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बाल मजदूरी के खिलाफ बड़ा अभियान, हरियाणा में 78 बच्चों को मिला नया जीवन

कैथल/चंडीगढ़. ऑपरेशन मुस्कान अभियान के तहत मानवता व संवेदनशीलता की एक प्रेरणादायी मिसाल देखने को मिली। एमडीडी ऑफ इंडिया और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) की संयुक्त टीमों ने प्रभावी कार्रवाई करते हुए 78 जरूरतमंद बच्चों को रेस्क्यू कर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया। इन बच्चों में गुमशुदा, बाल श्रमिक, भीख मांगने वाले, कूड़ा बीनने वाले तथा संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे शामिल रहे। सीडब्ल्यूसी चेयरमैन भीम सेन ने बताया कि अप्रैल 2026 की मासिक समीक्षा रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण मामलों का सफलता पूर्वक निपटारा किया गया। उन्होंने कहा कि मुझे गर्व है अपनी कैथल जिला की पुलिस पर जिन्होंने अभियान के दौरान 18 गुमशुदा बच्चों को खोजकर उनके परिजनों से मिलवाया गया, जबकि 20 बच्चों को बाल श्रम के चंगुल से मुक्त करवाया गया। बेहतर भविष्य और पारिवारिक संरक्षण मिल सके इसके अतिरिक्त 22 बच्चों को भीख मांगने की विवशता से बाहर निकालकर सुरक्षित संरक्षण प्रदान किया गया तथा आठ कचरा बीनने वाले बच्चों के पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी की गई। उन्होंने बताया कि एक परित्यक्त मासूम बच्ची को भी सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करवाते हुए विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी (एसएए) में शिफ्ट किया गया, ताकि उसे बेहतर भविष्य और पारिवारिक संरक्षण मिल सके। इस अभियान के दौरान हर बच्चे की काउंसलिंग, चिकित्सा जांच, सुरक्षा और पुनर्वास को प्राथमिकता दी गई। भीम सेन अग्रवाल ने कहा कि हर बच्चा देश का भविष्य है और उसे भय, शोषण तथा असुरक्षा से मुक्त वातावरण देना समाज और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी है।” उन्होंने बताया कि सीडब्ल्यूसी की टीम लगातार यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी बच्चा दोबारा असुरक्षित परिस्थितियों में न पहुंचे।

बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला, चंडीगढ़ में समर कैंप की बाहरी गतिविधियां बंद

चंडीगढ़. गर्मी की छुट्टियों में स्कूलों में आयोजित किए जा रहे समर कैंपों में बाहरी गतिविधियाें पर पाबंदी रहेगी। यह आदेश चंडीगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग (सीसीपीसीआर) ने बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए जारी किया है। स्कूलों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। आयोग ने कहा है कि गर्मी की छुट्टियों के दौरान आयोजित किए जा रहे समर कैंपों में बच्चों को तेज धूप और गर्म हवाओं से बचाया जाए तथा दोपहर के समय किसी भी प्रकार की बाहरी गतिविधियां न करवाई जाएं। आयोग ने पहले ही हीटवेव की स्थिति को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी जारी की थी। इसके बाद शिक्षा विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन ने भी सभी सरकारी, निजी और सहायता प्राप्त स्कूलों में 23 मई से ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर दिया है। हालांकि आयोग के संज्ञान में आया है कि कुछ स्कूल छुट्टियों के दौरान समर कैंप आयोजित कर रहे हैं। आयोग ने माना कि ऐसे कैंप बच्चों की रचनात्मकता और ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने में सहायक होते हैं, लेकिन मौजूदा भीषण गर्मी को देखते हुए बच्चों को खुले में गतिविधियों से बचाना बेहद जरूरी है। सीसीपीसीआर की अध्यक्ष शिप्रा बंसल ने कहा कि अत्यधिक गर्म मौसम में बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। स्कूलों और संस्थानों से जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की अपील करते हुए कहा कि कोई भी बच्चा गर्मी की तीव्र परिस्थितियों के संपर्क में न आए। उन्होंने अभिभावकों से भी बच्चों को पर्याप्त पानी पिलाने और जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की है।

