तैनात करे। वन विभाग ने चेतावनी दी है कि कोई भी व्यक्ति चीतों के पास न जाए और न ही उन्हें फोटो खींचने के लिए उकसाए, क्योंकि इससे खतरा बढ़ सकता है। इसके पहले चीतों का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वो बंधी हुई गाय के सामने ही उसके बछड़े का शिकार कर लेते हैं। वह कुछ देर तक वहीं रुककर उसे खाते हुए नजर आते हैं। चीता प्रोजेक्ट के तहत कूनो नेशनल पार्क में लाए गए चीते कई बार पार्क की सीमाओं को लांघकर गांवों में पहुंचे हैं। अब उनके किसी गांव में पहुंचाना आम हो गया है, लेकिन चीता मित्र लगातार उन पर निगाह रखकर ग्रामीणों को उनके लिए सतर्क करते रहते हैं।  

वीआईपी के लिए रोके गए दर्शन, कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन पर लगाया ₹55 हजार का जुर्माना

भोपाल वीआईपी की वजह से भोपाल के एक परिवार को मध्य प्रदेश के मैहर में स्थित प्रसिद्ध शारदा माता मंदिर में दर्शन नहीं हो पाए थे। उन्होंने आवाज उठाई तो कर्मचारियों ने उन्हें अपमानित किया। इस परिवार ने मंदिर प्रबंधन की ओर से तय शुल्क देकर वाहन पार्किंग की थी। रोपवे का शुल्क दिया था। अब भोपाल के जिला उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए मंदिर प्रबंधन और रोपवे का संचालन करने वाली कंपनी को इस परिवार के लिए 55 हजार रुपये का हर्जाना अदा करने का निर्णय दिया है। भोपाल के बागमुगालिया स्थित अरविंद विहार निवासी ललित कुमार गुप्ता पत्नी, बच्चों और अन्य परिजनों के साथ चार साल पहले 2021 में मैहर में मां शारदा देवी के दर्शन करने गए थे। वहां उन्होंने 50 रुपये पार्किंग शुल्क दिया। मंदिर तक जाने के लिए रोपवे के लिए पांच टिकटों के लिए 130 रुपये प्रति टिकट की दर से 650 रुपये का भुगतान किया। उनका समूह लाइन में लगा रहा, लेकिन उनको दो घंटों के बाद भी दर्शन नहीं हो पाए।   पांच लाख रुपये की क्षतिपूर्ति मांगी थी इस बीच रोपवे प्रणाली के कर्मचारी बिना टिकट वाले वीआईपी लोगों को शीघ्र दर्शन कराकर ले आए। इस परिवार ने इस पर आपत्ति जताई तो उनके साथ रोपवे प्रणाली के कर्मचारियों ने दुर्व्यवहार किया। इससे आहत होकर उन्होंने 2022 में मां शारदा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और दामोदर रोपवे इंफ्रा लिमिटेड के खिलाफ याचिका दायर करके पांच लाख रुपये की क्षतिपूर्ति मांगी। भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष गिरिबाला सिंह, सदस्य अंजुम फिरोज व प्रीति मुद्गल की बैंच ने सुनवाई में इसे सेवा में कमी मानते हुए मंदिर प्रबंधन समिति और रोपवे का संचालन करने वाली कंपनी को परिवार को दर्शन से वंचित करने के लिए जिम्मेदार ठहराया। आयोग ने कहा- मंदिर में कोई भी भक्त खास या वीआईपी नहीं होता उपभोक्ता मामलों की अधिवक्ता संभावना राजपूत ने बताया कि प्रकरण में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था ही आधार बनी है। जिला उपभोक्ता आयोग ने निर्णय में कहा कि किसी भी मंदिर में कोई भी भक्त खास या वीआइपी नहीं होता है। सभी को एक ही श्रेणी में रखकर लाइन में लगाकर मां शारदा का दर्शन कराने का नियम होना चाहिए। यदि कोई भक्त रोपवे से टिकट लेकर लाइन में लगा और दो घंटे बाद भी दर्शन नहीं हो पाए, वहीं दूसरों को विशेष श्रेणी का दर्जा देकर दर्शन कराया गया तो यह सेवा में कमी है। कलेक्टर ने खड़े कर दिए हाथ मामले में मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष के रूप में कलेक्टर को प्रतिवादी बनाया गया था। कलेक्टर का कहना था कि मंदिर प्रबंध समिति में दर्शन के काम के लिए दूसरे लोग तैनात हैं। वहीं रोपवे संचालक कंपनी ने अत्यधिक भीड़ को इसकी वजह बताई।

