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योगी सरकार की नीतियों से यूपी बना इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर हब, 43 हजार करोड़ का निवेश, 3 लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर

लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पारंपरिक औद्योगिक विकास से आगे बढ़कर इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डीप-टेक जैसे भविष्य के क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियों, बेहतर कनेक्टिविटी और विशाल तकनीकी मानव संसाधन के दम पर प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत आधार तैयार हुआ है। राज्य में 200 से अधिक कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में काम कर रही हैं, जबकि इस सेक्टर में 43 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश और 3 लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। प्रदेश की इस बढ़ती ताकत का सबसे बड़ा प्रमाण मोबाइल फोन निर्माण है। देश में निर्मित होने वाले 55 प्रतिशत से अधिक मोबाइल फोन का उत्पादन उत्तर प्रदेश में हो रहा है। इसके साथ ही गौतमबुद्ध नगर क्षेत्र में दो इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित हो चुके हैं। मोबाइल फोन के अलावा टैबलेट, लैपटॉप, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू उपकरण, सोलर सेल, डिफेंस एवं लॉजिस्टिक्स ड्रोन और रोबोटिक्स मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भी प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है।  इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में यूपी की मजबूत पकड़ योगी सरकार की नीतियों का असर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के बढ़ते दायरे में साफ दिखाई देने लगा है। प्रदेश में 200 से अधिक कंपनियों की मौजूदगी ने एक व्यापक इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम तैयार किया है। एलजी, हैयर, डिक्सन, रैपे, एडवर्ब, सैमसंग और भगवती जैसी प्रमुख कंपनियां इस इकोसिस्टम का हिस्सा हैं। उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी-2025 भी निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। फैक्टशीट के अनुसार इस नीति के तहत अब तक 3800 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश आकर्षित हुए हैं।  सेमीकंडक्टर क्षेत्र में यूपी की बड़ी एंट्री इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की मजबूत नींव के बाद अब उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। केंद्र सरकार के सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम 2.0 में 1.27 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ भारत में मजबूत और लचीला सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने का लक्ष्य है। इस दिशा में उत्तर प्रदेश को भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला राज्य बताया जा चुका है। प्रदेश में केंद्र सरकार से स्वीकृत एक सेमीकंडक्टर एटीएमपी सुविधा मौजूद है। इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड की यह सुविधा यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र के सेक्टर-28 में है और इसमें 3700 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो चुका है।  1 हजार एकड़ के सेमीकंडक्टर पार्क से नया औद्योगिक केंद्र यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में 1 हजार एकड़ का सेमीकंडक्टर पार्क प्रदेश की भविष्य की टेक्नोलॉजी आधारित औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रहा है। इसके साथ ही एनएक्सपी, रेनेसास, क्वालकॉम, कैडेंस जैसी वैश्विक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम कंपनियों की मौजूदगी यूपी की बढ़ती क्षमता को दर्शा रहीं हैं। इससे प्रदेश में सेमीकंडक्टर निर्माण के साथ डिजाइन, पैकेजिंग, टेस्टिंग और इससे जुड़े अन्य उद्योगों के लिए भी संभावनाएं मजबूत हो रही हैं।  जेवर एयरपोर्ट और फ्रेट कॉरिडोर देंगे उद्योगों को रफ्तार टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों के विकास के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है। उत्तर प्रदेश में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे नेटवर्क जैसे कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध हैं। ग्रेटर नोएडा में 75 एकड़ का रोबोटिक्स एवं एआई कंप्यूटिंग पार्क भी इस तकनीकी इकोसिस्टम को नई दिशा दे रहा है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई और रोबोटिक्स आधारित उद्योगों को एक साथ विकसित करने का आधार मजबूत हो रहा है। आईटी और डेटा सेंटर में भी हजारों करोड़ का निवेश उत्तर प्रदेश का टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम केवल इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर तक सीमित नहीं है। आईटी पॉलिसी के तहत 7 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश दर्ज किया गया है। लखनऊ में 100 एकड़ की एचसीएल आईटी सिटी और प्रदेश में सात एसटीपीआई आईटी पार्क इस क्षेत्र के विस्तार को गति दे रहे हैं। डेटा सेंटर क्षेत्र में भी 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का उल्लेख फैक्टशीट में किया गया है। इससे प्रदेश में डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे का विस्तार हो रहा है।  24 हजार से अधिक स्टार्टअप, डीप-टेक पर भी जोर योगी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम भी तेजी से विस्तारित हुआ है। उत्तर प्रदेश में 24 हजार से अधिक डीपीआईआईटी पंजीकृत स्टार्टअप हैं। उत्तर प्रदेश स्टार्टअप पॉलिसी-2026 के साथ नोएडा और लखनऊ में यू-हब के माध्यम से डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। वहीं यूपी को डीपीआईआईटी स्टेट स्टार्टअप रैंकिंग फ्रेमवर्क-2024 में ‘टॉप परफॉर्मर’ का दर्जा भी मिला है।  युवा तकनीकी प्रतिभा बनेगी सबसे बड़ी ताकत सेमीकंडक्टर और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों के लिए केवल निवेश और जमीन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में प्रशिक्षित इंजीनियर, तकनीशियन, शोधकर्ता और इनोवेटर भी जरूरी हैं। इस मामले में उत्तर प्रदेश के पास देश के सबसे बड़े तकनीकी मानव संसाधन आधारों में से एक है। प्रदेश में 760 से अधिक कॉलेज हैं, जिनमें हर साल चार लाख से अधिक विद्यार्थी नामांकित होते हैं। आईआई कानपुर, आईआईटी बीएचयू और एनसीआर में स्थापित संस्थानों समेत तकनीकी संस्थानों का नेटवर्क प्रदेश को सेमीकंडक्टर और अन्य उभरती तकनीकों के लिए प्रतिभा उपलब्ध कराने में सक्षम बना रहा है।  वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की दिशा में टेक्नोलॉजी बनेगी आधार उत्तर प्रदेश की मौजूदा रणनीति इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, एआई, रोबोटिक्स और डीप-टेक को एक साथ जोड़कर तकनीक आधारित विकास का मॉडल तैयार करने पर केंद्रित है। राज्य की विशाल आबादी, युवा कार्यबल, इंजीनियरिंग एवं तकनीकी प्रतिभा, मजबूत औद्योगिक आधार और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर इसे बड़े निवेश के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बना रहे हैं।

