samacharsecretary.com

सेवा संकल्प अभियान में जगमगाएंगे घरों के दीप, जन सेवक महाकुंभ समेत होंगे कई कार्यक्रम

प्रदेशभर में 17 सितम्बर से एक माह तक चलेगा सेवा संकल्प अभियान घर दीप प्रज्ज्वलन से लेकर जन सेवक महाकुंभ जैसे होंगे आयोजन सभी 55 जिलों के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नोडल ऑफिसर नियुक्त भोपाल  मध्यप्रदेश में 17 सितंबर से 17अक्टूबर 2026 तक सेवा संकल्प अभियान चलाया जायेगा। इस अभियान के अंतर्गत सभी 55 जिलों में नागरिकों की सेवा से जुड़े प्रकल्वों का आयोजन क्रमबद्ध रूप से किया जाएगा। भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों को अभियान के लिए जिलों का नोडल अधिकारी नामांकित किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में सभी विभागाध्यक्ष को निर्देश दिये हैं। सेवा संकल्प अभियान 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 2 सितंबर 2026 को हुई बैठक में भी दिशा-निर्देश दिए गए थे। सेवा संकल्प अभियान 2026 में अनेक गतिविधियां होंगी जिसमें आर्शीवाद का दीया जलाना, यानि हितग्राही परिवारों के घर पर दीप प्रज्ज्‍वलन, सेवा चित्र राष्ट्रव्यापी ड्राईंग और भाषण प्रतियोगिता, सेवा स्मरण संगीतमय नाट्य प्रस्तुतियां, आंगन का मिलन यानि आंगनबाडी कार्यकर्ताओं का सम्मान एवं बच्चों तथा माताओं की सक्रिय भागीदारी, कहानी बदलाव के तहत सरकार की योजनाओं से जीवन में आए सकारात्मक बदलाव की सक्सेस स्टोरी, सेवा ज्योति यात्रा में गांव , जिला स्तर की जनभागीदारी यात्रा, विकसित भारत के निर्माण के संकल्प के साथ, वड़नगर (गुजरात) से वाराणसी यात्रा जल, जन और सेवा संकल्प यात्रा, सेवा-मेरा योगदान के तहत 25 प्रमुख सेवा गतिविधियों में नागरिकों की भागीदारी होगी। इसी तरह सेवा सेतु अभियान में सेवा सेतु केन्द्र स्थापित कर आम नागरिकों को एक ही स्थान पर जन कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी और योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना, सेवा के रंगके अंतर्गत घर-घर से राष्ट्र तक आभार और संकल्प की रंगोली का निर्माण, राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज विद्यार्थियों, युवाओं, स्टार्ट-अप्स, प्रोफेशनल्स, कॉर्पोरेट इनोवेटर और जमीनी स्तर पर नए समाधान विकसित करने वाले लोगों को जोड़ने के लिए होगा। जन सेवक महाकुंभ के तहत पंचायत से पार्लियामेंट तक देशभर से सरपंच एवं जनप्रतिनिधियों का राष्ट्रीय सम्मेलन और 25 साल 25 कहानियाँ नेशनल अनबॉक्सिंग गतिविधियां आयोजित होगी। वरिष्ठ भाप्रसे अधिकारियों को सौंपा जिलों का दायित्व सेवा संकल्प अभियान 2026 के अंतर्गत जिलों में अभियान के सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक समन्वय एवं मॉनिटरिंग की दृष्टि से भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों को जिले के लिए नोडल अधिकारी के रूप में नामांकित किया गया है। नोडल अधिकारीगण अभियान की संपूर्ण अवधि के लिए प्रतिदिन आयोजित होने वाले कार्यक्रमों एवं गतिविधियों की माईक्रो प्लानिंग में जिला कलेक्टर को सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान करेंगे, अभियान की नियमित मॉनिटरिंग के लिए एक सिस्टम तैयार किया जाना, ताकि सभी आयोजन शासन की अपेक्षा के अनुरूप प्रभावी रूप से संचालित हो सकें। जिले में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत अधिक से अधिक जन भागीदारी एवं जन सहयोग प्राप्त हो सके, इस दृष्टि से आयोजनों की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने में जिला प्रशासन का सहयोग करना और जिले के प्रभारी मंत्री एवं अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधिगण के साथ सेवा संकल्प अभियान के स्वरूप एवं रणनीति पर संवाद एवं समन्वय का दायित्व होगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने निर्देश दिए है कि सेवा संकल्प अभियान 2026 के क्रियान्वयन की जिले की संपूर्ण एक माह की योजना आज-कल में अनिवार्य रूप से तैयार करवा ली जाए।समस्त नामांकित नोडल अधिकारीगण 17 सितंबर 2026 को संपूर्ण दिवस अपने प्रभार के जिले में रहेंगे और उस दिन आयोजित होने वाले समस्त कार्यक्रमों आर्शीवाद का दीया एवं अन्य कार्यक्रम में अनिवार्य रूप से भाग लेंगें।

जमीनी स्तर पर आंगनवाड़ी का जायजा, आयुक्त संदीप जी.आर. ने बच्चों से की बातचीत और जाना हाल