आज और कल MP के 22 जिलों में बारिश, 13 अगस्त से फिर तेज बरसात के संकेत

भोपाल अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से मध्य प्रदेश में कहीं-कहीं बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। इसी क्रम में शनिवार को सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक दमोह में 92, पचमढ़ी में 29, रीवा में 15, खजुराहो में पांच, सिवनी में तीन, जबलपुर एवं सीधी में दो, छिंदवाड़ा में एक मिलीमीटर बारिश हुई। आज और कल भोपाल, रायसेन, राजगढ़, सीहोर, विदिशा, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, गुना, ग्वालियर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, मुरैना, श्योपुर, भिंड, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सागर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिले में बारिश के आसार हैं। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक 13 अगस्त को बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने जा रहा है। उसके असर से एक बार फिर झमाझम बारिश का दौर शुरू होने के आसार हैं। रविवार, सोमवार को सागर, नर्मदापुरम, भोपाल, ग्वालियर, चंबल संभाग के जिलों में मध्यम स्तर की बारिश हो सकती है।   यहां बना हुआ है चक्रवात मौसम विज्ञान केंद्र के विज्ञानी पीके रायकवार ने बताया कि मानसून द्रोणिका वर्तमान में भटिंडा, रोहतक, दिल्ली, हरदोई, बाराबंकी, देहरी, बांकुरा, कोंटाई से बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं उसके आसपास हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात बना हुआ है। इस चक्रवात से लेकर झारखंड तक एक द्रोणिका बनी हुई है। इसी चक्रवात से एक अन्य द्रोणिका गुजरात तक बनी हुई है, जो पश्चिमी मध्य प्रदेश से होकर जा रही है। मध्य प्रदेश में फिर शुरू होगी अच्छी बारिश 13 अगस्त को बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र बनने जा रहा है। इस मौसम प्रणाली के असर से मध्य प्रदेश में एक बार फिर अच्छी बारिश का सिलसिला शुरू होने की उम्मीद है। मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने बताया कि मानसून द्रोणिका नीचे आने लगी है। पश्चमी मध्य प्रदेश से होकर द्रोणिका भी गुजर रही है। इस वजह से रुक-रुककर बारिश होने लगी है। 13 अगस्त को कम दबाव का क्षेत्र बनने के बाद अच्छी बारिश होने की उम्मीद है।

रक्षाबंधन पर योगी सरकार का रिकॉर्ड, सिर्फ 2 दिन में 50 लाख यात्रियों ने की बस यात्रा