AI आधारित स्मार्ट मीटरिंग प्रणाली एवं डिजिटल विद्युत प्रबंधन मॉडल की सराहना

भोपाल  भारत सरकार के ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल ने मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अंतर्गत संचालित आरडीएसएस कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। समीक्षा बैठक में स्मार्ट मीटरिंग, फीडर सेपरेशन, पीएम कुसुम योजना, वन क्षेत्र विद्युत अधोसंरचना तथा डिजिटल विद्युत प्रबंधन से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। ऊर्जा सचिव  अग्रवाल ने निर्देश दिए कि कंपनी क्षेत्र में शेष अविद्युतीकृत घरों का सर्वे शीघ्र पूर्ण कर उनका डेटा तैयार किया जाए तथा डीपीआर को अंतिम रूप देकर प्रस्ताव तैयार किए जाएं, जिससे पात्र घरों तक विद्युत सुविधा पहुंचाई जा सके।  अग्रवाल ने आरडीएसएस योजना अंतर्गत फीडर सेपरेशन में शामिल 874 फीडरों को पीएम कुसुम योजना से जोड़कर लाभान्वित करने पर विशेष बल दिया। साथ ही वन्य जीव अभयारण्य क्षेत्रों से गुजरने वाली एलटी लाइनों के केबलीकरण के निर्देश देते हुए कहा कि इससे वन्य जीवों के साथ होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आएगी तथा विद्युत आपूर्ति अधिक सुरक्षित एवं विश्वसनीय बनेगी। बैठक में आरडीएसएस योजना अंतर्गत पूर्व क्षेत्र कंपनी के 41 ऐसे प्रकरणों की भी समीक्षा की गई, जिनमें वन विभाग की स्वीकृति लंबित है। ऊर्जा सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन प्रकरणों में वन मंत्रालय स्तर पर सतत फॉलोअप किया जाए, ताकि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जा सके। समीक्षा के दौरान स्मार्ट मीटरिंग प्रणाली में Artificial Intelligence (AI) एवं Machine Learning आधारित विश्लेषण प्रणाली की विशेष प्रस्तुति दी गई। अधिकारियों ने बताया कि AI आधारित तकनीकों के माध्यम से विद्युत चोरी की संभावनाओं की पहचान अधिक प्रभावी ढंग से की जा रही है। उपभोक्ताओं के खपत पैटर्न, स्मार्ट मीटर टैंपर इवेंट्स, डीटीआर ऊर्जा संतुलन, GIS आधारित उपभोक्ता मैपिंग तथा ऐतिहासिक बिलिंग डेटा का विश्लेषण कर संदिग्ध उपभोक्ताओं की सूची स्वतः तैयार की जा रही है। बैठक में कंपनी के स्मार्ट बिजली ऐप का भी अवलोकन किया। अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान में लगभग 13 हजार स्मार्ट मीटर उपभोक्ता प्रतिदिन स्वयं अपना विद्युत उपभोग ऐप के माध्यम से देख रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं में ऊर्जा संरक्षण एवं डिजिटल सहभागिता के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। अधिकारियों ने बताया कि मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 से लागू टैरिफ ऑर्डर में TOD योजना लागू की जा चुकी है, जिसका लाभ स्मार्ट मीटर वाले घरेलू उपभोक्ताओं को प्राप्त हो रहा है। ऊर्जा सचिव  अग्रवाल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे ऊर्जा संरक्षण, लोड प्रबंधन एवं डिजिटल उपभोक्ता सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा। ऊर्जा सचिव  अग्रवाल ने पूर्व क्षेत्र कंपनी द्वारा किए जा रहे नवाचारों एवं डिजिटल उपभोक्ता सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के तकनीक आधारित मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए।  