विनोद साहनी हत्याकांड पर सपा पर बरसे संजय निषाद, बोले- ‘होनहार युवाओं के दिमाग में जहर घोल रहा विपक्ष’

लखनऊ  गोंडा में बर्तन व्यवसायी विनोद साहनी हत्याकांड पर कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। संजय निषाद ने विपक्ष पर होनहार युवाओं को भड़काकर उनकी मौतों पर राजनीति करने का आरोप लगाया। दोषी सलाखों के पीछे, लेकिन असली गुनाहगार कोई और संजय निषाद ने घटना पर त्वरित कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार के जताते हुए कहा कि मामले के आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं और जांच के दायरे में आने वाले अन्य लोगों पर भी सख्त कार्रवाई होगी। इसके बाद सपा पर निशाना साधते हुए संजय निषाद ने कहा की एक होता है दोषी और दूसरा होता है गुनाहगार। दोषी तो वे हैं जिन्होंने अपराध किया और वे सलाखों के पीछे हैं। लेकिन असली गुनाहगार वे नेता हैं जो एक होनहार युवक को अपने पाले में लाते हैं, उससे भड़काऊ बातें लिखवाते हैं, और फिर उसकी मौत का इंतजार कर राजनीति चमकाते हैं। ऐसे नेताओं को शर्म आनी चाहिए।  इलाज कराने के बजाय मौत का इंतजार क्यों किया?   संजय निषाद ने विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पीड़ित गंभीर रूप से घायल था और विपक्षी नेता लखनऊ में बैठकें कर रहे थे तब उन्होंने उसका इलाज क्यों नहीं कराया। संजय निषाद ने बड़ा सवाल उठाते हुए कहा की जो महोदय उसे तोड़कर अपने साथ ले गए थे और उससे प्रचार करवा रहे थे, वे दूसरे दिन लखनऊ की मीटिंग में मौजूद थे। फिर वे घायल को अस्पताल ले जाने के बजाय किसका इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब मुझे पता चला तो मैं दिल्ली से आया लेकिन वो लोग इंतज़ार में थे।   अखिलेश यादव द्वारा मंत्री पद पर रहते हुए अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठने के तंज पर संजय निषाद ने दोटूक जवाब दिया। संजय निषाद ने कहा की हमेशा अपने समाज के साथ खड़ा रहूंगा। आज मेरा समाज जहां है, मैं वहां रहूंगा वो धरने पर है तो मै भी रहूंगा, वो दुखी तो हमें भी दुख होगा।  सपा सरकार में निषाद समाज पर गोलियां चलवाई गई थी सपा सरकार के पुराने कार्यकाल की याद दिलाते हुए संजय निषाद ने कहा कि सपा के समय निषाद समाज के आंदोलनों को कुचलने के लिए गोलियां चलवाई गईं, बेकसूरों पर धारा 302 के मुकदमे दर्ज किए गए और सिर्फ निषाद होने के कारण 37 से अधिक लोगों को बेरहमी से पीटा गया था, क्या अखिलेश यादव भूल गए।  युवाओं के दिमाग में जहर घोल रहा है विपक्ष   संजय निषाद ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि देश में अपनी बात रखने का तरीका लोकतांत्रिक और संवैधानिक है। असली ताकत वोट की चोट में है। मंत्री ने बड़ा आरोप लगाया कि विपक्ष के लोग जानबूझकर समाज के होनहार बच्चों के दिमाग में जहर घोल रहे हैं और उन्हें आंदोलन की आग में झोंक रहे हैं केवल अपने फायदे के लिए।   योगी सरकार में अपराध पर जीरो टॉलरेंस अखिलेश यादव द्वारा सरकार पर लगाए गए कमीशनखोरी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने साफतौर पर कहा कि योगी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करती है। उन्होंने कहा कि सपा-बसपा और कांग्रेस के राज में अपराधियों को सरकारी संरक्षण मिलता था, जबकि आज पुख्ता सबूतों के आधार पर दोषियों को जेल भेजा जाता है। अगर विपक्षी दलों की व्यवस्था इतनी ही साफ-सुथरी थी, तो जनता ने उन्हें सत्ता से उखाड़ क्यों फेंका।