  प्रदेश की लाखों बहनों ने उठाया योगी सरकार की निशुल्क यात्रा का लाभ 8 अगस्त को 19.5 लाख, 9 अगस्त को 31.7 लाख यात्रियों ने किया सफर कुल यात्रियों में 70 प्रतिशत तक यात्री निशुल्क यात्रा सुविधा से हो रहे लाभान्वित तीन दिनों में 75 लाख से अधिक यात्रियों के यात्रा करने का अनुमान   लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर रक्षाबंधन पर्व पर महिलाओं के लिए शुरू की गई निःशुल्क बस यात्रा योजना ने इस बार यात्री संख्या के नए कीर्तिमान बनाए हैं। तीन दिनों तक चलने वाली इस सुविधा को देखते हुए रात 12 बजे तक इसके 75 लाख यात्रियों का रिकॉर्ड बनाने की संभावना है। परिवहन निगम के अनुसार इसमें 70 प्रतिशत तक वह यात्री हो सकते हैं, जिन्हें सरकार की ओर से निशुल्क यात्रा का लाभ दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि योगी सरकार ने रक्षाबंधन के पर्व पर प्रदेश की माताओं और बहनों को बड़ी सौगात देते हुए 8 से 10 अगस्त तक परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा का तोहफा दिया है। इसमें महिलाओं के साथ एक सहयात्री को भी यह सुविधा दी जा रही है। 3 दिनों में 75 लाख यात्रियों के सफर का अनुमान परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक मासूम अली सरवर के अनुसार सामान्य दिनों में निगम की बसों में प्रतिदिन 14-15 लाख यात्री सफर करते हैं, लेकिन इस बार रक्षाबंधन पर्व के शुरुआती दो दिनों में ही यह आंकड़ा 50 लाख से अधिक पहुंच गया। इनमें लगभग 70 प्रतिशत महिला यात्री थीं, जिन्होंने मुख्यमंत्री योगी की ओर से दिए गए 66 घंटे के ‘सम्मान के तोहफे’ का लाभ लिया। एमडी सरवर ने बताया कि 8 अगस्त की सुबह 6 बजे से ही बस अड्डों पर यात्रियों की भारी भीड़ रही। पहले दिन यानी 8 अगस्त को 19.5 लाख से ज्यादा लोगों ने यात्रा की, जो सामान्य दिनों की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक था। रक्षाबंधन के दिन 9 अगस्त को तो यह संख्या 31.7 लाख के पार पहुंच गई, जो सामान्य दिनों की तुलना में 210 प्रतिशत से अधिक रही। तीसरे दिन 10 अगस्त को दोपहर 12.50 बजे तक ही 13 लाख यात्री सफर कर चुके थे और रात 12 बजे तक यह संख्या 25 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। इस तरह तीन दिनों में 75 लाख से अधिक लोग बसों में यात्रा करेंगे, जो परिवहन निगम के इतिहास में अभूतपूर्व संख्या है। चलाई गईं अतिरिक्त बसें, तैनात रहे सभी कर्मचारी उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस बार 8 अगस्त सुबह 6 बजे से 10 अगस्त मध्यरात्रि 12 बजे तक महिलाओं और बेटियों के लिए सभी श्रेणी की रोडवेज बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा उपलब्ध कराई गई। इस अवधि में जरूरत के अनुसार अतिरिक्त बसें चलाई गईं और समस्त अनुबंधित बसों को भी संचालन में लगाया गया। प्रमुख बस स्टेशनों — गाजियाबाद, मुरादाबाद, मेरठ, बरेली, लखनऊ, सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़, कानपुर एवं इटावा — पर यात्रियों की अधिक संख्या को देखते हुए विशेष ड्यूटी और अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की गई। उन्होंने यह भी बताया कि चालक-परिचालकों को प्रोत्साहन राशि देने की योजना लागू की गई है, जिसमें 1800 किलोमीटर संचालन पूर्ण करने पर 1200 रुपए का भुगतान और 6 दिनों तक लगातार कार्य करने पर अतिरिक्त 0.55 रुपए प्रति किलोमीटर दिया जाएगा। वहीं तकनीकी कर्मचारियों को भी प्रतिदिन उपस्थित रहने पर एकमुश्त 500 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। संचालन व्यवस्था बेहतर बनाए रखने वाले कार्मिकों और पर्यवेक्षकों को भी ₹5000 प्रति स्टेशन के हिसाब से सम्मानित किया जाएगा। बहनों ने योगी भाई को दिया धन्यवाद इस सुविधा का लाभ पाने वाली प्रदेश की लाखों महिलाओं ने इस तोहफे के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद कहा। उन्होंने कहा कि योगी सरकार की यह पहल सिर्फ एक यात्री सुविधा नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और सम्मान का प्रतीक है, जिससे न केवल रक्षाबंधन पर्व की खुशियां बढ़ी हैं, बल्कि करोड़ों महिलाओं को सुरक्षित, सुलभ और सम्मानजनक यात्रा का भरोसा भी मिला है। झांसी बस डिपो से यात्रा करने वाली संध्या ने कहा कि योगी सरकार ने यह अच्छा कदम उठाया है। इससे महिलाओं को काफी अच्छा महसूस हो रहा है। मुरादाबाद बस डिपो पर महिला यात्री जीतू ने कहा कि इस पहल से लाखों बहनों को लाभ हो रहा है, इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हार्दिक शुक्रिया। योगी सरकार की सुविधा का लाभ हिंदु समुदाय के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय की बहनों ने भी उठाया। उन्होंने भी एक सहयात्री के साथ निशुल्क यात्रा की और योगी सरकार का धन्यवाद दिया। विगत 8 वर्षों में 1.23 करोड़ बहनों को मिला मुफ्त सफर का लाभ 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शुरू हुई रक्षाबंधन पर माताओं-बहनों के लिए रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा की योजना बीते आठ वर्षों में नारी सशक्तिकरण और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन गई है। इन 8 वर्षों में  1,23,30,194 महिलाओं को इसका लाभ मिला है, जिसके लिए सरकार ने 101.42 करोड़ रुपए का आर्थिक बोझ वहन किया। इन वर्षों में 2023 में सर्वाधिक 29 लाख से अधिक महिलाओं ने निशुल्क यात्रा की। यह सुविधा खासकर ग्रामीण, पिछड़े और निम्न आय वर्ग की महिलाओं के लिए “सम्मान का तोहफा” साबित हुई है, जिससे उन्हें सुरक्षित, सुलभ और सम्मानजनक यात्रा का अवसर मिला। रक्षाबंधन को भावनात्मक और पारिवारिक जुड़ाव के साथ मनाने का यह अनूठा प्रयास दर्शाता है कि योगी सरकार महिला कल्याण को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे ज़मीन पर उतारकर महिलाओं की गरिमा और सुविधा के लिए प्रतिबद्ध है।

