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नशामुक्त भारत अभियान में दो दिवसीय राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण वाल्मी में प्रारंभ

भोपाल.  नशामुक्त भारत अभियान अंतर्गत प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिये नशामुक्ति अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये जिलों के 1200 मास्टर ट्रेनर्स का 12 दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 22 अप्रैल से 8 मई, 2026 तक म.प्र. जल एवं भूमि प्रबंध संस्थान (वाल्मी) भोपाल में किया जा रहा है। प्रशिक्षण का गुरुवार को विधिवत शुभारंभ किया गया। संयुक्त संचालक सामाजिक न्याय श्रीमती सुचिता तिर्की ने बताया कि इस 12 दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभागीय एवं धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक संगठनों तथा प्रदेश में नशामुक्ति के क्षेत्र में कार्यरत विभागीय मान्यता प्राप्त अशासकीय संस्थाओं के कुल 1200 मास्टर ट्रेनर को प्रशिक्षित किया जायेगा। इन मास्टर ट्रेनर्स द्वारा जिला, तहसील, नगरीय निकाय, नगर परिषद, विकासखण्ड एवं ग्राम पंचायत स्तर पर मास्टर वॉलिंटियर्स को प्रशिक्षित कर समाज में बच्चों एवं युवाओं तथा स्कूल एवं महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं को नशामुक्ति के लिये प्रेरित किया जायेगा। संचालक म.प्र. जल एवं भूमि प्रबंध संस्थान (वाल्मी) श्रीमती सरिता बाला ओम ने कहा कि नशामुक्ति का संदेश जन-जन तक पहुँचाने एवं महिलाओं के माध्यम से परिवार को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराये जाने में मास्टर ट्रेनर की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इस अवसर पर डॉ. तमोनुद मोदक जी, मनोचिकित्सक, एम्स भोपाल, कौशिक मन्ना नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो मध्यप्रदेश, डॉ. प्रियंका दीदी, वीके दीदी, सुनीता दीदी, ब्रम्हकुमारी, अनूप दुबे अल्कोहॉलिक अनॉनिमस, राजीव तिवारी, समर्थ दंडोतिया शुद्धि, जीके नशामुक्ति केन्द्र द्वारा नशे से मनुष्य के मस्तिस्क पर होने वाले दुष्परिणामों एवं उनसे उभरने के उपाय बताये गये।  

फार्मर रजिस्ट्री के लिए कम सैचुरेशन वाले गांवों पर फोकस, सभी भूमिधर किसानों का रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने के निर्देश

लखनऊ.  प्रदेश में जायद 2026 सीजन की तैयारियों के तहत सरकार ने फार्मर रजिस्ट्री को लेकर अभियान तेज कर दिया है। निर्देश दिए गए हैं कि 30 अप्रैल 2026 तक 100 प्रतिशत किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए विशेष रूप से उन गांवों पर फोकस किया जा रहा है जहां अब तक रजिस्ट्री का सैचुरेशन कम है। अभियान के तहत सभी भूमिधर किसानों को शामिल किया जाएगा, चाहे वे पीएम किसान योजना के लाभार्थी हों या नहीं। किसानों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जिलों को व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें लाउडस्पीकर के माध्यम से घोषणाएं, स्थानीय समाचार पत्रों में विज्ञापन और ग्राम प्रधानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि हर किसान तक जानकारी पहुंच सके और रजिस्ट्रेशन में तेजी आए। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 15 मई 2026 से फार्मर आईडी अनिवार्य कर दी जाएगी। इसके बिना किसानों को सरकारी कृषि योजनाओं, उर्वरकों और बीज का लाभ नहीं मिल सकेगा। ऐसे में किसानों को समय रहते अपना पंजीकरण पूर्ण कराने की सलाह दी गई है। इसी क्रम में जायद 2026 के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे भी निर्धारित समयसीमा में संचालित किया जाएगा। इसके लिए 28 अप्रैल 2026 को जिला स्तरीय टीमों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि 1 मई से 31 मई 2026 तक पूरे प्रदेश में सर्वे अभियान चलाया जाएगा। इस सर्वे के माध्यम से फसलों का सटीक आंकलन कर योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।

