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भारतीय सेना के शक्तिशाली टैंक T-72 और T-90 का अब MP में होगा रखरखाव

भोपाल   भारतीय सेना में शामिल शाक्तिशाली रूसी मूल के टी-90 और टी 72 टैंक की जल्द मध्यप्रदेश में रिपेयरिंग होगी. इन टैंकों की रिपेयरिंग के लिए मध्यप्रदेश में जल्द ही वॉर टैंक रिपेयरिंग हब बनने जा रहा है. मध्यप्रदेश के दौरे पर आई केन्द्रीय रक्षा संयुक्त सचिव गरिमा भगत ने भोपाल में डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स की मीटिंग में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के जबलपुर, कटनी, इटारसी और सागर के बीच डिफेंस कॉरिडोर की भरपूर संभावनाएं हैं. जबलपुर में टैंक रिपेयरिंग हब के लिए करीबन 300 करोड़ का निवेश प्रस्ताव भी मिला है. डिफेंस सेक्टर का बड़ा केन्द्र बन सकता है एमपी मैन्युफैक्चरर्स और अधिकारियों से चर्चा के दौरान केन्द्रीय रक्षा संयुक्त सचिव ने कहा, '' मध्यप्रदेश के जबलपुर में 24 सितंबर को एमएसएमई कॉन्क्लेव आयोजित होने जा रही है. डिफेंस सेक्टर में जबलपुर में अच्छी संभावनाएं मौजूद हैं. यहां पहले से ही व्हीकल फैक्ट्री और गन कैरिज फैक्ट्री मौजूद हैं. व्हीकल फैक्ट्री में भारतीय सेना के शक्तिशाली टैंक टी-90 और टी-72 की रिपेयरिंग का भी प्रस्ताव है. मध्यप्रदेश में रक्षा क्षेत्र में निवेश को लेकर बड़ी संभावना मौजूद है और केन्द्र सरकार इसमें प्रदेश का सहयोग कर रही है. रूसी मूल के हैं T-90, T72 टैंक     टी-90 टैंक मूल रूप से रूसी युद्धक टैंक हैं.     इसका भारतीय नाम भीष्म दिया गया है.     इसे विश्व के सबसे घातक टैंकों में से एक माना जाता है.     2003 से ही यह भारतीय सेना का मुख्य युद्ध टैंक है.     इसे लगातार अपग्रेड किया जा रहा है.     इसी तरह टी-72 टैंक अब पुराने हो चले हैं, टी 90 टैंक टी-72 का ही अपग्रेड वर्जन है.     टी-72 टैंक को भी लगातार अपग्रेड किया जा रहा है.     इन टैंकों में अब 1 हजार एचपी के इंजन लगाए जा रहे हैं.     अभी इसमें 780 एचपी के इंजन लगे हैं. देश का तीसरा बड़ा सेंटर बनेगा मध्यप्रदेश जबलपुर में मेंटेनन्स, रिपेयर और ऑपरेशन सेंटर प्रस्तावित किया गया है. यदि इसने आकार लिया तो यह दिल्ली और चेन्नई के बाद देश का तीसरा बेस टैंक ओवरहॉल फैसिलिटी सेंटर होगा, जहां टैंकों की रिपेयरिंग कर उन्हें नया रूप दिया जाएगा. दिल्ली और चेन्नई में फिलहाल यह काम हो रहा है, लेकिन काम का ज्यादा भार है. इसे देखते हुए इसका तीसरा सेंटर बनाने की ओर कदम आगे बढ़ाए जा रहे हैं. जबलपुर वैसे भी देश का बड़ा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब है. यहां गन कैरिज, बुलेटप्रूफ व्हीकल्स और गोला-बारूद बनाकर देश की सेना की बड़ी जरूरतें पूरी की जाती हैं. जबलपुर में 1904 में पहली पहली बार फैक्ट्री लगाई गई थी और सेना से जुड़े हथियार बनाना शुरू किए गए थे. 

