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गुरुग्राम में सबसे ज्यादा बदलाव, 56 हजार लोगों ने अपनाया पाइप्ड गैस कनेक्शन

चंडीगढ़ पश्चिम एशिया में हुए युद्ध संकट के दौरान केंद्र सरकार की ओर से जारी निर्देश के बाद हरियाणा के शहरों से करीब सवा लाख उपभोक्ताओं ने एलपीजी रसोई गैस सिलिंडर की जगह पीएनजी कनेक्शन ले लिया है। करीब 34 हजार उपभोक्ता ऐसे हैं जिनके आवेदन अभी गैस पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन के लिए लंबित हैं। कनेक्शन में बदलाव करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या गुरुगाम में सबसे अधिक (56 हजार) है। गुरुग्राम के अलावा पिछले तीन माह में फरीदाबाद, रेवाड़ी, सोनीपत में भी घर के पास गैस लाइन की उपलब्धता को देखते हुए लोगों ने एलपीजी रसोई गैस सिलिंडर को सरेंडर कर पीएनजी कनेक्शन लिया है। ऐसे उपभाक्ताओं को एजेंसी की ओर से सिलिंडर जमा करने के बाद एक फार्म बाउचर के साथ दिया है। इसका उपयोग लोग तब कर सकेंगे जब उन्हें वर्तमान पते को छोड़ दूसरे जिला में नया ठिकाना बनाना होगा और वहां पर पीएनजी की पाइप लाइन घर के पास उपलब्ध नहीं होगी। तब उन्हें इसी बाउचर पर वहां की गैस एजेंसी एलपीजी सिलिंडर के साथ नया कनेक्शन जारी कर देगी। बता दें कि केंद्र सरकार ने ही युद्ध संकट के चलते गैस आपूर्ति में आ रही बाधा के चलते अप्रैल माह में निर्देश जारी किए थे कि पीएनजी की उपलब्धता वाले शहर या क्षेत्र में एलपीजी सिलिंडर का उपयोग करने वाले लोग अपना पीएनजी कनेक्शन लेकर एलपीजी कनेक्शन बंद करा दें। इसके लिए उन्हें समय भी दिया गया था। लोगों को परेशानी नहीं हो इसके लिए पीएनजी कनेक्शन मिलने के बाद एलपीजी सिलिंडर एजेंसी में जमा कराने का एक माह का समय दिया था। हालांकि, होर्मुज समुद्री मार्ग खुलने कर वजह से गैस लेकर आने वाले जहाज निर्वाध रूप से आने लगे हैं लेकिन अभी भी लोगों को पीएनजी कनेक्शन लेने के लिए कहा जा रहा है। केंद्र सरकार के निर्देश पर राज्य सरकार पीएनजी पाइप लाइन बिछाने वाली कंपनियों को एनओसी देने की प्रक्रिया भी सरल कर रखी है।  

रायपुर: मुकेश कोठारी को तिल्दा-नेवरा SDM की जिम्मेदारी, आशुतोष देवांगन बने प्रोटोकॉल अधिकारी

रायपुर. राज्य शासन ने प्रशासनिक कार्य संचालन को ध्यान में रखते हुए रायपुर जिले में अधिकारियों के पदस्थापना आदेश में संशोधन किया है। जारी आदेश के अनुसार, संयुक्त कलेक्टर मुकेश कुमार कोठारी को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), तिल्दा-नेवरा के पद पर पदस्थ किया गया है। वहीं वर्तमान में तिल्दा-नेवरा में एसडीएम के रूप में कार्यरत आशुतोष कुमार देवांगन को प्रोटोकॉल अधिकारी, रायपुर के पद पर आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से पदस्थ किया गया है। गौरतलब है कि इससे पहले 16 अगस्त 2024 को जारी आदेश के तहत आशुतोष कुमार देवांगन को डिप्टी कलेक्टर रायपुर से तिल्दा-नेवरा का एसडीएम बनाया गया था। अब प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से शासन ने उक्त आदेश में संशोधन करते हुए नई पदस्थापना की है। इसका आदेश कलेक्टर कार्यालय के वित्त शाखा ने जारी किया है। ज्ञात हो कि रायपुर जिले में तहसीलदारों में भी फेरबदल किया गया है। इसका आदेश कलेक्टर ने जारी किया है। तबादला आदेश के मुताबिक आरंग, धरसीवां, मंदिर हसौद, खरोरा, गोबरा नवापरा के तहसीलदारों को इधर से उधर किया गया है।

