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मुख्यमंत्री योगी ने कहा- 140 करोड़ लोग एक स्वर में हुंकार भरेंगे तो दुनिया की कोई ताकत सामने नहीं ठहर सकती

गोरखपुर  मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि सनातन धर्म की एकता में ही हमारी सुरक्षा और मजबूती है। पंथ और संप्रदाय की उपासना पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन सभी का कल्याण वृहद सनातन धर्म की मजबूती में है। 140 करोड़ लोग एक स्वर में हुंकार भरेंगे तो दुनिया की कोई ताकत सामने नहीं ठहर सकती। अलग-अलग गति प्रगति नहीं, दुर्गति और अलग-अलग स्वर ताकत नहीं, पराजय का कारण बनेंगे।   मुख्यमंत्री योगी गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर आयोजित सप्त दिवसीय समारोह के तहत व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दोनों आचार्यों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके योगदान को याद किया।   रामभक्तों को पहचानना होगा कालनेमि मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अयोध्या में भगवान राम और सनातन का वैभव जिन्हें बर्दाश्त नहीं है, वे दुष्प्रचार और भ्रम पैदा करेंगे। जिस तरह संजीवनी बूटी लेने जाते समय हनुमान जी ने कालनेमि को पहचान लिया था, उसी तरह रामभक्तों को भी भ्रम फैलाने वालों को पहचानना होगा।   उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ भारत की आजादी को केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं मानते थे। संपूर्ण स्वाधीनता के लिए सांस्कृतिक स्वतंत्रता भी जरूरी थी। उनका मानना था कि सोमनाथ मंदिर की पुनर्प्राण प्रतिष्ठा हो सकती है तो अयोध्या में भी यह कार्य होना चाहिए   मुख्यमंत्री ने कहा कि 1949 में रामलला के प्रकटीकरण के समय महंत दिग्विजयनाथ, बाबा अभिराम दास और महंत रामचंद्र दास परमहंस सक्रिय थे। इसकी रणनीति देवीपाटन में महंत दिग्विजयनाथ, महाराजा बलरामपुर और तत्कालीन गोंडा जिलाधिकारी केके नायर के बीच बनी थी। आज 500 वर्षों बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर सनातन धर्मावलंबियों को गौरव की अनुभूति करा रहा है।   मोदी के नेतृत्व में दिख रहा सनातन का वैभव मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि और विंध्यवासिनी धाम का भव्य स्वरूप सामने है। प्रयागराज महाकुंभ ने दुनिया के सामने सनातन परंपरा का सामर्थ्य रखा है। उन्होंने वृंदावन के वैष्णव कुंभ का भी उल्लेख किया।   उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने बिखरे नाथ संप्रदाय को अखिल भारतीय भेष बारह पंथ योगी महासभा के रूप में एकजुट किया। अपनी परंपरा का पालन करते हुए वृहद सनातन धर्म की एकता को मजबूत करना होगा।   दोनों आचार्यों ने रखी भविष्य की मजबूत नींव मुख्यमंत्री योगी ने युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और अपने पूज्य गुरुदेव राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ को नमन करते हुए कहा कि दोनों आचार्यों ने जिन विषयों के लिए जीवन समर्पित किया, उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। महापुरुषों के दूरदर्शी कार्य भविष्य की मजबूत नींव तैयार करते हैं। गोरक्षपीठ और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद दोनों आचार्यों के आदर्शों को आगे बढ़ा रहे हैं।   गुलामी के दौर में रखी शिक्षा की नींव मुख्यमंत्री ने कहा कि देश गुलाम था और संसाधनों का अभाव था, तब महंत दिग्विजयनाथ ने 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। महाराणा प्रताप को आदर्श बनाने के पीछे स्वदेश, स्वाभिमान और स्वधर्म का भाव था।   उन्होंने कहा कि गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना में भी महंत दिग्विजयनाथ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विश्वविद्यालय के लिए मठ की संपत्ति और दो संस्थाएं सरकार को देने में उन्होंने श्रेय की चिंता नहीं की। आज महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अंतर्गत 50 से 55 संस्थाएं संचालित हैं। इनमें विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, आयुर्वेद कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक, विद्यालय, अस्पताल और कृषि विज्ञान केंद्र शामिल हैं   मुख्यमंत्री ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने उस दौर में बालिका शिक्षा के लिए विद्यालय और महाविद्यालय स्थापित किए। गोरखपुर में फर्टिलाइजर कारखाने और बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के प्रयासों को आगे बढ़ाने में भी उनकी भूमिका रही।   गोरक्षपीठ में जाति-पंथ का भेदभाव नहीं मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गोरक्षपीठ नाथ परंपरा की पीठ होते हुए भी पूरे सनातन धर्म के लिए समर्पित है। यहां जाति, पंथ या संप्रदाय के आधार पर भेदभाव नहीं होता। सभी जातियों के लोग एक पंक्ति में अन्न ग्रहण करते हैं और सभी आचार्यों व संतों को समान सम्मान मिलता है।   वक्ताओं ने भी याद किया योगदान अयोध्या से आए जगद्गुरु स्वामी रामदिनेशाचार्य ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने शिक्षा, स्वास्थ्य और भारतीय परंपरा को आगे बढ़ाया। गोरखनाथ मंदिर आज सामाजिक समरसता का भी केंद्र है। काशी से आए जगद्गुरु रामानंदाचार्य डॉ. रामकमल दास वेदांती ने कहा कि संत की साधना तभी सार्थक है, जब उससे लोककल्याण का मार्ग खुले। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. भूपेश कुमार गोयल ने कहा कि 1932 में बोया गया शिक्षा का बीज आज विशाल स्वरूप ले चुका है।   कार्यक्रम में डॉ. रामनरेश पांडे की पुस्तक श्री हनुमत् कथा पूजनम् का मुख्यमंत्री योगी और संतों ने विमोचन किया।   कार्यक्रम में ये रहे मौजूद कार्यक्रम में जगद्गुरु द्वाराचार्य स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्य, महंत बालकनाथ योगी, महंत योगी चेताईनाथ, जगद्गुरु संतोषाचार्य सतुआ बाबा और महंत मिथिलेशनाथ उपस्थित रहे।

