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वक़्फ़ संशोधन अधिनियम से बदली म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड की तकदीर और तस्वीर

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड ने नवीन वक़्फ़ अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से वक़्फ़ संपत्तियों के संरक्षण, पारदर्शी प्रबंधन और जनहित में उनका उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ऐतिहासिक और प्रभावी कार्रवाई की है। वक़्फ़ बोर्ड की संपत्तियों से वर्षों से अवैध कब्जाधारियों को हटाया गया और भौतिक सत्यापन के बाद जरुरतमंद लोगों को संपत्ति के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया गया। वक़्फ़ बोर्ड की आय कैसे बड़े इस पर अन्य राज्यों की वफ्फ समितियां से चर्चा कर, राजस्व बढ़ाने के लिए कार्य किया गया। भारत सरकार द्वारा वक़्फ़ संपतियों का लेखा-जोखा उम्मीद पोर्टल पर दर्ज कराने में म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। परिणामस्वरूप म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड को स्कॉच अवार्ड से नवाजा गया। नवीन वक्फ अधिनियम के बाद समाज के बेटा-बेटियों के लिए खुली हैं नई राहें म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने बताया कि देश में वक़्फ़ संशोधन कानून लागू होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड ने कानून के मंशानुरूप कई समाजिक परिवर्तनकारी कार्यों को आगे बढ़ाते हुए समाज को नई दिशा दी है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री की इच्छा शक्ति के परिणामस्वरूप 1552 बेटा-बेटियों को ड्रॉप आउट होने से बचाया गया। वे आगे की पढ़ाई जारी रख सकें, इसके लिए समुचित रुप से आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी की गई, नवीन वक्फ अधिनियम के बाद समाज के बेटा-बेटियों के लिए नई राहें खुली है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल जिले के 849 मेधावी बेटा-बेटियों को स्कॉलरशिप प्रदान कर सम्मानित करेंगे। यह शुरुआत है, वक़्फ़ बोर्ड मध्यप्रदेश के प्रत्येक जिले में इस तरह बेटा-बेटियों को स्कॉलरशिप देकर सम्मानित करेगा। मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड द्वारा 'पढ़ो पढ़ाओ – राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनों' जैसे नवाचार की चर्चा के बाद मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड की योजनाओं और कार्य करने की शैली को समझने के लिए अनेक राज्यों द्वारा अपने अधिकारी- कर्मचारियों को मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड के कार्यालय में भेजा जा रहा है। वक़्फ़ संपत्तियां स्वच्छ और जवाबदेह प्रबंधन को सौंपने के लिए उठाए गए निर्णायक कदम मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशन में नवीन वक़्फ़ अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड को कानूनी एवं प्रशासनिक मजबूती प्राप्त हुई। वक़्फ़ माफियाओं, दागदार प्रबंधकों और अवैध कब्जाधारियों के विरुद्ध कठोर अभियान चलाया गया। वक़्फ़ संपत्तियों को दागदार हाथों से मुक्त कर स्वच्छ और जवाबदेह प्रबंधन को सौंपने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए गए। समानांतर वक़्फ़ बोर्ड चलाकर वक़्फ़ संपत्तियों को हानि पहुँचाने वाले तत्वों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की गई। वक़्फ़ को हानि पहुँचाने वाले प्रबंधकों के विरुद्ध कुल 41 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली के लिए आरआरसी/वसूली नोटिस जारी किए गए और वसूली की कार्यवाही भी की गई। इस क्रम में वक़्फ़ यतीमखाना शाहजहांनी, भोपाल के प्रबंधक को 28 करोड़ 96 लाख रुपये का वसूली नोटिस जारी किया गया, जो देश के वक़्फ़ इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा वसूली नोटिस माना जा रहा है। वक़्फ़ मदर गेट उज्जैन के प्रबंधन के विरुद्ध 7 करोड़ 21 लाख रुपये की वसूली के लिए कार्रवाई की गई। वक़्फ़ जामा मस्जिद, बीना बजरिया सागर के प्रबंधकों के विरुद्ध 1 करोड़ 84 लाख रुपये की वसूली का नोटिस जारी कर कार्यवाही की गई। वक़्फ़ बड़वाली चौकी, इंदौर प्रकरण में 1 करोड़ 24 लाख रुपये की वसूली की कार्रवाई की गई। इसी क्रम में वक़्फ़ हिंदू अनाथालय, भोपाल के प्रबंधन पर 1 करोड़ 5 लाख रुपये की वसूली के लिए आरआरसी जारी की गई। वक़्फ़ अंजुमन इस्लामिया, जबलपुर के पूर्व अध्यक्ष प्यारे साहब द्वारा वक़्फ़ को पहुँचाई गई 81 लाख 43 हजार रुपये की हानि की वसूली के लिए भी नोटिस जारी किया गया। इन कार्यवाहियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नवीन वक़्फ़ बोर्ड वक़्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। वक़्फ़ को हानि पहुँचाने वाले किसी भी व्यक्ति, माफिया या दागदार प्रबंधन के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई निरंतर जारी है। अब सभी वक़्फ़ संपत्तियां दर्ज है ऑनलाइन केन्द्र सरकार द्वारा नये संशोधन कानून से वक़्फ़ संपतियों पर बैठे कब्जाधारियों को भी सोचने पर मजबूर होना पड़ा है। सभी संपत्तियां ऑनलाइन दर्ज है, इस कारण कहीं कोई गड़बड़ी नहीं कर सकता, इस बात की दहशत भी वक़्फ़ माफियाओं में देखने को मिली है। वक़्फ़ संपतियों के डिजिटलीकरण के परिणामस्वरूप पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित हुई है। इससे अनैतिक गतिविधियां करने वाले हतोत्साहित हुए। कृषि भूमियों की समय पर नीलामी की गई, जिससे राजस्व में वृद्धि हुई और इनका परिणाम आज सबसे सामने है। समाज के हर वर्ग में इसकी सराहना हो रही है। म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड के इतिहास में पहली बार हुआ पौधरोपण का निर्णय म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने बताया कि इस वर्ष मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड के इतिहास में पहली बार यह निर्णय लिया गया है कि वक़्फ़ बोर्ड की निगरानी में पर्यावरण को संरक्षित करने के उद्देश्य से पूरे प्रदेश में वक़्फ़ बोर्ड की जमीनों पर पांच लाख पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया है। समाज के हर वर्ग और प्रत्येक व्यक्ति से अपने पूर्वजों के नाम पर एक पौधा अवश्य लगाने का अनुरोध किया जा रहा है। पौध-रोपण के बाद उनकी सही देखभाल के लिए जिलेवार जिम्मेदारी तय की जाएगी और अच्छा कार्य करने वालों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।

