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श्रीमती मौसम बिसेन सदस्य नियुक्त, आयोग में पहले से कार्यरत हैं दो सदस्य

भोपाल मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने श्यामला हिल्स स्थित आयोग कार्यालय में औपचारिक रूप से कार्य भार ग्रहण किया। डॉ. कुसमरिया ने कहा कि आयोग प्रदेश में भ्रमण कर पिछड़े वर्ग की सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक स्थिति तथा समस्याओं का अध्ययन करेगा और उनके समाधान के लिये सुझाव प्रस्तुत करेगा। साथ ही पिछड़े वर्ग को उनके आरक्षण संबंधी अधिकार दिलाने के लिये भी कार्य किया जाएगा। डॉ. कुसमरिया ने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर से कृषि में एम.एससी. एवं कृषि अर्थशास्त्र में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। वे पूर्व में दमोह एवं खजुराहो संसदीय क्षेत्रों से सांसद और विधायक रह चुके हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश शासन में कृषि मंत्री के रूप में भी कार्य किया है। वर्तमान में वे मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष भी हैं। पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का अध्यक्ष पद संभालने के उपरांत दोनों आयोगों के मध्य बेहतर समन्वय के साथ कार्य किया जा सकेगा। आयोग में श्रीमती मौसम बिसेन को सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। आयोग में पूर्व से दो सदस्य कार्यरत हैं। इस अवसर पर पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन, पूर्व विधायक रमेश भटेरे, नगर पालिका अध्यक्ष बालाघाट श्रीमती भारती ठाकुर, सत्यनारायण अग्रवाल, कन्हैया चौहान, संजय मिश्रा, गोलू ठाकुर, सागर बिसेन सहित प्रदेश भर के कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  

जितेन्द्र चौरसिया : राजधानी भोपाल का ऐसा पत्रकार जिसकी मुहिम ने सरकारी बसें शुरू कराने कराया निर्णय, तो बंद कराया खनन माफिया का खेल

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र चौरसिया हैं। जितेंद्र चौरसिया ने इंदौर से भोपाल आकर पत्रकारिता में पहचान बनाई है। जितेंद्र चौरसिया ने इंदौर, भोपाल और दिल्ली में पत्रकारिता की है। इन्होंने मुख्य रूप से दैनिक भास्कर और पत्रिका सहित कई बड़े अखबारों में काम किया। जितेंद्र चौरसिया करीब 23 साल से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। इंदौर से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में काम शुरू किया। फिर नवभारत, राज एक्सप्रेस, नवदुनिया, दैनिक भास्कर और पत्रिका (राजस्थान पत्रिका ग्रुप) में विभिन्न पदों पर काम किया। वर्तमान में पत्रिका भोपाल में कार्यरत हैं। इंदौर और भोपाल में कार्य के दौरान कई पुरस्कार प्राप्त किये। साथ ही मध्य प्रदेश के 2008,  2013, 2018 और 2023 के विधानसभा और 2009, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव का राज्य स्तरीय कवरेज किया है। मुख्य रूप से जितेंद्र चौरसिया राजनीति और प्रशासन के क्षेत्र में गहरी पकड़ रखते हैं। उनकी अनेक खबरों पर सरकार को तुरंत एक्शन लेना पड़ा है, जिसके चलते ये धारदार पत्रकारिता में पहचान रखने वाले पत्रकार हैं। प्रमुख उपलब्धि :   जितेंद्र चौरसिया को पत्रकारिता के करियर में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां मिली। इसमें विश्वविद्यालय के कुलपतियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरणों के खुलासे से लेकर रेत माफिया, शराब माफिया और जमीन का दर्द मुहिम में भू-माफिया के खिलाफ अनेक खबरें की गई।  – मप्र में खनन माफिया के खिलाफ महिम चलाना विशेष उल्लेखनीय है। पत्रिका में 2013 से 2016 के बीच खनन माफिया पर कई बड़ी खबरें सिलसिलेवार की, जिसके बाद कई खदानों पर जांच बैठी। इसमें प्रदेश के नेताओं और उनके रिश्तेदारों की खदानों पर सिलसिलेवार स्टोरी की गई। इसमें बाद में राज्य सरकार को नियम बदलना पड़ा। इसीलिये अब डायरेक्ट नेता अपने नाम खदान नहीं रखते।  – हाल ही 2024 और 2025 में मध्य प्रदेश में राज्य सड़क परिवहन निगम (सपनि) की बसों को वापस शुरू करने के लिए जितेन्द्र चौरसिया ने अभियान चलाया, जिसे सफलता मिली। सपनि की मुहिम में राज्य सरकार को सड़क परिवहन निगम फिर शुरू करने का ऐलान करना पड़ा। अब सड़क परिवहन निगम शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है। इस पर पत्रिका संस्थान ने भी वेतनवृद्धि और पुरस्कार दिया। मध्य प्रदेश राज्य में सड़क परिवहन निगम को वापस शुरू करने में जितेंद्र चौरसिया की खबरों की अहम भूमिका रही है। जितेन्द्र चौरसिया के सोशल मीडिया अकाउंट लिंक्स- ट्विटर – https://x.com/Jitendra27ji?t=R4fxsyZSPRQgLuLjOjSSvA&s=35 इंस्टाग्राम- https://www.instagram.com/jitendra27ji?igsh=YWFiczF1cXB3YTNj फेसबुक- https://www.facebook.com/jitendra.chourasiya.007