प्रदेश की 90 प्रतिशत आपराधिक घटनाओं में सामने आता है सपा कनेक्शन : अनिल राजभर

 लखनऊ जौनपुर में विशाल यादव की हत्या को लेकर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कहीं भी अपराध की घटना होती है तो 90 प्रतिशत मामलों में कहीं न कहीं समाजवादी पार्टी का कनेक्शन सामने आता है। विशाल यादव हत्याकांड में भी पीड़ित परिवार ने स्थानीय सपा विधायक के खिलाफ गंभीर शिकायत की है। सरकार पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।   कैबिनेट मंत्री ने कहा कि अपराध और अपराधियों को संरक्षण देने वालों के खिलाफ सरकार की नीति स्पष्ट है। ऐसे मामलों में कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जो भविष्य के लिए नजीर बने। विशाल यादव के परिजनों ने जो आरोप लगाए हैं, उनकी भी गंभीरता से जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार जब तक कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाता, तब तक सरकार की कार्रवाई नहीं रुकेगी।   उल्लेखनीय है कि 11 सितंबर को जौनपुर के तिवारीपुर निवासी विशाल यादव उर्फ बिच्छी सैलून से बाल कटवाकर घर लौट रहा था। इसी दौरान अराजक तत्वों ने उस पर लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के कारण विशाल की मौत हो गई। घटना से आक्रोशित परिजनों ने शव जौनपुर-मिर्जापुर हाईवे पर रखकर प्रदर्शन किया था।   विशाल की मां मालती देवी और अन्य परिजनों ने स्थानीय सपा विधायक लकी यादव पर आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। मामले में 28 नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। विशाल गुजरात में ट्रेलर चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था।

सड़क की जमीन पर कब्जे का आरोप, मस्जिद के हिस्से को हटाने का आदेश; अब दोबारा होगी सुनवाई

लखनऊ यूपी के सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद अब लखीमपुर में सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर कब्जा कर बनाई गई मस्जिद के हिस्से को हटाने के साथ ही 36750 रुपए का जुर्माना तहसीलदार धौरहरा कोर्ट ने लगाया है। हालांकि, इस मुकदमे में दूसरे पक्ष ने आदेश के विरुद्ध पुनः सुनवाई के लिए बाजदायर प्रार्थनापत्र दिया गया है। इसे तहसीलदार ने स्वीकार करते हुए फिर से सुनवाई का आदेश दिया है। मामला धौरहरा तहसील के ग्राम व परगना धौरहरा का है। यहां की गाटा संख्या 1954/1.121 हेक्टेयर सड़क के नाम दर्ज है। इसके 0.105 भाग पर प्रतिवादी जियाउल्ला खां पुत्र कुर्बान निवासी जवाहर नगर कस्बा व तहसील धौरहरा पर कब्जा कर मस्जिद का हिस्सा निर्माण करने की रिपोर्ट लेखपाल द्वारा तहसीलदार कोर्ट में पेश की गई। इस पर सुनवाई के बाद जारी आदेश में तहसीलदार आदित्य विशाल ने कहा कि क्षेत्रीय लेखपाल ने ग्रामीणों के समक्ष भूमि का निरीक्षण कर सर्वेक्षण आख्या प्रस्तुत की। रकबा 0.040 की लम्बाई 220 कड़ी, चौड़ाई 120 कड़ी 0.105 हेक्टेयर पर जियाउल्ला खां पुत्र कुरबान द्वारा पक्का निर्माण कर कब्जा पाया गया। तहसीलदार के आदेश में जियाउल्ला के खिलाफ जमीन से बेदखली करते हुए 36750 रुपए का अर्थदंड जमा कराने का निर्देश दिया गया है। न्यायालय तहसीलदार धौरहरा में गांव सभा धौरहरा बनाम जियाउल्ला खां उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 में अंतिम फैसला नौ सितम्बर को तहसीलदार ने किया है। उधर, प्रतिवादी जियाउल्ला खान का कहना है कि तहसीलदार न्यायालय से जो आदेश प्राप्त हुआ है, उसमें मेरे द्वारा पुनर्विचार प्रार्थना दिया गया है। मामला अभी अदालत में चल रहा है। इस बाबत तहसीलदार आदित्य विशाल ने बताया कि हालांकि यह आदेश पारित किया गया है किंतु इस मामले में विपक्षी जियाउल्ला खां की ओर से बाजदायर प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया है। अब इस पर दुबारा सुनवाई के बाद ही पुनः फैसला किया जाएगा। लोक अदालत में 80000 से अधिक वादों का निस्तारण लखीमपुर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष जिला जज शिवकुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में पूरे जनपद की अदालतों में 80000 से अधिक वादों का निस्तारण आपसी सुलह समझौते के आधार पर किया गया। इसमें जिले की राजस्व अदालतों ने 75497 वादों का निस्तारण किया। इस लोक अदालत में परिवार न्यायालय से तीस जोड़े अपने गिले शिकवे भुलाकर साथ रहने के लिए विदा हुए। दुर्घटना दावा प्राधिकरण की जज डॉ कपिला राघव ने दुर्घटना प्रतिकर के 187 मुकदमों को सुलह समझौते के आधार पर निस्तारित करते हुए पीड़ित पक्षों को 10 करोड़ 65 लाख 76 हजार से अधिक की प्रतिकर धनराशि दिलायी। प्राधिकरण के सचिव अम्बरीष त्रिपाठी ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में जिला जज शिवकुमार सिंह ने चार वाद, विशेष न्यायाधीश विद्युत अधिनियम ने 356 वाद निस्तारित किए।

