samacharsecretary.com

2017 से पहले यूपी में होती थी गो तस्करी, योगी सरकार ने अवैध बूचड़खाने बंद किए

2017 से पहले यूपी में होती थी गो तस्करी, योगी सरकार ने बंद किए अवैध बूचड़खाने प्रदेश की साढ़े सात हजार गोशालाओं में 12,58,000 गोवंश का संरक्षण: श्याम बिहारी प्रदेश में 94,000 हेक्टेयर में गो आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा सीएम योगी के नेतृत्व में गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए चल रहा अभियान बुंदेलखंड के 7 जिलों में 23,500 हेक्टेयर में हो रही गो आधारित प्राकृतिक खेती यूपी में 1 करोड़ 90 लाख गोवंश, गो आधारित प्राकृतिक खेती तय करेगी किसानों के भविष्य की दिशा लखनऊ  प्रदेश में गो संरक्षण और प्राकृतिक खेती को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में गो तस्करी की घटनाएं होती थीं, लेकिन योगी आदित्यनाथ सरकार आने के बाद अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई कर उन्हें बंद किया गया। इसके बाद से गो संरक्षण की व्यवस्था मजबूत हुई है और आज प्रदेश की साढ़े सात हजार गोशालाओं में लगभग 12,58,000 गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी के मार्गदर्शन में गोशालाओं को बनाया जा रहा आत्मनिर्भर उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए ‘गो आधारित प्राकृतिक खेती मिशन’ तेजी से लागू किया जा रहा है। वर्तमान में पूरे उत्तर प्रदेश में करीब 94,000 हेक्टेयर क्षेत्र में गो आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर और महोबा में लगभग 23,500 हेक्टेयर क्षेत्र में यह अभियान संचालित है। एक गाय से प्रतिदिन 5 लीटर गोमूत्र और 10 किलोग्राम गोबर श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि आने वाले समय में गो आधारित प्राकृतिक खेती ही किसानों के भविष्य की दिशा तय करेगी। एक गाय से प्रतिदिन लगभग 5 लीटर गोमूत्र और 10 किलोग्राम गोबर प्राप्त होता है, जो प्राकृतिक खेती के लिए अत्यंत उपयोगी है। प्रदेश में करीब 1 करोड़ 90 लाख गोवंश होने के कारण इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि गोमूत्र और गोबर से तैयार जैविक उत्पादों के उपयोग से किसानों की लागत घट रही है और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है। इससे जहां किसानों की आय बढ़ रही है, वहीं मिट्टी की उर्वरता भी संरक्षित हो रही है। 7,716 स्थानों पर गो संरक्षण प्रदेश में 7,716 स्थानों पर गो संरक्षण का कार्य किया जा रहा है और गोशालाएं अब जैविक खाद उत्पादन के केंद्र के रूप में विकसित हो रही हैं। प्राकृतिक खेती के इस मॉडल से न केवल किसानों को लाभ मिल रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिल रही है।

उत्तर प्रदेश में पहली बार होगी पेपरलेस जनगणना, घर बैठे खुद भी दर्ज कर सकेंगे अपनी जानकारी