20 करोड़ से बनेगा भव्य रुद्रेश्वर धाम कॉरिडोर

रायपुर धमतरी शहर से लगे रुद्री स्थित प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल भर नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में यह प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बनकर उभरेगा। लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित रुद्रेश्वर धाम कॉरिडोर परियोजना के माध्यम से मंदिर परिसर का समग्र विकास किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से तीन चरणों में विकसित करने की योजना तैयार की गई है। विशेष बात यह है कि पूरे विकास कार्य में मंदिर की मूल संरचना और उसकी आध्यात्मिक गरिमा को अक्षुण्ण रखा जाएगा। बिना किसी बड़े विध्वंस या संरचनात्मक क्षति के मंदिर परिसर को आधुनिक सुविधाओं और पारंपरिक भारतीय स्थापत्य शैली के समन्वय से नया स्वरूप दिया जाएगा। प्रस्तावित डिजाइन में शिखर, त्रिशूल, ओम् प्रतीक, तोरण द्वार, अलंकृत स्तंभ, नंदी प्रतिमा, दीप स्तंभ और जाली कार्य जैसे पारंपरिक तत्व शामिल किए गए हैं। प्राकृतिक सैंडस्टोन क्लैडिंग और पत्थर आधारित फिनिश मंदिर परिसर को भव्य, आकर्षक और कालातीत स्वरूप प्रदान करेंगे। परियोजना का उद्देश्य केवल मंदिर सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है। इसके तहत चौड़े पैदल मार्ग, सुव्यवस्थित प्रवेश और निकास द्वार, परिक्रमा पथ, घाट, मंडप और सार्वजनिक उपयोग के क्षेत्रों का सुनियोजित विकास किया जाएगा। परिसर में डिजिटल सूचना स्क्रीन, प्रसाद एवं स्मृति चिन्ह दुकानें, फूड कोर्ट, विश्राम क्षेत्र, शिशु आहार कक्ष, भुगतान आधारित स्वच्छ शौचालय और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित होंगी। आधुनिक तकनीक के उपयोग के तहत एआई आधारित हेल्थ चेकअप कियोस्क भी स्थापित किए जाएंगे। वृद्धजनों और दिव्यांगजनों के लिए रैम्प आधारित बाधारहित आवागमन व्यवस्था परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। घाट क्षेत्र को भी विशेष रूप से विकसित किया जाएगा। यहां रेलिंग युक्त विसर्जन कुंड, सुरक्षित सीढ़ियां और श्रद्धालुओं के बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी, ताकि धार्मिक गतिविधियां सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संचालित हो सकें। इसके अलावा गार्डन, सांस्कृतिक मंडप, खुला मंच, रिवर फ्रंट कॉटेज और भविष्य में विकसित होने वाली मेरीन ड्राइव जैसी अवधारणाएं इस परियोजना को धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक और पारिवारिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बनाएंगी। पूरे लेआउट को वास्तु सिद्धांतों, प्राकृतिक वेंटिलेशन, खुले प्रांगण और श्रद्धालुओं की क्रमिक आध्यात्मिक यात्रा की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। डिजाइन में सोमनाथ मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और जगन्नाथ मंदिर की स्थापत्य अवधारणाओं से प्रेरणा ली गई है। पर्यावरण संरक्षण को भी परियोजना का अहम हिस्सा बनाया गया है। इसके तहत सौर ऊर्जा आधारित पार्किंग शेड, ईवी चार्जिंग स्टेशन, वर्षा जल संचयन, प्राकृतिक प्रकाश और वायु संचार आधारित डिजाइन, हरित क्षेत्र विकास तथा वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं प्रस्तावित हैं। स्थानीय और टिकाऊ निर्माण सामग्री के उपयोग से पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के साथ स्थानीय कारीगरों और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा के अनुसार यह परियोजना केवल अधोसंरचना निर्माण नहीं, बल्कि धमतरी की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन संभावनाओं को नई पहचान देने वाला प्रयास है। आने वाले समय में रुद्रेश्वर धाम प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों में शामिल होगा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. दादा असीम बनर्जी को दी श्रद्धांजलि

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को सतना पहुंचकर वरिष्ठ समाजसेवी उत्तम बनर्जी के पिता स्वर्गीय दादा असीम बनर्जी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिवंगत के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और शोक संतप्त परिजन से भेंट कर ढांढस बंधाया। इस दौरान नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, सांसद सतना गणेश सिंह, खजुराहो सांसद बीडी शर्मा, महापौर योगेश ताम्रकार, जिलाध्यक्ष भगवती प्रसाद पाण्डेय ने भी स्व. दादा असीम बैनर्जी को श्रृद्धांजलि अर्पित की।  