योगी सरकार का लक्ष्य 2027 तक फाइलेरिया मुक्त हो उत्तर प्रदेश, फाइलेरिया उन्मूलन अभियान शुरू

– सीएम योगी के निर्देश पर 27 जिलों में जनप्रतिनिधियों व सीएमओ ने किया अभियान का आगाज – 28 अगस्त तक स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर खिलाएंगे दवा, दवा जरूर खाएं और खुद के साथ समुदाय को बीमारी से बचाएं लखनऊ,  योगी सरकार प्रदेश को वर्ष 2027 तक फाइलेरिया मुक्त बनाने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रही है। इसी के तहत प्रदेश में रविवार से 27 जिलों के 195 ब्लाॅक में लिम्फेटिक फाइलेरियासिस के उन्मूलन के प्राथमिक उद्देश्य से व्यापक सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान शुरू किया गया। इन जिलों में जनप्रतिनिधियों ने दवा खाकर अभियान की शुरुआत की। सामुदायिक भागीदारी के महत्व को समझते हुए, योगी सरकार ने कई विभागों को शामिल करते हुए सहयोगात्मक प्रयास की योजना बनाई है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, शिक्षा विभाग, पंचायती राज विभाग और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर व्यापक जन सहयोग सुनिश्चित करने और एमडीए अभियान की अंतिम सफलता सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को अभियान से जोड़ा गया राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने बताया कि सीएम योगी की मंशा के अनुरूप अभियान को सफल बनाने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। इस उद्देश्य अभियान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों का पालन करे और उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त करे। इसके अतिरिक्त, मिशन निदेशक ने सभी सहयोगी विभागों को विस्तृत दिशा-निर्देश और प्रोटोकॉल प्रदान करने में अग्रणी भूमिका निभाई है। ये दिशा-निर्देश अभियान के कार्यान्वयन के दौरान एकीकृत और सुसंगत दृष्टिकोण सुनिश्चित करने के लिए तैयार किए गए हैं। जन सहभागिता रणनीति का एक प्रमुख पहलू स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को शामिल करना है, जो दी जाने वाली दवा की सुरक्षा और प्रभावशीलता के बारे में जनता की किसी भी चिंता या आशंका को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। फाइलेरिया की रोकथाम में बच्चे और गुरू जी निभाएंगे अहम भूमिका शिक्षा विभाग विभिन्न स्कूल-आधारित गतिविधियों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाकर इस अभियान में सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है। शिक्षक छात्रों को फाइलेरिया की रोकथाम के बारे में शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस शिक्षा को दैनिक दिनचर्या में शामिल किया जाएगा, जहां शिक्षक प्रार्थना सभाओं के दौरान फाइलेरिया की रोकथाम के महत्व को समझाएँगे। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य एमडीए अभियान में अभिभावकों की भागीदारी और समर्थन को प्रोत्साहित करना है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग भी अभियान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी के प्रसार में सक्रिय रूप से शामिल है। यह जानकारी राशन की दुकानों पर रणनीतिक रूप से साझा की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आबादी के एक बड़े हिस्से तक पहुंच हो। अभियान का उद्देश्य उन परिवारों को अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है जो इस अभियान से हिचकिचा रहे हैं। 15 साल बाद दिखाई देते हैं फाइलेरिया के लक्षण प्रमुख सचिव ने अभियान के महत्व को रेखांकित किया है और इस बात पर ज़ोर दिया है कि यह फाइलेरिया के दुर्बल करने वाले प्रभावों के विरुद्ध महत्वपूर्ण निवारक उपाय है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अभियान की सफलता व्यापक जनभागीदारी और सहयोग पर निर्भर करती है। फाइलेरिया, संक्रमित क्यूलेक्स मच्छरों के काटने से फैलने वाला रोग है, जिसके लक्षण अक्सर सूजन और दूधिया पेशाब आने के काफी समय बाद, आमतौर पर 10-15 साल बाद दिखाई देते हैं। हालाँकि फाइलेरिया वर्तमान में लाइलाज है, लेकिन पाँच साल तक दी जाने वाली वार्षिक दवा इस रोग की शुरुआत को प्रभावी ढंग से रोक सकती है। 35 हजार से अधिक औषधि प्रशासक और 7 हजार से अधिक पर्यवेक्षक किये गये तैनात एमडीए अभियान औरैया, बहराइच, बलरामपुर, बस्ती, चंदौली, देवरिया, इटावा, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, कौशाम्बी, लखीमपुर खीरी, कुशीनगर, महाराजगंज, मिर्जापुर, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, सीतापुर, श्रावस्ती, रायबरेली और सुल्तानपुर में चलेगा। इसके लिए 35483 औषधि प्रशासक (डीए) और 7096 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। 195 ब्लॉकों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में सूचना एवं संचार तकनीक सामग्री भेज दी गई है और यह सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत सूक्ष्म योजनाएँ बनाई गई हैं कि 195 ब्लॉक टास्क फोर्स की बैठकें हुई हैं और तैयारियों का जायजा लिया गया है। किसी भी गंभीर प्रतिकूल दवा प्रभाव से निपटने के लिए 390 त्वरित प्रतिक्रिया दल तैयार किया गया है। इस व्यापक कार्यान्वयन का उद्देश्य आबादी के एक बड़े हिस्से को फाइलेरिया के खतरे से बचाना है।

