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मध्य प्रदेश का बैतूल बनेगा Green Model, 100 करोड़ की योजना सफल रही तो पूरे देश में होगी लागू

बैतूल बैतूल में विकास और पर्यावरण संरक्षण को लेकर 100 करोड़ रुपए का ‘लैंडस्केप प्रोजेक्ट’ तैयार हो रहा है। इस परियोजना में पहली बार जंगल, वन्यजीव, जल, जैव विविधता और वन अधिकार पाने वाले हजारों परिवारों को एक ही विकास मॉडल में शामिल किया जाएगा। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो इसे देशभर के लिए मॉडल बनाया जा सकता है। अभी तक जंगलों का प्रबंधन अलग-अलग वन मंडलों के हिसाब से होता है, लेकिन इस परियोजना में पूरे सतपुड़ा से मेलघाट तक फैले जंगल, वन्यजीवों के कॉरिडोर, नदियां, गांव, खेती और वनाधिकार वाले क्षेत्रों को एक इकाई मानकर योजना बनाई जाएगी। यानी जंगल और गांव को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक के रूप में देखा जाएगा। एक ओर जंगलों के संरक्षण की जरूरत है, तो दूसरी ओर वन अधिकार अधिनियम के तहत हजारों परिवारों को जंगलों के आसपास रहने और आजीविका का अधिकार मिला है। अब पहली बार इस चुनौती का समाधान तलाशने की कोशिश बैतूल से शुरू हो रही है। पूरी परियोजना का राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व बैतूल के पूर्व मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) एवं वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (एफएओ) में सीनियर एडवाइजर राकेश भूषण सिन्हा कर रहे हैं। आखिर 'लैंडस्केप प्रोजेक्ट' है क्या? अब तक वन विभाग अलग-अलग वन मंडलों के हिसाब से वर्किंग प्लान तैयार करता रहा है। एक वन मंडल की योजना दूसरे से अलग होती है, लेकिन जंगल किसी प्रशासनिक सीमा को नहीं मानते। वन्यजीव, नदियां, पहाड़ और जैव विविधता पूरे क्षेत्र में फैली होती है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लेकर मेलघाट टाइगर रिजर्व तक के पूरे वन क्षेत्र को एक लैंडस्केप यानी एक साझा पारिस्थितिकी तंत्र मानकर योजना बनाई जाएगी। इसमें जंगल, वन्यजीवों के कॉरिडोर, जल स्रोत, ग्रामीण आबादी, खेती, वनाधिकार वाले गांव और प्राकृतिक संसाधनों को एक साथ जोड़कर विकास और संरक्षण की रणनीति तैयार होगी। सबसे बड़ी चुनौती… जंगल भी बचें और वनवासी भी आगे बढ़ें राकेश भूषण सिन्हा बताते हैं कि वन अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद जंगलों के आसपास रहने वाले हजारों परिवारों को वन भूमि पर अधिकार मिले हैं। इसका उद्देश्य उन्हें सम्मानपूर्वक आजीविका उपलब्ध कराना था। अब चुनौती यह है कि इन परिवारों की आय बढ़े, लेकिन जंगलों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। दो राज्यों का साझा मॉडल सतपुड़ा और मेलघाट भले ही दो राज्यों में स्थित हों, लेकिन पर्यावरण की दृष्टि से दोनों एक ही लैंडस्केप का हिस्सा हैं। बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीव प्रशासनिक सीमाओं को नहीं पहचानते। ऐसे में यह परियोजना मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच समन्वित कार्यप्रणाली विकसित करेगी। अभी तक दोनों राज्यों की योजनाएं अलग-अलग बनती रही हैं, जबकि नई व्यवस्था में साझा रणनीति के साथ काम होगा।   दक्षिण वन मंडल के डीएफओ अरिहंत ने बताया कि यह परियोजना संयुक्त राष्ट्र (United Nations) और फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) के संयुक्त प्रयासों से तैयार की जा रही है। इसका क्रियान्वयन मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम, बैतूल और छिंदवाड़ा जिलों के साथ महाराष्ट्र के मेलघाट तक फैले वन्यजीव कॉरिडोर क्षेत्र में प्रस्तावित है।

Haryana Education: सरकारी स्कूलों में शुरू होगी रोबोटिक्स और AI शिक्षा, 391 लैब बनकर तैयार

