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महानदी विवाद पर हाईलेवल मीटिंग, अमित शाह के साथ साय और माझी

रायपुर. महानदी जल विवाद के समाधान को लेकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच बातचीत अब महत्वपूर्ण दौर में पहुंच गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में 1 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की उच्चस्तरीय बैठक होने की संभावना है। इसकी जानकारी ओडिशा के महाधिवक्ता पितांबर आचार्य ने दी है। इसी बीच विधानसभा का मौजूदा सत्र समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के रायपुर आने और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात करने की भी संभावना है। मुख्यमंत्री साय ने CM माझी से की थी मुलाकात बता दें कि इससे पहले 20 सितंबर को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भुवनेश्वर में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से उनके निवास पर शिष्टाचार भेंट की थी। इस दौरान दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच छत्तीसगढ़ और ओडिशा के आपसी सहयोग, विकास, जनकल्याण सहित दोनों राज्यों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सौहार्दपूर्ण और सार्थक चर्चा हुई थी। सीएम साय ने महानदी जल विवाद के संबंध में कहा कि लंबे समय से चले आ रहे इस विषय के समाधान की दिशा में अब सकारात्मक वातावरण बना है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा, दोनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार है। केंद्र सरकार के सहयोग और दोनों राज्यों की सकारात्मक पहल से इस विषय का बहुत जल्द समाधान निकलने की उम्मीद है।

निवेशकों ने मत्स्य पालन, फीड मिल, कोल्ड चेन, हैचरी, बीज उत्पादन तथा वैल्यू एडिशन व निर्यात के क्षेत्र में दिखाई रुचि

नोएडा उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (आईटीएस-2026) में मत्स्य विभाग को 600.20 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इन प्रस्तावों में कोल्ड चेन क्षेत्र में सर्वाधिक 509.20 करोड़, फीड मिल क्षेत्र में 51 करोड़, मत्स्य पालन क्षेत्र में 13.80 करोड़, हैचरी एवं बीज उत्पादन क्षेत्र में 6.20 करोड़ तथा वैल्यू एडिशन एवं निर्यात के क्षेत्र में 20 करोड़ के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं। फिश व्हाइट, बीवीजी इंडिया समेत कई निवेशकों ने दिखाई रुचि इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में फिश व्हाइट, बीवीजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु तथा पीवीआर एक्वा, व्हाइट फिश वाराणसी सहित विभिन्न प्रमुख निवेशकों एवं उद्यमियों द्वारा निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। निवेशकों ने उत्तर प्रदेश में मत्स्य उत्पादन, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज की उपलब्धता, आधुनिक हैचरी, फीड उत्पादन, शीत श्रृंखला तथा मूल्य संवर्धित मत्स्य उत्पादों के क्षेत्र में कार्य करने में रुचि व्यक्त की। मत्स्य क्षेत्र में निवेश के लिए उपलब्ध हैं अनेक अवसर मत्स्य विभाग की महानिदेशक धनलक्ष्मी के. ने बताया कि विभाग द्वारा निवेशकों को प्रदेश में मत्स्य क्षेत्र के विकास के लिए उपलब्ध निवेश अवसरों, विभागीय योजनाओं तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराई गई। विभाग का उद्देश्य निजी निवेश के माध्यम से मत्स्य उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करना, आधुनिक मत्स्य अवसंरचना का विकास करना तथा मत्स्य उत्पादों के मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण एवं विपणन को प्रोत्साहित करना है। उद्यमियों के लिए सशक्त मंच बना यूपीआईटीएस उन्होंने बताया कि ट्रेड शो में मत्स्य विभाग की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी/ स्टॉल निवेशकों, उद्यमियों, विद्यार्थियों एवं मत्स्य पालकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदेश में मत्स्य पालन तथा इससे जुड़े सहायक क्षेत्रों में उपलब्ध निवेश संभावनाओं, आधुनिक तकनीकों, उत्पादन, प्रसंस्करण, शीत श्रृंखला, हैचरी एवं गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन तथा मूल्य संवर्धन के अवसरों की जानकारी प्रदान की गई। निवेश की संभावनाओं पर हुई विस्तृत चर्चा ट्रेड शो के दौरान विभिन्न निवेशकों एवं उद्यमियों ने मत्स्य विभाग के अधिकारियों से संवाद कर प्रदेश में मत्स्य क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान निवेशकों द्वारा प्रस्तावित परियोजनाओं, संभावित निवेश, तकनीकी आवश्यकताओं तथा परियोजनाओं के संभावित क्षेत्रों के संबंध में जानकारी साझा की गई। इन चर्चाओं के परिणामस्वरूप मत्स्य क्षेत्र के विभिन्न उप-क्षेत्रों में कुल 600.20 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