10 दिनों में 6.39 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग, दुर्गम अंचलों तक पहुंचीं टीमें; हजारों मरीजों को मिला निःशुल्क उपचार

रायपुर.  बस्तर संभाग के घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों और दूरस्थ बसाहटों में अब स्वास्थ्य सेवाओं की दस्तक साफ महसूस की जा रही है। जहां कभी इलाज के लिए लंबी दूरी और अनिश्चितता ही विकल्प थी, वहां अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें खुद लोगों के द्वार तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के दस दिन पूरे होते-होते यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में सफल हो रही है, बल्कि सुदूर अंचलों में रहने वाले लोगों के मन में भरोसे की नई किरण भी जगा रही है। अभियान के तहत अब तक 6.39 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। बड़ी संख्या में मरीजों को मौके पर ही निःशुल्क दवा और उपचार उपलब्ध कराया गया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में तत्काल राहत मिली है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को प्राथमिकता के साथ चिन्हित कर त्वरित रेफरल की व्यवस्था की गई है। अब तक 8055 मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में भेजकर विशेषज्ञ उपचार सुनिश्चित किया गया है। जांच के दौरान मलेरिया के 1125, टीबी के 3245, कुष्ठ के 2803, मुख कैंसर के 1999, सिकल सेल के 1527 और मोतियाबिंद के 2496 मामलों की पहचान की गई है। समय पर पहचान और उपचार शुरू होने से इन बीमारियों की जटिलताओं को कम करने में मदद मिल रही है, साथ ही गंभीर स्थितियों को टालने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है। अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों तक एक समन्वित व्यवस्था बनाई गई है। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और स्वास्थ्य शिविरों के जरिए उन इलाकों तक भी सेवाएं पहुंच रही हैं, जहां पहले इलाज की सुविधा सीमित थी। इसके साथ ही लोगों के डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल (आभा) तैयार किए जा रहे हैं, ताकि आगे भी इलाज की निरंतरता बनी रहे और जरूरत पड़ने पर तुरंत स्वास्थ्य जानकारी उपलब्ध हो सके। अब बस्तर के सुदूर गांवों में भी लोग इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं खुद उनके द्वार तक पहुंच रही हैं। यही बदलाव इस अभियान को खास बना रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – माताओं-बहनों को सर्वोपरि रखने की है हमारी संस्कृति

