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श्री रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज में रिश्वतखोरी मामले में राज्य सरकार भी आई हरकत में, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त और संचालक से मांगी रिपोर्ट

रायपुर श्री रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज में सीट वृद्धि के लिए निरीक्षण के दौरान हुई रिश्वतखोरी मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कार्रवाई के बाद अब राज्य सरकार भी हरकत में आ गई है. मामले में स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जांच शुरू कर दी है. स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस संबंध में आयुक्त चिकित्सा शिक्षा शिखा राजपूत तिवारी, चिकित्सा शिक्षा संचालक डॉ. यूएस पैकरा और पंडित जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, रायपुर के डीन डॉ. विवेक चौधरी को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है. मंत्री ने कॉलेज की कार्यप्रणाली की जांच के निर्देश भी दिए हैं. इस मामले में आंबेडकर अस्पताल में पदस्थ सह प्राध्यापक और रावतपुरा कॉलेज के निदेशक डॉ. अतिन कुंडू की भूमिका भी घेरे में है. उनके खिलाफ प्रशासनिक लापरवाही को लेकर कार्रवाई शुरू हो चुकी है. सीबीआई ने इस पूरे मान्यता घोटाले में देशभर के आठ राज्यों के 36 लोगों को आरोपित बनाया है. इसमें रावतपुरा मेडिकल कॉलेज के अध्यक्ष रविशंकर महाराज (रावतपुरा सरकार), डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी, एकाउंटेंट लक्ष्मीनारायण चंद्राकर, डॉ. अतिन कुंडू और संजय शुक्ला के नाम हैं. मामले में अब तक छह लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. बीते वर्ष एक फैकल्टी सदस्य ने इस घोटाले की एनएमसी को शिकायत की थी, लेकिन मामले को अनदेखा कर दिया गया था. दोषियों पर की जाएगी कड़ी कार्रवाई इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त शिखा राजपूत तिवारी ने बताया कि राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है. एनएमसी और सीबीआई द्वारा जांच की जा रही है. दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. वहीं मेडिकल कालेज डीन, डॉ. विवेक चौधरी, रायपुर ने बताया कि डॉ. अतिन कुंडू के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया गया है. वे रावतपुरा कॉलेज से जुड़े हैं, इसकी पुष्टि हो चुकी है. उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है.

कभी वीरान पड़ा था ये स्कूल…. वही ईरकभट्टी का प्राथमिक शाला बच्चों की चहचहाहट फिर से गूंजा

