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75 जिलों के 1183 केंद्रों पर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई परीक्षा, पांच मामलों में गिरफ्तारी और एफआईआर

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा को पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न कराने के लिए किए गए व्यापक प्रबंधों का असर दूसरे दिन भी देखने को मिला। मंगलवार को प्रदेश के सभी 75 जिलों के 1183 परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में आयोजित परीक्षा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के डीजी एसबी शिरडकर के अनुसार दोनों पालियों में कुल 9,62,833 अभ्यर्थियों को परीक्षा के लिए बुलाया गया था, जिनमें से 7,32,731 अभ्यर्थी उपस्थित हुए। कुल उपस्थिति 76.10 प्रतिशत दर्ज की गई। योगी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह नकलविहीन और पारदर्शी बनाने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन, सीसीटीवी निगरानी, फ्रिस्किंग, पहचान सत्यापन और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। इसी का परिणाम रहा कि दूसरे दिन भी विभिन्न जिलों में नकल, प्रतिरूपण और भ्रामक प्रचार के मामलों का तत्काल पता लगाकर संबंधित आरोपियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की गई। हरदोई में मोबाइल और प्रश्नपत्र के साथ अभ्यर्थी गिरफ्तार हरदोई के वेणी माधव विद्यापीठ इंटर कॉलेज में परीक्षा दे रहे अभ्यर्थी रोहित पथौरी को नकल के उद्देश्य से छिपाकर लाए गए मोबाइल फोन और पूर्व प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्नपत्रों के साथ पकड़ा गया। पुलिस ने उसके विरुद्ध उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। अलीगढ़ और मुजफ्फरनगर में फर्जी अभ्यर्थी पकड़े गए अलीगढ़ में धर्म समाज महाविद्यालय परीक्षा केंद्र पर एक व्यक्ति फर्जी आधार कार्ड के सहारे दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचा था। जांच में मामला उजागर होने पर आरोपी सहित उसके सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया गया। इसी प्रकार मुजफ्फरनगर के डीएवी इंटर कॉलेज में भी एक व्यक्ति कूटरचित आधार कार्ड के जरिए दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देता पकड़ा गया। दोनों मामलों में भारतीय न्याय संहिता और सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। कानपुर में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के साथ अभ्यर्थी पकड़ा गया कानपुर के सिद्दीकी फैज-ए-आम इंटर कॉलेज मखनिया में द्वितीय पाली की परीक्षा शुरू होने से पहले फ्रिस्किंग के दौरान एक अभ्यर्थी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट को परीक्षा केंद्र के अंदर ले जाने का प्रयास करता पकड़ा गया। उससे पूछताछ की जा रही है तथा विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले पर कार्रवाई परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया पर भ्रामक और तथ्यहीन वीडियो पोस्ट करने के मामले में भी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। इंस्टाग्राम आईडी से फर्जी वीडियो प्रसारित करने वाले अमरोहा निवासी इन्द्रजीत को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। नकल माफिया और फर्जीवाड़े पर जीरो टॉलरेंस योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि भर्ती परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के डीजी ने कहा है कि नकल, प्रतिरूपण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग अथवा सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने जैसे कृत्यों में शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

गांव-गांव तक हाई स्पीड डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री ने किया प्रोजेक्ट गंगा का शुभारंभ