दमोह के 3 गांवों ने आपसी सहमति से शराबबंदी का फैसला, तोड़ा तो जेब ढीली

दमोह   शराब को सामाजिक बुराई का दर्जा दिया गया है. दमोह में 3 गांव के लोगों ने मिलकर इस बुराई को दूर करने का फैसला किया है. ग्रामीणों ने आपसी सहमति से गांव में पूरी तरह से शराबबंदी का फैसला लिया है. इस फैसले को कड़ाई से लागू कराने के लिए इसका उल्लंघन करने पर जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि शराब की वजह से कई घर-परिवार बर्बाद हो गए. गांव में आए दिन शराब पीकर मारपीट की घटनाएं सामने आती हैं. इस पर लगाम लगाने के लिए ये फैसला लिया गया है. दमोह के 3 गांवों में शराबबंदी का निर्णय विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा दमोह में शराबबंदी के लिए मुहिम चलाई जा रही है. जिसमें भगवती मानव कल्याण संगठन द्वारा किए जा रहे प्रयास अब रंग ला रहे हैं. संगठन के प्रयासों से 2 दिन के भीतर जिले के 3 ग्राम पंचायत आनू, हलगज और मुराड़ी में सर्वसम्मति से शराबबंदी का निर्णय लिया गया. इस मौके पर जनप्रतिनिधियों के अलावा स्थानीय थाने की पुलिस भी मौजूद थी. ग्रामीणों की सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय पंचायत में फैसला लिया गया कि तीनों गांवों में शराब, गांजा सहित सभी प्रकार के नशे पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. जो भी व्यक्ति इस फैसले का उल्लंघन करेगा, जैसे शराब पीकर गांव में आएगा, गांव में शराब बेचेगा या किसी भी प्रकार का नशा करने या दूसरों को करने के लिए प्रेरित करेगा, उस पर 11 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. ग्रामीणों ने नारा लगाकर इस बुराई को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया. ग्रामीणों की सर्वसम्मति से लिया गया फैसला ग्राम पंचायत मुड़ारी के सरपंच प्रतिनिधि मुकेश सिंह ने बताया "हमारे गांव में जो गांजा, शराब और अन्य नशीले पदार्थ बिक रहे हैं उन्हें बंद करना है. इससे गांव में बहुत परेशानियां हो रही हैं. शराब पीकर लोग गाली गलौज भी करते हैं. जिसके बाद सभी ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया और प्रस्ताव पारित किया है कि गांव में पूर्ण शराबबंदी लागू की जाए." आनू की ग्राम सभा में पहुंचे बांदकपुर चौकी प्रभारी एएसआई राजेंद्र मिश्रा में कहा कि "यह एक अच्छी पहल है. इस सामाजिक बुराई को दूर होना चाहिए. ग्रामीण और उनकी मुहिम में पुलिस का पूरा सहयोग है. पहले भी पुलिस ने सहयोग किया है अभी भी करेगी." शराब पीकर गाली गलौज करने पर 5 हजार का जुर्माना भगवती मानव कल्याण संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश लोधी ने कहा कि "शराब ने घर परिवार में कोहराम मचा रखा है. जिस परिवार में बाप-बेटे शराब पीते हैं, वहां मारपीट होती है लड़ाई-झगड़े होते हैं. वहां का वातावरण खराब हो गया है. इससे जब लोग परेशान हो गए तो इसके लिए सभी जाति धर्म के लोगों ने निर्णय लिया कि शराब बंदी की जाए. इसके लिए शराब पीकर गाली-गलौज करने वालों पर 5000 और 11000 रुपए का जुर्माने का प्रावधान रखा गया है." मध्य प्रदेश के कई गांवों में लागू है शराबबंदी इससे पहले भी बीते महीने दमोह की हटा तहसील के बंधा गांव में ग्रामीणों ने आपसी सहमति से शराबबंदी का निर्णय लिया था. इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों के कई गांव में इसी तरह शराबबंदी का फैसला लिया गया है. बुरहानपुर के चौंड़ी और जम्बूपानी गांव में शराब बैन है. जबलपुर की तिन्हेटा तहसील के 6 गांवों में शराबबंदी लागू है. निवाड़ी के किशोरपुरा गांव में शराब बैन है. इसके अलावा भी प्रदेश में ऐसे कई गांव हैं जहां ग्रामीणों ने आपसी सहमति से गांव में शराब पीने और बेचने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है.