रायपुर, कभी वीरान पड़ा था ये स्कूल…. दरवाजों पर ताले लटकते थे, कमरे धूल और सन्नाटे से भरे रहते थे। लेकिन आज वही ईरकभट्टी का प्राथमिक शाला बच्चों की चहचहाहट और पाठों की गूंज से फिर से जीवंत हो उठा है। अबुझमाड़ के इस सुदूर गांव में फिर से शिक्षा की लौ जल उठी है, जिसका श्रेय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार द्वारा संचालित ‘नियद नेल्ला नार’ योजना और युक्तियुक्तकरण की पहल को जाता है। बीते कुछ वर्षों में माओवादी गतिविधियों के चलते गांवों की रंगत फीकी पड़ गई थी। बच्चों के हाथों से किताबें छूट गई थीं, स्कूलों के आँगन सुनसान हो गए थे और मांदर की थाप भी खामोश हो गई थी। नारायणपुर जिले के ईरकभट्टी भी ऐसा ही एक गांव था, जहां लोग हर हाल में जीवन को संवारने की कोशिश करते थे, लेकिन शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत तक से वंचित थे। यहां के निवासी श्री रामसाय काकड़ाम कहते है कि पहले लगता था कि हमारे बच्चे शायद कभी स्कूल का नाम भी नहीं जान पाएंगे, लेकिन अब जब शिक्षकों की नियुक्ति हो गई है और स्कूल फिर से खुल गया है, तो लगता है मानो गाँव में फिर से जान लौट आई हो। ‘नियद नेल्ला नार’ यानी ‘आपका अच्छा गांव’ योजना ने ईरकभट्टी जैसे दूरदराज और संघर्षरत गांवों में एक नई उम्मीद जगाई है। सुरक्षा कैंपों के पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों में योजनाओं को प्रभावी तरीके से पहुँचाया जा रहा है। इसी क्रम में ईरकभट्टी में सड़क बनी, बिजली पहुंची और वर्षों से बंद पड़ा प्राथमिक स्कूल फिर से खुल गया। शासन के युक्तियुक्तकरण प्रयास से प्राथमिक शाला ईरकभट्टी में अब दो शिक्षक नियमित रूप से पदस्थ हैं। श्री अशोक भगत और श्रीमती लीला नेताम नामक शिक्षक यहां के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। वे न केवल पठन-पाठन का कार्य कर रहे हैं, बल्कि अभिभावकों को भी प्रेरित कर रहे हैं कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें। शिक्षिका श्रीमती लीला नेताम बताती हैं कि पहले तो यहां डर लगता था, लेकिन बच्चों की मुस्कुराहट सब डर भुला देती है। ये बच्चे बहुत होशियार हैं, बस उन्हें अवसर की जरूरत थी। अब हम हर दिन उन्हें नया सिखाने का प्रयास करते हैं। अब स्कूल में दर्जन भर से अधिक बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। छोटे-छोटे हाथों में किताबें हैं, और उन आंखों में भविष्य के सपने। पहले जो गांव स्कूल जाने के नाम से डरते थे, अब वहां लोग अपने बच्चों को कंधे पर बिठाकर स्कूल छोड़ने आते हैं। गांव के बुजुर्ग मंगतु बाई की आंखों में आंसू हैं, लेकिन खुशी के। वे कहती हैं कि अब हमारी पोती भी पढ़-लिखकर अफसर बन सकती है। हमने कभी सोचा भी नहीं था कि ये दिन भी देखेंगे। ईरकभट्टी की कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उन हजारों गाँवों की है, जो कभी उपेक्षा और असुरक्षा के अंधेरे में डूबे हुए थे। लेकिन अब ‘नियद नेल्ला नार’ और युक्तियुक्तकरण जैसी योजनाएं उनके जीवन में उजाले की किरण लेकर आई हैं। शिक्षा की लौ फिर से जल चुकी है और यह लौ अब बुझने वाली नहीं।

डिप्टी सीएम बैरवा ने तेजाजी की मूर्ति के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में लोकगीतों पर जमकर थिरके

 जयपुर राजस्थान की राजनीति में संस्कृति और सादगी का अनोखा संगम देखने को मिला जब उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने फागी के भोजपुरा गांव में तेजाजी मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान मंजीरा थामकर लोकगीतों की मधुर धुनों पर जमकर नृत्य किया। उनका यह देसी अंदाज न केवल कार्यक्रम में शामिल लोगों के लिए यादगार रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इसे खूब पसंद किया। कार्यक्रम में भारी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद थे। जैसे ही लोकगीतों की धुनें बजनी शुरू हुईं, डिप्टी सीएम बैरवा ने मंजीरा थामकर ताल से ताल मिलाना शुरू किया। उनका यह सहज और स्वाभाविक अंदाज लोगों के दिलों को छू गया। बैरवा के डांस का वीडियो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स बैरवा की इस सरलता और संस्कृति से जुड़ाव की जमकर तारीफ कर रहे हैं। डॉ. बैरवा के इस लोक रंगीले अंदाज ने न सिर्फ भाजपा कार्यकर्ताओं बल्कि आम जनता का भी दिल जीत लिया है। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि डिप्टी सीएम बनने के बाद भी वे अपनी संस्कृति, धरती और जनता के प्रति उतने ही समर्पित हैं और राजनीति से ऊपर उठकर अपनी जड़ों से गहरे जुड़े हुए हैं।

