samacharsecretary.com

पुलिस विभाग में 2070 महिला आरक्षकों को दिये जायेंगे नियुक्ति पत्र

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के पालन में पुलिस विभाग में रिक्त पदों पर भर्ती के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी रिक्त पदों पर बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। इसी क्रम में मध्य प्रदेश पुलिस में वर्ष 2025 में आरक्षक के रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से कराई गई है। पुलिस विभाग में जिला बल में 6800 पुलिस आरक्षकों की चयन प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। इसमें पुलिस आरक्षकों के 2070 पदों पर महिलाओं का चयन किया गया है। चयनित पुलिस आरक्षकों को जिलें आवंटित कर पुलिस अधिक्षकों को पत्र जारी कर दिये गये हैं। वे नियुक्ति पत्र जारी कर नियुक्ति की कार्यवाई समय सीमा में पूर्ण करायेंगे। भर्ती प्रक्रिया में जिला बल के लिए विज्ञप्ति आरक्षक के 6800 पदों में से महिलाओं के लिए 35% आरक्षण के मान से 2380 पद आरक्षित किए गए । इनमें से माननीय न्यायालय के आदेश के पालन में 13% पदों को रोकते हुए 87% पदों का परीक्षा परिणाम जारी किया गया है। इस तरह महिलाओं के लिए आरक्षित 2070 पदों पर महिला उम्मीदवारों का चयन किया गया है। पुलिस मुख्यालय की चयन भर्ती शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार म.प्र. पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा 2025 का अंतिम परिणाम म.प्र. कर्मचारी चयन भोपाल व्दारा अपनी वेबसाईट पर गत 9 अप्रैल को जारी किया जा चुका है। चयनित उम्मीदवारों को पदस्थापना हेतु इकाई का आवंटन चयन/भर्ती शाखा पुलिस मुख्यालय भोपाल व्दारा किया गया है। इकाई आवंटन का परिणाम आज 30 अप्रैल को म.प्र. कर्मचारी चयन मण्डल भोपाल की वेबसाईट पर जारी किया गया है। साथ ही चयनित उम्मीदवारों को अपनी आवंटित इकाई में उपस्थित होने के संबंध में निर्देश भी डाउनलोड किये जा सकते है। इकाइयों को नियुक्ति संबंधी कार्यवाही एक माह में पूर्ण करने की समय-सीमा निर्धारित की गई है।  

श्रमिक समाज की आधारशिला हैं और उनके बिना विकास की कल्पना अधूरी: श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन

रायपुर अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस (मई दिवस) के अवसर पर प्रदेश के श्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन ने राज्य के श्रमिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सभी मेहनतकश श्रमिकों के सुखमय और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि 1 मई का दिन श्रमिकों के परिश्रम, समर्पण और योगदान के प्रति आभार व्यक्त करने का विशेष अवसर है।                     मंत्री  देवांगन ने कहा कि श्रमिक समाज की आधारशिला हैं और उनके बिना विकास की कल्पना अधूरी है। उन्होंने श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक खुशहाली के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार श्रमिकों सहित सभी जरूरतमंद वर्गों के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों और उनके परिवारों को विभिन्न योजनाओं का लाभ तेजी से उपलब्ध कराया जा रहा है। श्रम विभाग के अंतर्गत संचालित तीनों मंडलों- भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल, संगठित कर्मकार मंडल और राज्य सामाजिक सुरक्षा एवं श्रम कल्याण मंडल के माध्यम से योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।                 मंत्री  देवांगन ने कहा कि बीते सवा दो वर्षों में विभिन्न योजनाओं के तहत करीब 800 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। इससे न केवल श्रमिकों बल्कि उनके परिवारों के सामाजिक और आर्थिक स्तर में भी सुधार आया है।