दिव्या मित्तल से शाह फैसल तक, IAS से राजनीति में आए इन अफसरों की कहानी

लखनऊ दिव्या मित्तल ने राजनीति में उतरने का ऐलान किया है। दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव पद से इस्तीफा दिया था। बता दें कि, देश में ऐसे नेताओं की एक अच्छी-खासी लिस्ट है जो पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी यानी IAS थे और बाद में राजनीति में कदम रखा। कुछ अधिकारियों को तो राजनीति में अच्छी-खासी सफलता भी मिली। आइए जानते हैं उनकी कहानी। यशवंत सिन्हा भारतीय प्रशासनिक सेवा से सफल राजनेता बनने की लिस्ट में सबसे पहला नाम यशवंत सिन्हा का आता है। यशवंत सिन्हा 1960 बैच के IAS अधिकारी रहे हैं। IAS बनने से पहले वे दो साल तक पटना विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के शिक्षक रहे। यशवंत सिन्हा 1984 तक कई विभागों में वरिष्ठ अधिकारी के रूप में काम किया। वहीं साल 1984 में उन्होंने नौकरी छोड़कर राजनीति का रुख किया। राजनीति उन्हें काफी रास आई। साल 1984 में वो जनता पार्टी में शामिल हो गए। 1988 में वे राज्यसभा सांसद बने। बता दें कि, जब चंद्रशेखर 1990 में प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने यशवंत सिन्हा को वित्त मंत्री बनाया था। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को यशवंत सिन्हा अपने गुरु मानते थे। वहीं साल 1993 में वे भाजपा में आ गए। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनी तो उन्हें इसबार विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। 2018 में मतभेदों के कारण उन्होंने बीजेपी से किनारा कर लिया। फिलहाल यशवंत सिन्हा तृणमूल कांग्रेस में हैं अजीत जोगी एक ऐसा अधिकारी, जिन्होंने राजनीति में कदम रखा और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे। 1968 के बैच के आईएएस अधिकारी अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बने। अजीत जोगी ने राजनीति में शामिल होने का फैसला किया तो वह भी जिला कलेक्टर थे। जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कहने के बाद वो कांग्रेस में शामिल हो गए। अजीत जोगी, मध्यप्रदेश में अधिकारी थे। उस समय छत्तिसगढ़, एक राज्य नहीं बना था और वो मध्यप्रदेश का ही हिस्सा था। जानकारी के मुताबिक, मध्यप्रदेश में नौकरी के दौरान अजीत जोगी तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के करीब आ गए और उन्होंने ही अजीत जोगी को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से मिलवाया। राजीव गांधी के कहने वो अजीत जोगी राजनीति में आए और कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेजा। वहीं जब छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश से अलग हुआ तब अजीत जोगी राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने। साल 2016 में उन्होंने खुद की पार्टी भी बनाई। मई 2020 को उनका निधन हो गया। अल्फोंज कन्नाथानम केरल के कोट्टायम जिले के रहने वाले अल्फोंज कन्नाथानम, 1979 बैच के IAS अधिकारी हैं। 1990 के दशक में दिल्ली विकास प्राधिकरण DDA के कमिश्नर रहते हुए उन्हें काफी पहचा मिली थी। उन्होंने कई अवैध इमारतों को ध्वस्त करवा था। इसरे बाद उनको ‘डिमोलिशन मैन’ भी कहा जाता था। साल 2006 में आईएएस से रिटायरमेंट के बाद वो कोट्टायम में कंजिरप्पाली से विधायक बने। वहीं 2011 में बीजेपी में शामिल हो गए और छह साल बाद, राजस्थान से राज्यसभा सांसद बने। बाद में वो केंद्रीय मंत्री भी बने आर के सिंह कभी देश के सबसे कड़क IAS अधिकारी के रुप में चर्चित रहे राज कुमार सिंह यानी आरके सिंह, राजनीति में भी काफी सपल रहे। बता दें कि, आर के सिंह ने जिलाधिकारी रहते हुए भाजपा नेता एल.के. आडवाणी को गिरफफ्तार भी किया था। समस्तीपुर के जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने एल.के. आडवाणी को उनकी रथ यात्रा के दौरान गिरफ्तार किया था। आरके सिंह ने 1974 में एक भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी बने , वहीं 1975 में वो एक IAS अधिकारी बने। IAS अधिकारी के रूप में पटना के डीएम भी रहे रिटायरमेंट के बाद उन्होंने साल 2013 में भाजपा का दामन थाम लिया और 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में सफलता भी हासिल की। बिहार के आरा से वो दो बार सांसद बन चुके हैं। सांसद बनने के बाद आरके सिंह, केंद्रीय मंत्री भी बने। वहींसाल 2024 के लोकसभा चुनाव उनके लिए अच्छा नहीं रहा और उन्हें इस चुनाव में हार मिली। फिलहाल उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से दूरी बना ली है। IAS शाह फैसल जम्मू-कश्मीर से आने वाले यूपीएससी टॉपर शाह फैसल ने भी नौकरी छोड़ राजनीति का रुख किया था। शाह फैसल ने 2010 में UPSC AIR-1 हासिल किया। IAS अफसर बनने के बाद उन्होंने कई अहम पदों पर जिम्मेदारी संभाली, लेकिन 2019 में अचानक इस्तीफे का ऐलान कर दिया। इसके लिए उन्होंने बकायदा ‘जम्मू और कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट’ नाम की पार्टी भी बना ली थी। उनकी पार्टी जेकेपीएम ने अगस्त 2020 को घोषणा की, कि फैसल अब पार्टी छोड़ चुके हैं।

छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, कोरिया-बालोद-जशपुर-दंतेवाड़ा के अपर कलेक्टर बदले

रायपुर राज्य शासन ने मंगलवार को राज्य प्रशासनिक सेवा के 125 अधिकारियों के तबादले किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में अधिकारियों को प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित करते हुए नई पदस्थापना दी गई है। आदेश में अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर समेत मंत्रालय और विभिन्न विभागों में पदस्थ अधिकारियों के नाम शामिल हैं। कई जिलों के अपर कलेक्टर भी बदले तबादला सूची में कई जिलों के अपर कलेक्टर भी बदले गए हैं। सुरेंद्र प्रसाद वैद्य को कोरिया के अपर कलेक्टर से बालोद का अपर कलेक्टर बनाया गया है। चंद्रकांत कौशिक को बालोद से सारंगढ़-बिलाईगढ़, सुनील कुमार नायक को सरगुजा से जशपुर और राजेश कुमार पात्रे को दंतेवाड़ा के अपर कलेक्टर पद से हटाकर नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण में प्रबंधक की जिम्मेदारी दी गई है। ट्रांसफर लिस्ट में कई महत्वपूर्ण जिलों के अपर कलेक्टर और संयुक्त कलेक्टर लेवेल के अधिकारी के पद प्रभावित हुए हैं: सुरेन्द्र प्रसाद वैद्य (अपर कलेक्टर, कोरिया) को बालोद का नया अपर कलेक्टर बनाया गया है।  चन्द्रकांत कौशिक (अपर कलेक्टर, बालोद) को सारंगढ़-बिलाईगढ़ स्थानांतरित किया गया है।  सुनील कुमार नायक (अपर कलेक्टर, सरगुजा) अब जशपुर के अपर कलेक्टर का पदभार संभालेंगे।  राजीव कुमार पाण्डेय (अपर संचालक, उच्च शिक्षा) को जशपुर का अपर कलेक्टर नियुक्त किया गया है।  सुश्री योगिता देवांगन (अपर कलेक्टर, दुर्ग) को कोरबा का नया अपर कलेक्टर बनाया गया है।  चन्द्रिका प्रसाद बघेल (अपर कलेक्टर, बस्तर) को सुकमा भेजा गया है।  कई अन्य को भी मिली बड़ी जिम्मेदारी इसी तरह राजीव कुमार पांडेय को उच्च शिक्षा संचालनालय में अपर संचालक से जशपुर का अपर कलेक्टर बनाया गया है। अरविंद कुमार पांडेय को रायपुर विकास प्राधिकरण से छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी, निमोरा रायपुर में संयुक्त संचालक की जिम्मेदारी दी गई है। निष्ठा पांडेय तिवारी को मुंगेली से बेमेतरा और प्रदीप कुमार साहू को जशपुर से बेमेतरा का अपर कलेक्टर बनाया गया है। रायपुर से जुड़े अधिकारियों की भी बदली जिम्मेदारी आदेश में रायपुर से जुड़े कई अधिकारियों की पदस्थापना में भी बदलाव किया गया है। रवि राही को रायगढ़ के अपर कलेक्टर पद से रायपुर नगर निगम में अपर आयुक्त बनाया गया है। अतुल विश्वकर्मा को नवा रायपुर में संयुक्त आयुक्त, भू-अभिलेख से रायपुर नगर निगम में अपर आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है। ऋचा शर्मा को पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के अवर सचिव पद से रायपुर नगर निगम में उपायुक्त बनाया गया है। इसके अलावा नितिन तिवारी को बिलासपुर के डिप्टी कलेक्टर से नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण में प्रबंधक बनाया गया है। गोविंद कुमार सिन्हा को नारायणपुर के डिप्टी कलेक्टर पद से हटाकर छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड, रायपुर में मुख्य कार्यपालन अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण कर पालन प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

