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“हमारे शिक्षक” ऐप के माध्यम से AI आधारित सत्यापन और जियो-फेंसिंग तकनीक से सुनिश्चित हो रही वास्तविक उपस्थिति

भोपाल  स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विकसित "हमारे शिक्षक" ऐप प्रदेश के शिक्षकों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और तकनीक-सक्षम बना रहा है। ऐप के माध्यम से संचालित रियल-टाइम ई-अटेंडेंस प्रणाली एजुकेशन पोर्टल 3.0 से एकीकृत है, जिससे उपस्थिति संबंधी जानकारी तत्काल उपलब्ध होती है और प्रशासनिक निगरानी अधिक प्रभावी बनती है। विभाग की यह पहल पारदर्शिता, जवाबदेही, प्रशासनिक दक्षता तथा डेटा आधारित प्रबंधन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। तकनीकी नवाचार के माध्यम से विभाग शिक्षा प्रशासन को अधिक उत्तरदायी, प्रभावी एवं आधुनिक बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। ई-अटेंडेंस प्रणाली में AI आधारित Liveness Authentication तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसके तहत कर्मचारी को उपस्थिति दर्ज करते समय पलक झपकाने अथवा मुस्कुराने जैसी लाइव गतिविधि करनी होती है। इससे प्रॉक्सी अथवा फर्जी उपस्थिति की संभावना समाप्त होती है और यह सुनिश्चित होता है कि उपस्थिति वास्तविक व्यक्ति द्वारा ही दर्ज की गई है। साथ ही, जियो-फेंसिंग तकनीक के माध्यम से कर्मचारी केवल अपने निर्धारित विद्यालय, कार्यालय अथवा प्रशिक्षण केंद्र की निर्धारित सीमा के भीतर से ही उपस्थिति दर्ज कर सकते हैं। इससे कार्यस्थल पर वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित होती है। इससे उपस्थिति प्रणाली की विश्वसनीयता और सुदृढ़ हुई है। यह सुविधा नियमित कार्यदिवसों के अतिरिक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं अन्य विभागीय गतिविधियों के लिए भी उपलब्ध है। विभागीय अधिकारियों को जिला, विकासखंड, संकुल तथा विद्यालय स्तर तक उपस्थिति की रियल-टाइम मॉनिटरिंग, विश्लेषण एवं रिपोर्ट प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बनी है।  

विशेषज्ञों ने साइबर एवं फॉरेंसिक विषयों पर विस्तृत जानकारी दी

लखनऊ  योगी सरकार अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाती है। इसी लिए अपराधों के खुलासे के लिए वैज्ञानिक तरीकों को बढ़ावा दे रही है। इसी के तहत उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ़ फॉरेंसिक साइंस लखनऊ (यूपीएसआईएफएस) में मंगलवार को 48 प्रशिक्षु अधिकारियों ने परिभ्रमण किया। ये सभी डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी में प्रान्तीय सिविल सेवा (स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग, राज्य कर विभाग तथा कोषागार विभाग) के प्रशिक्षणरत अधिकारी हैं। इन्हें संस्थान के विषय विशेषज्ञों द्वारा साइबर एवं फॉरेंसिक विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गयी। प्रशिक्षु अधिकारियों ने ड्रोन तथा डीएनए लैब के कार्य और उनकी बारीकियों को समझा।  इस अवसर पर संस्थापक निदेशक डॉ. जी. के. गोस्वामी ने सभागार में उपस्थित अधिकारियो को संबोधित करते हुए कहा कि यह संस्थान वर्तमान में साइबर सुरक्षा तथा फॉरेंसिक विषय में विभिन्न संस्थानों को तकनीकी दक्षता आज निपुण कर रहा है। उन्होंने साक्ष्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी केस में साक्ष्य ही अपराधी को सजा तक पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि अभी आप लोगों का प्रशिक्षण का काल है जितना जिज्ञासु होगें उतना ही नई-नई चीजों को सीख पायेगें। उन्होंने कहा कि साइबर युग में अपराध के आयाम बदल रहे हैं। पहले फिजिकल अपराध होते थे लेकिन अब डिजिटल दुनिया में अपराध हो रहे है ऐसे में तकनीक के बारे मे हम सभी को अधिक से अधिक जानकारी रखनी होगी।   कार्यक्रम के अंत में उप निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव ने सभागार में उपस्थित समस्त अधिकारियों का अभार प्रकट किया। कार्यक्रम का संचालन जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी ने किया। इस अवसर पर पुलिस उप महानिरीक्षक हेमराज मीना, उप निदेशक चिरंजीब मुखर्जी, अतुल यादव, फेकल्टी डॉ. मनीष राय, डॉ पलक,  उप निरीक्षक आर शैलेन्द्र सिंह एवं कार्तिकेय सहित अन्य उपस्थित रहे।