लखनऊ उत्तर प्रदेश के गांवों तक हाई स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने, डिजिटल समावेशन को नई गति देने और युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर सृजित करने की दिशा में मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'प्रोजेक्ट गंगा' का शुभारंभ किया। यह परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में लास्ट माइल डिजिटल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के साथ-साथ डिजिटल शिक्षा, टेलीमेडिसिन, ई-गवर्नेंस, कौशल विकास और तकनीक आधारित रोजगार के नए अवसरों का विस्तार करेगी। प्रोजेक्ट गंगा के तहत प्रदेश में डिजिटल सेवा प्रदाताओं (डीएसपी) का एक व्यापक नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से लगभग 20 लाख परिवारों तक हाई स्पीड इंटरनेट पहुंचाने, 8 से 10 हजार डिजिटल सेवा प्रदाता तैयार करने तथा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के प्रथम चरण में 21 जनपदों में इसका संचालन प्रारंभ किया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज के दौर में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी एक बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है। इंटरनेट की गति जितनी तेज होगी, विकास की रफ्तार भी उतनी ही तेज होगी। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट गंगा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'डिजिटल इंडिया' विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार गंगोत्री से गंगासागर तक मां गंगा का प्रवाह अपने मार्ग में आने वाले क्षेत्रों के विकास, समृद्धि और जीवन का आधार रहा है, उसी प्रकार प्रोजेक्ट गंगा भी उत्तर प्रदेश की डिजिटल समृद्धि का एक मजबूत आधार बनेगा। यह पहल गांवों तक डिजिटल अवसर पहुंचाकर सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की नई संभावनाएं सृजित करेगी। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में ई-ऑफिस, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी), बीसी सखी, ग्राम सचिवालय सहित अनेक तकनीक आधारित पहलों के माध्यम से शासन और जनता के बीच की दूरी कम हुई है। इन प्रयासों ने डिजिटल सशक्तिकरण को नई गति दी है और आम नागरिकों तक सेवाओं की पहुंच को आसान बनाया है। प्रोजेक्ट गंगा इसी यात्रा का अगला महत्वपूर्ण चरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रथम चरण में 21 जनपदों में प्रारंभ हो रही इस परियोजना को आगे चलकर प्रदेश की सभी 57 हजार ग्राम पंचायतों और लगभग 8 हजार न्याय पंचायतों तक पहुंचाना होगा। इससे लास्ट माइल डिजिटल कनेक्टिविटी की परिकल्पना साकार होगी और गांव स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित होंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए 8 हजार डिजिटल उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था। प्रोजेक्ट गंगा इस लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार का प्रयास केवल इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। यह परियोजना युवाओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने हिंदुजा समूह को इस पहल के लिए बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार 'सीएम युवा' योजना के माध्यम से युवाओं को 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध करा रही है। प्रोजेक्ट गंगा के अंतर्गत चयनित युवा भी इस सुविधा का लाभ उठाकर डिजिटल सेवा प्रदाता के रूप में अपना उद्यम स्थापित कर सकेंगे। चयन और प्रशिक्षण के महत्व पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना की सफलता प्रशिक्षित और सक्षम डिजिटल सेवा प्रदाताओं पर निर्भर करेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि चयनित युवाओं को तकनीकी, प्रबंधकीय और व्यावसायिक दृष्टि से गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे अपने क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का प्रभावी नेटवर्क विकसित कर सकें। कार्यक्रम में वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि प्रोजेक्ट गंगा उत्तर प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि तकनीक तक व्यापक पहुंच सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का आधार बनती है। मोबाइल फोन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक ने उन लोगों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाया है, जो कभी इससे दूर थे। आज सामान्य नागरिक डिजिटल माध्यमों से सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहा है और देश-दुनिया से सीधे जुड़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रोजेक्ट गंगा डिजिटल सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाकर इस परिवर्तन को और गति देगा। सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि प्रोजेक्ट गंगा केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के डिजिटल भविष्य की मजबूत नींव है। यह पहल प्रदेश के युवाओं, विद्यार्थियों, किसानों और उद्यमियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगी तथा आने वाले वर्षों में व्यापक बदलाव का माध्यम बनेगी। हिंदुजा समूह की ओर से ग्रुप प्रेसिडेंट कॉरपोरेट अफेयर्स सुनील कुमार चड्ढा ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ विजन को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का अभिनव मॉडल अपनाने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है। हिंदुजा समूह इस परियोजना में ‘नो प्रॉफिट, नो लॉस’ के सिद्धांत के साथ सहयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप परियोजना में महिलाओं की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी और लाभार्थियों में लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं होंगी। स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के चेयरमैन मनोज कुमार सिंह ने प्रोजेक्ट गंगा की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह केवल इंटरनेट कनेक्टिविटी विस्तार की परियोजना नहीं, बल्कि ग्रामीण उत्तर प्रदेश में डिजिटल उद्यमिता का एक नया मॉडल है। इसके अंतर्गत स्थानीय युवाओं को डिजिटल सेवा प्रदाता (डीएसपी) के रूप में विकसित किया जाएगा, जो अपने क्षेत्रों में फाइबर ब्रॉडबैंड नेटवर्क स्थापित कर डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने बताया कि परियोजना के माध्यम से लगभग 20 लाख परिवारों तक हाई स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने, 8 से 10 हजार डिजिटल सेवा प्रदाता तैयार करने तथा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट गंगा ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा, टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन कौशल प्रशिक्षण, ई-गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा, सार्वजनिक वाई-फाई, स्मार्ट कृषि और आईटी आधारित रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराएगा। परियोजना के तहत चयनित युवाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, नेटवर्क निर्माण और व्यवसाय संचालन में भी सहयोग प्रदान किया जाएगा, जिससे वे अपने क्षेत्रों में टिकाऊ डिजिटल उद्यम स्थापित कर सकें।

वन्य-जीवों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये जागरूकता बढ़ाने के लिये क्षेत्रीय स्तर पर चरवाहा सम्मेलन का आयोजन किया जाये