जल गुणवत्ता निगरानी में जनभागीदारी और पंचायत की कार्यप्रणाली की सराहना, पौधरोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

भोपाल ओडिशा के पंचायती राज एवं पेयजल मंत्रीरबी नारायण नाइक ने प्रतिनिधिमंडल के साथ मुगलिया हाट गांव पहुंचकर ग्रामीण पेयजल योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का अवलोकन किया। भ्रमण के दौरान उन्होंने गांव में संचालित पेयजल आपूर्ति प्रणाली, जल गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था तथा पंचायत की कार्यप्रणाली का विस्तार से अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने में सामुदायिक भागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका है और मुगलिया हाट में इसका प्रभावी उदाहरण देखने को मिला। भ्रमण के दौरान मंत्रीनाइक ने ग्राम सरपंच, फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) से जुड़ी महिला सदस्यों तथा ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी) के सदस्यों से संवाद कर जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी, पेयजल योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव तथा ग्रामीण समुदाय की सहभागिता के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने ग्रामीणों द्वारा निभाई जा रही जिम्मेदारियों और पंचायत की सक्रिय भूमिका की सराहना की। प्रतिनिधिमंडल ने इस अवसर पर पीडीपी पोर्टल के माध्यम से पेयजल योजनाओं की मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन व्यवस्था को भी देखा। इसके साथ ही ग्रामीण जल प्रदाय प्रणाली के विभिन्न तकनीकी घटकों का निरीक्षण कर उनके संचालन की जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को योजनाओं के संचालन, रखरखाव तथा पारदर्शी निगरानी तंत्र से अवगत कराया। भ्रमण के दौरान मंत्रीनाइक एवं प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। प्रतिनिधिमंडल ने मुगलिया हाट ग्राम पंचायत द्वारा पेयजल योजनाओं के सुव्यवस्थित संचालन, बेहतर रखरखाव, जल गुणवत्ता निगरानी में जनभागीदारी तथा पंचायत की सक्रिय कार्यशैली की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि सामुदायिक सहभागिता और जिम्मेदार पंचायत व्यवस्था के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सेवाओं को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।  

अयोध्या प्रकरण में एसआईटी जांच की समय-सीमा बढ़ाई गई

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या तीर्थ क्षेत्र में दान प्रकरण की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) की समय-सीमा 15 जुलाई तक बढ़ा दी है। मामले के विभिन्न पहलुओं की गहन छानबीन के लिए एसआईटी ने मुख्यमंत्री से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार करते हुए उन्होंने एसआईटी को आगामी 15 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि एसआईटी इस प्रकरण में हर पहलू की सघनता और निष्पक्षता से जांच करते हुए दूध का दूध और पानी का पानी करेगी। दोषियों को किसी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। गत 23 जून को एसआईटी के प्रमुख सदस्य लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने अपना प्रारंभिक प्रतिवेदन गृह विभाग को सौंपा था, जिसमें कठोर संस्तुतियां की गई थीं। इन संस्तुतियों के आधार पर गत 25 जून को ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में पहली एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें 8 नामजद व अन्य अज्ञात व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया था। सभी नामजद अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

