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निजी स्कूलों को झटका: हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, फीस रेगुलेशन एक्ट को बताया संविधानसम्मत

रायपुर  छत्तीसगढ़ में अब निजी स्कूल (Private Schools) मनचाही फीस नहीं वसूल सकेंगे। सरकार इसको लेकर नियम लागू कर सकती है। हाईकोर्ट (High Court) ने राज्य सरकार के “छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम 2020” (Chhattisgarh Non-Government School Fee Regulation Act, 2020) और उससे जुड़े नियमों को पूरी तरह संवैधानिक करार देते हुए, निजी स्कूल संघ की याचिका को खारिज कर दिया है। सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) में आती है। राज्य सरकार को निजी स्कूलों की फीस तय करने का पूरा अधिकार है। याचिका में उठाए गए तर्क खारिज निजी स्कूलों ने अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद 14 (Right to Equality) और 19(1)(g) (Right to Practice Profession) का उल्लंघन बताया था। लेकिन कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता एक संघ है, न कि व्यक्तिगत नागरिक। इसलिए वे इन अनुच्छेदों का हवाला नहीं दे सकते। हाईकोर्ट के इस महत्वपूर्ण फैसले से राज्य के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिल सकती है। इसके तहत फीस बढ़ाने के लिए जिला समिति की अनुमति आवश्यक होगी। अधिनियम की धारा 10 के तहत कोई भी स्कूल बिना जिला शुल्क निर्धारण समिति की अनुमति के फीस नहीं बढ़ा सकता। साथ ही प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की याचिका को खारिज कर दिया है। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के अग्रवाल और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच में हुई। दरअसल, राज्य सरकार ने साल 2020 में छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम लागू करने का निर्णय लिया था। इसके लागू होने के बाद प्रदेश में संचालित निजी स्कूलों के एसोसिएशन ने साल 2021 में हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसमें कहा कि वे गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों का प्रतिनिधित्व करते हैं और यह अधिनियम उनकी स्वायत्तता (ऑटोनॉमी) में हस्तक्षेप करता है। फीस तय करने का अधिकार केवल प्रबंधन के पास होना चाहिए, इसमें सरकारी हस्तक्षेप अनुचित है। प्राइवेट स्कूलों ने बताया समानता के अधिकार का उल्लंघन याचिका में प्राइवेट स्कूल की तरफ से बताया गया कि अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता का अधिकार और 19(1)(g) व्यवसाय करने की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए अधिनियम को असंवैधानिक बताया। वहीं, राज्य सरकार ने तर्क दिया कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में आती है। अधिनियम का उद्देश्य पारदर्शिता और न्यायोचित शुल्क तय करना है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि निजी स्कूल भी इस नियम से मुक्त नहीं हो सकते। हाईकोर्ट ने कहा- संघ है याचिकाकर्ता, नागरिक नहीं हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा है कि याचिकाकर्ता संघ नागरिक नहीं हैं, ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देकर संवैधानिक अधिकारों का हवाला नहीं दिया जा सकता। फीस के लिए नियम तय करना राज्य सरकार का अधिकार है। अधिनियम का उद्देश्य केवल फीस में पारदर्शिता लाना है। कोई अधिनियम केवल इस आधार पर अवैध नहीं ठहराया जा सकता कि उससे किसी को असुविधा हो रही है। फैसले से छात्रों और अभिभावकों को मिलेगी राहत हाईकोर्ट के इस महत्वपूर्ण फैसले से राज्य के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिल सकती है। अब निजी स्कूलों को फीस तय करने में जवाबदेही और पारदर्शिता बरतनी होगी। इसमें अभिभावकों की भागीदारी और जिला स्तरीय समिति की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। साथ ही प्राइवेट स्कूलों के लिए राज्य शासन के निर्देशों के तहत ही फीस ली जा सकती है। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगेगा लगाम हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब राज्य शासन प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगा सकती है। इसके तहत शासन प्राइवेट स्कूलों की फीस बढ़ाने की सीमा तय भी कर सकेगी। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान भी अधिनियम में शामिल किया गया है। अधिनियम के तहत जिला और राज्य स्तर पर फीस निर्धारण समितियों का गठन अनिवार्य होगा। जिलों में कलेक्टर इसके अध्यक्ष होंगे, जबकि राज्य स्तर पर स्कूल शिक्षा मंत्री समिति के प्रमुख होंगे। ये समितियां निजी स्कूलों द्वारा ली जाने वाली फीस की नीति तय करेंगी। जानिए अधिनियम में क्या है प्रावधान अधिनियम की धारा 10 के अनुसार, कोई भी निजी स्कूल बिना समिति की अनुमति के फीस नहीं बढ़ा सकता। अगर फीस बढ़ानी हो, तो स्कूल प्रबंधन को कम से कम 6 महीने पहले प्रस्ताव देना होगा। समिति को 3 महीने में निर्णय लेना होगा। फीस वृद्धि की अधिकतम सीमा 8 फीसदी तय की गई है। वहीं, अभिभावक संघ भी फीस वृद्धि पर आपत्ति दर्ज कर सकते हैं। समिति को ऐसी आपत्तियों पर सुनवाई करनी होगी। समितियों को सिविल कोर्ट जैसे अधिकार दिए गए हैं, जिससे वे स्कूल से रिकॉर्ड मांग सकते हैं और सुनवाई कर सकते हैं। शिकायत पर हो सकती है कार्रवाई अब स्कूलों को फीस रजिस्टर, वेतन, व्यय, उपस्थिति, भवन किराया से संबंधित दस प्रकार के रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग इसकी जांच कर सकता है। वहीं, अगर कोई स्कूल समिति की अनुमति से अधिक फीस वसूलता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