यूपीकॉस के माध्यम से एकीकृत और तकनीक आधारित होगी आउटसोर्स प्रणाली

लखनऊ  प्रदेश में आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और पारिश्रमिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और एकरूप बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकॉस) की भूमिका को और प्रभावी बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को यूपीकॉस की कार्यप्रणाली एवं प्रगति की समीक्षा करते हुए इसके माध्यम से आउटसोर्स व्यवस्था को तकनीक आधारित, जवाबदेह और कर्मचारी हितैषी बनाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का गठन विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति, सेवा शर्तों, प्रक्रियाओं और मानदेय व्यवस्था में एकरूपता एवं पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि कर्मचारियों के हितों का संरक्षण हो और विभागों को भी सुव्यवस्थित मानव संसाधन उपलब्ध हो सके। मुख्यमंत्री ने आउटसोर्स कर्मियों से संबंधित एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल के विकास कार्य की समीक्षा करते हुए इसे समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पोर्टल के माध्यम से नियुक्ति, सत्यापन, अनुश्रवण तथा अन्य प्रक्रियाओं का केंद्रीकृत संचालन किया जाए, जिससे व्यवस्था अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बन सके। बैठक में आउटसोर्स एजेंसियों के एम्पैनलमेंट की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि एजेंसियों के चयन एवं संचालन से संबंधित सभी मानकों और प्रक्रियाओं को स्पष्ट, मानकीकृत और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। इसके लिए तैयार की जा रही व्यवस्था को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए, ताकि सभी विभागों को एक समान और सुव्यवस्थित प्रणाली उपलब्ध हो सके।

रायसेन के डायल-112 हीरोज खेलते-खेलते घर से निकले 03 वर्षीय गुम बालक को खोजकर परिजनों से मिलाया

भोपाल रायसेन जिले के थाना सुल्तानगंज क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं तत्पर कार्यवाही से गुम हुए 03 वर्षीय बालक को खोजकर सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया गया। समय रहते की गई तलाश एवं सहायता से बालक सकुशल अपने परिवार तक पहुँच सका और परिजनों की चिंता दूर हुई। 08 जूनको राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना सुल्तानगंज क्षेत्र अंतर्गत एक 03 वर्षीय बालक गुम हो गया है तथा पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही तत्काल सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ सैनिक 227  द्वारका प्रसाद एवं पायलट  सुनील कुमार मौके पर पहुँचे और परिजनों से बालक के संबंध में जानकारी प्राप्त की। डायल-112 जवानों ने बालक का फोटो लेकर आसपास क्षेत्र में उसकी तलाश एवं पूछताछ प्रारंभ की। लगातार प्रयासों के दौरान बालक तालाब के पास मिला, जहाँ से उसे सुरक्षित संरक्षण में लिया गया। डायल-112 टीम द्वारा आवश्यक पहचान एवं सत्यापन उपरांत बालक को उसके परिजनों के सुपुर्द किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार बालक खेलते-खेलते घर से निकल गया था और भटकते हुए तालाब के पास पहुँच गया था।अपने बच्चे को सकुशल पाकर परिजनों ने डायल-112 सेवा एवं पुलिस जवानों का आभार व्यक्त किया। डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता ही नहीं, बल्कि बच्चों एवं आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य भी निरंतर कर रही है।  