गऊ माता की कृपा से समृद्धि का रास्ता: यूपी के लिए सीएम योगी का विजन

  एक गाय के गोबर से 5500 किलोमीटर बिना प्रदूषण फैलाए चलेगी कार एक गोवंश के गोबर से सालाना 225 लीटर पेट्रोल के बराबर मीथेन होगी तैयार रफ्तार पकड़ेगी अर्थव्यवस्था : स्वरोजगार से लाखों की होगी कमाई, बड़ी संख्या में पैदा होंगे नए तौर तरीके के रोजगार निराश्रित गोवंश से प्रदेश में हर दिन औसतन 54 लाख किलोग्राम गोबर (गोमेय) प्राप्त होता है प्रदेश में पहली बार गऊ माता से मिल रहे गोमेय का किया जा रहा इतना व्यापक रूप से प्रयोग लाखों ग्रामीण युवाओं को रोजगार और महिलाओं को लघु उद्यम से जोड़ने की तैयारी, योगी सरकार को मिलेगा राजस्व लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन और गऊ माता की कृपा से अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था नई रफ्तार पकड़ने जा रही है। प्रदेश में पहली बार गाय के गोबर से इतने बड़े पैमाने पर मीथेन तैयार की जाएगी, जो वाहनों को लंबी दूरी तक चलाने के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार और हरित अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी। विशेषज्ञों का कहना है कि एक गाय के गोबर से सालाना 225 लीटर पेट्रोल के बराबर मीथेन गैस तैयार होगी। इसे शुद्ध कर सीबीजी में बदला जाएगा, जिससे एक कार 5500 किलोमीटर से भी अधिक दूरी तय कर सकेगी। गोबर को सीबीजी संयंत्रों में प्रोसेस किया जाएगा उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में निराश्रित गोवंश से रोजाना औसतन 54 लाख किलोग्राम गोबर प्राप्त होता है। इस गोबर को सीबीजी संयंत्रों में प्रोसेस किया जा सकेगा, जिसका इस्तेमाल मीथेन बनाने से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में घरों में खाना पकाने, लघु उद्योगों में हीटिंग ईंधन और प्राकृतिक खेती में जैविक घोल के रूप में किया जाएगा। इससे लाखों रुपये तक की सालाना कमाई संभव होगी। कचरे से कंचन' की अवधारणा को मिलेगा बढ़ावा गो सेवा आयोग के ओएसडी डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि यह 'मीथेन फार्मिंग' आने वाले समय में जीवाश्म ईंधनों का विकल्प बन सकती है। यह योजना 'कचरे से कंचन' की अवधारणा को बढ़ावा दे रही है, जो परिवहन और हरित अर्थव्यवस्था के लिए प्रभावी ईंधन उपलब्ध कराएगी। डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि एक गोवंश के गोबर से तैयार मीथेन प्राकृतिक गैस का ही एक रूप है, जो पर्यावरण अनुकूल और किफायती भी है। हिंदी में कीवर्ड्स सीएम योगी विजन गऊ माता की कृपा वन ट्रिलियन इकोनॉमी यूपी गाय का गोबर सीबीजी 5500 किलोमीटर कार मीथेन गैस उत्पादन गोबर से सीबीजी संयंत्र ग्रामीण रोजगार योजना यूपी कचरे से कंचन अवधारणा हरित ईंधन उत्तर प्रदेश

