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छत्तीसगढ़ में तबादलों की लिस्ट जारी: परिवहन विभाग के 20 RTO अधिकारी इधर से उधर

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार के परिवहन विभाग ने राज्य में सुचारू परिवहन व्यवस्था और प्रशासनिक कसावट लाने के उद्देश्य से 20 अधिकारियों का तबादला आदेश जारी किया है। महानदी भवन से जारी इस आदेश में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों से लेकर तकनीकी अधिकारियों के नाम शामिल हैं। आदेश के अनुसार, कई जिलों के जिला परिवहन अधिकारियों को बदला गया है। कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार हैं…     विवेक सिन्हा: जिला परिवहन अधिकारी (कोरबा/पेंड्रा) से अब जांजगीर-चांपा भेजे गए हैं।     अतुल असैया: जिला परिवहन अधिकारी (कोण्डागांव) से अब कोरबा की जिम्मेदारी संभालेंगे।     गौरव साहू: जांजगीर-चांपा से स्थानांतरित कर रायगढ़ का जिला परिवहन अधिकारी बनाया गया है।     अब्दुल मुजाहिद: जिला परिवहन अधिकारी (धमतरी) से परिवहन मुख्यालय, नवा रायपुर स्थानांतरित किए गए हैं।     अनिल भगत: कोरिया से राजनांदगांव (अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी) भेजे गए हैं। तकनीकी और मुख्यालय स्तर पर बदलाव सूची में एआरटीओ योगेश भण्डारी (बालोद), किशनलाल माहौर (बेमेतरा) और शिवभगत रावटे (धमतरी) जैसे नाम भी शामिल हैं जिन्हें नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इसके अलावा, तकनीकी विभाग से चुन्नीलाल देवांगन को भी मुख्यालय, नवा रायपुर में पदस्थ किया गया है।  

योगी सरकार का बड़ा फैसला, आयुष कॉलेजों में नई चिकित्सा पद्धतियों को मिलेगा स्थान

 लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब पारंपरिक और प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने जा रहा है। आयुष प्रणालियों को नई ऊंचाई देने के लिए योगी सरकार ने प्रदेश के आयुष कॉलेजों में 2500 वर्ष पुरानी तिब्बती चिकित्सा प्रणाली ‘सोवा रिग्पा’ (अमची चिकित्सा) और दक्षिण भारत की प्रसिद्ध 'सिद्ध' पद्धति की पढ़ाई शुरू करने की ऐतिहासिक तैयारी की है। इस कदम का उद्देश्य न केवल सदियों पुरानी चिकित्सा विधाओं को पुनर्जीवित करना है, बल्कि जटिल और दीर्घकालिक बीमारियों के लिए मरीजों को किफायती और प्रभावी वैकल्पिक उपचार प्रदान करना भी है। योगी सरकार की हरी झंडी: डिग्री के साथ मिलेगा रजिस्ट्रेशन का अधिकार प्रमुख सचिव आयुष, रंजन कुमार के अनुसार, योगी सरकार ने इन दोनों पद्धतियों के डिग्री कोर्स शुरू करने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी है। अब चयनित आयुष कॉलेजों में जरूरी बुनियादी ढांचे और पाठ्यक्रम का विकास किया जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन कोर्सों को पूरा करने वाले चिकित्सकों का विधिवत पंजीकरण (Registration) किया जाएगा। इससे डिग्री धारक डॉक्टर अधिकृत रूप से अपने क्लीनिक और उपचार केंद्र खोल सकेंगे, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। वाराणसी बनेगा रिसर्च और ट्रेनिंग का ग्लोबल हब सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य केंद्र भगवान शिव की नगरी वाराणसी होगी। वाराणसी को सोवा रिग्पा के प्रमुख शोध, प्रशिक्षण और उपचार केंद्र (Hub) के रूप में विकसित किया जाएगा। चूंकि काशी पहले से ही आयुर्वेद और आध्यात्मिक चिकित्सा की जननी रही है, इसलिए यहाँ सोवा रिग्पा और सिद्ध पद्धति का एकीकरण जटिल रोगों पर वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देगा। यह केंद्र विशेष रूप से उन बीमारियों के उपचार पर केंद्रित होगा जहां आधुनिक चिकित्सा के साथ पूरक उपचार (Complementary Therapy) की आवश्यकता होती है। असाध्य रोगों का रामबाण इलाज: क्या है सोवा रिग्पा और सिद्ध पद्धति? तिब्बत से निकली 'सोवा रिग्पा' पद्धति हिमालयी क्षेत्रों में अपनी प्रभावशीलता के लिए प्रसिद्ध है, जो शरीर, मन और पर्यावरण के संतुलन पर काम करती है। यह गठिया, पाचन विकार, मानसिक तनाव और कैंसर जैसे रोगों के उपचार में सहायक मानी जाती है। वहीं, दक्षिण भारत की 'सिद्ध' पद्धति वात, पित्त और कफ के दोषों को संतुलित कर जीवनशैली और प्राकृतिक औषधियों के जरिए स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती है। योगी सरकार का लक्ष्य आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी के साथ इन पद्धतियों को मुख्यधारा में लाकर उत्तर प्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं का 'वन स्टॉप डेस्टिनेशन' बनाना है।  