‘प्रगति-50’ में रायपुर-बिलासपुर, CM साय ने स्वच्छता मित्रों को दी बधाई

रायपुर. भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय की महत्वाकांक्षी ‘प्रगति-50’ (PRAGATI-50) योजना में छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर को शामिल किया गया है। केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से योजना का शुभारंभ किया। देश के चुनिंदा 50 शहरों में राज्य के दो शहरों के शामिल होने से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री अरुण साव के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ के नगरीय विकास एवं स्वच्छता प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। शुभारंभ कार्यक्रम में चयनित राज्यों के नगरीय विकास विभागों, शहरी स्थानीय निकायों के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सहभागिता की। केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू नई दिल्ली से कार्यक्रम में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री अरुण साव राजनांदगांव से कार्यक्रम में वर्चुअली जुड़े। मुख्यमंत्री साय और उप मुख्यमंत्री साव ने ‘प्रगति-50’ में शामिल होने पर रायपुर और बिलासपुर नगर निगमों, दोनों शहरों के स्वच्छता मित्रों और शहरवासियों को बधाई दी है। रायपुर की महापौर मीनल चौबे और बिलासपुर की महापौर पूजा विधानी के साथ दोनों नगर निगमों के आयुक्त भी कार्यक्रम में ऑनलाइन सम्मिलित हुए। प्रधानमंत्री द्वारा ‘प्रगति’ की बैठक में दिए गए निर्देशों पर शुरू हुई पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित 51वीं ‘प्रगति’ बैठक के निर्देशों पर शुरू की गई यह पहल स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत चयनित शहरों में स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं को तेज गति से सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। योजना में देश के 50 शहरों को शामिल किया गया है। इन शहरों को केंद्र सरकार की ओर से विशेष तकनीकी सहयोग, सतत मार्गदर्शन और गहन निगरानी मिलेगी। साथ ही श्रेष्ठ कार्य-पद्धतियों को अपनाने के लिए भी सहयोग दिया जाएगा। ‘प्रगति-50’ के तहत घर-घर कचरा संग्रहण, कचरे का वैज्ञानिक पृथक्करण एवं प्रसंस्करण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाने तथा सार्वजनिक स्वच्छता सुविधाओं व शहरों की साफ-सफाई में सुधार लाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। भारत सरकार की इस महत्वाकांक्षी पहल के अंतर्गत उपयोग किए गए जल के उपचार, पुन: उपयोग और समुचित प्रबंधन को बढ़ावा देने तथा स्वच्छता अभियानों में नागरिकों, संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता बढ़ाने के साथ ही निर्धारित संकेतकों के आधार पर शहरों के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा एवं मॉनिटरिंग भी की जाएगी। राज्य की कोशिशों का परिणाम मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री अरुण साव के मार्गदर्शन में राज्य सरकार नगरीय निकायों में स्वच्छता, जनसुविधाओं के विस्तार, प्रभावी कचरा प्रबंधन और बेहतर सेवा-प्रदाय के लिए प्राथमिकता से काम कर रही है। ‘प्रगति-50’ के लिए रायपुर और बिलासपुर का चयन राज्य सरकार की इन कोशिशों का परिणाम है। इसमें दोनों नगर निगमों की सक्रिय भूमिका, स्वच्छता मित्रों की मेहनत और नागरिकों का सहयोग भी शामिल है। राज्य के अन्य नगरीय निकायों के लिए बनेगा मॉडल ‘प्रगति-50’ के माध्यम से रायपुर और बिलासपुर को राष्ट्रीय स्तर की श्रेष्ठ कार्य-पद्धतियां अपनाने का अवसर मिलेगा। दोनों शहरों में स्वच्छता व्यवस्था, कचरा प्रबंधन, प्रयुक्त जल प्रबंधन तथा नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में और सुधार किया जाएगा। इन शहरों के अनुभव और नवाचार छत्तीसगढ़ के अन्य नगरीय निकायों के लिए भी उपयोगी मॉडल बन सकेंगे। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के लिए रायपुर और बिलासपुर के चयन पर नगरीय प्रशासन विभाग तथा दोनों निकायों के अधिकारियों एवं स्वच्छता मित्रों को बधाई देते हुए कहा कि दोनों शहरों का चयन पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। यह हमारे स्वच्छता मित्रों के परिश्रम और नागरिकों की भागीदारी का सम्मान है। केंद्र सरकार के सहयोग से दोनों शहर स्वच्छता के क्षेत्र में देश के अग्रणी शहरों में अपनी जगह बनाएंगे।

पंचायत चुनाव में पोलिंग एजेंट के नियम बदले, जानें कौन बन सकेगा एजेंट

जयपुर पंचायत चुनावों के लिए लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्वाचन विभाग ने प्रदेश सहित जयपुर जिले में चुनाव की तैयारियां तेज कर दी है। इसी कड़ी में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग ने मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए मतदान अभिकर्ताओं (पोलिंग एजेंट) की नियुक्ति को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पंच पद के लिए कोई पोलिंग एजेंट नियुक्त नहीं किया जाएगा। वहीं सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ने वाला प्रत्येक अभ्यर्थी या उसका चुनाव एजेंट हर मतदान केंद्र पर एक मतदान अभिकर्ता नियुक्त कर सकेगा। निर्वाचन आयोग के निर्देश के बाद जयपुर जिले की बस्सी, तूंगा, चाकसू, कोटखावदा जमवारामगढ़ और आंधी पंचायत समितियों में चुनाव लड़ने वाल संभावित प्रत्याशियों ने भी अपनी गतिविधियां तेज कर दी है। पंच पद के लिए नहीं होगा अलग एजेंट मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजेश वर्मा ने बताया कि पंच पद के लिए अलग से कोई मतदान अभिकर्ता नियुक्त नहीं होगा, बल्कि अभ्यर्थी स्वयं यह जिम्मेदारी निभाएगा। वहीं सरपंच पद के लिए कोई पृथक निर्वाचन अभिकर्ता नहीं होगा। आयोग के निर्देशों के बाद उम्मीदवारों और उनके एजेंटों को समय रहते नियमों के अनुरूप मतदान अभिकर्ताओं की नियुक्ति करनी होगी, ताकि मतदान दिवस पर किसी प्रकार की असुविधा न हो। वैध फोटो पहचान पत्र होना अनिवार्य पंचायत क्षेत्र का कोई भी मतदाता मतदान अभिकर्ता यानी पोलिंग एजेंट नियुक्त किया जा सकता है, लेकिन उसके पास वैध फोटो पहचान पत्र होना अनिवार्य है। इसके लिए पासपोर्ट, वोटर आइडी या आयोग की ओर से मान्य अन्य दस्तावेज स्वीकार किए जाएंगे। मतदान केंद्र के अंदर रहते समय अभिकर्ता को नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र साथ रखना होगा और मांगने पर प्रस्तुत करना होगा। किसी दूसरी पंचायत के मतदाता को पोलिंग एजेंट नहीं बनाया जा सकता। ये नहीं बन सकेंगे पोलिंग एजेंट निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आयोग ने कुछ श्रेणियों के लोगों को मतदान अभिकर्ता बनने से प्रतिबंधित किया है। इनमें केंद्र या राज्य सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, स्थानीय निकायों के निर्वाचित पदाधिकारी, सरकारी या अर्द्धसरकारी संस्थानों के कर्मचारी, सार्वजनिक उपक्रमों के अधिकारी, मानदेय प्राप्त करने वाले व्यक्ति, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पैरामेडिकल व हेल्थ केयर स्टाफ, उचित मूल्य की दुकान के डीलर व सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान में कार्यरत व्यक्ति शामिल हैं। चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारी भी मतदान अभिकर्ता नहीं बन सकेंगे।