पटना उत्तर प्रदेश में जल्द ही जनगणना शुरू होने जा रही हैं. इस बार जनगणना पूरी तरह से डिजिटल तरीके से की जाएगी. जनगणना अधिकारी घर-घर जाकर गणना करेंगे. उत्तर प्रदेश में जनगणना की तारीख आई सामने उत्तर प्रदेश में साल 2027 की जनगणना शुरू होने जा रही है. इस बार ये पहली बार होगा जब जनगणना डिजिटल रूप से आयोजित की जाएगी, जिसमें डेटा जुटाने, उनकी एंट्री, सत्यापन और निगरानी समेत सभी काम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किए जाएंगे. लोगों को स्व-गणना का भी ऑप्शन दिया जाएगा यानी वोटर स्वयं अपना डेटा जमाकर करे जनगणना में शामिल हो सकेंगे. उत्तर प्रदेश में दो चरणों में जनगणना कराई जाएगी पहले चरण में मकान का सूचीकरण एवं मकान की गणना का काम होगा जबकि दूसरे चरण में जनसंख्या गणना कराई जाएगी. पहले चरण में स्व-गणना की प्रक्रिया 7 मई से 21 मई तक चलेगी, इसके बाद अधिकारी 22 मई से 20 जून घर-घर जाकर फील्ड कार्य पूरा करेंगे. दूसरे चरण में ही जातिगत गणनी की जाएगी. जनगणना में इन सवालों के देने होंगे जवाब जनगणना के पहले चरण में मकान का सूचीकरण और मकानों की गणना की जाएगी. इसके लिए लोगों से 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिनकी जानकारी लोगों को गणना के लिए आए अधिकारियों को देनी होगी. 1. भवन नंबर या जनगणना नंबर 2. मकान नंबर 3. मकान के फर्श में इस्तेमाल प्रमुख सामग्री. यानी कि फर्श सीमेंट का है, ग्रेनाइट है, मार्बल है. 4. मकान के दीवार में इस्तेमाल सामग्री 5. मकान की छत में इस्तेमाल सामग्री 6. मकान का इस्तेमाल 7. मकान की हालत 8. परिवार क्रमांक 9. परिवार के सदस्यों की संख्या 10. परिवार के मुखिया का नाम 11. परिवार के मुखिया का लिंग 12. जाति, सामान्य, अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी. 13. मकान के स्वामित्व की स्थिति 14. मकान में कमरों की संख्या 15. विवाहित दंपतियों की संख्या 16. पेयजल का सोर्स 17. पेयजल की उपलब्धता 18. बिजली का सोर्स 19. शौचालय की उपलब्धता 20. शौचालय का प्रकार 21. गंदे पानी की निकासी 22. स्नानघर की उपलब्धता 23. गैस कनेक्शन 24. खाना पकाने का मुख्य ईंधन 25. रेडियो या ट्रांजिस्टर 26. टीवी 27. इंटरनेट की सुविधा 28. लैपटॉप या कंप्यूटर 29. टेलीफोन, मोबाइल, स्मार्ट फोन 30. साइकल, स्कूटर, मोटरसाइकल 31.कार, जीप, वैन 32. मुख्य अनाज 33. मोबाइल नंबर उत्तर प्रदेश में जनगणना के लिए क़रीब छह लाख से ज्यादा कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी. ये कर्मचारी लोगों के घर-घर जाकर मकानों का सूचीकरण करेंगे और सारा डेटा जुटाएंगे. ये डेटा इकट्ठा करने और उसे सत्यापित करने का काम डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा. इसके लिए राज्य स्तर पर एक नोडल कार्यालय भी स्थापित किया जाएगा.    