RSS की विस्तार रणनीति में बदलाव, भैयाजी जोशी बोले- गांव से जोड़ेंगे बड़ी कंपनियों को

इंदौर  इंदौर में हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के एक दिवसीय प्रवास के बाद अब संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी भैयाजी जोशी मध्यप्रदेश पहुंचे हैं। वे इंदौर में संघ पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इसमें संघ के शताब्दी वर्ष (2025-26) के दौरान प्रदेश के गांव-गांव में होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। युवाओं और प्रोफेशनल्स को शाखाओं से जोड़ने पर जोर भैयाजी जोशी ने इंदौर से पहले बैतूल में बैठक की थी। इस बैठक में पंच परिवर्तन, शाखाओं का विस्तार और सेवा कार्यक्रमों पर चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार, जोशी शाम तक इंदौर पहुंचेंगे और यहां संपर्क विभाग के पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। संघ 2025-26 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। इसकी शुरुआत इंदौर से की गई है। शताब्दी वर्ष में विशेष रूप से युवाओं और प्रोफेशनल्स को शाखाओं से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। शाखाओं की संख्या बढ़ाने के लिए समय-निर्धारण लचीला रखा जाएगा ताकि सुबह से शाम तक किसी भी समय शाखा लगाई जा सके। इसके साथ ही गोष्ठियों और पंच परिवर्तन कार्यक्रमों का कैलेंडर भी तैयार किया गया है। प्रचारकों को गांवों में जिम्मेदारी बैतूल बैठक में भैयाजी जोशी ने प्रचारकों को निर्देश दिए कि वे गांवों में शाखाओं की संख्या बढ़ाएं और कॉलेज, आईटी के छात्रों व प्रोफेशनल्स को संघ से जोड़ें। इसके अलावा शहरों में पथ संचलन, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर संवाद और युवाओं को नगर, मंडल व बस्तियों में सक्रिय करने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई। विजयदशमी (2 अक्टूबर 2025) से संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम औपचारिक रूप से शुरू होंगे। पंच परिवर्तन पर फोकस मालवा प्रांत में वर्तमान में 3046 स्थानों पर 4636 शाखाएं संचालित हो रही हैं। बैतूल सम्मेलन में संघ के सामाजिक और सेवा कार्यों की भी समीक्षा की गई, जिनमें शिक्षा, चिकित्सा, स्वावलंबन और सामाजिक जागरूकता शामिल हैं। संघ पदाधिकारियों ने बताया कि पंच परिवर्तन के तहत स्वदेशी, पर्यावरण, नागरिक कर्तव्य, सामाजिक समरसता और कुटुंब प्रबोधन से जुड़े कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इसके अलावा बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक नए लोगों को जोड़ने की रणनीति बनाई जा रही है। रिटायर अधिकारियों-कर्मचारियों को भी संघ के कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा। इसके लिए संपर्क अभियान शुरू कर दिया गया है। 