MP में बड़ा फैसला! 58 लाख बच्चों को ₹600, अग्निवीरों के लिए 20% कोटा

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं। प्रदेश सरकार ने स्कूली छात्रों, अग्निवीरों और राज्य के विकास कार्यों को लेकर बड़े निर्णय लिए हैं, जिनमें कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों को ड्रेस के स्थान पर नगद राशि देना और वर्दीधारी पदों पर अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण देना प्रमुख है। 58 लाख विद्यार्थियों के खातों में डीबीटी से आएंगे 600 रुपये कैबिनेट बैठक में स्कूली शिक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। अब प्रदेश में कक्षा एक से लेकर आठवीं तक के विद्यार्थियों को स्कूल ड्रेस (गणवेश) के स्थान पर 600 रुपये की नगद राशि दी जाएगी। यह राशि सीधे छात्रों या उनके अभिभावकों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से भेजी जाएगी। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के करीब 58 लाख विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। अग्निवीरों को वर्दीधारी पदों की भर्ती में 20% आरक्षण सेना में अपनी सेवाएं देने वाले अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से भी कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर मुहर लगाई है। राज्य में पुलिस, वन विभाग और अन्य वर्दीधारी पदों पर होने वाली सरकारी भर्तियों में अब अग्निवीरों को 20 प्रतिशत का सीधा आरक्षण दिया जाएगा। दमोह-कटनी मार्ग और छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज को मंजूरी बैठक में बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास पर भी चर्चा हुई। कैबिनेट ने कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए दमोह-कटनी मार्ग के निर्माण कार्य को अपनी मंजूरी प्रदान की है। इसके साथ ही, छिंदवाड़ा मेडिकल साइंस कॉलेज के निर्माण के लिए भी पुनरीक्षित स्वीकृति दी गई है, जिससे क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूती मिलेगी।

उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह

ग्रेटर नोएडा केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की पहचान अब पुराने ‘कट्टा उद्योग’ से नहीं, बल्कि ब्रह्मोस मिसाइल और फाइटर जेट जैसे आधुनिक रक्षा उत्पादन से हो रही है। प्रदेश में कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे, एक्सप्रेसवे, हवाई संपर्क और औद्योगिक विकास में हुए बदलावों ने उत्तर प्रदेश को नई आर्थिक पहचान दी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और उत्तर प्रदेश इस शक्ति का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की औद्योगिक क्षमता अब पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि रक्षा उत्पादन, आधुनिक विनिर्माण, निर्यात और तकनीक के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। कट्टा उद्योग से ब्रह्मोस और फाइटर जेट तक बदली पहचान गिरिराज सिंह ने उत्तर प्रदेश की बदलती औद्योगिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय प्रदेश को ‘कट्टा उद्योग’ के संदर्भ में देखा जाता था, लेकिन आज यहां ब्रह्मोस मिसाइल और फाइटर जेट जैसे आधुनिक रक्षा उत्पादों के निर्माण की चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव प्रदेश में विकसित हो रहे औद्योगिक एवं रक्षा क्षेत्र की क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि बेहतर कानून-व्यवस्था, सड़क एवं हवाई संपर्क और औद्योगिक ढांचे ने निवेश तथा कारोबार के लिए नए अवसर तैयार किए हैं। जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के बीच आवागमन और कारोबारी गतिविधियों को सुविधा मिल रही है। ओडीओपी ने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ा केंद्रीय मंत्री ने एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से जिलों के विशिष्ट उत्पादों, कारीगरों और उद्यमियों को बाजार से जोड़ने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि यूपीआईटीएस जैसे आयोजन स्थानीय उत्पादों को देश और दुनिया के खरीदारों तक पहुंचाने के लिए मंच उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बनारस की साड़ी, मुरादाबाद का पीतल, भदोही का कालीन, लखनऊ की चिकनकारी सहित प्रदेश के विभिन्न उत्पादों की अपनी विशिष्ट पहचान है। इन उत्पादों को आधुनिक तकनीक, बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और वैश्विक बाजार से जोड़ने की आवश्यकता है। यूपीआईटीएस ने कारोबार के लिए उपलब्ध कराया वैश्विक मंच गिरिराज सिंह ने यूपीआईटीएस में हुई बी2बी बैठकों और कारोबारी गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आयोजन ने उत्तर प्रदेश के उद्यमियों, निर्यातकों, कारीगरों, प्रदर्शकों और देश-विदेश के खरीदारों को एक मंच पर लाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है और निर्यात, विनिर्माण तथा एमएसएमई क्षेत्र की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर जोर केंद्रीय मंत्री ने भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और निर्यात में वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की वैश्विक आर्थिक भूमिका बढ़ रही है। उन्होंने ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एथनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा आयात पर होने वाले खर्च को कम करना आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए वैकल्पिक और स्वदेशी ऊर्जा स्रोतों का विस्तार आवश्यक है। वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका गिरिराज सिंह ने ब्रिक्स सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक संवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने युवाओं की क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा शक्ति देश के विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक मजबूती का प्रभाव देश की समग्र अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। प्रदेश में उद्योग, निर्यात, एमएसएमई और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार किया जा सकता है। यूपीआईटीएस की सफलता के लिए आयोजकों को दी बधाई केंद्रीय मंत्री ने यूपीआईटीएस-2026 के आयोजन से जुड़े अधिकारियों, विभिन्न विभागों, इंडिया एक्सपो मार्ट, उद्यमियों, कारीगरों, प्रदर्शकों और देश-विदेश से आए खरीदारों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि पांच दिवसीय आयोजन ने उत्तर प्रदेश के उत्पादों, उद्यमशीलता, हस्तशिल्प और औद्योगिक क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर दिया है। उन्होंने आयोजन की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए यूपीआईटीएस-2026 को सफल बनाने में योगदान देने वाली पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रदेश के एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, राज्य मंत्री एमएसएमई हंसराज विश्वकर्मा, प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल सुशील, सचिव प्रांजल यादव, कमिश्नर उद्योग के. विजयेंद्र पांडियन, विशेष सचिव एमएसएमई शिशिर और अपर कमिश्नर उद्योग रोहित आनंद मौजूद रहे।  

