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मनी लॉन्ड्रिंग केस: चैतन्य बघेल से पूछताछ के लिए ईडी को मिली 5 दिन और

 रायपुर प्रदेश में हुए 32 सौ करोड़ के शराब घोटाला और मनी लांड्रिंग मामले में कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को 5 दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया है। अब 23 अगस्त तक ईडी चैतन्य से नए तथ्यों पर पूछताछ करेगी। कोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री भी बेटे से मिलने पहुंचे थे। मंगलवार को न्यायिक रिमांड खत्म होने पर चैतन्य बघेल को कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान ईडी ने नए साक्ष्यों के आधार पर कस्टोडियल रिमांड की मांग की। कोर्ट में इस पर लंबी बहस हुई। बचाव पक्ष ने रिमांड की मांग को अवैधानिक बताया। वकीलों ने तर्क दिया कि दर्ज एफआईआर आइपीसी की धाराओं के तहत हुई है, जिसमें केवल प्रथम न्यायिक रिमांड तक ही कस्टडी मांगी जा सकती है। वहीं, ईडी के वकील ने पंजाब और इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए रिमांड को वैधानिक ठहराया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष कोर्ट ने ईडी की मांग स्वीकार कर ली। 16.70 करोड़ मिलने का दावा ईडी के मुताबिक, शराब घोटाले से जुड़े मनी लांड्रिंग केस में चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपये मिले हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि घोटाले से निकली ब्लैक मनी को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में लगाया गया। पैसे को सफेद करने के लिए फर्जी निवेश दिखाया गया और सिंडिकेट के साथ मिलकर करीब 1,000 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई। जांच में सामने आया कि चैतन्य बघेल के विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट (बघेल डेवलपर्स) में भी घोटाले की रकम का निवेश हुआ। ईडी ने प्रोजेक्ट से जुड़े अकाउंटेंट और अन्य ठिकानों पर छापेमारी कर अहम दस्तावेज व डिजिटल डिवाइस जब्त किए हैं। मामले में ईडी की पूछताछ जारी है।