इंदौर में ऑनलाइन गेमिंग का कहर: बर्बाद हुए सैकड़ों परिवार, टूटी कई जिंदगियां

 इंदौर  ऑनलाइन गेमिंग से अपना सबकुछ गंवा रही युवा पीढ़ी और इसकी लत का शिकार हुए अपने नौनिहालों को गंवा रहे परिवारों को अब जाकर राहत मिलने की उम्मीद जागी है। प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 लोकसभा और राज्यसभा में पास होने के बाद ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाए जाने की राह भी साफ हो गई है। देशभर में बीस हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि गंवाने के अलावा सैकड़ों युवाओं ने आत्महत्या भी कर ली। 2020 में इंदौर में ऑनलाइन गेमिंग के खिलाफ जनहित याचिका भी दायर की गई थी। इसमें केंद्र और राज्य सरकार तथा गेमिंग कंपनियों के अलावा इसका प्रचार करने वाले खिलाड़ियों और फिल्म सितारों को भी नोटिस दिए गए थे। इंदौर में पिछले कुछ वर्षों में कई दर्दनाक घटनाएं सामने आईं। 13 वर्षीय छात्र आकलन जैन ने ऑनलाइन गेम खेलते हुए अपनी मां का डेबिट कार्ड इस्तेमाल कर लगभग 2,800 रुपये गंवा दिए। डर और तनाव के कारण एक अगस्त को उसने आत्महत्या कर ली। उसके स्वजन आज भी यह दर्द नहीं भूल पाए हैं। स्वजन ने कहा कि हमारा बेटा होनहार था। अगर पहले ही सरकार गेमिंग पर सख्ती करती तो शायद वह आज जीवित होता। नशे की तरह है गेमिंग की लत गेमिंग की लत नशे जैसी होती है। मरीज जब तक गेम नहीं खेलता, बेचैन रहता है। कई मामलों में लोग सारी कमाई एक हफ्ते में ऑनलाइन गेम में उड़ा देते हैं। इलाज के दौरान उन्हें दवा के साथ-साथ काउंसलिंग और बैंक खाते में सीमित पैसे रखने जैसी सलाह दी जाती है। माता-पिता को बच्चों पर लगातार नजर रखनी चाहिए। – डॉ. कृष्णा मिश्रा, मनोचिकित्सक केस 1 : मार्च में इंदौर के 16 वर्षीय छात्र प्रिंस का मामला भी पूरे शहर को झकझोर गया था। वह ऑनलाइन गेम्स का आदी था और जब उसका फोन चोरी हो गया तो उसे तुरंत नया फोन नहीं मिल सका। गुस्से और बेचैनी में उसने जहर खा लिया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। केस 2 : 25 वर्षीय जितेंद्र वास्कले इंदौर में पढ़ाई के साथ सुरक्षा गार्ड का काम करता था। ऑनलाइन गेमिंग में फंसकर उसने लोन ले लिया, लेकिन लगातार हारने के कारण कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया। दबाव और निराशा में उसने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को मिले सुसाइड नोट में उसने साफ लिखा कि वह कर्ज और गेमिंग लत से टूट चुका है। केस 3 : 24 वर्षीय एक नौकरीपेशा युवक जो हर माह 50 हजार रुपये कमाता था, यह पैसा वह एक ही हफ्ते में गेम में उड़ा देता था। इलाज के लिए डॉक्टर के पास पहुंचा। उसे ऑनलाइन गेम की लत बार-बार तलब होती थी। जब तक गेम नहीं खेलता था, बेचैन रहता था। उसके लिए गेम नशे की तरह एडिक्शन रहता है। डॉक्टरों ने खाते में कम रुपये रखवाए। इसके साथ ही दवाइयां भी दी। करीब छह माह इलाज के बाद वह अब स्वस्थ है। ऑनलाइन गेमिंग के माध्यम से हुई ठगी मंदसौर में ऑनलाइन गेम की लत से कई लोगों ने रुपये गंवाए हैं। लोक-लाज के भय से अधिकांश पुलिस थाने तक नहीं पहुंचे। 15 दिसंबर 2024 को इंदौर क्राइम ब्रांच ने मंदसौर के आठ सदस्यीय गिरोह को गिरफ्तार किया था, जो ऑनलाइन गेमिंग वेबसाइट के माध्यम से फ्राड करते थे। यह ठग लोगों से लिए रुपये अलग-अलग खातों में डालकर उन्हें आइडी और पासवर्ड देते थे। उसी आइडी से लोग वेबसाइट पर सट्टा खेलते थे। आरोपितों के पास से करोड़ों का हिसाब-किताब मिला था। पुलिस ने मंदसौर के परीक्षित लोहार, रोशन लालवानी, विजय विश्वकर्मा, अभिषेक यादव, राजेश कोतक, प्रफुल्ल सोनी, महेंद्रसिंह के साथ ही बिहार के रुचित को गिरफ्तार किया था। आरोपितों के पास से फर्जी बैंक खाते नंबर भी मिले थे। मोबाइल में दुबई मनी एक्सचेंज करने वाले लोगों के नंबर भी मिले थे।

