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मानसून से पहले एक्शन में पंजाब सरकार: नदियों की डीसिल्टिंग के लिए कैबिनेट का अहम फैसला

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने राज्य में मानसून के दौरान संभावित बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य की प्रमुख नदियों, सहायक नदियों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई यानी डीसिल्टिंग के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य नदियों के तल में जमा सिल्ट और कचरे को हटाना है, ताकि पानी की निकासी सुचारू रूप से हो सके और आस-पास के इलाकों में जलभराव का खतरा टल सके। खेती और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा नदियों और नालों की समय पर सफाई न होने के कारण हर साल पंजाब के कई जिलों में भारी बारिश के दौरान पानी खेतों और रिहायशी इलाकों में घुस जाता है। इससे फसलों को भारी नुकसान होता है और सार्वजनिक संपत्ति भी क्षतिग्रस्त होती है। कैबिनेट के इस नए फैसले के बाद, सिंचाई और जल संसाधन विभाग को उन संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं जहाँ गाद जमा होने के कारण बहाव बाधित हो रहा है। इस परियोजना के पूरा होने से किसानों की भूमि को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। पारदर्शिता और आधुनिक तकनीक का उपयोग डीसिल्टिंग की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने आधुनिक मशीनों और पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के उपयोग पर जोर दिया है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि सफाई का काम मानसून की दस्तक से पहले अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए। सरकार का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से की गई डीसिल्टिंग न केवल बाढ़ को रोकेगी, बल्कि नदियों की प्राकृतिक जल संग्रहण क्षमता को भी पुनर्जीवित करेगी। प्रशासनिक स्तर पर पुख्ता इंतजाम कैबिनेट द्वारा दी गई इस मंजूरी के बाद संबंधित जिलों के प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है। स्थानीय निकायों और ड्रेनेज विभाग के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस परियोजना की नियमित निगरानी की जाएगी ताकि काम की गुणवत्ता और समय सीमा के साथ कोई समझौता न हो। पंजाब सरकार का यह प्रयास राज्य के बुनियादी ढांचे को आपदाओं के प्रति अधिक लचीला बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।

केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के मुआवजे पर छतरपुर में विरोध, प्रशासन के आश्वासन से खत्म हुआ आंदोलन

छतरपुर  केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण विस्थापित होने वाले 14 गांवों के ग्रामीणों का आंदोलन फिलहाल थम गया है। मुआवजे और पुनर्वास में अनियमितताओं के आरोपों के बीच छतरपुर जिला प्रशासन ने झुकते हुए दोबारा सर्वे कराने का फैसला लिया है। कलेक्टर पार्थ जायसवाल द्वारा गठित विशेष संयुक्त टीमों ने  ही जमीनी स्तर पर वेरिफिकेशन और विसंगतियों की जांच शुरू कर दी है। 7 दिन की डेडलाइन प्रशासन ने इस री-सर्वे को कैंपेन मोड में चलाने के निर्देश दिए हैं। संयुक्त टीमों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अगले 7 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट और नए प्रस्ताव पेश करें। इस कदम का उद्देश्य उन पात्र लाभार्थियों को शामिल करना है जो पहले छूट गए थे और उन अपात्रों को बाहर करना है जिन्होंने गलत तरीके से लाभ लेने की कोशिश की है। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है: किसी भी पात्र व्यक्ति का हक नहीं छिनना चाहिए और किसी भी अपात्र को सूची में जगह नहीं मिलनी चाहिए। पारदर्शिता ही हमारी प्राथमिकता है। पारदर्शिता के लिए दूसरे क्षेत्र के अधिकारियों की ड्यूटी मुआवजे की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कलेक्टर ने एक अनूठी पहल की है। री-सर्वे की जिम्मेदारी उन स्थानीय कर्मचारियों को नहीं दी गई है जिन पर पहले पक्षपात के आरोप लगे थे। इसके बजाय, बिजावर सब-डिवीजन और अन्य तहसीलों के एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पटवारियों को मैदान में उतारा गया है। ये टीमें स्वतंत्र रूप से वोटर लिस्ट, बीपीएल कार्ड, बिजली बिल और स्कूल रिकॉर्ड के जरिए पात्रता की जांच करेंगी। प्रभावितों के लिए क्या है खास? कुल प्रभावित गांव 14 गांव सर्वे की समय सीमा 7 कार्य दिवस (रिपोर्ट सबमिशन) जांच का आधार वोटर लिस्ट, बीपीएल कार्ड, बिजली बिल, स्कूल रिकॉर्ड टीम का गठन एसडीएम, तहसीलदार और पटवारियों की संयुक्त टीम अतिरिक्त लाभ भूमिहीन परिवारों के लिए सरकारी कल्याणकारी योजनाएं

