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CM डॉ. मोहन यादव बोले- डिजिटल इंडिया से लोगों का जीवन हुआ सरल और सुगम

डिजिटल इंडिया से जीवन हुआ है सरल और सुगम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया की 11 वर्षों में हुई प्रगति के लिए माना उनका आभार भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 'डिजिटल इंडिया' की 11 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा का पूर्ण होना गर्व का विषय है। 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य की ओर बढ़ते डिजिटल कदमों से देशवासियों का जीवन सरल व सुगम हुआ है। साथ ही देश में समृद्धि के नए द्वार भी खुले है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री मोदी का डिजिटल इंडिया की इन 11 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा के लिये आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डिजिटल यात्रा की उपलब्धियों के संबंध में जानकारी साझा करते हुए अपने संदेश में बताया कि पिछले 11 वर्षों में डिजिटल क्रांति ने यूपीआई से 81 प्रतिशत डिजिटल भुगतान सुनिश्चित किया, 2.18 लाख ग्राम पंचायतें भारत नेट से जुड़ीं, 45 हजार से अधिक जीपीयू से ए.आई. मिशन को गति मिली और 2.23 लाख स्टार्ट-अप्स ने 23.36 लाख रोजगार सृजित किए।  

बोरवेल में बच्चे की मौत के बाद कार्रवाई, अंबाला में खेत मालिक सहित तीन पर FIR

अंबाला. गांव धन्यौड़ा के खेत में मंगलवार सुबह सात बजे खुले पड़े 300 फीट गहरे बोरवेल में साढ़े तीन वर्षीय मासूम निरवैर सिंह उर्फ निर्भय की मौत के बाद प्रशासन ने एक्शन लिया है। लापरवाही बरतने के आरोप में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। SP अजीत सिंह शेखावत ने कहा कि इस दुखद घटना में परिवार की शिकायत के आधार पर तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। एसपी ने कहा कि बोरवेल को मालिक और ठेकेदार ने खुला छोड़ दिया था और सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए गए, जिससे यह हादसा हुआ। वहां न कोई चेतावनी बोर्ड लगा हुआ था और न कोई बैरियर। शिकायत मिलने पर सदर पुलिस स्टेशन ने 3 लोगों के खिलाफ (खेत का मालिक और दो अन्य, जिन्होंने खेत ठेके पर लिया हुआ था) मामला दर्ज किया है। मामले के सभी तथ्यों की जांच के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 20 घंटे तक मौत से लड़ा निर्भय बता दें कि मंगलवार को बच्चे को निकालने के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ), सेना की टीम, प्रशासन और पंजाब के संगरूर से आई विशेषज्ञ टीम रेस्क्यू में देर रात तक लगी थीं। करीब 20 घंटे की मशक्कत के बाद रात करीब साढ़े चार बजे बच्चे को 160 फीट ऊपर तक लाया गया। लेकिन बच्चे को बचाया नहीं जा सका। रेस्क्यू के दौरान रात करीब 10 बजे बोरवेल में 220 फीट तक रस्सी जा रही थी और निर्भय 40 फीट और नीचे चला गया था। बोरवेल में डाले गए कैमरे से मिली तस्वीरों में बच्चे पर वर्षा का पानी गिरता दिखाई दे रहा था। रेस्क्यू टीम ने जिस कैमरे से बच्चे की स्थिति जांची, उसमें हलचल नहीं दिखी।  पिता को खाने दे जा रहा था निर्भय बता दें कि धन्यौड़ा का किसान मंजीत मंगलवार सुबह 6:30 बजे पिता को खाना देने खेत जा रहा था तो बेटे निर्भय ने भी जाने की जिद की तो मंजीत साथ ले गया। पिता को खाना दे वह काम करने लगा। तभी निर्भय खेत में खेलने लगा। वहां रास्ते के साथ नौ इंची चौड़े बोरवेल बोरी से ढकी थी। निर्भय उस बोरी पर कूद गया और बोरवेल में चला गया।

पंजाब में ई-ऑफिस सिस्टम लागू, सिविल सर्जन कार्यालयों में अब ऑनलाइन होगी फाइलों की प्रक्रिया