मुख्यमंत्री साय की दिल्ली बैठक खत्म, बस्तर विकास और कैबिनेट विस्तार पर हुआ मंथन

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपने तीन दिवसीय दिल्ली दौरे के बाद शनिवार सुबह रायपुर लौट आए। इस दौरे में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित भाजपा के कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। दौरा राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रहा, जिसमें छत्तीसगढ़ के विकास, बस्तर की पहचान और बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार जैसे अहम विषयों पर मंथन हुआ। मुख्यमंत्री साय ने एयरपोर्ट पर मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि दिल्ली दौरे में उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा आलाकमान से हुई। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के विजन "अंजोर@2047", राज्य के राज्योत्सव, और अगले छह महीनों तक चलने वाले आयोजनों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। सीएम साय ने बस्तर ओलंपिक को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की योजना का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि इसे 'खेलो इंडिया ट्राइब गेम्स' के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे बस्तर को नई सांस्कृतिक और खेल पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में मिली सफलताएं इस दिशा में सकारात्मक संकेत हैं। जल्द होगा मंत्रिमंडल विस्तार दिल्ली दौरे की एक और अहम उपलब्धि रही मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सकारात्मक संकेत। सीएम साय ने कहा कि थोड़ा इंतजार कीजिए, बहुत जल्द मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा आलाकमान से इस विषय पर गहन चर्चा हुई है और संभावना जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में नए मंत्रियों का शपथग्रहण हो सकता है। सीएम साय ने 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उस समय कुल 12 मंत्रियों ने शपथ ली थी। लेकिन बृजमोहन अग्रवाल के सांसद निर्वाचित होने के बाद दो मंत्री पद रिक्त हो गए, जिन्हें भरने की कवायद कई बार शुरू होकर भी अधूरी रह गई थी। अब उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस गतिरोध का समाधान निकल जाएगा।

PM मोदी ने दिया ट्रंप को जवाब, कहा- भारत बन रहा तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