सीएम योगी का बड़ा फैसला: लेखपाल की रिपोर्ट पर नहीं होगा अंतिम निर्णय

लखनऊ  यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राजस्व मामलों की जांच को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब इन मामलों में लेखपाल की रिपोर्ट को अंतिम नहीं माना जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय में जनता दर्शन के दौरान आने वाली शिकायतों के मद्देनजर लेखपाल स्तर की जांच पर रोक लगा दी गई है। अब राजस्व संबंधी शिकायतों की जांच लेखपाल नहीं,नायब तहसीलदार करेंगे। अपर मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। नायब तहसीलदार से नीचे कोई अधिकारी राजस्व मामलों की जांच नहीं करेगा। शिकायतकर्ता को सुनने के बाद ही नायब तहसीलदार अपनी रिपोर्ट देंगे। अंतिम निर्णय और समाधान उपजिलाधिकारी (SDM) स्तर पर होगा। जनता की समस्याओं के प्रति गंभीर रूप अपनाते हुए सीएम कार्यालय ने यह निर्णय लिया है। अब किसी रिपोर्ट से नहीं सुनवाई से न्याय होगा। राजस्व मामलों की जांच की प्रक्रिया में किए गए इस महत्वपूर्ण बदलाव से उम्मीद है कि इन मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी। पहले ऐसी शिकायतों की जांच लेखपाल करते थे। अब लेखपाल की बजाए नायब तहसीलदार ऐसे मामलों की जांच करेंगे। बताया जा रहा है कि इस बदलाव का मकसद राजस्व मामलों की जांच में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार पर नकेल कसना है। कहा जा रहा है कि ऐसे मामलों को लेकर आए दिन शिकायतें आ रही थीं। ऐसी कुछ शिकायतें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दर्शन कार्यक्रम में भी पहुंंची थीं। ऐसी शिकायतों पर सीएम योगी ने पूर्व में भी अधिकारियों को अधिक सतर्कता बरतने और जनता की शिकायतों को गुणवत्तापूर्ण ढंग से हल करने के निर्देश दिए थे। साथ ही यह भी कहा था कि शिकायतकर्ताओं की समस्या के समाधान के बाद उनका फीडबैक भी लिया जाए। सीएम जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान अक्सर अधिकारियों को निर्देश देते हैं कि शिकायतकर्ताओं की समस्याओं का समाधान गुणवत्तापूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए। माना जा रहा है कि जांच प्रक्रिया में बदलाव से जांच में जवाबदेही बढ़ेगी। इससे शिकायतों का निपटारा अधिक गुणवत्तापूर्ण ढंग से होगा।  

महाकौशल में भारी बारिश का कहर, कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त, स्कूलों की छुट्टी घोषित