चंडीगढ़. पंजाब के सेहत और परिवार कल्याण विभाग ने दफ्तरी काम में पारदर्शिता लाने और झंझट खत्म करने के लिए एक अहम फैसला लिया है। डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज द्वारा जारी आदेशों के अनुसार एक जुलाई से सभी सिविल सर्जन दफ्तरों का सारा ऑफिशियल काम अब ई-ऑफिस पोर्टल के जरिए किया जाएगा। इस नए ऑनलाइन सिस्टम के तहत पहले पड़ाव में छुट्टियों, शिकायतों और कोर्ट केस से जुड़ी फाइलें सिविल सर्जन ऑफिस से सीधे डायरेक्टर ऑफिस में ई-ऑफिस के जरिए भेजी जाएंगी। इसके बाद अगले पड़ाव में प्रमोशन, NOC, M.A.C.P., फाइनेंशियल मामले और दूसरी जरूरी एडमिनिस्ट्रेटिव फाइलों का भी निपटारा इसी प्रणाली के जरिए होगा। जिला स्तर पर इस सिस्टम को सही तरीके से लागू करने के लिए सभी सिविल सर्जन को अपने-अपने ऑफिस से कंप्यूटर की तकनीकी जानकारी रखने वाले एक अधिकारी या कर्मचारी को मास्टर ट्रेनर के तौर पर नामजद करने की हिदायतें दी गई है जो बाकी स्टाफ को ट्रेनिंग देगा। पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (P.CM.S.A.) ने विभाग के इस कदम का स्वागत किया है और कहा है कि यह बड़ा प्रशासनिक सुधार है जिससे डॉक्टरों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है। इससे ऑफिस में होने वाली फालतू की देरी खत्म होगी और मेडिकल ऑफिसर्स को अपना काम करने में होने वाली परेशानी से छुटकारा मिलेगा, जिससे पूरे सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी पक्की होगी। 

योगी सरकार ने एआई डायग्नोस्टिक सुविधाओं के लिए केंद्र संग एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

लखनऊ  योगी सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सुलभ और तकनीक आधारित बनाने क दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेशवासियों को अत्याधुनिक एवं निःशुल्क डायग्नोस्टिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा उत्तर प्रदेश सरकार के बीच प्रधानमंत्री निधि के तहत एआई-सक्षम पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन, 1.5 टेस्ला एमआरआई एवं डिजिटल मैमोग्राफी टोमोसिंथेसिस (डीबीटी) मशीनों की आपूर्ति, स्थापना एवं संचालन के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता जून-26 से मार्च-36 तक प्रभावी रहेगा। इससे प्रदेश के नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके निकट ही आधुनिक रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग सेवाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान संभव होगी, उपचार में होने वाली देरी कम होगी तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा। एआई आधारित आधुनिक इमेजिंग तकनीक से कैंसर और हृदय रोग की सटीक हो सकेगी पहचान अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने बताया कि यह पहल उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित आधुनिक इमेजिंग तकनीक के उपयोग से कैंसर, क्षय रोग (टीबी), हृदय रोग सहित अन्य गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) का प्रारंभिक चरण में सटीक निदान संभव हो सकेगा। समय पर बीमारी की पहचान होने से मरीजों का उपचार अधिक प्रभावी होगा और मृत्यु दर में कमी लाने में भी सहायता मिलेगी। एमओयू का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं पहुंचाना है। विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां अब तक उन्नत जांच सुविधाएं सीमित रही हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में क्षेत्रीय असमानता भी कम होगी और लोगों को बड़े शहरों के अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एमओयू के अनुसार भारत सरकार मशीनों की केंद्रीकृत खरीद, आपूर्ति, स्थापना, कमीशनिंग तथा प्रारंभिक अनुरक्षण की जिम्मेदारी निभाएगी। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित करेगी, साइट की तैयारी सुनिश्चित करेगी, सभी आवश्यक नियामकीय अनुमतियां प्राप्त करेगी तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता के साथ उपकरणों के प्रभावी संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी। इस समन्वित व्यवस्था से परियोजना का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। मशीनों की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए विकसित किया जाएगा रीयल टाइम आईटी पोर्टल एमओयू के अनुसार, सभी मशीनों की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए एक अत्याधुनिक रीयल टाइम आईटी पोर्टल विकसित किया जाएगा। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रत्येक मशीन की कार्यशीलता, उपयोग की स्थिति, उपलब्ध कराई गई सेवाओं, जांच कराने वाले लाभार्थियों की संख्या तथा उपकरणों के प्रदर्शन की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, उपकरणों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और आवश्यकतानुसार त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई भी संभव हो सकेगी। उपकरणों के दीर्घकालिक संचालन को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री निधि के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली सभी मशीनों पर एक वर्ष की वारंटी के बाद अगले नौ वर्षों तक व्यापक वार्षिक अनुरक्षण की व्यवस्था भी की गई है। इससे मशीनों के रखरखाव में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी तथा मरीजों को लगातार गुणवत्तापूर्ण जांच सेवाएं उपलब्ध होती रहेंगी।

