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काशी विश्वनाथ धाम बना वैश्विक आस्था केंद्र, योगी सरकार के प्रयासों से बढ़ा पर्यटन

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 'सांस्कृतिक पुनर्जागरण' का असर धरातल पर दिखने लगा है। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा है जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। अकेले मार्च के महीने में लगभग 65 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। यह आंकड़ा न केवल उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन की नई ऊंचाई को दर्शाता है, बल्कि योगी सरकार द्वारा सुधारी गई सुरक्षा और सुगम दर्शन व्यवस्था पर मुहर भी लगाता है। संकरी गलियों से भव्य कॉरिडोर तक का सफर कभी तंग गलियों और भारी भीड़ के बीच घंटों इंतजार के लिए जानी जाने वाली काशी आज अपने नए और दिव्य स्वरूप 'काशी विश्वनाथ धाम' के कारण दुनिया भर के पर्यटकों की पहली पसंद बन गई है। योगी सरकार ने कॉरिडोर के माध्यम से मंदिर का गंगा से सीधा जुड़ाव सुनिश्चित किया है, जिससे श्रद्धालुओं को अब एक ही परिसर में आध्यात्म और सुकून का अनुभव होता है। व्यवस्थाओं में आए प्रमुख बदलाव     स्मार्ट कतार प्रबंधन: डिजिटल निगरानी और सुव्यवस्थित क्यू (Queue) सिस्टम के कारण अब लाखों की भीड़ होने पर भी दर्शन सहजता से हो रहे हैं।     बुनियादी सुविधाएं: परिसर में आधुनिक पेयजल केंद्र, स्वच्छ शौचालय, विश्रामालय और बुजुर्गों व दिव्यांगों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।     गंगा क्रूज और कनेक्टिविटी: घाटों का सौंदर्यीकरण और गंगा में क्रूज संचालन ने पर्यटकों के लिए काशी दर्शन को और भी रोमांचक बना दिया है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला 'बूस्टर डोज' श्रद्धालुओं की इस रिकॉर्ड संख्या ने वाराणसी की स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक दी है। होटलों की बुकिंग से लेकर हस्तशिल्प, बनारसी साड़ी उद्योग और नाविकों तक, हर क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से काशी आज आस्था और आधुनिकता का वैश्विक केंद्र बन गई है। रोप-वे परियोजना और स्मार्ट सिटी के कार्यों ने काशी की भव्यता में चार चांद लगा दिए हैं। यह वीडियो भी देखें सुरक्षा और स्वच्छता का नया मानक योगी सरकार ने मंदिर के आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से कड़ा किया है, जिससे विदेशी पर्यटक भी खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। साथ ही, 'स्वच्छ भारत मिशन' के तहत घाटों और मंदिर परिसर की नियमित सफाई ने काशी की वैश्विक छवि को निखारा है।  

वन विभाग की सख्ती: गौरेला क्षेत्र में अवैध सागौन कटाई पर कार्रवाई

रायपुर गौरेला क्षेत्र में सागौन की अवैध कटाई पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई छत्तीसगढ़ के गौरेला वन परिक्षेत्र में सागौन के अवैध दोहन को रोकने के लिए वन विभाग ने अपना शिकंजा कस दिया है। विभाग के संयुक्त दल द्वारा की जा रही लगातार निगरानी के फलस्वरूप हाल ही में अवैध रूप से काटी गई सागौन की लगभग 500 बल्लियां (5 घन मीटर से अधिक) बरामद की गई हैं। जब्त लकड़ियों को सुरक्षित रूप से मड़ना सरकारी काष्ठागार (डिपो) में स्थानांतरित कर दिया गया है। गौरेला क्षेत्र में सागौन की अवैध कटाई पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई            पण्डरीपानी परिसर (सामाजिक वानिकी परियोजना 2009-10), जो लगभग 103 हेक्टेयर में फैला है। चार ग्राम पंचायतों (कोरजा, गांगपुर, डाहीबहरा और पण्डरीपानी) से घिरे होने के कारण इस क्षेत्र पर अत्यधिक जैविक दबाव है। प्राथमिक जांच के अनुसार, स्थानीय ग्रामीणों द्वारा गृह निर्माण, कृषि कार्यों और अन्य व्यक्तिगत उपयोग के लिए अवैध कटाई की जा रही थी।           वनमण्डलाधिकारी मरवाही और उप वनमण्डलाधिकारी गौरेला के नेतृत्व में उड़नदस्ता दल और विभागीय कर्मचारी क्षेत्र का सघन सर्वेक्षण कर रहे हैं। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सर्वेक्षण पूर्ण होते ही दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, वन भूमि पर किए गए पुराने अतिक्रमणों को हटाने का अभियान भी तेज कर दिया गया है।