 यमुनानगर  सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए विज्ञान की पढ़ाई किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। वे रोबोट बनाएंगे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) पर काम करेंगे, 3-डी प्रिंटर से माडल तैयार करेंगे और अपने आइडिया को तकनीक के जरिए हकीकत में बदलना सीखेंगे। क्योंकि प्रदेश के 391 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में इसी माह अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) शुरू हो रही है। इसके लिए स्कूलों में सामान पहुंच चुका है, वहीं मई में शिक्षकों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद स्कूल खुलते ही यह लैब क्रियान्वित की जा रही हैं। इससे सरकारी स्कूलों के हजारों विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा और नवाचार का मंच मिल सकेगा। अटल टिंकरिंग लैब की शुरुआत वर्ष 2018 में नीति आयोग ने अटल इनोवेशन मिशन के तहत की थी। उस समय निर्धारित मानकों के आधार पर प्रदेश के ज्यादातर निजी स्कूलों मं ही यह सुविधा मिल सकी थी, जबकि अधिकांश सरकारी स्कूल इससे वंचित रह गए थे। नीति आयोग की तर्ज पर हरियाणा सरकार ने अपने संसाधनों से 391 सरकारी स्कूलों में 2026-27 के शैक्षणिक सत्र में अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने का निर्णय लिया। इसके लिए फरवरी से स्कूलों में लैब का सामान भेजना शुरू कर दिया गया था, जो अब लगभग सभी स्कूलों में पहुंच चुका है। साथ ही मई में शिक्षकों को लैब से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया गया। हिसार में सबसे ज्यादा 29 लैब, रोहतक में सबसे कम पांच सबसे ज्यादा हिसार के 29 स्कूलों में लैब स्थापित हो रही हैं। इसके बाद जींद व सिरसा में 26-26, यमुनानगर में 23, अंबाला, भिवानी व फतेहाबाद में 22-22, करनाल में 21, कैथल में 20, पानीपत व सोनीपत में 19-19, कुरुक्षेत्र, नूंह व पलवल में 17-17, महेंद्रगढ़ में 16 और गुरुग्राम में 15 लैब स्थापित होंगी। चरखी दादरी, पंचकूला व रेवाड़ी में 11-11, फरीदाबाद में 10 व झज्जर में नौ लैब हैं। सबसे कम पांच लैब रोहतक में हैं। नवाचार, वैज्ञानिक सोच व तकनीकी कौशल का होगा विकास जिला विज्ञान विशेषज्ञ विशाल सिंघल ने बताया कि जुलाई में लैब शुरू कराने का प्रयास है। इनमें छात्र-छात्राएं रोबोटिक्स, एआइ, 3-डी प्रिंटिंग, इलेक्ट्रानिक्स, सेंसर, माइक्रोकंट्रोलर व कोडिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। यात्री छात्र केवल सिद्धांत नहीं पढ़ेंगे, बल्कि मॉडल तैयार करेंगे, प्रोटोटाइप बनाएंगे व दैनिक जीवन की समस्याओं के तकनीकी समाधान विकसित करने का अभ्यास भी करेंगे। इससे विद्यार्थियों में नवाचार, वैज्ञानिक सोच व तकनीकी कौशल का विकास होगा।

Employment Report: रोजगार के मामले में लुधियाना सबसे आगे, 63 फीसदी कर्मचारी नियमित वेतनभोगी