अब उम्र नहीं देख रही थायराइड बीमारी, किशोर और युवा भी तेजी से हो रहे प्रभावित

 फतेहाबाद बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के बीच थाइराइड की बीमारी तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। पहले जहां इसे बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता था, वहीं अब युवा और किशोर भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन तीन से चार नए मरीज थाइराइड संबंधी समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें महिलाओं के साथ युवा वर्ग की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। चिकित्सकों के अनुसार समय रहते जांच और उपचार न कराया जाए तो यह बीमारी शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकती है।थाइराइड गले के सामने मौजूद एक छोटी ग्रंथि होती है, जो शरीर में हार्मोन बनाने का काम करती है। यही हार्मोन शरीर की ऊर्जा, वजन, हृदय गति, पाचन और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करते हैं। जब यह ग्रंथि जरूरत से कम या अधिक हार्मोन बनाने लगती है तो शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं। हार्मोन कम बनने की स्थिति को हाइपोथाइराइड और अधिक बनने को हाइपरथाइराइड कहा जाता है। दोनों ही स्थितियां स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। थकान, वजन बढ़ना और चिड़चिड़ापन हैं प्रमुख संकेत लगातार थकान रहना, अचानक वजन बढ़ना या घटना, बाल झड़ना, हाथ कांपना, नींद कम आना, चिड़चिड़ापन, दिल की धड़कन तेज होना और गले में सूजन इसके सामान्य लक्षण हो सकते हैं। महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी गड़बड़ी और गर्भधारण में परेशानी भी थाइराइड के कारण हो सकती है। वहीं बच्चों और युवाओं में यह बीमारी पढ़ाई, मानसिक एकाग्रता और शारीरिक विकास पर असर डाल सकती है। इलाज में लापरवाही पड़ सकती है भारी चिकित्सकों का कहना है कि कई लोग शुरुआत में इसे सामान्य कमजोरी या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन लंबे समय तक उपचार न मिलने पर यह बीमारी हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मोटापा, मानसिक तनाव और कमजोरी जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित जांच और चिकित्सकीय सलाह से इस बीमारी को नियंत्रित रखा जा सकता है। मरीजों को बिना डाक्टर की सलाह दवा बंद नहीं करनी चाहिए। थाइराइड से बचाव के लिए अपनाएं ये सावधानियां     संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।     आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग करें।     नियमित व्यायाम और योग करें।     तनाव से दूर रहने का प्रयास करें।     पर्याप्त नींद लें और दिनचर्या नियमित रखें।     वजन और स्वास्थ्य की समय-समय पर जांच करवाएं।     लगातार थकान या अन्य लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।     जागरूकता और समय पर उपचार से थाइराइड को नियंत्रित किया जा सकता है। लापरवाही बरतने पर यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकती है। पहले केवल 50 साल के बाद यह बीमारी देखने को मिलती थी, लेकिन अब तो युवा इसकी चपेट में आ रहे है। -डॉ. मनीष टूटेजा, छाती रोग विशेषज्ञ नागरिक अस्पताल।  