गौरवशाली भारतीय नायकों की गाथा नाटक से पहुंचेगी नई पीढ़ी तक : मुख्यमंत्री

भारतीय नायकों के गौरवशाली इतिहास से युवाओं को परिचित कराने का नाटक सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवाओं को इतिहास से जोड़ेगा नाटक: डॉ. यादव ने बताया सांस्कृतिक माध्यम का महत्व गौरवशाली भारतीय नायकों की गाथा नाटक से पहुंचेगी नई पीढ़ी तक : मुख्यमंत्री नाटक बनेगा प्रेरणा का मंच, युवाओं में भरेगा राष्ट्रभक्ति : डॉ. यादव का संदेश 6 दिवसीय हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वास्तव में नाटक कला अनूठी है। नाटकों के माध्यम से भारतीय इतिहास के गौरवशाली व्यक्तित्वों की जानकारी वर्तमान पीढ़ी को प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री ने संस्कृति विभाग की संस्था मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के सहयोग से रवीन्द्र भवन में आयोजित छह दिवसीय हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमरिया, पूर्व राज्यसभा सदस्य रघुनंदन शर्मा, प्रमुख सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी, फिल्म सेंसर बोर्ड के सदस्य सुवाणी त्रिपाठी और अन्य अतिथि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह संयोग है कि वे हरिहर की नगरी से आते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की चौदह विद्याओं और चौसठ कलाओं में नाट्य शास्त्र के सभी आयाम शामिल हैं। उज्जैन ऐसी नगरी है, जहां भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा हुई साथ ही महाकाल की नगरी होने का आशीर्वाद भी इसे मिला है। उज्जैन में श्रावण माह, कार्तिक माह और अन्य अवसरों पर होने वाले आयोजन अनूठे होते हैं। हमारे इतिहास में जहां राष्ट्र के दुर्बल होने के निराशाजनक उदाहरण देखने को मिलते हैं, वहीं हमारे समर्थ होने के भी प्रमाण मिलते हैं। विदेशी आक्रांताओं ने आराध्य स्थलों को नष्ट करने और प्रतिमाएं अन्य देशों में ले जाने का कृत्य किया, लेकिन यह भी सत्य है कि हमारे पराक्रमी और राष्ट्रप्रेमी शासकों ने उन प्रतीकों को पुन: स्वदेश लाने का कार्य भी किया। नाटक कला अनूठी है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं विद्यालयीन और महाविद्यालयीन स्तर से नाटकों के मंचन से जुड़े रहे हैं। उन्हें अनेक वर्ष पूर्व महानाट्य जाणताराजा देखने का सौभाग्य मिला, जो शिवाजी महाराज के साहसिक जीवन पर केन्द्रित था। बाद में इस तर्ज पर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन को मंच पर लाने में सफलता मिली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के विविध  पक्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि शिवाजी महाराज की तरह सम्राट विक्रमादित्य सुशासन और शौर्य के प्रतीक थे। उनके राज्य का काफी विस्तार हुआ। उन्होंने अपने भूभाग के समस्त नागरिकों का ऋण समाप्त करने का ऐतिहासिक कार्य किया और विक्रम संवत् के प्रर्वतन की दिशा में आगे बढ़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग को छह दिवसीय नाट्य समारोह के आयोजन के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीर भारत न्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'लोक में मणिधर-बघेश्वर' और नाट्य समारोह की स्मारिका का विमोचन किया। प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला ने हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह में प्रस्तुत होने वाले नाटकों और भरतमुनि राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रस्तुत होने वाले शोध पत्रों की जानकारी दी। अतिथियों का स्वागत संस्कृति संचालक एन.पी. नामदेव ने किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी सहित विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कलाप्रेमी उपस्थित थे।  