आंगनवाड़ी सेवाओं की जमीनी हकीकत जानने पहुंचे आयुक्त संदीप जी.आर. बच्चों से संवाद कर लिया फीडबैक भोपाल  नवागत आयुक्त महिला एवं बाल विकास संदीप जी.आर. ने मैदानी स्तर पर विभागीय सेवाओं की स्थिति जानने सीहोर जिले के आंगनवाड़ी केंद्र डोडी क्रमांक-58 का भ्रमण एवं निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्र पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और अन्य हितग्राहियों को उपलब्ध कराई जा रही पोषण, स्वास्थ्य एवं प्रारंभिक शिक्षा संबंधी सेवाओं का बारीकी से अवलोकन किया और सेवाओं की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने 3 से 6 वर्ष आयु के बच्चों के लिए उपलब्ध नाश्ता एवं गर्म पके भोजन की गुणवत्ता और स्वाद की जानकारी ली। उन्होंने गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं तथा 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे स्थानीय टेक होम राशन, शाला पूर्व शिक्षा गतिविधियों तथा केंद्र पर प्रदाय की जा रही अन्य पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी भी ली। आंगनवाड़ी केंद्रों को अधिक बाल हितैषी बनाने पर जोर आयुक्त संदीप जी.आर. ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र केवल पोषण वितरण का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और मातृ एवं शिशु कल्याण का महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने बच्चों और हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने, पोषण एवं स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने तथा आंगनवाड़ी केंद्रों को अधिक सक्रिय, जीवंत और बाल हितैषी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बच्चों और हितग्राहियों से सीधे संवाद कर जानी जमीनी स्थिति आयुक्त संदीप जी.आर. ने आंगनवाड़ी केंद्र में उपस्थित बच्चों और महिला हितग्राहियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने बच्चों से केंद्र पर मिलने वाले नाश्ते और गर्म पके भोजन के स्वाद एवं गुणवत्ता के बारे में सहज बातचीत की तथा पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में हितग्राहियों से फीडबैक लिया। पोषण ट्रैकर के उपयोग और कुपोषित बच्चों के प्रबंधन की ली जानकारी आयुक्त संदीप ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से शाला पूर्व शिक्षा गतिविधियों के आयोजन, पोषण ट्रैकर के उपयोग तथा केंद्र में कुपोषित बच्चों के उपचार एवं प्रबंधन के लिए की जा रही कार्यवाही की जानकारी ली। कार्यकर्ता द्वारा पोषण ट्रैकर में उपलब्ध शाला पूर्व शिक्षा गतिविधि के वीडियो के माध्यम से बच्चों के साथ कराई जा रही गतिविधि का भी उन्होंने प्रत्यक्ष अवलोकन किया। संदीप ने डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग के साथ बच्चों के लिए गतिविधि आधारित और रुचिकर प्रारंभिक शिक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की भी की समीक्षा निरीक्षण के दौरान आयुक्त सेदीप जी. आर. ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना सहित विभाग की अन्य योजनाओं में नवीन हितग्राहियों के पंजीयन तथा उन्हें योजनाओं का लाभ प्राप्त होने की स्थिति की जानकारी भी ली। उन्होंने योजनाओं का पात्र हितग्राहियों तक समय पर लाभ पहुंचाने और मैदानी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।  

गोशालाओं को अब संरक्षण के साथ बनाया जाएगा आत्मनिर्भरता का मॉडल

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण को अधिक प्रभावी, व्यवस्थित और आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी तेज हो गई है। इसी क्रम में गोशालाओं को प्राकृतिक कृषि, जैविक उर्वरक, बायोगैस, पंचगव्य आधारित उत्पादों और ग्रामीण रोजगार से जोड़ने की दिशा में उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (UPCAR) के संयुक्त सहयोग से कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार की अध्यक्षता में 25 सूत्रीय एजेंडे पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। पिकअप भवन में आयोजित बैठक में गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने गोवंश संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना में वर्तमान में एक से चार गोवंश सुपुर्द किए जाने की सीमा बढ़ाकर अधिकतम 10 गोवंश किए जाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे अधिक संख्या में इच्छुक कृषक और पशुपालक गोवंश संरक्षण से जुड़ सकेंगे तथा योजना की पहुंच और प्रभाव बढ़ेगा। आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल ने विभिन्न मंडलों और जनपदों में गोवंशों की देखभाल और गोशाला प्रबंधन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को गंभीरता व जिम्मेदारी के साथ काम करने की अपेक्षा की। आयोग के सदस्य रमाकांत उपाध्याय ने सड़क दुर्घटनाओं अथवा अन्य कारणों से घायल गोवंशों को तत्काल चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए 24×7 समर्पित एंबुलेंस सेवा शुरू करने का सुझाव दिया। इसके जरिए घायल गोवंशों को तत्काल निकटतम पशु चिकित्सालय या उपयुक्त चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाया जा सकेगा। सदस्य दीपक गोयल ने गोशालाओं में मृत होने वाले गोवंशों के सम्मानजनक और व्यवस्थित निस्तारण के लिए स्थानीय परिस्थितियों व निर्धारित मानकों के अनुरूप समर्पित स्थल विकसित करने का सुझाव दिया। सदस्य राजेश सिंह सेंगर ने गोशालाओं  के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की अपेक्षा की। कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार ने आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के सुझावों पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता गोशालाओं को अधिक व्यवस्थित और आत्मनिर्भर बनाना है।  किसानों के यहां वीबीजी-रामजी योजना के तहत पक्के कैटल शेड, यूरिन टैंक और नाद के निर्माण, बड़े गो संरक्षण केंद्रों और अस्थायी गो आश्रय स्थलों में बायोगैस संयंत्रों की स्थापना तथा गोबर-गोमूत्र से जीवामृत, घन जीवामृत, बीजामृत और अन्य कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार कर उनके विपणन की व्यवस्था पर विचार हुआ। कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार ने संबंधित विभागों को आयोग द्वारा प्रस्तुत विषयों पर आवश्यक समन्वय के साथ आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस दौरान उत्तर प्रदेश काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च के डीजी डॉ. संजय सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