HC का अहम फैसला: अब ससुर से भी मेंटेनेंस ले सकती हैं बहुएं, जानिए क्या है शर्त

इलाहाबाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक अहम और बड़ा फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि हिन्दू विधवा महिलाएं अपने ससुर से भी गुजारा भत्ता की मांग कर सकती हैं। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह टिप्पणी की है कि पति का अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने का दायित्व उसकी मृत्यु के बाद भी बना रहता है। ऐसे में कोई भी विधवा अपने ससुर से भी भरण-पोषण की मांग कर सकती है। यानी हाई कोर्ट की शर्तों के अनुसार पति के गुजर जाने के बाद ही कोई विधवा अपने ससुर से भरण-पोषण भत्ता देने का दावा कर सकती है। जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर सिंह की पीठ ने अपने फैसले में कहा, "यह बात पूरी तरह से स्थापित है कि पति का अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने का दायित्व होता है। यह स्थिति उन मामलों से सामने आई है, जहाँ पति-पत्नी अलग हो गए हैं और पत्नी ने भरण-पोषण की मांग की है, चाहे वह आपराधिक मामलों के तहत हो या हिंदू कानून में भरण-पोषण के प्रावधानों के तहत। इतना ही नहीं, पत्नी का भरण-पोषण करने का पति का यह दायित्व उसकी मृत्यु के बाद भी कानूनन बना रहता है, जिससे विधवा को अपने ससुर से भरण-पोषण की मांग करने का अधिकार मिल जाता है।" लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने अपने आदेश में हालांकि किसी विशेष कानूनी प्रावधान का ज़िक्र नहीं किया, लेकिन स्पष्ट किया कि 'हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956' की धारा 19 और 21 एक हिंदू विधवा को कुछ शर्तों के तहत अपने ससुर/उनकी संपत्ति से भरण-पोषण की मांग करने की इजाजत देती हैं। मामला क्या? दरअसल, हाई कोर्ट एक पति द्वारा दायर उस अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी पत्नी पर झूठी गवाही देने का मुकदमा चलाने की अनुमति मांगने वाले उसके आवेदन को खारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी ने भरण-पोषण की मांग करते हुए अपने लिखित बयानों में झूठे बयान दिए हैं। पति ने दावा किया कि उसकी पत्नी ने खुद को झूठे तौर पर एक गृहिणी के रूप में पेश किया, और यह बात छिपाई कि वह एक कामकाजी महिला है। उसने आगे आरोप लगाया कि उसके पास एक बैंक में 20 लाख रुपये से अधिक की कुल राशि वाली फिक्स्ड डिपॉज़िट रसीदें (FDRs) थीं, लेकिन उसने अपने हलफनामे में इस जानकारी को छिपा लिया। विवाह के बाद बेटी का भरण पोषण करना बाप का दायित्व नहीं याचिकाकर्ता ने पीठ को यह भी बताया गया कि वर्तमान में, FDR में लगभग 4 लाख रुपये जमा हैं और बाकी राशि उसने निकाल ली है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने शुरुआत में ही टिप्पणी की कि फैमिली कोर्ट का निष्कर्ष स्पष्ट है कि आवेदक-अपीलकर्ता/पति ने ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया जिससे यह साबित हो सके कि प्रतिवादी-पत्नी कहीं कार्यरत है। पीठ ने कहा कि यह साबित करने का पूरा दायित्व पति पर ही था कि उसकी पत्नी कहीं नौकरी कर रही है; पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि पत्नी द्वारा यह कहने पर कि वह कहीं कार्यरत नहीं है, उसे किसी नकारात्मक बात को साबित करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। पत्नी की वित्तीय संपत्तियों के संबंध में, कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि FDRs उसे उसके पिता द्वारा दी गई थीं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि एक पिता का अपनी बेटी के विवाह के बाद उसके भरण-पोषण का कोई दायित्व नहीं होता, सिवाय उस स्थिति के जब वह विधवा हो गई हो। ससुर से गुजारा मांगने की क्या शर्तें? इसके बाद हाई कोर्ट ने कहा, "हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम की धारा 19 के अनुसार, एक विधवा बहू अपने ससुर से गुजारा भत्ता तब तक मांग सकती है, जब तक कि वह अपनी खुद की कमाई या अपनी खुद की संपत्ति से अपना गुजारा करने में असमर्थ हो। इसमें कहा गया है कि विधवा अपने ससुर से तभी संपर्क कर सकती है, जब वह अपने मृत पति की संपत्ति से, अपने माता-पिता की संपत्ति से, या अपने बच्चों और उनकी संपत्ति से गुजारा भत्ता पाने में पूरी तरह से असमर्थ हो।" कोर्ट ने ये भी कहा कि गुजारा भत्ता देने की यह जिम्मेदारी तब लागू नहीं होती, जब ससुर के पास अपनी हिस्सेदारी वाली या पुश्तैनी संपत्ति से (जो उसके कब्ज़े में हो) भुगतान करने के साधन न हों; विशेष रूप से ऐसी संपत्ति से, जिसमें से बहू को पहले ही कोई हिस्सा मिल चुका हो। कोर्ट ने ये भी कहा कि बहू के पुनर्विवाह करने पर यह जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है।  

एमएसपी से किसानों को मिलेगा लाभ, पारदर्शी व्यवस्था हमारी प्राथमिकता: सूर्य प्रताप शाही