वाराणसी  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत की अर्थव्यवस्था को 'डेड इकोनॉमी' बताया था. उनके इस तंज के जवाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से करारा संदेश दिया और कहा कि भारत अब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है. पीएम मोदी ने देशवासियों को स्वदेशी अपनाने का संकल्प दिलाया और कहा कि अब समय आ गया है कि हर भारतीय, हर खरीदारी में देशहित को प्राथमिकता दे. प्रधानमंत्री ने साफ कहा- अब भारत भी हर चीज को परखने के लिए सिर्फ एक ही तराजू इस्तेमाल करेगा- वो है, भारतीय पसीने से बनी चीजें. उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है जब देश का हर नागरिक, हर दुकानदार और हर उपभोक्ता इस मंत्र को अपनाए कि हम वही खरीदेंगे जो भारत में बना हो, जिसे भारतीय हाथों ने गढ़ा हो और जिसमें हमारे देश का पसीना हो. वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में यह सिर्फ सरकार की नहीं, हर भारतवासी की जिम्मेदारी है. प्रधानमंत्री का कहना था कि आज दुनिया की अर्थव्यवस्था कई आशंकाओं से गुजर रही है. अस्थिरता का माहौल है. ऐसे में दुनिया के देश अपने-अपने हितों पर फोकस कर रहे हैं. भारत भी दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है. इसलिए भारत को भी अपने आर्थिक हितों को लेकर सजग रहना ही है. भारत को भी अपने किसानों, लघु उद्योगों, युवाओं और रोजगार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देनी होगी. उन्होंने आगे कहा, भारत को अब सजग रहना होगा. कौन सी चीज खरीदनी है, इसका सिर्फ एक ही तराजू होगा- वो जिसमें भारत के किसी नागरिक का पसीना बहा हो. हम वही चीजें खरीदेंगे जो भारत में बनी हों. भारतीय कौशल से बनी हों, भारतीय हाथों से बनी हों. यही हमारे लिए असली स्वदेशी है. 'हर नागरिक बने स्वदेशी का प्रचारक' प्रधानमंत्री मोदी ने इस संकल्प को सिर्फ सरकार या राजनीतिक दलों तक सीमित ना रखकर हर नागरिक की जिम्मेदारी बताया. उन्होंने कहा, सरकार इस दिशा में हर प्रयास कर रही है. लेकिन देश के नागरिक के रूप में हमारे कुछ दायित्व हैं. ये बात सिर्फ मोदी नहीं, हिंदुस्तान के हर व्यक्ति को हर पल बोलते रहना चाहिए- दूसरे को कहते रहना चाहिए. जो देश का भला चाहते हैं, जो देश को तीसरे नंबर की इकोनॉमी बनाना चाहते हैं, उसे अपने संकोच को छोड़कर देशहित में हर पल देशवासियों के अंदर एक भाव जगाना होगा- वह संकल्प है, हम स्वदेशी को अपनाएं. मोदी ने साफ किया कि 'वोकल फॉर लोकल' और 'मेक इन इंडिया' को अब केवल नारा नहीं, व्यवहारिक जीवन का हिस्सा बनाना होगा. 'व्यापारी सिर्फ स्वदेशी माल बेचें, यही सच्ची देशसेवा' प्रधानमंत्री ने देश के व्यापारियों और उद्योगजगत से विशेष आग्रह किया और कहा, अब समय आ गया है कि सिर्फ और सिर्फ स्वदेशी उत्पादों को ही बेचा जाए. उन्होंने कहा, मैं व्यापार जगत से जुड़े भाइयों को आगाह करता हूं- अब हमारी दुकानों पर सिर्फ स्वदेशी सामान बिकना चाहिए. यही देश की सच्ची सेवा होगी. जब हर घर में नया सामान आए तो वो स्वदेशी ही हो, यही हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए. पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक व्यापारिक दबाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन से आयात पर बहस और अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चा के केंद्र में हैं.  

भोपाल में अपराधियों पर शिकंजा, मछली गैंग से जुड़े लोगों के गन लाइसेंस रद्द करने की तैयारी