अवैध खनन माफिया पर शिकंजा, बिलासपुर में लगातार कार्रवाई से मचा हड़कंप

बिलासपुर. कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर जिले में अवैध बोर खनन और बिना रॉयल्टी खनिज परिवहन के खिलाफ प्रशासन लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। बीते दो दिनों में बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 8 वाहनों को जब्त किया गया है। प्रशासन ने 4 बोर मशीनों और 4 हाइवा वाहनों पर कार्रवाई कर अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों में हड़कंप मचा दिया है। जानकारी के मुताबिक ग्राम बसिया में देर रात अवैध रूप से बोर खनन किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान वहां से दो बोर मशीनें जब्त की गईं।इसके अलावा तिफरा क्षेत्र में भी प्रशासन ने दबिश देकर दो और बोर मशीनों को पकड़ा। बिना रॉयल्टी मुरूम और गिट्टी ढो रहे थे हाइवा राजस्व विभाग की टीम ने बिना रॉयल्टी मुरूम और गिट्टी का परिवहन कर रहे 4 हाइवा वाहनों को भी जब्त किया। अधिकारियों के अनुसार सभी वाहनों को आगे की कार्रवाई के लिए सिरगिट्टी और तोरवा थाना पुलिस को सौंप दिया गया है। तहसीलदार के नेतृत्व में हुई संयुक्त कार्रवाई यह पूरी कार्रवाई तहसीलदार प्रकाश साहू के नेतृत्व में राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने की। प्रशासन का कहना है कि जिले में अवैध खनन और अवैध परिवहन के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।

मुख्यमंत्री ने सीधी जिले के ग्राम कसिहवा में हुई घटना पर लिया संज्ञान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को सीधी जिले के ग्राम कसिहवा में शॉर्ट सर्किट से हुए एक हादसे में तीन बच्चों की मृत्यु हो जाने की घटना का त्वरित संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा है कि घटना अत्यंत ही दुखद एवं हृदय विदारक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शोकाकुल परिजन के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर ईश्वर से दिवगतों को शांति प्रदान करने की प्रार्थना की है। उन्होंने कहा है कि दुख की इस घड़ी में सरकार परिजन के साथ है। मुख्यमंत्री ने परिजन के लिए राहत राशि भी घोषित की है। उन्होंने कहा है कि मृत बच्चों के परिजन को राज्य सरकार की ओर से 6-6 लाख रुपये आर्थिक सहायता दी जायेगी। उन्होंने बताया कि जिला रेडक्रॉस सोसायटी, सीधी की ओर से परिजन को 20-20 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता राशि दे दी गई है। सीधी जिले के ग्राम कसिहवा, ग्राम पंचायत बघवारी, तहसील गोपद बनास में शनिवार की सुबह 11:20 बजे श्री रामरतन साकेत के घर के पास बिजली के पोल से शार्ट-सर्किट होने से आग लग गई, जिसमें श्री रामरतन की दो बेटियां कुमारी घुम्मु उर्फ संध्या साकेत (लगभग 6 वर्ष) कुमारी रिद्धि (लगभग 1.6 वर्ष) एवं एक बेटा नागेन्द्र (लगभग 3 वर्ष) की दर्दनाक मृत्यु हो गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा घटना पर तत्काल संज्ञान लेकर परिजन को 2-2 लाख रुपए आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई। म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा परिजन को 4-4 लाख रूपए राहत राशि देने की घोषणा की गई है। इसी क्रम में जिला प्रशासन सीधी की ओर से 5-5 हजार रुपये के मान से 15 हजार रूपए अंत्येष्टि सहायता राशि एवं 20-20 हजार रूपए जिला रेडक्रास सोसाइटी सीधी की ओर से तत्काल सहायता राशि परिजन को दे दी गई है।  