सीएमओ ने कहा- पहली जांच रिपोर्ट सही है, जिन बिंदुओं पर चर्चा हुई, उन पर फिर से करेंगे जांच

कानपुर.  कानपुर में शनिवार को पुलिस कमिश्नर ऑफिस में अर्धसैनिक बल आईटीबीपी के जवानों की हलचल के मामले को लेकर तस्वीर अब साफ हो गई है। दरअसल,  जवान अपने साथी विकास सिंह की मां के इलाज में कथित लापरवाही और अस्पताल पर कार्रवाई न होने से नाराज थे। इसी सिलसिले में कमांडेट गौरव प्रसाद पुलिस कमिश्नर के साथ बात करने आए थे। इस बातचीत में सीएमओ भी शामिल हुए। सीएमओ, पुलिस कमिश्नर और आईटीबीपी कानपुर कमांडेंट के बीच इस संबंध में लंबी बातचीत चली। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी से इस प्रकरण में दोबारा स्पष्ट रिपोर्ट मांगी गई है। कमिश्नरेट के घेराव की बात निराधार एडिशनल पुलिस कमिश्नर (कानून-व्यवस्था) विपिन ताडा ने अर्धसैनिक बल के जवानों द्वारा कमिश्नरेट परिसर को घेरने की बात से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि आईटीबीपी का जवान बात करने के लिए अपने कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आया था। उस दौरान उनके साथी बाहर खड़े थे। इस पर उनसे बात की गई तो उन्होंने जवानों को वापस भेज दिया. विपिन टाडा ने यह भी बताया कि इस मामले में पुलिस कमिश्नर ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से दोबारा स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच, तथ्यों के आधार पर होगी और अगर लापरवाही साबित हुई तो क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी। आईटीबीपी का जवान कुछ दिन पहले आवेदन लेकर आया था, जिसमें आरोप था कि अस्पताल द्वारा लापरवाही पूर्वक इलाज करने के कारण उनकी मां का हाथ काटना पड़ा। मामला स्वास्थ्य विभाग का होने के कारण आवेदन मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेजा गया था। उनके अनुसार डॉक्टरों की कमेटी गठित कर सभी पहलू की जांच कराई गई थी, लेकिन जो रिपोर्ट आई, उस पर बात करने के लिए जवान अपने अधिकारियों को लेकर आया। उसने कुछ बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी और जवान बातचीत के बाद फिर से जांच के लिए राज़ी हुए हैं। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी। कमांडेंट ने कहा- पुलिस से पूरा सपोर्ट आईटीबीपी के कानपुर कमांडेंट गौरव प्रसाद ने बताया कि हमारे जवान की मां का हाथ काटे जाने की मेडिकल जांच रिपोर्ट पर बातचीत करने के लिए पुलिस कमिश्नर से अप्वाइंटमेंट लिया गया था। इसीलिए हमारे अधिकारी व जवान आए थे। मैं अंदर बैठा था, बाहर जवान खड़े थे। शायद इसे ग़लत रूप में ले लिया गया। घेराव की बात निराधार है। हमें पुलिस कमिश्नर की तरफ से पूरा सपोर्ट मिल रहा है। सीएमओ ने जहां, कुछ बिंदुओं पर दोबारा जांच मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी ने बताया कि हम लोगों ने आपस में बात की है। जो जांच रिपोर्ट दी गई है, वह सही है, लेकिन जिन बिंदुओं आज बात हुई है, उन पर फिर से जांच करेंगे। इसके बाद फाइनल जांच रिपोर्ट दी जाएगी.  यह है पूरा मामला मूल रूप से फतेहपुर के अलीमऊ गांव के रहने वाले विकास सिंह आईटीबीपी में कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं। मौजूदा समय में उनकी पोस्टिंग महाराजपुर आईटीबीपी कैंप में है। विकास के मुताबिक, मां निर्मला देवी (56) को सांस लेने में दिक्कत थी। उन्हें कब्ज और कमजोरी की भी शिकायत थी। सबसे पहले मां को आईटीबीपी अस्पताल महाराजपुर में दिखाया था। वहां पर प्राथमिक उपचार के बाद ITBP के पैनल में शामिल अस्पताल यानी हायर सेंटर रेफर किया गया था। इसके बाद इलाज के लिए कानपुर के एक निजी अस्पताल में एडमिट कराया था। मां को वेंटीलेटर पर रखा गया था। विकास का आरोप है कि इलाज के दौरान मां को गलत इंजेक्शन लगा दिया गया। इसकी वजह से उनका हाथ काला पड़ गया और सूजन लगातार बढ़ती जा रही थी। मां की हालत जब बिगड़ने लगी तो उन्हें बिठूर रोड बैकुंठपुर स्थिति दूसरे निजी अस्पताल में एडमिट कराया, जहां उनका हाथ काटना पड़ा।