धालभूमगढ़ एयरपोर्ट का बढ़ा दायरा, 540 एकड़ में बनेगा नया एयरपोर्ट

 रांची कोल्हान की बहुप्रतीक्षित धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना को फिर से रफ्तार मिली है। झारखंड नागर विमानन विभाग ने परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), वन विभाग और केंद्र सरकार के साथ समन्वय तेज कर दिया है। राज्य स्तर पर भूमि, वन एवं पर्यावरण से जुड़े मामलों के निपटारे के साथ केंद्र से मिलने वाली स्वीकृतियों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में धालभूमगढ़ में करीब 540 एकड़ भूमि पर एयरपोर्ट विकसित करने का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र को भेजा गया है। पहले करीब 240 एकड़ क्षेत्र में एयरपोर्ट विकसित करने की योजना थी। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अब प्रस्तावित क्षेत्र को बढ़ाकर 540 एकड़ किया गया है। नागर विमानन विभाग की ओर से एएआई के साथ लगातार समन्वय कर परियोजना की तकनीकी और प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है। एएआई की टीम और रांची एटीसी के अधिकारियों ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण भी किया है। 19 बिंदुओं के जवाब भेजे, केंद्र की मंजूरी का इंतजार परियोजना में वन भूमि और हाथी गलियारे से जुड़े मुद्दे सबसे महत्वपूर्ण हैं। राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार के 19 बिंदुओं पर मांगी गई जानकारी का जवाब भेजा गया है। वन और गैर-वन भूमि का सीमांकन पूरा करने के साथ संबंधित एनओसी भी भेजी गई है। अब केंद्र स्तर से मिलने वाली आवश्यक स्वीकृतियों पर परियोजना की अगली गति निर्भर करेगी। नागर विमानन विभाग इस पूरी प्रक्रिया में राज्य का नोडल विभाग है। विभाग एएआई के साथ एयरपोर्ट की तकनीकी आवश्यकताओं, भूमि उपलब्धता, आधारभूत संरचना और विभिन्न विभागों से मिलने वाली मंजूरियों के बीच समन्वय कर रहा है। विभाग की कोशिश है कि अलग-अलग स्तर पर लंबित प्रक्रियाओं को एक साथ आगे बढ़ाया जाए। एलीफेंट कॉरिडोर का फिर होगा सर्वे धालभूमगढ़ क्षेत्र में एलीफेंट कॉरिडोर होने के कारण पर्यावरणीय पहलू भी महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार ने हाथियों के प्राकृतिक आवागमन को ध्यान में रखते हुए कॉरिडोर का नए सिरे से सर्वे कराने की दिशा में पहल की है। एयरपोर्ट निर्माण की योजना में वन एवं वन्यजीव संबंधी केंद्रीय मानकों का पालन करना होगा। साहिबगंज में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की तैयारी धालभूमगढ़ के साथ राज्य सरकार साहिबगंज में भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। नागर विमानन विभाग इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर रहा है। साहिबगंज में एयरपोर्ट बनने से संथाल परगना को हवाई संपर्क मिलने की संभावना बढ़ेगी। उड़ान योजना में कई शहर केंद्र की संशोधित उड़ान योजना में झारखंड के कई शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। धालभूमगढ़, दुमका, हजारीबाग, डालटनगंज और चाईबासा को लेकर विकास और कनेक्टिविटी की योजनाओं पर काम चल रहा है। इसके अलावा बोकारो, देवघर और जमशेदपुर को भी क्षेत्रीय हवाई संपर्क से जोड़ने की दिशा में अलग-अलग स्तर पर काम हुआ है। इनमें कुछ स्थानों पर एयरपोर्ट/हवाई पट्टी का विकास पूरा हो चुका है, जबकि कुछ जगहों पर भूमि, साइट और परिचालन से जुड़ी प्रक्रियाएं चल रही हैं। संशोधित उड़ान योजना के तहत केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक 28,840 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान किया है। इसके तहत देशभर में 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने की योजना है। धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना को लेकर राज्य सरकार की ओर से सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है। एएआई के साथ भी लगातार बातचीत हो रही है। भूमि, वन एवं पर्यावरण से जुड़े विषयों पर प्रक्रिया आगे बढ़ी है। केंद्र से आवश्यक स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना के अगले चरण पर काम किया जाएगा। कैप्टन एसपी सिन्हा, निदेशक (परिचालन), नागर विमानन विभाग, झारखंड

युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धाजंलि सभा में बोले गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ

गोरखपुर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1949 में अयोध्या स्थित श्री रामजन्मभूमि पर रामलला का प्रकटीकरण श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध हुआ। आज जब अयोध्या स्थित भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बन गया है तो रामद्रोहियों को अयोध्या का वैभव बर्दाश्त नहीं हो रहा है। सभी रामभक्तों, सनातन धर्मावलंबियों को आज के कालनेमियों से सावधान रहना होगा। हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, इसमें किसी को किसी प्रकार का भ्रम या संशय नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार (आश्विन कृष्ण तृतीया) को गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धाजंलि समारोह के अंतर्गत महंत दिग्विजयनाथ की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भव्य मंदिर, काशी में बाबा विश्वनाथ का भव्य धाम, विंध्याचल में मां विंध्यवासिनी धाम का वैभव, प्रयागराज के दिव्य कुंभ और वृंदावन के वैष्णव कुंभ को देखकर सनातन से चिढ़ने वाले दुष्प्रचार करेंगे, भ्रम पैदा करेंगे। सभी सनातनियों को इसके लिए सतर्क और जागरूक रहना होगा। ये रामद्रोही व सनातनद्रोही आज के दौर के कालनेमि हैं। रामायण कालखंड में जब रामभक्त हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने जा रहे थे तब कालनेमि ने छद्म रूप में उन्हें रोकने की कोशिश की थी। हनुमान जी ने उसे पहचान लिया था। वर्तमान दौर में भी रामभक्तों, सनातन धर्मावलंबियों को आज के कालनेमियों से सावधान रहना होगा। हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, इसमें किसी प्रकार का भ्रम या संशय नहीं होना चाहिए। अयोध्या व काशी में आई भव्यता सही दिशा में चलने का ही परिणाम है। वैष्णव कुंभ पर बांके बिहारी और राधारानी की कृपा सीएम योगी ने 2019 में प्रयागराज के भव्य एवं दिव्य कुंभ आयोजन के बाद वृंदावन में वैष्णव कुंभ के भव्य आयोजन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब यह आयोजन हुआ तो उस समय कोरोना का प्रकोप था। किंतु, बांके बिहारी लाल तथा राधारानी की कृपा से इस आयोजन में कोरोना बाल भी बांका नहीं कर पाया। आध्यात्मिक शक्ति ऐसी ही होती है। किसी पंथ-जाति में भेदभाव नहीं करती गोरक्षपीठ मुख्यमंत्री ने शैव परंपरा वाली गोरक्षपीठ को संपूर्ण सनातन के लिए समर्पित पीठ बताते हुए कहा कि यह किसी पंथ, संप्रदाय, व्यक्ति या जाति में कोई भेदभाव नहीं करती। किसी पंथ या संप्रदाय की विशिष्ट उपासना पद्धति हो सकती है, लेकिन सबका कल्याण वृहद सनातन धर्म में ही होता है। सनातन की किसी भी शाखा के व्यक्ति को गोरक्षपीठ में वही सम्मान मिलता है, जो उन्हें अपनी पावन परंपरा में मिलता होगा। अलग गति से चलना बनेगा दुर्गति का कारण सीएम योगी ने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम को साकार करने के लिए सभी पंथों, संप्रदायों को एक भाव से, एक स्वर में, एक गति से, एक साथ आगे बढ़ना होगा। यदि 140 करोड़ भारतवासियों में एक साथ चलने का सामर्थ्य हो जाए तो दुनिया की कोई भी ताकत हमारे सामने ठहर नहीं पाएगी। लेकिन, अलग स्वर से बोलना व अलग गति से चलना, दुर्गति का कारण बनेगा। दूरदर्शी होते हैं संतों-महापुरुषों के कार्य मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों व महापुरुषों को जानने और उनके बारे में पढ़ने से हमेशा नई प्रेरणा मिलती है। ये लोग केवल वर्तमान को नहीं जीते, बल्कि उनके कार्य दूरदर्शी होते हैं। उनके कार्य भविष्य की सुदृढ़ नींव के रूप में भावी जीवन को सुखद और उज्जवल बनाते हैं। सामान्य मनुष्य अपने लिए सोचता है, जबकि महापुरुष समूचे समाज और राष्ट्र कल्याण की भावना रखते हैं। लगभग 95 वर्ष पहले जब देश गुलाम था, साधन व संसाधनों का अभाव था, तब दिग्विजयनाथ जी ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। उन्होंने स्वदेश, स्वधर्म और स्वाभिमान के आदर्श महाराणा प्रताप के नाम पर शिक्षा के प्रकल्प का नामकरण किया। यूपी में पहला राज्य विश्वविद्यालय गोरखपुर में बना और शिक्षा परिषद के दो कॉलेज देकर दिग्विजयनाथ जी महाराज ने उसकी नींव को सुदृढ़ करने का काम किया। उन्हें श्रेय लेने की कोई चाह नहीं थी। तब उन्होंने कहा था कि गोरक्षपीठ हिंदू और लोक कल्याण की पीठ है। इसकी संपत्ति लोकोपयोगी कार्य के लिए ही है। महंत जी के कार्य आज भी अनुकरणीय शिक्षा क्षेत्र में महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज के योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश गुलाम था, तब उन्होंने बालिका महाविद्यालय की स्थापना कर दी थी। संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना की। उनका मानना था कि भारत को उसकी परंपरा और विरासत के अनुसार आगे बढ़ाना है। इस निमित्त उन्होंने पीठ के महंत और सासंद के रूप में जो प्रयास किए, वह आज भी अनुकरणीय हैं। एमपी शिक्षा परिषद की 50 से अधिक संस्थाएं आज उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ने का संकल्प ले रही हैं। सीएम ने संस्थाओं का आह्वान किया कि वे सफलता प्राप्ति के लिए संस्थापकों के आदर्शों को कार्यशैली का हिस्सा बनाएं।    असाधारण होते हैं संतों के कार्य: स्वामी राजेंद्रदास श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए रेवासाधाम वृंदावन से पधारे श्रीमद्जगद्गुरु द्वाराचार्य अग्रपीठाधीश्वर एवं मलूकपीठाधीश्वर स्वामी श्री राजेंद्रदास देवाचार्य जी महाराज ने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ जी महाराज और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्यस्मृति को नमन करते हुए उन्हें वास्तविक संत बताया। उन्होंने कहा कि संत असाधारण होते हैं और इसलिए उनके द्वारा किए गए सभी कार्य भी असाधारण होते हैं। परमात्मा की कृपा से यदि धरती पर संत, सद्गुरु, ऋषि, महात्मा प्रकट नहीं होते तो मनुष्यता का बोध भी नहीं होता। गोरक्षपीठ अत्यंत पूज्य स्थान है क्योंकि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी के पावन श्रीचरणों के स्पर्श का लाभ इस भूमि को मिला है। यह भूमि महान मनीषियों के चरण रज से अलंकृत है। नाथपंथ की परंपरा के महान वाहक थे दिग्विजयनाथ जी: बालकनाथ इस अवसर पर मस्तनाथ पीठ अस्थल बोहर के महंत और राजस्थान विधानसभा के सदस्य बालकनाथ जी महाराज ने कहा कि नाथ परंपरा ने सदैव लोक कल्याण की भावना से समाज को एकजुट रखने का कार्य किया। महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज इसी परंपरा के महान वाहक थे। वास्तविक संत वही है जो शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अनेक जनकल्याणकारी संस्थाओं के माध्यम … Read more