यूपी में महिला सशक्तिकरण का नया मॉडल: सोलर दीदी अभियान तेज

वाराणसी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की आधी आबादी अब न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही है, बल्कि हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश का नेतृत्व करने के लिए भी तैयार है। धर्म और संस्कृति की नगरी काशी (वाराणसी) में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 'सोलर दीदी' नामक एक क्रांतिकारी पहल की शुरुआत की गई है। इस अभियान के जरिए स्थानीय महिलाओं को अत्याधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण देकर 'सोलर लीडर' के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो राज्य में ऊर्जा स्वावलंबन और महिला सशक्तिकरण का एक अनूठा मॉडल बनकर उभरा है। यूपी नेडा (UPNEDA) के अनुसार, चयनित महिलाओं को उनके गृह जनपद वाराणसी में ही रोजगार के बेहतरीन अवसर दिए जा रहे हैं। आकर्षक वेतन के साथ मिलेंगे कई मुफ्त लाभ यूपी नेडा के डायरेक्टर रविन्दर सिंह ने बताया कि विभाग से जुड़ी प्रमुख वेंडर कंपनियों द्वारा इन 'सोलर दीदियों' को ₹14,196 प्रति माह का फिक्स वेतन दिया जाएगा। इसके अलावा, महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए कंपनियों द्वारा प्रत्येक सोलर दीदी के घर पर ₹1.30 लाख मूल्य का 2 किलोवाट क्षमता वाला सोलर प्लांट बिल्कुल मुफ्त लगाया जाएगा, जिससे उनका अपना घर भी सौर ऊर्जा से रोशन हो सके। आधुनिक रसोई को बढ़ावा देने के लिए उन्हें एक इंडक्शन स्टोव (चूल्हा) भी मुफ्त मिलेगा। यही नहीं, भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा हर सफल सोलर इंस्टॉलेशन पर ₹1000 की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। 7 दिन का विशेष प्रशिक्षण और टेस्ट अनिवार्य इस महाअभियान का हिस्सा बनने के लिए विभाग ने महिलाओं से एक विशेष अपील की है। सभी इच्छुक प्रशिक्षुओं को तय समय पर प्रशिक्षण केंद्र पहुंचकर सात दिवसीय व्यावहारिक ट्रेनिंग को गंभीरता से पूरा करना होगा। इस ट्रेनिंग के बाद होने वाले टेस्ट को उत्तीर्ण करने वाली महिलाओं को ही 'सोलर दीदी' के रूप में फील्ड में काम करने और इन सभी सुविधाओं का लाभ उठाने का मौका मिलेगा। यह कदम ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को तकनीकी रूप से कुशल बनाने में गेम-चेंजर साबित हो रहा है। उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा की रिकॉर्ड रफ्तार वाराणसी की इस पहल के बीच पूरे उत्तर प्रदेश में रूफटॉप सोलर का नेटवर्क तेजी से फैला है। प्रदेश में अब तक कुल 9,68,548 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से 5,44,810 से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं। इस बड़े बदलाव के कारण राज्य में 1,844.87 मेगावाट की स्थापित क्षमता तैयार हुई है। इस पूरी योजना को रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा ₹3,539.06 करोड़ और राज्य सरकार द्वारा ₹1200 करोड़ से अधिक की भारी-भरकम सब्सिडी जारी की जा चुकी है। रोजाना बन रही 5 करोड़ रुपये की मुफ्त बिजली योगी सरकार के इन प्रयासों का सबसे बड़ा फायदा सीधे जनता और पर्यावरण को मिल रहा है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के घरों की छतों पर लगे इन सोलर प्लांटों के माध्यम से प्रतिदिन 82 लाख यूनिट से अधिक मुफ्त बिजली पैदा की जा रही है। अगर बाजार भाव से इसकी तुलना करें, तो प्रदेश के नागरिक रोजाना लगभग 5 करोड़ रुपये से अधिक की बिजली पूरी तरह मुफ्त और सीधे सूरज की रोशनी से बना रहे हैं। वाराणसी का यह 'सोलर दीदी' मॉडल जल्द ही प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. श्रीमती सरोज देवी माहेश्वरी को दी श्रद्धांजलि