मेड इन इंडिया’ को मिल रही वैश्विक मांग, इंदौर बना ई-कॉमर्स निर्यात का नया केंद्र

भोपाल वैश्विक बाजारों में ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच मध्यप्रदेश के एमएसएमई और डी2सी ब्रांड्स अब सीधे अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों तक अपनी पहुंच बना रहे हैं। इसी दिशा में इंदौर में अमेज़न के ई-कॉमर्स निर्यात कार्यक्रम अमेज़न ग्लोबल सेलिंग द्वारा "एक्सपोर्ट हाट" का आयोजन किया गया, जिसने उभरते उद्यमियों और निर्यातकों को वैश्विक व्यापार से जोड़ने का सशक्त मंच प्रदान किया। अमेज़न ग्लोबल सेलिंग द्वारा वर्ष 2015 से अब तक 2 लाख से अधिक भारतीय निर्यातकों को 20 बिलियन डॉलर से अधिक के संचयी ई-कॉमर्स निर्यात तक पहुंचने में सहयोग दिया गया है। इंदौर में आयोजित इस कार्यक्रम में 150 से अधिक निर्यातकों ने भागीदारी की, जिनमें भोपाल सहित आसपास के क्षेत्र के निर्यातक शामिल रहे। कार्यक्रम के माध्यम से एमएसएमई, डी2सी ब्रांड्स और टियर-2 शहरों के उद्यमियों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया, जिसमें निर्यात व्यवसाय की स्थापना, विस्तार, बाजार अवसरों की पहचान, लॉजिस्टिक्स, अंतर्राष्ट्रीय भुगतान और ई-कॉमर्स निर्यात से जुड़े सभी आवश्यक पहलुओं को शामिल किया गया। इस वर्ष अमेज़न ग्लोबल सेलिंग द्वारा तिरुपुर, करूर और ठाणे जैसे प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में भी इसी प्रकार की पहलें आयोजित की जा रही हैं। इंदौर में आयोजित यह कार्यक्रम फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (एफआईईओ) के सहयोग से सम्पन्न हुआ, जिसने क्षेत्र की बढ़ती निर्यात क्षमता को रेखांकित किया। वस्त्र, हस्तशिल्प, होम डेकोर और खाद्य उत्पादों के मजबूत विनिर्माण आधार के कारण मध्यप्रदेश वैश्विक विस्तार के इच्छुक छोटे व्यवसायों के लिए तेजी से आकर्षण का केंद्र बन रहा है। वर्तमान में राज्य के 8 हजार से अधिक निर्यातक अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में सक्रिय हैं। एमपी इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक एवं निर्यात आयुक्त  चंद्रमौली शुक्ला ने बताया कि मध्यप्रदेश मजबूत एमएसएमई आधार और विविध उत्पाद श्रेणियों के चलते भारत के निर्यात परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक खरीददारों की बदलती प्राथमिकताओं के बीच ई-कॉमर्स निर्यात स्थानीय व्यवसायों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचने और अपने ब्रांड स्थापित करने का अवसर प्रदान कर रहा है। ऐसे कार्यक्रम विक्रेताओं को डिजिटल टूल्स के उपयोग और निर्यात प्रक्रिया को समझने में सक्षम बना रहे हैं, जिससे इंदौर के व्यवसाय वैश्विक स्तर पर विस्तार कर सकें। एमपीआईडीसी इंदौर के कार्यकारी निदेशक  हिमांशु प्रजापति ने बताया कि इंदौर निर्यात और उद्यमिता का सशक्त केंद्र बनकर उभर रहा है। एक्सपोर्ट हाट डिजिटल निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, जो एमएसएमई, स्टार्टअप और डी2सी ब्रांड्स को वैश्विक ई-कॉमर्स और क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड की समझ प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि ओडीओपी और जीआई टैग उत्पादों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर राज्य अपने विशिष्ट उत्पादों को वैश्विक स्तर पर स्थापित कर सकता है। अमेज़न ग्लोबल सेलिंग इंडिया की प्रमुख निधि कल्पवुड़ी ने बताया कि इंदौर जैसे उभरते केंद्र वैश्विक बाजारों की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं। मध्यप्रदेश की वस्त्र और कपास उत्पादन क्षमता अब वैश्विक मांग में परिवर्तित हो रही है, जिससे ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की पहुंच दुनिया भर में बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि निर्यात प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने के लिए आवश्यक टूल्स, जानकारी और एंड-टू-एंड सहयोग प्रदान किया जा रहा है, जिससे एमएसएमई और डी2सी ब्रांड्स वैश्विक ग्राहकों तक पहुंच सकें और वर्ष 2030 तक 80 बिलियन डॉलर के संचयी ई-कॉमर्स निर्यात के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ा जा सके। डिटवी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं निदेशक  सचिन सुले ने बताया कि एसजीआई बेडिंग के माध्यम से भारतीय वस्त्र विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अमेज़न ग्लोबल सेलिंग से बाजार रुझानों की समझ, पर्यावरण के प्रति जागरूक ग्राहकों तक पहुंच और फुलफिलमेंट बाय अमेज़न के माध्यम से लॉजिस्टिक्स प्रबंधन में सुविधा मिली है। प्रतिस्पर्धी कीमतों पर टिकाऊ उत्पाद उपलब्ध कराते हुए भारतीय कारीगरी को वैश्विक ग्राहकों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे भारत की वस्त्र क्षेत्र में वैश्विक पहचान और मजबूत हो रही है।  

MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं की कटौती राशि एरियर्स सहित देने के निर्देश

जबलपुर हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने 2019 से 2023 के बीच सरकार द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं के मानदेय में की गई कटौती को गलत माना है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जून 2019 से जून 2023 तक का जो बकाया यानी एरियर्स है, उसे सरकार को छह प्रतिशत ब्याज के साथ चुकाना होगा। कोर्ट ने इसके लिए 120 दिनों की समय सीमा तय की। इस अवधि के अंदर प्रशासन को 48 महीनों की एरियर्स राशि का भुगतान करना होगा। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को ग्रेच्युटी एक्ट के दायरे में रखने का भी आदेश दिया है। सीधी निवासी आंगनबाड़ी सहायिका कार्यकर्ता संघ की सचिव विभा पांडे की और से 2019 में याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता था। 2018 में केंद्र की भाजपा सरकार ने इसमें 1500 की वृद्धि की। लेकिन 2019 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो कार्यकर्ताओं का मानदेय 1500 कम कर दिया गया। इसी तरह सहायिकाओं का मानदेय भी 7000 से घटकर से 5500 कर दिया गया। अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि इसके बाद भाजपा सरकार ने इस कटौती को वापस कर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं के मानदेय 2023 में बहाल कर दिए। लेकिन 2019 से 2023 तक का इन्हें एरियर्स नहीं मिला। इन्हें ग्रेच्युटी भी नहीं मिल रही है।

डबल इंजन की रफ्तार, योजनाओं की बौछार- किसान, आदिवासी, महिला और युवा बने केंद्र में