पुलिस मुख्यालय परिवार द्वारा 11 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दी गई भावभीनी विदाई

भोपाल पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं से माह अप्रैल में सेवानिवृत्त 11 कर्मचारियों को पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने गुरूवार को भावभीनी विदाई दी। पुलिस महानिदेशक ने सभी को पौधे एवं स्मृति चिन्ह भेंट किए और उनके स्वस्थ एवं सुखी जीवन की कामना की। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके विभिन्न स्वत्वों (क्लेम) भुगतान के आदेश भी प्रदान किए गये। नवीन पुलिस मुख्यालय भवन कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित विदाई समारोह में विशेष पुलिस महानिदेशक  अनिल कुमार,  पंकज वास्तव, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  योगेश चौधरी,  विवेक शर्मा एवं अन्य पुलिस अधिकारी, कर्मचारी एवं सेवानिवृत्त, कर्मचारियों के परिजन उपस्थित थे। पुलिस मुख्यालय से सेवानिवृत्तव मानसेवी उप पुलिस अधीक्षक विशेष शाखा  अजय कुमार तुरकई, मानसेवी उप पुलिस अधीक्षक योजना शाखा मती लता खट्टर, निरीक्षक अ.अ.वि. शाखा  कैलाश नारायण भारद्वाज, कार्यवाहक निरीक्षक विशेष शाखा  रामसनेही यादव, कार्यवाहक निरीक्षक विशेष शाखा  केदारनाथ शर्मा, कार्यवाहक सूबेदार (एम) रिकार्ड शाखा  नईमउद्दीन, उप निरीक्षक (तकनीकी) पुलिस आईटीआई  शशिवीर सिंह सिसोदिया, उप निरीक्षक (तकनीकी) पुलिस आईटीआई  रणजीत सिंह उप्पल, सहायक उप निरीक्षक (एम) शिकायत शाखा  राजकुमार साहू, कार्यवाहक सहायक उप निरीक्षक अ.अ.वि.  चैनसिंह तथा कार्यवाहक प्रधान आरक्षक पीटीआरआई  हाकिम सिंह को पुलिस मुख्यालय परिवार ने गुरूवार को भावभीनी विदाई दी। सहायक पुलिस महानिरीक्षक मती इरमीन शाह ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के कार्यकाल पर प्रकाश डाला। विदाई समारोह में मौजूद अधिकारियों ने सेवानिवृत कर्मचारियों की मेहनत और लगन की सराहना की।  