रिपोर्ट के लिए CAG परेशान, मध्य प्रदेश के 34 विभागों से नहीं मिला खर्च का डाटा

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार के कई विभागों की हालत अच्छी नहीं है। मंत्रियों की उदासीनता और अफसरों की लापरवाही का नतीजा यह हो रहा है कि 34 विभाग अब तक बजट के बारे में जानकारी नहीं दे पा रहे। यह जानकारी ऑडिटर जनरल कार्यालय द्वारा मांगी गई है, लेकिन उसे जानकारी नहीं मिल पाई। दरअसल, महालेखाकार कार्यालय कैग ने 31 मार्च 2025 की स्थिति तक विभागों से जानकारी मांगी है। यह जानकारी मांगी गई है कि विभाग के अधीन बजट नियंत्रण अधिकारियों ने बैंकों में कितनी राशि जमा कर रखी थी? इस अवधि में कौन-कौन से बड़े कार्य और परियोजनाएं अधूरी रहीं? कई बार पत्र लिख चुका CAG महालेखाकार कार्यालय ने इसको लेकर इस वित्त वर्ष में सबसे पहले 29 अप्रैल को, फिर 20 मई और इसके बाद 24 जुलाई को पत्र लिखा था। महालेखाकार कार्यालय इस बार सीधे मुख्य सचिव को पत्र लिख चुका है। इसके बाद गुरुवार तक सभी विभागों को जानकारी भेजने के निर्देश एक बार फिर जारी किए गए थे। इसके बाद भी जवाब नहीं मिला तो एक अगस्त को वित्त विभाग को अलग और मुख्य सचिव को अलग पत्र भेजकर जानकारी दिलाने को कहा है। वित्त विभाग ने बार-बार विभागों को जानकारी भेजने के निर्देश दिए हैं। बताया जाता है कि बजट नियंत्रण अधिकारियों की इस लापरवाही का सीधा असर सरकार की वित्तीय रिपोर्टिंग पर पड़ रहा है। इससे राज्य के वित्तीय लेनदेन का ब्यौरा तैयार करने में मुश्किलें आ रही हैं। यह विभाग बने लापरवाह राजस्व विभाग, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन, एमएसएमई, जनजातीय कार्य विभाग, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा, अनुसूचित जाति कल्याण, कुटीर एवं ग्रामोद्योग, महिला एवं बाल विकास, वाणिज्यिक कर, संसदीय कार्य, विमानन, लोक सेवा प्रबंधन, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार, वित्त विभाग, गृह विभाग, स्कूल शिक्षा, विधि एवं विधायी कार्य, जनसंपर्क विभाग, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, संस्कृति विभाग, उच्च शिक्षा, सामान्य प्रशासन, वन विभाग, खनिज साधन, किसान कल्याण एवं कृषि विकास, श्रम विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, नगरीय विकास एवं आवास, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग और लोक निर्माण विभाग। वित्त विभाग ने मांगी थी यह जानकारी तय बजट के अलावा अन्य खर्च, अनपेड बिलों से संबंधित देनदारियां, आउट साइड फंड ऑपरेशन की स्थिति, बैंकों में जमा राशि, पंचायत राज संस्थाओं को दी जाने वाली बकाया ग्रांट, अपूर्ण बड़े कार्यों की सूची, नए ऋण और अग्रिम (एडवांस) की जानकारी, ऋण की अदायगी और बकाया स्थिति, ऋण और अग्रिम का समेकित विवरण (समरी), निगमों, सरकारी कंपनियों और सहकारी संस्थाओं को दी गई सहायता, पीपीपी मोड और जनभागीदारी के तहत हुए निवेश की जानकारी, नई योजनाओं पर लिए गए नीतिगत निर्णयों का संभावित कैश फ्लो, संस्थाओं को दी गई ग्रांट की पूरी जानकारी, सिंचाई परियोजनाओं के वित्तीय परिणाम, अब तक नहीं दी गई यह महत्वपूर्ण जानकारी, बिजली योजनाओं के वित्तीय परिणाम, ऋण व लाभांश की रिपोर्ट।  

अब स्मार्ट पोर्टल बताएगा MP के किस जिले में कौन-सी बीमारी फैल रही है

 भोपाल  मध्य प्रदेश के जिला अस्पताल अब डिजिटल तकनीक से लैस हो रहे हैं। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) मध्यप्रदेश ने स्मार्ट पोर्टल (स्टेट मानिटरिंग एंड असेसमेंट आन रियल टाइम पोर्टल) को नए स्वरूप में शुरू किया है। शुरुआत राजधानी के जेपी अस्पताल से हो चुकी है और आने वाले समय में सभी जिला अस्पताल इस प्लेटफार्म से जुड़ेंगे। स्मार्ट पोर्टल एक डिजिटल प्लेटफार्म है, जिसमें मरीजों की पूरी मेडिकल हिस्ट्री, जांच रिपोर्ट और दवाइयों की जानकारी दर्ज होगी। हर मरीज को यूनिक हेल्थ आईडी (यूएचआईडी) नंबर मिलेगा। इस नंबर के आधार पर डॉक्टर तुरंत मरीज की पिछली रिपोर्ट, बीमारियों और उपचार का पूरा रिकॉर्ड देख सकेंगे। इससे मरीजों को हर बार पुराने पर्चे और कागज लाने की झंझट से छुटकारा मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग को मिलेगा जिलावार डेटा विशेषज्ञों के अनुसार, पोर्टल से जिलावार बीमारी का डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा। किस जिले में कौन-सी बीमारी तेजी से फैल रही है, इसका तुरंत पता लगाया जा सकेगा। कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक का विश्लेषण संभव होगा। इससे सरकार को स्वास्थ्य नीतियां बनाने और योजनाओं की दिशा तय करने में मदद मिलेगी। पोर्टल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों से भी जोड़ा जा रहा है। इसमें गैर-संचारी रोग (एनसीडी), नेशनल ओरल हेल्थ प्रोग्राम (एनओएचपी), नेशनल प्रोग्राम फार हेल्थ केयर आफ द एल्डरली (एनपीएचसीई), नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम (एनआरसीपी) और नेशनल मेंटल हेल्थ प्रोग्राम (एनएमएचपी) शामिल होंगे। अब इन योजनाओं से जुड़ी जांच, दवाइयों और परामर्श की जानकारी भी ऑनलाइन दर्ज होगी। पारदर्शिता और सुविधा डिजिटल सिस्टम के जरिए स्वास्थ्य सेवाएं न केवल पारदर्शी होंगी, बल्कि तेज भी होंगी। डॉक्टर और मरीज दोनों को इससे सुविधा होगी। मरीज का इलाज आसान होगा और अस्पताल प्रशासन के रिकॉर्ड प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी। प्रदेशभर में लागू किया जा रहा     पोर्टल पहले से संचालित था, लेकिन इसकी प्रापर मानिटरिंग नहीं हो पा रही थी। कुछ कमियां थीं, इसलिए अब इसे नए स्वरूप में लागू किया जा रहा है। मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री और राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं को एक ही प्लेटफार्म पर लाकर इसे 2025 से पूरे प्रदेशभर में लागू किया जा रहा है। – सलोनी सिडाना, मिशन संचालक, एनएचएम, मप्र  