हजूर साहिब कानून पर फिलहाल रोक, तरुण चुघ बोले- महाराष्ट्र सरकार का फैसला सराहनीय

चंडीगढ़. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने तख्त श्री हजूर साहिब से संबंधित प्रस्तावित कानून को महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्थगित किए जाने का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का आभार व्यक्त किया। चुघ ने कहा कि नानक नाम लेवा संगतों और विभिन्न सिख संगठनों की भावना थी कि इस विषय पर सभी पक्षों से व्यापक चर्चा के बाद ही कोई निर्णय लिया जाए। महाराष्ट्र सरकार ने संगतों की भावनाओं का सम्मान करते हुए कानून को स्थगित कर लोकतांत्रिक संवेदनशीलता का परिचय दिया है। चुघ ने कहा कि तख्त श्री हजूर साहिब करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े प्रत्येक निर्णय में सिख समाज की भावनाओं तथा परंपराओं का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संवाद और सहमति के माध्यम से ऐसा समाधान निकलेगा जो संगतों की अपेक्षाओं के अनुरूप होगा। इसी दौरान राज्यसभा सांसद निर्वाचित होने के उपरांत दिल्ली में आयोजित 'पंजाबी गौरव अभिनंदन समारोह' में राजधानी दिल्ली के 109 पंजाबी सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठनों ने तरुण चुघ तथा दिल्ली भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा का भव्य नागरिक अभिनंदन किया। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दोनों नेताओं को पंजाबी समाज की ओर से 'पंजाबी गौरव' अलंकरण एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। समारोह को संबोधित करते हुए चुघ ने कहा कि "पंजाबी कोई कौम नहीं बल्कि एक विचार है, जो हर परिस्थिति में सेवा और सहायता के लिए तैयार रहता है।" उन्होंने कहा कि पंजाबियों का संघर्ष और बलिदान का इतिहास हजार वर्षों से अधिक पुराना है तथा पंजाबी वही है जो संकट और संघर्ष के समय सबसे आगे खड़ा दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि पंजाब केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं बल्कि जिंदादिली, साहस, राष्ट्रभक्ति और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की पहचान है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि पंजाबी पहचान को धर्म या जाति तक सीमित न करें, क्योंकि पंजाबी एक जीवंत सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है।