भोपाल मध्यप्रदेश टाइगर फाउण्डेशन समिति की 22वीं शासी निकाय की बैठक प्रमुख सचिव वन  संदीप यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हाइब्रिड मोड में आयोजित की गई। बैठक में टाइगर फाउण्डेशन समिति की 21वीं बैठक का अनुमोदन किया गया। बैठक में वन्य एवं वन्य-जीव संरक्षण से संबंधित विभिन्न योजनाओं एवं प्रस्तावों की समीक्षा की गई। संरक्षित क्षेत्रों, वन मण्डलों में वन्य-जीव संरक्षण, आवास विकास, मानव वन्य-जीव संघर्ष न्यूनीकरण, अनुसंधान, अध्ययन, जागरूकता एवं क्षमता संवर्धन के साथ ब्लैकबक कैप्चर ऑपरेशन से संबंधित कार्यों के लिये लगभग 22.79 करोड़ की राशि के प्रस्ताव स्वीकृत किये गये। समिति के वर्ष 2026-27 के वार्षिक कार्य-योजना (एपीओ) का भी अनुमोदन किया गया। साथ ही टाइगर फाउण्डेशन समिति की 22वीं बैठक की कार्यसूची के प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रमुख सचिव  यादव ने कहा कि टाइगर फाउण्डेशन समिति की बैठक हर 3 माह में आयोजित की जाये। उन्होंने कहा कि इससे कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता आयेगी।  यादव ने कहा कि वन्य-जीवों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये जागरूकता बढ़ाने के लिये क्षेत्रीय स्तर पर चरवाहा सम्मेलन आयोजित करने पर बल दिया गया। बैठक में जिन कार्यों की स्वीकृति दी गई है, उन्हें नियमानुसार गुणवत्ता एवं पारदर्शिता के साथ पूर्ण करना सुनिश्चित करें। बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  शुभरंजन सेन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य-जीव डॉ. समीता राजौरा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास), अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (संरक्षण) अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य-जीव)  एल. कृष्णमूर्ति एवं संचालक वन विहार राष्ट्रीय उद्यान बैठक में उपस्थित रहे। अपर पुलिस महानिदेशक एवं अध्यक्ष टाइगर सेल, सदस्य सचिव, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण नई दिल्ली, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं संचालक माधव राष्ट्रीय उद्यान, मुख्य वन संरक्षक, वन वृत्त सागर, जबलपुर, रीवा, उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर, क्षेत्र संचालक कान्हा, बाँधवगढ़, पेंच और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व वर्चुअली शामिल हुए।  

PM स्वनिधि योजना को घर-घर पहुंचाने की तैयारी, 30 जून तक चलेगा विशेष अभियान

प्रदेश में पीएम स्वनिधि योजना की पहुँच को अंतिम छोर तक पहुँचाने के लिये 30 जून तक चलेगा विशेष अभियान जिला स्तर पर स्वनिधि महोत्सव और नगरीय निकायों में लगेंगे लोक कल्याण मेले प्रदेश में 10 लाख से अधिक पथ विक्रेता हुए लाभान्वित भोपाल  प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश ने देश में एक गौरवशाली और ऐतिहासिक उपलब्धि अर्जित की है। राज्य शासन, नगरीय निकायों तथा ऋणदाता संस्थाओं के समर्पित प्रयासों एवं सक्रिय सहयोग से प्रदेश में अब तक 10 लाख से अधिक पथ विक्रेताओं को सफलतापूर्वक लाभान्वित कर उनके स्वावलंबन का मार्ग प्रशस्त किया जा चुका है। इस योजना की पहुँच को अंतिम छोर तक और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से प्रदेश के समस्त क्षेत्रों में 01 जून 2026 से विशेष अभियान संचालित किया जा रह है, जो 30 जून तक चलेगा। जिला स्तर होंगे 'स्वनिधि महोत्सव' अभियान के अंतर्गत जिला मुख्यालयों पर “स्वनिधि महोत्सव” का आयोजन किया जाएगा।महोत्सव में पीएम स्वनिधि योजना के सफल लाभार्थियों तथा उनके परिवारजनों की आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमों, उनके संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानियों का उत्सव मनाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य उत्कृष्ट कार्य करने वाले सफल वेंडर्स को सम्मानित करना तथा योजना से जुड़े सभी संबंधित हितधारकों के मध्य इसके प्रति और अधिक व्यापक जागरूकता का संचार करना है। नगरीय निकायों में सजेंगे 'लोक कल्याण मेले' नगरीय निकाय स्तर पर “लोक कल्याण मेलों” के माध्यम से 'पथ विक्रेताओं के लिए सेवाएँ आपके द्वार' की पावन संकल्पना का क्रियान्वयन किया जाएगा। इन मेलों के माध्यम से जरूरतमंद वेंडर्स को वित्तीय, सामाजिक और डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिये बिना गारंटी के 15 हजार रूपये तक की आसान ऋण सुविधा, न्यूनतम ब्याज दर पर वित्तीय सहायता, क्रेडिट कार्ड एवं डिजिटल लेनदेन के लिए प्रभावी मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही बैंकर्स एवं पथ विक्रेताओं की विशेष बैठकें आयोजित कर अंतिम व्यक्ति तक बैंकिंग सेवाओं की पहुँच सुलभ कराई जाएगी तथा 'नगरीय निकाय सहायता केंद्रों' के माध्यम से वेंडर्स की समस्याओं और शिकायतों का त्वरित निराकरण भी सुनिश्चित किया जाएगा। सेन्सस टाउन में 'स्वनिधि कैंप' से अंत्योदय की परिकल्पना अभियान में सेन्सस टाउन स्तर पर “स्वनिधि कैंप” का आयोजन कर दूरस्थ व अर्द्धें-शहरी क्षेत्रों में निवासरत पथ विक्रेताओं को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। विशेष शिविरों के माध्यम से छूटे हुए और नए पथ विक्रेताओं की पहचान कर उन्हें योजना की जानकारी दी जाएगी। ऋण स्वीकृति के लिए उनके पंजीयन की त्वरित कार्यवाही पूरी की जाएगी जिससे कोई भी पात्र वेंडर लाभ से वंचित न रहे।  