बारिश में बालों का झड़ना रोकेंगे ये 7 आसान घरेलू उपाय, रखें बाल मजबूत हमेशा।

बारिश का मौसम हमें भीषण गर्मी से तो राहत दिलाता है, लेकिन अपने साथ हवा में बहुत ही ज्यादा ह्यूमिडिटी भी लेकर आता है. बारिश के इस मौसम में हमें कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है, जिनमें से एक है तेजी से बालों का झड़ना. हवा में मॉइस्चर होने की वजह से स्कैल्प चिपचिपा हो जाता है, जिस वजह से बैक्टीरिया और फंगल इन्फेक्शन का खतरा और भी ज्यादा बढ़ने लगता है. इसका नतीजा होता है कि हमारे बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं और देखते ही देखते टूटने भी लग जाती हैं. अगर बारिश के दिनों में आपको भी हेयर फॉल की समस्या होती है, तो आज की यह आर्टिकल आपके काम की होने वाली है. आज हम आपको 7 ऐसे आसान और कमाल के घरेलू उपाय बताने जा रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप बारिश के इस मौसम में भी अपने बालों को मजबूत, शाइनी, हेल्दी और खूबसूरत बनाकर रख सकेंगे. तो चलिए, इन उपायों के बारे में जानते हैं विस्तार से. बारिश के पानी से बालों को बचाएं बारिश के पानी में भीगने में भले ही आपको बहुत मजा आता हो, लेकिन आज के समय में बारिश के पानी में पॉल्यूशन के साथ हानिकारक केमिकल भी मिले हुए होते हैं. जब इस तरह का केमिकल वाला और पॉल्यूटेड पानी हमारे सिर पर पड़ता है, तो बालों की जड़ों को कमजोर कर देता है. इसलिए बारिश के दिनों में जब भी आप अपने घर से बाहर निकलें, एक छाता या फिर स्कार्फ अपने साथ जरूर रखें. अगर आप किसी कारण से भीग जाते हैं, तो घर आने के बाद सबसे पहले अपने बालों को अच्छी तरह से गुनगुने पानी से धोकर साफ करें. एंटी-फंगल और माइल्ड शैंपू का इस्तेमाल करें बारिश के दिनों में स्कैल्प पर पसीना और ऑयल जमा होने की वजह से डैंड्रफ की समस्या काफी ज्यादा बढ़ जाती है. आप सभी यह बात तो जानते ही होंगे कि डैंड्रफ भी आपके बालों के झड़ने का एक मुख्य कारण बन सकता है. डैंड्रफ की प्रॉब्लम से बचने के लिए हफ्ते में दो से तीन बार एक माइल्ड या एंटी-फंगल शैंपू का इस्तेमाल करके अपने बालों को जरूर ही धोएं. इस बात का ख्याल रखें कि ऐसा शैंपू चुनें जिसमें सल्फेट और पैराबेंस जैसे हार्श केमिकल न हों, ताकि आपके बालों का नेचुरल मॉइस्चर बरकरार रहे. कभी न भूलें कंडीशनर लगाना हवा में ह्यूमिडिटी और मॉइस्चर होने की वजह से बारिश के मौसम में हमारे बाल ड्राई, बेजान और फ्रिजी हो जाते हैं. जब आपके बाल ज्यादा उलझते हैं, तो कंघी करते समय वे टूटते भी ज्यादा हैं. इसलिए यह काफी जरूरी हो जाता है कि शैंपू करने के बाद आप अपने बालों की लंबाई पर एक अच्छे कंडीशनर का इस्तेमाल जरूर करें. कंडीशनर आपके बालों को न्यूट्रिशन देता है, जिसकी वजह से वे आपस में उलझते नहीं हैं और एक प्रोटेक्टिव लेयर भी बनती है. आपको सिर्फ इस बात का ख्याल रखना है कि कंडीशनर को केवल बालों पर लगाएं, स्कैल्प पर गलती से भी नहीं. गीले बालों में कंघी करने से बचें यह एक ऐसी गलती है जिसे अनजाने में हम आए दिन दोहराते ही रहते हैं. अगर आप अपने बालों को डैमेज होने से बचाना चाहते हैं, तो आपको यह समझना होगा कि जब आपके बाल गीले होते हैं, तब उनकी जड़ें सबसे ज्यादा नाजुक और कमजोर होती हैं. ऐसे में अगर आप तुरंत गीले बालों पर कंघी करते हैं, तो वे बहुत ही तेजी से टूटने लगते हैं. बालों को अगर आप हेल्दी रखना चाहते हैं, तो उन्हें धोने के बाद नैचुरली सूखने का मौका दें. जब आपके बाल पूरी तरह सूख जाएं, तभी चौड़े दांतों वाली लकड़ी की कंघी का इस्तेमाल करके, वह भी बिल्कुल हल्के हाथों से, उन्हें सुलझाएं. स्कैल्प को हमेशा रखें ड्राई और क्लीन मानसून में अक्सर पसीने और मॉइस्चर की वजह से स्कैल्प हमेशा गीला या फिर चिपचिपा महसूस होता रहता है. यह माहौल फंगल इन्फेक्शन और बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है. इसलिए, यह बहुत ही जरूरी हो जाता है कि आप अपने स्कैल्प को हमेशा साफ और सूखा रखें. अगर वर्कआउट करने या फिर बाहर से आने के बाद आपका स्कैल्प पसीने से गीला हो गया है, तो उसे तौलिए से उन्हें अच्छी तरह सुखा जरूर लें. हैवी ऑयलिंग करने से बचें वैसे तो बालों में तेल लगाना बहुत ही अच्छा और फायदेमंद माना जाता है, लेकिन बारिश के दिनों में बहुत ज्यादा या हैवी ऑयलिंग करने से आपको बचना चाहिए. जैसा कि हमें आपको पहले भी बताया कि इस मौसम में हमारा स्कैल्प पहले से ही चिपचिपा होता है, और ऐसे में अगर बहुत ज्यादा तेल लगाया जाए, तो वह धूल और गंदगी को अपनी तरफ खींचने लगेगा, जिससे बालों के पोर्स बंद भी हो सकते हैं. ऐसा न हो इसलिए आपको हफ्ते में सिर्फ एक बार हल्के गुनगुने नारियल या आल्मंड ऑयल से सिर्फ 15 से 20 मिनट के लिए हल्की मसाज करनी चाहिए और करीबन एक घंटे बाद अपने बालों को अच्छी तरह से धो जरूर लें. हेयर ड्रायर और स्टाइलिंग टूल्स से दूरी बनाएं बारिश के दिनों में हमारे बाल नॉर्मल दिनों की तुलना में ज्यादा देर से सूखते हैं. ऐसे में कई लोग अपने बालों को जल्दी सुखाने के लिए बार-बार हेयर ड्रायर का इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा, स्ट्रेटनर या कर्लर जैसे हीटिंग टूल्स का इस्तेमाल भी आपके बालों को और भी ज्यादा कमजोर और ड्राई बना देता है. बारिश के मौसम में बालों को नैचुरली हवा में ही सूखने देना सबसे बेस्ट माना जाता है. अगर आपके लिए बहुत ही जरूरी है, तो ड्रायर को कूल मोड पर रखकर इस्तेमाल करना आपके लिए बेस्ट है.

सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार पर सरकार कायम, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र ने आदेश पर दी बड़ी सफाई

रायपुर. छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार के आदेश को लेकर सियासी बयानबाजी जारी है. आदिवासी संगठन, ईसाई संस्थाओं के साथ कांग्रेस ने राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई है. इस घटनाक्रम के बीच स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंन्द्र यादव का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार देने के उद्देश्य से मंत्रोच्चार कराने का फैसला लिया गया, लेकिन दुर्भाग्य है कि कांग्रेस ने इसके खिलाफ कोर्ट में याचिका लगाई है. शिक्षा गजेन्द्र यादव का कहना है कि फिलहाल सरकारी स्कूलों में निर्बाध रूप से मंत्रोच्चार चलेगा. मामले में कोर्ट जो फैसला सुनाएगी, उसके अनुसार आगे होगा. सरकार अपने आदेश पर कायम है और अदालत का जो भी फैसला आएगा, उसके अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी. रिटायर्ड शिक्षकों को बड़ी राहत छत्तीसगढ़ में शिक्षा सत्र 2026-27 के दौरान रिटायर होने वाले शिक्षकों को बड़ी राहत दी गई है. वह पूरे शैक्षणिक सत्र तक पढ़ा सकेंगे. इस फैसले को लेकर शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने बताया कि शैक्षणिक सत्र के बीच अगर कोई शिक्षक रिटायर होता है तो वह सत्र के आखिर तक स्कूलों में पढ़ा सकेगा. हालांकि अगर कोई ऐसा नहीं करना चाहता है, तो यह अलग विषय है, लेकिन ज्यादातर लोगों की इस पर सहमती रहती है.