जैसलमेर के डांडेवाला फील्ड में नेचुरल गैस की खोज, ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

जयपुर दुनियाभर में ऊर्जा संकट के बीच राजस्थान से खुशखबरी मिली है. सीमावर्ती जिले जैसलमेर में नेचुरल गैस का भंडार मिला है. जैसलमेर बेसिन स्थित डांडेवाला फील्ड में ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने नए प्राकृतिक गैस भंडार की सफल खोज की है. इस उपलब्धि को भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. डांडेवाला क्षेत्र के सानू फॉर्मेशन से पहली बार प्राकृतिक गैस का सफल प्रवाह शुरू हुआ है. हर दिन 25 हजार स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर उत्पादन परीक्षण के दौरान यहां से करीब 25 हजार स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन गैस उत्पादन दर्ज किया गया. ऑयल इंडिया लिमिटेड के अनुसार, कंपनी ने इस कुएं की ड्रिलिंग करीब 950 मीटर की गहराई तक की थी. प्रारंभिक तकनीकी मूल्यांकन और भूवैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर लगभग 75 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस संसाधन होने की संभावना जताई जा रही है. केंद्रीय मंत्री ने दी जानकारी केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 'एक्स' पर जानकारी साझा की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है और राजस्थान में मिली यह सफलता ऊर्जा आत्मनिर्भरता के अभियान को नई गति देगी. मरुस्थल में मौजूद हो सकते हैं कई बड़े भंडार खास बात यह है कि डांडेवाला क्षेत्र में पहले पारंपरिक गैस उत्पादन होता रहा है. लेकिन सानू फॉर्मेशन में पहली बार गैस की मौजूदगी सामने आई है. इस नए गैस भंडार की खोज के बाद रेगिस्तानी इलाके के लिए उम्मीद जग गई है. संभावना है कि मरुस्थल में कई बड़े ऊर्जा संसाधन मौजूद हो सकते हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच आई यह सफलता देश के लिए राहत की खबर मानी जा रही है. वर्तमान में भारत अपनी प्राकृतिक गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में जैसलमेर की यह खोज रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है.

समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश, जनप्रतिनिधियों से समन्वय पर ज़ोर