विकास आयुक्त मती अमृत राज के प्रयासों से मिली वैश्विक पहचान

भोपाल मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और हस्तशिल्प विरासत 'बाग प्रिंट' ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में सफलता के नए आयाम स्थापित किए हैं। प्रदेश की पारंपरिक कलाओं को वैश्विक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक प्रभावी कदम है। इस अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि में विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) मती अमृत राज के दूरदर्शी नेतृत्व और विशेष प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके मार्गदर्शन में हस्तशिल्पियों को वैश्विक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से एक सुदृढ़ कार्ययोजना तैयार की गई है, जिससे मध्य प्रदेश की कला को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। मती अमृत राज के प्रयासों से ही स्थानीय शिल्पकारों को आधुनिक वैश्विक मांग के अनुरूप तकनीकी सहयोग और विपणन के अवसर प्राप्त हो रहे हैं, जिससे बाग प्रिंट जैसी दुर्लभ कला का पुनरुद्धार हुआ है। नेशनल अवार्डी शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री पेरिस में आयोजित यूरोप के सबसे प्रतिष्ठित मेले 'फ़ोयर डे पेरिस' में बिलाल खत्री बाग प्रिंट का लाइव डेमोंस्ट्रेशन दे रहे हैं। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा इन्हें चयनित किया गया है। उनके द्वारा प्राकृतिक रंगों और लकड़ी के ठप्पों के माध्यम से कपड़े पर उकेरी जा रही कलाकृतियां अंतरराष्ट्रीय दर्शकों और विशेषज्ञों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। मेले के दौरान भारतीय दूतावास की थर्ड सेक्रेटरी सु वर्धा खान और प्रथम सचिव  माधव आर. सल्फुले ने भारतीय पवेलियन का अवलोकन किया। उन्होंने बिलाल खत्री के कौशल की सराहना करते हुए स्वयं ब्लॉक प्रिंटिंग का अनुभव लिया। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति का अनमोल हिस्सा बताते हुए मध्यप्रदेश के शिल्पकारों के समर्पण की प्रशंसा की।  

चुनाव में सुरक्षा का सख्त पहरा: पंचकूला के संवेदनशील बूथों पर कमांडो, 1200 जवानों की तैनाती