मध्यप्रदेश में पराली प्रबंधन की नई पहल, किसानों को धान और गेहूं के अवशेष से होगा फायदा

ग्वालियर  ग्वालियर चंबल अंचल में हुई रिकार्ड वर्षा के बीच धान का रकबा लक्ष्य से अधिक बढ़ गया है। इसके साथ ही पराली की समस्या भी डराने लगी है, क्योंकि पिछले साल देश में सबसे अधिक पराली अंचल के श्योपुर और दतिया में जलाई गई थी। बहरहाल, कृषि विभाग ने इस समस्या का समाधान निकाल लिया है। कृषि विभाग ने किसानों को पराली का प्रबंधन सिखाने की योजना बनाई है। योजना कारगर साबित हुई तो किसानों को दोहरा फायदा होगा। यानी पराली की समस्या का समाधान होगा और बुवाई के लिए खेत की बार-बार जुताई से मुक्ति मिलेगी। एक बार में ही खेत की पराली समस्या का हल और बीज की बुवाई भी हो जाएगी। यह काम हैप्पी सीडर मशीन से होगा। कृषि विभाग फिलहाल जिले के 250 किसानों को 250 हेक्टेयर जमीन पर हैप्पी सीडर से पराली प्रबंधन व जुताई का तरीका सिखाएगा। क्या है हैप्पी सीडर मशीन, कैसे होगा पराली की समस्या का हल हैप्पी सीडर एक आधुनिक कृषि मशीन है, जो खासतौर पर पराली (फसल कटने के बाद बचा हुआ डंठल और पुआल) जलाने की समस्या का समाधान करेगी। हैप्पी सीडर को ट्रैक्टर से जोड़ा जाता है। यह पहले खेत में पड़ी हुई पराली को काटकर साइड में फैला देती है। उसी समय मशीन जमीन में गेहूं या अन्य रबी की फसल का बीज बो देती है। इस तरह बिना पराली जलाए सीधे उसी खेत में अगली फसल की बुआई हो जाती है। क्या है कृषि विभाग की पूरी योजना     स्थानीय कृषि विभाग धान की पैदावार करने वाले अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसे 250 किसानों को चिह्नित कर रहा है, जिनके पास कम से कम एक हेक्टेयर जमीन हो। धान की फसल होने के बाद इन किसानों के खेतों में हैप्पी सीडर से सीधे पराली को काटकर, खेत जोतकर गेहूं की बुवाई कराई जाएगी।     हैप्पी सीडर मशीन की कीमत 1.5 लाख से 3 लाख रुपये के बीच है। इस पर सरकार 50 प्रतिशत से अधिक सब्सिडी दे रही है। यदि कोई समूह या समिति इसे खरीदता है, तो सब्सिडी और बढ़ जाती है। कृषि विभाग गांव के उन किसानों को हैप्पी सीडर मशीन खरीदने के लिए प्रेरित कर रही है, जिनके पास ट्रैक्टर हैं। ऐसे होगा किसानों को दोहरा फायदा     कृषि विभाग के सहायक संचालक नरेश मीणा बताते हैं कि धान की कटाई के बाद पराली को जलाने या नष्ट करने के लिए खेत को तैयार किया जाता है। इस तरह बुआई से पहले किसानों को दो से तीन बार जुताई करना होती है। हैप्पी सीडर मशीन पराली की कटाई करेगी और साथ ही गहरी जुताई भी कर देगी। इस तरह किसानों का श्रम और खर्च बचेगा। इसका उपयोग गेहूं की कटाई के बाद नरवाई के प्रबंधन में भी किया जा सकता है।     हैप्पी सीडर से काटकर खेत की मिट्टी में मिलाई गई पराली एक से डेढ़ महीने में जैविक खाद में बदल जाएगी। इससे किसानों को खेतों में खाद भी कम देना होगा। धान का रकबा बढ़ गया     ग्वालियर ही नहीं, श्योपुर आदि जिलों में अच्छी वर्षा की वजह से अन्य फसलों की बुवाई नहीं हो पाई, केवल धान की बुवाई हुई है। इस बार धान का रकबा करीब 15 हजार हेक्टेयर बढ़ गया है। धान की कटाई के बाद पराली जलाने की समस्या खड़ी होगी। इसलिए किसानों को हैप्पी सीडर मशीन से पराली का प्रबंधन व सीधे गेहूं की बुआई का प्रबंधन सिखाया जाएगा। – आरबीएस जाटव, उप संचालक, कृषि व किसान कल्याण विभाग, ग्वालियर  