रायपुर वित्त मंत्री एवं जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री  ओपी चौधरी ने कड़े लहजे में अधिकारियों से कहा कि जशपुर मुख्यमंत्री का गृह जिला है, इसलिए सभी अधिकारी अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करते हुए निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करना सुनिश्चित करें। प्रभारी मंत्री  चौधरी ने आज जशपुर जिला पंचायत सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागीय योजनाओं और जारी विकास कार्यों की विस्तार से समीक्षा की।  शिलापट्ट स्थापना में लापरवाही पर सख्त रुख          प्रभारी मंत्री  चौधरी ने कहा कि पिछले दस वर्षों की तुलना में वर्तमान सरकार द्वारा जशपुर जिले में रिकॉर्ड संख्या में विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि जिन विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन हो चुका है, उनके शिलापट्ट संबंधित गांवों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की गरिमामय उपस्थिति में अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएं। शिलापट्ट लगाने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागीय अधिकारियों की होगी। यदि कहीं भी यह शिकायत मिलती है कि शिलापट्ट उपेक्षित पड़ा है या स्थापित नहीं किया गया है, तो जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध तत्काल कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर खेती पर विशेष ध्यान          वित्त मंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए दो प्रमुख वर्गों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए महतारी वंदन योजना के तहत मिल रही एक हजार रूपए की मासिक सहायता का उपयोग महिलाएं बच्चों के भविष्य के लिए, समृद्धि सुकन्या योजना जैसी बचत योजनाओं में करें। इसके अलावा स्वरोजगार के लिए महतारी शक्ति ऋण योजना के अंतर्गत कम ब्याज दर पर 25 हजार रूपए तक का ऋण त्वरित उपलब्ध कराया जाए। पारंपरिक खेती से हटकर किसानों को अधिक मुनाफे वाले फलोत्पादन (विशेषकर केला और लीची की खेती) तथा आधुनिक मत्स्य पालन के लिए प्रोत्साहित किया जाए। साथ ही कृषि विभाग खरीफ सीजन के लिए समितियों में पर्याप्त खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करे। जिले की प्रमुख विकास परियोजनाओं की प्रगति            बैठक में कलेक्टर  रोहित व्यास ने जिले में चल रहे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की अद्यतन स्थिति साझा की। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज, शासकीय नर्सिंग कॉलेज, शासकीय प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, क्रिटिकल केयर सेंटर और अखिल भारतीय कल्याण आश्रम द्वारा संचालित अस्पताल का निर्माण तेजी से जारी है। सन्ना विकासखंड के ग्राम पंडरापाठ में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा बच्चों के लिए विशेष तीरंदाजी केंद्र का निर्माण शुरू हो चुका है। इसके अतिरिक्त कुनकुरी और जशपुर में नालंदा परिसर तथा सलियाटोली में एडवेंचर स्पोर्ट्स परियोजना पर कार्य चल रहा है। कानून व्यवस्था और जन-जागरूकता            वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रमुख चौक-चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने बताया कि जिले में सोशल मीडिया के माध्यम से एक अनूठा हेलमेट जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें अब तक 2 हजार से अधिक नागरिकों के अपील वीडियो जारी किए जा चुके हैं। व्यापक विभागीय समीक्षा            प्रभारी मंत्री ने बैठक में सुशासन तिहार, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, महिला एवं बाल विकास, जल संसाधन और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सहित दो दर्जन से अधिक विभागों के कल्याणकारी कार्यों की गहन समीक्षा की।           बैठक में जशपुर विधायक मती रायमुनि भगत, पत्थलगांव विधायक मती गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष  सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष  अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, जिला पंचायत सीईओ  अभिषेक कुमार, डीएफओ  शशि कुमार सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