पंचकूला. नगर निगम चुनाव के लिए 10 मई (रविवार) को मतदान होगा। चुनाव निष्पक्ष, सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पंचकूला पुलिस ने कमर कस ली है। सोमवार को सेक्टर-4 स्थित पुलिस आयुक्त कार्यालय में पुलिस कमिश्नर (एडीजीपी) शिवास कविराज की अध्यक्षता में एक रणनीतिक बैठक हुई। इस बैठक में चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की रूपरेखा तैयार करते हुए सभी अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए ताकि जिले में कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी भी प्रकार की अवांछित गतिविधि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित न कर सके। पुलिस कमिश्नर शिवास कविराज ने बताया कि चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए करीब 1200 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। जिले के कुल 85 लोकेशन पर 204 बूथों पर मतदान होना है। सभी बूथों पर पुलिस की कड़ी निगरानी सभी बूथों पर पुलिस की कड़ी निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन करवाया जाएगा ताकि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित रह सके। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने संवेदनशील और अति-संवेदनशील बूथों को चिह्नित कर लिया है। इसमें 21 लोकेशन के 36 बूथों को संवेदनशील और 21 लोकेशन के 59 बूथों को अति-संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है, जहाँ अतिरिक्त पुलिस बल, महिला पुलिसकर्मी और स्वैट कमांडो की तैनाती की जाएगी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए चार टीयर गैस टीमें भी रिजर्व रखी गई हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा और किसी भी गड़बड़ी या अव्यवस्था पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। बॉर्डर से लेकर शहर तक कड़ी निगरानी जिले की सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए पांच इंटर-स्टेट बार्डर नाकों पर 24 घंटे कड़ा पहरा लगा दिया गया है। इसके अतिरिक्त, शहर के महत्वपूर्ण स्थानों पर चुनाव से 48 घंटे पहले 20 विशेष नाके स्थापित किए जाएंगे। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस कर्मियों को 55 बाडी कैमरों से लैस किया गया है ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। चुनाव के दौरान 12 पेट्रोलिंग टीमें लगातार गश्त करेंगी, जबकि ईआरवी, राइडर और पीसीआर वाहन भी हर पल मुस्तैद रहेंगे। धारा 163 के तहत हथियारों के दुरुपयोग को रोकने के लिए एसीपी व थाना प्रभारियों द्वारा शस्त्र जमा कराने की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी की जा रही है। भारी मात्रा में ड्रग्स और हथियार बरामद पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि आचार संहिता लागू होने के बाद से ही पुलिस की विभिन्न टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं। अब तक की कार्रवाई में 538 ग्राम हेरोइन, 1.154 किलो चरस, 607 ग्राम अफीम, 18 किलो से अधिक चूरापोस्त और 180 पेटी अवैध शराब जब्त की गई है। इसके अलावा, अपराध पर लगाम कसते हुए आठ अवैध देशी कट्टे व पिस्टल और 12 जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए हैं। सभी अपराध इकाइयों, थाना व चौकी प्रभारियों को साफ आदेश दिए हैं कि अवैध शराब, नशा तस्करी और दबंगई करने वाले तत्वों के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति अपनाएं। बैठक में डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता, डीसीपी क्राइम एवं ट्रैफिक अमरिंदर सिंह सहित सभी एसीपी, थाना प्रभारी, चौकी इंचार्ज और विभिन्न शाखाओं के प्रभारी मौजूद रहे।

कांके में आयुष और योग आधारित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की होगी स्थापना

 रांची राज्य सरकार ने देसी चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तरीय हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थापना का निर्णय किया है। इस हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थापना कांके में होगी। इसके लिए रिनपास परिसर में जमीन चिह्नित की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए न केवल प्रस्ताव तैयार किया है, बल्कि चालू वित्तीय वर्ष के बजट में राशि का भी प्रविधान किया है। इस सेंटर की स्थापना का उद्देश्य आयुष चिकित्सा पद्धति के साथ-साथ देसी चिकित्सा से जुड़ी अन्य पद्धतियों को बढ़ावा देना है, जिनमें योगा भी प्रमुख है। प्रस्ताव के अनुसार, इस राज्य स्तरीय हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में देसी चिकित्सा पद्धतियों से उपचार के साथ-साथ लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करने के लिए काउंसिलिंग की भी व्यवस्था होगी। बदलते लाइफ स्टाइल में बेहतर स्वास्थ्य देखभाल के तरीकों से भी लोगों को अवगत कराया जाएगा। यहां मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर आदि की जांच की भी व्यवस्था होगी। बताते चलें कि केंद्र के सहयोग से राज्य के चयनित स्वास्थ्य उपकेंद्रों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) के रूप में अपग्रेड किया गया है। पहली बार राज्य एवं जिला स्तर पर इसके व्यापक स्वरूप में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थापना राज्य बजट से होगी। 23 जिलों में हेल्थ काटेज की भी स्थापना यह सेंटर एक माडल के रूप में काम करेगा। इसी की तर्ज पर रांची को छोड़कर शेष 23 जिलों में हेल्थ काटेज की भी स्थापना की जाएगी। यह राज्य स्तरीय हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का छोटा रूप होगा। बजट में इसके लिए भी राशि का प्रविधान किया गया है।  