विश्व के प्रतिष्ठित शैक्षणिक सम्मान ‘फुलब्राइट स्कॉलर-इन-रेजिडेंस’ के लिए डॉ. कमलेश कुमार दुबे आमंत्रित

लखनऊ उत्तर प्रदेश की फॉरेंसिक और तकनीकी प्रतिभा अब अमेरिका की नई पीढ़ी को तकनीक सिखाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को फॉरेंसिक साइंस, साइबर सिक्योरिटी और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयासों को बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि मिली है। यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कमलेश कुमार दुबे को अमेरिका के प्रतिष्ठित ‘फुलब्राइट स्कॉलर-इन-रेजिडेंस’ के रूप में आमंत्रित किया गया है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश की उस बदलती तस्वीर का प्रमाण है, जहां फॉरेंसिक साइंस को आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और वैश्विक अकादमिक सहयोग से जोड़कर नई दिशा दी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फॉरेंसिक साइंस को मजबूत करने और उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में विश्व पटल पर स्थापित करने के प्रयासों की दिशा में इसे एक बढ़ते हुए महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। इससे भारत-अमेरिका के बीच गणित, डेटा एनालिटिक्स और उभरती तकनीकों में शोध सहयोग के नए द्वार खुलेंगे। डॉ. कमलेश कुमार दुबे को वर्ष 2026-27 के लिए अमेरिका के लिविंगस्टोन कॉलेज, सैलिसबरी, नॉर्थ कैरोलिना में ‘फुलब्राइट स्कॉलर-इन-रेजिडेंस’ के रूप में आमंत्रित किया गया है। वह वहां दो अकादमिक सेमेस्टर तक (मई 2027) शैक्षणिक एवं अकादमिक गतिविधियों में भाग लेंगे। अमेरिका में डॉ. दुबे गणित के साथ प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स, बिजनेस एनालिटिक्स, डिस्क्रिप्टिव एनालिटिक्स और डेटा माइनिंग जैसे आधुनिक विषयों से अमेरिकी जेन जी को रूबरू करवाएंगे। गणित से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, क्रिप्टोग्राफी, क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और ब्लॉकचेन जैसे भविष्य की तकनीकों तक उनकी विशेषज्ञता है।      ‘फुलब्राइट’ दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों में शामिल है। डॉ. दुबे का चयन उत्तर प्रदेश की अकादमिक और तकनीकी क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली महत्वपूर्ण मान्यता है।  यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि डॉ. कमलेश कुमार दुबे की यात्रा से भारत और अमेरिका के बीच मैथमेटिक्स, डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, क्रिप्टोग्राफी और अन्य उभरती तकनीकों के क्षेत्र में नए शैक्षणिक एवं शोध सहयोग की संभावनाएं मजबूत होंगी। गणित को एआई और डेटा की दुनिया से जोड़कर पढ़ाने का उनका अनुभव दोनों देशों के शिक्षकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के बीच नए अकादमिक संवाद का आधार बन सकता है। डॉ. जीके गोस्वामी स्वयं फुलब्राइट फ्लेक्स अवार्ड फेलो रह चुके हैं। सीएम योगी के विजन से फॉरेंसिक साइंस को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक साइंस, साइबर सिक्योरिटी और आधुनिक तकनीकी क्षमताओं को संस्थागत रूप से मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस प्रदेश में आधुनिक फॉरेंसिक इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक अपराधों के साथ-साथ साइबर अपराध, डिजिटल फ्रॉड और डेटा आधारित अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में फॉरेंसिक साइंस को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी और क्रिप्टोग्राफी जैसी आधुनिक तकनीकों से जोड़ना समय की आवश्यकता बन चुका है। फॉरेंसिक से साइबर सिक्योरिटी तक बदल रहा यूपी का चेहरा उत्तर प्रदेश में तैयार हो रहा यह नया फॉरेंसिक इकोसिस्टम केवल अपराध जांच तक सीमित नहीं है। इसका विस्तार साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल फॉरेंसिक, डेटा एनालिटिक्स और उभरती तकनीकों तक हो रहा है। यूपीएसआईएफएस में प्रदेश के विभिन्न जिलों के अधिकारियों को फॉरेंसिक साइंस की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रदेश की जांच व्यवस्था को वैज्ञानिक, तकनीकी और साक्ष्य आधारित बनाना है। इसी व्यापक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय विस्तार डॉ. दुबे का अमेरिका जाना है। वहां वे न केवल अमेरिकी विद्यार्थियों के साथ अपने ज्ञान और अनुभव को साझा करेंगे, बल्कि उत्तर प्रदेश में विकसित हो रही फॉरेंसिक और तकनीकी क्षमताओं की झलक भी वैश्विक अकादमिक समुदाय के सामने रखेंगे। 40 से अधिक शोध-पत्र, 10 पेटेंट और चार पुस्तकें प्रकाशित डॉ. कमलेश कुमार दुबे की यह उपलब्धि 19 वर्षों से अधिक की अकादमिक यात्रा का परिणाम है। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर से गणित में पीएच.डी. तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.एससी. एवं एम.एससी. की उपाधियां प्राप्त की हैं। उन्होंने अब तक 40 से अधिक शोध-पत्र, 10 पेटेंट और चार पुस्तकें प्रकाशित की हैं। उनके निर्देशन में छह शोधार्थी पीएचडी पूरी कर चुके हैं। वैश्विक ज्ञान-विनिमय में योगदान देने वाला प्रदेश बना यूपी डॉ. दुबे का ‘फुलब्राइट स्कॉलर-इन-रेजिडेंस’ के रूप में अमेरिका जाना इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश अब केवल तकनीकी प्रतिभा तैयार करने वाला प्रदेश नहीं, बल्कि वैश्विक ज्ञान-विनिमय में योगदान देने वाला प्रदेश बन रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप फॉरेंसिक साइंस और आधुनिक तकनीक को प्रदेश की ताकत बनाने की दिशा में उठाए जा रहे कदम अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देने लगे हैं।