एमएसपी से किसानों को मिलेगा लाभ, पारदर्शी व्यवस्था हमारी प्राथमिकता: सूर्य प्रताप शाही कृषि मंत्री ने रबी सीजन की फसलों की खरीद के लिए बनाई गई व्यापक रणनीति के बारे में मंगलवार को दी जानकारी एमएसपी पर दलहन-तिलहन खरीद 7 अप्रैल से होगी शुरू, 30 जून तक चलेगी चना, मसूर, सरसों की खरीद पिछले वर्ष की तुलना में एमएसपी दरों में वृद्धि, कृषि विभाग की योजनाओं पर रिकॉर्ड खर्च और बीज वितरण में ऐतिहासिक उपलब्धि का किया उल्लेख* लखनऊ रबी सीजन 2026-27 में भी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ मिलेगा। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने मंगलवार को लोक भवन में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि चना, मसूर, सरसों की खरीद 7 अप्रैल से 30 जून तक की जाएगी। इस दौरान पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था, डीबीटी भुगतान और विस्तृत क्रय नेटवर्क के माध्यम से किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।  सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने, फसलों का उचित मूल्य दिलाने और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। एमएसपी पर दलहन और तिलहन की खरीद की यह रणनीति किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में उर्वरक की कोई कमी नहीं है और 75 जनपदों में उर्वरकों की सप्लाई सुचारु रूप से हो रही है। एमएसपी पर खरीद की व्यवस्था कृषि मंत्री ने बताया कि मूल्य समर्थन योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करती है। चने का एमएसपी 5875 रुपये प्रति क्विंटल, मसूर का 7000 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों का 6200 रुपये प्रति क्विंटल और अरहर का 8000 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जिससे किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिल सके। खरीद लक्ष्य और समयसीमा सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने फसलों की खरीद के स्पष्ट लक्ष्य तय किए हैं। उन्होंने कहा कि चने के लिए 2.24 लाख मीट्रिक टन, मसूर के लिए 6.77 लाख मीट्रिक टन, सरसों के लिए 5.30 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कृषि मंत्री ने बताया कि इस वर्ष एमएसपी दरों में वृद्धि कर किसानों को अतिरिक्त लाभ देने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि चने पर 225 रुपये, मसूर पर 300 रुपये और सरसों पर 250 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है, जिससे किसानों की आय में सीधा इजाफा होगा। सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है और एमएसपी में यह वृद्धि उसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पारदर्शी खरीद और भुगतान प्रणाली कृषि मंत्री ने बताया कि खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सभी क्रय केंद्रों पर आधार-सक्षम पीओएस मशीनें स्थापित की गई हैं। इससे वास्तविक किसानों की पहचान सुनिश्चित होगी और किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना समाप्त होगी। किसानों को उपज का भुगतान सीधे डीबीटी के माध्यम से उनके आधार-लिंक्ड बैंक खातों में भेजा जाएगा, जिससे भुगतान प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी। क्रय केंद्रों और एजेंसियों की व्यवस्था कृषि मंत्री ने बताया कि इस वर्ष खरीद व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए बड़ी संख्या में क्रय केंद्र स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है। भारत सरकार की एजेंसियां नैफेड और एनसीसीएफ को राज्य की 5 एजेंसियां यूपीपीसीयू, यूपीपीसीएफ, जैफेड और यूपीएसएस किसानों से उपज को क्रय करके सप्लाई करेंगी, जिसका लाभ किसानों को सीधे खाते में वितरित किया जाएगा। इन एजेंसियों के समन्वय से खरीद प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और व्यापक बनाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें। कृषि क्षेत्र में उपलब्धियों का किया उल्लेख सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रदेश में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्ष 2025-26 में कृषि विभाग द्वारा लगभग 5700 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि विभिन्न योजनाओं पर व्यय की गई, जो रिकॉर्ड उपलब्धि है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधारात्मक प्रावधान लागू करने से राज्य को 303 करोड़ रुपये की बचत हुई है। बीज वितरण की दी जानकारी कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों को सशक्त बनाने के लिए बड़े पैमाने पर बीज वितरण किया गया है। 11.25 लाख किसानों को 50 फीसदी अनुदान पर बीज उपलब्ध कराया गया, जबकि 12.73 लाख किसानों को मुफ्त बीज वितरित किए गए। जायद फसलों को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष 31,950 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया, जिसमें मूंगफली, उड़द और मूंग शामिल हैं। उर्वरक उपलब्धता की दी जानकारी राज्य में किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में राज्य में कुल 25.41 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जो सभी 75 जनपदों में संतुलित रूप से वितरित किया गया है। उपलब्ध उर्वरकों में 11.26 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 5.08 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 4.64 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 3.45 लाख मीट्रिक टन एसएसपी तथा 98 हजार मीट्रिक टन पोटाश (एमओपी) शामिल है। यह मात्रा किसानों की वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है और किसी भी जिले में कमी की स्थिति नहीं है। उर्वरकों का वितरण पूरी तरह डिजिटल प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है। पीओएस मशीनों के जरिए अब तक 63.34 लाख मीट्रिक टन उर्वरक किसानों को वितरित किया जा चुका है, जिससे पारदर्शिता बनी हुई है और वास्तविक किसानों तक ही लाभ पहुंच रहा है। अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार ने अग्रिम योजना के तहत उर्वरकों का भंडारण भी किया है, ताकि आने वाले खरीफ सीजन में भी किसी प्रकार की कमी न हो। साथ ही वैज्ञानिकों की सलाह के आधार पर प्रति हेक्टेयर उर्वरक उपयोग के मानक तय किए गए हैं, जिससे संतुलित उपयोग को बढ़ावा मिल सके। कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, क्योंकि प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। सरकार लगातार इसकी निगरानी कर रही है, ताकि हर किसान को समय पर उर्वरक मिल सके। सीड पार्क की स्थापना का भी किया उल्लेख कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश को बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने … Read more