बिजली कार्मिक करेंगे शिकायतों का तत्काल समाधान

भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक  ऋषि गर्ग ने बिजली उपभोक्‍ताओं की सुविधा को देखते हुए फ्यूज ऑफ कॉल (विद्युत अवरोध को दूर करना) समय पर अटेण्ड करने के निर्देश दिए हैं। प्रबंध संचालक ने कहा है कि कंपनी के समस्त मैदानी अधिकारी अथवा कार्मिक अपने मोबाइल फोन को 24 घंटे चालू रखें एवं उपभोक्‍ताओं के कॉल अटेंड करें। इसके साथ ही क्षेत्रीय मुख्‍य महाप्रबंधक, संभागीय उप महाप्रबंधक एवं सभी मैदानी अधिकारी कॉल सेन्‍टर 1912, व्‍हाट्सऐप चैटबोट तथा स्‍थानीय वाट्सऐप ग्रुप एवं अन्‍य माध्‍यम से प्राप्‍त होने वाली विद्युत संबंधी शिकायतों का तत्‍काल समाधान करना सुनिश्चित करें। सभी मैदानी अधिकारियों से कहा है कि वे सीआरएम पोर्टल पर सतत निगरानी रखें और जनप्रतिनिधि तथा उपभोक्‍ताओं से संवाद बनाये रखें। कंपनी ने कहा है कि ऑंधी, बारिश के दौरान एवं अन्य व्यवधान के कारण हुए बिजली फॉल्ट की शिकायतें दर्ज कराने के लिए कंपनी ने उपभोक्ताओं को अनेक विकल्प प्रदान किये हैं। अब उपभोक्ताओं के पास विद्युत व्यवधान संबंधी शिकायतों को दर्ज करने के लिए कॉल सेन्टर के टोल फ्री नंबर 1912, व्हाट्सएप नंबर 0755-2551222, मोबाइल ऐप ‘उपाय (UPAY) अथवा कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in का विकल्प मौजूद है। उपभोक्ता इन विकल्पों में से किसी भी एक विकल्प का उपयोग कर अपनी विद्युत व्यवधान संबंधी शिकायतें दर्ज कर आसानी से निराकरण करा सकते हैं। कंपनी ने कहा है कि उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने के लिए अपने मोबाइल में कंपनी के व्हाटसऐप नंबर 07552551222 को सेव कर मैसेज “Hi” लिखकर भेजें एवं आगामी संदेशों का पालन करें। इसी प्रकार प्ले स्टोर एवं ऐप स्टोर के माध्यम से उपाय ऐप को डाउनलोड कर एवं उसके उपयोग से भी अपनी शिकायत आसानी से दर्ज करा सकते है। कंपनी के पोर्टल portal.mpcz.in पर जाकर एलटी सर्विसेज पर क्लिक करें उसके उपरांत कंपलेंट पर क्लिक करें तथा आगामी निर्देशों का पालन करें अथवा 1912 पर कॉल कर आईवीआरएस के माध्यम से त्वरित शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध है। कंपनी ने कहा है कि बिजली कार्मिक विद्युत आपूर्ति और रखरखाव तथा ऑपरेशन्स को देखते हुए सतर्कता और सजगता से काम करें तथा कोई कार्मिक बिना परमीशन के अवकाश पर न जाए। यदि अवकाश पर जाता है तो उसके स्थान पर वैकल्पिक कार्मिक की तैनाती की व्यवस्था पहले से ही करें। आंधी, तूफान और बारिश के दौरान कॉल सेन्टर में एफओसी (विद्युत अवरोध) से संबंधित उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत शिकायतों की संख्या बढ़ जाती है। इसलिए काल सेन्टर के ऑपरेशनल एवं सुपरवाइजरी स्टॉफ को और अधिक सजगता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने मैदानी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कहा है कि आपदा के समय संपर्क करने के लिये लाइनमेनों के मोबाइल नंबर आदि की जानकारी अपडेट रखें। मैदानी अधिकारियों से कहा गया है कि वे जिला प्रशासन/पुलिस प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से सपंर्क और समन्वय बनाए रखें। 