मध्य प्रदेश में 9 साल बाद प्रमोशन की राह खुली, कानूनी राय के बाद मोहन सरकार एक्शन में

भोपाल  मध्य प्रदेश के करीब दो लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए लंबे समय से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। लगभग नौ वर्षों से लंबित प्रमोशन को लेकर सरकार को महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) की कानूनी राय मिलने के बाद प्रशासन ने सभी विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं। यदि प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो कर्मचारियों को पदोन्नति न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन मिलेगी। सरकार ने मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन से कानूनी राय ली थी। राय में स्पष्ट किया गया कि इन नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाएं हाईकोर्ट में लंबित जरूर हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने नियमों के क्रियान्वयन पर कोई अंतरिम रोक (स्टे) नहीं लगाई है। इसलिए नियम पूरी तरह प्रभावी हैं और इनके तहत पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।  सभी विभागों और कलेक्टरों को भेजे गए निर्देश कानूनी राय मिलने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों के प्रभारी सचिवों, विभागाध्यक्षों और सभी जिला कलेक्टरों को पत्र भेजकर राय का परीक्षण करने और आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि सरकार जल्द ही विभागीय पदोन्नति समितियों (डीपीसी) की बैठकें बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।  सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी दिया गया हवाला कानूनी राय में सुप्रीम कोर्ट के 'स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश बनाम विनय कुमार बबेले' मामले सहित हाईकोर्ट के कई आदेशों का उल्लेख किया गया है। इनमें कहा गया है कि केवल नियमों को अदालत में चुनौती दिए जाने भर से सरकार पदोन्नति प्रक्रिया नहीं रोक सकती। हालांकि, सभी पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी।  मौखिक आश्वासन को नहीं माना गया बाध्यकारी राय में यह भी कहा गया कि जब पदोन्नति नियम-2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शुरुआती सुनवाई हुई थी, तब सरकार की ओर से केवल मौखिक रूप से यह कहा गया था कि सुनवाई पूरी होने तक पदोन्नति नहीं की जाएगी। लेकिन यह आश्वासन किसी न्यायिक आदेश का हिस्सा नहीं बना था, इसलिए इसे कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं माना जा सकता। नई बेंच करेगी सुनवाई 17 फरवरी 2026 को याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया गया था, लेकिन इस बीच एक न्यायाधीश के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने और दूसरे के स्थानांतरण के कारण फैसला नहीं आ सका। अब यह मामला नई खंडपीठ के समक्ष फिर से सुना जाएगा। ऐसे में अंतिम निर्णय आने में समय लग सकता है, जिससे सरकार को पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाने का कानूनी आधार मिल गया है। कर्मचारियों को मिल सकती है बड़ी राहत यदि सरकार कानूनी राय के अनुरूप कार्रवाई करती है तो करीब दो लाख कर्मचारियों की वर्षों से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। हालांकि, सभी पदोन्नतियां हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी।  

Patna News: अतिक्रमण पर चला बुलडोजर, DM ने खाली कराई जमीन; अब विकसित होंगे पार्क और खेल मैदान