मंडला/डिंडोरी.  मानसून के सक्रिय होने के कारण महाकौशल के जिलों में बारिश का कहर जारी है। मौसम विभाग ने महाकौशल के जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है। नर्मदा सहित कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। मंडला और डिंडोरी में बारिश के कारण स्कूलों में 5 जुलाई तक अवकाश घोषित कर दिया गया है। नदी के पुलों में पानी होने के कारण कई जिलों के बीच सड़क संपर्क टूट गया है। बाढ़ से कई हाईवे में यातायात ठप डिंडोरी जिले के गोरखपुर कस्बे के पास सिवनी नदी का पुल डूबने से जाने के कारण जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे बंद हो गया है। खरमेर नदी के बढ़े जलस्तर के कारण अमरपुर जनपद का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। सुरक्षा की दृष्टि से पुल पर पुलिसकर्मी तैनात किया गया है। थावर नदी उफान पर है और पानी पुल के उपर पहुंच गया है। जिससे कारण पिंडरई से केवलारी मार्ग पर आवागमन बंद है। जिला अस्पताल और घर में घुसा पानी बारिश के कारण शहर की सड़कें तालाब में तब्दील हो गयी है। बारिश का पानी लोगों के घरों में घुस गया। अस्पताल परिसर में घुटने तक पानी भरने से परेशानी हो रही है। नगर पालिका कर्मचारी जेसीबी मशीन का उपयोग कर पानी निकाल रहे हैं। औसत से दोगुनी बारिश मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटों में 118.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। डिंडौरी में सर्वाधिक 34.2 मिलीमीटर और समनापुर में न्यूनतम 1.4 मिलीमीटर वर्षा हुई। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष दोगुनी बारिश हुई है। इस साल बारिष का आंकडा 1633 मिलीमीटर पहुंच गया है। पिछले वर्ष आज के दिन तक बारिष का आंकडा आंकड़ा 822 मिलीमीटर था। बारिश से जनजीवन प्रभावित जबलपुर-मंडला में बारिश के कहर से लोगों को जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। जिले के कई गांव में पानी भरने के कारण लोग वोट के माध्यम से सुरक्षित स्थानों में पहुंचाया गया। नदियों के पुल में पानी होने कारण कई मार्ग में आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया है। 250 ग्रामीण को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जिला पंचायत मंडला के सीईओ श्रेयांस कुमट ने बताया कि गांवों में बारिश का भारी भर पर ग्रामीणों की सुरक्षा का ध्यान रखा गया। सुरक्षा की दृष्टि से दस गांव के ढाई सौ से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थान में पहुंच गया है। लोगों के लिए पंचायत भवन में पुनर्वास केन्द्र बनाये गये थे। प्रशासन के दौरान उनके भोजन की व्यवस्था की गई। इसके अलावा तीन स्थानों में वोट के माध्यम से रेस्क्यू कर लोगों को सुरक्षित स्थान में पहुंचाया गया। कागज की तरह बहे ट्रक जिले की कई छोटी नदियों और नालों का पानी पुलिया पुल के ऊपर पहुंच गया था। सुरक्षा की दृष्टि से ऐसे स्थानों पर यातायात प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसके अलावा बैरिकेट लगाते हुए प्रशासन और पुलिस के कर्मचारियों को तैनात किया गया था। जिले में भारी बारिश के चलते बरेला-पड़रिया रोड पर सलैया गांव के पास हिरन नदी की बाढ़ में गैस सिलेंडर से भरा ट्रक और भूसे से भरा ट्रक बह गए। सड़क के नीचे से बह गयी जमीन सीईओ ने बताया कि निवास-मार्ग में बारिश के कारण सड़क के नीचे की जमीन बह गयी थी। जिसके कारण की-रिंग जैसी स्थिति निर्मित हो गयी थी। सुरक्षा की दृष्टि से उक्त मार्ग में यातायात प्रतिबंधित कर दिया गया था। पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों ने जाकर सड़क का निरीक्षण किया गया। सड़क के मरम्मत का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जायेगा।  