बिहार की 4 और यूपी की 6 MLC सीटों पर BJP ने उतारे प्रत्याशी

नई दिल्ली बीजेपी ने 2026 में होने वाले विधान परिषद चुनाव के लिए बिहार और उत्तर प्रदेश की ग्रेजुएट और शिक्षक सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है. पार्टी ने बिहार की 4 और उत्तर प्रदेश की 6 सीटों के लिए प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की है. इस लिस्ट में वाराणसी स्नातक सीट से केदार नाथ सिंह और पटना शिक्षक सीट से नवल किशोर यादव को टिकट दिया गया है. दरअसल, बिहार की चार और उत्तर प्रदेश की छह सीटों पर विधान परिषद यानी एमएलसी चुनाव होने हैं. बिहार की चार सीटों में पटना शिक्षक सीट से नवल किशोर यादव को उम्मीदवार बनाया गया है. वहीं कोसी स्नातक सीट से डॉ. एनके यादव, दरभंगा स्नातक सीट से सर्वेश कुमार और तिरहुत शिक्षक सीट से नरेंद्र प्रसाद सिंह को टिकट दिया गया है. बिहार की चार सीटों पर उम्मीदवार पटना शिक्षक सीट से नवल किशोर यादव, कोसी स्नातक से डॉ. एनके यादव, दरभंगा स्नातक से सर्वेश कुमार और तिरहुत शिक्षक सीट से नरेंद्र प्रसाद सिंह बीजेपी के उम्मीदवार होंगे. उत्तर प्रदेश की छह सीटों पर प्रत्याशी उत्तर प्रदेश की छह सीटों में वाराणसी स्नातक से केदार नाथ सिंह, मेरठ स्नातक से दिनेश गोयल, इलाहाबाद-झांसी स्नातक से अशोक कुमार राठौर को उम्मीदवार बनाया गया है. वहीं वाराणसी शिक्षक सीट से डॉ. प्रमोद मिश्रा, आगरा शिक्षक सीट से इंजीनियर हरि किशोर तिवारी और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से ध्रुव त्रिपाठी को टिकट दिया गया है. बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 पटना शिक्षक – नवल किशोर यादव कोसी स्नातक – डॉ. एन.के. यादव दरभंगा स्नातक – सर्वेश कुमार तिरहुत शिक्षक – नरेंद्र प्रसाद सिंह उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026 वाराणसी स्नातक – केदार नाथ सिंह मेरठ स्नातक – दिनेश गोयल इलाहाबाद-झांसी स्नातक – अशोक कुमार राठौर वाराणसी शिक्षक – डॉ. प्रमोद मिश्रा आगरा शिक्षक – इंजीनियर हरि किशोर तिवारी गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक – ध्रुव त्रिपाठी

योगी सरकार के प्रयास से गन्ने की खेती में बढ़ेगी ‘मिठास’, 100 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज देंगी चार नई किस्में

ग्रेटर नोएडा  इंटरनेशनल ट्रेड शो में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के स्टॉल पर गन्ने की नवीन उन्नत चार किस्मों का प्रदर्शन किया गया है। उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद (UPCSR) द्वारा विकसित इन किस्मों का उद्देश्य प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता और चीनी परता बढ़ाने के साथ किसानों की आय में वृद्धि करना तथा लाल सड़न रोग के प्रभाव को कम करना है। अब योगी सरकार के प्रयास से गन्ने की खेती में ‘मिठास’ बढ़ेगी। ट्रेड शो में को.शा. 19231, को.शा. 18231, को.शा. 13235 और को.शा. 17231 किस्मों को प्रदर्शित किया गया है। इन किस्मों की उपज क्षमता लगभग 90 से 100 टन प्रति हेक्टेयर है। इन उन्नत किस्मों में गन्ने के प्रमुख रोग लाल सड़न (रेड रॉट) के प्रति रोगरोधी या प्रतिरोधी प्रवृत्ति भी पाई जाती है। इसके साथ ही इनमें अंकुरण और शुरुआती बढ़वार अच्छी होती है। मिल में पेराई योग्य गन्नों की संख्या भी अधिक होने से गन्ने की उत्पादकता और चीनी उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है। इन किस्मों की एक अन्य खासियत अच्छी पेड़ी क्षमता है। पेड़ी फसल का बेहतर उत्पादन होने से किसानों को अगली फसल तैयार करने में लागत कम करने के साथ अच्छा उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। नवीन उन्नत किस्मों के इस्तेमाल से किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ गन्ने की खेती को अधिक लाभकारी बनाने में सहायता मिल सकती है।