रायपुर छत्तीसगढ़ में बीते लगभग ढाई वर्षों में शासन की कार्यशैली को लेकर एक नई परिभाषा गढ़ने की कोशिश दिखाई देती है। विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 'सुशासन' को केवल एक नारा नहीं, बल्कि जमीनी क्रियान्वयन का आधार बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। सीमित समयावधि करीब 2 वर्ष 4 माह 17 दिन में ही सरकार ने विकास का जो खाका तैयार किया है, उसे भविष्य की बड़ी तस्वीर के रूप में देखा जा रहा है। प्रदेश की पहचान ‘धान का कटोरा’ के रूप में रही है, लेकिन इस पहचान को सम्मान देने का काम हालिया नीतिगत निर्णयों में स्पष्ट दिखता है। किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी और 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय करना केवल आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि अन्नदाताओं के आत्मविश्वास को मजबूत करने की पहल भी है। इसके साथ ही, तेंदूपत्ता संग्राहकों जिन्हें ‘हरा सोना’ से जुड़ा श्रमिक वर्ग कहा जाता है, के लिए पारिश्रमिक दर को 5500 रुपये करना और चरण पादुका वितरण जैसे निर्णयों ने आदिवासी क्षेत्रों में राहत पहुंचाई है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही लगभग 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति देना सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है। बेघर और जरूरतमंद परिवारों को छत उपलब्ध कराना सुशासन की पहली सीढ़ी के रूप में देखा गया।राज्य सरकार ने 70 लाख से अधिक विवाहित महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता राशि देने की पहल की। यह राशि भले सीमित लगे, लेकिन ग्रामीण और जरूरतमंद परिवारों के लिए यह आर्थिक संबल का काम कर रही है। यह कदम महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहे बस्तर क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में केंद्र और राज्य के संयुक्त प्रयासों ने असर दिखाया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री श्री अमित शाह की रणनीति और संकल्प के साथ 31 मार्च 2026 तक नक्सलमुक्ति का लक्ष्य एक बड़े बदलाव का संकेत देता है। इससे विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद बढ़ी है।   विष्णु देव साय सरकार ने युवाओं के लिए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 'छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग' से जुड़े मामलों में जांच कराना सरकार के जवाबदेही वाले दृष्टिकोण को दर्शाता है। साथ ही, खेल गतिविधियों विशेषकर बस्तर व सरगुजा ओलंपिक जैसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया गया है। विगत वर्ष आयोजित ‘सुशासन तिहार’ को इस वर्ष भी 1 मई से 10 जून तक आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य योजनाओं की जमीनी हकीकत को परखना, नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना और प्रशासन को सीधे जनता से जोड़ना है। श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य के समन्वय को 'डबल इंजन सरकार' के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि इस समन्वय से विकास योजनाओं को गति मिली है और इसका लाभ प्रदेश के लगभग तीन करोड़ नागरिकों तक पहुंच रहा है। ‘बगिया के विष्णु’ के रूप में पहचाने जाने वाले मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों ईब से इंद्रावती तक विकास का जो रोडमैप तैयार किया है, वह समावेशी विकास की अवधारणा को दर्शाता है। लक्ष्य स्पष्ट है, अंतिम छोर के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना। छत्तीसगढ़ में सुशासन की यह यात्रा अभी 'प्रारंभिक चरण' में है, लेकिन दिशा स्पष्ट दिखाई देती है। सरकार की प्राथमिकताओं में किसान, महिला, आदिवासी, युवा और ग्रामीण समाज केंद्र में हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये नीतियां किस तरह स्थायी बदलाव का रूप लेती हैं, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि विकास की यह कहानी गति पकड़ चुकी है।