तुंगल बना इको-पर्यटन हब: वन मंत्री की पहल से बदली तस्वीर

सुकमा/रायपुर. सुकमा जिले में वन विभाग की एक सराहनीय पहल ने विकास और पुनर्वास की नई मिसाल पेश की है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में तैयार किया गया तुंगल इको-पर्यटन केंद्र आज आत्मनिर्भरता और सामाजिक बदलाव का प्रतीक बन गया है। सुकमा नगर से मात्र एक किलोमीटर दूर स्थित यह स्थान पहले उपेक्षित और जर्जर था, लेकिन वन विभाग के प्रयासों से इसे एक सुंदर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया। यहाँ बनाए गए आकर्षक टापू और प्राकृतिक वातावरण अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य ओडिशा से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहे हैं। इस केंद्र की सबसे खास पहल है “तुंगल नेचर कैफे”, जिसे ‘आत्मसमर्पण पुनर्वास महिला स्वयं सहायता समूह’ की 10 महिलाएँ संचालित कर रही हैं। इनमें 5 महिलाएँ वे हैं जिन्होंने नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है, जबकि 5 महिलाएँ नक्सल हिंसा से प्रभावित रही हैं। इन सभी को जगदलपुर और सुकमा के संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए तैयार किया गया है। आज ये महिलाएँ आत्मविश्वास के साथ पर्यटकों का स्वागत कर रही हैं और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। जो महिलाएँ कभी संघर्ष और भय के माहौल में थीं, वे अब स्वावलंबन और आत्मसम्मान की मिसाल बन गई हैं। इस पर्यटन केंद्र की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 31 दिसंबर 2025 को शुरू होने के बाद केवल तीन महीनों में, 30 मार्च 2026 तक यहाँ 8 हजार 889 पर्यटक आए। इस दौरान केंद्र ने लगभग 2.92 लाख रूपए की आय भी अर्जित की। पर्यटक यहाँ स्वादिष्ट स्थानीय व्यंजनों का आनंद लेने के साथ-साथ तुंगल डैम में कयाकिंग, पैडल बोटिंग और बाँस राफ्टिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का भी अनुभव कर रहे हैं। यह पहल साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है। तुंगल इको-पर्यटन केंद्र न केवल पर्यटन का केंद्र है, बल्कि यह उन महिलाओं के साहस, आत्मविश्वास और वन विभाग की दूरदर्शी सोच का प्रतीक है। यह कहानी हमें यह संदेश देती है कि प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ मानव विकास को जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। बस्तर की बदलती तस्वीर में यह केंद्र एक उज्ज्वल उदाहरण बनकर उभरा है।

अवैध खनन के खिलाफ मोर्चा: कैबिनेट मंत्री से सख्त कार्रवाई की मांग, किसानों की बर्बादी पर जताया रोष