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी संस्कृति माताओं-बहनों का सर्वोपरि रखने की रही है। बहनों को विधानसभाओं और लोकसभा में आरक्षण दिलवाने के लिए हमारी सरकार लड़ाई लड़ रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सबको साथ लेकर चलने के लिए सभी से अपील की थी, लेकिन कुछ राजनैतिक दलों को बहनों को उनका अधिकार देने में जरा भी दया नहीं आई। पहले भी बहनों के भरण पोषण के भत्ते से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी इन लोगों ने ही ठुकरा दिया था। राज्य सरकार माताओं-बहनों का सम्मान करते हुए लाड़ली बहना योजना के माध्यम से बहनों को हर महीने 1500 रुपए की सौगात दे रही है। प्रदेश के 17 जिलों में महिला कलेक्टर हैं। प्रदेश के 10 से अधिक जिलों में महिला अधिकारी एसपी हैं और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। सागर जिले में सांसद, महापौर भी महिलाएं हैं। प्रदेश भर में प्रमुख पदों पर महिलाओं को जिम्मेदारी दी जा रही है, लेकिन कई राजनैतिक दलों को नहीं सुहाता है। माताएं-बहनें सब कुछ भूल सकती हैं, पर अपना अपमान कभी नहीं भूल सकती हैं, बहनों से यही अपील है कि मौका मिलने पर हिसाब जरूर चुकता करना है। हमारा पूर्ण संकल्प है कि आज नहीं तो कल प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इन बहनों को विधानसभा और लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण दिलवा कर रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, नरयावली, सागर में विकास कार्यों के भूमि पूजन और लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन के प्रारंभ में बुंदेल केसरी महाराजा छत्रसाल और डॉ. हरिसिंह गौर को नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्या पूजन तथा दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया, उन्होंने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नरयावली में 27 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित सांदीपनि विद्यालय का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विद्यालय नहीं, हमारी 5 हजार साल पुरानी विरासत का प्रतीक है। उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने वाले श्रीकृष्ण हमारे आदर्श हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नरयावली में 41 करोड़ 7 लाख रुपए की लागत से 36 विकास कार्यों का लोकार्पण किया। इसमें विभिन्न पंचायतों में बने 12 सीसी रोड शामिल हैं। क्षेत्र की जनता को नए सामुदायिक भवनों और आंगनवाड़ी भवनों की भी सौगात मिली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा आज 17 करोड़ 39 लाख रुपए की लागत से 62 विकास कार्यों का भूमि-पूजन भी किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण के लिए सरकार प्रयासरत है। अब कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को आगे बढ़ाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही हैं। बुंदेलखंड की धरती वीरों और महावीरों की धरती है। बुंदेलखंड के लोग हर क्षेत्र में दक्ष थे, लेकिन प्रकृति की मार पड़ी तो पानी की कमी हो गई और खेती प्रभावित होने से पलायन शुरू हो गया। अब प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में यहां केन-बेतवा लिंक नदी जोड़ो परियोजना की सौगात मिली है। इस 1 लाख करोड़ रूपए की परियोजना से बुंदेलखंडवासियों के पीने के पानी की समस्या हल होगी। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। उद्योग-धंधे स्थापित होंगे। सागर में इंडस्ट्रियल पार्क का कार्य तेजी से हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के किसानों को 5 रुपए में बिजली का अस्थाई कनेक्शन दिया जा रहा है। किसानों को 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देकर 2625 रुपए प्रति क्विंटल मूल्य पर गेहूं खरीदा जा रहा है। किसानों से किए सभी वादों को पूरा करते हुए आगामी वर्षों में 2700 रुपए से अधिक भाव पर गेहूं खरीदा जाएगा। किसान भाइयों की मेहनत से प्रदेश में इस वर्ष गेहूं उत्पादन भी बढ़ा है। अब पॉली बैग्स का विकल्प निकाला गया है। राज्य सरकार ने गेहूं का एक-एक दाना खरीदने का संकल्प लिया है। राज्य सरकार पहले छोटे और मध्यम वर्ग के किसान और उसके बाद बड़े किसानों का गेहूं खरीद रही है। केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश के लिए 78 लाख मैट्रिक टन गेहूं खरीद का कोटा तय किया है, लेकिन इस बार गेहूं का उत्पादन दोगुना हुआ है, इसीलिए केंद्र सरकार से गेहूं खरीद का कोटा बढ़ाने का अनुरोध किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक किसानों को भी राज्य सरकार ने भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत लाभान्वित कर उपज का उचित दाम दिलवाया था। सच्चा वादा, पक्का काम, प्रेम से बोलो जय श्रीराम हमारी सरकार का नारा है। जो कहा है, उसे पूरा करके दिखाया है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में नए सांदीपनि विद्यालय खोले जा रहे हैं। प्रदेश में स्कूल, कॉलेज, बांध, सड़कें और उद्योग सहित अन्य विकास कार्यों के लिए आवश्यकता पड़ने पर किसानों से भूमि अधिग्रहित की जाती है। जमीन ही किसानों का आसरा होती है। इसीलिए सरकार ने निर्णय लिया है कि किसानों को भूमि अधिग्रहण करने पर कलेक्टर रेट से 4 गुना मुआवजा दिया जाएगा। किसानों की आय में वृद्धि के लिए कृषि के साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने 16 विभागों को एक साथ जोड़कर योजनाएं तैयार की हैं। सहकारिता के माध्यम से सरकार आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में बन रहे आधुनिक सांदीपनि विद्यालय प्राइवेट स्कूलों को पीछे छोड़ रहे हैं। वर्ष 2025-26 में बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम आया तो सरकारी स्कूलों के बच्चों ने सर्वोच्च स्थान हासिल किया है। बेटियों ने परीक्षाओं में बाजी मारी है। राज्य सरकार स्कूल टॉपर विद्यार्थियों को स्कूटी और मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप दे रही है। नरयावली क्षेत्र डॉ. हरिसिंह गौर के समय से शिक्षा का पावन मंदिर रहा है। यहां कोई शासकीय विश्वविद्यालय नहीं था, इसीलिए नरयावली में रानी अवंतीबाई के नाम पर राजकीय विश्वविद्यालय शुरू करने की पहल की गई। नरयावली को आज 27 करोड़ रुपए लागत के सांदीपनि विद्यालय की सौगात मिली है, जो भविष्य निर्माण का प्रमुख केंद्र बनेगा। जरुआखेड़ी में 10 करोड़ की लागत से नवीन आईटीआई भवन, 60 सीटर छात्रावास और आवासीय भवनों का लोकार्पण भी हुआ है। आज इस ऐतिहासिक अवसर पर नरयावली की जनता को 58 … Read more