6 बेटियों का राष्ट्रीय फुटबॉल कैंप के लिए चयन, प्रदेश और शहडोल का बढ़ाया मान

भोपाल  सीमित संसाधनों के बीच फुटबॉल के सपने देखने वाले शहडोल के छोटे से गांव विचारपुर की बेटियों की प्रतिभा ने प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है। फुटबॉल के इस ‘मिनी ब्राजील’ विचारपुर के ‘खेलो इंडिया स्माल सेंटर’ में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली 6 प्रतिभाशाली बेटियों का चयन राष्ट्रीय फुटबॉल कैंप के लिये हुआ है। यह उपलब्धि 6 बेटियों की सफलता से अधिक उस बदलाव की कहानी है, जहां गांव की बेटियां अब अपने बड़े सपनों को पूरा करने के लिए जी-जान एक कर रही हैं। छोटे गांव से राष्ट्रीय टीम तक का सफर महू में 31 अगस्त से 4 सितम्बर 2026 तक आयोजित एआईएफएफ इंटर डिस्ट्रिक्ट अंडर-16 गर्ल्स फुटबॉल टूर्नामेंट में शहडोल की अंडर-16 बालिका टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। लीग मुकाबलों में शहडोल ने ग्वालियर को 10-0 और महू को भी 10-0 से हराया। फाइनल में इंदौर के खिलाफ टीम को 1-0 से हार मिली और शहडोल को उपविजेता से संतोष करना पड़ा। लेकिन, इस हार के बीच शहडोल की बेटियों ने अपनी प्रतिभा का ऐसा प्रदर्शन किया कि टीम की आठ खिलाड़ियों का चयन राष्ट्रीय फुटबॉल कैंप के लिए हो गया। चयनित खिलाड़ियों में विचारपुर के ‘खेलो इंडिया स्माल सेंटर’ की राधिनी सिंह, संध्या सहीस, मोनिका सिंह, चांदनी यादव, राधा सिंह और वाशु शामिल हैं। साथ ही दिव्या संत और दिव्या बैगा ने भी राष्ट्रीय कैंप में जगह बनाई है। राधिनी ने आठ गोल कर मचाई धूम इस टूर्नामेंट में विचारपुर की राधिनी सिंह ने अपने खेल से खास पहचान बनाई। राधिनी दो मुकाबलों में कुल आठ गोल दागकर प्रतियोगिता में सर्वाधिक गोल करने वाली खिलाड़ी बन गई। पहले मुकाबले में उसने पांच और दूसरे मुकाबले में तीन गोल किए। राधिनी की नियमित पोजीशन सेंटर है, लेकिन टीम के गेम प्लान के अनुसार उन्हें फारवर्ड लाइन में उतारा गया। इस नई भूमिका में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित करते हुए 8 गोल दाग दिए। दसवीं में अध्ययनरत राधिनी विचारपुर स्थित ‘खेलो इंडिया स्माल सेंटर’ में प्रशिक्षण ले रही हैं। सेंटर की कोच लक्ष्मी सहीस के अनुसार, राधिनी कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा का परिचय दे रही हैं। वह अब तक तीन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं। अब पहनना है राष्ट्रीय टीम की जर्सी राष्ट्रीय कैंप इंदौर में आयोजित किया जा रहा है। यहां खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर मध्यप्रदेश की राष्ट्रीय अंडर-16 बालिका फुटबॉल टीम का चयन किया जाएगा। चयनित टीम राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जाएगी। विचारपुर की इन 6 बेटियों के सामने अपने खेल से राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने का बड़ा अवसर है। देश के खेल मैदानों का सपना — गांव की बेटियां विचारपुर से एक साथ 6 खिलाड़ियों के राष्ट्रीय फुटबॉल कैंप के लिए चयन से शहडोल जिले के विचारपुर को मिनी ब्राजील कहा जाना सार्थक हो गया है। इन बेटियों ने सिद्ध कर दिया है कि गांवों में भी प्रतिभा की कमी नहीं है, बशर्ते उसे सही मंच, प्रशिक्षण और अवसर दिये जाएं। विचारपुर की बेटियां अपनी फुटबॉल प्रतिभा से गांव के फुटबॉल मैदान से राष्ट्रीय टीम में अपना स्थान बनाने की ओर अग्रसर हैं। देश के खेल मैदानों को भी गांव की दमदार बेटियों का इंतजार है। इन बेटियों की कहानी उन हजारों बेटियों के लिए उम्मीद है, जो छोटे शहरों और गांवों में बड़े सपने देखती हैं।  