गौरवशाली भारतीय नायकों की गाथा नाटक से पहुंचेगी नई पीढ़ी तक : मुख्यमंत्री

भारतीय नायकों के गौरवशाली इतिहास से युवाओं को परिचित कराने का नाटक सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवाओं को इतिहास से जोड़ेगा नाटक: डॉ. यादव ने बताया सांस्कृतिक माध्यम का महत्व गौरवशाली भारतीय नायकों की गाथा नाटक से पहुंचेगी नई पीढ़ी तक : मुख्यमंत्री नाटक बनेगा प्रेरणा का मंच, युवाओं में भरेगा राष्ट्रभक्ति : डॉ. यादव का संदेश 6 दिवसीय हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वास्तव में नाटक कला अनूठी है। नाटकों के माध्यम से भारतीय इतिहास के गौरवशाली व्यक्तित्वों की जानकारी वर्तमान पीढ़ी को प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री ने संस्कृति विभाग की संस्था मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के सहयोग से रवीन्द्र भवन में आयोजित छह दिवसीय हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमरिया, पूर्व राज्यसभा सदस्य रघुनंदन शर्मा, प्रमुख सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी, फिल्म सेंसर बोर्ड के सदस्य सुवाणी त्रिपाठी और अन्य अतिथि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह संयोग है कि वे हरिहर की नगरी से आते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की चौदह विद्याओं और चौसठ कलाओं में नाट्य शास्त्र के सभी आयाम शामिल हैं। उज्जैन ऐसी नगरी है, जहां भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा हुई साथ ही महाकाल की नगरी होने का आशीर्वाद भी इसे मिला है। उज्जैन में श्रावण माह, कार्तिक माह और अन्य अवसरों पर होने वाले आयोजन अनूठे होते हैं। हमारे इतिहास में जहां राष्ट्र के दुर्बल होने के निराशाजनक उदाहरण देखने को मिलते हैं, वहीं हमारे समर्थ होने के भी प्रमाण मिलते हैं। विदेशी आक्रांताओं ने आराध्य स्थलों को नष्ट करने और प्रतिमाएं अन्य देशों में ले जाने का कृत्य किया, लेकिन यह भी सत्य है कि हमारे पराक्रमी और राष्ट्रप्रेमी शासकों ने उन प्रतीकों को पुन: स्वदेश लाने का कार्य भी किया। नाटक कला अनूठी है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं विद्यालयीन और महाविद्यालयीन स्तर से नाटकों के मंचन से जुड़े रहे हैं। उन्हें अनेक वर्ष पूर्व महानाट्य जाणताराजा देखने का सौभाग्य मिला, जो शिवाजी महाराज के साहसिक जीवन पर केन्द्रित था। बाद में इस तर्ज पर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन को मंच पर लाने में सफलता मिली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के विविध  पक्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि शिवाजी महाराज की तरह सम्राट विक्रमादित्य सुशासन और शौर्य के प्रतीक थे। उनके राज्य का काफी विस्तार हुआ। उन्होंने अपने भूभाग के समस्त नागरिकों का ऋण समाप्त करने का ऐतिहासिक कार्य किया और विक्रम संवत् के प्रर्वतन की दिशा में आगे बढ़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग को छह दिवसीय नाट्य समारोह के आयोजन के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीर भारत न्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'लोक में मणिधर-बघेश्वर' और नाट्य समारोह की स्मारिका का विमोचन किया। प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला ने हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह में प्रस्तुत होने वाले नाटकों और भरतमुनि राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रस्तुत होने वाले शोध पत्रों की जानकारी दी। अतिथियों का स्वागत संस्कृति संचालक एन.पी. नामदेव ने किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी सहित विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कलाप्रेमी उपस्थित थे।  