24×7 हेल्पलाइन और परामर्श व्यवस्था से लोगों को मिल रही मदद

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में मद्यनिषेध विभाग के जरिए नशा मुक्त भारत अभियान को नई गति मिली है। योगी सरकार नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने और युवाओं को नशे की गिरफ्त में आने से बचाने के लिए व्यापक स्तर पर जनजागरण अभियान चला रही है। इसके तहत जागरूकता कार्यक्रमों के साथ-साथ हेल्पलाइन, परामर्श और पुनर्वास सेवाओं का भी लगातार विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश में नशे के खिलाफ सामाजिक चेतना विकसित करने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों के समन्वय से अभियान संचालित किया जा रहा है। स्कूलों, कॉलेजों और ग्राम पंचायतों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया जा रहा है। कई स्थानों पर लोगों को नशा न करने और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की शपथ दिलाई जा रही है। 37 हजार से अधिक लोगों तक पहुंचाई गई सहायता  केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे नशामुक्त भारत अभियान के तहत योगी सरकार लगातार प्रयासरत है। 24×7 हेल्पलाइन नंबर 14416 और अन्य परामर्श सेवाओं के माध्यम से नशे की समस्या से जूझ रहे व्यक्तियों और उनके परिवारों को मानसिक एवं भावनात्मक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, हेल्पलाइन और परामर्श व्यवस्था के जरिए प्रदेश में अब तक 37 हजार से अधिक लोगों तक सहायता पहुंचाई जा चुकी है। इससे जरूरतमंद लोगों को समय पर मार्गदर्शन और विशेषज्ञों की सलाह मिल रही है। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2025- 26 में 4 लाख से अधिक मोबाइल नंबरों पर एसएमएस तथा आकाशवाणी के एफएम रेनबो चैनल पर 232 स्पॉट्स प्रसारित किए गए हैं। सीएम योगी के निर्देश पर कराया गया वीडियो वैन का संचालन यूपी में वित्तीय वर्ष 2025-26 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सोनभद्र और प्रयागराज के माघ मेला-2026 में वीडियो वैन का संचालन, 829 सांस्कृतिक कार्यक्रम, 1800 वालपेंटिंग, 1767 गोष्ठियां और नशा छोड़ने/ उपचार के लिए 3026 प्रेरित किया है चूंकि नशे के खिलाफ जनभागीदारी आवश्यक है इसलिए राज्य सरकार का उद्देश्य केवल नशा छोड़वाना नहीं, बल्कि युवाओं को सकारात्मक दिशा देकर प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करना है।  नशामुक्त भारत अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में लगातार प्रयास  उत्तर प्रदेश में नशामुक्त भारत अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। योगी सरकार की मंशा के अनुरूप नशा मुक्ति केंद्रों और पुनर्वास सेवाओं को भी मजबूत किया जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित नशा मुक्ति केंद्रों के माध्यम से उपचार, काउंसलिंग और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रहीं हैं, ताकि नशे की लत से बाहर आए लोग सम्मानपूर्वक समाज में पुनः स्थापित हो सकें। इन केंद्रों में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मदद से मरीजों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।     आर.एल. राजवंशी, राज्य मद्यनिषेध अधिकारी

राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्रियों और परिवहन मंत्री ने की समीक्षा