 पटना डीएम कुंदन कुमार ने अतिक्रमण उन्मूलन अभियान को प्रभावी बनाने के लिए कई आदेश दिए। एक ओर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए लापरवाही पर कार्रवाई की व्यवस्था की तो दोबारा अतिक्रमण रोकने के लिए खाली स्थान की बोलार्ड से बैरिकेडिंग कर वहां ग्रीन पार्क, रिक्रिएशन जोन या बैडमिंटन कोर्ट बनाने का निर्देश दिया। डीएम मंगलवार को नगर आयुक्त यशपाल मीणा, एडीएम सिटी संजय कुमार, एडीएम आरके दिवाकर, एडीएम चित्रगुप्त कुमार, नगर दंडाधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक, नगर कार्यपालक व अन्य अधिकारियों के साथ अतिक्रमण-उन्मूलन अभियान की विस्तृत समीक्षा की और एक से 31 जुलाई तक चलने वाले अभियान प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। जोनवाइज हॉटस्पॉट चिह्नित कर स्थायी समाधान पर जोर: डीएम ने एडीएम सिटी को निर्देश दिया कि नगर निगम व अन्य निकायों के टाउन प्लानर की मदद से शहरी क्षेत्र का सर्वेक्षण कर जोनवाइज अतिक्रमण हॉटस्पॉट (अतिक्रमण के संवेदनशील क्षेत्रों) को चिह्नित कर कार्य योजना बनाकर अतिक्रमण का स्थायी समाधान किया जाए। इसके लिए खाली हुए क्षेत्र में सुंदरीकरण व विकास के कार्य किए जाएं। वहां जन सुविधाओं जैसे ग्रीन पार्क, बैडमिंटन कोर्ट, रिक्रिएशन जोन अन्य सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की जाएं। दोबारा अतिक्रमण रोका जाए। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने के बाद संबंधित विभागों के अधिकारी उस स्थान की बोलार्ड से बैरिकेडिंग कर वाहनों का प्रवेश स्थायी रूप से रोकें। दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके विरुद्ध विभागीय एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जल्द शुरू होंगे 32 वेंडिंग जोन: नगर आयुक्त ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में 32 वेंडिंग जोन प्रस्तावित है। डीएम ने सभी हितधारकों से समन्वय स्थापित कर इन वेंडिंग जोन में आसपास के अव्यवस्थित वेंडिंग शांप व वेंडर्स को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। एक से 31 जुलाई तक अभियान के लिए नौ टीमों का गठन किया गया है। यह मल्टी-एजेंसी विशेष अभियान नगर निगम के छह अंचलों नूतन राजधानी, पाटलिपुत्र, कंकड़बाग, बांकीपुर, अजीमाबाद, पटना सिटी के साथ नगर परिषद खगौल, फुलवारीशरीफ व दानापुर में चलेगा। इसमें विभिन्न विभागों के पदाधिकारी-कर्मी शामिल हैं। इन क्षेत्रों पर रहेगी विशेष नजर: डीएम ने कहा कि नेहरू पथ, जेपी गंगापथ, हवाई अड्डा रोड, अशोक राजपथ, दीघा-आशियाना रोड, गांधी मैदान, सगुना मोड़, दानापुर रेलवे स्टेशन रोड शहर की लाइफलाइन है। जनहित में यह आवश्यक है कि अतिक्रमणकारियों के विरूद्ध प्रभावी कार्रवाई हो। अतिक्रमण उन्मूलन अभियान का असर दिखना चाहिए ताकि लोगों के मन में विश्वास जागे। अधिकारियों को सभी अस्पतालों समेत हर क्षेत्र की मुख्य सड़कों व सार्वजनिक स्थलों को अतिक्रमण-मुक्त रखने का आदेश दिया। वसूला 55 हजार जुर्माना डीएम कुंदन कुमार के निर्देश पर  राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। इस कई प्रकार की सामग्रियां जब्त करने के साथ स्थायी-अस्थायी अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया। साथ ही 55,500 रुपये जुर्माना वसूला गया। अब तक इस अभियान के तहत कुल 16 लाख 84 हजार 850 रुपये का जुर्माना वसूला जा चुका है। नूतन राजधानी अंचल में आर ब्लाक से स्टेशन गोलंबर से वीणा सिनेमा हाल तक, बांकीपुर अंचल में नाला रोड, आर्य कुमार रोड एवं भिखना पहाड़ी क्षेत्र में, कंकड़बाग अंचल में मलाही पकड़ी से 90 फीट मोड़ तक तथा नगर परिषद खगौल में दानापुर रेलवे स्टेशन से विजय सिंह यादव पथ तक अतिक्रमण हटाया गया। पटना सिटी अंचल में नाला पर से गुरूगोबिंद सिंह लिंक पथ होते हुए भगत सिंह चौक तक, पाटलिपुत्र अंचल में रेल पुलिस केंद्र चीना कोठी से बुद्ध मार्ग तक, अजीमाबाद अंचल में डंका इमली से ज्युडिशियल एकेडमी होते हुए अशोक राज पथ एवं महावीर घाट तक अभियान चलाया गया। नगर परिषद दानापुर निजामत में टी प्वाइंट गोला रोड से गोला रोड मेन तक तथा नगर परिषद फुलवारीशरीफ में थाना गोलंबर से खगौल रोड बीएमपी-16 तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।