प्रॉपर्टी आईडी में गलती? अब नहीं होगी परेशानी: Panipat निगम खुद करेगा सुधार, NDC पोर्टल एक्टिव

पानीपत. अब नगर निगम में बिना शिकायत ही प्रापर्टी आइडी में क्षेत्र, कैटेगरी और अन्य तरह की बड़ी गलतियां ठीक होंगी। नगर निगम अधिकारी और कर्मचारी ऐसी आइडी की तलाश खुद करेगा। इसके लिए शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय (यूएलबी) के एनडीसी पोर्टल का सहारा लिया जाएगा। नगर निगम के कर्मचारी कंप्यूटर सिस्टम में एनडीसी पार्टल खोलकर उसमें फिल्टर लगाकर गलतियां वाली आइडी की तलाश करेंगे। फिर ऐसी आइडी की खुद ही फाइल बनाकर उसकी प्रोसेस चलाएंगे। अभी शहर में 1.86 लाख प्रापर्टी आइडी हैं। इनमें करीब 50 हजार ऐसी आइडी हैं, जिनमें किसी न किसी प्रकार की गलतियां हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में नगर निगम ने 30.65 करोड़ रुपये प्रापर्टी टैक्स रिकवर किया था। जिसके साथ ही नगर निगम ने अपना ही रिकार्ड तोड़ा है अब मौजूदा वित्तीय वर्ष 2026-27 में टैक्स रिकवरी और भी अधिक बढ़ाने का लक्ष्य अभी से बनाकर काम शुरू कर दिए गए हैं।  गलतियां ठीक होने पर संबंधित मालिकों को सूचित करेंगे ऐसी आइडी की गलतियां ठीक करके संबंधित प्रापर्टी मालिकों को सूचित भी किया जाएगा। हालांकि प्रोसेस चलाने के दौरान भी जो मोबाइल नंबर दिया हुआ है, उस पर काल करके ओटीपी भी लिए जाएंगे। इसके बाद जब आइडी की गलतियां ठीक हो जाएंगी तो नगर निगम की टीमें संबंधित मालिकों को सूचित करेंगे। इसके साथ-साथ बिल भरने के लिए प्रेरित भी करेंगे। अतिरिक्त आयुक्त विवेक चौधरी ने कहा कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में इस बार प्रापर्टी टैक्स रिकवरी पहले से भी बेहतर करने के प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए प्रापर्टी आइडी की गलतियां ठीक होना बहुत जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए ऐसी प्रापर्टी आइडी की तलाश करवा रहे हैं, जिनमें बड़ी गलतियां हैं। इसके लिए विशेष रूप से टीमें गठित करके जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं। शहरवासियों को बेहतर सहयोग देने के साथ-साथ प्रापर्टी टैक्स जमा कराने के लिए भी प्रेरित करेंगे।

24 को लखनऊ में होगा उत्तर जोन का क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन

लखनऊ.  उत्तर जोन खेती का प्राण है। कृषि क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने अनेक सकारात्मक कदम उठाए हैं। यूपी के इस कदम के कारण केंद्रीय किसान कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में 24 अप्रैल (शुक्रवार) को सेंट्रम होटल में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर जोन) होगा। इसमें 9 राज्यों (उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब व दिल्ली) के कृषि मंत्री, उद्यान मंत्री, प्रमुख सचिव, निदेशक, एफपीओ, प्रगतिशील किसान, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, भारत सरकार के अधिकारी आदि रहेंगे। उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी व रामनाथ ठाकुर भी सम्मिलित होंगे।  यह जानकारी कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने दी। श्री शाही ने गुरुवार को लोकभवन में पत्रकारों से बातचीत में आयोजन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।   उन्होंने बताया कि इसमें कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की प्रगति, राज्यों के किसानों, केंद्र के स्टार्टअप, एफपीओ, नाबार्ड, बैंकों, मिल मालिकों, प्रसंस्करण इकाइयों, बागवानी की संभावनाओं, दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की प्रगति, बीज एजेंसियों, खरीद एजेंसियों, सिंचाई कंपनियों, राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन आदि पर चर्चा व समीक्षा भी होगी।  अपने बेहतर कार्यों के बारे में प्रस्तुतिकरण देंगे अन्य राज्य कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों के कल्याण व आमदनी को लेकर विभिन्न राज्यों ने बेहतर कार्य किया है। वे अपने कार्यों का प्रस्तुतिकरण देकर अन्य राज्यों को भी अवगत कराएंगे। उत्तर प्रदेश के अंदर गन्ने के साथ इंटरक्रॉपिंग शुरू कराई गई है। इसके साथ ही धान की सीधी बोआई (डीएसआर) विधि को लेकर भी प्रस्तुतिकरण होगा। भारत सरकार ने सर्वोत्तम पद्धति मानते हुए इसे किसानों के हित का भी बताया है। वहीं पंजाब सरकार ने धान के फसल विविधीकरण की पद्धति, हिमाचल व उत्तराखंड ने बागवानी के क्षेत्र में विशेष पद्धति अपनाई है। इसके साथ ही कृषि के क्षेत्र में अन्य राज्यों के विभिन्न सकारात्मक कार्यों की भी जानकारी आदान-प्रदान होगी।  किसानों को सामर्थ्यवान बनाने पर भी होगी विस्तृत चर्चा सम्मेलन में नकली कीटनाशकों, उर्वरकों की कालाबाजारी पर नियंत्रण, प्रभावी वितरण, इसके विकल्पों को बढ़ावा देने, संतुलित उपयोग, रासायनिक फर्टिलाइजर की जगह पर अल्टरनेटिव फर्टिलाइजर के प्रयोग को लेकर भी पर विस्तृत चर्चा व समीक्षा भी होगी। सम्मेलन में उत्तर जोन के लिए आगे क्या पॉलिसी बनाई जाए और इसके जरिए किसानों को कैसे सामर्थ्यवान व आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जा सके, इस पर भी चर्चा होगी।  यूरिया की खपत कम कराने के लिए लगभग 40 हजार कुंतल ढेंचे का बीज कराएंगे उपलब्ध कृषि मंत्री ने एक सवाल के जवाब में बताया कि उत्तर प्रदेश में उर्वरक की कोई समस्या नहीं है। उत्तर प्रदेश में 20 लाख मीट्रिक टन से अधिक फर्टिलाइजर है। इसमें साढ़े 11 लाख एमटी यूरिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने तय किया है कि लगभग 40 हजार कुंतल ढेंचे का बीज किसानों को उपलब्ध कराएगी, जिससे यूरिया की 20 प्रतिशत खपत कम होगी।