रायपुर छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए तकनीक आधारित निगरानी, बेहतर चालक प्रशिक्षण, वाहनों की वैज्ञानिक फिटनेस जांच और यातायात नियमों के प्रभावी पालन पर सरकार ने विशेष जोर दिया है। नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में आयोजित राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में उपमुख्यमंत्री  अरुण साव, उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा तथा परिवहन मंत्री  केदार कश्यप ने सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा कर अधिकारियों को प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में विधायक  अनुज शर्मा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।           बैठक में बताया गया कि प्रदेश में सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए आधुनिक वाहन फिटनेस केंद्रों, ई-ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक, एएनपीआर कैमरों और स्पीड मॉनिटरिंग सिस्टम का विस्तार किया जा रहा है। जनवरी से मई 2026 तक 31 हजार 604 वाहनों की फिटनेस जांच की गई, जबकि 61 हजार से अधिक चालान तकनीकी निगरानी तंत्र के माध्यम से जारी किए गए।          उपमुख्यमंत्री  अरुण साव ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जवाबदेही है। दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सड़क इंजीनियरिंग, प्रभावी प्रवर्तन और जन-जागरूकता के समन्वित प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने दुर्घटना संभावित स्थलों की नियमित समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक उपाय सुनिश्चित करने तथा जागरूकता अभियानों को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया।         उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली जनहानि रोकना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से यातायात नियमों के पालन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय तथा नियमों के उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही युवाओं और विद्यार्थियों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष बल दिया।          परिवहन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए तकनीक, प्रशिक्षण, जन-जागरूकता और प्रभावी प्रवर्तन व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सुरक्षित यातायात व्यवस्था विकसित करने तथा सड़क सुरक्षा को जनभागीदारी का अभियान बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।          बैठक में जानकारी दी गई कि रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, कोरबा, जांजगीर-चांपा और रायगढ़ सहित विभिन्न जिलों में संचालित आधुनिक फिटनेस केंद्रों में जनवरी से मई 2026 के दौरान 31 हजार 604 वाहनों की फिटनेस जांच की गई है।            सुरक्षित और कुशल ड्राइविंग को बढ़ावा देने के लिए कई जिलों में ई-ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक संचालित किए जा रहे हैं, जबकि वित्तीय वर्ष 2026-27 में आठ नए जिलों में इनके निर्माण की प्रक्रिया जारी है। बिलासपुर और जगदलपुर में क्षेत्रीय ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्र तथा 14 जिलों में ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर संचालित किए जा रहे हैं।         प्र. देश में यातायात नियमों के प्रभावी पालन के लिए 174 एएनपीआर कैमरे और सात लिडार आधारित स्पीड कैमरे स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से जनवरी से मई 2026 तक 61 हजार से अधिक चालान जारी किए गए। वहीं सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक 2 लाख 68 हजार 316 वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाए जा चुके हैं।         नवा रायपुर स्थित आईडीटीआर में वाहन चालकों को आधुनिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वर्ष 2025 में 15 हजार 779 तथा वर्ष 2026 में अप्रैल तक 4 हजार 64 वाहन चालकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। यातायात नियमों के उल्लंघन पर जनवरी से अप्रैल 2026 तक 2.86 लाख वाहनों से 62.21 करोड़ रुपये का शमन शुल्क वसूला गया है। गंभीर उल्लंघनों के मामलों में वर्ष 2025-26 के दौरान 7 हजार 434 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित अथवा निरस्त किए गए हैं।

जयपुर पुलिस कमिश्नरेट और JDA में बदलाव, कई अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी

जयपुर राजस्थान सरकार ने प्रदेश के पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है.  पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी की गई तबादला सूची में 141 उप पुलिस अधीक्षक (DSP) स्तर के अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है.  लंबे इंतजार के बाद प्रदेश में यह तबादला सूची जारी की गई है.  प्रदेश में मजबूत कानून व्यवस्था स्थापित करने के लिए अधिकारियों को नई जिम्मेदारी मिली है. यह तबादला सूची अतिरिक्त महानिदेश पुलिस (कार्मिक) बीजू जॉर्ज जोसफ ने जारी की है. इस सूची में जयपुर पुलिस कमिश्नरेट और जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) में भी कई अहम बदलाव किये गये है. रमेश कुमार पारीक, ओम प्रकाश मीणा और सुरेश कुमार स्वामी को JDA में उप पुलिस अधीक्षक के पद पर नियुक्त किया गया है. राजधानी में कानून व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए नए सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) भी लगाए गए हैं.   और किन अधिकारियों का हुआ तबादला? इसके अलावा हरजी लाल यादव को सहायक पुलिस आयुक्त बस्सी, हेमेन्द्र शर्मा को ACP मानसरोवर, सत्येन्द्र सिंह नेगी को ACP सोडाला और शिवकुमार भारद्वाज को ACP झोटवाड़ा की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसके साथ ही राम सिंह को ACP मेट्रो, जयपुर का कार्यभार दिया गया है. बांदीकुई में DSP रोहिताश देवन्दा के स्थान पर लक्ष्मीकांत शर्मा को नियुक्त किया गया है. लक्ष्मी सुथार को ACP (आदर्श नगर) से सीओ कोटपूतली बहरोड की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इस तबादला सूची में लंबे समय से एक ही जगह जमे हुए अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है. इस सूची में शामिल अधिकारियों को जल्द ही अपने नए स्थान पर ज्वाइन करने के आदेश दिए गए हैं. इसी संबंध में लिविंग और ज्वाइनिंग संबंधी कागजी कार्रवाई शुरू की गई है. पुलिस विभाग में हुए इस व्यापक फेरबदल का उद्देश्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना है. मुबारिक खान को पत्रकारिता में करीब 8 सालों का अनुभव है. उन्होंने राजस्थान की राजनीतिक खबरों के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट, एजुकेशन और मेडिकल क्षेत्र से जुड़ी ख़बरों की रिपोर्टिंग की है. 2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में राजस्थान की अलग-अलग विधानसभा सीटों पर ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग की. आनंदपाल एनकाउंटर और लॉरेंस बिश्नोई गैंग की मैडम माया पर स्टोरी ने खूब सुर्खियां बटोरी. मुबारिक खान ने राजस्थान यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई करने के बाद बीजेएमसी में डिप्लोमा प्राप्त किया.