पेसा कानून के बेहतर क्रियान्वयन के लिये अमरकंटक में स्थापित होगा उत्कृष्टता केन्द्र

भोपाल  भोपाल स्थित वाल्मी परिसर में गुरूवार को पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार, मध्यप्रदेश शासन तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू), अमरकंटक के संयुक्त तत्वावधान में हुए कार्यम्रम में पेसा कंपेडियम का विमोचन तथा एमओयू समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। कार्यक्रम में भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज, मध्यप्रदेश शासन की प्रमुख सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ब्योमकेश त्रिपाठी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पेसा पर आधारित एक संक्षिप्त वीडियो फिल्म प्रदर्शित की गई। “पेसा के अंतर्गत बेहतरीन कार्यों की कंपेडियम” का विमोचन किया गया। इस अवसर पर “पेसा को सशक्त बनाने के लिए क्षमता निर्माण, अनुसंधान एवं संस्थागत सहयोग” विषय पर एक विशेषज्ञ पैनल चर्चा भी हुई।  

प्लाटून कमांडर बनने का सपना होगा पूरा! राजस्थान में 84 पदों पर भर्ती शुरू

जयपुर राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक शानदार अवसर सामने आया है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) ने प्लाटून कमांडर के पदों पर 84 रिक्तियों की घोषणा की है। भर्ती की ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और 21 अगस्त 2025 तक आधिकारिक वेबसाइट rssb.rajasthan.gov.in के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। कुल पदों का विवरण इस भर्ती प्रक्रिया के तहत राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) द्वारा कुल 84 प्लाटून कमांडर पदों पर नियुक्ति की जाएगी। इनमें से 82 पद गैर-अनुसूचित क्षेत्र के लिए आरक्षित हैं, जबकि 2 पद अनुसूचित क्षेत्र (Scheduled Area) के लिए निर्धारित किए गए हैं। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति क्षेत्रवार रिक्तियों के अनुसार की जाएगी। बोर्ड द्वारा 22 नवंबर 2025 को ऑफलाइन (OMR आधारित) परीक्षा आयोजित की जाएगी। शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके अलावा, ऐसे भूतपूर्व सैनिक भी पात्र हैं जो नायब सूबेदार या उससे उच्च रैंक पर कार्यरत रहे हों और विधिवत रूप से सेवानिवृत्त हो चुके हों। साथ ही, उम्मीदवार को देवनागरी लिपि में हिंदी भाषा का ज्ञान होना चाहिए तथा राजस्थान की संस्कृति से परिचित होना अनिवार्य है। आयु सीमा की बात करें तो, 1 जनवरी 2026 को आधार मानते हुए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए। हालांकि, आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को सरकार द्वारा नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। वेतनमान प्लाटून कमांडर पद के लिए राजस्थान राज्य सरकार द्वारा सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतनमान निर्धारित किया गया है। चयनित उम्मीदवारों को पे-बैंड 9300-34800 रुपए, ग्रेड पे 11, तथा पे मैट्रिक्स लेवल L-10 के तहत वेतन दिया जाएगा। आवेदन शुल्क सामान्य वर्ग और क्रीमीलेयर OBC/MBC वर्ग के उम्मीदवारों को ₹600, जबकि नॉन-क्रीमीलेयर OBC, EWS, SC, ST, एवं दिव्यांगजन श्रेणी के उम्मीदवारों को 400 रुपए शुल्क देना होगा। शुल्क का भुगतान उम्मीदवार ई-मित्र कियोस्क, नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, अथवा क्रेडिट कार्ड जैसे ऑनलाइन माध्यमों से 21 अगस्त 2025 तक कर सकते हैं।