एआई मिशन के जरिए युवाओं को कौशल, रोजगार और नवाचार के मिलेंगे नए अवसर

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विकास एवं विस्तार, मोबाइल नेटवर्क सुदृढ़ीकरण, इंटरनेट कनेक्टिविटी, सेवा सेतु, ई-प्रगति पारस (प्रोजेक्ट असेसमेंट रिव्यू एवं एनालिसिस सिस्टम), सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, डेटा लैब्स तथा विभिन्न डिजिटल नवाचार परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। इसके साथ ही युवाओं के लिए कौशल विकास, रोजगार सृजन, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने तथा तकनीक आधारित सुशासन को नई गति देने के विभिन्न आयामों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और राज्य इस क्षेत्र में देश का अग्रणी प्रदेश बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि एआई केवल भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता, दक्षता और जनसेवा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रभावी माध्यम है। एआई के प्रभावी उपयोग से शासन-प्रशासन को अधिक सक्षम, पारदर्शी, त्वरित एवं नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल नई तकनीक को अपनाना नहीं है, बल्कि प्रदेश के लोगों को एआई के लिए तैयार करना, व्यवसायों की उत्पादकता बढ़ाना, नागरिकों की आय में वृद्धि करना तथा बेहतर सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, कौशल विकास और दैनिक प्रशासनिक कार्यों में एआई के व्यापक उपयोग से आम नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इसके लिए राज्य में मजबूत एआई इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा तथा सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदार एआई के उपयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। बैठक में प्रस्तुत विजन दस्तावेज में बताया गया कि राज्य का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को एआई के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना है, जहां प्रत्येक नागरिक अपनी भाषा में एआई सीख सके, सरकार तकनीक आधारित भरोसेमंद सेवाएं प्रदान करे और उद्योगों तथा व्यवसायों को नई गति मिले। इस मिशन के अंतर्गत पांच प्रमुख स्तंभों – एआई कौशल विकास, नवाचार एवं स्टार्टअप, जागरूकता एवं आउटरीच, सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई तथा शासन में एआई के उपयोग – पर कार्य किया जाएगा। प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में विद्यार्थियों तथा सरकारी कर्मचारियों को एआई का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत स्कूलों में एआई जागरूकता कार्यक्रम, एआई एवं रोबोटिक्स क्लब तथा हैकाथॉन आयोजित किए जाएंगे। महाविद्यालयों में एआई सर्टिफिकेशन कार्यक्रम, छात्र परियोजनाओं के लिए अनुदान, आईटीआई में एआई लैब तथा विश्वविद्यालयों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। राज्य में नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए एआई डेटा लैब्स, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, एआई आधारित स्टार्टअप, डेटा सेट तथा अनुसंधान परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त क्लाउड कंप्यूटिंग सुविधा, सीड फंडिंग तथा उद्योगों एवं शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से अत्याधुनिक एआई आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने की भी कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। बैठक में सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई उपयोग को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य स्तर पर एआई नीति तैयार की जाएगी, जिसमें डेटा सुरक्षा, नागरिकों की निजता का संरक्षण, नियमित तकनीकी ऑडिट तथा केंद्र सरकार के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) कानून के अनुरूप व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। शासन में एआई के प्रभावी उपयोग के लिए विभिन्न विभागों में एआई आधारित निर्णय सहायता प्रणाली विकसित की जाएगी, प्रत्येक विभाग का अलग रोडमैप तैयार होगा, एआई नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। इसके साथ ही सरकारी एआई पायलट परियोजनाएं प्रारंभ करने का लक्ष्य रखा गया है। नागरिकों को उनकी अपनी भाषा में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए भाषिणी प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे सरकारी सेवाएं अधिक सरल, सुलभ और समावेशी बन सकें। बैठक में मोबाइल नेटवर्क विस्तार की समीक्षा के दौरान बताया गया कि पिछले ढाई वर्षों में डीबीएन वित्तपोषित लगभग एक हजार मोबाइल टॉवर स्थापित कर राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इसके अतिरिक्त 577 नए मोबाइल टावरों की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इनमें से 406 टावरों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जबकि शेष 171 प्रकरणों का निराकरण आगामी एक माह के भीतर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। भारतनेट फेज-3 की समीक्षा में अधिकारियों ने बताया कि राज्य की 4,114 ग्राम पंचायतों को रिंग टोपोलॉजी आधारित आधुनिक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही आईपी-एमपीएलएस आधारित एकीकृत नेटवर्क विकसित किया जाएगा तथा गांवों तक एफटीटीएच सेवाओं का विस्तार सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध हो सकें और डिजिटल सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। सेवा सेतु पोर्टल की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वर्तमान में राज्य के 36 विभागों की 520 सेवाएं इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं, जिनमें 111 होस्टेड तथा 409 रीडायरेक्ट सेवाएं शामिल हैं। प्रदेशभर में संचालित 16 हजार 726 सेवा केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। एक अप्रैल 2025 से अब तक सेवा सेतु के माध्यम से 39.75 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 37.52 लाख आवेदनों का सफलतापूर्वक निराकरण करते हुए 94.3 प्रतिशत सफलता दर प्राप्त की गई है। अधिकारियों ने बताया कि सेवा सेतु में क्यूआर आधारित प्रमाण-पत्र सत्यापन, आधार प्रमाणीकरण, डिजिलॉकर एकीकरण, ट्रेजरी एवं ई-चालान प्रणाली तथा डीबीटी आधारित भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, जिससे सेवाओं की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और सुविधा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बैठक में नवा रायपुर में सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप की स्थापना, एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, डेटा लैब्स, सुरक्षा संचालन केंद्र, जीआईएस आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली तथा डिजिटल निगरानी जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई।  अधिकारियों ने बताया कि इन पहलों से प्रदेश में आईटी एवं आईटीईएस क्षेत्र को नई गति मिलेगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा हजारों युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। बैठक में मुख्य सचिवविकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिवसुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिवराहुल भगत, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिवअंकित आनंद, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिवप्रभात मलिक , सुशासन तथा अभिसरण विभाग के संयुक्त एवं  चिप्स के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसरमयंक अग्रवाल … Read more