यूपी एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई, हाथ जोड़कर माफी मांगता दिखा मौलाना, लंगड़ाते हुए निकला जुलूस

 बहराइच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां और गौ माता के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने वाले मौलाना अब्दुल्ला सलीम चतुर्वेदी की अकड़ अब काफूर हो चुकी है. यूपीएसटीएफ की टीम मौलाना को बिहार से गिरफ्तार कर बहराइच ले गई थी.  इस दौरान पूछताछ में मौलाना अब्दुल सलीम ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. साथ ही उसने एक वीडियो भी जारी किया है जिसमें वह हाथ जोड़कर माफी मांगता और लंगड़ाता हुआ नजर आ रहा है. कौन है मौलान अब्दुल सलीम मूल रूप से बिहार के अररिया के रहने वाले मौलाना अब्दुल्ला सलीम ने एक धार्मिक सभा में गौकशी और सीएम योगी की मां को लेकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था.वीडियो वायरल होने के बाद मौलाना के खिलाफ बहराइच के कोतवाली नगर थाने में 8 मार्च को विश्व हिंदू परिषद (VHP) मुकदमा दर्ज हुआ था. भड़काऊ बयान देने के बाद मौलाना फरार हो गया था जिसे ट्रैक करने के लिए यूपी एसटीएफ की टीमें लगी हुई थीं. इस बीच सादी वर्दी में पहुंची एसटीएफ ने बिहार के पूर्णिया से स्थानीय पुलिस की मदद से उसे हिरासत में लिया और उसे यूपी लेकर आई. जेल भेजा गया मौलाना इस बीच जब यूपीएसटीएफ की टीम ने उसे बहराइच ले जाकर पूछताछ शुरू की तो वह माफी मांगने लगा. मौलान से पूछताछ के बाद का एक वीडिया सामने आया है. इस वीडियो में मौलाना लंगड़ाते हुए हाथ जोड़कर माफी मांगता नजर आ रहा है. इस दौरान उसने लोगों से भी अपील की है कि वे इस तरह की भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल न करें.फिलहाल बहराइच पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उसे जेल भेज दिया है.    