महिला उद्यमियों के लिए योगी सरकार की बड़ी तैयारी, ₹20 हजार से शुरू होगा क्रेडिट लाभ

 लखनऊ  विधान सभा चुनाव से पहले महिलाओं को लुभाने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। उत्तर प्रदेश महिला उद्यमी क्रेडिट योजना में महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं एक करोड़ दीदियों को एक लाख रुपये तक का क्रेडिट (ऋण) लाभ दिया जाएगा। हालांकि योजना के पहले चरण में 20,000 रुपये की पहली किश्त मिलेगी। इसके समय से भुगतान पर दो चरणों में 80 हजार रुपये का और क्रेडिट दिया जाएगा। सरकार, योजना को विधान सभा चुनाव से पहले जोर-शोर से लांच करने की तैयारी कर रही है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसका प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। पिछले माह राजनीतिक गलियारों में योगी सरकार द्वारा महिलाओं को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की चर्चाएं चली थीं। अब तक सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। हालांकि भाजपा ने मध्य प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र में विधान सभा चुनावों से पहले ऐसा ही दांव चला था। अब यूपी में भी ऐसे ही दांव की तैयारी है। उत्तर प्रदेश आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के तहत संचालित महिला स्वयं सहायता समूहों को उद्यमी क्रेडिट योजना को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। महिलाओं को दिया जाएगा विशेष क्रेडिट कार्ड प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना की घोषणा की थी। बुधवार को योजना भवन में हुई ग्राम्य विकास विभाग की उच्चस्तरीय बैठक में उपमुख्यमंत्री ने इस उत्तर प्रदेश महिला उद्यमी क्रेडिट योजना की तैयारी की समीक्षा की। योजना के तहत महिला को ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाना है। इसके लिए महिलाओं को विशेष क्रेडिट कार्ड बनाकर दिया जाएगा। इस धनराशि का उपयोग महिलाएं अपने छोटे व्यवसाय को शुरू करने या पहले से संचालित उद्यम को विस्तार देने में कर सकेंगी। पहले चरण में दिए जाने वाले 20 हजार रुपये का समय से भुगतान करने पर महिलाओं को दूसरे चरण में 30 हजार रुपये ऋण के रूप में दिए जाएंगे। यदि महिलाएं दूसरी किस्त भी चुका देती हैं तो उनको तीसरे चरण में 50 हजार रुपये का क्रेडिट लाभ दिया जाएगा। इसके लिए बैंकों ने एक प्रारूप तैयार किया है, जिसके विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि समूह की दीदियों को पहचान व सुविधाओं से जोड़ने के लिए आइकार्ड उपलब्ध कराया जाए। ये कार्ड क्यूआर कोड जैसी डिजिटल सुविधाओं से युक्त हों दीदियों को डिजिटल भुगतान, डिजिटल मार्केटिंग, आनलाइन बिक्री, वित्तीय सेवाओं और आधुनिक उद्यम प्रबंधन से जोड़ा जाए। उन्होंने ई-रिक्शा योजना के तहत दो लाख रुपये तक के वाहनों की ही खरीद पर विचार करने, 100 महिला शक्ति केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए। बैठक में एचसीएल फाउंडेशन के साथ ‘समुदाय साझेदारी’ को वर्ष 2031 तक बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। इस दाैरान ग्राम्य विकास राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम, प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास सौरभ बाबू, आयुक्त प्रमोद कुमार उपाध्याय, मिशन निदेशक अरुण कुमार आदि उपस्थित रहे।  