रायपुर जिले के 9 तहसीलदार बदले गए, कलेक्टर ने जारी किए तबादला आदेश

रायपुर. छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में तहसीलदारों का फेरबदल किया गया है। इसका आदेश कलेक्टर ने जारी किया है। तबादला आदेश के मुताबिक आरंग, धरसीवां, मंदिर हसौद, खरोरा, गोबरा नवापरा के तहसीलदारों को इधर से उधर किया गया है। इन अधिकारियों की नई पदस्थापना भी कर दी गई है। शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार सभी अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह तीन वर्ष की स्थानापन्न अवधि के लिए की गई है। अब ये अधिकारी छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा के नियमों के तहत अपनी सेवाएं देंगे। संबंधित अधिकारियों को जल्द नई जगह पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। तीन साल की स्थानापन्न अवधि के लिए पदोन्नति जारी आदेश में बताया गया है कि इनकी तीन वर्ष की स्थानापन्न अवधि है। अधिकारी अब छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा के नियमों के तहत अपनी सेवाएं देंगे।

मध्य प्रदेश ने 24×7 नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में बढ़ाया बड़ा कदम, ऊर्जा क्षेत्र में नई पहल

मध्यप्रदेश ने 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा की दिशा में उठाया बड़ा कदम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में आयोजित प्री-बिड मीटिंग को वर्चुअली किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार ने 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा  उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत कर दी है। मध्यप्रदेश, स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत कर रहा है। उन्होंने बताया कि दावोस में की गई घोषणा के अनुरूप प्रदेश, 24 घंटे हरित ऊर्जा देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा परियोजना के लिए, मध्यप्रदेश भवन नई दिल्ली में आयोजित प्री-बिड मीटिंग को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। नई दिल्ली में हुई बैठक में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव तथा विभिन्न कपंनियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। मध्यप्रदेश का ट्रैक रिकॉर्ड सबसे बेहतर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना ने देश में सबसे कम सौर टैरिफ स्थापित कर भारत को वैश्विक पहचान दिलाई। शाजापुर-नीमच सोलर पार्कों ने 2.14 रूपए प्रति यूनिट का प्रदेश में सबसे कम टैरिफ अर्जित किया। हाल ही में मुरैना की 4 घंटे की स्टोरेज प्लस परियोजना के लिए 2.70 रूपए प्रति यूनिट पर पीपीए हुआ, यह देश की सबसे प्रतिस्पर्धी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में से एक है। मध्यप्रदेश है देश का सबसे निवेश मित्र राज्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को पारदर्शी नीतियाँ, त्वरित निर्णय और उत्कृष्ट अधोसंरचना उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने देश-विदेश के निवेशकों से मध्यप्रदेश की ऊर्जा क्रांति के सहभागी बनने का अनुरोध किया। ऊर्जा में आत्मनिर्भरता है हमारा लक्ष्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केवल परियोजनाएँ स्थापित करना नहीं, बल्कि हरित ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाना राज्य सरकार का उद्देश्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास जताया कि रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना और सभी हितधारकों के संयुक्त प्रयास से 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा परियोजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और हरित विकास की दिशा में ऐतिहासिक सिद्ध होगी। नई दिल्ली की प्री-बिड मीटिंग में टाटा पॉवर, रिलायंस एनर्जी, टोरेंट पॉवर, जिंदल रिन्युएबल, एन.टी.पी.सी., अडानी ग्रीन्स, हिन्दुस्तान पॉवर, महिंद्रा सिस्टम आदि के प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

Delhi News: 1 नवंबर से 31 जनवरी तक इन वाहनों पर रोक, बढ़ेगी पार्किंग फीस; जानें नए नियम

 नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हर साल सर्दियों का मौसम प्रदूषण की मार लेकर आता है. इस बार प्रदूषण पर नकेल के लिए सरकार पहले से ही एक्शन प्लान तैयार करने में जुटी है. दिल्ली सरकार ने इस बार प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए कड़े नियमों का ऐलान कर दिया है. दिल्ली में इस बार एक नवंबर से 28 फरवरी तक वाहनों की आवाजाही से लेकर निर्माण कार्य तक, कड़े नियम लागू रहेंगे।  दिल्ली सरकार का कहना है कि पिछले तीन वर्ष में सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता लगातार बहुत खराब से गंभीर श्रेणी तक पहुंचती रही है, इसलिए अब स्थायी और सख्त उपाय लागू किए जा रहे हैं. दिल्ली में अब बिना पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) सर्टिफिकेट के वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा. दिल्ली के सभी पेट्रोल और सीएनजी पंपों पर पूरे साल केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन मिलेगा, जिनके पास वैध पीयूसी होगा।  दिल्ली में अब एएनपीआर कैमरों और डिजिटल डेटाबेस के जरिये निगरानी की जाएगी. बिना पीयूसी के पकड़े जाने पर जुर्माना लगाया जाएगा. एक नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली में दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-VI से नीचे के वाहनों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा. दिल्ली से बाहर के सभी वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर इस अवधि के दौरान रोक रहेगी. हालांकि, CNG के साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस की गाड़ियों को छूट दी जाएगी।  दोगुनी होगी पार्किंग फी एक नवंबर से 28 फरवरी तक पार्किंग की फीस भी महंगी होगी. अधिकृत पार्किंग स्थलों पर वाहन पार्क करने की फीस इस अवधि में दोगुनी वसूली जाएगी. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के पार्किंग स्थलों को इस फैसले से बाहर रखा गया है. इसके पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि इससे लोग मेट्रो का अधिक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।  दफ्तर आएगा 50% स्टाफ एक नवंबर से 31 जनवरी तक सरकारी और निजी कार्यालयों में केवल 50% कर्मचारी ही शारीरिक रूप से उपस्थित रह सकेंगे. बाकी कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य होगा. निजी कंपनियों को कार-पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन और अलग-अलग शिफ्ट लागू करने के निर्देश दिए गए हैं. इस अवधि में निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर भी रोक रहेगी. 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच अधिकांश निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़े काम पर पूर्ण प्रतिबंध लागू रहेगा।  इस दौरान निर्माण सामग्री लेकर आने वाले वाहनों को भी दिल्ली में एंट्री नहीं दी जाएगी. तीन हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली सभी व्यावसायिक ऊंची इमारतों, मॉल, होटल और कार्यालय भवनों में एंटी-स्मॉग गन या मिस्ट सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा. सभी संस्थानों को 15 अगस्त तक यह व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी. एक हजार वर्गमीटर से बड़े निर्माण स्थलों पर भी मिस्ट सिस्टम लगाना जरूरी होगा।  खुले में कूड़ा या पत्ते जलाने पर एक्शन दिल्ली में आरडब्ल्यूए, हाउसिंग सोसाइटी, संस्थानों और सरकारी-निजी प्रतिष्ठान को अपने-अपने परिसर में खुले में आग जलाने की घटनाएं रोकने की जिम्मेदारी दी गई है. कूड़ा, पत्तियां, प्लास्टिक या बायोमास जलाने पर सख्त कार्रवाई होगी. खुले में आग जलाने और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन आधारित निगरानी की जाएगी. रात के समय निगरानी और अधिक की जाएगी।  नियम तोड़ने वालों पर केस दिल्ली सरकार ने सख्त लहजे में कहा है कि आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत कार्रवाई की जाएगी. नियम तोड़ने वालों के खिलाफ जुर्माना, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति, परिसर सील करने से लेकर अभियोजन तक की कार्रवाई की जा सकती है. दिल्ली सरकार ने कहा है कि पिछले तीन वर्षों में नवंबर से फरवरी के बीच दिल्ली का AQI लगातार 312 से 342 के बीच रहा, जबकि अधिकतम AQI 461 से 494 तक पहुंचा।  अधिकारियों का कहना है कि इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सर्दियों के लिए यह स्थायी प्रदूषण नियंत्रण ढांचा तैयार किया गया है. कुल मिलाकर, दिल्ली सरकार ने सर्दियों में प्रदूषण को आपदा के स्तर तक पहुंचने से रोकने के लिए अब तक का सबसे व्यापक और सख्त शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण आदेश जारी किया है. इसका असर सीधे आम नागरिकों, वाहन चालकों, दफ्तरों, बिल्डरों और व्यावसायिक संस्थानों पर पड़ेगा। 