यूपी में बन रहा फोर लेन हाईवे रुका, भूमि अधिग्रहण बना बड़ी चुनौती

परसपुर (गोंडा) चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग का निर्माण भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही पूरी न होने के कारण शुरू नहीं हो सका है। गोंडा के पांच गांवों में भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही चल रही है। विभागीय अधिकारी 15 सितंबर के बाद निर्माण शुरू होने की उम्मीद जता रहे हैं। केंद्र सरकार ने अयोध्या की चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग के निर्माण की स्वीकृति वर्ष 2019 में दी थी, इसका नाम 227 नेशनल हाईवे है। चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग को फोर लेन राष्ट्रीय राजमार्ग में तब्दील किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर यात्रा सुविधा मिलेगी। 3350 करोड़ रुपये की लागत से 275 किलोमीटर लंबे इस मार्ग का निर्माण कराया जाना है, जिसे छह खंडों में बांटा गया है। वर्ष 2021 में कार्यदायी संस्था ने सेटेलाइट व ड्रोन से सर्वे का काम शुरू किया। बस्ती, अंबेडकरनगर, अयोध्या, बाराबंकी व गोंडा इस मार्ग का निर्माण होना है, जिसमें गोंडा जिले में 75 किलोमीटर लंबा हाईवे बनाया जाएगा। जिले में घाघरा नदी पर पुल बनने के साथ ही बहुअन मदार मांझा, चरसडी, राजापुर, खैरा,अल्लीपुर खांडेराय, बखरिहा,बरौली, होकर परिक्रमा मार्ग निकाला जाएगा। जमीन पर पत्थर भी लगा दिया गया है लेकिन, परिक्रमा मार्ग का निर्माण शुरू नहीं हो रहा है। एनएचएआइ के सहायक अभियंता वेदप्रकाश ने कहा कि बस्ती, अंबेडकरनगर, अयोध्या व बाराबंकी में भूमि अधिग्रहणपूरा हो चुका है जबकि, गोंडा में बहुअन मदार मांझा, राजापुर, खैरा, अल्लीपुर खांडेराय व अमदही में भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही चल रही है। उन्होंने कहा कि इस मार्ग का निर्माण छह पैकेज में होना है। पैकेज एक व दो का कार्य बस्ती में, पैकेज तीन में आंबेडकरनगर, चार में अयोध्या, पांच में बाराबंकी व छठे पैकेज में गोंडा में कार्य होगा। परियोजना का निर्माण 15 सितंबर के बाद शुरू होने की उम्मीद है। 

लापरवाही से भड़के स्वास्थ्य मंत्री, मरीज को स्ट्रेचर पर सड़क पार कराने पर जताई नाराज़गी