विधायक सिंगरौली रामनिवास शाह ने अपने कार्यालय में आयोजित किया रक्षाबंधन का पर्व !

सिंगरौली हजारों की संख्या में माताएं बहने हुई शामिल उक्त रक्षाबंधन को भव्य बनाने में पार्टी कार्यकर्ताओं ने बढ़चढ़कर लिया भाग , बहनों ने विधायक को बांधी राखी माथे में तिलक लगाकर उनके लंबी आयु का वरदान मांगा वहीं उपरोक्त अवसर पर विधायक के द्वारा माताओं बहनों को उपहार स्वरूप हेल्मेट के साथ टिफीन बाँटा और उन्होंने कहा की बहनो के सुरक्षा की जिम्मेदारी भी एक भाई की होती है बढ़ रहे सड़क हादसों को लेकर उपस्थित बहनों को हेल्मेट प्रदान किया और हर घर परिवार के लोगों को सुरक्षा बरतने को कहा इस प्रकार से सामुहिक रूप से रक्षाबंधन का पर्व भव्य रूप में मनाने को लेकर उपस्थित लोगो ने जमकर सराहना की !

प्रेम और सहयोग की भाषा ने विदेश से आए सैलानियों के लिए तैयार की राह, स्थानीय संस्कृति में ढले सैलानी