AISHE डाटा में गलती पर लगेगी रोक, संस्थानों को क्रॉस-वेरिफिकेशन के निर्देश

 लखनऊ  उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने एआइएसएचई (अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण) में प्रत्येक जानकारी को मूल अभिलेखों से जांचकर ही दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को राज्य स्तरीय एआइएसएचइ कार्यशाला में उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा से जुड़े सही और समय पर उपलब्ध आंकड़े ही नए संस्थान, शिक्षकों और संसाधनों की जरूरत तय करने का आधार बनेंगे। इसलिए में आंकड़े भरने को केवल औपचारिकता न माना जाए। डा. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय लखनऊ में आयोजित कार्यशाला में उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं और नीतियां उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर बनती हैं। गलत या अधूरी जानकारी से योजना निर्माण प्रभावित हो सकता है। विश्वविद्यालय, संबद्ध महाविद्यालयों और संस्थानों का एआइएसएचई डाटा नियमित रूप से अपडेट कराएं। कई संस्थान एआइएसएचई कोड मिलने के बाद समय पर डाटा नहीं देते, जिससे उनका स्टेटस निष्क्रिय हो सकता है और विद्यार्थियों पर असर पड़ सकता है। पोर्टल खुलने के बाद अंतिम तिथि का इंतजार न करें। उन्होंने नामांकन, रिक्तियों, पाठ्यक्रम, परीक्षा, परिणाम और आधारभूत ढांचे की जानकारी का मूल रिकार्ड से मिलान करने और अंतिम अनुमोदन से पहले क्रास-वेरिफिकेशन और जरूरत के अनुसार रैंडम जांच के निर्देश दिए। कहा कि कोई पात्र और संचालित संस्थान प्रशासनिक लापरवाही से सर्वे से बाहर न रहे। लक्ष्य जीरो पेंडेंसी का होना चाहिए। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अमित कुमार घोष ने कहा कि एआइएसएचई डाटा पूरे संस्थान की जिम्मेदारी है। विश्वविद्यालय और एआइएसएचई रिकार्ड में एकरूपता, संबद्धता सूची के मिलान और गलत या दोहरी रिपोर्टिंग रोकने के लिए अभिलेखों की जांच जरूरी है। असामान्य बदलाव की भी समीक्षा हो। कार्यशाला के सुझावों के आधार पर एसओपी तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि डाटा अपलोड करना प्रक्रिया है, जबकि उसका विश्लेषण और गैप एनालिसिस अधिक महत्वपूर्ण है। कार्यशाला में निदेशक उच्च शिक्षा प्रो. मोनिका सिंह, आरएमएलएनएलयू के कुलपति प्रो. डा. अमर पाल सिंह, एआइएसएचइ की अपर महानिदेशक संगीता नर्मदेश्वर, रजिस्ट्रार केशव कुमार, राज्य नोडल अधिकारी प्रो. दिनेश चंद्र शर्मा और उच्च शिक्षा परिषद के अपर सचिव डा. दिनेश के. राजपूत समेत अधिकारी व विश्वविद्यालयों के नोडल अधिकारी मौजूद रहे। तकनीकी सत्र में डीसीएफ, एआइएसएचइ पोर्टल और विश्वविद्यालय-विशिष्ट समस्याओं पर चर्चा हुई।  