सुरक्षा, विश्वास और सशक्तिकरण को बनाया जाए आधार

भोपाल राष्ट्रीय महिला आयोग के तत्वावधान में मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग द्वारा महिलाओं को हिंसा एवं अन्य संकट की परिस्थितियों में प्रभावी, संवेदनशील एवं समन्वित सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वन स्टॉप सेंटर के काउंसलर्स एवं केस वर्कर्स के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष  रेखा यादव ने कहा कि जब कोई महिला अथवा बालिका अपनी समस्या लेकर वन स्टॉप सेंटर पहुंचती है, तो काउंसलर का पहला दायित्व उसकी बात को बिना किसी पूर्वाग्रह, निर्णय या निष्कर्ष के ध्यानपूर्वक सुनना है। महिला की परिस्थितियों को समझे बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उसके लिए और अधिक कठिनाई पैदा कर सकता है। प्रशिक्षण के दौरान भारतीय न्याय संहिता (BNS), दंड संबंधी कानूनों, पॉक्सो अधिनियम, दहेज प्रतिषेध अधिनियम, बाल विवाह निषेध अधिनियम, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, नागरिक सुरक्षा से संबंधित प्रावधानों सहित अन्य कानूनों की बारीकियों एवं उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन की जानकारी दी गई। साथ ही महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम के लिए बालकों एवं युवाओं में भी लैंगिक समानता, सम्मान और संवेदनशीलता की समझ विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। सर्वाइवर केंद्रित रणनीति पर जोर आयोग के सदस्य श्री सुरेश तोमर ने सर्वाइवर केंद्रित रणनीति पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रत्येक पीड़ित महिला की सुरक्षा, सम्मान, गोपनीयता, आवश्यकताओं और निर्णय लेने की क्षमता को केंद्र में रखकर सहायता एवं पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला को केवल एक ‘प्रकरण’ के रूप में नहीं, बल्कि अपने जीवन के संघर्ष से गुजर रही एक व्यक्ति के रूप में समझना आवश्यक है। केस डॉक्यूमेंटेशन एवं SOP की जानकारी प्रशिक्षण के दूसरे सत्र में सुश्री प्राची चंदेल ने केस डॉक्यूमेंटेशन, रिकॉर्ड संधारण एवं डेटा के व्यवस्थित प्रबंधन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जब कोई महिला या बालिका वन स्टॉप सेंटर आती है, तो उसकी परिस्थिति, आवश्यक सेवाओं और प्रकरण से संबंधित जानकारी का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए। केस वर्कर्स एवं काउंसलर्स को भारत सरकार द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुरूप प्रकरणों पर कार्य करने की प्रक्रिया समझाई गई। महिला की व्यक्तिगत जानकारी एवं प्रकरण से संबंधित सूचनाओं को पूर्ण रूप से गोपनीय रखने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही आवश्यक सहमति (Consent) प्रपत्रों को नियमानुसार भरवाने और महिला को उपलब्ध सभी आवश्यक सेवाएं एवं सहायता प्रदान करने की बात कही गई। विशेषज्ञों ने कहा कि वन स्टॉप सेंटर की जिम्मेदारी केवल महिला की प्रारंभिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकरणों में नियमित फॉलोअप लेना भी आवश्यक है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि महिला को आवश्यक सहायता वास्तव में प्राप्त हो रही है और वह सुरक्षित स्थिति में है। सुरक्षा, विश्वास और सशक्तिकरण को बनाया जाए आधार प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि संकट की स्थिति में वन स्टॉप सेंटर पहुंचने वाली अधिकांश महिलाएं किसी न किसी प्रकार के मानसिक एवं भावनात्मक आघात (Trauma) से गुजर रही होती हैं। ऐसे में सबसे पहले उन्हें सुरक्षा, विश्वास, विकल्प, सहभागिता और सशक्तिकरण का भरोसा दिलाना आवश्यक है। विशेषज्ञों ने कहा कि वन स्टॉप सेंटर में आने वाली महिला को शारीरिक और भावनात्मक सुरक्षा प्रदान करना सबसे पहला कदम होना चाहिए। उसकी इच्छा, आवश्यकता और निर्णय को सम्मान देते हुए उसे उपलब्ध विकल्पों की जानकारी दी जानी चाहिए, जिससे वह अपने भविष्य से जुड़े निर्णयों में स्वयं सहभागी बन सके।  

‘सैफई से आती थी नौकरी की सूची’, भूपेंद्र चौधरी ने सपा पर बोला हमला, बोले- परिवार और जाति से आगे नहीं बढ़ रहा एजेंडा