मंत्रीगण और वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुंचने के दिए निर्देश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर में तेज आंधी-तूफान के कारण बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह हादसा पीड़ादायक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह और पर्यटन मंत्री  धर्मेंद्र सिंह लोधी को तत्काल प्रभावित क्षेत्र में पहुंचने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर संभाग प्रभारी एसीएस, एडीजी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस हादसे में दिवंगत नागरिकों के परिजन को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। प्रभावित व्यक्तियों और परिवारों को हर संभव सहायता सुनिश्चित की जा रही है। लाइफ सेविंग जैकेट की व्यवस्था से बची जानें स्थानीय प्रशासन की सहायता से रेस्क्यू फोर्स सक्रिय है। त्वरित बचाव कार्य से 15 नागरिकों को सकुशल बचा लिया गया है। जो नागरिक लापता हैं, उन्हें जल्द से जल्द ढूंढने का प्रयास किया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पर्यटन विभाग और क्रूज संचालन का प्रबंधन और पर्यटकों के भ्रमण का दायित्व संभालने वाले व्यक्तियों द्वारा लाइफ सेविंग जैकेट की व्यवस्था से जानें बचाने में सफलता मिली। निरंतर चल रहा बचाव और राहत कार्य उल्लेखनीय है कि जबलपुर में तेज आंधी तूफान के कारण हुए क्रूज हादसे के पश्चात 15 व्यक्तियों को सुरक्षित बचा लिया गया है। हादसे में चार व्यक्तियों की मृत्यु की पुष्टि हुई है। शेष व्यक्ति की तलाश और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। जबलपुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित एसडीआरएफ एवंअन्य बचाव दल घटना स्थल पर मौजूद रहकर राहत और बचाव कार्य में सक्रिय हैं।  

कांकेर एकलव्य की छात्रा कृतिका टेकाम ने देशभर के एकलव्य विद्यालयों में की टॉप

रायपुर छत्तीसगढ़ के कांकेर निवासी कृतिका टेकाम ने सीबीएसई 10 वीं बोर्ड की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। होनहार छात्रा कृतिका ने संपूर्ण देश में संचालित लगभग 750 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में सर्वाधिक अंक प्राप्त कर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। इस बड़ी उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कृतिका को उज्ज्वल भविष्य के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी है।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कांकेर की होनहार छात्रा कृतिका टेकाम को सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा में देशभर के एकलव्य विद्यालयों में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल कृतिका के परिश्रम और प्रतिभा का परिणाम है, बल्कि छत्तीसगढ़ में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और जनजातीय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों की सफलता का भी प्रमाण है। उन्होंने कहा कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के माध्यम से राज्य के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर अवसर मिल रहे हैं, जिससे वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सभी सफल विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता को निरंतर प्रोत्साहित करती रहेगी। आदिम जाति विकास मंत्री  रामविचार नेताम ने कांकेर की छात्रा कृतिका टेकाम को सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा में देशभर के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के जनजातीय विद्यार्थियों की प्रतिभा, परिश्रम और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के माध्यम से जनजातीय अंचलों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर संसाधन और अनुकूल वातावरण मिल रहा है, जिसके परिणामस्वरूप वे राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। मंत्री  नेताम ने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार जनजातीय विद्यार्थियों के शैक्षणिक, बौद्धिक और सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।   गौरतलब है कि सीबीएसई द्वारा हाल ही में शैक्षणिक सत्र 2025-26 हेतु 10वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित किया है, जिसमें छत्तीसगढ़ की छात्रा कु. कृतिका टेकाम देशभर के एकलव्य विज्ञालयों में प्रथम स्थान हासिल की है।  आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने बताया कि कृतिका टेकाम कांकेर जिले में संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रही थी। संपूर्ण देश में संचालित लगभग 750 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रदेश के साथ-साथ आदिम जाति विभाग को भी गौरवान्वित किया है। इसके साथ ही अन्य विद्यार्थियों द्वारा भी अच्छा परीक्षा परिणाम प्राप्त किया गया है। प्रदेश में संचालित 75 एकलव्य विद्यालयों में से हाई स्कूल स्तर पर 71 एकलव्य विद्यालय संचालित हैं। इनमें 11 एकलव्य विद्यालयों द्वारा शत्-प्रतिशत परीक्षा परिणाम अर्जित किया गया। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में संचालित कुल 75 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ उनके मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसी का परिणाम है कि शिक्षण सत्र 2025-26 में चौथी एकलव्य विद्यालयों की राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में प्रदेश के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के दल द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुये देश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया गया।  आयुक्त डॉ. सारांश मित्तर ने बताया कि इसी प्रकार भारत सरकार, पंचायती राज, मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा आयोजित मॉडल यूथ ग्राम सभा प्रतियोगिता में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, कोसमबुड़ा जिला-गरियाबंद को देश में संचालित 800 विद्यालयों में से राष्ट्रीय विजेता चुना गया। गरियाबंद के चयनित इन विद्यार्थियों को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए 28 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया, साथ ही इस विद्यालय को एक करोड़ रूपए की उपहार राशि प्रदान की गई है।