बारिश के चलते सब्ज़ियां हुई महंगी, महंगाई की मार से बिगड़ा रसोई का बजट

भोपाल   बीते कुछ दिनों तक लगातार हुई मूसलधार बारिश ने किसानों की सब्जी फसलों को भारी नुकसान हुआ है. खेतों में फूल-फल लगे हुए फसल लगभग नष्ट हो चुके हैं. जिससे किसानों के चेहरों पर मायूसी छा गयी है. खेतो में लगा टमाटर, मिर्च, बैंगन, भिंडी, कद्दू, पालक, बंधा गोभी की फसल बर्बाद हो गये हैं. मक्का व गरमा फसलों को पानी में डूबने से नुकसान हुआ है. पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं. धान के बिचड़े भी पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं. किसान छोटू मुंडा बताते हैं कि पिछले चार दिनों से लगातार हुई वर्षा से धान का बिचड़ा पानी में डूब गया है.  बारिश की शुरुआत के साथ ही शहर में सब्जी महंगी हो गई है, जो 10 दिन में ही दो से ढ़ाई गुना तक कीमत पहुंच गई है। इससे स्थिति यह है कि अब सिर्फ आलू व कद्दू ही सस्ते हैं और अन्य कोई भी सब्जी अब 60 से 80 रुपए किलो कीमत से कम नहीं मिल रही है। अचानक बढ़ी सब्जियों की कीमतें एमपी में आमजन की परेशानी बन गई हैं। जो टमाटर 10 दिन पहले तक 30 रुपए किलो बिक रहा था, अब 80 रुपए किलो कीमत पर पहुंच गया है। रेट बढक़र सीधे हो गए दोगुना भिंडी, लॉकी, पालक, करेला, गोभी और पालक की रेट बढक़र सीधे ही दोगुना हो गई है। वहीं बाजार में गिलकी, शिमला मिर्च और बरवटी 120 रुपए किलो बिक रही है। कहू की रेट भी तीन गुना बढ़ गई लेकिन यह अभी आमजन की पहुंच में है। हालांकि आलू व प्याज की कीमतों में पिछले 10 दिनों में कोई अंतर नहीं आया है। महंगी सब्जियों से ही काम चलाना होगा सब्जी दुकानदारों के मुताबिक जिले में सब्जियां(Vegetables Price Hike) बची नहीं है, बाहर से जिले में आ रही है। बारिश की वजह से बाहर से भी कम ही मिल पा रही हैं, इससे कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि सब्जी दुकानदारों का कहना है कि डेढ़-दो महीने बाद जिले में स्थानीय स्तर से हरी सब्जियों की आवक बढ़ जाएगी, इससे कीमतें घटने का अनुमान है, लेकिन स्थानीय सब्जियों की आवक होने तक लोगों को महंगी सब्जियों से ही काम चलाना होगा।  किसानों ने बताया कि बहुत मेहनत के बाद खेतों में फसल तैयार हुए थे. लेकिन फसलें बर्बाद हो गयी. किसानों ने सरकार से नुकसान की मुआवजा का मांग करते हुए कहा कि उनकी फसलों को बचाने के लिए उचित कदम उठाया जाये. बाजारों पर दिखा असर : लगातार वर्षा होने से खेतों से सब्जियों की तुड़ाई नहीं होने से मंडी खाली रहे. जिसके कारण किसान समेत सब्जी विक्रेताओं को काफी नुकसान हुआ. वहीं शनिवार को बुकबुका बाजार में सब्जी खरीदने आये ग्राहकों को मन मुताबिक सब्जी नहीं मिलने से निराश घर लौटना पड़ा. हालाकि कुछ सब्जियां जो बाजार में लाये गये थे, उनमें दाग लगा था. कम सब्जी आने से मूल्य में वृद्ध देखी गयी.