लुधियाना.  लुधियाना क्षेत्र में अवैध माइनिंग माफिया की सक्रियता ने स्थानीय किसानों और आम जनता की रातों की नींद उड़ा दी है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर डॉक्टर तेजपाल गिल ने अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध तरीके से की जा रही खुदाई के कारण न केवल उपजाऊ भूमि का क्षरण हो रहा है, बल्कि किसानों की तैयार फसलों को भी भारी क्षति पहुँच रही है। माफिया द्वारा की जाने वाली अनियंत्रित माइनिंग ने कृषि प्रधान क्षेत्र के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं। सरकारी संपत्ति को पहुँच रहा भारी नुकसान अवैध खनन का प्रभाव केवल फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सरकारी बुनियादी ढांचे को भी नुकसान हो रहा है। डॉक्टर गिल के अनुसार, भारी वाहनों की आवाजाही और अनियंत्रित खुदाई के कारण आसपास की सड़कों, ड्रेनेज सिस्टम और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों की स्थिति जर्जर होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि माफिया निजी लाभ के लिए सार्वजनिक संसाधनों का दोहन कर रहा है, जिसकी भरपाई अंततः आम जनता को ही करनी पड़ती है। यह स्थिति क्षेत्र के विकास के लिए एक बड़ी बाधा बन गई है। कैबिनेट मंत्री से सख्त हस्तक्षेप की गुहार समस्या की गंभीरता को देखते हुए, डॉक्टर तेजपाल गिल ने कैबिनेट मंत्री से मुलाकात की और उन्हें विस्तार से जमीनी हकीकत से अवगत कराया। उन्होंने एक औपचारिक मांग पत्र सौंपते हुए आग्रह किया कि इस मामले में तुरंत उच्च स्तरीय जांच बैठाई जाए। उन्होंने मांग की कि जो लोग भी अवैध खनन में लिप्त हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और उनकी मशीनों को जब्त किया जाए। मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार अवैध माइनिंग को लेकर शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाएगी। पर्यावरण और जनहित की रक्षा का संकल्प क्षेत्र में माइनिंग माफिया के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सामाजिक स्तर पर भी लामबंदी शुरू हो गई है। डॉक्टर गिल ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा और किसानों के हितों को बचाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन तेज किया जाएगा। यह मांग की गई है कि माइनिंग साइटों की नियमित निगरानी के लिए विशेष टीमें तैनात की जाएं ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके।

सशक्त होंगी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता: कैबिनेट मंत्री ने सुनीं समस्याएं, प्राथमिकता के आधार पर समाधान का आश्वासन

चंडीगढ़.  पंजाब सरकार समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए लगातार काम कर रही है, जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और हेल्परों का कल्याण विशेष प्राथमिकता है। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार इन कार्यकर्ताओं की समस्याओं को हल करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। सरकार का उद्देश्य इन महिला कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण और उनके हक प्रदान करना है। अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक चंडीगढ़ स्थित पंजाब भवन में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान डॉ. बलजीत कौर ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आंगनवाड़ी प्रतिनिधियों से सीधा संवाद किया। इस बैठक में सामाजिक सुरक्षा विभाग की निदेशक शेना अग्रवाल और उप-निदेशक सुमनदीप कौर भी मौजूद रहीं। मंत्री ने जोर देकर कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता विभाग की रीढ़ हैं, जो बच्चों और महिलाओं तक सरकारी योजनाओं को पहुँचाने में सेतु का काम करती हैं। प्राथमिकता के आधार पर होगा समस्याओं का निपटारा बैठक में उठाई गई विभिन्न मांगों को सुनने के बाद कैबिनेट मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो मुद्दे प्रशासनिक स्तर पर सुलझाए जा सकते हैं, उन पर तुरंत कार्रवाई की जाए। उन्होंने बताया कि जो मांगें सीधे सरकार के नीतिगत फैसलों से जुड़ी हैं, उन्हें हाल ही में गठित उप-समिति के समक्ष रखा जाएगा। इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए प्राथमिकता के आधार पर समाधान निकाला जाएगा ताकि कार्यकर्ताओं का मनोबल बना रहे। समाज की नींव मजबूत करने में अहम योगदान डॉ. बलजीत कौर ने बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को बेहतर बनाने में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि गाँवों और शहरों में घर-घर जाकर दी जा रही सेवा समाज की मजबूत नींव तैयार करने में सहायक है। पंजाब सरकार कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान को बरकरार रखने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आवश्यकतानुसार उचित और बड़े फैसले लेने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है।

यूथ कांग्रेस नेताओं पर FIR, 25 नामजद; केन-बेतवा लिंक परियोजना आंदोलनकारियों से मिलने पहुंचे थे छतरपुर में