वर्ष 2025-26 में 204 सूचनाकर्ताओं को मिला 5.05 लाख का रिवॉर्ड

भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिजली चोरी की रोकथाम के लिए चलाई जा रही 'पारितोषिक योजना' को अब और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया  गया है। योजना के संशोधित प्रावधानों के अनुसार, बिजली के अवैध उपयोग की सटीक सूचना देने वाले सूचनाकर्ताओं को अब प्रोत्साहन राशि के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा। कंपनी ने निर्णय लिया है कि सूचना सही पाए जाने और अंतिम निर्धारण आदेश (Final Assessment Order) जारी होने के तुरंत बाद सूचनाकर्ता को कुल 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि में से 5 प्रतिशत राशि का भुगतान तत्काल कर दिया जाएगा। शेष 5 प्रतिशत राशि की अदायगी आरोपी से राशि की पूर्ण वसूली होने के उपरांत की जाएगी। सफल क्रियान्वयन: सीधे बैंक खाते में पहुंची राशि मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा चलाई जा रही 'पारितोषिक योजना' की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 204 प्रकरणों में सफल सूचनाकर्ताओं को 5.05 लाख रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। इसके अलावा, जांच और वसूली की कार्यवाही करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी उनके मासिक वेतन के साथ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा इस योजना के दायरे को बढ़ाते हुए नियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को भी सूचनाकर्ता के रूप में शामिल किया गया है। सूचना सही पाए जाने और पूर्ण वसूली होने पर इन कर्मचारियों को एक प्रतिशत प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। साथ ही, जांच एवं वसूली कार्य में शामिल विभागीय अधिकारियों सहित बाह्य स्रोत (Outsource) कर्मचारियों के महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए उन्हें भी 2.5 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि समान रूप से वितरित की जा रही है। पूर्ण गोपनीयता और ऑनलाइन प्रक्रिया मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने स्पष्ट किया है कि सूचनाकर्ता की पहचान और भुगतान से जुड़ी पूरी प्रक्रिया पूर्णतः गोपनीय और ऑनलाइन रखी गई है। योजना का लाभ लेने के लिए सूचनाकर्ता को कंपनी के पोर्टल portal.mpcz.in पर informer scheme लिंक पर जाकर अथवा उपाय के माध्‍यम से बिजली चोरी की सूचना देनी होगी और दिए गए प्रारूप में अपना बैंक खाता विवरण और पहचान पत्र (जैसे पैन कार्ड या अन्य अधिकृत आईडी) देना अनिवार्य होगा।  कंपनी ने बताया है कि योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि सीधे कंपनी मुख्यालय से सूचनाकर्ता के खाते में भेजी जा रही है। क्षेत्रीय वृत्त स्तर पर प्राप्त होने वाली शिकायतों पर त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए मुख्यालय स्तर से इसकी सतत निगरानी भी की जा रही है, ताकि बिजली चोरी रोकने के अभियान को और गति मिल सके। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा समस्त नागरिकों के साथ साथ आउटसोर्स कर्मचारियों तथा उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे गुप्त सूचना देकर, पारितोषिक योजना का लाभ उठाकर कंपनी को सहयोग प्रदान अवश्य करें।  