जनता को मिली बड़ी राहत, गोंडा में अब घर-घर कूड़ा उठाने के लिए नहीं देना होगा शुल्क

 गोंडा उत्तर प्रदेश में गोंडा जिले के नगर पालिका में आगामी वर्ष के लिए 84.46 करोड़ के प्रस्ताव पारित किए गए हैं। पालिका सभागार में सोमवार को हुई बोर्ड बैठक में वर्ष 2025-26 में आय-व्यय का पूरा ब्योरा प्रस्तुत किया गया। पालिका अध्यक्ष उजमा राशिद की अध्यक्षता में शहरी क्षेत्र के सभी 27 वार्डों के 115 प्रस्तावों और सड़क, नाली समेत 68 विकास कार्यों को मंजूरी दी गई। एक प्रस्ताव घर-घर कूड़ा उठाने का शुल्क लेने को सभासदों के विरोध के चलते खारिज कर दिया गया। बैठक का संचालन एसडीएम व प्रभारी ईओ विशाल कुमार ने किया। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2025 तक अवशेष धनराशि 38.29 करोड़ थी। लेकिन 28 फरवरी 2026 तक 49.58 करोड़ आय की। यानी कुल आय 87.88 करोड़ हुआ। जिसमें 48.47 करोड़ खर्च किए गए हैं और 39.41 करोड़ बचे हैं। आगामी वर्ष में 62.96 करोड़ खर्च किए जाने का अनुमान हैं। बैठक में सांसद प्रतिनिधि एवं सभासद संदीप पांडेय भी मौजूद रहे बोर्ड बैठक में कुल 116 प्रस्तावों को पटल पर रखा गया। इन प्रस्तावों के महत्वपूर्ण कार्यो में सिविल लाइन चौकी से आरटीओ आफिस तक नाली निर्माण, पंतनगर में दो कार्य रबड़मोल्ड इंटरलाकिंग व नाली निर्माण, महरानीगंज वार्ड में अतीक ठेकेदार के घर के निकट सीसी रोड व नाली निर्माण, मकार्थीगंज में बरियारपुरवा में पूर्व सभासद विनोद कुमार के घर निकट नाली निर्माण और रबरमोल्ड इंटरलाकिंग कार्य कराया जाना है। बड़गांव में फैज रैनी के घर निकट आरसीसी नाला व स्लैब निर्माण, साहेबगंज में मारवाड़ कालेज के सामने नया नाली निर्माण और रबरमोल्ड इंटरलाकिंग, सिविल लाइन प्रथम में शिवपुरी कालोनी नाली निर्माण और ररबरमोल्ड इंटरलाकिंग, सेमरा दम्मन में विष्णु के घर से शिव ट्रेडर्स तक इंटरलाकिंग निर्माण, शास्त्री नगर तोपखाना सीसी रोड व नाली निर्माण, इमामबाड़ा में नाली निर्माण और रबरमोल्ड इंटरलाकिंग, महराजगंज में इंटरलाकिंग उच्चीकरण न नाली मरम्मत, पटेल नगर पूर्वी में सीसी इंटरलाकिंग व नाली निर्माण, रानीबाजार में इंटरलाकिंग व नाली निर्माण, छेदी पुरवा में बड़गांव चौराहे के निकट इंटरलाकिंग व नाली निर्माण, आवास विकास कालोनी में मकान संख्या 2020 के निकट सड़क इंटरलाकिंग नाली मरम्मत व क्रास ड्रेन निर्माण के अलावा करीब सभी वार्डो में नाली निर्माण, नाली मरम्मत व रबड़मोल्ड इंटरलाकिंग आदि कराए जाने हैं। बैठक में सभासदों अनूप कुमार श्रीवास्तव बंटी, फहीम सिद्दीकी, प्रकाशआर्य हीरु, मो इसरायल, वैभव, बब्लू सोनी, विनय शर्मा, शाहिद अली कुरैशी, अब्दुल्ला अंसारी, शशांक श्रीवास्तव छोटू, अलंकार सिंह, आफताब तनहा, सुड्डन सिंह, धर्म प्रकाश शुक्ला,अब्दुल सईद, मिथुन कौशल आदि मौजूद रहे। तीन कार्यों के नामों के बदलाव को मंजूरी बोर्ड बैठक में तीन कार्यो के नाम के बदलाव को मंजूरी दी गई है। इनमें अम्बेडकर चौराहे से डिग्री कालेज चौराहे तक सड़क का नाम गोण्डा नरेश राजा देवीबख्श सिंह करने व सिविल लाइन में चेतना पार्क का नाम स्वतंत्रता सेनानी लाल बिहारी टंडन के नाम पर करने और अम्बेडकर चौराहे से जेल रोड की सड़क का नाम अमर शहीद राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी करने की स्वीकृति दी गई। घर-घर कूड़ा उठाने का शुल्क नहीं लगेगा बोर्ड बैठक में सबसे महत्वपूर्ण घर घर कूड़ा उठाने के एवज में 30 रुपया प्रतिमाह वसूलने का शुल्क के प्रस्ताव खारिज कर दिए गए है। प्रस्ताव संख्या115 में पालिका की आय बढ़ोतरी के घर-घर से यह वसूली किए जाने का जिक्र था। अध्यक्ष सभासद संघ शाहिद अली कुरैशी ने बताया कि सभासदों के आपत्ति के बाद यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया। शहर की प्रकाश व्यवस्था पर 53.28 लाख खर्च होंगे बोर्ड प्रस्ताव संख्या में पांच में शहर को जगमगाने के लिए 53.28 लाख खर्च किए जाने का जिक्र है। जिसे बोर्ड से मंजूरी दी गई है। इसमें एलईडी स्ट्रीट लाइट फिटिंग 90 वाट, एलईडी फ्लड लाइट फिटिंग्स 180 से 200 वाट, केबल 300 क्वायल, 16 एम्पियर पियानो स्विच मय पीएम एल्मुनियम 150 क्वायल, एमसीबी, पीसीसी पोल नट, पीसीबी टेप एलईडी ड्राईवर 90 वाट, समेत अन्य बिजली सामान व संयत्र क्रय एवं आपूर्ति लेने के प्रस्ताव शामिल हैं। वहीं प्रस्तावों में जाड़े में रैन बसेरे के इंतजाम के लिए 20 बेड व अन्य जरुरी सामान, पालिका में स्टेशनरी व छपाई एवं अधिकांश सम्पतियों के दाखिल खारिज व हस्तांरण आदि शामिल हैं।