कमजोर पड़ा मानसून जैसलमेर में, अगले चरण की बारिश की उम्मीद तीन दिन बाद

जैसलमेर पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी जिले जैसलमेर में मानसून फिलहाल सुस्त होता नजर आ रहा है। बीते दिनों हुई अच्छी बारिश के बाद अब बादलों ने जिले से दूरी बना ली है। बुधवार को जिले में मौसम पूरी तरह साफ रहा और दोपहर के समय तेज धूप ने गर्मी का असर और अधिक बढ़ा दिया। हालांकि आसमान में छिटपुट हल्के बादलों की मौजूदगी बनी रही, लेकिन वह बारिश लाने में नाकाम रहे। मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार को अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री सेल्सियस, जबकि न्यूनतम तापमान 26.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिन के तापमान में मामूली गिरावट देखने को मिली है, लेकिन धूप के तीखे तेवर जारी हैं। मौसम विशेषज्ञों ने अगले तीन दिनों तक जिले में मौसम शुष्क और गर्म रहने की संभावना जताई है। वहीं, जो किसान बारिश का इंतजार करते हुए खरीफ की फसल की बुवाई स्थगित किए बैठे थे। उन्होंने अब खेतों की जुताई कर बोवनी शुरू कर दी है। इस वर्ष अब तक की बारिश ने खेती योग्य भूमि में नमी की पर्याप्त मात्रा बना दी है, जिससे खेतों में बीजों के अंकुरण के लिए अनुकूल स्थिति बनी हुई है। फिर बढ़ेगी बारिश की संभावना, सिस्टम सक्रिय कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ. अतुल गालव के अनुसार, वर्तमान में बंगाल की खाड़ी में एक मानसूनी परिसंचरण तंत्र सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से आगामी दिनों में विशेष रूप से 24 जुलाई के बाद, एक नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। यह सिस्टम पूर्वी राजस्थान की ओर बढ़ सकता है और इसके असर से 27 से 30 जुलाई के बीच पुनः बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।डॉ. गालव ने बताया कि मानसून फिलहाल जैसलमेर में कमजोर पड़ गया है, जिस कारण वर्षा की गतिविधियां रुकी हुई हैं। लेकिन बंगाल की खाड़ी से सक्रिय हो रहे सिस्टम के प्रभाव से एक बार फिर जिले में नमी बढ़ेगी और बारिश की वापसी संभव है।

कौन बनेगा अगला उपराष्ट्रपति? थावरचंद गहलोत सहित कई नामों की चर्चा तेज

भोपाल  उपराष्ट्रपति जगदीप धनखंड के इस्तीफे के बाद रेस में कई नाम हैं। सियासी गलियारों में उन नामों को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। इस रेस में मध्य प्रदेश के भी एक दिग्गज नेता का नाम है। वह केंद्र की मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। अभी कर्नाटक के राज्यपाल हैं। चुनाव आयोग ने उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऐसे में उम्मीदवार के नाम जल्द ही आ जाएंगे। अभी एमपी से कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत का नाम भी चल रहा है। पॉलिटिक्ल अनुभवों के साथ-साथ सियासी समीकरण में भी फिट बैठते हैं। अभी कर्नाटक के राज्यपाल हैं थावरचंद गहलोत थावरचंद गहलोत एमपी के सीनियर नेता हैं। केंद्र की राजनीति में शुरू से सक्रिय रहे हैं। अभी कर्नाटक के राज्यपाल हैं। उन्हें उपराष्ट्रपति पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। उनके राजनीतिक अनुभव और जाति के समीकरण को भी ध्यान में रखा जा रहा है। इससे उनका नाम इस दौड़ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रतलाम के रहने वाले हैं थावरचंद गहलोत थावरचंद गहलोत का राजनीतिक सफर मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के आलोट से शुरू हुआ है। वह राजनीतिक और जातिगत समीकरणों में फिट बैठते हैं। उनके पास राज्यसभा का लंबा अनुभव है। वह राज्यसभा में सदन के नेता भी रह चुके हैं। इसके अलावा, वह मोदी सरकार में दो बार केंद्रीय मंत्री रहे हैं। वह बीजेपी की सबसे बड़ी संसदीय समिति के सदस्य भी रहे हैं। अनुसूचित जनजाति से आते हैं गहलोत 77 साल के गहलोत अनुसूचित जनजाति से आते हैं। इस वजह से जातिगत समीकरणों में भी वह फिट बैठते हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी किसी समर्पित कार्यकर्ता को उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बना सकती है। थावरचंद गहलोत उनमें से एक हो सकते हैं। 1980 में बने थे पहली बार विधायक थावरचंद गहलोत 1980 में पहली बार मध्य प्रदेश में विधायक बने थे। 1990 में वह एमपी सरकार में राज्यमंत्री बन गए। 1996 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने। वहीं 1998 से 2004 तक लगातार लोकसभा सांसद रहे हैं। 2012 में पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए। 2018 में फिर से राज्यसभा गए। 2014 में मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री बने। 2019 में केंद्रीय मंत्री के साथ-साथ राज्यसभा में वह सदन के नेता भी बने। 2021 में कर्नाटक के राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद से पद पर बने हुए हैं। पीएम मोदी के गुड बुक में हैं गहलोत थावरचंद गहलोत को पीएम मोदी का करीबी माना जाता है। उनके पास राजनीतिक अनुभव के साथ-साथ बीजेपी में भी बड़ी जिम्मेदारियां निभाने का अनुभव है। वह बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव और उत्तर पूर्व भारत के प्रभारी भी रह चुके हैं। इसके अलावा, वह बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे हैं।हालांकि थावरचंद गहलोत के साथ अन्य भी कई नामों की चर्चा है। मध्य प्रदेश से वह अकेले हैं, जिनके नाम की चर्चा है। हालांकि अंतिम निर्णय बीजेपी और एनडीए गठबंधन को लेना है कि उनका संयुक्त उम्मीदवार कौन होगा।  