छतरपुर   केन-बेतवा लिंक परियोजना के प्रभावितों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन के दौरान हुए विवाद के मामले में बमीठा थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार सहित करीब 50 अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने यह कदम शासकीय कर्मचारियों के साथ अभद्रता और सरकारी काम में बाधा डालने के बाद उठाया है।  वन कर्मचारियों व यूथ कांग्रेस नेताओं के बीच बहस बिजावर क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत ढोडन बांध पर उचित मुआवजा को लेकर पिछले 10 दिन से आंदोलन पर बैठे आदिवासी, किसानों, ग्रामीणों से मिलने पहुंचे यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार को वन विभाग के अधिकारियों ने भुसोर गेट के अंदर नही जाने दिया. आरोप है कि इसके बाद यूथ कांग्रेस नेताओं ने भुसोर गेट तोड़कर अधिकारिओ से अभद्रता की. यहां बाहरी लोगों के प्रवेश पर आने-जाने पर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने प्रतिबंध लगाया था।  पुलिस ने वीडियो को बनाया साक्ष्य प्रदर्शन के दौरान हुए घटनाक्रम का वीडियो यूथ कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड किया. इसके बाद पुलिस ने रेंजर की शिकायत पर कार्रवाई की. पुलिस का कहना है कि वीडियो साक्ष्य में प्रदर्शनकारियों द्वारा शासकीय संपत्ति के साथ छेड़छाड़ और कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार स्पष्ट दिख रहा है. वहीं, फिलहाल धरना 10 दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है. अगर प्रशासन ने आन्दोलनकारियो की मांगें नही मानी तो फिर आंदोलन होनी की चेतावनी है।  25 लोगों की शिनाख्त, जल्द होगी गिरफ्तारी टीआई बमीठा बाल्मीक चौबे ने बताया "राजेन्द्र कुमार सोलंकी वन परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा थाना में आवेदन दिया गया. अभिषेक परमार एवं उसके 50 से अधिक लोगों के खिलाफ भुसोर गेट पर ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियो के कार्य मे बाधा डालना एवं शासकीय सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने पर के मामले में धारा 223,132,191(2),190 बीएनएस 3(1) लोक सम्पत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है. 20 से 25 लोगों की पहचान कर ली है. सभी की गिरफ्तारी  होगी।  इस मामले में यूथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया का कहना है "गरीब,आदिवासियों और किसानों के साथ हमेशा से यूथ कांग्रेस खड़ी है. उनकी हम लड़ाई लड़ रहे हैं. प्रशासन ने हमारे साथियों को रोकने का काम किया है. हम गरीबों की आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। 

वर्ल्ड लिवर डे 2026: पंजाब ने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत लिवर रोग की स्क्रीनिंग को किया और व्यापक