महंगाई भत्ता बढ़ोतरी: MP वित्त विभाग ने तय की लिमिट, 2028-29 तक 94% होगा डीए

भोपाल  मध्यप्रदेश में अधिकारी-कर्मचारियों का अगले 3 साल में 30 प्रतिशत तक महंगाई भत्ता (DA) बढ़ेगा। अभी कर्मचारियों को 55 प्रतिशत डीए मिल रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में 31 मार्च तक इसे 9 प्रतिशत बढ़ाकर 64 प्रतिशत करने का टारगेट है। इसमें से 4 प्रतिशत तो दिवाली तक ही बढ़ेगा। जबकि शेष 5 प्रतिशत मार्च के आखिर से पहले दिया जाएगा।सरकार हर साल डीए बढ़ाकर चुनावी साल 2028-29 तक महंगाई भत्ता 94 प्रतिशत कर देगी। दरअसल, सरकार ने रोलिंग बजट की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें ये प्रावधान किए गए हैं। वहीं, विभागवार बजट की लिमिट भी तय कर दी है। अब अलग-अलग कार्यों के लिए विभाग प्रमुख इसी बजट में बदलाव कर सकेंगे। लेकिन, विभागों को तय लिमिट से अधिक बजट का प्रावधान नहीं होगा। अभी आधा वित्तीय वर्ष न बीता हो पर सरकार ने 2026-27 के बजट की तैयारी शुरू कर दी है। अभी कर्मचारियों को 55 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है, जो अगले साल बढ़कर 74 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। यानी एक साल में 19 प्रतिशत तक की महंगाई भत्ता की वृद्धि होगी। इसके हिसाब से सभी विभागों को स्थापना व्यय की गणना करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश में पहली बार सरकार एक साथ तीन वर्ष की वित्तीय आवश्यकताओं का आकलन करके बजट तैयार करा रही है। हर वर्ष स्थापना बजट बढ़ता जा रहा है। भारत सरकार बढ़ा सकती महंगाई भत्ता आगामी वर्षों में ढाई लाख से अधिक रिक्त पदों की पूर्ति किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसे देखते हुए वित्त विभाग ने सभी विभागों से कहा है कि वे स्थापना का आकलन भी उसी हिसाब से करते हुए बजट प्रस्ताव तैयार करें। वर्ष 2026-27 के लिए कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में संभावित वृद्धि को देखते हुए 74 प्रतिशत की दर से स्थापना व्यय की गणना करने के लिए कहा गया है। दरअसल, वर्ष 2025-26 की शेष अवधि के लिए भारत सरकार तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ा सकती है। इसके अनुरूप प्रदेश में भी वृद्धि होगी, जिससे यह 58 प्रतिशत हो जाएगा। प्रदेश सरकार ने तय किया है कि भारत सरकार जब से महंगाई भत्ता बढ़ाएगी तब से ही प्रदेश के कर्मचारियों को उसका लाभ दिया जाएगा। यद्यपि, पेंशनरों के मामले में ऐसा नहीं है। अभी भी उन्हें 53 प्रतिशत की दर से महंगाई राहत मिल रही है क्योंकि छत्तीसगढ़ सरकार में 55 प्रतिशत करने को लेकर सहमति अब तक नहीं दी है। राज्य पुनर्गठन अधिनियम के अनुसार महंगाई राहत में वृद्धि के लिए दोनों के मध्य सहमति होना आवश्यक है। पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी का कहना है कि पेंशनरों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। अभी भी कर्मचारियों की तुलना में हमें दो प्रतिशत महंगाई राहत कम दी जा रही है। पुराना एरियर भी अभी तक नहीं दिया गया है। मार्च तक 9 प्रतिशत महंगाई भत्ता देगी सरकार रोलिंग बजट की सरकार की कवायद के बीच यह बात भी सामने आई है कि 2026-27 के बजट के लिए प्रस्तावित महंगाई भत्ते के पहले सरकार को इसे 64 प्रतिशत तक पहुंचाएगी। अभी प्रदेश के कर्मचारियों को राज्य सरकार सातवें वेतनमान पर 55 फीसदी महंगाई भत्ता दे रही है। माना जा रहा है कि इस साल दिवाली के समय और फिर अगले साल फरवरी-मार्च में सरकार 2 किस्तों में 4 प्रतिशत और 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता देकर इसे 31 मार्च के पहले 64 प्रतिशत तक पहुंचा देगी। 5वें और 6वें वेतनमान वालों को भी मिलेगा फायदा वित्त विभाग ने कहा है कि जिन विभागों में छठवें या पांचवें वेतनमान पाने वाले कर्मचारी हैं, उन्हें भी हर साल 10 फीसदी महंगाई भत्ता बढ़ाकर दिया जाएगा। छठवें वेतनमान में वर्तमान में 252% तक महंगाई भत्ता दिया जाता है। इसके आधार पर वर्ष 2026-27 में 265 प्रतिशत, वर्ष 2027-28 में 280 और वर्ष 2028-29 में 295 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जाएगा। इसके हिसाब से विभागों को रोलिंग बजट में प्रावधान करना होगा। प्रदेश सरकार के उपक्रम, निगम, मंडल में काम करने वाले कर्मचारियों को भी इसी तर्ज पर महंगाई भत्ता दिया जाना है। 85 हजार करोड़ रुपये से अधिक होंगे खर्च प्रदेश में स्थापना व्यय पर सरकार प्रतिवर्ष बजट का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा व्यय करती है। 2023-24 में वेतन-भत्ते और पेंशन मिलकर व्यय 72 हजार करोड़ रुपये के आसपास था, जो 2024-25 में 75 हजार करोड रुपये से अधिक हो गया 2025-26 में 79 हजार करोड़ रुपये व्यय अनुमानित है। इसे देखते हुए 26-27 में यह राशि 85 हजार करोड रुपये तक पहुंच सकती है। आठवें वेतनमान को लेकर भी तैयारी उधर, भारत सरकार ने आठवें वेतनमान आयोग का गठन कर दिया है। इसे देखते हुए प्रदेश के साढ़े सात लाख नियमित सरकारी कर्मचारियों और साढ़े चार लाख पेंशनरों को नया वेतनमान देने की तैयारी राज्य सरकार ने भी शुरू कर दी है। सातवां वेतनमान मूल वेतन में 2.75 का गुणा करके निर्धारित हुआ था। तब लगभग सात से 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन में वृद्धि हुई थी।