हर जिले तक पहुंचेगा एकीकृत रोजगार मॉडल, युवाओं को प्रशिक्षण से लेकर प्लेसमेंट तक मिलेगी सुविधा

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र (एसवीबीपीईआईजेड) परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को परियोजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी युवा शक्ति का प्रदेश है। तेजी से बढ़ते निवेश, विस्तार ले रहे उद्योगों और बदलती तकनीकी आवश्यकताओं को देखते हुए राज्य को ऐसे संस्थागत ढांचे की जरूरत है जो युवाओं को प्रशिक्षण, रोजगार और उद्यमिता के अवसरों से सीधे जोड़ सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण की व्यवस्था उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए, ताकि युवाओं को कौशल प्राप्त करने के बाद रोजगार के लिए भटकना न पड़े। उन्होंने निर्देश दिए कि परियोजना को केवल प्रशिक्षण केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि रोजगार, उद्योग और उद्यमिता के समेकित इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आने वाले वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता को देखते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल इंडस्ट्रियल एवं एम्प्लायमेंट जोन की अवधारणा तैयार की गई है। इसका उद्देश्य युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। बैठक में नौ क्षेत्रीय जोनों की प्रस्तावित हब एवं स्पोक संरचना प्रस्तुत की गई। प्रत्येक जोन में एक उत्कृष्टता केंद्र (हब) तथा उससे जुड़े क्षेत्रीय कौशल विकास केंद्र (स्पोक) विकसित किए जाएंगे। हब स्तर पर उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण, अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षक प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और कैरियर सेवाओं का संचालन होगा, जबकि क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम स्पोक केंद्रों के माध्यम से संचालित किए जाएंगे। परियोजना के तहत कौशल विकास केंद्र, औद्योगिक भूखंड, प्लग एंड प्ले औद्योगिक सुविधाएं, साझा सुविधा केंद्र, रोजगार सहायता तंत्र, व्यावसायिक सेवाएं, विदेशी भाषा प्रशिक्षण, डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम तथा उद्यमिता सहायता सुविधाएं एक ही परिसर में विकसित की जाएंगी। इससे युवाओं को प्रशिक्षण से लेकर रोजगार प्राप्त करने और स्वयं का उद्यम स्थापित करने तक की पूरी प्रक्रिया के लिए एकीकृत व्यवस्था उपलब्ध होगी। बैठक में बताया गया कि परियोजना के प्रथम चरण के लिए मऊ, कानपुर देहात, कन्नौज, रायबरेली, प्रतापगढ़ तथा कानपुर नगर में कुल 369 एकड़ भूमि उपलब्ध है। अन्य जिलों के लिए भी भूमि की उपलब्धता हो रही है।  बैठक में बताया गया कि परियोजना के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण एवं प्रमाणन उपलब्ध कराया जा सकेगा। प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक रोजगार मिलान (जॉब मैचिंग) का लक्ष्य रखा गया है, जबकि प्रशिक्षित युवाओं के लिए 80 प्रतिशत प्लेसमेंट सुनिश्चित करने की योजना है। इसके अतिरिक्त प्रतिवर्ष दो लाख से अधिक नए एमएसएमई उद्यमों को प्रोत्साहन मिलने तथा लगभग 50 हजार गिग वर्कर्स को औपचारिक आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बैठक में बताया गया कि सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (ITE) और उसकी नॉलेज पार्टनर संस्था ITEES के अनुभवों का उपयोग किया जाएगा। यह संस्था विश्व के अनेक देशों में तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा प्रणालियों के विकास में सहयोग कर चुकी है। पाठ्यक्रम विकास, क्षमता निर्माण, गुणवत्ता आश्वासन, मूल्यांकन, नेतृत्व विकास और प्रशिक्षण अवसंरचना के निर्माण में उसकी विशेषज्ञता का लाभ प्रदेश को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि उपलब्धता, संस्थागत संरचना, निजी क्षेत्र की भागीदारी तथा क्रियान्वयन मॉडल से संबंधित प्रस्तावों पर शीघ्र निर्णय लेते हुए परियोजना को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाया जाए।