अब WhatsApp पर आएगा ई-चालान, QR कोड से घर बैठे भर सकेंगे जुर्माना

शामली ई-चालान एप्लीकेशन के नए वर्जन नेक्स्ट जेन 2.0 में हेलमेट नहीं लगाने पर पीछे बैठी सवारी का चालान काटने के साथ ही कई विकल्प जोड़े गए हैं। अब वाहन स्वामी को चालान भरने के लिए किसी कार्यालय नहीं जाना होगा। वाहन स्वामी के वाट्सएप नंबर पर चालान के साथ ही क्यूआर कोड भी भेजा जाएगा। इस पर जुर्माना राशि का भुगतान किया जा सकेगा। ई-चालान एप्लीकेशन अपडेशन के चलते प्रदेश में तीन दिन तक एक भी वाहन का ई-चालान नहीं काटा जा सका। सोमवार शाम से एप्लीकेशन का नया वर्जन चार दिन के ट्रायल के साथ शुरू हो गया है। शुक्रवार सुबह से ही ई-चालान एप्लीकेशन बंद हो गई थी। आमतौर पर मेरठ और आसपास के जिलों में यातायात पुलिस और थानों की पुलिस रोजाना औसतन करीब 500 वाहनों के चालान काटकर कार्रवाई करती थी, लेकिन पिछले तीन दिनों से एप्लीकेशन न चलने के कारण चालान प्रक्रिया पूरी तरह शून्य पर आ टिकी है। बिजनौर के एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि नेक्स्ट जेन 2.0 एप का नया वर्जन अपलोड किया गया है। अभी तक आनलाइन माध्यम से होने वाले चालान पुराने साफ्टवेयर पर आधारित थे। अब सरकार ने उसे अपडेट करके नेक्स्ट जेन 2.0 के नाम से लांच किया है। मेरठ के एसपी ट्रैफिक राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि नए अपडेट वर्जन का सोमवार शाम से चार दिन का ट्रायल शुरू हो गया है। इसके बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। इसमें चालान के साथ ही वाहन स्वामी के वाट्सएप नंबर पर क्यूआर कोड भी आएगा। क्यूआर कोड के माध्यम से चालान राशि जमा की जा सकेगी। वाहन स्वामी को किसी भी कार्यालय के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं होगी। पहली एप्लीकेशन में पीछे बैठी बिना हेलमेट की सवारी का चालान काटने का विकल्प नहीं था। नए वर्जन में यह विकल्प जोड़ दिया गया है। इसके साथ ही शराब पीकर गाड़ी चलाने और माडिफाई साइलेंसर का चालान काटने का भी नया विकल्प शामिल किया गया है। मेरठ में सोमवार को 80 चालान काटे गए, जिनमें आठ हेलमेट न लगाने पर पीछे बैठी सवारियों के शामिल हैं।  