इन महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत मिलेगा पक्का मकान

लखनऊ योगी सरकार महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी सशक्तीकरण को लेकर लगातार नए कदम उठा रही है। इसी क्रम में योगी सरकार ने तीन तलाक तथा एसिड अटैक जैसी गंभीर सामाजिक त्रासदियों से प्रभावित महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। योगी सरकार इन पीड़ित महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना तथा मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से लाभान्वित करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही निराश्रित महिलाओं को भी इन सभी योजनाओं का लाभ देने की तैयारी शुरू कर दी गयी है। कई विभागों से समन्वय स्थापित कर एकत्रित किया जा रहा डाटा  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर महिला कल्याण विभाग ने विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके साथ ही महिला कल्याण विभाग तीन तलाक एवं एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं के साथ निराश्रित महिलाओं का विस्तृत डाटा एकत्रित किया जा रहा है, ताकि पात्र महिलाओं को योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जा सके। शासन स्तर पर इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश और शासनादेश (जीओ) तैयार करने की प्रक्रिया भी चल रही है। महिला कल्याण विभाग द्वारा पीड़ित महिलाओं का सत्यापित विवरण एकत्रित किया जा रहा है। इसके आधार पर लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा। योगी सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी पात्र महिला को केवल जानकारी के अभाव या प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण सरकारी योजनाओं से वंचित न रहना पड़े। इसके लिए विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को दिए थे निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये थे कि जिन महिलाओं को तीन तलाक या एसिड अटैक जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है और जिनके पास स्थायी आवास नहीं है, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही इन महिलाओं और उनके परिवारों को आयुष्मान भारत योजना एवं मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़कर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का भी लाभ दिया जाए। मालमू हो कि एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को लंबे समय तक इलाज, सर्जरी और पुनर्वास की आवश्यकता होती है। वहीं, तीन तलाक से प्रभावित कई महिलाएं आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा का सामना करती हैं। ऐसे में आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा दोनों उपलब्ध कराकर योगी सरकार उनके जीवन को अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

डीजीपी कैलाश मकवाणा के मुख्य आतिथ्य में पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय इंदौर में 78वें नव आरक्षक बुनियादी प्रशिक्षण सत्र का दीक्षांत समारोह सम्पन्न