चंडीगढ़ 19 अप्रैल को दुनिया भर में ‘सॉलिड हैबिट्स, स्ट्रॉन्ग लिवर’ थीम के साथ मनाए जाने वाले वर्ल्ड लिवर डे के मौके पर, ‘द लैंसेट’ की एक चेतावनी में लिवर की बीमारियों में दुनिया भर में तेज़ी से बढ़ोतरी पर रोशनी डाली गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2050 तक ‘मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोइक लिवर डिज़ीज़’ (MASLD) के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इस खतरनाक स्थिति के बीच, पंजाब इस चुनौती का डटकर सामना करने के लिए आगे बढ़ रहा है। राज्य ने बढ़ी हुई स्क्रीनिंग और कैशलेस ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के ज़रिए अपनी हेल्थ सेवाओं को मज़बूत किया है, जिससे मॉडर्न लाइफस्टाइल से जुड़ी इस तेज़ी से बढ़ती ‘साइलेंट एपिडेमिक’ के खिलाफ भारत की लड़ाई में यह लीडिंग रोल निभा रहा है। लिवर की बीमारियाँ दुनिया भर में एक ‘साइलेंट एपिडेमिक’ के तौर पर उभर रही हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि लगभग तीन में से एक एडल्ट इससे प्रभावित है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसके लक्षण अक्सर तभी दिखते हैं जब गंभीर नुकसान पहले ही हो चुका होता है। ‘द लैंसेट’ की एक स्टडी में चेतावनी दी गई है कि 2023 में मरीज़ों की संख्या 1.3 बिलियन से बढ़कर 2050 तक 1.8 बिलियन हो सकती है, जो 42 परसेंट की बढ़ोतरी है। भारत में भी ऐसा ही ट्रेंड देखा जा रहा है, खासकर शहरी आबादी और हाई-रिस्क ग्रुप्स में। पंजाब के डॉक्टरों के मुताबिक, ‘हेपेटाइटिस-C’ इंफेक्शन, शराब पीने और खाने की बदलती आदतों की वजह से स्थिति और गंभीर होती जा रही है। डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा, “भारत में शराब लिवर की गंभीर बीमारियों का एक बड़ा कारण है और वायरल हेपेटाइटिस के साथ मिलकर यह हालत और खराब कर देती है। फैटी लिवर की बीमारी अब शराब और हेपेटाइटिस-C के साथ एक बड़ा कारण बनकर उभर रही है। लंबे समय तक अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाना, फ्राइड खाना और ट्रांस-फैट खाने से यह समस्या और बढ़ रही है।” डॉक्टर यह भी चिंताजनक ट्रेंड देख रहे हैं कि कम उम्र के मरीज़ों में लिवर की बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। इसका मुख्य कारण शराब का बढ़ता सेवन और हेपेटाइटिस-C का फैलना है, जो राज्य में बदलती लाइफस्टाइल और व्यवहार के ट्रेंड को दिखाता है। हेल्थ सर्विसेज़ के बारे में उन्होंने कहा, “पंजाब ने अपने रेफरल सिस्टम को मज़बूत किया है, जिससे लिवर की बीमारियों का पहले पता चल रहा है। गांवों में स्क्रीनिंग और स्पेशलिस्ट सर्विसेज़ तक पहुंच भी बेहतर हुई है, हालांकि फैटी लिवर के ‘साइलेंट’ नेचर की वजह से देर से पता चलने की समस्या अभी भी है।” फाइनेंशियल और पहुंच से जुड़ी रुकावटों को दूर करने के लिए, राज्य ने चीफ मिनिस्टर हेल्थ स्कीम के तहत कवरेज बढ़ाया है, जो सरकारी और लिस्टेड प्राइवेट अस्पतालों में हर परिवार को हर साल 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज देती है। डॉ. सिंह बताते हैं कि एक बार मरीज़ के भर्ती होने के बाद, ज़्यादातर टेस्ट और दवाएं इस स्कीम के तहत कवर हो जाती हैं, जिससे मरीज़ का जेब से होने वाला खर्च कम हो जाता है। इस स्कीम में टेस्टिंग, हॉस्पिटल में भर्ती होना और स्पेशलिस्ट सर्विसेज़ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि चीफ मिनिस्टर हेल्थ स्कीम ने कई मरीज़ों को बेहतर इलाज दिलाने में मदद की है और यह कई जानें बचाने में अहम साबित हुई है। पंजाब के हेल्थ मिनिस्टर डॉ. बलबीर सिंह ने यह भी कहा, “यह स्कीम जेब से होने वाले खर्च को कम करती है, साथ ही डायग्नोसिस और इलाज में देरी को भी रोकती है।” पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम के तहत स्क्रीनिंग बढ़ाने से उम्मीद है कि जल्दी पता लगाने में सुधार होगा और बीमारी का बढ़ना धीमा हो जाएगा। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि लिवर की बीमारी के शुरुआती स्टेज को अक्सर लाइफस्टाइल में बदलाव जैसे अच्छी डाइट, रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी और शराब कम पीने से ठीक किया जा सकता है।

बिहार सरकार का बड़ा फैसला: महिला रोजगार योजना में अब ₹20,000 की दूसरी किस्त मिलेगी

गयाजी. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के अंतर्गत रोजगार शुरू करने वाली पात्र महिलाओं को जल्द ही द्वितीय किस्त का भुगतान किया जाएगा। बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति ने सभी जिला परियोजना इकाइयों को इस दिशा में आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। जिला परियोजना प्रबंधक आचार्य मम्मट ने वर्चुअल बैठक के माध्यम से जिला एवं प्रखंड स्तरीय अधिकारियों को पात्र लाभुकों का चयन कर विवरण शीघ्र भेजने का निर्देश दिया है। योजना का उद्देश्य प्रत्येक परिवार की एक महिला को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के तहत प्रथम किस्त के रूप में 10,000 रुपया पहले ही दिए जा चुके हैं। अब निर्धारित शर्तें पूरी करने वाली महिलाओं को द्वितीय किस्त के रूप में 20,000 रुपया प्रदान किए जाएंगे। इसके लिए लाभुकों को राशि का सही उपयोग, एमआईएस में प्रविष्टि, वित्तीय साक्षरता प्रशिक्षण, समूह बैठकों में भागीदारी, नियमित बचत और व्यवसायिक योजना तैयार करना अनिवार्य है। द्वितीय किस्त का भुगतान तीन चरणों में किया जाएगा। ग्राम संगठन द्वारा सत्यापन के बाद प्रखंड स्तर पर मूल्यांकन होगा और अंततः डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभुकों के खाते में राशि भेजी जाएगी। जिले में अब तक 6 लाख 89 हजार से अधिक महिलाओं को 10,000 रुपया की प्रारंभिक राशि दी जा चुकी है। जांच के बाद पात्र लाभुकों को चरणबद्ध तरीके से पांच चरणों में 2 लाख 10 तक की सहायता प्रदान की जाएगी, जिसमें लाभुकों का अंशदान भी शामिल होगा। डीपीएम मम्मट ने बताया कि योजना के तहत महिलाएं फल-सब्जी, किराना, सिलाई, नाश्ता दुकान, पशुपालन व कृषि जैसे विभिन्न रोजगार शुरू कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