UP के 1.19 लाख बुजुर्गों को राहत, 45-45 दिन में मिलेगी ₹1,500 की पेंशन किस्त

 बाराबंकी  वृद्धावस्था पेंशन योजना के लाभार्थियों के लिए नई किस्त प्रणाली लागू कर दी गई है। अब तीन माह की 3000 रुपये की पेंशन राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से दो बराबर किस्तों में भेजी जाएगी। 1.19 लाख वृद्धावस्था पेंशन लाभार्थी हैं और इनके खातों में पेंशन की राशि आनी शुरू हो गई है। नई व्यवस्था में 80 वर्ष से अधिक उम्र के लाभार्थियों को मिलने वाली 3000 रुपये की त्रैमासिक पेंशन में राज्य और केंद्र सरकार का योगदान बराबर रहेगा। दोनों की ओर से 1500-1500 रुपये दिए जाएंगे। वहीं, 80 वर्ष से कम उम्र के लाभार्थियों की पेंशन में राज्य सरकार का योगदान 2400 रुपये और केंद्र सरकार का अंश 600 रुपये होगा। यह पात्रता, करें आवेदन जिला समाज कल्याण अधिकारी डॉ. नीलम सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में 46 हजार 80 और शहरी क्षेत्र में 56 हजार 460 रुपये वार्षिक आय होनी चाहिए। परिवार रजिस्टर नकल, आधार कार्ड, बैंक पास बुक, शैक्षिक योग्यता यदि हो, पासपोर्ट साइज फोटो लगेगा। एकीकृत सामाजिक पेंशन पोर्टल (एसएसपीवाई.यूपी.जीओवी.इन) पर आवेदन किया जाता है। कोई व्यक्ति जिसकी 60 वर्ष की उम्र पूरी हो चुकी है, वह आवेदन कर सकता है। नई किस्त प्रणाली के मुख्य बिंदु     तीन माह की कुल पेंशन : 3,000 रुपये     भुगतान : दो किस्तों में     प्रत्येक किस्त : 1500 रुपये     प्रत्येक किस्त 1.5 माह यानी 45 दिन में जारी होगी     भुगतान : डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खाते में     भुगतान की स्थिति : एसएमएस और पोर्टल पर उपलब्ध     पात्रता के लिए : आयु प्रमाण और आधार से लिंक बैंक खाता जरूरी     80 साल से अधिक उम्र के लाभार्थी     राज्य सरकार : 1500 रुपये     केंद्र सरकार : 1500 रुपये     80 साल से कम उम्र के लाभार्थी     राज्य सरकार : 2400 रुपये     केंद्र सरकार : 600 रुपये  