अन्नपूर्णा तालाब पर भव्य घाट निर्माण को मंजूरी, छठ पर्व पर दिखेगी खास रौनक

इंदौर इंदौर नगर निगम द्वारा छठ पूजा के लिए विभिन्न स्थानों पर घाट निर्माण की योजना के तहत वर्षों पुराने अन्नपूर्णा तालाब को चुना गया है। निगम यहां सवा करोड़ रुपये की लागत से घाट बनाएगा और तालाब परिसर का संपूर्ण सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा। इसके अंतर्गत प्रवेश द्वार से लेकर तालाब के चारों ओर सुविधाजनक घाट निर्माण, लाइटिंग और बैठने की व्यवस्था की जाएगी, जिससे छठ पूजा जैसे प्रमुख पर्व को मनाने में श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। कभी बदहाल था अन्नपूर्णा तालाब, अब बनेगा धार्मिक आयोजन का केंद्र एक समय पर अन्नपूर्णा तालाब की हालत बेहद खराब थी। चारों ओर गंदगी, कचरे के ढेर और जलकुंभी से भरे इस तालाब के आसपास लोग आना तक पसंद नहीं करते थे। नगर निगम द्वारा कुछ समय पूर्व इस तालाब की साफ-सफाई करवाई गई और आसपास के क्षेत्र में विकास कार्य कराए गए, जिससे स्थिति में सुधार आया। अब निगम यहां छठ पूजा के मद्देनजर विशेष घाट निर्माण करने जा रहा है। इसके लिए निगम द्वारा टेंडर जारी किए गए हैं, जिनमें घाट निर्माण के साथ-साथ परिसर का समग्र सौंदर्यीकरण भी शामिल है। उत्तर भारतीय समुदाय के लिए विशेष तैयारी, तय होगी समय सीमा छठ पूजा उत्तर भारतीय समुदाय का प्रमुख पर्व है और इंदौर में इसकी लोकप्रियता को देखते हुए नगर निगम इसे व्यवस्थित ढंग से मनाने के लिए कार्य कर रहा है। अन्नपूर्णा तालाब पर बन रहे इन घाटों की योजना इस तरह से तैयार की जा रही है कि श्रद्धालुओं को जगह, सुविधा और स्वच्छता के स्तर पर कोई परेशानी न हो। निगम अधिकारियों का कहना है कि कार्यों के लिए समय सीमा निर्धारित की जाएगी ताकि त्यौहार से पहले सभी निर्माण पूर्ण हो जाएं। साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी छठ पूजा के लिए उपयुक्त जमीनों की तलाश की जा रही है, जहां भविष्य में घाट बनाए जा सकें। सुखलिया क्षेत्र की सड़कों पर चलेगा विकास कार्य, बदलेगी ड्रेनेज व्यवस्था नगर निगम द्वारा केवल धार्मिक स्थलों पर ही नहीं, बल्कि शहर के अन्य इलाकों में भी बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए काम किया जा रहा है। सुखलिया और आसपास की कॉलोनियों जैसे खातीपुरा, पन्नानगर, सूरज नगर में वर्षों पुरानी ड्रेनेज लाइनों के कारण बार-बार चोकिंग की शिकायतें मिल रही थीं। अब इन क्षेत्रों में डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से नई और बड़ी ड्रेनेज लाइनें बिछाने का काम शुरू किया जा रहा है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। साथ ही पुराने टूटे-फूटे चेंबर भी सुधारे जाएंगे, जिससे स्थानीय निवासियों को राहत मिलेगी और जल निकासी की व्यवस्था बेहतर होगी। 