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को पर्यटन के नजरिए से बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। इसी कड़ी में गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले को स्थानीय प्रशासन और पर्यटन समितियों की मेहनत से पर्यटन के क्षेत्र में नई  पहचान लगातार बढ़ रही है। बनमनई इको फाउंडेशन और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय नेचर हीलिंग कैंप में मलेशिया सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों ने बड़े ही उत्साह से भाग लिया। मलेशिया से चार विदेशी मेहमान इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए  पहुंचे थे। इनके साथ ही बिहार से फिल्म निर्माता आर्यन चंद्रप्रकाश, वरिष्ठ पत्रकार विभाष झा, डॉ अरविंद गुप्ता बंगलौर, ए के सिंह (सेवानिवृत्त प्रबंधक, कोल इंडिया), इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय और अमलाई के शोधार्थी सहित 20 अन्य प्रतिभागी कैंप में शामिल हुए।        कार्यक्रम में पर्यावरणविद् संजय पयासी ने जिले के दो प्रमुख जलप्रपात लक्ष्मणधारा और झोझा जल प्राप्त की ट्रैकिंग कराई। मलेशियाई मेहमानों का पेंड्रारोड रेलवे स्टेशन पहुंचे पर आत्मीय स्वागत किया गया। स्थानीय लोग उत्साह से भर उठे। सभी ने उनके साथ फोटो खिंचवाई। स्थानीय लोगों के इस उत्साह से विदेशी अतिथि अत्यंत प्रसन्न और प्रभावित हुए। उन्हें पेंड्रा की हरी सब्जियां, चरवाहों की बाँस की टोपी, और लक्ष्मणधारा की ऑफ-रोड राइडिंग ने उन्हें एक अनोखा अनुभव दिया।     लक्ष्मणधारा पर्यटन समिति द्वारा परोसे गए पकौड़े और लेमन जिंजर चाय का उन्होंने भरपूर आनंद लिया। इतने सुदूर क्षेत्र में भी पर्यटन समिति के उत्कृष्ट प्रबंधन ने सभी पर्यटकों को आश्चर्यचकित कर दिया। अरपा नदी पर स्थित लक्ष्मणधारा जलप्रपात अपने पूरे शबाब पर था। पानी की उड़ती बूंदों में छनकर आती सूर्य किरणें सुंदर इंद्रधनुष रच रही थीं। यही पर्यटन का आकर्षण है, जहां अलग-अलग भाषा, देश, परिवेश और संस्कृति के लोग अपने-अपने रंग लिए मिलते हैं।      शाम को पर्यटक लमना होमस्टे पहुंचे, जहां ग्रामीण महिलाओं ने तिलक लगाकर पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया। गांव वालों का प्रेम और सम्मान “अतिथि देवो भव” की परंपरा को सजीव कर रहा था। रात्रि में प्रस्तुत गौरा-गौरी का स्थानीय लोकनृत्य सभी को थिरकने पर मजबूर कर गया। लोक नृत्य और गायन, जो ग्रामीणों के पारंपरिक मनोरंजन के साधन हैं, ने अपनी अभिव्यक्ति से ऐसा अद्भुत दृश्य रचा जो स्थानीय सीमा से निकलकर वैश्विक हो गया। यही सांस्कृतिक आदान-प्रदान लमना गांव के सामुदायिक पर्यटन का आदर्श मॉडल है, जो न केवल आर्थिक रूप से ग्रामीणों को सशक्त कर रहा है, बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक दृष्टि से भी उन्हें समृद्ध बना रहा है।     शिविर के दूसरे दिन सुबह मलेशिया से आई पर्यटक एलिस ने ग्रामीण महिलाओं  के सहयोग से बड़ी दिलचस्पी के साथ नाश्ता तैयार किया। ग्रामीणजन उनकी भाषा नहीं समझते थे लेकिन प्रेम और सहयोग के लिए भाषा बाधा नहीं बनी। ग्रामीण महिलाएं अपने गांव से बाहर निकले बिना ही दूसरे देश की संस्कृति और खानपान से परिचित हुई। पर्यटकों ने झोझा जलप्रपात की ट्रैकिंग की, यहां लगभग 350 फीट नीचे गिरता  प्राकृतिक जलप्रपात अत्यंत ही सुंदर और दुर्गम है। जिला प्रशासन ने यहां तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का निर्माण कराया है, जिससे रास्ता आसान हो गया। यह निर्माण शासन की प्रतिबद्धता उत्कृष्ट उदाहरण है, जो इस क्षेत्र के पर्यटन को और सुलभ बनाता है।