निकाय चुनाव की तैयारी तेज: कांग्रेस ने पंजाब के कई जिलों में ऑब्जर्वर किए तैनात

गुरदासपुर. पंजाब की राजनीति से जुड़ी अहम खबर सामने आई है। पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने आने वाले म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, म्युनिसिपल काउंसिल और नगर पंचायतों के चुनावों को ध्यान में रखते हुए एक अहम फैसला लिया है। पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की मंजूरी के बाद अलग-अलग जिलों और शहरों के लिए ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पार्टी द्वारा जारी आधिकारिक आदेशों के तहत गुरदासपुर के बटाला म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के लिए अनिल जोशी को ज़िम्मेदारी दी गई है, जबकि पठानकोट में जसबीर सिंह डिम्पा और कपूरथला में कुलदीप सिंह वैद को ऑब्जर्वर, होशियारपुर में सुनील दत्ती और मोगा में सिमरजीत सिंह बैंस और रमिंदर आवला को जिम्मेदारी दी गई है। बठिंडा, फाजिल्का, SAS नगर समेत कई अहम जिलों में भी सीनियर नेताओं को तैनात किया गया है। इसके अलावा, नगर परिषदों और नगर पंचायतों के लिए भी बड़ी संख्या में ऑब्जर्वर तैनात किए गए हैं। नकोदर, नवांशहर, खन्ना, जगराओं, आनंदपुर साहिब, राजपुरा, नाभा, मलेरकोटला, सुनाम, खरड़, जीरकपुर और डेरा बस्सी जैसे इलाकों में अलग-अलग नेताओं को नियुक्त किया गया है। सूची में मानसा, श्री मुक्तसर साहिब, फिरोजपुर, फरीदकोट और अमृतसर के इलाके भी शामिल हैं।  आधिकारिक आदेशों में यह साफ किया गया है कि सभी ऑब्जर्वर संबंधित सांसदों, विधानसभा क्षेत्रों के उम्मीदवारों, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों और ब्लॉक स्तर के नेताओं के साथ मीटिंग करेंगे। उनकी मुख्य जिम्मेदारी चुनाव की तैयारियों का रिव्यू करना, योग्य उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग करना और पूरे चुनाव प्रोसेस पर नजर रखना होगा। इसके साथ ही, ऑब्जर्वर को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने तय इलाकों में जाकर जमीनी हकीकत समझें और पार्टी कार्यकर्ताओं से संपर्क करके उनसे फीडबैक भी लें। यह पूरी रिपोर्ट 12 मई तक PPCC ऑफिस में जमा करनी होगी।

10 हजार की पहली किस्त मिली, लेकिन 20 हजार के लिए नहीं मिल रहीं पात्र महिलाएं

 आरा भोजपुर जिले में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10-10 हजार की पहली किस्त हासिल करने वाली महिला लाभार्थियों की संख्या चार लाख सत्रह सौ साठ थी। इसके बावजूद जिले में करीब 22 हजार महिलाओं को राशि विलंब से आवेदन करने के कारण नहीं मिल सकी। उन्हें आज भी इस राशि का इंतजार है। वहीं, दूसरी किस्त के लिए योग्य महिला उद्यमी नहीं मिल रही हैं। जिनको 20-20 हजार रुपए दिए जाने हैं। मई माह में राज्य सरकार ने दूसरी किस्त जारी करने का निश्चय किया है। सभी जिले को पत्र देकर दूसरी किस्त के योग्य महिला उद्यमी की सूची सौंपनी है। भोजपुर जिले में भी सूची तैयार हो रही है। इसमें चौंकाने वाली रिपोर्ट आ रही है। सूची तैयार करने की जिम्मेदारी ग्राम संगठनों की है। जिले में 1582 ग्राम संगठन हैं। ग्राम संगठन मानक के अनुसार दूसरी किस्त के लिए योग्य जीविका दीदी को चयन कर रहे हैं। इन्हें मानक के अनुसार कुल लाभार्थी के पांच से छह प्रतिशत महिला उद्यमी मिले हैं। जिला जीविका दीदी के पदाधिकारी मनीष ने बताया कि जिले में पहली किस्त प्राप्त करने वाले अधिकांश महिला उद्यमी अभी अपना रोजगार शुरू नहीं की है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जिले में दूसरी किस्त के लिए करीब 24 हजार महिला उद्यमी को मानक के अनुसार योग्य पाया गया है। दूसरी किस्त के लिए तैयार हो रहा आंकड़ा विगत फरवरी माह से जिले में महिला उद्यमियों को चयन करने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें महिला उद्यमी से 10 हजार रुपए की राशि, क्या रोजगार में शुरू किया, की जानकारी मांगी जाती है। इस बाबत ग्राम संगठनों ने सात प्रश्न सुनिश्चित किया है। जो महिला उद्यमी उसको पूरा करती हैं, उसी को 20-20 हजार रुपए की किस्त मिलेगी। इनका डेटा पोर्टल पर अपलोड हो रहा है। मुख्यालय भेजने के लिए आज मंगलवार तक अंतिम तिथि निर्धारित थी। आरा सदर प्रखंड में 1 प्रतिशत भी कम योग्य लाभार्थी भोजपुर जिले के सबसे अधिक शहरी इलाका आरा सदर प्रखंड में है। यहां पर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत पहली किस्त हासिल करने वाली महिलाओं की संख्या करीब 26 हजार रही है। इन महिलाओं ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10-10 हजार रुपए की राशि प्राप्त की है। इस प्रखंड में 120 ग्राम संगठन है। दूसरी किस्त के लिए सर्वे के बाद 234 जीविका दीदी को दूसरी किस्त के लायक पाया गया। यह संख्या कुल लाभार्थियों के एक प्रतिशत से भी कम है।