लुधियाना पंजाब में रोजगार के मामले में लुधियाना सबसे आगे है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों पर आधारित नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार लुधियाना का श्रमिक जनसंख्या अनुपात 57 प्रतिशत है, जो दिल्ली (41.2 प्रतिशत) और फरीदाबाद (44 प्रतिशत) से बेहतर है। नियमित वेतनभोगियों की हिस्सेदारी भी 63 प्रतिशत है, जो कई बड़े शहरों के बराबर या उनसे बेहतर है। रिपोर्ट के अनुसार लुधियाना में औद्योगिक गतिविधियां तेज होने से रोजगार के अवसर बढ़े हैं। विनिर्माण, ऑटोमोबाइल और कपड़ा उद्योगों में कुशल श्रमिकों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी जरूरत को देखते हुए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में नए पाठ्यक्रम भी शुरू किए जा रहे हैं। लुधियाना में स्वरोजगार करने वालों का प्रतिशत 34.7 है जबकि आकस्मिक श्रमिक (कैजुअल लेबर) 2.3 प्रतिशत हैं। शहर की बेरोजगारी दर 3.5 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो फरीदाबाद (4.9 प्रतिशत) और दिल्ली (5.3 प्रतिशत) से कम है। हालांकि महिलाओं की श्रम भागीदारी अब भी चिंता का विषय है। महिलाओं का श्रमिक जनसंख्या अनुपात केवल 22.8 प्रतिशत है। महिलाओं में बेरोजगारी दर 3.8 प्रतिशत जबकि पुरुषों में 3.4 प्रतिशत है। दिल्ली में महिलाओं की बेरोजगारी 8.4 प्रतिशत और पुरुषों की 4.7 प्रतिशत दर्ज की गई है। अमृतसर में रोजगार की तस्वीर कमजोर रिपोर्ट के अनुसार अमृतसर में रोजगार की स्थिति लुधियाना के मुकाबले कमजोर है। यहां श्रमिक जनसंख्या अनुपात 45.8 प्रतिशत है जबकि पुरुषों में यह 69 प्रतिशत और महिलाओं में केवल 21.2 प्रतिशत है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण सरकार रोजगार बढ़ाने के प्रयास कर रही है, लेकिन अपेक्षित परिणाम अभी नहीं मिल पाए हैं। महिलाओं की श्रम भागीदारी यहां भी काफी कम बनी हुई है।  बेरोजगारी दर 8.7%, महिलाओं पर ज्यादा असर अमृतसर की कुल बेरोजगारी दर 8.7 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो लुधियाना से काफी अधिक है। पुरुषों में यह 7.6 प्रतिशत और महिलाओं में 12.3 प्रतिशत है। शहर में स्वरोजगार का प्रतिशत 43.9 है। स्वरोजगार में 49.2 प्रतिशत पुरुष और 25.9 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। वहीं आकस्मिक श्रमिकों की हिस्सेदारी 11.3 प्रतिशत है। रिपोर्ट बताती है कि महिलाओं की रोजगार भागीदारी बढ़ी है, लेकिन यह अब भी संतोषजनक स्तर से काफी नीचे है।

POCSO Case: जबलपुर हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट का फैसला पलटा, उम्र पर सवाल उठाते हुए 20 साल की सजा रद्द

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पॉक्सो कानून और पीड़िता की उम्र निर्धारण को लेकर एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि अभियोजन पक्ष पीड़िता की जन्मतिथि को संतोषजनक और पुख्ता ढंग से साबित नहीं कर पाता है, तो केवल 'पॉजिटिव डीएनए रिपोर्ट' के आधार पर आरोपी को दोषी मानकर सजा नहीं दी जा सकती। कोर्ट का सवाल, 9 साल में कैसे पास कर ली 10वीं कक्षा? हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्कूल रिकॉर्ड और मार्कशीट में दर्ज पीड़िता की उम्र पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने तार्किक विसंगति को रेखांकित करते हुए कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार पीड़िता ने जुलाई 2014 में एलकेजी में दाखिला लिया था। ऐसे में कोई भी बच्ची महज 9 साल के भीतर (2023 के आसपास) कक्षा 10वीं कैसे उत्तीर्ण कर सकती है? युगलपीठ ने इस विसंगति के चलते 10वीं की मार्कशीट में दर्ज जन्मतिथि जो 27 फरवरी 2007 थी को सही मानने से इनकार कर दिया। क्या है पूरा मामला? दरअसल, सिंगरौली के रहने वाले मुन्ना राम को जिला अदालत ने पीड़िता को नाबालिग मानते हुए पॉक्सो एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं के तहत अधिकतम 20 साल की जेल की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।     जन्मतिथि साबित न हो तो केवल डीएनए रिपोर्ट से दोषी नहीं ठहराया जा सकता।     जबलपुर हाईकोर्ट ने POCSO मामले में 20 साल की सजा रद्द की।     दसवीं की मार्कशीट में दर्ज जन्मतिथि पर कोर्ट ने जताया संदेह।     मेडिकल रिपोर्ट में जबरन संबंध के स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिले।     अभियोजन उम्र साबित नहीं कर पाया, आरोपी को दोषमुक्त किया। पीड़िता के परिजन के बयानों में विरोधाभास अपील पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पीड़िता के माता-पिता के बयानों में उनकी शादी के साल और पीड़िता के जन्म को लेकर गहरा विरोधाभास था। पिता के अनुसार उनकी शादी 19 साल पहले हुई थी और उसके 1 साल बाद पीड़िता का जन्म हुआ, जबकि मां के अनुसार शादी 20 साल पहले हुई थी और जन्म 2 साल बाद हुआ था। आपसी सहमति से संबंध और मेडिकल रिपोर्ट बनी आधार हाईकोर्ट ने अपने आदेश में नोट किया कि पीड़िता ने खुद अपने बयानों में स्वीकार किया था कि वह अपनी मर्जी से अपीलकर्ता के साथ बनारस गई थी, जहां दोनों ने शादी की और पति-पत्नी की तरह रहने लगे। इसके अलावा, मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर पर कोई बाहरी या अंदरूनी चोट के निशान नहीं मिले। प्राइवेसी के उल्लंघन को लेकर भी डॉक्टरों की कोई निश्चित राय नहीं थी। हाईकोर्ट का अंतिम आदेश युगलपीठ ने कहा कि, चूंकि अभियोजन पक्ष पीड़िता की जन्मतिथि को संदेह से परे साबित नहीं कर सका, इसलिए पीड़िता को घटना के समय बालिग माना जाएगा। चूंकि संबंध आपसी सहमति से बने थे, इसलिए केवल डीएनए रिपोर्ट पॉजिटिव आने से आरोपी अपराधी सिद्ध नहीं होता। हाईकोर्ट ने जिला न्यायालय के आदेश को पूरी तरह निरस्त करते हुए अपीलकर्ता मुन्ना राम को तत्काल दोषमुक्त करने के आदेश जारी किए हैं।  