सारंगढ़ में जनजातीय कारीगर हैंडीक्राफ्ट मेला आयोजित

​रायपुर   जनजातीय संस्कृति और शिल्प को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'जनजातीय गरिमा उत्सव' के अंतर्गत सारंगढ़ के साहू धर्मशाला में एक भव्य हस्तनिर्मित (हैंडीक्राफ्ट) वस्तु प्रदर्शनी सह विक्रय मेले का आयोजन किया गया। ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ट्राइफेड) द्वारा आयोजित इस मेले में जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के, विशेषकर ग्राम बैगीनडीह के जनजातीय कारीगरों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया और अपने हुनर का प्रदर्शन किया। ​  ​  ग्राम बैगीनडीह का झारा शिल्प      ​ इस मेले में ग्राम बैगीनडीह के शिल्पकारों द्वारा तैयार किए गए झारा शिल्प और बेलमेटल (घंटी धातु) उत्पाद ग्राहकों और आगंतुकों के लिए मुख्य आकर्षण रहे। प्रदर्शनी में शामिल अधिकांश महिला शिल्पकार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के राष्ट्रीय आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत गठित 'कात्यायनी' और 'भारत माता' जैसे स्व-सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के माध्यम से वे अपने पारंपरिक हुनर को आजीविका का मजबूत जरिया बना रही हैं। ​ट्राइफेड (TRIFED): शिल्पकारों की तरक्की का नया मार्ग       ​ सारंगढ़-बिलाईगढ़ के बैगीनडीह जैसे कई शिल्प ग्रामों के कारीगर ट्राइफेड से जुड़कर अपने जीवन स्तर को बेहतर बना सकते हैं। ​ ज्ञात हो कि ट्राइफेड अर्थात 'ट्राइबल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड' भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करने वाली एक राष्ट्रीय स्तर की शीर्ष संस्था है। यह संस्था जंगलों से लघु वनोपज (MFP) इकट्ठा करने वाले और हस्तशिल्प बनाने वाले आदिवासी समुदायों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाता है। इसके साथ ही यह संस्था आदिवासी उत्पादों (जैसे प्राकृतिक शहद, हस्तशिल्प, कपड़े, जैविक उत्पाद) की ब्रांडिंग करती है और इनके लिए राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बाजार तलाशती है।      ​वनधन माइक्रो उद्यमों को बढ़ावा        ​ ट्राइफेड ने 50-100 राज्य स्तरीय निर्माता कंपनियों के माध्यम से वनधन माइक्रो उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। इन वनधन निर्माता कंपनियों का मुख्य उद्देश्य है ​उत्पादकता में वृद्धि और लागत में कमी लाना,​कुशल एकत्रीकरण और मूल्य संवर्धन (Value Addition) के लिए बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण (Processing) करना और ​उत्पादों का बेहतर उपयोग और कुशल विपणन (Marketing) सुनिश्चित करना है। ​ट्राइफेड का हिस्सा बनने का खुला अवसर        ​ट्राइफेड केवल कारीगरों के लिए ही नहीं, बल्कि एक बड़ा नेटवर्क बनाने के लिए वैश्विक स्तर पर अवसर प्रदान करता है। इससे कॉर्पोरेट जगत, आदिवासी समाज, वैज्ञानिक, विभिन्न संस्थान, प्रशिक्षक, संसाधन व्यक्ति, विषय विशेषज्ञ, सलाहकार, कार्यान्वयन एजेंसियां, उपकरण निर्माता, खरीदार (Buyers) और डिजाइनर्स सभी जुड़कर एक साथ काम कर सकते हैं।

नगर निकाय चुनाव को लेकर बठिंडा में सुरक्षा कड़ी, ऑब्जर्वर ने की अहम बैठक

बठिंडा/मानसा. नगर निगम, नगर कौंसिल और नगर पंचायत चुनावों को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयमुक्त माहौल में संपन्न करवाने के लिए पंजाब पुलिस पूरी तरह सतर्क हो गई है। चुनावों के मद्देनजर बठिंडा रेंज और मानसा जिले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उच्च स्तरीय बैठकों का दौर शुरू हो गया है। इसी कड़ी में बठिंडा रेंज के लिए नियुक्त पुलिस आब्जर्वर सुखवंत सिंह गिल ने रविवार को अधिकारियों के साथ अहम बैठक कर चुनावी तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में डीआईजी बठिंडा रेंज हरजीत सिंह, एआईजी काउंटर इंटेलिजेंस अवनीत कौर संधू और जिला बठिंडा के गजटिड अधिकारी भी मौजूद रहे। इस दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने, मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न करवाने और सुरक्षा प्रबंधों को और मजबूत करने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। पंजाब राज्य चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत बठिंडा और मानसा जिलों में 26 मई को होने वाले चुनावों के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुखवंत सिंह गिल को पुलिस आब्जर्वर नियुक्त किया गया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जा चुके हैं। मोबाइल नंबर किया जारी सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान कोई भी नागरिक अपनी शिकायत, सूचना या सुझाव सीधे पुलिस आब्जर्वर तक पहुंचा सकता है। इसके लिए मोबाइल नंबर जारी किया गया है। वहीं ईमेल के माध्यम से भी शिकायत भेजी जा सकती है। फोन नंबर- 95171-95171 ई-मेल आईडी- observer.mcelec.bti@gmail.com पुलिस अधिकारियों ने बताया कि संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने की तैयारी भी की जा रही है, ताकि मतदान के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। प्रशासन का कहना है कि लोगों के सहयोग से चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से पूरा करवाया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को समन्वय कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