प्रदेश की विमानन नीति की सफलता में जोड़ें नए आयाम

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विमानन क्षेत्र में मध्यप्रदेश को देश का रोल मॉडल बनाने के प्रयास किए जाएं। प्रदेश के दूरस्थ इलाकों के साथ ही पड़ौसी राज्यों के यात्रियों को भी विमानन सेवाएं लाभान्वित करती हैं। मध्यप्रदेश के पर्यटन क्षेत्र का महत्व बढ़ाने की दृष्टि से भी ये सेवाएं महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में हुई बैठक में विमानन विभाग के कार्यों की जानकारी प्राप्त कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विमानन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में विकसित होने वाले मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों और विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के परिसर में हैलीपेड निर्माण को प्राथमिकता दी जाए। हैली सेवाओं के विस्तार के लिए हैलीपेड निर्माण में निजी क्षेत्र का सहयोग प्राप्त किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने उज्जैन एयरपोर्ट के विकास के लिए संचालित कार्यों को समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि उज्जैन एयरपोर्ट में एयरफील्ड का कुल क्षेत्रफल 95 एकड़ है। राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार उज्जैन एयरपोर्ट 2700 मीटर लंबाई के रनवे के साथ कुल 4 हजार 100 मीटर लंबाई में विकसित होगा। इसके लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के लिए 590 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि स्वीकृत की जा चुकी है। सिंहस्थ:2028 के दृष्टिगत श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए एयरपोर्ट उपयोगी होगा। उन्होंने निर्देशित किया कि एयरपोर्ट के विकास के सभी कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण किया जाए। बैठक में पीएम हेली पर्यटन सेवा के संचालन के संबंध में भी चर्चा हुई। रोजगारपरक एविएशन पाठ्यक्रम का लाभ युवाओं को दिलवाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में विमानन सेवाओं के विस्तार के साथ दक्ष पायलट और अन्य प्रशिक्षित अमले की आवश्यकता होगी। नई शिक्षा नीति में एविएशन पाठ्यक्रम को रोजगारपरक शिक्षा की श्रेणी में शामिल किया गया है। उन्होंने प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा एविएशन कोर्स का लाभ युवाओं को दिलवाने के लिये प्रयास करने के ‍निर्देश दिये। सफल है प्रदेश की विमानन नीति, रीवा से 24 हजार यात्रियों ने उठाया हवाई सेवा का लाभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 गत फरवरी 2025 में जारी की गई थी। नीति में विमानन क्षेत्र की समग्र वैल्यू चैन के लिए कई तरह के प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। मध्यप्रदेश से बनारस और पटना जैसे बड़े नगरों के लिए विमान सेवा प्रारंभ करने का प्रयास किया जाए ताकि धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिले। प्रदेश की विमानन नीति की सफलता में नए आयाम जोड़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विमानन नीति की सफलता के लिए विभाग के अधिकारियों को बधाई दी। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के एयरपोर्ट से नए गंतव्यों को हवाई मार्ग से जोड़ने के लिए वित्तीय सहायता भी शिड्यूल्ड ऑपरेटर्स को दी जा रही है। मध्यप्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 की सफलता का ही यह प्रमाण है कि गत छह माह में रीवा से 24 हजार यात्रियों ने हवाई सेवा का लाभ उठाया है। रीवा से दिल्ली, रीवा से रायपुर सप्ताह में तीन दिन और रीवा से इंदौर प्रतिदिन फ्लाइट उपलब्ध है। गत चार माह में रीवा से इंदौर की ऑक्यूपेंसी 85 प्रतिशत और गत डेढ़ माह में रीवा से रायपुर की ऑक्यूपेंसी 80 प्रतिशत से अधिक है। रीवा- नई दिल्ली फ्लाइट की ऑक्यूपेंसी भी 70 प्रतिशत से अधिक है। बैठक में अपर मुख्य सचिव विमानन विभाग  संजय कुमार शुक्ला, मुख्यमंत्री के सचिव  आलोक कुमार सिंह, सचिव वित्त  लोकेश जाटव सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।  