झारखंड आबकारी नीति विवाद: अनिल टुटेजा पर क्या हैं आरोप?

रांची  झारखंड के शराब घोटाला मामले में IAS अनिल टुटेजा को जमानत मिल गई है। उन पर झारखंड के अधिकारियों के साथ मिलकर आबकारी नीति में बदलाव करवाकर अपने पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने और करोड़ों रुपये का कमीशन कमाने का आरोप है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार करते हुए 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो साल्वेंट जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि कोर्ट ने ये शर्त रखी है कि अगर IAS ने जांच में किसी भी तरह की बाधा डाली, तो EOW अग्रिम जमानत के आदेश को रद कराने वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में टुटेजा को जांच में सहयोग करने व गवाहों को प्रभावित न करने की सख्त हिदायत भी दी है। अभी जेल से निकलना मुश्किल बता दें कि करीब एक सप्ताह पहले छत्तीसगढ़ के चर्चित डीएमएफ घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे अनिल टुटेजा की जमानत याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। ऐसे में उनका जेल से बाहर आना फिलहाल मुश्किल है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने अनिल टुटेजा पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और आईपीसी की धारा 420, 120बी के तहत मामला दर्ज किया है। कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई नीति आरोप है कि टुटेजा और अन्य आरोपितों ने झारखंड में छत्तीसगढ़ के आबकारी मॉडल की तर्ज पर अवैध शराब का कारोबार चलाने के लिए सिंडिकेट बनाया था। सिंडिकेट ने झारखंड की आबकारी नीति में बदलाव करवाकर अपने पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया और करोड़ों रुपये का अवैध कमीशन कमाया। अपनी याचिका में टुटेजा ने ये लगाए आरोप वहीं, अनिल टुटेजा ने कोर्ट को बताया कि यह उसे हमेशा जेल में रखने की साजिश का मामला है। जब भी एक मामले में जमानत मिलने वाली होती है तो जेल में रखने के लिए एक नई FIR दर्ज कर दी जाती है। झारखंड पुलिस ने इसी मामले में अलग से एफआइआर दर्ज की है, लेकिन टुटेजा को आरोपित तक नहीं बनाया गया है। छापेमारी में नहीं मिली कोई अवैध संपत्ति याचिका में कहा है कि बीते पांच साल में पांच अलग-अलग एजेंसियों ने छापेमारी की, लेकिन उनके के पास से एक भी रुपए की बेहिसाब संपत्ति नहीं मिली। जांच एजेंसी के पास कोई डिजिटल सबूत, कॉल रिकॉर्ड या वित्तीय लेनदेन का प्रमाण भी नहीं है, जो उसे झारखंड के अधिकारियों से जोड़ता हो। राज्य सरकार टुटेजा को बताया मास्टरमाइंड छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा, अनिल टुटेजा चावल मिलिंग, डीएमएफ, कोयला और शराब जैसे कई घोटालों का मास्टरमाइंड है। राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि टुटेजा ने रायपुर में बैठकें कर झारखंड के अधिकारियों के साथ साजिश रची, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। सिंडिकेट माडल के जरिए बेहिसाब संपत्ति अर्जित की गई।