लखनऊ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद भाजपा नेताओं ने सपा और उसके नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने समाजवादी पार्टी को युवा विरोधी पार्टी बताते हुए आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान नौकरियों में भ्रष्टाचार, पेपर लीक और परीक्षाओं में अनियमितताएं आम थीं। उन्होंने कहा कि उस दौर में निकलने वाली सरकारी नौकरियों की सूची सैफई से आती थी और एक परिवार व एक बिरादरी तक सीमित रहती थी। ‘सैफई से आती थी नौकरी की सूची’ भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा युवाओं के विरोध में रही है। उनके मुताबिक सपा सरकार में जमकर पेपर लीक होते थे और परीक्षाएं ठेके पर कराई जाती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो भी नौकरी निकलती थी, वह केवल एक परिवार और एक बिरादरी के लिए होती थी और उसकी सूची सैफई से आती थी। ‘हारते हैं तो ईवीएम को दोष देते हैं’ भूपेंद्र चौधरी ने ईवीएम के मुद्दे पर भी सपा को घेरा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी जब चुनाव जीतती है तो ईवीएम पर सवाल नहीं उठाती, लेकिन चुनाव हारने के बाद उसी ईवीएम को दोष देने लगती है और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करती है। ‘परिवार और जाति से आगे नहीं बढ़ता सपा का एजेंडा’ अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा जाति की राजनीति की है। सर्व समाज को साथ लेकर चलने की बात उसके एजेंडे में कभी नहीं रही। उन्होंने कहा कि जब सपा विपक्ष में होती है तो सर्व समाज की बात करती है, लेकिन सत्ता में आते ही उसका एजेंडा परिवार और जाति तक सिमट जाता है। भूपेंद्र चौधरी ने AI वीडियो को लेकर भी सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह के वीडियो जारी करना प्रदेश की 25 करोड़ जनता का अपमान है। उन्होंने कहा कि जनता ने योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया है और AI के जरिए उसकी तस्वीर बदलकर पेश करना जनता के जनादेश का अपमान है। ‘अखिलेश को सोते हुए सरकार बनती नजर आ रही’ भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव 2027 में समाजवादी पार्टी और उसके नेता को सोते हुए सरकार बनती नजर आ रही है। अखिलेश यादव के ‘जेन जी’ वाले बयान पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि उनके ‘जेन जी’ का मतलब जनता ने देखा है। दिनेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि 2017 से पहले अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के हर जिले में एक-एक माफिया पैदा करने का काम किया और उन्हीं के संरक्षण में सरकार चलती थी। उन्होंने कहा कि अखिलेश सरकार के दौरान जितनी वैकेंसी निकलीं, उनमें से एक भी नियुक्ति वह नहीं कर पाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में युवाओं के हाथ में कट्टा देने और वसूली करने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि ‘जेन जी’ पहले भी भाजपा के साथ था, आज भी भाजपा के साथ है और आगे भी भाजपा के साथ ही रहेगा। PDA मतलब- 'पराया धन अपना’ दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी के सत्ता से बाहर होते ही उनकी ‘पर्ची और खर्ची’ बंद हो गई। इसी वजह से आज सपा PDA की राजनीति कर रही है। उन्होंने अखिलेश यादव के पुराने बयान का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने चौरसिया, शाक्य और वर्मा समाज के लोगों को बोलने से रोकने की बात कही थी। दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव ने पहले भी इन समाजों का अपमान किया और आज भी कर रहे हैं। PDA को लेकर उन्होंने तंज कसा कि अखिलेश यादव के लिए PDA का मतलब ‘पराया धन अपना’ है। दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, समाजवादी पार्टी के लोगों का मानसिक संतुलन बिगड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि सपा की पूरी राजनीति X, प्रेस और अब पोस्टर तक सीमित होकर रह गई है। ‘अखिलेश और सपा फ्रस्टेशन में’ उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष मोहसिन रजा ने भी सपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव और उनकी पार्टी के लोग फ्रस्टेशन में हैं, क्योंकि पूरा प्रदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काम से सहमत है। मोहसिन रजा ने कहा कि मोदी और योगी सरकारों ने कानून-व्यवस्था पर काम कर लोगों को सुरक्षा देने का काम किया है और यही वजह है कि विपक्ष परेशान है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का यह अंतिम चुनाव है और 2027 में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा प्रचंड बहुमत से सरकार बनाएगी। ‘अखिलेश खुद कार्यक्रम जारी करते हैं और खुद कैंसिल करते हैं’ कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने अखिलेश यादव के रद्द हुए दौरों को लेकर सपा के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पहले अखिलेश यादव का सहारनपुर दौरा रद्द हुआ और फिर बुलंदशहर का दौरा भी रद्द हो गया। इसके बाद सरकार पर परमिशन नहीं देने का आरोप लगाया गया। अनिल कुमार ने कहा कि ये बातें निराधार हैं। उनके मुताबिक अखिलेश यादव खुद कार्यक्रम जारी करते हैं और खुद ही उसे कैंसल कर देते हैं। अनिल कुमार ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में देश में बड़ा बदलाव हुआ है। शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हुआ है। उन्होंने कहा कि विपक्ष हर काम को नकारने की आदत बना चुका है।