दिल्ली में चार साल में बनेंगे 32 हजार चार्जिंग पॉइंट, नई ईवी पॉलिसी लागू।

नई दिल्ली  ईवी पॉलिसी 2.0 के आने के बाद सरकार का अनुमान है कि 2030 तक सड़कों पर 31.83 लाख इलेक्ट्रिक गाड़ियां होंगी। इसमें 77.17 फीसदी टूव्हीलर शामिल होंगी। इस अनुमानित संख्या के आधार पर सरकार ने अगले चार साल में 32 हजार से अधिक चार्जिंग पॉइंट बनाने की भी योजना तैयार कर ली है। नई ईवी पॉलिसी 2.0 के अनुसार, दिल्ली में वर्तमान (15 जून 2026 तक) में कुल 9.89 लाख रजिस्टर्ड ई-गाड़ियां हैं। नई ईवी पॉलिसी में परिवहन विभाग के अनुमान के मुताबिक, आने वाले सालों में हर साल औसतन 7-8 लाख ई-गाड़ियां रजिस्टर्ड होंगी। इन चार सालों में 24.57 लाख ई-टूव्हीलर, 1.88 लाख फोरव्हीलर, 2.50 लाख ई-रिक्शा, 22,887 ई-ऑटो के अलावा अलग-अलग कैटेगरी के कामर्शियल या गुड्स व्हीकल रजिस्टर्ड होंगे। ईवी पॉलिसी 2.0 में हर साल 6-7 लाख गाड़ियां बढ़ेंगी     परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि चार्जिंग इंफ्रा की योजना भी पॉलिसी में तैयार की गई है।     चार साल में 32 हजार चार्जिंग पॉइंट तैयार होंगे, जिसमें 8913 अभी मौजूद हैं।     अगले चार साल में एक हजार करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश करके कुल 23 हजार से अधिक चार्जिंग पॉइंट बनाए जाएंगे।     बैटरी स्वैपिंग पॉइंट भी बनाए जाएंगे। ईवी पॉलिसी के अनुसार, कुल मौजूद इलेक्ट्रिक गाड़ियों में से 9.57 लाख गाड़ियों को पब्लिक चार्जिंग इंफ्रा की जरूरत पड़ेगी।     कुल मौजूद ई-टूव्हीलर में से 25 फीसदी को पब्लिक चार्जिंग स्टेशन की जरूरत होगी।     इसी तरह 25 फीसदी निजी ई-कार के लिए चार्जिंग पॉइंट की जरूरत होगी।     6-7 लाख गाड़ियां हर साल बढ़ेंगी ईवी पॉलिसी 2.0 में     32 हजार से ज्यादा चार्जिंग पॉइंट बनाने की प्लानिंग कर रही सरकार अगले चार साल में     सीएम ने कहा, पुरानी ईवी पॉलिसी की कमियों को दूर कर बनाया गया 2030 का रोडमैप     2030 तक दिल्ली के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को ई-मोबिलिटी की दिशा में ले जाने की प्लानिंग कितनी खूबसूरत हैं रवीना टंडन की 21 साल की बेटी राशा, देखिए वीडिय नई ईवी पॉलिसी जुलाई से होगी लागू नई ईवी पॉलिसी-2026 एक जुलाई से लागू हो जाएगी। सीएम आतिशी मार्लेना ने कहा कि इसका उद्देश्य केवल इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीद को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि 2030 तक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में ले जाना है। इसलिए नई नीति में ई-गाड़ी की खरीद के साथ बैटरी मैनेजमेंट, चार्जिंग पॉइंट इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का रोडमैप तैयार किया है। ईवी पॉलिसी ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की शुरुआत करने में अहम भूमिका निभाई     सीएम के मुताबिक, 2020 में लागू की गई पुरानी ईवी पॉलिसी ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की शुरुआत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन समय के साथ यह महसूस किया गया कि केवल प्रोत्साहन देकर ईवी की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं।     इसी को ध्यान में रखते हुए नई ईवी पॉलिसी-2026 तैयार की गई है, जिसमें चार्जिंग इन्फ्रा के विस्तार, संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने का रोडमैप शामिल है।     नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक टू व्हीलर पर 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी जारी रहेगी।     पुरानी गाड़ी को स्क्रैप कराने पर 10 हजार रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। साथ ही एक अप्रैल 2028 से दिल्ली में नए दोपहिया गाड़ी सिर्फ इलेक्ट्रिक रजिस्टर्ड होंगे।     थ्री व्हीलर के लिए भी प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है।     पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने पर 25 हजार रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप कराने पर 50 हजार तक प्रोत्साहन मिलेगा जनवरी 2027 से ई-ऑटो रिक्शा का रजिस्ट्रेशन केवल इलेक्ट्रिक गाड़ियों के रूप में किया जाएगा। पहली बार माल ढोने वाली गाड़ियों को व्यापक रूप से शामिल किया गया है। एन-1 कैटेगरी के इलेक्ट्रिक ट्रकों पर एक लाख रुपये तक की सब्सिडी और पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप कराने पर 50 हजार तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। शुरुआती एक हजार एन-2 इलेक्ट्रिक ट्रकों को नो-एंट्री समय में विशेष छूट मिलेगी। सरकार ने स्कूल ट्रांसपोर्ट को भी नीति का हिस्सा बनाया है। 2030 तक स्कूल बसों के बेड़े को 30 फीसदी इलेक्ट्रिक करने का लक्ष्य रखा गया है।  