विक्रमोत्सव-2025 को मिला एशिया का WOW गोल्ड अवार्ड

उज्जैन  मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा आयोजित विक्रमोत्सव 2025 को वाउ अवार्ड एशिया 2025 (WOW Awards Asia 2025) द्वारा एशिया के शासकीय समारोह की विशेष श्रेणी (Special Event of the Year Government) में गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। WOW Awards Asia की टीम भोपाल आकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को यह अवार्ड प्रदान करेंगी। विगत वर्ष विक्रमोत्सव 2024 को एशिया का बिगेस्ट रिलीजियस अवार्ड मिल चुका है। न केवल मध्य प्रदेश बल्कि समस्त भारतवर्ष के लिए गौरव का विषय विक्रमोत्सव 2025 को यह सम्मान मिलने पर मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने इसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की संस्कृति और विरासत के प्रति उनके समर्पण का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि विक्रमोत्सव 2025 को प्राप्त यह सम्मान न केवल मध्य प्रदेश बल्कि समस्त भारतवर्ष के लिए गौरव का विषय है। विक्रमोत्सव एक आयोजन मात्र नहीं है बल्कि इन सबसे बढ़कर संस्कृति, विरासत और विकास का बेजोड़ संगम हैं। बीते 18 वर्षों से निरंतर विक्रमोत्सव का आयोजन किया जाता रहा है। विगम वर्षों में विक्रमोत्सव ने देश के सांस्कृतिक क्षेत्र में अपनी उत्सवधर्मी पहचान को बखूबी स्थापित किया है। इसमें ना केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भी शामिल है। विक्रमोत्सव 2025 को एशिया का वाउ गोल्ड अवार्ड उल्लेखनीय है कि WOW Awards Asia, वर्ष 2009 से लाइव इवेंट्स के क्षेत्र में उत्कृष्टता और नवाचार को प्रोत्साहित करने वाला एक प्रतिष्ठित मंच रहा है। यह आयोजन अनुभव आधारित विपणन, व्यापारिक बैठकों, प्रोत्साहन यात्राओं, सम्मेलनों, प्रदर्शनियों, सजीव मनोरंजन तथा विवाह उद्योग जैसे क्षेत्रों में कार्यरत संस्थाओं और आयोजनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्रदान करता है। इस वर्ष इसका 16वाँ संस्करण, 20 और 21 जून 2025 को मुंबई स्थित जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में भव्य रूप से आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश की प्रतिष्ठित संस्थाओं ने सहभागिता की। प्रधानमंत्री कर चुके है सराहना विगत दिनों माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने विक्रमोत्सव की सराहना करते हुए कहा कि उज्जैन के महान सम्राट विक्रमादित्य के गौरव और वैभव को जन-जन तक पहुँचाने का यह प्रयास सराहनीय है। उनका शासन काल जन-कल्याण, सुशासन और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के लिए जाना जाता है। मध्यप्रदेश के ऊर्जावान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में यह आयोजन निश्चित रूप से युवा पीढ़ी को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़कर आत्मविश्वास और कर्तव्यनिष्ठा की भावना से परिपूर्ण नागरिक बनाने में सहायक सिद्ध होगा। विक्रमोत्सव 2025 में 300 से अधिक गतिविधियाँ हुई आयोजित विक्रमोत्सव 2025 अंतर्गत 300 से अधिक विभिन्न सांस्कृतिक एवं बहुआयामी गतिविधियाँ सम्पन्न हुई। इस महोत्सव में लाखों लोग भागीदार रहे जबकि सोशल मीडिया के माध्यम से करोड़ों लोग विक्रमोत्सव से जुड़े। विक्रमोत्सव की बहुआयामी गतिविधियों में मध्यप्रदेश के सभी प्रमुख शिवरात्रि मेलों का समारंभ, कलश यात्रा, विक्रम व्यापार मेला, संगीत, नृत्य, वादन, शिवोह्म, आदि-अनादि पर्व समारोह, विक्रम नाट्य समोराह, चित्र प्रदर्शनियाँ, संगोष्ठी, भारतीय इतिहास समागम, राष्ट्रीय विज्ञान समागम, वेद अंताक्षरी, कोटि सूर्योपासना, शिल्प कला कार्यशाला, प्रकाशन, विक्रम पंचांग, पौराणिक फिल्मों का अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, बोलियों एवं हिन्दी रचनाओं का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, 1000 ड्रोन्स की प्रस्तुति व ख्यात कलाकारों की प्रस्तुतियाँ शामिल है।  

भीष्म क्यूब्स से गोल्डन आवर में मिलेगी मदद, कोड इमरजेंसी एप से आम लोग भी बचा सकेंगे जान

भोपाल  अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल अब किसी भी आपात स्थिति या आपदा से निपटने के लिए और भी तैयार हो गया है। एम्स के ट्रामा एवं आपातकालीन चिकित्सा विभाग में भीष्म क्यूब्स का उद्घाटन और प्रदर्शन किया गया। ये भीष्म क्यूब्स दरअसल एक मोबाइल अस्पताल हैं, जिन्हें आपदा या मानवीय संकट के समय में तुरंत चिकित्सा पहुंचाने के लिए बनाया है। इन मोबाइल अस्पतालों को आपदा वाली जगह पर स्थापित किया जा सकता है। इनका फायदा यह है कि ये गोल्डन आवर (किसी दुर्घटना या गंभीर स्थिति के बाद का पहला महत्वपूर्ण घंटा), जिसमें इलाज मिलने पर जान बचने की संभावना ज्यादा होती है) में जरूरी चिकित्सा सेवाएं दे सकते हैं, जिससे जानें बचाई जा सकें। कार्यक्रम में एम्स के कार्यपालक निदेशक प्रो. डा. अजय सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कोड इमरजेंसी एप हर नागरिक के लिए जीवनरक्षक कार्यक्रम के दौरान एचएलएल टीम ने भीष्म क्यूब्स को स्थापित करके दिखाया और उनकी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। ट्रामा व आपातकालीन विभाग की अतिरिक्त प्रोफेसर डा. भूपेश्वरी पटेल ने एक जीवनरक्षक मोबाइल एप कोड इमरजेंसी का लाइव डेमो दिया। यह एप हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है। डाउनलोड होने के बाद बिना इंटरनेट के भी काम करता है। इसमें आडियो-विजुअल निर्देशों के जरिए किसी भी जगह पर सीपीआर देकर किसी व्यक्ति की जान बचाने की सुविधा दी गई है।