खूंटी में मासूम के साथ हैवानियत, 15 वर्षीय किशोर पर कार्रवाई की मांग

खूंटी झारखंड के खूंटी जिले में पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म किए जाने के आरोप में एक किशोर को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मिली जानकारी के अनुसार, जरियागढ़ थाना क्षेत्र के एक गांव में सोमवार को 15 वर्षीय लड़के ने बच्ची को मिठाई देने के बहाने फुसलाया, उसे सुनसान जगह पर ले गया और उसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया। जरियागढ़ थाने के प्रभारी अधिकारी बीरेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने किशोर को पकड़ लिया, जिसने शराब पीने के बाद अपराध किया। किशोर ने स्कूली शिक्षा भी छोड़ दी है।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की युगांडा प्रधानमंत्री से मुलाकात, मठ निर्माण पर हुई चर्चा

  छतरपुर  छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने युगांडा की प्रधानमंत्री रोबिना नब्बान्जा से मुलाकात की है। इस दौरान उन्होंने मानवता, वैश्विक प्रेम, शांति और सामंजस्य पर आध्यात्मिक चर्चा की। अपने प्रकल्पों से अवगत कराया है। यहां विशेष भेंट के दौरान खास प्रतिनिधि मंडल मौजूद रहा। तस्वीर में आप देख सकते हैं कि युगांडा की प्रधानमंत्री रोबिना नब्बान्जा और धीरेंद्र शास्त्री वार्ता करते हुए दिखाई देख रहे हैं। उद्योगपति डॉ. सुधीर रूपरेला, भारतीय समुदाय के अध्यक्ष परेश मेहता, पूर्व सांसद संजय तन्ना, दीपक दोरलता और राजस्थानी एसोसिएशन के सदस्य भी उपस्थित हैं। पीएम रोबिना ने इन प्रयासों और कार्यों की तारीफ की प्रधानमंत्री को जब बागेश्वर धाम द्वारा भारत में किए जा रहे सामाजिक कार्यों, गरीब बेटियों के लिए सामूहिक विवाह, प्रतिदिन हजारों लोगों के लिए अन्नपूर्णा सेवा और जरूरतमंद मरीजों के लिए बन रहे कैंसर अस्पताल की जानकारी मिली, तो उन्होंने इन प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर ने कहा कि उन्हें इन कार्यों की प्रेरणा भारतीय शास्त्रों और संस्कृति से मिलती है, जिसमें “नर को नारायण” मानकर सेवा का संदेश दिया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को बागेश्वर धाम आने का न्यौता भी दिया। विश्व शांति के लिए भारतीय जीवन शैली सर्वोत्तम- बागेश्वर महाराज बागेश्वर महाराज ने कहा कि विश्व शांति के लिए भारतीय जीवनशैली और सनातन धर्म का मार्ग ही सर्वोत्तम है। एक सनातनी संपूर्ण विश्व को अपना परिवार मानकर उसके कल्याण की कामना करता है। हमें ऐसी महान संस्कृति को समझने और जीवन में अपनाने की आवश्यकता है। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में जो लोग मानवता की सेवा कर रहे हैं, बागेश्वर धाम उन सभी के प्रति सम्मान व्यक्त करता है। मुलाक़ात के अंत में युगांडा की प्रधानमंत्री ने बाला जी सरकार का आशीर्वाद प्राप्त किया। बागेश्वर महाराज से युगांडा की उन्नति एवं उत्थान के लिए कामना की। वहीं, अब युगांडा से मिले खास प्रस्ताव को लेकर बाबा बागेश्वर के भक्तों में खुशी का माहौल है।  