अंबाला में स्वास्थ्य सुविधाओं को बड़ा बढ़ावा, CM नायब सैनी ने 337 करोड़ की 7 परियोजनाएं दीं

अंबाला. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को नारायणगढ़ में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान प्रदेश की जनता को 337 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री ने कुल 7 महत्वपूर्ण स्वास्थ्य परियोजनाओं का शुभारंभ किया और साथ ही 'डॉक्टर्स डे' के अवसर पर चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े सभी कर्मयोगियों को बधाई दी। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का यह अवसर पूरे हरियाणा के लिए ऐतिहासिक है। यह केवल विकास परियोजनाओं का उद्घाटन नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और समृद्ध हरियाणा के निर्माण का हमारा संकल्प है। हमारी सरकार तीसरे कार्यकाल में भी जनकल्याण के कार्यों को दोगुनी गति से आगे बढ़ा रही है। 114 करोड़ रुपये की स्वास्थ्य सेवाएं और 325 अमृत सरोवर समर्पित मुख्यमंत्री ने बताया कि नारायणगढ़ से शुरू की गई इन परियोजनाओं में 114 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 7 स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं। इसके अलावा, पर्यावरण और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 223 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 325 अमृत सरोवर भी प्रदेश की जनता को समर्पित किए गए हैं। नारायणगढ़ नागरिक अस्पताल अब हुआ 100 बेड का क्षेत्र के लोगों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए मुख्यमंत्री ने नागरिक अस्पताल में लगभग 32 करोड़ रुपये की लागत से बने नए 50 बेड के ब्लॉक का उद्घाटन किया। इस नए ब्लॉक के शुरू होने से नारायणगढ़ का नागरिक अस्पताल अब 100 बेड की क्षमता वाला अत्याधुनिक हस्पताल बन गया है। इसके साथ ही अस्पताल में एक ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट का भी शुभारंभ किया गया। आज की परियोजनाओं को मिलाकर अकेले नारायणगढ़ क्षेत्र के विकास पर अब तक ₹858 करोड़ खर्च किए हैं। पिछले साढ़े 11 वर्षों में नारायणगढ़ के लिए कुल 74 घोषणाएं की गई थीं, जिनमें से 61 पूरी हो चुकी हैं और 5 पर काम तेजी से जारी है। इस वित्त वर्ष के बजट में नारायणगढ़ में एक नए राजकीय बहुतकनीकी संस्थान के निर्माण का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में बनने वाले 10 नए औद्योगिक मॉडल टाउनशिप (IMT) में अंबाला और नारायणगढ़ को भी शामिल किया गया है, जिसके लिए जमीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।- सीएम नायब सैनी, हरियाणा कैंसर पीड़ितों को बड़ी राहत सीएम ने याद दिलाया कि गत 11 फरवरी को प्रदेश के 17 जिलों में डे-केयर कैंसर सेंटरों की शुरुआत की गई थी, जिससे मरीजों को स्थानीय स्तर पर बड़ी राहत मिल रही है। नारायणगढ़ में कम्युनिटी सेंटर के निर्माण के लिए पांच करोड़ की राशि अलग से देने का एलान किया। नारायणगढ़ और शहजादपुर दोनों स्थानों पर आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी का निर्माण कराया जाएगा।