सम्पर्क क्रांति में बम की अफवाह बन गई 1700 यात्रियों की टेंशन, झांसी पहुंचकर खुला पूरा मामला

 झांसी  मध्य प्रदेश के झांसी में हजरत निजामुद्दीन से चलकर दुर्ग जाने वाली छत्तीसगढ़ सम्पर्क क्रांति एक्सप्रेस (12824) में शुक्रवार रात बम रखे होने की सूचना से हड़कंप मच गया। ट्रेन में बम रखे होने की सूचना लखनऊ कंंट्रोल रूम को मिली थी। तत्काल झांसी को इस बारे में सूचित किया गया। सूचना मिलते ही रेलवे का अमला अलर्ट हो गया और तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी गई। इसके बाद आरपीएफ, जीआरपी समेत लोकल पुलिस ने स्टेशन पर डेरा डाल लिया। ट्रेन के रेलवे स्टेशन पर आते ही पुलिस ने पूरी ट्रेन को खाली करा लिया और यात्रियों को उतारकर सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया। लगभग 40 मिनट तक की गई गहन तलाशी के बाद ट्रेन में कुछ नहीं मिला, जिस पर रात लगभग 12:24 बजे ट्रेन को गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया। ट्रेन हजरत निजामुद्दीन से चलने के बाद सीधे झांसी में रुकती है। शुक्रवार की रात किसी ने लखनऊ के रेलवे कंट्रोल रूम नम्बर 139 को सूचना दी कि हजरत निजामुद्दीन से चलकर दुर्ग जाने वाली छत्तीसगढ़ सम्पर्क क्रांति एक्सप्रेस में बम रखा है। रेलवे को बम मिलने की सूचना की जानकारी दी गई तो तत्काल सुरक्षा बल अलर्ट हो गया। उसने स्टेशन पर मोर्चा संभाल लिया। प्लैटफॉर्म नंबर 2-3 खाली कराए गए ट्रेन के झांसी आने का समय रात 11 बजे है, लेकिन वह कुछ देर रात 11:32 बजे झांसी आई। एसपी जीआरपी विपुल श्रीवास्तव के नेतृत्व में रेलवे स्टेशन पर भारी फोर्स तैनात कर दी गई। सिटी मजिस्ट्रेट प्रमोद झा, एसपी सिटी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह भी सिविल पुलिस के साथ मौके पर पहुंच गए। रेल कमांडेंट ट्रेन विवेकानंद नारायण ने बताया कि ट्रेन को झांसी आने पहले ही रेलवे पुलिस ने प्लैटफॉर्म नंबर 2 और 3 खाली कराकर यात्रियों को दूसरे प्लैटफॉर्म की ओर डायवर्ट कर दिया। ट्रेन जैसे ही झांसी रेलवे स्टेशन पर खड़ी हुई, तत्काल इंजन के बाद वाले कोच से तलाशी अभियान शुरू हो गया। ट्रेन से उतरने वाले सभी यात्रियों की तलाशी ली जाने लगी। कोच के अंदर भी तलाशी शुरू हुई। यह क्रम तब तक चला जब तक कि पूरी ट्रेन की तलाशी नहीं हो गई। पूरी ट्रेन की तलाशी के बाद ही ट्रेन को गंतव्य स्थान के लिए रवाना किया गया।