राजस्थान वन विभाग का बड़ा फैसला: लेपर्ड को मारने से पहले DNA जांच जरूरी

जयपुर  राजस्थान में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के बीच राज्य वन विभाग ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। अब किसी भी लेपर्ड को 'आदमखोर' घोषित कर उसे मारने की अनुमति देना आसान नहीं होगा। चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन के.सी.ए. अरुणप्रसाद द्वारा जारी की गई नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर में स्पष्ट किया गया है कि लेपर्ड को 'आदमखोर' श्रेणी में डालने के लिए अब पुख्ता वैज्ञानिक और कानूनी साक्ष्यों की आवश्यकता होगी। बिना फॉरेंसिक जांच नहीं होगा फैसला नई गाइडलाइन के अनुसार, यदि किसी लेपर्ड पर इंसानों पर हमला करने या उन्हें खाने का संदेह है, तो केवल अनुमान के आधार पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। विभाग को अब निम्नलिखित प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी-     डीएनए विश्लेषण: घटनास्थल पर मिले बालों, लार या अन्य नमूनों का मिलान संदिग्ध जानवर से करना होगा।     फॉरेंसिक साक्ष्य: हमले के निशान और अन्य फॉरेंसिक एविडेंस की जांच अनिवार्य कर दी गई है।     वैज्ञानिक निगरानी: हमले वाले क्षेत्र में ट्रैप कैमरे और ड्रोन के जरिए लेपर्ड के व्यवहार की निगरानी की जाएगी। मारना नहीं, पकड़ना होगी पहली प्राथमिकता SOP में यह भी साफ किया गया है कि अगर किसी लेपर्ड को 'आदमखोर' मान भी लिया जाता है, तब भी पहली प्राथमिकता उसे जीवित पकड़ने की होगी। उसे मारने का आदेश केवल अंतिम विकल्प के रूप में और चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन की लिखित अनुमति के बाद ही दिया जा सकेगा। भीड़ पर लगेगी लगाम अक्सर रेस्क्यू के दौरान उमड़ने वाली भीड़ लेपर्ड को हिंसक बना देती है। अब ऐसे संवेदनशील ऑपरेशन्स के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (पूर्व में 144) लागू की जाएगी। पुलिस को भीड़ हटाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि वैज्ञानिक तरीके से जांच पूरी की जा सके। हर जिले में रैपिड रिस्पांस टीमें होगी तैनात वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि हैबिटेट के विखंडन के कारण लेपर्ड आबादी के करीब आ रहे हैं। इस नई नियमावली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी बेगुनाह जानवर को महज लोगों के गुस्से या डर के कारण अपनी जान न गंवानी पड़े। अब हर जिले में रैपिड रिस्पांस टीमें तैनात रहेंगी, जो आधुनिक उपकरणों और वैज्ञानिक डेटा के आधार पर ऐसे संकटों का समाधान करेंगी।

मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी भौंरी में जेजे एक्ट एवं पॉक्सो एक्ट पर दो दिवसीय सेमीनार संपन्न

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भौंरी भोपाल में जेजे एक्ट एवं पॉक्सो एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन तथा बाल संरक्षण तंत्र को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से दो दिवसीय सेमीनार का आयोजन 28 एवं 29 अप्रैल को किया गया। सेमीनार का आयोजन निदेशक/अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  मो. शाहिद अबसार के निर्देशन एवं उप निदेशक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय "जेजे एक्ट एवं पॉक्सो एक्ट के विशेष पाठ्यक्रम, एसजेपीयू, जेजेसी एवं सीडब्ल्यूसी की भूमिका" रहा, जिसके अंतर्गत बाल संरक्षण से संबंधित विभिन्न कानूनी एवं प्रक्रियात्मक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान उप पुलिस अधीक्षक  नीरज नामदेव, नेशनल ज्यूडिशियल अकादमी भोपाल की प्रोफेसर सु पैकर नासिर, जेजे बोर्ड के सदस्य डॉ. कृपा शंकर चौबे, नगरीय पुलिस भोपाल की एडीपीओ डॉ. मनीषा पटेल तथा म.प्र. पुलिस अकादमी की एडीपीओ मती सुचित्रा वर्मा ने व्याख्यानों के माध्यम से अपने अनुभव साझा करते हुए जेजे एक्ट एवं पॉक्सो एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन, बाल अधिकारों की सुरक्षा तथा संस्थागत समन्वय की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। सेमीनार में मध्यप्रदेश पुलिस की विभिन्न इकाइयों से आए अधिकारी एवं कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए विषय से संबंधित व्यावहारिक एवं विधिक पहलुओं की जानकारी प्राप्त की। सेमीनार का समापन 29 अप्रैल 2026 को उप निदेशक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस अवसर पर सहायक निदेशक प्रशिक्षण मती रश्मि पाण्डेय, उप पुलिस अधीक्षक  नीरज नामदेव, सूबेदार  विजय गौर सहित अकादमी का स्टाफ उपस्थित रहा।  

मुख्यमंत्री किसान कल्याण डैशबोर्ड प्रारंभ, पैक्स समितियों में सदस्यता वृद्धि महाअभियान का भी हुआ शुभारंभ