भोपाल देशभक्ति, अनुशासन और जनसेवा के मूल्यों से ओतप्रोत 78वें नव आरक्षकों ने मंगलवार को पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय, इंदौर में कठिन प्रशिक्षण के उपरांत भव्य दीक्षांत परेड के माध्यम से अपनी दक्षता, अनुशासन और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश पुलिस के महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने बतौर मुख्य अतिथि परेड की सलामी ली तथा खुली जिप्सी में सवार होकर परेड का निरीक्षण किया। लगभग एक वर्ष के कठिन, अनुशासित एवं बहुआयामी प्रशिक्षण के उपरांत 983 नव आरक्षक विधिवत रूप से मध्यप्रदेश पुलिस की मुख्यधारा में शामिल हुए, जिनमें 787 महिला एवं 196 पुरुष नव आरक्षक सम्मिलित हैं। दीक्षांत समारोह में विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण)  रवि कुमार गुप्ता, पुलिस आयुक्त इंदौर  संतोष कुमार सिंह, पुलिस महानिरीक्षक इंदौर ग्रामीण जोन  अनुराग, पुलिस महानिरीक्षक विसबल इंदौर  चंद्रशेखर सोलंकी, पुलिस महानिरीक्षक आरएपीटीसी इंदौर  धर्मेंद्र सिंह भदौरिया, उप पुलिस महानिरीक्षक (प्रशिक्षण) पुलिस मुख्यालय  मनीष कुमार अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक इंदौर ग्रामीण  राजेन्द्र कुमार वर्मा, सेनानी प्रथम वाहिनी  अभिषेक आनंद, सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  अनिल कुमार,  दिनेश चंद्र सागर सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षुओं के अभिभावक एवं पुलिस परिवारजन उपस्थित रहे। समारोह को संबोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने कहा कि आज का दिन सभी नव आरक्षकों के जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण, गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने परेड के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि यह दीक्षांत परेड प्रदेश के प्रशिक्षण संस्थानों में आयोजित होने वाले सबसे बड़े एवं प्रभावशाली पासिंग आउट समारोहों में से एक है। उन्होंने प्रशिक्षण संस्थान की उपलब्धियों, उत्कृष्ट प्रशिक्षण व्यवस्था तथा देश के सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण संस्थानों में शामिल होने पर संस्थान के अधिकारियों एवं प्रशिक्षण स्टाफ को बधाई दी। डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि पुलिस की सबसे बड़ी शक्ति उसके हथियार, अधिकार अथवा कानून नहीं, बल्कि जनता का विश्वास है। जब कोई पीड़ित व्यक्ति पुलिस के पास आता है तो वह केवल कानूनी सहायता नहीं, बल्कि विश्वास, संवेदनशीलता और न्याय की अपेक्षा लेकर आता है। यह विश्वास किसी नियम पुस्तिका से नहीं मिलता, बल्कि पुलिसकर्मी के व्यवहार, कार्यशैली और मानवीय दृष्टिकोण से अर्जित होता है। उन्होंने कहा कि आज अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आधुनिक अपराधी डिजिटल माध्यमों, मोबाइल, लैपटॉप, सोशल मीडिया और तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डाटा एनालिटिक्स, डिजिटल फॉरेंसिक एवं स्मार्ट पुलिसिंग के इस युग में पुलिसकर्मी को केवल शारीरिक रूप से सक्षम होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि तकनीकी रूप से दक्ष, मानसिक रूप से संतुलित, निर्णयक्षम और नैतिक रूप से दृढ़ होना भी आवश्यक है। प्रशिक्षण भले ही आज पूर्ण हो रहा हो, लेकिन सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। उन्होंने नव आरक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्दी शक्ति का नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व का प्रतीक है। वर्दी अधिकार अवश्य देती है, लेकिन उससे कहीं अधिक जिम्मेदारी भी देती है। समाज पुलिसकर्मी को उसकी वर्दी से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और चरित्र से पहचानता है। वर्दी की वास्तविक प्रतिष्ठा उसके अधिकार में नहीं, बल्कि उसे पहनने वाले व्यक्ति के आचरण और संवेदनशीलता में निहित होती है। डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस का लक्ष्य केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक आधारित, जनसहभागी, पारदर्शी, जवाबदेह और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार पुलिस व्यवस्था का निर्माण करना है। हमारा उद्देश्य मध्यप्रदेश पुलिस को देश की सबसे आधुनिक, संवेदनशील और विश्वसनीय पुलिस संस्थाओं में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश पुलिस ने वर्ष 2025 में नक्सलवाद जैसी गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती को समाप्त कर मध्यप्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। इसके लिए उन्होंने प्रदेश पुलिस एवं सभी सुरक्षा बलों को बधाई दी। डीजीपी ने साइबर अपराध और नशे को समाज एवं युवा पीढ़ी के सामने उभरती दो सबसे बड़ी चुनौतियां बताते हुए कहा कि ये ऐसे शत्रु हैं जो दिखाई कम देते हैं लेकिन समाज को भीतर से खोखला कर सकते हैं। उन्होंने वर्ष 2025 में चलाए गए ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता का व्यापक आंदोलन था। उन्होंने नव आरक्षकों से इस अभियान को आगे बढ़ाने और समाज को सुरक्षित एवं नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने आगामी सिंहस्थ-2028 को मध्यप्रदेश पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्व के सबसे बड़े मानव समागमों में से एक है। सुरक्षा, यातायात, भीड़ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन और तकनीकी समन्वय में पुलिस की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आज प्रशिक्षण पूर्ण कर रहे अनेक नव आरक्षक उस ऐतिहासिक आयोजन की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।  मकवाणा ने कहा कि ईमानदारी, संवेदनशीलता, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति एवं उत्कृष्ट चरित्र ही एक सफल पुलिसकर्मी की पहचान है। उन्होंने सभी नव आरक्षकों से प्रशिक्षण के दौरान ली गई शपथ को जीवनभर स्मरण रखने और मध्यप्रदेश पुलिस के मूल मंत्र ‘देशभक्ति-जनसेवा’ को अपने आचरण से चरितार्थ करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रशिक्षुओं के अभिभावकों को विशेष बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने अपने परिवार के सदस्य को केवल रोजगार के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा के लिए तैयार किया है। उनके संस्कार, त्याग और विश्वास का ही परिणाम है कि आज उनके बेटे-बेटियां इस गौरवपूर्ण अवसर का हिस्सा बने हैं। उत्कृष्ट प्रशिक्षण और नवाचारों का राष्ट्रीय स्तर पर गौरव पुलिस अधीक्षक पीटीसी इंदौर मती वाहनी सिंह ने अपने प्रतिवेदन में बताया कि पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय, इंदौर देश के प्रतिष्ठित आरक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है। बीपीआरएंडडी, नई दिल्ली द्वारा इसे दो बार देश के सर्वश्रेष्ठ आरक्षक प्रशिक्षण संस्थान के रूप में सम्मानित किया जा चुका है। संस्थान में अब तक 77 बुनियादी प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से 27 हजार से अधिक आरक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर पुलिस सेवा में योगदान दे चुके हैं। आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों, साइबर जागरूकता, हार्टफुलनेस, वात्सल्य छात्रावास, किलकारी झूलाघर, पर्यावरण संरक्षण एवं अन्य नवाचारों के माध्यम से संस्थान पुलिस प्रशिक्षण के क्षेत्र में नई मिसाल स्थापित कर रहा है। सांस्कृतिक संध्या में झलकी भारतीय संस्कृति, प्रतिभा और रचनात्मकता दीक्षांत समारोह के पूर्व 08 जून को पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय, इंदौर में 78वें नव आरक्षक बुनियादी प्रशिक्षण सत्र के समापन अवसर पर सांस्कृतिक संध्या का भव्य आयोजन किया गया। पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा के मुख्य आतिथ्य एवं विशेष पुलिस … Read more