मानसून में बारिश का असमान वितरण, खेती पर असर; बिहार के 14 जिलों में बाढ़ का संकट

 पटना  मानसून की विदाई का समय करीब आ गया है, लेकिन बिहार में अबकी बार बारिश का वितरण बेहद असमान रहा है। स्थिति यह है कि मानसून सीजन समाप्त होने में कुछ ही सप्ताह शेष हैं, इसके बावजूद राज्य के किसी भी जिले में सामान्य के मुकाबले 60 प्रतिशत या उससे अधिक बारिश दर्ज नहीं हो सकी है। कई इलाकों में कम बारिश के कारण खेती प्रभावित हुई, वहीं दूसरी ओर नदियों में नेपाल और पड़ोसी राज्यों से आए पानी के कारण 14 जिलों में बाढ़ की विकट स्थिति बनी हुई है। यानी बारिश की कमी और बाढ़, दोनों तस्वीरें एक साथ देखने को मिल रही है। ऐसे तमाम झंझावात के बीच किसानों ने कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार 99 प्रतिशत धान की रोपनी कर दी। महत्वपूर्ण यह है कि 26 जिलों में सौ प्रतिशत या उससे अधिक रोपनी हुई है। पांच जिलों में किसानों ने सौ प्रतिशत से अधिक धान लगाया है। ऐसे जिलों में जहानाबाद, गोपालगंज, मूंगेर, शेखपुरा एवं किशनगंज जिले हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून में बिहार में बारिश का वितरण लगातार उतार-चढ़ाव वाला रहा। कई दौर में अच्छी बारिश हुई, लेकिन उसका क्षेत्रवार फैलाव समान नहीं रहा। कुछ जिलों में एक-दो दिनों में भारी बारिश हुई, जबकि लंबे अंतराल तक बारिश नहीं होने से कुल मौसमी आंकड़ा सामान्य से नीचे बना रहा। किसानों के लिए बारिश का असमान वितरण चिंता मौसम की इस असमानता का सीधा असर खरीफ (शारदीय) फसलों पर पड़ा है। जिन क्षेत्रों में समय पर पर्याप्त बारिश नहीं हुई, वहां धान समेत अन्य फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ा। वहीं, बाद में बाढ़ ने कई इलाकों में खेतों में पानी जमा कर दिया। इससे फसल खराब होने की आशंका बढ़ गई है। सितंबर की बारिश पर टिकी उम्मीद मानसून की विदाई से पहले सितंबर की बारिश किसानों और जलस्रोतों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मौसम विभाग ने बिहार समेत कई राज्यों में अगले कुछ दिनों के दौरान बारिश जताई है। ऐसे में आने वाले दिनों की बारिश राज्य के मौसमी आंकड़े को कुछ सुधार सकती है, लेकिन मानसून के अंतिम चरण तक भी यदि व्यापक बारिश नहीं हुई तो इस साल का मानसून बिहार के लिए कम बारिश, असमान वितरण और बाढ़ की दोहरी मार के रूप में दर्ज हो सकता है।

राशन कार्डधारकों के लिए जरूरी खबर: 180 दिन में ई-केवाईसी नहीं कराई तो नाम सूची से हटेगा

सुनेल राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (एनएफएसए) के लाभार्थियों को लेकर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने नई व्यवस्था लागू की है। अब एनएफएसए सूची में किसी लाभार्थी का नाम जुड़ने के बाद 90 दिन के भीतर ई-केवाईसी करवाना अनिवार्य होगा। निर्धारित अवधि में ई-केवाईसी नहीं कराने पर 91वें दिन लाभार्थी का नाम एनएफएसए सूची से स्वतः अस्थायी रूप से निलंबित हो जाएगा। इसके बाद भी निर्धारित अवधि में ई-केवाईसी नहीं कराने पर नाम स्थायी रूप से सूची से हटा दिया जाएगा। विभाग ने यह व्यवस्था लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित करने और अपात्र नामों को सूची से हटाने के उद्देश्य से लागू की है। 180 दिन में ई-केवाईसी नहीं तो स्थायी रूप से बाहर नई व्यवस्था के तहत नाम जुड़ने के बाद पहले 90 दिन ई-केवाईसी के लिए निर्धारित हैं। इस अवधि में केवाईसी नहीं कराने पर नाम अस्थायी रूप से निलंबित होगा। इसके बाद अगले 90 दिन में भी ई-केवाईसी नहीं कराने पर लाभार्थी का नाम एनएफएसए सूची से स्वतः स्थायी रूप से हटा दिया जाएगा। खास बात यह है कि यह प्रक्रिया परिवार के बजाय प्रत्येक लाभार्थी के स्तर पर लागू होगी। अपात्र परिवारों पर भी पहले निलंबन, फिर स्थायी कार्रवाई एनएफएसए सूची में शामिल कोई परिवार अपात्र पाया जाता है तो संबंधित जिला रसद अधिकारी उसे विभागीय पोर्टल पर अस्थायी रूप से निलंबित कर सकेंगे। निलंबन के बाद 90 दिन की अवधि में जांच के दौरान परिवार पात्र पाया जाता है तो उसे दोबारा सक्रिय किया जा सकेगा। वहीं 90 दिन की अवधि पूरी होने के बाद अपात्र परिवार का नाम स्वतः स्थायी रूप से सूची से हटा दिया जाएगा और उसे दोबारा शामिल नहीं किया जा सकेगा। निलंबित नाम सूची में दिखेगा, लेकिन राशन नहीं मिलेगा अस्थायी रूप से निलंबित लाभार्थी का नाम राशन डीलर की एनएफएसए सूची में दिखाई देता रहेगा, लेकिन उसे खाद्यान्न का वितरण नहीं किया जा सकेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अस्थायी निलंबन और स्थायी रूप से नाम हटाने की पूरी प्रक्रिया स्वचालित होगी और इसमें किसी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा। अतिरिक्त खाद्य आयुक्त पूनम प्रसाद सागर के आदेश के अनुसार यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। छह माह से राशन नहीं उठाया तो भी होगी कार्रवाई भारत सरकार की 22 जुलाई 2025 की अधिसूचना की पालना में छह माह से खाद्यान्न का उठाव नहीं करने वाले लाभार्थी परिवार भी इस व्यवस्था के दायरे में रहेंगे। छह माह की अवधि पूरी होने के बाद ऐसे परिवारों का नाम स्वतः अस्थायी रूप से निलंबित होगा और संदेश के जरिए सूचना दी जाएगी। इसके बाद 90 दिनों में जिला रसद अधिकारी जांच कर सकते हैं। परिवार स्वयं भी सूची में फिर से सक्रिय होने के लिए आवेदन कर सकता है। लेकिन 90 दिन की अवधि पूरी होने के बाद नाम स्वतः स्थायी रूप से हटा दिया जाएगा। ई-केवाईसी कराई तो 24 घंटे में फिर सक्रिय होगा नाम प्रवर्तन अधिकारी गोविन्द देथा ने बताया कि विभाग के आदेश के अनुसार 90 दिन की अवधि पूरी होने के बाद अस्थायी रूप से निलंबित लाभार्थी के पास ई-केवाईसी करवाने का एक और अवसर रहेगा। यदि वह आगामी 90 दिनों के भीतर राशन डीलर के पास जाकर ई-केवाईसी पूरी करवा लेता है तो 24 घंटे के भीतर उसका नाम एनएफएसए सूची में स्वतः फिर सक्रिय हो जाएगा। नाम अस्थायी रूप से निलोंबत होने और दोबारा सक्रिय होने की सूचना दी जाएगी।  