मुख्य लाइन जाम कर सहायक गलियों में सीवर ओवरफ्लो कराने की साजिश, नगर निगम ने भेलूपुर थाने में दी तहरीर

​ वाराणसी  काशी की छवि को योजनाबद्ध तरीके से धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। सीवर लाइनों की सफाई के दौरान शिवाला, सरायनंदन, नगवा समेत आधा दर्जन वार्डों में मुख्य सीवर लाइनों के भीतर बालू की बोरियां, लकड़ी का बुरादा, पत्थर, प्लाई और प्लास्टिक की सामग्री ठूंसी हुई मिली है। प्रथम दृष्टया यह किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा प्रतीत हो रहा है। मुख्य मार्ग की सीवर लाइन जाम होने के कारण सहायक गलियों में सीवर का पानी ओवरफ्लो करने लगा, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ और जलभराव का दृश्य बना। नगर निगम प्रशासन ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए अज्ञात अराजक तत्वों के खिलाफ एफआईआर (प्राथमिकी) दर्ज कराने हेतु पुलिस को लिखित तहरीर सौंप दी है।  महापौर अशोक कुमार तिवारी एवं नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने शनिवार को पार्षदों व अधिकारियों के साथ शिवाला वार्ड में अग्रवाल रेडियों के समीप मौका मुआयना किया। इस दौरान महापौर ने कहा कि नगर निगम और जलकल विभाग की टीमें दिन-रात सड़कों पर मुस्तैद रहकर जलजमाव निस्तारण में जुटी हुई हैं। इसके बावजूद पिछले दस दिनों से सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों पर नगर निगम को टारगेट कर जलभराव की भ्रामक फोटो व वीडियो प्रसारित की जा रही हैं। जबकि धरातल पर सच्चाई यह है कि दर्जनों जलभराव वाले प्वाइंट्स को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है और निचले इलाकों से पानी पंपों के जरिए लगातार निकाला जा रहा है। ​महापौर ने बताया कि शुक्रवार की रात शिवाला क्षेत्र में सीवर लाइन सफाई के दौरान करीब 12 बोरी बालू निकाली गई। सीवर लाइन में इस प्रकार बालू भरी बोरियां मिलना सीधे तौर पर साजिश की ओर इशारा करता है, जो गहन जांच व विवेचना का विषय है। निगम प्रशासन क्षेत्र के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रहा है ताकि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके। वहीं, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने इस कृत्य के पीछे अवांछनीय तत्वों का हाथ होने की आशंका व्यक्त करते हुए कहा कि निगम इस साजिश का पर्दाफाश करने में पूरी ताकत से जुटा है। उन्होंने सम्मानित शहरवासियों से अपील की है कि यदि कोई भी व्यक्ति सीवर लाइन या सरकारी परिसंपत्तियों के साथ ऐसी छेड़छाड़ करता दिखे तो तुरंत नगर निगम को सूचित करें। ​जलकल विभाग ने भेलूपुर थाने में दर्ज कराई प्राथमिकी की तहरीर ​अधिशासी अभियंता (जोन-2), जलकल विभाग, इस प्रकरण में अज्ञात लोगों के खिलाफ भेलूपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए तहरीर दी है है। तहरीर में शिवाला वार्ड संख्या-75 के अंतर्गत कूड़ा घर रत्नाकर पार्क के पास अग्रवाल रेडियों के निकट जलभराव समस्या के निस्तारण हेतु मुख्य सीवर लाइन सफाई के दौरान अत्यधिक मात्रा में बालू से भरे बोरे पाए गए। इसमें स्पष्ट उल्लेख है कि अज्ञात लोगों द्वारा मुख्य सीवर लाइन को चोक कर जलकल विभाग एवं शहर की छवि धूमिल करने की नीयत से यह साजिश रची गई है। ​मौके पर मौजूद प्रमुख जन प्रतिनिधि व अधिकारी: निरीक्षण के दौरान उपसभापति नरसिंह दास, पार्षद सुरेश चौरसिया, चंद्रनाथ मुखर्जी, मदनमोहन तिवारी, विजय द्विवेदी, महेंद्र पटेल, इंद्रदेव सिंह, मनीष गुप्ता, सोमनाथ यादव, अक्षयवर सिंह, अतुल पांडेय, रविंद्र कुमार सिंह, जलकल के महाप्रबंधक अनूप सिंह एवं सचिव सुधीर वर्मा सहित कई अन्य अधिकारी व प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