कॉलोनियों से जुड़ी समस्याओं, नागरिक सुविधाओं एवं आवासीय परियोजनाओं के मुद्दों पर हुई विस्तृत चर्चा

रायपुर आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओपी चौधरी ने आज मंत्रालय महानदी भवन में विभिन्न आवासीय कॉलोनियों एवं हाउसिंग सोसायटियों के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में रायपुर क्षेत्र की विभिन्न आवासीय परियोजनाओं से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा अपनी-अपनी कॉलोनियों से संबंधित समस्याओं, आवश्यकताओं एवं सुझावों से मंत्री के समक्ष अवगत कराया। मंत्री  ओपी चौधरी ने सभी प्रतिनिधियों की समस्याओं एवं सुझावों को गंभीरता से सुना और संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक परीक्षण कर व्यवहारिक एवं विधिसम्मत समाधान की दिशा में कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेहतर शहरी अधोसंरचना, पारदर्शी प्रशासन एवं नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए शासन प्रतिबद्ध है तथा आवासीय कॉलोनियों में रहने वाले नागरिकों की समस्याओं के निराकरण को प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाएगा। मंत्री  चौधरी ने आवास विभाग, नगरीय निकायों, रेरा, बिल्डर संगठनों तथा रहवासी कल्याण संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ नियमित समय-समय  पर स्टेकहोल्डर मीटिंग आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि विभिन्न पक्षों के बीच सतत संवाद स्थापित हो तथा समस्याओं का समयबद्ध एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। बैठक में कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाओं, अधोसंरचना विकास, सड़क, जल निकासी, सार्वजनिक सुविधाओं तथा अन्य स्थानीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री  चौधरी ने कहा कि शासन और नागरिकों के बीच निरंतर संवाद से समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव है तथा जनसहभागिता से शहरी विकास को नई गति मिलेगी। बैठक के दौरान आवासीय समितियों के प्रतिनिधियों ने इस बैठक को एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि संभवतः छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार आवास एवं पर्यावरण मंत्री द्वारा आवासीय सोसायटियों के प्रतिनिधियों के साथ इस प्रकार का प्रत्यक्ष संवाद आयोजित किया गया है। उन्होंने इसे राज्य ही नहीं, बल्कि देश के लिए भी एक अनुकरणीय पहल बताया। बैठक में प्रतिनिधियों ने रियल एस्टेट परियोजनाओं, नागरिक सुविधाओं, रेरा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, लंबित परियोजनाओं के हस्तांतरण तथा संस्थागत सुधारों से जुड़े विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किए। साथ ही आवासीय समितियों को सशक्त बनाने, "आवास मितान" डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने, सलाहकार समिति गठित करने तथा बड़े आवासीय परिसरों में मतदान सुविधाओं के विस्तार जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। बैठक में नगर तथा ग्राम निवेश आयुक्त  अवनीश शरण सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही पार्थिव पैसिफिक, कुबेर सोसायटी, सिटी ऑफ ड्रीम्स, आनंदम वर्ल्ड सिटी, पाम बेलाजियो, साई वाटिका, अविनाश सनसिटी, मारुति लाइफस्टाइल, अविनाश सिग्नेचर होम्स, रालास एन्क्लेव, क्रेस्ट ग्रीन्स, सिंगापुर सिटी, सैफायर ग्रीन्स, लास विस्टास, जैनम हाइट्स, पार्थिवी प्रोविंस, बरसाना एन्क्लेव, गैलेक्सी आईलैंड, सृष्टि पैलाजो एवं क्रॉसविंड्स सहित विभिन्न आवासीय परियोजनाओं के प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित रहे।