मध्य प्रदेश में मानसून का कहर, शुक्रवार-शनिवार को भारी बारिश का रेड अलर्ट; जानें प्रभावित जिले

भोपाल  कुछ दिनों की देरी से आने के बाद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून गुरुवार को मध्य प्रदेश में और भी आगे बढ़ गया और इसके असर से प्रदेश के कई हिस्सों में जोरदार बारिश हो रही है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो से तीन दिन राज्य के अन्य हिस्सों में भी मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां बेहद अनुकूल हैं। ऐसे में IMD ने प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में जबरदस्त बारिश होने की संभावना जताई है। विभाग ने गुरुवार को प्रदेश के छह जिलों शाजापुर, राजगढ़, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए इन जिलों में बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी । इस दौरान इन जिलों में 40-50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवा भी चलने की संभावना है। इन जिलों में भारी वर्षा की संभावना इसके अलावा विभाग ने रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, खरगोन, बड़वानी, धार, रतलाम, देवास, मंदसौर, डिंडोरी, जबलपुर, नरसिंहपुर और मंडला जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए इन जिलों में 40 से 50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवा चलने के साथ ही गरज-चमक के साथ भारी वर्षा होने की संभावना जताई है। जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में झंझावत और बिजली गिरने के साथ ही 40 से 50 की स्पीड से हवा चलने का अनुमान लगाया है। 3 जुलाई (शुक्रवार) के लिए मौसम विभाग ने प्रदेश के हरदा और खंडवा जिलों के लिए भारी से भी भारी बारिश (204.5 MM से ज्यादा) का रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं धार, बड़वानी, खरगोन, देवास, बुरहानपुर और बैतूल जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान इन पांचों जिलों में बहुत भारी बारिश (115.6 MM से 204.4 MM) होने की संभावना जताई है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए यहां बिजली गिरने का अनुमान लगाया है। इसके साथ ही विभाग ने पूरे प्रदेश में 40 से 50 की स्पीड से हवा चलने का अनुमान लगाया है। 4 जुलाई (शनिवार) के लिए मौसम विभाग ने तीन जिलों धार, बड़वानी और खरगोन के लिए रेड अलर्ट जारी करते हुए यहां भारी से बहुत भारी वर्षा (204.5 MM से ज्यादा) का अनुमान लगाया है, वहीं झाबुआ, अलीराजपुर और बुरहानपुर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए भारी बारिश (115.6 MM से 204.4 MM) की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों के लिए विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है और इस दौरान रतलाम, उज्जैन, इंदौर, देवास, खंडवा, सीहोर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। साथ ही पूरे प्रदेश में 40 से 50 की गति से तेज हवा चलने का अनुमान लगाया है। बीते दिन केवलारी में हुई 166 मिमी बारिश बीते दिन के मौसम की बात करें तो प्रदेश में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 37.6 डिग्री सेल्सियस रतलाम में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 20.2 डिग्री सेल्सियस पचमढ़ी में रिकॉर्ड किया गया। इस दौरान सबसे ज्यादा बारिश सिवनी जिले के केवलारी 166 मिली मीटर और चांद 140 मिमी दर्ज की गई। वहीं मुलताई में 112.0, सिंगरौली में 104.0, जैसीनगर में 102.1, उज्जैन में 101.0, बिछुआ में 100.0, नैनपुर में 96.6, पीथमपुर में 87.0, बेनीबारी में 83.6, पांढुर्णा में 78.3, सांवेर में 72.5, चौराई में 68.0, मंडला में 65.8, बदनावर में 65.1, कसरावद में 65 मिली मीटर वर्षा दर्ज की गई। मौसम की विशेष परिस्थितियां दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 2 जुलाई को गुजरात के कुछ और भागों, उत्तर प्रदेश के शेष भागों, संपूर्ण दिल्ली तथा मध्य प्रदेश, हरियाणा एवं पंजाब के अधिकांश भागों तथा राजस्थान के कुछ भागों में आगे बढ़ गया है। फिलहाल मॉनसून की उत्तरी सीमा पोरबंदर, वल्लभ विद्यानगर, नीमच, टोंक, भिवानी और भटिंडा से होकर गुजर रही है।