मुश्किल वक्त में मिला साथ: मुख्यमंत्री सेहत योजना से पटियाला की महिला ने जीती कैंसर की जंग

चंडीगढ़/पटियाला. पटियाला के रहने वाले गुरपिंदर जीत सिंह की जिंदगी पांच महीने पहले अचानक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई, जहां हर रास्ता मुश्किल नजर आने लगा था। उनकी 65 वर्षीय माता बलजीत कौर ने गंभीर बीमारी के कारण धीरे-धीरे खाना-पीना छोड़ दिया था। मजबूर और बेबस बेटे के लिए यह सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि रोज टूटती जा रही उम्मीदों का दर्द था। गुरपिंदर जीत के अनुसार पहले निजी डॉक्टरों के पास दौड़-भाग की गई, फिर मां को राजिंद्रा अस्पताल, पटियाला रेफर कर दिया गया। दवाइयां चलीं, टेस्ट हुए, लेकिन हालत सुधरने की बजाय और गंभीर हो गई। जब रिपोर्ट आई तो जैसे आसमान ही ढह पड़ा- मां को बच्चेदानी का कैंसर था। गुरपिंदर के लिए यह बहुत मुश्किल घड़ी थी, यह उस मां की जिंदगी का सवाल था जिसने उसे जन्म दिया और पाला-पोसा। आज वह जिंदगी और मौत से जूझ रही थी। बिना देरी किए वह मां को संगरूर के टाटा कैंसर अस्पताल ले गया। इलाज शुरू हुआ, लेकिन पहले ही झटके में 60 हजार रुपये से अधिक खर्च हो गए। एक ड्राइवर की सीमित आय के सामने यह राशि पहाड़ जैसी थी। गुरपिंदर के मन में एक ही सवाल था- “मां को कैसे बचाऊं?” कर्ज लेने की नौबत भी आ गई थी। तभी, जैसे अंधेरे में एक रोशनी की किरण उसके सामने आई। अस्पताल में उसे मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के बारे में पता लगा। बिना और देरी किए गुरपिंदर ने वहीं रजिस्ट्रेशन करवा लिया। कुछ समय बाद ही उसके मोबाइल पर मैसेज आ गया और स्मार्ट कार्ड बन गया। इसके बाद जो हुआ, वह उसके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। लाखों रुपये का इलाज- जिसमें महंगे टेस्ट, बार-बार कीमोथेरेपी, दवाइयां, ऑपरेशन, आईसीयू, वेंटिलेटर और अस्पताल में रहने-खाने तक का खर्च शामिल था- सारा खर्च सरकार ने उठाया। गुरपिंदर की आंखें भर आती हैं जब वह कहता है, “मां तो मां होती है… उसे हर हाल में बचाना था। पैसे नहीं थे, लेकिन रब ने इस योजना के रूप में रास्ता दिखा दिया।” डॉक्टरों के लिए भी यह केस बहुत चुनौतीपूर्ण था। कैंसर बच्चेदानी से आगे बढ़कर लीवर और फेफड़ों तक फैल गया था। पहले तीन बार कीमोथेरेपी दी गई, लेकिन शरीर कमजोर होने के कारण साइड इफेक्ट सामने आए। फिर धीरे-धीरे डोज कम करके नौ बार और कीमोथेरेपी दी गई। इलाज के बाद ट्यूमर एक जगह सिमट गया और डॉक्टरों ने लगभग आठ घंटे लंबा ऑपरेशन करके उसे निकाल दिया। 35 से 40 टांकों के साथ मां ने दर्द सहते हुए भी जिंदगी की डोर थामे रखी। मां ऑपरेशन के बाद दो-तीन दिनों के लिए आईसीयू में और वेंटिलेटर पर रहीं, फिर उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। गुरपिंदर हर वक्त मां के पास बैठा रहता—कभी दवाई देता, कभी सिर सहलाता। आठ दिन अस्पताल में बिताने के बाद जब मां की हालत सुधरने लगी, तो जैसे उनकी दुनिया वापस आ गई। 24 नवंबर 2025 से शुरू हुआ यह सफर अभी भी जारी है। अगले इलाज और जांच के लिए वे मुल्लांपुर स्थित अस्पताल में फॉलोअप के लिए जाएंगे। कुछ दवाइयां जो अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं, उनका खर्च गुरपिंदर ने खुद उठाया, लेकिन बाकी सारा इलाज योजना के तहत मुफ्त हुआ। अस्पताल में गायनेकोलॉजी की डॉ. शिवाली ने सर्जरी के डॉक्टरों के साथ मिलकर ऑपरेशन किया। टाटा मेमोरियल के डॉक्टरों के अनुसार, इस सर्जरी पर दवाइयों को मिलाकर कम से कम 8 से 10 लाख रुपये का खर्च हुआ है। दो बच्चों के पिता और एक साधारण ड्राइवर गुरपिंदर के लिए यह राहत शब्दों से परे है। वह कहता है, “अब सुकून है कि मां बिना इलाज के नहीं मरेगी… सरकार ने हमें उम्मीद दी है।” यह सिर्फ इलाज की कहानी नहीं, बल्कि एक बेटे के संघर्ष, मां के लिए प्यार और एक ऐसी योजना की कहानी है, जिसने मुश्किल वक्त में सहारा बनकर एक परिवार को टूटने से बचा लिया। यह सफर इस परिवार के लिए गंभीर बीमारी की कठोर हकीकत को बयान करता है, साथ ही यह भी दर्शाता है कि सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं और प्रभावशाली सरकारी मदद कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह यकीनी बनाता है कि आर्थिक तंगी किसी भी व्यक्ति के जीवन बचाने वाले इलाज के रास्ते में रुकावट न बने।