कक्षा में बवाल! छोटे विवाद ने लिया खतरनाक रूप, छात्रों पर चला चाकू

बिलासपुर स्कूल में पुरानी रंजिश को लेकर छात्रों ने मिलकर एक छात्र और उसके दोस्त पर चाकू से हमला कर दिया। हमले में घायल छात्रों का स्कूल प्रबंधन की ओर से इलाज कराया गया। इसके बाद घटना की सूचना स्वजन को दी गई। स्वजन की शिकायत पर पुलिस ने हमलावर छात्रों की तलाश शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, तारबाहर क्षेत्र में रहने वाले आवेश मिर्जा तारबाहर क्षेत्र के भारतमाता स्कूल में 11वीं के छात्र हैं। मंगलवार को वे स्कूल में थे। इसी दौरान उनके दोस्त ने किसी काम से अपनी कक्षा में बुलाया। तब आवेश स्कूल के पहली मंजिल पर स्थित अपने दोस्त के क्लास की ओर गए। क्लास के बाहर ही छह से आठ छात्र खड़े थे। उन्होंने पहले हुए विवाद को लेकर आवेश से गाली-गलौज की। इसका विरोध करने पर छात्रों ने मिलकर उसकी पिटाई की। इसी बीच किसी ने उसे चाकू से मार दिया। इस हमले में आवेश लहूलुहान हो गया। इधर मारपीट होते देख आवेश का दोस्त बीच-बचाव करने आया। तब छात्रों ने उस पर भी चाकू से मार दिया। इधर मारपीट और चाकूबाजी की जानकारी मिलते ही स्कूल के प्रबंधन और टीचर वहां पहुंच गए। आनन-फानन में घायल छात्रों को अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में उपचार के बाद घटना की जानकारी घायल छात्रों के स्वजन को दी गई। इस पर स्वजन भी स्कूल पहुंच गए। वे घायल छात्रों को लेकर सीधे तारबाहर थाना पहुंचे। स्वजन ने घटना की शिकायत की है। इस पर पुलिस ने जुर्म दर्ज कर मामले को जांच में लिया है।  

डिप्टी कलेक्टर की पोस्टिंग का विरोध तेज, महिला-बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया के आवास पर जुटे अधिकारी

बुरहानपुर मध्य प्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग में बुरहानपुर जिला की डिप्टी कलेक्टर लता शरणागत की अतिरिक्त निदेशक (Additional Director) के रूप में नियुक्ति पर सरकारी अधिकारियों के एक वर्ग ने विरोध जताया है. महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के एक ग्रुप ने भोपाल में विभाग की मंत्री निर्मला भूरिया से मुलाकात की और शरणागत की अतिरिक्त निदेशक के रूप में नियुक्ति का विरोध किया.  उन्होंने शीर्ष पद पर उनकी 'जूनियर' हैसियत का हवाला दिया और शरणागत की नियुक्ति रद्द करने का अनुरोध किया. मंत्री भूरिया ने बाद में बताया कि अधिकारियों की मांग जायज है और वह इस संबंध में जरूरी कदम उठाएंगी. उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग में अतिरिक्त निदेशकों की नियुक्ति विभाग के ही वरिष्ठ अधिकारियों में से की जाती है. मंत्री ने बताया कि शरणागत के मामले में उनकी नियुक्ति सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा की गई थी. इससे पहले, अधिकारियों के एक समूह ने भूरिया को एक ज्ञापन सौंपा और उनसे शरणागत की नियुक्ति के संबंध में जरूरी कार्रवाई करने का अनुरोध किया. महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त निदेशक (इंदौर संभाग) डॉ. संध्या व्यास ने कहा कि शरणागत को अतिरिक्त निदेशक के पद पर नियुक्त करना नियमों के विरुद्ध है और इससे विभाग में भारी रोष है. व्यास ने कहा, "अधिकारी इस नियुक्ति से नाराज हैं क्योंकि शरणागत की नियुक्ति से विभाग के अधिकारियों की वरिष्ठता का हनन हुआ है." महिला मंत्री भूरिया को सौंपे ज्ञापन में, अधिकारियों ने बताया कि शरणागत 2008 बैच की अधिकारी हैं, जबकि विभाग में कई वरिष्ठ संयुक्त निदेशक 2009 से इसी पद पर कार्यरत हैं.  ज्ञापन में कहा गया है कि यह प्रमुख विभाग महिलाओं और बच्चों के लिए कल्याणकारी योजनाएं चलाता है, जिनके लिए विशेषज्ञता की जरूरत होती है और एक डिप्टी कलेक्टर इन विषयों का विशेषज्ञ नहीं होता.