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में कृषक कल्याण वर्ष के दौरान सोलह विभाग समन्वित रूप से किसानों के हित में कार्य कर रहे हैं। यह एक समग्र पहल है, जिसमें कृषि, उद्यानिकी, सहकारिता, पशुपालन, मत्स्य पालन सहित अन्य विभागों को जोड़कर किसानों के विकास के लिए कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण कार्यशाला से प्रदेश में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी किसानों के समर्पण भाव के साथ नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाते हुए कार्य करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में किसानों की समृद्धि के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2026 कृषक कल्याण के लिए समर्पित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रवींद्र भवन, भोपाल में कृषक कल्याण वर्ष में किसानों के सशक्तिकरण और उनकी आय वृद्धि के उद्देश्य से कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सूचना प्रौद्योगिकी आधारित प्रणालियों की शुरूआत की गई, जिनमें मुख्यमंत्री किसान कल्याण डैशबोर्ड, पैक्स समितियों में सदस्यता वृद्धि महाअभियान और सीएम किसान हेल्पलाइन शामिल हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हेल्पलाइन से जुड़कर कृषि संबंधी जानकारी प्राप्त की और इसकी उपयोगिता का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की सेवा के लिए सीएम किसान हेल्पलाइन प्रारंभ की गई है। किसान भाई टोल फ्री नम्बर 155253 के माध्यम से इस नवाचारी पहल का लाभ ले सकेंगे। इस हेल्पलाइन से किसानों को त्वरित मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उन्मुखीकरण कार्यशाला में उपस्थित सभी कृषि कर्मयोगियों से किसान हितैषी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए पवित्र और समर्पण भाव से कार्य करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के लिए कार्य करते हुए नए प्रयोगों के साथ अपने मन के नए अंकुरण और कोमलता को जीवंत रखने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में हुए सकारात्मक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता के बल पर अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से पशुपालन क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिससे प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हुई है और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है। राज्य सरकार ने कई असंभव कार्यों को लक्ष्य तक पहुंचाया है। प्रदेश में दुग्ध क्रांति हो रही है। वर्तमान में किसानों को प्रति लीटर दूध पर पहले की तुलना में 7 से 8 रुपए तक अधिक मूल्य मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि क्षेत्र में अब व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहे है। पहले रबी फसल वर्षा पर निर्भर रहती थी, लेकिन अब समय बदल रहा है। नहरों और विद्युत सुविधाओं के विस्तार से खेत-खेत तक सिंचाई पहुंच गई है। इसके परिणामस्वरूप किसान अब वर्ष में 2 के स्थान पर 3 फसलें लेने लगे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार किसानों के लिये प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है। इस वर्ष राज्य सरकार किसानों से 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं उपार्जित कर रही है। राज्य सरकार ने उड़द की फसल पर समर्थन मूल्य के साथ देने की शुरुआत की है। किसानों की अतिरिक्त आय का साधन बना एग्री वेस्ट मैनेजमेंट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान अब एग्री वेस्ट मैनेजमेंट अपनाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। मक्के के डंठल, गेहूं और धान की नरवाई से भूसा बनाकर किसान लाभ कमा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं को खेती की ओर आकर्षित करने पर बल देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकों और नवाचारों के माध्यम से खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। इजरायल में सीमित संसाधनों के बावजूद वहां खेती को अत्यंत आधुनिक और लाभकारी बनाया गया है। इजरायल में कम बारिश के बाद भी खेती में तकनीक का उपयोग प्रेरणास्पद है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार के लिए सीमा पर जवान और खेतों में किसान दोनों बराबर हैं। कृषक परिवारों से आने वाले युवा डॉक्टर, इंजीनियर बनना चाहते हैं, लेकिन खेती को भी लाभ का जरिया बनाया जा सकता है। इसके लिए युवाओं को प्रेरित करने की आवश्यकता है। पीकेसी परियोजना के लिए हमारी सरकार के आभारी है राजस्थानवासी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश को तीन-तीन नदी जोड़ो परियोजनाओं की सौगात मिली है। केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुंदेलखंड और पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना से मध्यप्रदेश और राजस्थान के कई जिले लाभान्वित होने वाले हैं, जिनके लिए केंद्र सरकार ने लागत की 90 प्रतिशत राशि दी है। पीकेसी परियोजना पर सहमति के लिए राजस्थान के 15 जिलों के लोग मध्यप्रदेश सरकार को कोटि-कोटि धन्यवाद दे रहे हैं। मध्यप्रदेश नदियों का मायका है और यहां जलराशी का पर्याप्त भंडार है। प्रधानमंत्री  मोदी ने मां नर्मदा के आशीर्वाद से अपने गुजरात के मुख्यमंत्री के कार्यकाल में गुजरात को विकसित और अग्रणी राज्य बनाया। अब हमारी सरकार भी नर्मदा के जल से प्रदेश को समृद्ध बना रही है। आज पानी की बूंद-बूंद को बचाकर खेती-किसानी को आगे बढ़ाने का प्रयास करने की आवश्यकता है। कृषि मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा कि हर जिले में कृषि मेले आयोजित किये जा रहे हैं। इस कार्यशाला के माध्यम से कृषि कर्मयोगियों के साथ मंथन हो रहा है। राज्य में किसान हितैषी सरकार है, मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों की परेशानियों के लिए चिंतित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज गेहूं उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण किया है। प्रधानमंत्री  मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों के लिए शुरू की गई योजनाओं को जमीनी स्तर पर उतारा है। इस कार्य में सभी कृषि कर्मयोगियों को सहयोग प्राप्त हो रहा है। सचिव कृषि  निशांत वरवड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने लोकसेवकों को कर्मयोगी की संज्ञा दी है। कृषक कल्याण वर्ष में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन से आज सभी 55 जिले, विकासखंड, क्लस्टर लेवल और ग्राम पंचायतों से कृषि से जुड़े 16 विभागों के 1627 चुनिंदा अधिकारियों और कर्मचारियों को कर्मयोगी उन्मुखीकरण कार्यशाला में आमंत्रित किया है। इसमें कृषि विभाग, सहकारिता विभाग, मत्स्य पालन विभाग, उद्यानिकी विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, मार्केटिंग फेडरेशन, बीज निगम, कृषि अभियांत्रिकी विभाग एवं अन्य विभाग शामिल हैं। कार्यशाला में किसानों की समस्याओं … Read more