भोपाल  एमडी ड्रग्स में पकड़े गए यासीन अहमद और उसके परिवार के सदस्यों के शामिल होने के बाद क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार को कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को मछली परिवार से जुड़े 15 लोगों के नाम भेजे हैं। जिनके नाम शस्त्र लाइसेंस हो सकते हैं। पत्र मिलने के बाद शस्त्र शाखा ने भी रिकार्ड खंगालना शुरू कर दिया है। इसके तहत पांच लोगों के शस्त्र मिलने का पता चला है, जिनको आठ शस्त्र रखने की अनुमति दी गई है। इन शस्त्र लाइसेंस को निलंबित करने से पहले नोटिस जारी किए जाएंगे। जानकारी के मुताबिक, अब तक शस्त्र शाखा को सोहेल, शहरयार, शफीक, शाहिद और शावेज के नाम शस्त्र लाइसेंस मिले हैं। जिन पर आठ शस्त्र चढ़े हैं। कौशलेंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि क्राइम ब्रांच से मिली जानकारी के बाद अपराधों में लिप्त लोगों का रिकार्ड सर्च किया जा रहा है। जिनके नाम मिलेंगे, उनके शस्त्र निलंबित किए जाएंगे। जिले में अपराधों में लिप्त लोगों के लाइसेंस निलंबित किए जाते हैं। सरकारी जमीन पर बनी कोठी भी तोड़ेंगे जिला प्रशासन की टीम ने मछली परिवार के सरकारी जमीनों पर बने मैरिज गार्डन, फार्म हाउस, कारखाना, वेयरहाउस, बकरा और मुर्गी फार्म, मदरसे को जमींदोज करने के बाद सील की गई कोठी को भी तोड़ने की तैयारी कर ली है। एसडीएम हुजूर विनोद सोनकिया का कहना है कि सरकारी जमीन पर बनी कोठी को तोड़ने के लिए दोबारा से टीम जाएगी। प्रशासन कार्रवाई कर रहा है     एमडी ड्रग्स मामले के आरोपितों की शस्त्र लाइसेंस संबंधी जानकारी पता कर प्रशासन कार्रवाई कर रहा है। आरोपितों के नाम से शस्त्र लाइसेंस होने की जानकारी मिलती है तो निलंबित की कार्रवाई की जाएगी। – हरिनारायणाचारी मिश्र, पुलिस आयुक्त  

‘मछली गैंग’ का पर्दाफाश जारी, आरोपी यासीन पर एक और गंभीर आरोप दर्ज

भोपाल  बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता शफीक मछली के भाई शाहवर अहमद और भतीजे यासीन अहमद पर लगातार शिकंजा कसता जा रहा है। पहले से ही ड्रग्स तस्करी और मारपीट के मामले में जेल में बंद शाहवर और यासीन पर एक और कार्रवाई की गई है। यासीन अहमद उर्फ मछली पर रेप की एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपी पर अब तक 6वां मामला दर्ज हुआ है। दरअसल, एमपी नगर थाने में दर्ज नए प्रकरण में पीड़िता ने कहा है कि यासीन ने शादी का झांसा देकर करीब एक साल तक उसका यौन शोषण किया। यासीन मछली ने पहले एमपी नगर के एक फाइव स्टार होटल में रेप किया। फिर उसके बाद अलग-अलग जगहों पर युवती के साथ ज्यादती की गई। उसने आरोप लगाया है कि यासीन बेरहमी से पीटता था और उसने मारपीट के वीडियो भी बनाए थे। इन्हीं वीडियो के आधार पर पुलिस ने युवती की पहचान की और उसकी काउंसलिंग के बाद एफआईआर दर्ज की। मछली परिवार की बढ़ रही मुसीबतें इससे पहले भी अरेरा हिल्स और महिला थाने में यासीन के खिलाफ दुष्कर्म और धोखाधड़ी के केस दर्ज हो चुके हैं। पुलिस के अनुसार पीड़िता प्राइवेट नौकरी करती है। वहीं, ड्रग तस्कर यासीन से उसकी मुलाकात एक पब में हुई थी। दोनों की बातचीत के बाद एक दूसरे से दोस्ती हो गई थी। दोनों ने एक-दूसरे को अपने मोबाइल नंबर शेयर किए थे। इसके बाद यासीन ने युवती को मिलने के लिए एक फाइव स्टार होटल में बुलाया, जहां उसने शादी करने का झांसा देकर उसके साथ रेप किया। उसके बाद से वह लगातार युवती का शोषण कर रहा था। जब पीड़िता ने शादी की बात की तो उसने इनकार कर दिया। इतना ही नहीं मारपीट कर वीडियो भी बना लिया।