महाकाल मंदिर में 60 करोड़ का दान, दो साल में 12.32 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे, बना नंबर-1 धार्मिक केंद्र

उज्जैन  महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है। महाकाल लोक बनने के बाद मंदिर में दर्शन के लिए रोजाना डेढ़ से दो लाख भक्त पहुंच रहे हैं। पहले यह संख्या 40 से 50 हजार होती थी।  मंदिर समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक के मुताबिक, महाकाल लोक के खुलने के बाद भक्त बड़ी संख्या में उज्जैन आ रहे हैं और खुलकर दान भी कर रहे हैं।वर्ष 2019-20 में मंदिर को करीब 15 करोड़ रुपए दान में मिले थे, जो 2023-24 में बढ़कर 59.91 करोड़ रुपए हो गए।2024-25 में अब तक 51.22 करोड़ रुपए का दान आ चुका है। यह राशि सिर्फ भेंट पेटियों में डाले गए दान की है। मंदिर की अन्य कमाई मिलाकर यह आय एक अरब रुपए से भी ज्यादा है। धार्मिक पर्यटन में भी रिकॉर्ड बढ़त महाकाल लोक खुलने के बाद उज्जैन में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी है।2023 में 5.28 करोड़ लोग उज्जैन आए थे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 7.32 करोड़ पहुंच गया है।यानि एक साल में 39% की बढ़ोतरी। पिछले दो वर्षों में 12 करोड़ 32 लाख से ज्यादा श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन को उज्जैन पहुंचे हैं। गुप्त दान में मिली चांदी की पालकी में सवार होकर निकलेंगे बाबा महाकाल श्रावण-भाद्रपद मास में इस बार उज्जैन राजाधिराज महाकाल चांदी की नई पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। मंदिर प्रशासन के अनुसार, करीब 10 साल बाद सवारी में नई पालकी को शामिल किया जा रहा है। नवंबर 2024 में छत्तीसगढ़ के एक भक्त ने गुप्तदान के रूप में मंदिर समिति को यह पालकी भेंट की थी। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्रावण-भाद्रपद मास में महाकाल की सवारी निकलती है। इस बार 14 जुलाई को पहली और 18 अगस्त को श्रावण-भाद्रपद मास की राजसी सवारी निकलेगी। इसे लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिर समिति ने हर बार की तरह इस बार भी लोक निर्माण विभाग से पालकी का परीक्षण कराया है। यह है पालकी की खासियत चांदी की नई पालकी का वजन करीब 100 किलो है। लकड़ी से बनी पालकी पर 20 किलो चांदी का आवरण है। पालकी को उठाने के लिए स्टील के पाइप लगाए गए हैं। पालकी का ऊपरी हिस्सा भी स्टील के पाइप से बना है। वर्षों पहले सवारी में लकड़ी की पालकी का उपयोग होता था। ठोस लकड़ी से निर्मित पालकी का वजन डेढ़ क्विंटल से अधिक था। बाद में लकड़ी और स्टील के पाइप से बनी पालकी का उपयोग शुरू हुआ। इसका वजन करीब 130 किलो बताया जाता है। यह तीन फीट चौड़ी और पांच फीट लंबी है। पालकी को उठाने वाले हत्थे पर सिंहमुख की आकृति बनाई गई है। चांदी के आवरण पर सूर्य, स्वास्तिक, कमल पुष्प और दो शेरों की नक्काशी की गई है। भगवान महाकाल की पालकी उठाने के लिए 70 कहार सेवा देते हैं। श्रावण-भाद्रपद मास में निकलेगी छह सवारियां पहली सवारी 14 जुलाई को होगी। इसके बाद 21 जुलाई, 28 जुलाई, 4 अगस्त, 11 अगस्त और अंतिम राजसी सवारी 18 अगस्त को निकलेगी। मंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था और सवारी की तैयारियां शुरू कर दी हैं।