सरकारी जमीन को लेकर दो गुटों में हिंसा, श्योपुर में 24 घायल, 8 की हालत गंभीर

 श्योपुर /वीरपुर  सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात वीरपुर थाना क्षेत्र के नेहलापुरा गांव में सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। रावत और जाटव समाज के लोगों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी से हमला घटना के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर जमकर लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी से हमला किया। इतना ही नहीं, पथराव भी हुआ जिससे हालात और बिगड़ गए। इस हिंसा में कुल 24 लोग घायल हो गए, जिनमें महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया है। लंबे समय से चल रहा था विवाद जानकारी के अनुसार, नेहलापुरा गांव में सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद ने सोमवार रात उग्र रूप ले लिया और दोनों गुट आमने-सामने आ गए। प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन संबंधित अधिकारी समय रहते कार्रवाई नहीं करते। हल्का पटवारी से लेकर तहसील स्तर तक ढिलाई के कारण इलाके में सरकारी जमीनों पर कब्जे बढ़ते जा रहे हैं। वीरपुर क्षेत्र में कई कीमती जमीनें दबंगों के कब्जे में होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। पुलिस जांच में जुटी मामले में वीरपुर पुलिस कार्रवाई कर रही है और पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। अधिकारी का बयान इस संबंध में महाराज सिंह बघेल ने बताया कि जमीनी विवाद को लेकर दो गुटों में संघर्ष हुआ है। इसमें कई लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।  

सिद्धार्थनगर हादसा: तेज आंधी में 32 लाख की टंकी टूटकर हवा में लटकी

 सिद्धार्थनगर उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के खुनियाव ब्लॉक के रमवापुर विशुनपुर गांव में जल जीवन मिशन योजना के तहत बनाई जा रही एक पेयजल टंकी आंधी के कारण क्षतिग्रस्त हो गई. यह हादसा 5 मई को दोपहर करीब 12 बजे उस समय हुआ जब मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के कर्मचारी टंकी के ऊपरी हिस्से में जिंक एलम मटेरियल की बोल्टिंग कर रहे थे. अचानक आए तेज हवा के दबाव के कारण निर्माणाधीन टॉप रूफ टूटकर नीचे की ओर लटक गया. मौसम विभाग की चेतावनी के चलते मजदूर पहले ही नीचे उतर आए थे, जिससे इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।  32 लाख की लागत से बन रही थी टंकी हैदराबाद की मेघा इंजीनियरिंग कंपनी द्वारा बनाई जा रही इस पेयजल टंकी की कुल लागत 32.41 लाख रुपये बताई जा रही है. डेढ़ लाख लीटर की स्टोरेज क्षमता वाली यह टंकी निर्माणाधीन अवस्था में थी।  कंपनी को जिले में ऐसी करीब 150 टंकियां बनाने का जिम्मा मिला हुआ है. स्थानीय लोगों ने जब टंकी के ऊपरी हिस्से को टूटते देखा, तो गांव में अफरातफरी मच गई, हालांकि मजदूरों की सूझबूझ से एक बड़ा हादसा होने से टल गया।  इंजीनियर ने बताया कैसे हुआ हादसा जल जीवन मिशन के अधिशाषी अभियंता संजय कुमार जायसवाल ने बताया कि टंकी का आरसीसी निर्माण पहले ही पूरा हो चुका था. वर्तमान में कंटेनर में जिंक एलम का काम लेयर दर लेयर चल रहा था. दो लेयर का काम पूरा होने के बाद आज बोल्टिंग की प्रक्रिया जारी थी. करीब 15-16 मीटर की ऊंचाई पर हवा का दबाव इतना अधिक था कि बोल्टिंग पूरी न होने की वजह से ढांचा भार नहीं सह सका. अब इसे दोबारा मानक के अनुसार तैयार कराया जाएगा।  सुरक्षा के मद्देनजर काम रोकने के आदेश घटना की सूचना मिलते ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया. मौसम विभाग द्वारा जारी खराब मौसम के अलर्ट को देखते हुए अधिशाषी अभियंता ने जिले में चल रहे सभी टंकी निर्माण कार्यों को फिलहाल रोकने के आदेश दिए हैं. इंजीनियर जायसवाल के अनुसार, जिले में लगभग 100 ऐसी टंकियां सुरक्षित रूप से पूर्ण हो चुकी हैं, लेकिन निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करना और खराब मौसम में काम न करना अब अनिवार्य कर दिया गया है।