लखनऊ की पर्वतारोही पूर्वा धवन ने 5,826 मीटर ऊंची रुद्रगैरा चोटी पर फहराया तिरंगा

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर ‘बेटी बढ़ाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश लेकर पर्वतारोहण अभियान पर निकलीं लखनऊ की पर्वतारोही पूर्वा धवन ने माउंट रुद्रगैरा की 5,826 मीटर ऊंची चोटी पर भारतीय तिरंगा फहराकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। 10 सितंबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे शिखर पर पहुंचीं पूर्वा ने कठिन बर्फीले और चट्टानी रास्तों, कम ऑक्सीजन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच यह उपलब्धि हासिल की। अब उनका अगला लक्ष्य दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह करना है। सीएम योगी से मुलाकात कर सौंपा था ‘बेटी बढ़ाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश मई 2018 में पूर्वा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का बैनर सौंप चुकी हैं। सीएम योगी ने शुभकामनाएं देकर उनका हौसला बढ़ाया था। पूर्वा ने रुद्रगैरा फतह का श्रेय परिवार के सहयोग और सीएम की प्रेरणा को दिया। अभियान में शैलेश सेमवाल और बिहारी सिंह राणा की भी अहम भूमिका रही। क्योंकि उन्हीं के मार्गदर्शन में पूर्वा ने गंगोत्री में विशेष प्रशिक्षण लिया। गंगोत्री से दो दिन का सफर, फिर 1,300 मीटर की कठिन चढ़ाई पूर्वा, शैलेश सेमवाल और बिहारी सिंह राणा ने 7 सितंबर को सुबह 9 बजे गंगोत्री से ट्रेक शुरू किया। दो दिन की चुनौतीपूर्ण ट्रेकिंग के बाद टीम 4,350 मीटर की ऊंचाई पर रुद्रगैरा बेस कैंप पहुंची। 10 सितंबर को सुबह चार बजे बेस कैंप से समिट पुश शुरू हुआ। करीब आठ घंटे 30 मिनट की कठिन चढ़ाई में टीम ने लगभग 1,300 मीटर की ऊंचाई हासिल की और दोपहर 12:30 बजे 5,826 मीटर ऊंचे शिखर पर पहुंची। रास्ते में खड़ी बर्फ, चट्टानी हिस्से और कठिन खुले सेक्शन थे। ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की कमी और शारीरिक थकान ने चुनौती बढ़ाई, लेकिन टीम ने हिम्मत नहीं छोड़ी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान मिले प्रोत्साहन को पूर्वा ने अपने अभियान की ऊर्जा बनाया और लगातार नए लक्ष्य की ओर बढ़ रही हैं। पीक्स एंड प्लास्टिक से स्वच्छ हिमालय का संदेश, अब मिशन एवरेस्ट पूर्वा ने अपने अभियान को पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा है। ‘पीक्स एंड प्लास्टिक’ पहल के जरिए वह पर्वतीय क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के प्रति जागरूकता और जिम्मेदार पर्वतारोहण का संदेश दे रही हैं। उनका कहना है कि हिमालय की चोटियों को फतह करना जितना गौरवपूर्ण है, उतना ही जरूरी उन्हें स्वच्छ और सुरक्षित रखना भी है। रुद्रगैरा पर तिरंगा फहराने के बाद अब पूर्वा की नजर 8,848.86 मीटर ऊंचे माउंट एवरेस्ट पर है। उनका लक्ष्य एवरेस्ट पर भारतीय तिरंगा फहराने के साथ महिला सशक्तीकरण, युवा प्रेरणा और स्वच्छ हिमालय का संदेश पहुंचाना है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कवि सम्मेलन से लखनऊ विवि की वॉल पेंटिंग तक, कई शहरों में पहुंचा अभियान