योगी सरकार की सख्ती से नकल माफिया और सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार करने वालों पर कार्रवाई तेज

लखनऊ उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा के दूसरे दिन मंगलवार को भी परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए कड़ी निगरानी जारी रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और नकलविहीन बनाने के लिए परीक्षा केंद्रों के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार नजर रखी गई। इसी क्रम में विभिन्न जिलों और सोशल मीडिया माध्यमों पर भ्रामक प्रचार, प्रतिरूपण और अन्य आपराधिक गतिविधियों के मामलों में कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर संचालित "टारगेट सेलेक्शन" चैनल द्वारा भर्ती परीक्षा को लेकर भ्रामक एवं तथ्यहीन वीडियो प्रसारित किए जाने को गंभीरता से लिया है। इस मामले में लखनऊ कमिश्नरेट के हुसैनगंज थाने में भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम तथा उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 के तहत मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वहीं, अलीगढ़ के रतनप्रेम डीएवी बालिका इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर एक अभ्यर्थी फर्जी आधार कार्ड के सहारे दूसरे परीक्षार्थी के स्थान पर परीक्षा देता हुआ पकड़ा गया। जांच में पता चला कि विकास कुमार नामक युवक हरिओम कुमार के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचा था। संदेह होने पर की गई जांच में मामला उजागर हुआ, जिसके बाद उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता एवं सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। भर्ती बोर्ड द्वारा जारी व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर 9454457951 पर प्राप्त शिकायत के आधार पर फेसबुक पर उपनिरीक्षक सीधी भर्ती-2025 को लेकर भ्रामक और तथ्यहीन वीडियो प्रसारित करने वाले यूजर "तनिष्क चौधरी" के खिलाफ भी हुसैनगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इसके अतिरिक्त इंस्टाग्राम आईडी "inderjeet_gautam_007" से भर्ती परीक्षा के संबंध में भ्रामक वीडियो पोस्ट किए जाने का मामला भी सामने आया है। इस संबंध में आजमगढ़ के कोतवाली थाने में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत नकल, फर्जीवाड़ा, प्रतिरूपण तथा सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाह फैलाने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। पुलिस भर्ती बोर्ड ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे किसी भी भ्रामक संदेश, अफवाह या अवैध गतिविधि से दूर रहें और पूरी निष्ठा के साथ परीक्षा की तैयारी करें।

प्रगतिशील किसान पुरेंद्र कुमार यादव ने अपनाई आधुनिक तकनीक, धान की खेती में मिले उत्साहजनक परिणाम