प्रदेश के चयन ट्रायल्स में उमड़ा खिलाड़ियों का उत्साह, हजारों प्रतिभाओं ने दिखाई अपनी खेल क्षमता

भोपाल खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा प्रदेश की उभरती खेल प्रतिभाओं की पहचान एवं उन्हें राज्य खेल अकादमियों में प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से "टैलेंट सर्च 2026-27" का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में चयन ट्रायल्स आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में खिलाड़ी उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस महाअभियान के माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को राज्य खेल अकादमियों में प्रशिक्षण प्राप्त करने का सुनहरा अवसर मिल रहा है। विभिन्न खेलों के ट्रायल्स में दिखा खिलाड़ियों का उत्साह अब तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में शूटिंग, पुरुष एवं महिला हॉकी, स्लालम, बैडमिंटन, घुड़सवारी, तीरंदाजी, जूडो, रोइंग, कुश्ती एवं फेंसिंग सहित अनेक खेलों के चयन ट्रायल्स सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं। प्रत्येक चयन स्थल पर बड़ी संख्या में बालक एवं बालिका खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी तकनीकी दक्षता, फिटनेस एवं खेल कौशल का प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों के साथ अभिभावकों एवं प्रशिक्षकों की सक्रिय भागीदारी ने भी इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन प्रदान किया। विशेषज्ञों की निगरानी में हुई चयन प्रक्रिया चयन प्रक्रिया विभाग द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप अनुभवी प्रशिक्षकों एवं विशेषज्ञ चयनकर्ताओं की निगरानी में संपन्न की जा रही है। खिलाड़ियों का परीक्षण शारीरिक दक्षता, तकनीकी कौशल तथा खेल विशेष की आवश्यकताओं के आधार पर किया जा रहा है, जिससे योग्य प्रतिभाओं का चयन कर उन्हें राज्य खेल अकादमियों में प्रशिक्षण का अवसर उपलब्ध कराया जा सके। आगामी दिनों में इन खेलों के होंगे चयन ट्रायल्स टैलेंट सर्च अभियान के अंतर्गत आगामी दिनों में भी प्रदेश के विभिन्न केंद्रों पर एथलेटिक्स, ट्रायथलॉन, बॉक्सिंग, क्याकिंग एवं केनोइंग, बैडमिंटन, पुरुष एवं महिला हॉकी, तीरंदाजी एवं ताइक्वांडो सहित विभिन्न खेलों के चयन ट्रायल्स निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही विभिन्न जिलों एवं संभागीय केंद्रों पर खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रहा है प्रतिभा चयन अभियान भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, सतना, रीवा, गुना, शिवपुरी, दतिया, सागर, नर्मदापुरम, बैतूल, कटनी, मंदसौर, उज्जैन, सिवनी, बड़वानी, मंडला, झाबुआ, अलीराजपुर, धार सहित प्रदेश के अनेक जिलों में चयन ट्रायल्स का आयोजन किया जा रहा है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को भी राज्य स्तरीय खेल अकादमियों तक पहुंचने का समान अवसर प्राप्त हो रहा है। खिलाड़ियों से अधिकाधिक भागीदारी की अपील खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने प्रदेश के खिलाड़ियों, अभिभावकों, विद्यालयों एवं खेल संस्थाओं से अपील की है कि जिन खेलों के चयन ट्रायल्स आगामी दिनों में आयोजित होने हैं, उनमें अधिक से अधिक खिलाड़ी निर्धारित तिथि एवं पात्रता के अनुसार भाग लें। टैलेंट सर्च 2026-27 केवल चयन प्रक्रिया नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की नई खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।  