असंगठित मजदूरों के लिए नई योजना, स्वास्थ्य से आवास तक मिलेगा लाभ

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार श्रमिकों के लिए ठोस और दीर्घकालिक राहत की दिशा में काम कर रही है। अब तक अस्थायी कैंपों में मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं के बजाय श्रमिकों को स्थायी और कैशलेस इलाज से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही उनके लिए किफायती और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हॉस्टल सुविधा शुरू करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। 8.42 करोड़ असंगठित श्रमिकों का डेटा दर्ज आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष में कारखानों में 2.77 लाख पुरुष और 23,941 महिला श्रमिक पंजीकृत थे। वहीं, ई-श्रम पोर्टल पर प्रदेश के 8.42 करोड़ असंगठित श्रमिकों का डेटा दर्ज है, जिनमें से 7.06 करोड़ से अधिक को राशन कार्ड उपलब्ध कराए जा चुके हैं। लेटेस्ट और ट्रेंडिंग स्टोरीज करीब 35 लाख श्रमिक, जो पहले खाद्य सुरक्षा योजना से वंचित थे, उन्हें भी अब इसमें शामिल किया गया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में श्रमिक अभी भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर हैं। श्रम विभाग नई स्वास्थ्य योजनाएं तैयार कर रहा प्रदेश में कई श्रमिक ईएसआई और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं और उन्हें समय-समय पर अस्थायी स्वास्थ्य कैंपों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए श्रम विभाग नई स्वास्थ्य योजनाएं तैयार कर रहा है। प्रस्ताव है कि ऐसे श्रमिकों को मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें अस्पताल में भर्ती, सर्जरी, जांच और दवाओं की कैशलेस सुविधा मिल सके। श्रमिकों के लिए हॉस्टल सुविधा शुरू करने पर भी काम सरकार श्रमिकों के लिए हॉस्टल सुविधा शुरू करने पर भी काम कर रही है, जिससे उन्हें सुरक्षित और सस्ती आवासीय व्यवस्था मिल सके। साथ ही, श्रमिकों के बच्चों के लिए चल रही छात्रवृत्ति योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की योजना है। वर्तमान में, जिन श्रमिकों की मासिक आय 24 हजार रुपये से कम है, उनके लिए श्रम कल्याण परिषद आठ योजनाएं संचालित कर रही है। जागरूकता की कमी के कारण इन योजनाओं में आवेदन कम इन योजनाओं के तहत बच्चों की शिक्षा, खेल, कन्यादान और धार्मिक पर्यटन के लिए 2,500 रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है। हालांकि, जागरूकता की कमी के कारण इन योजनाओं में आवेदन अपेक्षाकृत कम हैं। केंद्र सरकार द्वारा 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार नई श्रम संहिताएं लागू की गई हैं, जिनका उद्देश्य श्रमिकों और उद्योग दोनों के हितों की रक्षा करना है। प्रदेश में नियमावली तैयार की जा रही है इनमें वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां (OSH) संहिता और सामाजिक सुरक्षा संहिता शामिल हैं। इन संहिताओं के आधार पर प्रदेश में नियमावली तैयार की जा रही है, जिसके लागू होने से श्रमिकों के हित में कई योजनाओं को और गति मिलने की उम्मीद है।  