रायपुर कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का बढ़ता उपयोग किसानों की आय और उत्पादकता में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। दुर्ग जिले के ग्राम डूंडेरा के प्रगतिशील किसान  पुरेंद्र कुमार यादव इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आए हैं। उन्होंने धान की खेती में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया का उपयोग कर न केवल उत्पादन में सुधार हासिल किया, बल्कि खेती की लागत में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की है। पौधों की वृद्धि और उत्पादन की गुणवत्ता में हुए सकारात्मक सुधार           यादव ने बताया कि कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी फसल में नैनो उर्वरकों का प्रयोग किया। इसके परिणामस्वरूप फसल को संतुलित एवं प्रभावी पोषण मिला, जिससे पौधों की वृद्धि बेहतर हुई और उत्पादन की गुणवत्ता में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिला। उनके अनुसार नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसल अधिक स्वस्थ और मजबूत दिखाई दी, जिसका सीधा लाभ उपज पर भी पड़ा। नैनो डीएपी और यूरिया का उपयोग अधिक सुविधाजनक और किफायती          उन्होंने बताया कि पारंपरिक बोरा बंद उर्वरकों की तुलना में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग अधिक सुविधाजनक और किफायती साबित हुआ। अत्यंत कम मात्रा में उपयोग किए जाने वाले इन उर्वरकों से फसल को आवश्यक पोषक तत्व प्रभावी ढंग से प्राप्त हुए, जिससे उर्वरक लागत में कमी आई। साथ ही परिवहन, भंडारण और श्रम संबंधी खर्चों में भी बचत हुई। नैनो उर्वरक खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण          धान की फसल में अपेक्षा से बेहतर परिणाम मिलने पर  यादव बेहद उत्साहित हैं। उनका मानना है कि नैनो उर्वरक खेती को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वे अन्य किसानों को भी नई तकनीकों को अपनाने और खेती में नवाचार करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। किसानों के लिए भरोसेमंद साथी साबित होंगे           पुरेंद्र कुमार यादव कहते हैं, “नैनो डीएपी और नैनो यूरिया आने वाले समय में किसानों के लिए भरोसेमंद साथी साबित होंगे। इससे खेती की लागत कम होती है, फसल को बेहतर पोषण मिलता है और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। मैं सभी किसान भाइयों से आग्रह करता हूं कि वे भी इन उन्नत उर्वरकों का उपयोग कर इसके लाभ प्राप्त करें।” किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ          उल्लेखनीय है कि कृषि विभाग द्वारा किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के प्रति लगातार जागरूक किया जा रहा है। जिले में बढ़ते उपयोग के साथ किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ प्राप्त हो रहा है। यह पहल खेती को पर्यावरण अनुकूल, संसाधन-संरक्षण आधारित और अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान की सामान्य परिषद की बैठक हुई

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान की सामान्य परिषद की बैठक सम्पन्न हुई। उच्च शिक्षा मंत्री  परमार ने संस्थान के शैक्षणिक, शोध, छात्र कल्याण एवं अधोसंरचनात्मक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्देश दिए। मंत्री  परमार ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने जापान सहित भारत के सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों वाले देशों की भाषाओं के प्रशिक्षण पर विशेष बल देते हुए कहा कि इससे युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे तथा वे विदेशों में प्रभावी संवाद स्थापित कर सकेंगे। उन्होंने संस्थान को इस दिशा में नवाचारपूर्ण पहल करने के निर्देश दिए। मंत्री  परमार ने छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए परिसर में सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं के लिए स्वच्छ, आधुनिक एवं पर्याप्त शौचालय सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया तथा कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित और सुविधायुक्त परिसर भी उतना ही आवश्यक है। मंत्री  परमार ने संस्थान परिसर में वृहद स्तर पर नीम, बरगद, पीपल, जामुन एवं आम जैसे पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्षों के रोपण के निर्देश दिए। उन्होंने संस्थान के हरित वसुंधरा क्लब द्वारा लुप्तप्राय वृक्ष प्रजातियों के संरक्षण एवं रोपण के संकल्प की सराहना करते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को अनुकरणीय बताया। मंत्री  परमार ने संस्थान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रस्तुत शोधपत्रों के संकलन एवं संस्थान के वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन का विमोचन भी किया। बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा विभाग  अनुपम राजन ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं कल्याण से संबंधित विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया। बैठक में संस्थान के वर्ष 2026-27 के वार्षिक बजट 12 करोड़ 86 लाख 3 हजार 503 रुपये को स्वीकृति प्रदान की गई। साथ ही संस्थान के प्रत्येक संकाय के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को संचालक पदक प्रदान किए जाने तथा सामान्य परिषद के अध्यक्ष के नाम से विशेष पदक स्थापित किए जाने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित किया गया। परिषद ने प्रत्येक संकाय के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के शैक्षणिक शुल्क में राहत प्रदान करने के प्रस्ताव को भी सहर्ष स्वीकृति दी। बैठक में उच्च स्तरीय शोध को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से फोरियर इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोप (FTIR) उपकरण के क्रय के लिये 20 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। साथ ही विभिन्न स्तरों पर उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान किए जाने के प्रस्ताव को भी परिषद द्वारा अनुमोदित किया गया। बैठक में संस्थान के संचालक डॉ. प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल द्वारा सामान्य परिषद को अवगत कराया गया कि वर्ष 2026 में भारतीय वाणिज्य परिषद का राष्ट्रीय सम्मेलन भोपाल में संस्थान द्वारा सेज विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर परिषद ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अपनी सहमति प्रदान की। बैठक में विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी उच्च शिक्षा  अनिल पाठक, डॉ दिवा मिश्रा, माधव विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हरीश व्यास, सीए  संजय वास्तव, डॉ. शैलजा दुबे, डॉ. महिपाल सिंह यादव, डॉ. ज्योति सक्सेना, डॉ. रामकृष्ण वास्तव, डॉ. सभाकांत द्विवेदी, डॉ. स्वामी स्वरूप वास्तव, डॉ. अमित जैन, डॉ. निधि चौहान, डॉ. रचना सिंह ठाकुर एवं डॉ. अमित मांडले सहित सामान्य परिषद के सदस्य उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में युवाओं को गांव में ही स्वरोजगार, महिलाओं को मिलेगी प्राथमिकता