भोपाल से गया के लिए पितृपक्ष स्पेशल ट्रेन, रेलवे ने जारी किया पूरा टाइमटेबल

 भोपाल  गया में पितृपक्ष के अवसर पर बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही को देखते हुए रेल प्रशासन ने रानी कमलापति-गया-रानी कमलापति के बीच विशेष स्पेशल ट्रेनों का संचालन करने का निर्णय लिया है। इससे श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान सुगमता और सुविधाजनक परिवहन उपलब्ध होगा। गाड़ियों का संचालन     गाड़ी संख्या 01661 रानी कमलापति-गया पितृपक्ष स्पेशल     यह ट्रेन 07, 12 और 17 सितंबर को रानी कमलापति स्टेशन से दोपहर 1:20 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन सुबह 09:30 बजे गया पहुंचेगी।     गाड़ी संख्या 01662 गया-रानी कमलापति पितृपक्ष स्पेशल     यह ट्रेन 10, 15 और 20 सितम्बर को गया स्टेशन से दोपहर 2:15 बजे रवाना होगी और अगले दिन सुबह 10:45 बजे रानी कमलापति पहुंचेगी। इन स्टेशनों से होकर गुजरेगी ट्रेन दोनों दिशाओं में यह ट्रेन भोपाल, विदिशा, गंजबासौदा, बीना, सागर, दमोह, कटनी, मैहर, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, भभुआ रोड, सासाराम, डेहरी-आन-सोन और अनुग्रह नारायण रोड स्टेशनों पर ठहरेगी।

ड्यूटी के दौरान गिरी जान : छपरा स्टेशन पर इंस्पेक्टर राकेश कुमार का निधन

पटना बिहार में सारण जिले के पूर्वोत्तर रेलवे छपरा स्टेशन पर ड्यूटी पर तैनात इंस्पेक्टर ऑफ़ वर्क्स (आईओडब्लू) राकेश कुमार की मौत मंगलवार को निरीक्षण के दौरान प्लेटफार्म पर अचानक गिरने से हो गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गोरखपुर से आए प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर नीलमणि तथा सीनियर डीआई-2 अधिकारी छपरा जंक्शन का निरीक्षण कर रहे थे उसी दौरान राकेश कुमार भी निरीक्षण टीम के साथ मौजूद थे। परिजनों ने बताया कि कुमार पहले से हृदय रोग से पीड़ित थे। स्टेशन पर अधिकारियों के साथ तेज़ी से दौड़ने के क्रम में अचानक उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ और वह गिर पड़े। शीघ्रता से रेलकर्मियों ने उन्हें रेलवे अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सक ने प्राथमिक चिकित्सा के बाद बेहतर इलाज के उन्हें सदर अस्पताल भेज दिया। इस बीच सदर अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। मचा हड़कंप इधर, घटना की सूचना मिलने पर रेलवे कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। सदर अस्पताल पहुंचने पर कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच कई बार तीखी झड़पें भी हुईं। कर्मचारियों ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आए दिन छपरा जंक्शन पर उच्च अधिकारियों द्वारा निरीक्षण के नाम पर कर्मचारियों को अनावश्यक दबाव और तनाव में रखा जाता है। शाखा मंत्री संजय तिवारी ने बताया कि अधिकारियों की तानाशाही और लापरवाही के कारण ही यह दर्दनाक हादसा हुआ है।  