308 पहियों का महाबली ट्रक बना आकर्षण, बेल्जियम से यूपी पहुंची 41 मीटर की मशीन

लखनऊ उत्तर प्रदेश की सड़कों पर इन दिनों 308 पहियों वाला एक ऐसा 'महाबली' ट्रक लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है. इस विशाल ट्रक पर 164.28 मीट्रिक टन वजन की मशीन लदी है और इसे बेल्जियम से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी तक पहुंचाया जा रहा है. करीब 41 मीटर लंबी इस मशीन को बलरामपुर चीनी मिल के कुंभी स्थित बायोपॉलीमर प्लांट तक पहुंचना है. खास बात यह है कि कई महीनों से जारी इस सफर के बावजूद 'महाबली' अभी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाया है. बेल्जियम से शुरू हुआ सफर इस विशाल मशीन की यात्रा अप्रैल में बेल्जियम से शुरू हुई थी. मशीन को समुद्री रास्ते से भारत भेजा गया और करीब एक महीने के सफर के बाद यह ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंची. इसके बाद मशीन को 308 पहियों वाले विशेष ट्रक पर लादा गया और सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के लिए रवाना किया गया. 6 महीने पहले बेल्जियम से चला था. (Photo: ITG) पारादीप से निकलने के बाद महाबली ट्रक झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश पहुंचा. विशाल आकार और भारी वजन के कारण इसे सामान्य वाहनों की तरह तेज रफ्तार से नहीं चलाया जा सकता. रास्ते में जगह-जगह ऊंचाई, चौड़ाई और सड़क से जुड़े अवरोध सामने आए. चंदौली में क्यों रुक गया था 'महाबली'? 25 सितंबर को यह विशाल ट्रक उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले की सीमा में पहुंचा. पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के पास नेशनल हाईवे-19 पर रिंग रोड के नजदीक पहुंचने के बाद इसे आगे बढ़ने में परेशानी हुई. दरअसल, ट्रक और उस पर लदी मशीन की ऊंचाई और चौड़ाई को देखते हुए आगे का रास्ता पर्याप्त नहीं था. ऐसे में लॉजिस्टिक्स टीम ने संबंधित विभागों और अधिकारियों से अनुमति लेकर वैकल्पिक रास्ता तैयार किया. इसके लिए मौके पर जेसीबी समेत मशीनरी की मदद ली गई. सोमवार दोपहर रास्ता तैयार होने के बाद महाबली ट्रक को आगे वाराणसी की ओर रवाना कर दिया गया. 308 पहियों वाले ट्रक को देखने उमड़ी भीड़ महाबली ट्रक जहां से गुजर रहा है, वहां लोगों में इसे देखने को लेकर खासा उत्साह दिखाई दे रहा है. चंदौली में इसके रुकने की खबर मिलते ही आसपास के गांवों के साथ-साथ दूर-दराज के लोग भी मौके पर पहुंच गए. लोग इस विशाल ट्रक और उस पर लदी मशीन के साथ सेल्फी लेते दिखाई दिए. कई कंटेंट क्रिएटर्स ने भी मौके पर पहुंचकर इसके वीडियो बनाए. लोगों के लिए सबसे ज्यादा हैरानी की बात इसके 308 पहिए और विशाल आकार हैं. महाबली ट्रक को देखने के लिए उमड़ी लोगों की भीड़. (Photo: ITG) अब कहां जाएगा 'महाबली'? लॉजिस्टिक्स मैनेजर अनेक भारती के मुताबिक ट्रक को आगे गाजीपुर, गोरखपुर और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के रास्ते लखीमपुर ले जाने की योजना है. रास्ते में आने वाले अवरोधों को संबंधित विभागों से अनुमति लेकर हटाया जा रहा है. लॉजिस्टिक्स टीम के मुताबिक, अगर आगे का सफर योजना के मुताबिक चलता रहा तो महाबली ट्रक को लखीमपुर खीरी पहुंचने में अभी करीब दो से तीन सप्ताह का समय लग सकता है. आखिर क्या है मशीन? इस विशाल ट्रक पर एक रिएक्टर ले जाया जा रहा है. लॉजिस्टिक्स मैनेजर ने बताया कि मशीन को बायोपॉलीमर प्लांट के लिए ले जाया जा रहा है, हालांकि उन्होंने इसके तकनीकी विवरण के बारे में अधिक जानकारी देने से इनकार किया. चंदौली पुलिस के मुताबिक, मशीन करीब 41 मीटर लंबी है और इसका वजन 164.28 मीट्रिक टन है. इसे लखीमपुर खीरी के ग्राम कुंभी में बलरामपुर चीनी मिल द्वारा बनाए जा रहे बायोप्लास्टिक प्लांट के लिए ले जाया जा रहा है. यानी बेल्जियम से शुरू हुआ यह सफर समुद्र के रास्ते भारत पहुंचने के बाद अब सड़कों पर जारी है. 308 पहियों वाला 'महाबली' कई राज्यों और मुश्किल रास्तों को पार कर चुका है, लेकिन लखीमपुर खीरी में अपने अंतिम गंतव्य तक पहुंचने के लिए अभी इसका सफर बाकी है.

अक्टूबर में कम आएगा बिजली का बिल, 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं को मिलेगा फायदा

 लखनऊ बिजली उपभोक्ताओं को अक्टूबर में भी बिजली के बिल से राहत मिलती दिख रही है। जून में 10 प्रतिशत ज्यादा बिजली का बिल देने वाले उपभोक्ताओं का जुलाई में 4.43 प्रतिशत, अगस्त में 2.92 प्रतिशत, सितंबर में रिकॉर्ड 7.93 प्रतिशत के बाद अब अक्टूबर में भी पांच प्रतिशत से अधिक बिल कम हो सकता है। एफपीपीसीए (ईंधन एवं बिजली खरीद लागत समायोजन) के तहत जुलाई माह के ईंधन अधिभार शुल्क(फ्यूल सरचार्ज) में कमी को देखते हुए सितंबर के बिजली बिल पर अक्टूबर में सभी श्रेणियों के लगभग 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। इस संबंध में पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन द्वारा जल्द ही आदेश जारी करने की कवायद की जा रही है। जून में भारी-भरकम 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार शुल्क वसूलने पर विद्युत नियामक आयोग के कड़े रुख के बाद से लगातार चौथे माह उपभोक्ताओं को बिजली के बिल से कुछ राहत मिलना तय है। गौरतलब है कि कारपोरेशन द्वारा पुराने भुगतान को भी अधिभार में शामिल करते हुए 1610 करोड़ रुपये के लिए जून में उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत अतिरिक्त वसूला गया था। जून में उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत वसूलने के बाद कॉर्पोरेशन प्रबंधन जुलाई में भी 10 प्रतिशत वसूलता उससे पहले ही आयोग ने पुराने भुगतान को अधिभार में शामिल करने पर नाराजगी जताते हुए उसे गलत ठहराते हुए आदेश जारी किया था। आयोग ने कहा था कि वास्तविक बिजली खरीद की लागत एवं ट्रांसमिशन शुल्क के आधार पर ही अधिभार तय होगा। इसमें किसी अन्य माह की देनदारी के भुगतान या समायोजन को शामिल नहीं किया जा सकता। यही कारण रहा कि जुलाई से लगातार उपभोक्ताओं को बिजली का कम ही बिल देना पड़ रहा है। उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने बताया कि एफपीपीसीए गणना में अब पारदर्शिता के चलते उपभोक्ताओं को कानूनन इसका लाभ समय पर मिल रहा है।  