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शुरू किया गया 'प्रोजेक्ट गंगा' उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल क्रांति का नया अध्याय साबित होने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य गांव-गांव तक हाई स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाना, डिजिटल सुविधाओं का विस्तार करना और युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करना है। स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान इस संबंध में विस्तार से जानकारी दी।  योजना में महिलाओं को 50 प्रतिशत से अधिक पदों पर दी जाएगी प्राथमिकता  स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने कहा कि, आज के दौर में हाई स्पीड इंटरनेट सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रोजेक्ट गंगा आगे चलकर न्याय पंचायतों और फिर ग्राम पंचायतों तक हाई स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाई जाएगी। इस योजना के तहत प्रदेश में 8 से 10 हजार डिजिटल सेवा प्रदाता (डीएसपी) तैयार किए जाएंगे, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 1 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार योजना में महिलाओं को 50 प्रतिशत से अधिक पदों पर प्राथमिकता दी जाएगी। चयनित युवाओं को प्रशिक्षण देकर डिजिटल उद्यमी के रूप में स्थापित किया जाएगा, जिससे वे अपने गांव में रहकर ही रोजगार प्राप्त कर सकेंगे। सीईओ मनोज कुमार सिंह ने कहा कि डिजिटल सेवा प्रदाताओं के लिए यह योजना आय का बड़ा माध्यम बन सकती है। अनुमान है कि 350 से 390 रुपये प्रतिमाह इंटरनेट कनेक्शन लेने वाले लोग जुड़ते जाएंगे तो 7 से 8 महीने में एक डिजिटल उद्यमी की मासिक आय लगभग 20 हजार रुपये तक पहुंच सकती है। कनेक्शनों की संख्या बढ़ने पर यही आय 1 लाख रुपये प्रतिमाह तक हो सकती है। ग्राम पंचायत स्तर की परियोजना की लागत 5.53 लाख रुपये होगी, जिसमें 5 लाख रुपये का ब्याज मुक्त ऋण मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत मिलेगा, उन्होंने कहा कि इसके लिए एक व्यक्ति को सिर्फ 50 हजार रुपए मार्जिन मनी के तौर पर लगाना होगा।