कटघोरा एवं पाली क्षेत्र के उपभोक्ताओं को होगी निर्बाध बिजली की आपूर्ति

रायपुर 132 केव्ही उपकेन्द्र छुरीखुर्द में 40 एमव्हीए का अतिरिक्त ट्रांसफार्मर उर्जीकृत छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड, द्वारा विद्युत उपभोक्ताओं की सुविधाओं में उत्तरोत्तर वृद्धि करते हुये ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में विद्यमान उपकेन्द्रों में स्थापित पॉवर ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि का कार्य सर्वाेच्च प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है। इसी क्रम में 132 केव्ही उपकेन्द्र कोरबा जिले के छूरीखुर्द में 4 करोड़ 31 लाख रूपये की लागत से 40 एम.व्ही.ए. क्षमता का अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। विद्युत कंपनी के विशेष प्रयासों से विद्युत विकास के लिए स्वीकृत इस कार्य से उपकेन्द्र के परिधि में आने वाले उपभोक्ताओं को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा अब उन्हे उच्च गुणवत्तापूर्ण तथा निर्बाध विद्युत की आपूर्ति होगी।  ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक  आर.के.शुक्ला ने स्वीच का बटन ऑन कर नये ट्रांसफार्मर के माध्यम से विद्युत सप्लाई प्रारंभ की तथा उन्होने अपने उद्बोधन में कहा कि विद्युत विभाग उपभोक्ताओं की सुविधाओं में निरंतर वृद्धि करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कडी में आज इस उपकेन्द्र में अतिरिक्त 40 एमव्हीए क्षमता के पॉवर ट्रांसफार्मर को उर्जीकृत किया गया है, जिसका लाभ इस क्षेत्र के 50 गांवों के उपभोक्ताओं को मिलेगा।