पंचायत चुनाव से पहले राजस्थान में बड़ा स्वास्थ्य प्लान, 600 नए सब-सेन्टर खुलेंगे

जयपुर राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में जहां एक तरफ आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर सियासी पारा चढ़ने लगा है, वहीं दूसरी तरफ भजनलाल सरकार ने ग्रामीण अंचलों की सूरत बदलने के लिए एक बड़ी प्रशासनिक कवायद शुरू कर दी है। राज्य के गांवों और दूरदराज की ढाणियों में रहने वाले आम नागरिकों को अब छोटी-मोटी बीमारी या प्राथमिक जांच के लिए मीलों दूर कस्बों या जिला अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। भारत सरकार के सहयोग से राजस्थान सरकार प्रदेश के हर 10 किलोमीटर के दायरे में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ कराने जा रही है जिसके तहत अब ग्रामीण इलाकों में 600 नए सब-सेन्टर (छोटे स्वास्थ्य केंद्र) स्थापित किए जा रहे हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सोमवार को जयपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, मानव संसाधन के प्रभावी प्रबंधन, दवा व जांच सुविधाओं के साथ-साथ मौसमी बीमारियों की रोकथाम पर विस्तार से चर्चा की गई। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस कदम को रणनीतिक रूप से देखा जा रहा है। ग्रामीण मतदाताओं और जमीनी स्तर के आम आदमी को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाले स्वास्थ्य सेक्टर में यह कवायद ऐसे समय पर तेज हुई है जब राज्य में पंचायत चुनावों की सुगबुगाहट जोरों पर है। सरकार यह संदेश देने की पूरी कोशिश में है कि ग्रामीण विकास के साथ-साथ बुनियादी चिकित्सा ढांचे को मजबूत करना उसकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है, ताकि चुनाव से ठीक पहले हर गांव तक गवर्नेंस और राहत का सीधा असर पहुंच सके। 50 हजार नई नियुक्तियों के बाद अब ग्राउंड पर एक्शन सरकार का यह फैसला केवल कागजी घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत प्रशासनिक तैयारी नजर आ रही है। हाल ही में स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न संवर्गों में लगभग 50 हजार पदों पर नई नियुक्तियां दी जा चुकी हैं। अब सरकार का पूरा फोकस इस बात पर है कि इन तमाम डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और मेडिकल प्रोफेशनल्स को सही जगह पर तैनात किया जाए। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने हाल ही में बुलाई गई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में साफ निर्देश दिए हैं कि मानव संसाधन का उपयोग केवल कागजी पदों के आधार पर नहीं, बल्कि उस इलाके की वास्तविक जरूरत, भौगोलिक स्थिति और मरीजों के भार को देखकर किया जाना चाहिए। इस नई व्यवस्था के तहत सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले हर नागरिक को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ज्यादा दूर न भटकना पड़े। 600 नए सब-सेन्टर: भारत सरकार के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में नए सब-सेन्टर खोले जाएंगे, जिन्हें एक तरह से स्थानीय स्तर पर छोटे अस्पतालों के रूप में विकसित किया जाएगा। विशेष जरूरत वाले केंद्र: ट्रोमा सेंटर, प्रसव की सुविधा वाले स्वास्थ्य केंद्र और दूरदराज के ग्रामीण अस्पतालों में विशेष तौर पर प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती अनिवार्य की जाएगी। सुरक्षा और पारदर्शिता: चिकित्सा संस्थानों के भवनों की सुरक्षा और जवाबदेही तय करने के साथ-साथ आगामी तीन महीनों में सभी अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जमीनी स्तर पर कामकाज की नियमित मॉनिटरिंग हो सके। क्या होते हैं सब-सेंटर्स सामान्य बोलचाल की भाषा में 'सब-सेन्टर' को ग्रामीण स्तर का छोटा अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ही माना जाता है। सब-सेन्टर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की सबसे शुरुआती और जमीनी इकाई होती है, जो अमूमन ग्रामीण इलाकों में बस्तियों या गांवों के पास बनाई जाती है। यहाँ डॉक्टर नहीं बल्कि प्रशिक्षित एएनएम (ANM) या स्वास्थ्य कार्यकर्ता बैठते हैं। यहाँ गर्भवती महिलाओं की जांच, टीकाकरण, बच्चों के टीके, सामान्य बीमार जैसी बुनियादी और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं मुफ्त मिलती हैं। इसलिए, जब हर 10 किलोमीटर पर नए सब-सेन्टर खोलने की बात कही जा रही है, तो इसका सीधा मतलब यही है कि सरकार गांवों के पास छोटे स्वास्थ्य केंद्र (अस्पताल) स्थापित कर रही है ताकि ग्रामीणों को छोटी-मोटी बीमारी या जांच के लिए दूर शहर न जाना पड़े। प्रशासनिक कसावट और भविष्य की तैयारी स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने भी स्पष्ट किया है कि आरयूएचएस के माध्यम से हजारों चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और दिसंबर में होने वाली नई परीक्षाओं के जरिए महकमे को और मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, जिन स्वास्थ्य केंद्रों के नए भवन बनकर तैयार हो चुके हैं, वहां तत्काल प्रभाव से सेवाएं शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आम जनता को तुरंत फायदा मिल सके। गांवों की चौखट तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का यह कदम निश्चित रूप से राजस्थान के चिकित्सा ढांचे की तस्वीर बदलने वाला साबित हो रहा है।