प्रदेश में एक और प्रशासनिक सर्जरी: 20 CMO समेत 37 अधिकारियों के तबादले, लिस्ट जारी

रायपुर  छत्तीसगढ़ में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। बड़े स्तर पर अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कुल 37 अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले कर दिए हैं और साथ ही आदेश भी जारी किया गया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की ओर से आदेश जारी हो गया है। नगर पालिकाओं एवं जिला मुख्यालयों में नियमित मुख्य नगर पालिका अधिकारियों की पदस्थापना की गई है। इसके साथ ही 6 सहायक राजस्व अधिकारियों एवं जूनियर कर्मचारियों, उन्हें उनके मूल पद पर वापस भेज दिया गया है। इस आदेश के तहत सबसे बड़ा फोकस नगर पालिकाओं और जिला मुख्यालयों में नियमित मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) की तैनाती पर रखा गया है। लंबे समय से कई नगरीय निकायों में प्रभारी व्यवस्था के सहारे काम चल रहा था, जिससे विकास कार्यों की गति और जवाबदेही दोनों प्रभावित हो रही थीं। अब सरकार ने इन जगहों पर नियमित अधिकारियों की पदस्थापना कर प्रशासनिक स्थिरता लाने की कोशिश की है। वहीं, इस फेरबदल का एक अहम पहलू यह भी है कि 6 सहायक राजस्व अधिकारियों और जूनियर कर्मचारियों को, जो अब तक प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी के रूप में काम कर रहे थे, उन्हें उनके मूल पदों पर वापस भेज दिया गया है। यह कदम इस बात का संकेत देता है कि शासन अब जिम्मेदार पदों पर योग्य और नियमित अधिकारियों की नियुक्ति को प्राथमिकता दे रहा है, ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी हो सके। हालांकि, राज्य में नियमित मुख्य नगर पालिका अधिकारियों की कमी अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए कुछ नगरीय निकायों में वरिष्ठ कर्मचारियों को प्रभारी CMO के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह एक अस्थायी व्यवस्था है, लेकिन इससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो, इसकी कोशिश की गई है। नियमित मुख्य नगर पालिका अधिकारियों की कमी को देखते हुए कुछ नगरीय निकायों में वरिष्ठ कर्मचारियों को प्रभारी के रूप में नियुक्त किया गया है। लिहाजा ये एक बड़ा प्रसासनिक  फेरबदल हुआ है। सूची इस तरह से है।