अवैध निर्माण पर कड़ा वार: Punjab में कॉलोनियों पर चला बुलडोज़र, प्रशासन अलर्ट

गुरदासपुर. पंजाब सरकार की गाइडलाइन और एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (जनरल) गुरसिमरन सिंह ढिल्लों के आदेशों के बाद, PAPRA एक्ट 1995 के तहत समय-समय पर अनधिकृत कॉलोनियों को नोटिस जारी किए गए और उन्हें समय-समय पर डिमोलिश किया गया। आज एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (जनरल) गुरसिमरन सिंह ढिल्लों के आदेशों के बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट रूपिंदर कौर की देखरेख में डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर रितेश गोयनका, असिस्टेंट टाउन प्लानर पुनीत डिगरा, असिस्टेंट टाउन प्लानर प्रभजोत सिंह और जिला प्रशासन/रेगुलेटरी टीम की ओर से बड़ी कार्रवाई करते हुए गांव राजूवाल में PAPRA एक्ट 1995 का उल्लंघन करके बनाई गई अनधिकृत कॉलोनी को डिमोलिश किया गया। इस बारे में जानकारी देते हुए एडिशनल डिप्टी कमिश्नर गुरसिमरन सिंह ढिल्लों ने बताया कि भविष्य में होने वाले डेवलपमेंट को कंट्रोल करने के लिए, गांव राजूवाल में बनी अनधिकृत कॉलोनियों को PAPRA एक्ट-1995 के तहत नोटिस जारी कर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई है, क्योंकि अनधिकृत कॉलोनियों के मालिक सरकारी निर्देशों को नजरअंदाज़ करके सरकारी नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि PAPRA एक्ट-1995 के अमेंडमेंट 2024 के अनुसार, अनधिकृत कॉलोनी काटने वाले व्यक्ति को 5 से 10 साल की जेल और 25 लाख से 5 करोड़ तक का जुर्माना हो सकता है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा रेगुलेटरी विंग समय-समय पर गुरदासपुर जिले में बन रही अनधिकृत कॉलोनियों और कंस्ट्रक्शन की जांच कर रहा है। इसके साथ ही काम रोकने के लिए संबंधित एक्ट के तहत नोटिस जारी कर रहा है और संबंधित पुलिस स्टेशन अफसर को आगे की कानूनी कार्रवाई करने के लिए कह रहा है। इस मौके पर उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे ऐसी गैर-कानूनी कॉलोनियों में प्लॉट न खरीदें जो सरकार से मंजूर न हों और किसी भी कॉलोनी में प्लॉट खरीदने से पहले सरकार की मंजूरी जरूर लें ताकि प्रॉपर्टी को नुकसान न हो और उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। इसके अलावा उन्होंने कहा कि PUDA एरिया में 19 मार्च 2018 से पहले जो भी अनधिकृत कॉलोनियां अप्लाई की गई हैं, वे कॉलोनाइजर जरूरी डॉक्यूमेंट जमा करके तुरंत अपनी कॉलोनियों को रेगुलर करवा लें, नहीं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी कॉलोनाइजर/प्रमोटर डिपार्टमेंट की मंजूरी लिए बिना कोई कंस्ट्रक्शन करता है, तो उसके खिलाफ नियमों के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी लक्ष्य 78 से बढ़कर 100 लाख मीट्रिक टन हुआ

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश के लिए विपणन वर्ष 2026-27 में गेहूं खरीदी के लक्ष्य में 22 लाख मीट्रिक टन की महत्वपूर्ण वृद्धि की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस वृद्धि के साथ अब मध्यप्रदेश का कुल गेहूं खरीदी लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 100 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है। यह निर्णय राज्य में किसानों से अधिक मात्रा में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गेहूँ खरीदी के लक्ष्य में वृद्धि के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार माना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह निर्णय किसानों के हित में एक बड़ा कदम है, जिससे उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ ही राज्य में खाद्यान्न प्रबंधन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। यह निर्णय किसानों के परिश्रम का सम्मान है और उन्हें उचित मूल्य दिलाने की दिशा में सशक्त कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के बावजूद हमारी सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। गेहूँ खरीदी चरणबद्ध तरीके से पहले छोटे किसानों से, फिर मध्यम और बाद में बड़े किसानों से की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस संबंध में केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी को प्रस्ताव भेजा था।  