योगी बोले- यूपी की अर्थव्यवस्था अब शीर्ष तीन में, 9.5 लाख युवाओं को नौकरी

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष खासकर समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि जिन लोगों ने पहले राज्य के लोगों के सामने पहचान का संकट खड़ा किया, वे अब नए रूप और नारे के साथ गिरगिट की तरह रंग बदल रहे हैं। उनके शासनकाल में माफिया हर जिले में समानांतर सरकार चला रहे थे। पहले भर्तियों के विज्ञापन से पहले ही आशंकाएं सामने आ जाती थीं। जकड़न, बेईमानी और माफिया का राज था। वर्ष 2017 में सरकार बनते ही हमनें इस स्थिति को समाप्त करने का संकल्प लिया। आज प्रदेश सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था वाला राज्य बन गया है। नवचयनित 1375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को सोमवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के ज्यूपिटर हाल में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि नौजवानों के सपनों को उड़ान चाहिए, जो अब मिल रही है। 10 वर्ष पहले ऐसा नहीं था। आज हम युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभाओं का उपयोग राज्य की समृद्धि में कर रहे हैं। हमारी सरकार में 9.5 लाख युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सरकारी नौकरियां दी गई हैं। पहले हमारी अर्थव्यवस्था नीचे के पांच राज्यों में थी, अब हम शीर्ष तीन राज्यों में शामिल हैं। प्रदेश की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और राज्य का बजट तीन गुणा बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा के लिए विकास का मतलब केवल सैफई था। हमने सपा अध्यक्ष से कहा था कि हर सप्ताह नियुक्ति पत्र बांटेंगे, छह महीने में एक लाख नौकरियां देंगे। आज चौथा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम हो रहा है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले तीन कार्यक्रमों में 5297 युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी के सपनों को केंद्र और प्रदेश की एनडीए सरकार ने साकार किया है। गांवों में अब ग्राम सचिवालय बनाए गए हैं, जहां ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी, लेखपाल, बीसी सखी और पंचायत सहायक के बैठने की व्यवस्था है। डिजिटल लाइब्रेरियां बनाई जा रही हैं। जितनी कमाई ग्राम पंचायतें करेंगी, उतनी ही धनराशि सरकार भी देगी। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि इस सरकार में विभाग में 6581 नियुक्तियां की गईं हैं। सपा के शासनकाल में नौकरी का विज्ञापन आते ही शिवपाल यादव के गुर्गे पूरे प्रदेश में नौकरी बेचने में जुट जाते थे। सपा और कांग्रेस नफरत की राजनीति करती हैं। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि अब नौकरियों के लिए कोई पैसा नहीं ले सकता है। गांधी जी के नाम पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस ने कभी गांवों का विकास नहीं किया। इस कार्यक्रम में महापौर सुषमा खर्कवाल, एमएलसी डॉ. महेंद्र सिंह, विधायक डा. नीरज बोरा, प्रमुख सचिव पंचायती राज रविंद्र, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एसएन साबत उपस्थित थे। मुख्यमंत्री के हाथों इन्हें मिले नियुक्ति पत्र मुख्यमंत्री ने 11 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र दिए, जिनमें आशुतोष त्रिपाठी, ओम बघेल, प्रवीण, सुधा, आदित्य सिंह, नेहा, रूपाली, श्रुति श्रीवास्तव, ब्यूटी शाही, शुभम और अमित कुमार सिंह शामिल हैं। कुशीनगर के आदित्य सिंह, लखनऊ की श्रुति सिंह और गोरखपुर की ब्यूटी शाही ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर अपने विचार साझा किए।

सीएम योगी की प्रेरणा से यूपी के युवाओं ने खोजी भविष्य में होने वाली बीमारियों से बचाने में सक्षम मशीन