अंबिकापुर सरगुजा संभाग के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक महिला मरीज को ऑक्सीजन लगाकर स्ट्रेचर से सड़क पार कर ले जाने का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रसारित वीडियो ने यह उजागर कर दिया कि अस्पताल के दोनों हिस्सों के बीच मरीजों को सड़क पार कराना ही एकमात्र विकल्प है। वीडियो सामने आते ही स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने घटना को गंभीर मानते हुए विभागीय अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और तुरंत जांच के आदेश दिए। स्वास्थ्य मंत्री ने दिए जांच के आदेश उन्होंने कहा कि मरीजों की देखभाल और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस तरह की लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री के निर्देश के बाद संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं सरगुजा ने अस्पताल अधीक्षक को नोटिस जारी कर तत्काल जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, वहीं अस्पताल प्रशासन ने नर्सिंग स्टाफ की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रकरण में नर्सिंग सिस्टर किरण बेक को नोटिस जारी कर जबाब मांगा गया है कि जब मरीजों को लाने ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था है तो उसका उपयोग क्यों नहीं किया गया?    स्वास्थ्य मंत्री की सख्त चेतावनी स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि मरीजों की देखभाल में किसी भी प्रकार की लापरवाही करने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी, साथ ही अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। अस्पताल अधीक्षक डाक्टर आरसी आर्या ने कहा कि अस्पताल दो हिस्से में है। दोनों हिस्से में अलग-अलग वार्ड है। मरीजों को एक हिस्से से दूसरे हिस्से के वार्ड में लाने ले जाने के लिए एक एंबुलेंस की व्यवस्था है। संवाद की कमी आई सामने इस प्रकरण में संवाद की कमी परिलक्षित हुई है। उस समय एक दूसरे मरीज को लेकर एंबुलेंस गया था। स्वजन थोड़ी देर प्रतीक्षा करते तो एंबुलेंस मिल जाती, लेकिन उन्होंने स्वयं मरीज को ले जाने की सोची। उन्होंने कहा कि पुराने कर्मचारियों को सारी व्यवस्थाओं की जानकारी थी। वर्तमान में कुछ नए आउटसोर्सिंग के कर्मचारी आए हैं। अस्पताल के सामने अव्यस्थित यातायात को दुरुस्त करने लगातार पुलिस अधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है।

हनुमानगंज बाईपास खुला, अब वाराणसी-लखनऊ हाईवे पर नहीं फंसेगा ट्रैफिक

वाराणसी  वाराणसी-सुलतानपुर-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-56) करीब तीन वर्ष के इंतजार के बाद पूरी तरह फोरलेन हो गया है। सुलतानपुर से करीब छह किलोमीटर आगे (जौनपुर की तरफ) सड़क डायवर्जन किया गया था क्योंकि हनुमानगंज बाईपास अधूरा पड़ा था, जिसे एक माह पहले ही चालू किया गया है। डायवर्जन की वजह से वाहन पुराने दो लेन मार्ग से गुजारे जा रहे थे, ऐसे में हनुमानगंज रेलवे क्रासिंग पर जाम लगता लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। करीब 4.70 किमी. डायवर्जन मार्ग लोहरामऊ से शुरू होकर दोमुहां (पखरौली) में फोरलेन सड़क पर जुड़ता था, लेकिन अब 5.97 किमी. बाईपास शुरू होने से जाम की समस्या दूर हो गई है। गोपालपुर के पास नया आरओबी भी बनाया गया है, इसके कारण वाहनों की निर्बाध आवाजाही मुमकिन हुई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने फोरलेन बाईपास का निर्माण 19 अक्टूबर 2022 को करीब 80 करोड़ लागत से शुरू कराया था लेकिन परियोजना विलंबित हो गई। यह प्रोजेक्ट अप्रैल 2024 में ही पूरा हो जाना चाहिए था लेकिन कई बार समय सीमा बढ़ानी पड़ी।    विधानसभा की आश्वासन समिति के समक्ष मामला उठाया गया था, यह समिति प्रोजेक्ट की निगरानी कर रही थी। हर महीने रिपोर्ट तलब होती। 15 जुलाई को प्रोजेक्ट को अंतिम रूप दिया गया और ट्रैफिक चालू कर दिया गया। दिल्ली की कंपनी विद्या इन्फ्रास्ट्रक्चर को निर्माण एजेंसी नियुक्त किया गया था। विलंबित परियोजना के चलते कंपनी पर जुर्माना लगाने की भी तैयारी चल रही है। एनएचएआइ के परियोजना निदेशक पंकज मिश्रा ने बताया कि पुराने मार्ग की तुलना में बाईपास की 1233 मीटर लंबाई बढ़ाई गई है। परियोजना विलंबित होने से वाहनों को रेलवे क्रासिंग पार करते हुए जाना पड़ता था लेकिन अब समस्या नहीं होगी।