स्किन ग्राफ्टिंग से मरीज के पलक का सफल पुनर्निर्माण

रायपुर.  छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर में एक बार फिर जटिल चिकित्सा प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए डॉक्टरों की टीम ने 22 वर्षीय युवक को नई दृष्टि और सामान्य जीवन की ओर लौटने का अवसर प्रदान किया है। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुई आंख की निचली पलक का सफल ऑपरेशन कर मरीज को बड़ी राहत मिली है। दिसंबर 2025 की दुर्घटना के बाद बढ़ी थी परेशानी प्राप्त जानकारी के अनुसार, युवक दिसंबर 2025 को एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया था। हादसे में उसकी आंख की निचली पलक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे वह अपनी आंख पूरी तरह बंद नहीं कर पा रहा था। प्रारंभिक उपचार के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद वह सिम्स के नेत्र रोग विभाग पहुंचा। विशेषज्ञों ने किया सर्जरी का निर्णय नेत्र विशेषज्ञों द्वारा गहन जांच के बाद सर्जरी का निर्णय लिया गया। ऑपरेशन के दौरान पलक पर बने पुराने कठोर निशान (स्कार टिश्यू) को सावधानीपूर्वक हटाया गया। इसके बाद पलक की संरचना को पुनः सामान्य करने के लिए उन्नत स्किन ग्राफ्टिंग तकनीक का उपयोग किया गया। जटिल सर्जरी के बाद तेजी से सुधार सर्जरी अत्यंत जटिल थी, क्योंकि ग्राफ्ट का आकार बड़ा था। इसके बावजूद विशेषज्ञों ने सफलतापूर्वक स्किन ग्राफ्ट का प्रत्यारोपण कर पलक और गाल के हिस्से का पुनर्निर्माण किया। ऑपरेशन के बाद मरीज की आंख की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और अब वह सामान्य रूप से देख पा रहा है। पलक भी पूरी तरह से बंद हो रही है, जिससे चेहरे की विकृति दूर हो गई है। इन विशेषज्ञों की टीम ने निभाई अहम भूमिका इस सफल सर्जरी में डॉ. सुचिता सिंह, डॉ. प्रभा सोनवानी, डॉ. कौमल देवांगन, डॉ. विनोद ताम्कनंद, डॉ. डेलीना नेल्सन, डॉ. संजय चौधरी एवं डॉ. अनिकेत सहित नर्सिंग स्टाफ सिस्टर संदीप कौर तथा नेत्र, सर्जरी एवं निश्चेतना विभाग की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मरीज व परिजनों ने जताया आभार अस्पताल प्रशासन के अनुसार सर्जरी पूरी तरह सफल रही है। मरीज की पलक सामान्य स्थिति में लौट आई है और आंख की कार्यक्षमता भी बहाल हो गई है। चेहरे की विकृति समाप्त होने से मरीज और उसके परिजनों ने राहत की सांस ली तथा सिम्स के चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त किया। सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि “सिम्स में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर निरंतर बेहतर हो रहा है। हमारे विशेषज्ञ चिकित्सक जटिल से जटिल मामलों में भी उत्कृष्ट परिणाम दे रहे हैं। यह उपलब्धि संस्थान की आधुनिक सुविधाओं और डॉक्टरों की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।” चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि “इस प्रकार की जटिल सर्जरी का सफल निष्पादन हमारी टीम की समन्वित कार्यप्रणाली और विशेषज्ञता को दर्शाता है। सिम्स में अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे मरीजों को बेहतर उपचार यहीं मिल रहा है।” सरकारी संस्थान में विश्वस्तरीय उपचार का उदाहरण इस सफल सर्जरी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में भी अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता के बल पर जटिल से जटिल बीमारियों का विश्वस्तरीय उपचार संभव है।

Amit Jogi को बड़ी राहत: Supreme Court of India ने CBI जवाब तक सरेंडर टाला

रायपुर. एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए सीबीआई का जवाब आने तक सरेंडर पर रोक लगाई है. छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी के बेटे अमित जोगी ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी. बता दें कि एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में दो अप्रैल को हाई कोर्ट ने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जोगी) सुप्रीमो अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया था. इस पर अमित जोगी ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. राम अवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने लल्लूराम डॉट कॉम ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर टू में आज इस मामले में सुनवाई हुई. कोर्ट ने सीबीआई, स्टेट और उन्हें (सतीश जग्गी) तो नोटिस जारी किया है. सीबीआई का जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी. 2007 में निचली अदालत ने किया बरी एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की साल 2003 में हुई हत्या के मामले में निचली अदालत ने 2007 में 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन सबूतों का अभाव बताते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था. इस फैसले को पीड़ित के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया था. हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को दोषी माना और दोषी करार देते हुए 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया था. 2004 में सीबीआई ने शुरू की जांच सतीश जग्गी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी पर जग्गी हत्याकांड का आरोप लगाया था. केस की जांच साल 2004 में सीबीआई को सौंपी गई थी. सीबीआई ने जांच के बाद करीब 11 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 31 लोगों को आरोपी बनाया गया. मई 2007 में स्पेशल कोर्ट ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. दो लोग सरकारी गवाह बन गए, जबकि सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था.