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में युवाओं को रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच देने और माफिया राज व भय की संस्कृति के खिलाफ सकारात्मक संदेश देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे रंग दे बसंती अभियान का कारवां लगातार बढ़ रहा है। अभियान के तहत प्रदेश के विभिन्न शहरों में कार्यक्रम आयोजित कर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को जोड़ा जा रहा है। इसी क्रम में लखनऊ के राजेंद्र नगर स्थित नवयुग कन्या डिग्री कॉलेज में रंग दे बसंती टीम ने छात्राओं से संवाद किया। कार्यक्रम में छात्राओं को शिक्षा के साथ नवाचार और एआई आधारित शिक्षा के महत्व की जानकारी दी गई। साथ ही बदलते दौर में सोशल मीडिया की उपयोगिता, उसके सकारात्मक प्रयोग और रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए इसके इस्तेमाल को लेकर छात्राओं से संवाद किया गया। इस दौरान छात्राओं ने क्विज प्रतियोगिता, टैलेंट क्रिएशन समेत विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कॉलेज की प्राचार्य मंजुला उपाध्याय ने कहा कि रंग दे बसंती जैसे प्लेटफॉर्म छात्रों के लिए उपयोगी साबित होंगे। ऐसे मंचों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को अपनी प्रतिभा को निखारने और उसे सामने लाने का अवसर मिल रहा है। कार्यक्रम में छात्राओं ने रैंप वॉक, सिंगिंग, डिबेट और काव्य पाठ जैसी क्रिएटिव गतिविधियों में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाली छात्राओं का रंग दे बसंती टीम की ओर से उत्साहवर्धन किया गया। मानवी राजपूत, आमना असद, रौशनी चौधरी, वर्तिका, शगुन और कुलेष्ठा को प्रोत्साहन स्वरूप ट्रॉफी प्रदान की गई। रंग दे बसंती के प्रदेश संयोजक ने बताया कि अभियान के तहत प्रदेश के विभिन्न जनपदों से योग्य छात्र-छात्राओं का चयन किया जा रहा है। चयनित विद्यार्थियों को शैक्षिक गतिविधियों के साथ-साथ नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने में सहायता देने के लिए 15 हजार रुपये की आर्थिक मदद भी दी जा रही है। इसके लिए प्रदेश के सभी जनपदों में फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। आवेदन फॉर्म रंग दे बसंती के इंस्टाग्राम पेज और वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं। अभियान के तहत टीम प्रदेश के अनेक जनपदों में कार्यक्रम आयोजित कर तेजी से छात्र-छात्राओं तक अपनी पहुंच बना रही है। इसके तहत इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कवि सम्मेलन, लखनऊ विश्वविद्यालय में वॉल पेंटिंग और मुजफ्फरनगर के एसडी कॉलेज में कॉमिक बुक का विमोचन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा चुके हैं।

योगी सरकार की पहल के तहत ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ से 5,123 छात्रों को मिलेगा प्रशिक्षण

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब स्कूली शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल से भी जोड़ा जाएगा। योगी सरकार की पहल के तहत ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के माध्यम से बांदा मंडल के सात आवासीय सर्वोदय विद्यालयों में अध्ययनरत 5,123 विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण देने की तैयारी पूरी कर ली गई है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना की तैयारियां पूरी की हैं। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले मेधावी विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ ऐसा कौशल उपलब्ध कराना है, जिससे भविष्य में उनके लिए नौकरी और स्वरोजगार के विकल्प बढ़ सकें। 7 विद्यालयों के छात्रों को मिलेगा लाभ समाज कल्याण विभाग की ओर से बांदा मंडल में 7 जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इनमें बांदा के दो, चित्रकूट के तीन तथा हमीरपुर और महोबा में एक-एक विद्यालय शामिल हैं। इन आवासीय विद्यालयों में मुख्य रूप से अनुसूचित जाति वर्ग के गरीब और मेधावी विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। अब कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को उनकी नियमित पढ़ाई के साथ कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। रुचि के अनुसार ट्रेड, प्रैक्टिकल पर जोर प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत विद्यार्थियों की रुचि और उपलब्ध ट्रेड के आधार पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। तीन से छह महीने की अवधि वाले सर्टिफिकेट कोर्स संचालित होंगे। अपैरल, आईटी-आईटीईएस, रिटेल मैनेजमेंट, ब्यूटी एंड वेलनेस, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक कक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा। विद्यार्थियों के लिए सप्ताह में दो दिन प्रैक्टिकल क्लास भी आयोजित की जाएगी, जिससे वे सीखे हुए कौशल का व्यावहारिक इस्तेमाल कर सकें। विद्यालय परिसर में ही प्रशिक्षण, योगी सरकार उठाएगी खर्च विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के लिए किसी दूसरे स्थान पर नहीं जाना पड़ेगा। संबंधित विद्यालय परिसरों में ही प्रशिक्षकों की तैनाती कर प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। इससे नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की संभावना कम रहेगी। योजना के तहत प्रशिक्षण का पूरा खर्च योगी सरकार वहन करेगी, जिससे विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद विद्यार्थियों का मूल्यांकन किया जाएगा। सफल विद्यार्थियों को उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन और नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएसडीसी) का संयुक्त प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जो देशभर में मान्य होगा। रोजगार और स्वरोजगार के लिए तैयार होंगे विद्यार्थी इस पहल का फोकस विद्यार्थियों को केवल किसी ट्रेड का प्रशिक्षण देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें भविष्य की रोजगार जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। कौशल हासिल करने के बाद विद्यार्थी निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर तलाशने के साथ अपनी रुचि के अनुसार स्वरोजगार की दिशा में भी आगे बढ़ सकेंगे। समाज कल्याण विभाग के अनुसार, जल्द ही विद्यालयवार विद्यार्थियों का पंजीकरण शुरू कराया जाएगा। इसके बाद रुचि के आधार पर ट्रेड आवंटित किए जाएंगे। प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उपस्थिति और पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए प्रत्येक विद्यालय में नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया जाएगा।