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को सतना पहुंचकर मणिकांत माहेश्वरी की माताजी स्व. श्रीमती सरोज देवी माहेश्वरी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिटी कोतवाली के पीछे स्थित माहेश्वरी निवास में स्व. श्रीमती माहेश्वरी के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शोक संतप्त परिजन से भेंट कर उन्हें ढांढस बंधाया। इस दौरान नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, सांसद सतना गणेश सिंह, खजुराहो सांसद बीडी शर्मा, महापौर योगेश ताम्रकार, समाजसेवी श्रीकृष्ण माहेश्वरी, पूर्व महापौर ममता पाण्डेय, पं. गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास अध्यक्ष डॉ. राकेश मिश्र, समाजसेवी डॉ. स्वप्ना वर्मा, सहित जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। 

मोरहाबादी से बीआईटी मेसरा तक PNG कनेक्शन की तैयारी, संजय सेठ ने की समीक्षा बैठक

 रांची  राजधानी रांची के मोरहाबादी, हेहल, लालपुर, एचईसी क्षेत्र, स्मार्ट सिटी और बीआईटी मेसरा इलाके में जल्द ही पाइपलाइन के माध्यम से गैस आपूर्ति शुरू होगी। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने शुक्रवार को रांची स्थित गेल (इंडिया) लिमिटेड के क्षेत्रीय कार्यालय में सिटी गैस वितरण परियोजना और पाइपलाइन गैस आपूर्ति (पीएनजी) कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को नेटवर्क विस्तार में तेजी लाने का निर्देश दिया। बैठक में अधिकारियों ने मंत्री को जानकारी दी कि वर्तमान में अशोक नगर, हरमू, हीनू, अरगोड़ा, पुंदाग, बरियातू, कांके, कोकर, तातीसिलवे, नामकुम और खेलगांव सहित कई इलाकों में पीएनजी नेटवर्क उपलब्ध है। वहीं मोरहाबादी, हेहल, लालपुर, एचईसी क्षेत्र, स्मार्ट सिटी और बीआईटी मेसरा में पाइपलाइन विस्तार का कार्य तेजी से चल रहा है। रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि सुरक्षित, सस्ती और पर्यावरण अनुकूल गैस सुविधा उपलब्ध कराना केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अधिक से अधिक घरों तक पाइपलाइन गैस पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। इसके लिए टास्क फोर्स का गठन कर युद्धस्तर पर पीएनजी कनेक्शन देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अधिकारियों ने बताया कि रांची में अब तक 854 किलोमीटर एमडीपीई पाइपलाइन और 70 किलोमीटर स्टील पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। शहर में 28 सीएनजी स्टेशन संचालित शहर में 28 सीएनजी स्टेशन संचालित हो रहे हैं, जहां प्रतिदिन 38 हजार से 42 हजार किलोग्राम सीएनजी की बिक्री हो रही है। पीएनजी परियोजना के तहत अब तक 79,071 घरेलू अवसंरचना विकसित की गई है, जबकि 23,628 घरेलू उपभोक्ताओं को पाइपलाइन गैस से जोड़ा जा चुका है। इसके अलावा 165 वाणिज्यिक और 16 औद्योगिक उपभोक्ता भी इस सुविधा का लाभ ले रहे हैं। बैठक में झिरी स्थित पांच टीपीडी क्षमता वाले कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि यह प्लांट नगर निगम के ठोस अपशिष्ट को हरित ईंधन और जैव उर्वरक में बदल रहा है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा और सतत अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा मिल रहा है। समीक्षा बैठक के बाद रक्षा राज्य मंत्री ने दो फायर बाइक का उद्घाटन भी किया। गेल अधिकारियों ने बताया कि संकरी गलियों और ऐसे मोहल्लों में, जहां दमकल की बड़ी गाड़ियां नहीं पहुंच पातीं, वहां इन फायर बाइक का उपयोग पाइपलाइन से संबंधित आग बुझाने में किया जाएगा। बाइक में पानी और अग्निशमन उपकरण उपलब्ध रहेंगे। मंत्री ने गेल की इस पहल की सराहना की। बैठक में रांची की मेयर रौशनी खलखो, पूर्व राज्यसभा सांसद अजय मारू, चेंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा, इंडस्ट्रीज एसोसिएशन से जुड़े अजय भंडारी और विनय टिबरेवाल तथा होटल एसोसिएशन के चंद्रकांत रायपत सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।