रायपुर  जांजगीर-चांपा जिले की होनहार पर्वतारोही अमिता वास ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) को 22 मई 2026 को सफलतापूर्वक फतह कर छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि अमिता ने अपने साहस, दृढ़ संकल्प और अथक मेहनत से प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का नया अध्याय रचा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि छत्तीसगढ़ की बेटी ने विश्व की सर्वोच्च चोटी पर तिरंगा और हमारे प्रदेश का गौरव बढ़ाया।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर कहा कि समिट के बाद बेस कैंप लौटने के दौरान अत्यधिक ऊंचाई, शून्य से लगभग 40 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान और ऑक्सीजन की कमी के कारण अमिता वास की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिली है। उन्हें हेलीकॉप्टर के माध्यम से रेस्क्यू कर काठमांडू स्थित नॉर्विक इंटरनेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें गंभीर फ्रॉस्टबाइट एवं हाई एल्टीट्यूड संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं हुई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जानकारी मिलते ही राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक समन्वय स्थापित कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अमिता वास और उनके परिवार के साथ खड़ी है तथा उनके बेहतर उपचार के लिए निरंतर संपर्क और सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने अमिता के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा कि अमिता बिटिया शीघ्र पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर अपने घर लौटें, यही हमारी कामना है। उनका साहस, धैर्य और हौसला हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। छत्तीसगढ़ को उन पर गर्व है।

गांव-गांव बदल रही तस्वीर! गौ संरक्षण के जरिए योगी सरकार बढ़ा रही किसानों की आमदनी

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में गो संरक्षण को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और प्राकृतिक खेती से जोड़कर विकास का मजबूत मॉडल बनाया गया है। उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 7700 से अधिक गोशालाएं संचालित हैं, जहां 12 लाख से ज्यादा निराश्रित गोवंश संरक्षित किए जा रहे हैं। योगी सरकार की यह पहल गांवों में रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता का नया आधार बनकर उभर रही है। योगी सरकार अब तक 1.62 लाख से अधिक गाय किसानों और पशुपालकों को सौंप चुकी है। इन पशुओं के पालन-पोषण के लिए लाभार्थियों को 1500 रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि भी प्रदान की जा रही है। इससे किसानों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जैविक खेती में भी लाभ मिल रहा है।  महिला स्वयं सहायता समूहों को मिला आत्मनिर्भरता का नया रास्ता उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि प्रदेश के 38 जिलों में महिला स्वयं सहायता समूह गो आधारित उत्पादों के निर्माण और विपणन से जुड़ चुके हैं। इससे 50 हजार से अधिक महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। गोबर और पंचगव्य आधारित उत्पादों के कारोबार में करीब 30 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। इसके अलावा उन्नाव में महिलाएं गाय के गोबर से प्राकृतिक डिस्टेंपर पेंट तैयार कर रहीं हैं। यह पेंट कम लागत वाला होने के साथ एंटीबैक्टीरियल, एंटी फंगल और पूरी तरह गंध रहित है। पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इससे स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा मिल रहा है। जैविक खाद और पंचगव्य उत्पाद बने ग्रामीण रोजगार का नया आधार उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योगी सरकार की नीतियों में गोबर को अपशिष्ट नहीं बल्कि आय और रोजगार के संसाधन के रूप में विकसित किया गया है। प्रदेश में गोबर से जैविक खाद, धूपबत्ती, साबुन, पंचगव्य उत्पाद और बायोगैस तैयार की जा रही है। जैविक खाद का बाजार मूल्य 4 हजार से 6 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच चुका है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। वहीं प्राकृतिक खेती से 8 लाख से ज्यादा किसान जुड़ चुके हैं। जिससे रासायनिक खाद की लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी आई है।

Vishnu Deo Sai से आदिवासी समाज की अहम मुलाकात, जनहित के मुद्दों पर हुई बातचीत

रायपुर. छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधि मंडल ने नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल और मुख्यमंत्री के बीच सामाजिक समरसता, जनकल्याण तथा छत्तीसगढ़ के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई। प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित विकास कार्यों और जनहितकारी योजनाओं की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं भी दीं। मुख्यमंत्री ने भी समाज के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज के विकास, संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुलाकात के प्रमुख बिंदु – आदिवासी उत्थान और विकास: मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी समाज के समग्र विकास और उत्थान के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है. जनकल्याणकारी योजनाएं: प्रतिनिधिमंडल के साथ शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा की गई, ताकि उनका अधिकतम लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुंचाया जा सके. सांस्कृतिक संरक्षण: चर्चा में आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और विरासत को बढ़ावा देने और सहेजने पर सहमति बनी.