देवास के डायल-112 हीरोज घर की राह भटके 03 वर्षीय मासूम को सुरक्षित परिजनों से मिलाया

भोपाल  देवास जिले के थाना औद्योगिक क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं तत्पर कार्यवाही से घर से निकलकर रास्ता भटक गए 03 वर्षीय बालक को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया गया। समय पर की गई सहायता से मासूम सकुशल अपने परिवार तक पहुँच सका। 01 जुलाई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना औद्योगिक क्षेत्र अंतर्गत अमृत स्वीट्स के पास एक 03 वर्षीय बालक मिला है, जो घर का रास्ता भटक गया है तथा अपने परिजनों के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे पा रहा है। सूचना प्राप्त होते ही थाना औद्योगिक क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षकश्री सचिन चौहान एवं पायलट श्री देवेंद्र भारती ने मौके पर पहुंचकर बालक को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। इसके उपरांत डायल-112 टीम ने बालक को एफआरव्ही वाहन में साथ लेकर आसपास के क्षेत्रों में उसके परिजनों की तलाश एवं पूछताछ की, किन्तु कोई जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी। इसके बाद बालक को सुरक्षित थाने लाया गया। कुछ समय पश्चात बालक के माता-पिता उसकी तलाश करते हुए थाना पहुँचे। आवश्यक पहचान एवं सत्यापन उपरांत बालक को सुरक्षित उनके सुपुर्द किया गया। अपने बच्चे को सकुशल पाकर परिजनों ने डायल-112 सेवा एवं पुलिस जवानों के प्रति आभार व्यक्त किया। डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता ही नहीं, बल्कि बच्चों एवं आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य भी निरंतर कर रही है।  

प्रदेश के सभी जिलों में जन सम्मेलन-सह-लॉन्च कार्यक्रम आयोजित, हजारों नागरिकों ने की सहभागिता

भोपाल  ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका सृजन एवं टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण को नई गति प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM-G] का आज प्रदेशभर में उत्साहपूर्ण शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के सभी जिलों में जिला प्रशासन द्वारा जन सम्मेलन-सह-लॉन्च कार्यक्रम आयोजित किए गए। केन्द्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, श्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश के तिरुपति के ओबुलवारिपल्ले मंडल स्थित मुक्कावरिपल्ली ग्राम में विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM-G] का राष्‍ट्रीय स्‍तर परभव्‍य शुभारंभ किया। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि विकसित भारत – जी राम जी के तहत सबसे अधिक पिछड़ी पंचायतों में भी रोजगार और बुनियादी ढाँचे के लिये अधिक निधि, अधिक सहायता और अधिक अवसर मिलेंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने संस्कारधानी जबलपुर में विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM-G) का राज्य स्‍तर पर जन सम्मेलन-सह-लॉन्च किया। कार्यकम के दौरान उन्‍होंने योजना के विभिन्न आयामों और जन-कल्याणकारी नीतियों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की। उन्‍होंने कहा की तकनीक और पारदर्शिता का यह अद्भुत समागम सुशासन को सुदृढ़ करने के साथ-साथ हम सभी को राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में पूरी निष्ठा के साथ जुटने की प्रेरणा देता है, केंद्र व राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और आत्मनिर्भरता के नए अवसर सृजित कर विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए निरंतर कार्यरत है। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्रीमति सुमित्रा बाल्मीकि सहित स्थानीय प्रतिनिधि और संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में प्रभारी मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने सहभागिता करते हुए मिशन के उद्देश्यों एवं प्रावधानों की जानकारी दी। राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी कराया गया, जिससे उपस्थित नागरिकों ने मिशन के उद्देश्य एवं प्रमुख प्रावधानों की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रमों में पंचायत पदाधिकारी, स्व-सहायता समूहों की सदस्याएँ, श्रमिक, हितग्राही, युवा तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिकों ने सहभागिता की। इस अवसर पर विभिन्न जिलों में नवीन विकास कार्यों का शुभारंभ, IEC प्रदर्शनी, पोस्टर एवं बैनर प्रदर्शन, सफलता की कहानियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। कार्यक्रमों में उपस्थित नागरिकों को मिशन के प्रमुख प्रावधानों, विशेष रूप से 125 दिवस रोजगार गारंटी, डिजिटल कार्यप्रणाली, पारदर्शी भुगतान व्यवस्था, प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी तथा विकेन्द्रीकृत ग्राम स्तरीय योजना निर्माण के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रदेश में आयोजित इन कार्यक्रमों ने ग्रामीण विकास के क्षेत्र में जनसहभागिता आधारित विकास मॉडल को नई दिशा प्रदान की है। राज्य शासन का उद्देश्य है कि मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को अधिक रोजगार, बेहतर आजीविका के अवसर तथा टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों का लाभ सुनिश्चित किया जाए।  