45 दिन में आत्महत्या का पांचवां मामला, अधीक्षका ने की आत्महत्या से सनसनी

बलरामपुर रामानुजगंज बलरामपुर रामानुजगंज नगर के वार्ड क्रमांक 3 में रिंग रोड में स्थित एकलव्य आवासीय विद्यालय के कन्या छात्रावास की अधीक्षिका नेहा वर्मा संदिग्ध परिस्थितियों में आज सुबह दुपट्टा से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली इसकी जानकारी विद्यालय के अन्य स्टाप को लगी तो तत्काल दरवाजा को जोर से धक्का देकर उसे फांसी से उतारा गया। तब तक उसकी मौत हो चुकी थी घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। प्राप्त जानकारी के अनुसार एकलव्य आवासीय विद्यालय के कन्या छात्रावास की अधीक्षिका नेहा वर्मा पिता संजय कुमार उम्र 25 वर्ष पटना बिहार की रहने वाली थी। वह पिछले वर्ष 27 जून 2024 को कन्या छात्रावास अधीक्षका के रूप में पदभार ग्रहण किया था। एकलव्य आवासीय विद्यालय के प्राचार्य राजू सिंह ने बताया कि नेहा व्यवहार कुशल एवं अपने कर्तव्य के प्रति कर्मठ कर्मचारी थी। कल रात तक उसने अपना ड्यूटी का निर्वहन किया आज सुबह 10:30 बजे के करीब विद्यालय के अन्य स्टाप से मुझे आत्महत्या कर लेने की जानकारी मिली जिसके बाद इसकी सूचना थाने में दी गई। विद्यालय के अन्य सहयोगी कर्मचारी ने बताया कि सुबह तक वह ठीक-ठाक लोगों से बात विचार कर रही थी एकाएक घटना से सभी स्तब्ध हैं। घटना के बाद लगातार बज रहा है मोबाइल पर घंटी घटना के बाद विद्यालय के कर्मचारियों के द्वारा यहां फांसी से शव को निकल गया। वही नेहा का लगातार मोबाइल बज रहा था। इंस्टाग्राम के माध्यम से नेहा के दूसरे सहयोगि विद्यालय स्टाप को घटना की सूचना किसी युवक के द्वारा दी गई। 45 दिनों में आत्महत्या की यह पांचवीं घटना रामानुजगंज क्षेत्र में बीते 45 दिनों में फांसी लगाकर आत्महत्या करने की यह पांचवीं घटना है। फांसी लगाकर आत्महत्या करने वाले सभी लोगों की उम्र 18 से लेकर 30 वर्ष के बीच है एवं सभी अविवाहित थे।

इनामी नक्सली समेत तीन गिरफ्तार, सुरक्षाबलों को मिली अहम कामयाबी

सुकमा सुकमा में थाना केरलापाल क्षेत्रान्तर्गत प्रतिबंधित माओवादी संगठन में सक्रिय दो लाख रुपये के इनामी नक्सली सहित तीन नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार नक्सलियों द्वारा सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने की मंशा से रखे गए टिफिन IED बम एवं अन्य विस्फोटक सामग्री को भी बरामद किया गया। आरोपियों के विरुद्ध थाना केरलापाल में वैधानिक कार्यवाही करते हुए न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया। तीनों नक्सली थाना केरलापाल क्षेत्र के ग्राम गोगुंडा के निवासी हैं। उक्त कार्रवाई थाना केरलापाल पुलिस बल, डीआरजी एवं 159 वाहिनी सीआरपीएफ की संयुक्त टीम द्वारा की गई। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत 1 अगस्त 2025 को ग्राम गोगुंडा, पोंगाभेजी, सिमेल, खुंडूशपारा और आसपास के क्षेत्रों में सर्चिंग हेतु संयुक्त बल रवाना हुआ था। इसी दौरान ग्राम पोंगाभेजी व रबड़ीपारा के जंगल-पहाड़ी क्षेत्र से तीन नक्सलियों क्रमशः (1) पोड़ियाम नंदा पिता देवा, गोगुंडा पंचायत मिलिशिया कमांडर, इनामी ₹2 लाख, उम्र लगभग 40 वर्ष, जाति मुरिया, निवासी गोगुंडा डुंगिनपारा, (2) हेमला जोगा पिता स्व. नंदा, गोगुंडा पंचायत मिलिशिया सदस्य, उम्र लगभग 28 वर्ष, जाति मुरिया, निवासी गोगुंडा इंतापारा, (3) हेमला गंगा पिता स्व. गंगा, गोगुंडा पंचायत मिलिशिया सदस्य, उम्र लगभग 45 वर्ष, जाति मुरिया, निवासी गोगुंडा इंतापारा को गिरफ्तार किया गया। ये सभी प्रतिबंधित माओवादी संगठन केरलापाल एरिया कमेटी अंतर्गत गोगुंडा पंचायत मिलिशिया संगठन में सक्रिय थे। आरोपियों के कब्जे से 2 नग टिफिन बम (वजन लगभग 3-3 किग्रा), 3 नग डेटोनेटर, 2 नग जिलेटिन रॉड, कोर्डेक्स वायर लगभग 2 मीटर, इलेक्ट्रिक वायर (लाल-काला रंग) लगभग 18 मीटर, तथा 2 नग बैटरी बरामद किए गए। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि इन विस्फोटकों को सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से प्लांट करने हेतु जंगल में छिपाकर रखा गया था। उक्त कृत्य विधि के विरुद्ध पाए जाने पर थाना केरलापाल में अपराध क्रमांक 19/2025 धारा 4, 5 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर, 1 अगस्त 2025 को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया।