अन्नपूर्णा तालाब पर भव्य घाट निर्माण को मंजूरी, छठ पर्व पर दिखेगी खास रौनक

इंदौर इंदौर नगर निगम द्वारा छठ पूजा के लिए विभिन्न स्थानों पर घाट निर्माण की योजना के तहत वर्षों पुराने अन्नपूर्णा तालाब को चुना गया है। निगम यहां सवा करोड़ रुपये की लागत से घाट बनाएगा और तालाब परिसर का संपूर्ण सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा। इसके अंतर्गत प्रवेश द्वार से लेकर तालाब के चारों ओर सुविधाजनक घाट निर्माण, लाइटिंग और बैठने की व्यवस्था की जाएगी, जिससे छठ पूजा जैसे प्रमुख पर्व को मनाने में श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। कभी बदहाल था अन्नपूर्णा तालाब, अब बनेगा धार्मिक आयोजन का केंद्र एक समय पर अन्नपूर्णा तालाब की हालत बेहद खराब थी। चारों ओर गंदगी, कचरे के ढेर और जलकुंभी से भरे इस तालाब के आसपास लोग आना तक पसंद नहीं करते थे। नगर निगम द्वारा कुछ समय पूर्व इस तालाब की साफ-सफाई करवाई गई और आसपास के क्षेत्र में विकास कार्य कराए गए, जिससे स्थिति में सुधार आया। अब निगम यहां छठ पूजा के मद्देनजर विशेष घाट निर्माण करने जा रहा है। इसके लिए निगम द्वारा टेंडर जारी किए गए हैं, जिनमें घाट निर्माण के साथ-साथ परिसर का समग्र सौंदर्यीकरण भी शामिल है। उत्तर भारतीय समुदाय के लिए विशेष तैयारी, तय होगी समय सीमा छठ पूजा उत्तर भारतीय समुदाय का प्रमुख पर्व है और इंदौर में इसकी लोकप्रियता को देखते हुए नगर निगम इसे व्यवस्थित ढंग से मनाने के लिए कार्य कर रहा है। अन्नपूर्णा तालाब पर बन रहे इन घाटों की योजना इस तरह से तैयार की जा रही है कि श्रद्धालुओं को जगह, सुविधा और स्वच्छता के स्तर पर कोई परेशानी न हो। निगम अधिकारियों का कहना है कि कार्यों के लिए समय सीमा निर्धारित की जाएगी ताकि त्यौहार से पहले सभी निर्माण पूर्ण हो जाएं। साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी छठ पूजा के लिए उपयुक्त जमीनों की तलाश की जा रही है, जहां भविष्य में घाट बनाए जा सकें। सुखलिया क्षेत्र की सड़कों पर चलेगा विकास कार्य, बदलेगी ड्रेनेज व्यवस्था नगर निगम द्वारा केवल धार्मिक स्थलों पर ही नहीं, बल्कि शहर के अन्य इलाकों में भी बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए काम किया जा रहा है। सुखलिया और आसपास की कॉलोनियों जैसे खातीपुरा, पन्नानगर, सूरज नगर में वर्षों पुरानी ड्रेनेज लाइनों के कारण बार-बार चोकिंग की शिकायतें मिल रही थीं। अब इन क्षेत्रों में डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से नई और बड़ी ड्रेनेज लाइनें बिछाने का काम शुरू किया जा रहा है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। साथ ही पुराने टूटे-फूटे चेंबर भी सुधारे जाएंगे, जिससे स्थानीय निवासियों को राहत मिलेगी और जल निकासी की व्यवस्था बेहतर होगी।