कपास का अच्छा भाव भी नहीं लुभा पा रहा किसान, 60% तक घट सकता रकबा

 ढिगावा मंडी  हरियाणा में कपास की खेती करने में किसान रूचि नहीं दिखा रहे हैं। मार्केट में अच्छा भाव मिलने के बावजूद भी किसानों का कपास से मोह भंग हो चुका है। मार्केट में नरमा कपास इस समय आठ से 10 हजार रुपये क्विंटल बिक रही है। इसके बावजूद किसान कपास की फसल की बिजाई करने में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे। जिसके कारण पिछले साल से 60 से 65 प्रतिशत तक कपास का रकबा घट सकता है। कपास की फसल से किसानों का मोह भंग होने का कारण गुलाबी सुंडी है। गुलाबी सुंडी ने पिछले साल कपास की फसल में कहर ढाया था। जिसके कारण किसानों ने समय से पहले कपास की फसल काटकर अगली फसल की बिजाई कर दी थी। सरकार और कृषि विभाग को भी पहले से ही इस बार कपास का रकबा घटने का अंदेशा था। जिसके चलते गुलाबी सुंडी पर नियंत्रण पाने के लिए खरीफ सीजन से पहले ही प्रयास शुरू कर दिए गए थे। अधिकारियों ने किया था किसानों से संपर्क कृषि विभाग के अधिकारियों ने काटन मिल में जाकर निरीक्षण किया और वहां रखे बिनौले को ढक कर रखने के आदेश दिए थे, ताकि बिनौले से निकल कर गुलाबी सुंडी का फैलाव ना हो। वहीं खेतों में रखे कपास के फसल अवशेष (लकड़ी) भी उठाने या नष्ट करने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से संपर्क किया। ताकि फसल अवशेष में अगर गुलाबी सुंडी है, तो वो भी नष्ट हो जाए और कपास की अगली फसल में जाए। लेकिन कृषि विभाग के प्रयासों के बावजूद कपास की फसल की बिजाई करने में किसान कम रुचि ले रहे हैं। पिछले साल एक लाख 52 हजार एकड़ में कपास की फसल थी भिवानी जिले का लोहारू, बहल क्षेत्र कपास उत्पादन के लिए जाना जाता है, लेकिन अब यहां के किसान बाजरा, ग्वार, मूंग की फसलों का रुख कर रहे हैं। दैनिक जागरण टीम ने किसानों से इस बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि भूजल स्तर तेजी से गिरना, समर्थन मूल्य पर अनिश्चितता, गुलाबी सुंडी व सफेद मक्खी का प्रकोप किसानों ने कपास की खेती छोड़ने का प्रमुख कारण बताया। बता दें की भिवानी जिले में पिछले साल एक लाख 52 हजार एकड़ में कपास की फसल थी। 15 मई तक कपास की बिजाई के लिए अनुकूल समय माना जाता है, लेकिन अभी तक नाममात्र एकड़ पर ही कपास की बिजाई हो पाई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में आठ से 10 हजार एकड़ में और कपास की बिजाई हो सकती है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अगले पांच दिन मौसम कपास फसल बिजाई के लिए अनुकूल है। क्योंकि वर्षा से तेजी से बढ़ रहे तापमान में गिरावट आई है।

झारखंड: सरायकेला में 43°C तापमान, स्वास्थ्य सेवाएं हुईं प्रभावित

 सरायकेला सरायकेला-खरसावां जिले में बढ़ते तापमान और लू की मार ने स्वास्थ्य सेवाओं को हांफने पर मजबूर कर दिया है। सरायकेला के सदर अस्पताल व प्रखंडों के स्वास्थ्य केंद्रों में डायरिया, उल्टी, लूज मोशन और हीटस्ट्रोक से ग्रस्त मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सदर अस्पातल में प्रत्येक दिन डायरिया, बुखार व हीटस्ट्रोक से पीड़ित पांच से छह मरीजों को प्रतिदिन सदर अस्पताल में भर्ती किया जा रहा है सरायकेला सदर अस्पताल के ओपीडी में रोजाना 230 से 260 के करीब मरीज पहुंचते हैं लेकिन गर्मी के कारण रोजाना 300 से अधिक मरीज यहां पहुंच रहे हैं। यहां 50 से 60 मरीज कमजोरी, चक्कर और डिहाइड्रेशन की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। यही हाल पूरे जिले के अस्पतालों का है। जहां मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। गर्मी के कारण पानी की कमी से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो रहा है। यह मौसमी बीमारी का प्रकोप है, जो गंदे पानी, प्रदूषित भोजन और अत्यधिक गर्मी से जुड़ा है। जिले का तापमान 43 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है, जिससे ग्रामीण इलाकों में स्थिति गंभीर है। लू लगने के प्रमुख लक्षण     तेज बुखार: शरीर का तापमान अचानक 103-104°F या उससे ऊपर होना।     त्वचा में बदलाव: त्वचा का बहुत गर्म, लाल और शुष्क (रूखा) हो जाना, पसीना आना बंद हो जाना।     सिरदर्द और चक्कर: तेज सिरदर्द और कमजोरी के साथ चक्कर आना।     उल्टी और जी मिचलाना: लगातार जी मिचलाना या उल्टी होना।     तेज धड़कन और सांस: दिल की धड़कन तेज होना और सांस लेने में तकलीफ।     मांसपेशियों में ऐंठन: शरीर में अकड़न या जकड़न महसूस होना।     गर्मी के कारण हीटस्ट्रोक के मरीजों में इजाफा हुआ है। इस मौसम में ताजे फल जैसे तरबूज, खीरा, नींबू-पानी और छाछ को आहार में शामिल करें। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप से पूरी तरह परहेज करें। हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें, सिर पर टोपी या छाता इस्तेमाल करें। –