पवित्रता जीवन का सबसे बड़ा गहना है: राजयोगिनी बीके छाया दीदी

– परमात्म रक्षासूत्र कार्यक्रम आयोजित – बहनों ने भाइयों की कलाई पर बांधा रक्षासूत्र सेंधवा ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के सेंधवा सेवाकेंद्र में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर परमात्म रक्षासूत्र समारोह आयोजित किया गया। इसमें ब्रह्माकुमारी बहनों ने भाइ बहनों की कलाई पर परमात्म रक्षासूत्र बांधकर सदा पवित्रता के पथ पर और ईश्वरीय मार्ग पर चलने का संकल्प कराया। मुख्य संचालिका राजयोगिनी छाया दीदी ने सभी वरिष्ठ भाई और बहनों को रक्षासूत्र बांधा। समारोह में राजयोगिनी बीके साधना दीदी ने कहा कि परमपिता शिव परमात्मा हम मनुष्य आत्माओं को पवित्रता का प्यारा बंधन बांधने के लिए परमधाम से आते हैं। पवित्रता जीवन का सबसे बड़ा गहना है। रक्षाबंधन पवित्रता का पर्व है। यह भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। उन्होंने संस्था का अनुभव बताते हुए कहा कि संस्था में 1966 में माउंट आबू में मात्र पांच ही भाई थे, बाकी सभी बहनें थीं। लेकिन आज यह हजारों भाई समर्पित रूप से सेवाएं दे रहे हैं। इन पांच बातों का रखें ध्यान- राजयोगिनी छाया दीदी ने कहा कि परमात्मा हम बच्चों को मुख्य पांच बातों के आधार पर ईश्वरीय ज्ञान देते हैं। आज के दिन सभी यह पांच संकल्प करें- पहला है पढ़ाई। पढ़ाई अर्थात् शिव बाबा रोज हमें जो ज्ञान मुरली के माध्यम से पढ़ाई पढ़ाते हैं और नई-नई बातें सिखाते हैं उन्हें जीवन में धारण करना है। रोज अच्छी तरह से मुरली का अध्ययन करें और देखें कि आज मुझे किस बात पर ध्यान देना है। दूसरा है- जीवन में सच्चाई। यदि हमारा आत्मिक चरित्र ऊंच, महान और सच्चाई युक्त है तो ऐसे जीवन का हर किसी पर प्रभाव पड़ता है। हमारा चाल, चलन, चरित्र पवित्रतायुक्त हो। तीसरा है- अपने विकारों, कमियों और कमजोरियों का दान करना है। आज के दिन सभी संकल्प करें कि अपने अंदर जो कमी कमजोरी है उसे पहचानकर दूर करेंगे।  चौथा है जीवन को आदर्श और मूल्यवान बनाना और पांचवा है- स्मृति। सदा यह स्मृति रहे कि मेरा लक्ष्य क्या है। मुझे क्या करना है। देशभर में मनाया जा रहा है रक्षाबंधन- छाया दीदी ने कहा कि ब्रह्माकुमारी बहनों जेल से लेकर जवानों, वृद्धाश्रम, अनाथालय, ऑफिसों में भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं। बहनों के त्याग-तपस्या, सेवा का परिणाम है कि आज यह ईश्वरीय विद्यालय यहां तक पहुंचा है। इस मौके पर एडवोकेट संजय मोरे, धार जिले से गणेश भाई, स्वर्ण समाज के सुबोध सोनीजी, सम्माज सेविका बहन दुर्गा गुप्ता भाई सहित बड़ी संख्या में भाई-बहन मौजूद रहे।    श्री आर्य जी को राखी बांधी अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अंतरसिंह आर्य जी को रक्षा सूत्र बांधे व सौगात दी,तथा संस्था के मुख्यालय पधरने का निमंत्रण भी दिया। वरिष्ठ कार्यकर्ता विकास आर्य को भी राखी बांधी।

भालुओं का आतंक: विभाग सोया, जनता डरी

NH-43 से सिद्धबाबा तक खतरे की घंटी, फिर भी "भालू नहीं हैं" का राग मनेंद्रगढ़ क्या भालू जंगल छोड़कर शहर की चौखट पर आ गए हैं? या फिर वन विभाग की आंखों पर "नजर बंद" का ताला लग गया है? NH-43 से सिद्धबाबा धाम (पहाड़) जाने वाली सड़क पर इन दिनों भालुओं की धमक साफ देखी जा सकती है। स्थानीय लोग कह रहे हैं – सावधान रहें, लेकिन विभाग कह रहा है – "भालू नहीं हैं"! सवाल ये है कि जब वार्ड क्रमांक 1 में रोजाना भालू घूमते नजर आते हैं, सिद्धबाबा पहाड़/जंगल से लेकर रेलवे कॉलोनी और चनवारीडांड तक लगभग एक दर्जन भालू विचरण कर रहे हैं, तो आखिर विभाग का दावा किस आधार पर है? लोगों का कहना है कि अंधेरा होते ही जंगल में तफरी करना खतरे से खाली नहीं है। युवाओं की आवाजाही और रोमांच की चाहत कहीं जान पर भारी न पड़ जाए। DFO कार्यालय में भी इस मुद्दे पर बवाल मच चुका है, लेकिन अब तक न तो कोई ठोस कदम उठाया गया और न ही भालुओं की निगरानी बढ़ाई गई। क्या वन विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? जनता की मांग :- भालुओं की सटीक गिनती और लोकेशन ट्रैक की जाए। खतरे वाले इलाकों में चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। रात्रि गश्त और पिंजरा अभियान चलाया जाए। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, भालुओं का आतंक और विभाग की चुप्पी—दोनों ही खतरनाक हैं।