जल गंगा संवर्धन अभियान ने जनभागीदारी का रचा नया इतिहास, सोशल मीडिया पर मिली वैश्विक पहुंच

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने और भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के मुख्य उद्देश्यों के साथ संचालित 'जल गंगा संवर्धन अभियान' ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदेश के साथ देश और विदेश के लगभग 7 करोड़ परिवारों तक अपनी पहुंच बनाकर जनभागीदारी का एक नया इतिहास रच दिया है। आगामी मानसून में कम वर्षा की संभावना को देखते हुए पानी की प्रत्येक बूंद को सहेजने के दूरदर्शी उद्देश्य से शुरू हुआ यह महा अभियान 30 जून 2026 को भव्यता के साथ संपन्न हुआ। प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दृढ़ संकल्प से यह अभियान महज एक सरकारी कार्यक्रम न रहकर एक विराट वैश्विक जन आंदोलन के रूप में स्थापित हुआ है। इस महाअभियान को सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जनता का अभूतपूर्व समर्थन मिला। ट्विटर (एक्स), फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सरकार के आधिकारिक माध्यमों द्वारा प्रतिदिन जागरूकता पोस्टर, लघु फिल्में और इन्फोग्राफिक्स साझा किए गए। #जल_गंगा_संवर्धन_अभियान, #जल_है_तो_कल_है, #WaterConservation और #SaveWater जैसे हैशटैग्स के माध्यम से प्रदेश और देश के कोने-कोने तक जल संरक्षण का संदेश फैला, जिससे कुल 6 करोड़ 95 लाख 74 हजार 820 से अधिक लोगों तक इस अभियान की डिजिटल पहुंच सुनिश्चित हो सकी और लोग जल स्रोतों को सहेजने की मुहिम से सीधे जुड़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सतत मॉनिटरिंग और विशेष डिजिटल डैशबोर्ड के माध्यम से अभियान में पूरे राज्य में रिकॉर्ड स्तर पर कार्य किए गए। प्रदेश भर में 10,514 करोड़ रुपये की लागत से 3 लाख 63 हजार से अधिक जल संरचनाओं के निर्माण और जीर्णोद्धार के कार्य पूर्ण किए गए। भू-जल संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए रिकॉर्ड समय में 67,708 खेत-तालाब, 225 अमृत सरोवर और 97,614 कूप रिचार्ज संरचनाएं तैयार की गईं। इसके अलावा 10,000 से अधिक कुओं, नदियों और प्राचीन बावड़ियों की सफाई व सौंदर्यीकरण कर उन्हें अतिक्रमण मुक्त कराया गया। इन प्रामाणिक कार्यों की बदौलत मध्यप्रदेश जल संरक्षण में देश का अग्रणी राज्य बना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं विभिन्न जिलों का दौरा कर श्रमदान किया और समाज के हर वर्ग को प्रेरित किया। 19 मार्च 2026 को इंदौर से इसके तीसरे चरण की शुरुआत करने से लेकर धार में देवी सागर तालाब के गहरीकरण, उज्जैन में शिप्रा तीर्थ परिक्रमा, भोपाल के 'सदानीरा समागम' और राजगढ़ में आयोजित समापन समारोह तक उन्होंने सक्रिय सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संकल्प दोहराया कि 'जल है तो कल है' और सरकार इसे सहेजने के लिए पूरी तरह कृत संकल्पित है, इसलिए जल संरक्षण के कार्य आगे भी निरंतर जारी रहेंगे। अभियान के समापन के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए "एक पेड़ माँ के नाम" पौधरोपण अभियान और 1 जुलाई से "विकसित भारत–ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन" का भी भव्य शुभारंभ किया गया। जल संरक्षण और जनभागीदारी के इस अभियान ने मध्यप्रदेश को देश में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित किया है। जल गंगा संवर्धन अभियान ने यह साबित कर दिया कि जब सरकार और समाज साथ आते हैं, तो जल संरक्षण केवल एक योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक सशक्त जन आंदोलन बन जाता है।