युवाओं को कौशल से जोड़ने के लिए योगी सरकार की बड़ी पहल

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के युवाओं को रोजगारपरक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कुशल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य कौशल विकास निधि (एसएसडीएफ) योजना के अंतर्गत अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण के दूसरे चरण का लक्ष्य आवंटन जारी कर दिया गया है।  प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्किल इंडिया’ विजन को साकार करते हुए उत्तर प्रदेश आज कौशल विकास के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप युवाओं को टेक-सेवी बनाने के लिए हर बैच में 4 घंटे का 'एआई फॉर ऑल' और सॉफ्ट स्किल मॉड्यूल पढ़ाना अनिवार्य किया गया है। कोर्सेज की अधिकतम अवधि 900 घंटे तय की गई है और आवासीय सेंटर्स पर रोज कम से कम 8 घंटे की क्लास अनिवार्य होगी। पारदर्शिता के लिए पूरे सेंटर पर निर्धारित मानकों के अनुसार सीसीटीवी लगाना अनिवार्य किया गया है, जिससे मुख्यालय से सीधी निगरानी हो सके। साथ ही, युवाओं का सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए हर सेंटर पर रोज एक हिंदी और एक अंग्रेजी अखबार रखना होगा। नए सेंटर्स का उद्घाटन स्थानीय विधायक से कराना अनिवार्य होगा। संस्थाएं केवल एनसीवीईटी/एनक्यूआर पोर्टल पर लिस्टेड जॉब रोल ही चुन सकेंगी और डीपीएमयू द्वारा गहन जांच के बाद ही बैच को मंजूरी दी जाएगी।  योगी सरकार ने कौशल प्रशिक्षण को पूरी तरह पारदर्शी और परिणाममूलक बनाने के लिए इस बार लक्ष्य आवंटन की प्रक्रिया में ‘कौशल दर्पण’ एआई डैशबोर्ड का उपयोग किया है। जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (डीपीएमयू) से प्राप्त केंद्र कैपेसिटी सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर ही सभी 936 प्रदाताओं को लक्ष्य दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी प्रदाताओं को मिशन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार आवंटित टारगेट पूरा करना और सभी बैचों का अप्रूवल लेना अनिवार्य होगा। आधुनिक उद्योगों की मांग को देखते हुए हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, आईटी-आईटीईएस, फूड प्रोसेसिंग, अपैरल और हैंडीक्राफ्ट्स जैसे न्यू-एज सेक्टर्स को विशेष प्राथमिकता दी गई है। न्यू-एज प्रशिक्षण प्रदाता अनिवार्य रूप से केवल फ्यूचरिस्टिक जॉब रोल में ही प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेंगे। मंत्री ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य मिलने का मतलब काम शुरू करना नहीं है। जब तक ट्रेनिंग प्रदाता मिशन के साथ लिखित एग्रीमेंट नहीं कर लेते और उसकी पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक डीपीएमयू बैच बनाने की अनुमति नहीं देगी। मिशन के पास बजट या जरूरत के हिसाब से टारगेट घटाने-बढ़ाने का अधिकार सुरक्षित है। यदि किसी संस्था ने समय पर क्लास शुरू नहीं की या ग्राउंड से कोई शिकायत मिली, तो योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बिना देर किए उनके खिलाफ सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।  मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि कुल 936 प्रशिक्षण प्रदाताओं को 1 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें 831 निजी, राजकीय व स्टार्ट-अप प्रशिक्षण प्रदाताओं को 91,425 युवाओं तथा 105 औद्योगिक/न्यू-एज प्रशिक्षण प्रदाताओं को 14,650 युवाओं का प्रशिक्षण लक्ष्य दिया गया है। इससे पहले अप्रैल में पहले चरण में 957 ट्रेनिंग प्रोवाइडर्स को 99 हजार से अधिक युवाओं के प्रशिक्षण का लक्ष्य आवंटित किया गया था, जिनका प्रशिक्षण वर्तमान में सुचारू रूप से संचालित हो रहा है। एसएसडीएफ योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को स्थानीय आवश्यकताओं और उद्योगों की मांग के अनुसार रोजगारपरक प्रशिक्षण देना है। ‘कौशल दर्पण’ डैशबोर्ड का उपयोग और एआई फॉर ऑल जैसे न्यू-एज व फ्यूचरिस्टिक मॉड्यूल्स को अनिवार्य करके हम उत्तर प्रदेश के युवाओं को भविष्य के वैश्विक बाजारों के लिए तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चयनित संस्थाओं को हर हाल में 01 अगस्त, 2026 से कक्षाएं शुरू करनी होंगी। इसके लिए 17-चरणों का कड़ा टाइम-टेबल जारी किया गया है, जिसमें सेंटर सिलेक्शन, सत्यापन, जागरूकता कैंप, बैच अप्रूवल से लेकर प्लेसमेंट तक की समय-सीमा तय है। कोर्स पूरा होने के बाद केवल 70% या अधिक उपस्थिति वाले छात्रों को ही रोजगार मेले में बैठने का मौका मिलेगा और रिजल्ट के 90 दिनों के भीतर प्लेसमेंट कराना होगा। नौकरी मिलने के बाद भी 365 दिनों तक ट्रैकिंग की जाएगी।