धर्मांतरण और मानव तस्करी केस में गिरफ्तार ननों की जमानत मंजूर

दुर्ग   छत्तीसगढ़ के दुर्ग में मानव तस्करी और धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार केरल की दो ननों को आज एनआईए अदालत द्वारा ज़मानत दिए जाने के बाद जेल से रिहा कर दिया गया। सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार और केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर और अन्य नेताओं ने उनका स्वागत किया। मानव तस्करी और धर्मातरण के मामले में दुर्ग केंद्रीय जेल में बंद केरल की दो ननो को आज बिलासपुर एनआईए कोर्ट से जमानत मिल दे दी है। केरल के भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर आज दुर्ग जेल पहुंचे। और दोनो नन से की मुलाकात की। इसके कुछ देर में बाद जब दोनो नन को महिला बंदी गृह से रिहा किया।तब प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर दोनो नन को अपने साथ इनोवा कार में बिठाकर रायपुर रवाना हो गए। इससे पूर्व ननो को जमानत मिलने की खुशी में केरल के सांसद और विधायको के द्वारा जेल के बाहर मिठाई बांटकर खुशियां मनाई गई। पूरा मामला 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर नारायणपुर निवासी तीन युवतियों को एक युवक रेलवे स्टेशन लेकर पहुंचा थे।जहां तीनों युवतियों को लेने के लिए दो नन पहुंची थी। इस बात की जानकारी बजरंग दल को लगी जिसके बाद वो दुर्ग रेलवे स्टेशन पहुंचे और जमकर हंगामा किया।बजरंग दल ने ननों पर मानव तस्करी और धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत जीआरपी दुर्ग में की।जिसके बाद जीआरपी ने दो ननों और युवक को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया था जहां जेल भेज दिया था ननों की गिरफ्तारी के बाद 29 जुलाई को कांग्रेस सांसदों का प्रतिनिधिमंडल दुर्ग पहुंचा और जेल में बंद ननों से मुलाकात की।सांसदों ने मुलाकात के बाद कहा कि ननों को झूठे आरोपों में फंसाया गया है।

फिटजी कर्मचारियों को राहत, वेतन न मिलने पर कोर्ट ने सुनाया फैसला – संस्थान देगा 27 लाख