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से 13 हजार 868 हितग्राहियों को 11.75 करोड़ की मिली छूट

रायपुर प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना कबीरधाम जिले के आम नागरिकों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। इस योजना के तहत कबीरधाम जिले के कुल 13 हजार 868 उपभोक्ताओं को लाभ मिला है, जिन्हें अब तक 11 करोड़ 75 लाख 38 हजार 570 रुपये की छूट प्रदान की जा चुकी है। यह योजना बीपीएल, निम्नदाब घरेलू एवं कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए शुरू की गई है, ताकि वे अपने पुराने बकाया बिजली बिलों के बोझ से मुक्त हो सकें। योजना के अंतर्गत सक्रिय और निष्क्रिय दोनों प्रकार के उपभोक्ताओं को शामिल किया गया है, जिससे अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके। विद्युत विभाग के कार्यपालन अभियंता ने बताया कि जिले में योजना का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए विशेष ’समाधान शिविरों’ का भी लगाई गई। विभाग की टीमें न केवल इन शिविरों में उपस्थित रहकर सहायता प्रदान कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में घर-घर जाकर भी लोगों को योजना की जानकारी दे रही हैं। उपभोक्ताओं को पात्रता, छूट की प्रक्रिया और आवेदन संबंधी जानकारी सरल भाषा में समझाई जा रही है। उन्होंने बताया कि 31 मई तक इस योजना का लाभ उठा सकते है। उन्होंने बताया कि जिन उपभोक्ताओं के बिजली बिल 31 मार्च 2023 से पूर्व के बकाया हैं, वे इस योजना का लाभ लेकर अपने बकाया का निपटारा कर सकते हैं। इसके लिए उपभोक्ता अपने नजदीकी बिजली वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। बकाया बिजली बिलों का समय पर निपटारा कर उपभोक्ता न केवल आर्थिक बोझ से राहत पा सकते हैं, बल्कि भविष्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति भी सुनिश्चित कर सकते हैं। साथ ही, यह कदम बिजली कंपनी के सुदृढ़ीकरण में भी सहायक होगा। उन्होंने बताया कि कवर्धा सर्कल के 5 हजार 63 उपभोक्ताओं के 3 करोड़ 75 लाख 97 हजार 706 रुपये की छूट प्रदान की गई है। इसके तहत कृषि के 566 उपभोक्ताओं के 22 लाख 67 हजार 926, एपीएल के 538 उपभोक्ताओं के 48 लाख 62 हजार 408 रूपए और बीपीएल के 3 हजार 959 उपभोक्ताओं के 3 करोड़ 4 लाख 67 हजार 371 रुपये की छूट प्रदान की गई है। इसी तरह पंडरिया सर्कल के 8 हजार 805 उपभोक्ताओं के 7 करोड़ 99 लाख 40 हजार 864 रुपये की छूट प्रदान की गई है। इसके तहत कृषि के 340 उपभोक्ताओं के 27 लाख 35 हजार 629, एपीएल के 1881 उपभोक्ताओं के 1 करोड़ 9 लाख 97 हजार 435 रूपए और बीपीएल के 7 हजार 284 उपभोक्ताओं के 6 करोड़ 62 लाख 7 हजार 801 रुपये की छूट प्रदान की गई है।