चिकित्सा में आधुनिक तकनीक के साथ मानवीय संवेदनाएं भी जरूरी है – राज्यपाल डेका

रायपुर चिकित्सा में आधुनिक तकनीक के साथ मानवीय संवेदनाएं भी जरूरी है राज्यपाल  रमेन डेका ने डॉक्टर्स डे के अवसर पर आज विमतारा भवन में सिक्ख समाज छत्तीसगढ़ एवं जेसीआई रायपुर मेडिको सिटी द्वारा आयोजित अलग-अलग कार्यक्रमों में चिकित्सकों का सम्मान किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में अत्याधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का महत्व बढ़ा है, लेकिन रोगी के प्रति मानवीय संवेदनाएं, आत्मीय व्यवहार और नैतिक मूल्यों के साथ की गई चिकित्सा ही समाज का विश्वास मजबूत करती है। चिकित्सा में आधुनिक तकनीक के साथ मानवीय संवेदनाएं भी जरूरी है राज्यपाल ने कहा कि डॉक्टर का मधुर व्यवहार कई दवाइयों से भी अधिक प्रभावी होता है। मरीज के लिए चिकित्सक भगवान के समान होता है और उसे वास्तविक संतोष तभी मिलता है, जब डॉक्टर स्वयं उसका शारीरिक परीक्षण कर उसकी स्थिति को समझे। उन्होंने कहा कि आधुनिक जांच तकनीकों का अपना महत्व है, लेकिन मरीज का मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से उपचार भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि देश में विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन फैमिली डॉक्टर अथवा पड़ोस के डॉक्टर की परंपरा धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। इस परंपरा को बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि ऐसे चिकित्सक परिवारों के स्वास्थ्य और विश्वास का महत्वपूर्ण आधार होते हैं। राज्यपाल ने कहा कि 140 करोड़ की आबादी वाले हमारे देश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चिकित्सक इस दिशा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाकर अनेक रोगों की रोकथाम की जा सकती है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए कहा कि चिकित्सकों को इस दिशा में विशेष ध्यान देना होगा। मोबाइल और इंटरनेट की बढ़ती लत पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इनका उपयोग केवल आवश्यकता के अनुसार होना चाहिए। एआई अनेक क्षेत्रों में उपयोगी है, लेकिन मानव मस्तिष्क की संवेदनशीलता, विवेक और निर्णय क्षमता का कोई विकल्प नहीं हो सकता। राज्यपाल ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को सोचनीय बताते हुए कहा कि नशे की लत से ग्रस्त लोगों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करते हुए उनका उपचार और पुनर्वास सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने सिक्ख समाज द्वारा किए जा रहे सामाजिक एवं सेवा कार्यों की सराहना भी की। राज्यपाल ने सिक्ख समाज के कार्यक्रम में समाज के चिकित्सकों तथा जेसीआई रायपुर मेडिको सिटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सा के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चिकित्सकों को सम्मानित किया। इस अवसर पर विधायक  पुरंदर मिश्रा, जेसीआई रायपुर मेडिको सिटी के अध्यक्ष डॉ. निखिल मोती रामानी, सचिव डॉ. अविनाश तिवारी, सिक्ख समाज के अध्यक्ष  महेंद्र सिंह छाबड़ा, एम्स रायपुर के निदेशक डॉ. अशोक जिंदल, रिम्स के निदेशक डॉ. कृष्ण कुमार वाधवा, वरिष्ठ चिकित्सक, सिक्ख समाज के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।