ग्वालियर देशभर में अपनी शाखाओं के माध्यम से छात्रों से भारी फीस वसूलने और बाद में संस्थान बंद कर फरार होने वाले फिटजी कोचिंग संस्थान के खिलाफ अब कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। ग्वालियर में स्थित न्यायालय नियंत्रक प्राधिकारी उपदान अधिनियम (सहायक श्रमायुक्त) नम्रता सोनी ने संस्थान को निर्देश दिया है कि वह अपने छह पूर्व कर्मचारियों को कुल 26,98,786 रुपये की राशि 10% वार्षिक ब्याज सहित 30 दिनों के भीतर भुगतान करे। फिटजी ने ग्वालियर में भी सैकड़ों छात्रों से लाखों की फीस वसूली के बाद अचानक कोचिंग बंद कर दी थी। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें न तो वेतन दिया गया और न ही ग्रेच्युटी या अन्य निर्धारित लाभ। इस अन्याय से पीड़ित होकर उन्होंने श्रम विभाग में शिकायत दर्ज कराई। मामले में कर्मचारियों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता निखिल शिवहरे ने बताया कि फिटजी संस्थान ने न केवल छात्रों बल्कि अपने ही वफादार कर्मचारियों के साथ धोखाधड़ी की। ग्वालियर में वर्षों तक काम कर चुके इन कर्मचारियों को जब उचित वेतन और सेवा लाभ नहीं मिले तो उन्होंने कानूनी रास्ता अपनाया। श्रमायुक्त कार्यालय ने फिटजी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद सहायक श्रमायुक्त ने संस्थान को भुगतान का आदेश दिया। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया तो संबंधित राशि पर साधारण ब्याज जोड़कर वसूली प्रमाण पत्र (RC) जारी किया जाएगा और कानूनी वसूली की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

स्कूल मान्यता रद्द पर सरकार का आश्वासन – सभी बच्चों को दूसरे संस्थानों में मिलेगा प्रवेश

भोपाल  प्रदेश के 250 निजी स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी गई है। इन स्कूलों में अध्ययनरत करीब 25 हजार विद्यार्थियों को नजदीक के सरकारी स्कूलों में प्रवेश का विकल्प दिया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआइ) ने सभी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को इस संबंध में व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कहा गया कि ऐसे विद्यार्थियों को एक सप्ताह के भीतर दूसरे स्कूल में प्रवेश दिलाया जाए। बच्चों की आगे की पढ़ाई पर संकट जिन स्कूलों की मान्यता समाप्त हुई है उनमें राजधानी भोपाल के ही करीब 12 स्कूल हैं। इनमें दर्ज बच्चों के एडमिशन अवैध हो गए हैं। अब बच्चों की आगे की पढ़ाई पर संकट है। इस कारण अब डीईओ की जिम्मेदारी होगी कि इन स्कूलों में दर्ज बच्चों को नजदीक के स्कूलों में प्रवेश दिलाएं। यह आदेश सत्र शुरू होने के चार माह बाद हुए। 250 स्कूलों की अपील खारिज बता दें, कि प्रदेश के 350 निजी स्कूलों की मान्यता संबंधी विवाद की अपील शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के पास पहुंची थी। उन्होंने 250 स्कूलों की अपील को खारिज कर दिया। ये स्कूल जमीन संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए थे। कुछ स्कूलों के पास जमीन नहीं थी तो कुछ के पास पर्याप्त जमीन और रजिस्ट्री के कागज नहीं थे। अपील में जाने वाले 50 स्कूलों की मान्यता का नवीनीकरण हुआ वहीं 50 स्कूलों का मामला अभी भी लंबित है। राजधानी के ये सालों पुराने स्कूल राजधानी के अंकुर हायर सेकेंडरी स्कूल, जवाहर चौक स्थित सेवन हिल्स, सर्वधर्म कोलार स्थित प्रीति हायर सेकेंडरी स्कूल, कोलार स्थित राजपुष्पा, पार्थ, ज्ञान कृष्णा समेत अन्य स्कूल शामिल है। इन स्कूलों में मान्यता समाप्त करने का कारण जमीन नहीं होना बताया गया है। इन स्कूलों में करीब दो ढाई हजार विद्यार्थी हैं। जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार का कहना है कि राजधानी के करीब 12 स्कूल हैं, जिनकी मान्यता समाप्त की गई है। इसमें कुछ बड़े स्कूल भी हैं, जिनके पास जमीन नहीं था और वे वर्षों से संचालित हो रहे थे। इन स्कूलों के करीब 2500 विद्यार्थियों को पास के सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाया जाएगा।