6 लाख से ज्यादा बाढ़ प्रभावितों को राहत, डायरेक्ट अकाउंट ट्रांसफर से मिली मदद

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 1 अणे मार्ग स्थित 'संकल्प' से वर्ष 2025 में बाढ़ से प्रभावित परिवारों को डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाता में 7000 रुपये प्रति परिवार की दर से आनुग्रहिक राहत (Gratuitous Relief GR) की राशि के भुगतान का माउस क्लिक कर शुभारम्भ किया। आज 12 जिलों के 6 लाख 51 हजार 602 प्रभावित परिवारों को 7000 रुपये प्रति परिवार की दर से 456 करोड़ 12 लाख रुपये का भुगतान किया गया। शिविरों में मानव एवं पशु चिकित्सा के लिए भी सभी इंतजाम किए गए कार्यक्रम के दौरान विकास आयुक्त सह आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव ने जानकारी देते हुए बताया कि अगस्त माह में गंगा नदी के जलस्तर में अत्यधिक वृद्धि के कारण गंगा के किनारे स्थित 11 जिलों यथा भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर एवं कटिहार में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। इससे पहले पड़ोसी राज्य में भारी वर्षा के कारण नालंदा जिला के 4 प्रखंडों के 8 पंचायतों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी। इस प्रकार कुल 12 जिलों के 66 प्रखंडों में लगभग 38 लाख आबादी बाढ़ प्रभावित हुई है। बाढ़ के दौरान अब तक 2.19 लाख पॉलीथीन शीट्स तथा 57 हजार 639 ड्राई राशन पैकेट वितरित की गई। 14 बाढ़ राहत शिविर चलाए जा रहे हैं, जिसमें लगभग 15 हजार लोग रह रहे हैं। सामुदायिक रसोई केंद्र में अब तक लगभग 85 लाख लोग भोजन कर चुके हैं। शिविरों में मानव एवं पशु चिकित्सा के लिए भी सभी इंतजाम किए गए हैं।  6 लाख से ज्यादा लोगों के अकाउंट में भेजे 456 करोड़ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने 13 अगस्त को बाढ़ प्रभावित जिलों के साथ समीक्षा बैठक की थी और 14 अगस्त को पटना, वैशाली, बेगूसराय एवं मुंगेर जिलों के बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति को देखा था। हमने अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चलाने का निर्देश दिया था। साथ ही 20 अगस्त 2025 तक बाढ़ प्रभावित परिवारों को आनुग्रहिक राहत (Gratuitous Relief- GR) की राशि का भुगतान शुरू करने का भी निर्देश दिया था। मुझे खुशी है कि आज 12 जिलों के 6 लाख 51 हजार 602 प्रभावित परिवारों को 7000 रुपये प्रति परिवार की दर से 456 करोड़ 12 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। उन्होंने कहा कि आप सभी लोगों ने बाढ़ से निपटने में बहुत अच्छा काम किया है लेकिन हम आप सभी से कहना चाहेंगे कि बाढ़ का समय अभी समाप्त नहीं हुआ है। सितम्बर महीने में भी भारी वर्षा और नदियों के जलस्तर में वृद्धि होती है। कभी-कभी बाढ़ भी आ जाती है इसलिए आप लोग पूरे तौर पर सतर्क रहिये और स्थिति पर नज़र रखिये। बाढ़ जैसी स्थिति आने पर पीड़ित लोगों की पूरी संवेदनशीता के साथ मदद कीजिये। मेरा शुरू से मानना रहा है कि राज्य के खजाने पर आपदा पीड़ितों का पहला अधिकार है। कार्यक्रम में आपदा प्रबंधन मंत्री विजय कुमार मंडल, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा, विकास आयुक्त सह आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ, जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल, कृषि विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित जिलों के जिलाधिकारी जुड़े हुए थे।

साढ़े सात लाख सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, MP में मिलेगी केंद्र जैसी छुट्टियां

भोपाल  मध्य प्रदेश के साढ़े सात लाख शासकीय कर्मचारियों को अब केंद्र सरकार के अनुरूप अवकाश दिया जाएगा। इसके लिए मप्र सरकार ने 48 साल पुराने मप्र सिविल सेवा (अवकाश) नियम-1977 में बदलाव किया है। यह निर्णय मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया। कैबिनेट ने वित्त विभाग के मध्य प्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम-2025 के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इससे प्रदेश के करीब साढ़े सात लाख शासकीय अधिकारियों व कर्मचारियों को केंद्र सरकार के अनुरूप अवकाश की सुविधा मिलेगी। इसके तहत चिकित्सकों को पीजी योग्यता प्राप्त करने के लिए 36 माह का अध्ययन अवकाश मिलेगा। इससे सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं आएगा। अधिसूचना जारी होने के दिन से यह नियम लागू होंगे। अब शासकीय सेवक सरोगेट या कमीशनिंग मदर को प्रसूति अवकाश की पात्रता होगी। वहीं एकल (अकेले) पुरुष शासकीय सेवक को भी संतान पालन अवकाश मिलेगा। दत्तक संतान ग्रहण के लिए 15 दिन का पितृत्व अवकाश 15 मिलेगा। निलंबन काल में नहीं होगी अवकाश की पात्रता शासकीय सेवक के दिव्यांग अथवा गंभीर अस्वस्थ्य होने पर उनके परिवार के सदस्य आवेदन दे सकेंगे। निलंबन काल में अवकाश की पात्रता नहीं होगी। अवकाश दिवस पर काम करने वाले शैक्षणिक संवर्ग को एक वर्ष में 10 दिवस के अर्जित अवकाश की पात्रता होगी। सेवा के प्रारंभिक वर्ष में आवश्यकता होने पर अर्द्धवेतन अवकाश की सुविधा होगी। सेवानिवृत्ति के पूर्व अवकाश के प्रविधान और सेवानिवृत्ति की तिथि के बाद अवकाश के प्रविधान को भी विलोपित किया गया।