ग्रेटर नोएडा  सोचिए, एक ऐसा अस्पताल जिसे न बड़ी इमारत चाहिए, न भारी-भरकम मशीनों से भरी लैब। उसे कार में रखिए और शहर से गांव या किसी दूर-दराज इलाके तक ले जाइए। मरीज सामने आया तो बीपी और शुगर से लेकर ईसीजी, फेफड़ों, आंख-कान तक की जांच वहीं शुरू। एक बूंद खून से कई जरूरी जांच और महज 10 मिनट में कुल 75 तरह के टेस्ट की सुविधा। भविष्य में होने वाली बीमारियों के जोखिम का समय रहते संकेत देने की क्षमता भी। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदर्शित ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ इसी सोच को हकीकत में बदलने की कोशिश है। करीब तीन लाख रुपये की यह मशीन स्वास्थ्य सेवाओं को अस्पताल की चारदीवारी से निकालकर मरीज के दरवाजे तक पहुंचाने का मॉडल पेश कर रही है। सीएम योगी की प्रेरणा से यूपी के युवाओं ने भविष्य में होने वाली बीमारियों से बचाने में सक्षम ये मशीन खोजी है। तीन लाख की मशीन से अस्पताल जैसी जांच एमडी इंटरनल मेडिसिन और डॉक्टर्स ऑन ड्यूटी के फाउंडर एवं सीईओ डॉ. श्रेय श्रीवास्तव कहते हैं कि मशीन को इस तरह विकसित किया गया है कि प्राथमिक स्तर पर होने वाली कई महत्वपूर्ण जांच एक ही जगह की जा सकें। इसमें ब्लड प्रेशर, शुगर, बॉडी एनालिसिस, ईसीजी और लंग्स फंक्शन टेस्ट के साथ आंख, नाक और कान की जांच की सुविधा है। उनका कहना है कि सिंगल ड्रॉप ब्लड टेस्ट समेत कुल 75 जांच करीब 10 मिनट में की जा सकती हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका पोर्टेबल होना है। इसे कार में रखकर आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है। यानी जिस गांव में अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर नहीं है, वहां जांच की सुविधाएं पहुंचाने के लिए पूरी लैब खड़ी करने की जरूरत नहीं होगी। मशीन बिजली के साथ बैटरी और सोलर पावर से भी संचालित की जा सकती है। महंगी जांच का बोझ घटेगा इस मॉडल के जरिए अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर में होने वाली कई जांच की तुलना में बेहद कम लागत पर प्राथमिक जांच संभव हो सकती है। कई मामलों में खर्च मौजूदा लागत के करीब 10 प्रतिशत तक सीमित किया जा सकता है। यदि बड़े स्तर पर इसका इस्तेमाल सफल रहता है तो गांव और छोटे शहरों के मरीजों को सामान्य जांच के लिए बार-बार बड़े अस्पतालों की दौड़ लगाने से राहत मिल सकती है। इससे मरीज का पैसा ही नहीं, अस्पताल तक आने-जाने और जांच के इंतजार में लगने वाला समय भी बच सकता है। बीमारी दस्तक दे, उससे पहले मिल सकेगा संकेत ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ को केवल जांच मशीन तक सीमित रखने के बजाय एआई आधारित हेल्थ सिस्टम के रूप में विकसित किया गया है। उपलब्ध स्वास्थ्य संकेतकों और जांच रिपोर्ट के आधार पर मरीज में भविष्य में विकसित हो सकने वाले स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान में यह सहायक है। इसका उद्देश्य डॉक्टर को शुरुआती स्तर पर अधिक स्वास्थ्य डेटा उपलब्ध कराना और समय रहते मरीज को आगे की चिकित्सकीय सलाह तक पहुंचाना है। इस मॉडल के पीछे सोच है कि बीमारी गंभीर होने के बाद महंगे अस्पताल पहुंचने के बजाय जोखिम की पहचान पहले हो। खासकर ग्रामीण इलाकों में नियमित स्वास्थ्य जांच आसान होने से ऐसे लोगों तक स्क्रीनिंग पहुंचाई जा सकती है, जो दूरी और खर्च के कारण सामान्य जांच भी टाल देते हैं। बड़े अस्पतालों का दबाव घटाने की तैयारी ग्रेटर इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन के सीईओ डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि इस तकनीक का उद्देश्य लोगों की गाढ़ी कमाई के साथ समय बचाना भी है। प्राथमिक जांच स्थानीय स्तर पर होने से हर मरीज को शुरुआती टेस्ट के लिए बड़े अस्पताल जाने की जरूरत कम हो सकती है। इस मॉडल को सेंट्रल और बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव घटाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सामान्य जांच और शुरुआती स्क्रीनिंग स्थानीय स्तर पर होने के बाद जरूरत वाले मरीजों को ही विशेषज्ञ या बड़े अस्पताल तक रेफर करने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है। स्वास्थ्य सेवा के साथ रोजगार का भी मॉडल ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ केवल मेडिकल इनोवेशन तक सीमित नहीं है। करीब तीन लाख रुपये कीमत और पोर्टेबल स्वरूप के कारण इसे मेडिकल क्षेत्र में स्वरोजगार के मॉडल के रूप में भी विकसित करने की योजना है। प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी या उद्यमी मशीन के जरिए स्थानीय स्तर पर हेल्थ स्क्रीनिंग और जांच सेवाएं उपलब्ध करा सकते हैं। स्टार्टअप को ‘स्टार्ट इन यूपी’ के तहत उत्तर प्रदेश सरकार से 10 लाख रुपये की मदद भी मिली है। इंटरनेशनल ट्रेड शो में इसका प्रदर्शन इस बात का उदाहरण है कि प्रदेश के स्टार्टअप अब केवल ऐप और डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की लागत, पहुंच और उपलब्धता जैसी बुनियादी चुनौतियों के समाधान पर भी काम कर रहे हैं। बदल सकती है जांच की तस्वीर भारत जैसे विशाल देश में अस्पताल और विशेषज्ञ डॉक्टर तक पहुंच के साथ डायग्नोस्टिक सुविधाओं की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती है। ऐसे में कार में समा जाने वाला, बिजली-बैटरी-सोलर तीनों विकल्पों से चलने वाला और एक ही प्लेटफॉर्म पर दर्जनों जांच उपलब्ध कराने वाला मॉडल बड़े बदलाव की संभावना दिखाता है।