छत्तीसगढ़ में संविदा भर्ती के खिलाफ नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन, नियुक्तियों का जताया विरोध

रायपुर. पदोन्नति के पदों पर की गई संविदा नियुक्तियों को निरस्त करने और नर्सिंग संवर्ग की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ ने तीन दिवसीय सांकेतिक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शन के पहले दिन गुरुवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर परिसर में संघ के पदाधिकारियों और नर्सिंग कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। संघ का कहना है कि लंबे समय से नर्सिंग संवर्ग की कई मांगें लंबित हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से इनके निराकरण की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। इन्हीं मांगों को लेकर तीन दिवसीय सांकेतिक प्रदर्शन के जरिए शासन का ध्यान आकर्षित किया जा रहा है। पदोन्नति के पदों पर संविदा नियुक्ति का विरोध एसोसिएशन की प्रमुख मांग नर्सिंग डेमोंस्ट्रेटर और सहायक प्राध्यापक के पदों पर की संविदा नियुक्तियों को निरस्त करना है। संघ ने मांग की है कि पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग, बीएससी नर्सिंग और एमएससी नर्सिंग की योग्यता रखने वाले नर्सिंग संवर्ग के कर्मचारियों को वरिष्ठता सूची के आधार पर पदोन्नति दी जाए। संघ ने बताया कि नर्सिंग डेमोंस्ट्रेटर के 22 और सहायक प्राध्यापक के 18 पदों पर सीधी भर्ती के आदेश स्वीकृत होने के बावजूद अब तक विज्ञापन जारी नहीं किया गया है। एसोसिएशन ने इन पदों पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के पात्र नर्सिंग कर्मचारियों को पदोन्नति का अवसर देने की मांग की है। अलाउंस और वेतन बढ़ाने की मांग नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के नर्सिंग संवर्ग के ग्रेड-पे और वेतनमान में वृद्धि से संबंधित प्रस्ताव को शासन स्तर पर भेजकर जल्द स्वीकृति देने की मांग की है। इसके अलावा नर्सिंग ऑफिसर और सीनियर नर्सिंग ऑफिसर पदनाम से संबंधित घोषणा के अनुरूप आदेश जारी करने की मांग भी रखी गई है। संघ ने नर्सिंग अलाउंस 7,200 रुपये और वॉशिंग अलाउंस 1,800 रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग की है। वहीं संविदा और कलेक्टर दर पर कार्यरत स्टाफ नर्सों के लिए न्यूनतम 40 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन निर्धारित करने की मांग भी शामिल है। लंबित पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करने की मांग एसोसिएशन ने नर्सिंग सिस्टर, सहायक नर्सिंग अधीक्षक, उप नर्सिंग अधीक्षक, डेमोंस्ट्रेटर और सहायक प्राध्यापक के पदों पर लंबित पदोन्नति प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की है। साथ ही स्टाफ नर्सों के रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करने और पहले से कार्यरत संविदा एवं कलेक्टर दर के स्टाफ नर्सों को नियमित पदों पर प्राथमिकता देने की मांग की गई है। इसके अलावा समयमान वेतनमान से संबंधित आदेश जारी करने की मांग भी संघ ने रखी है। 1500 से बढ़ाकर 15 हजार रुपये दें स्टाइपेंड नर्सिंग छात्र-छात्राओं के स्टाइपेंड को लेकर भी एसोसिएशन ने सरकार से बड़ा बदलाव करने की मांग की है। संघ के मुताबिक वर्ष 1998-99 से नर्सिंग विद्यार्थियों को 1,500 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जिसमें पिछले 27 वर्षों में कोई वृद्धि नहीं हुई है। एसोसिएशन ने इसे बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की है। प्रदर्शन के पहले दिन चिकित्सा शिक्षा विभाग के नियमित नर्सिंग संवर्ग के कर्मचारियों के साथ संविदा और डेली वेजेस पर कार्यरत स्टाफ नर्सों ने भी हिस्सा लिया। संघ ने कहा कि तीन दिवसीय सांकेतिक प्रदर्शन के माध्यम से शासन तक अपनी मांगें पहुंचाई जा रही हैं और लंबित मुद्दों के शीघ्र निराकरण की उम्मीद है।