बरेका ने रचा नया इतिहास: 572 रेल इंजनों का किया अभूतपूर्व निर्माण, अब तक का सर्वाधिक वार्षिक उत्पादन

बनारस बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) ने महाप्रबंधक श्री आशुतोष पंत  के कुशल नेतृत्व में भारतीय रेल के औद्योगिक इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 572 रेल इंजनों का निर्माण कर अब तक का सर्वाधिक वार्षिक उत्पादन दर्ज किया है। यह उपलब्धि बरेका की उत्कृष्ट तकनीकी क्षमता, कुशल प्रबंधन और अधिकारियों, कर्मचारियों की अथक मेहनत का सशक्त प्रमाण है। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में 477 रेल इंजनों का निर्माण हुआ था, जबकि इस वर्ष उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह उपलब्धि न केवल बरेका बल्कि पूरे भारतीय रेल परिवार के लिए गर्व का विषय है। इस वित्तीय वर्ष में निर्मित 572 लोकोमोटिव में शामिल हैं – भारतीय रेलवे के लिए 558 आधुनिक विद्युत लोकोमोटिव जिसमें- WAG-9 – 401 (माल वाहक इलेक्ट्रिक लोको)  WAP-7 – 143 (यात्री वाहक इलेक्ट्रिक लोको) अमृत भारत लोको – 14 मोजांबिक को निर्यात हेतु 10 डीजल लोकोमोटिव एवं  घरेलू ग्राहकों हेतु 04 डीजल लोकोमोटिव विशेष उल्लेखनीय है, कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित 553 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लक्ष्य के मुकाबले 558 लोकोमोटिव का निर्माण किया गया, जो  लक्ष्य से लगभग 1 प्रतिशत अधिक एवं पिछले वर्ष की तुलना में 18 प्रतिशत है। 11259 रेल इंजनों के निर्माण का गौरवशाली सफर स्थापना से लेकर अब तक बरेका कुल 11259 रेल इंजनों का निर्माण कर चुका है, जिनमें 2925 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव शामिल हैं। यह उपलब्धि भारतीय रेल की आत्मनिर्भरता और तकनीकी उत्कृष्टता की दिशा में बरेका के महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाती है। आधुनिक तकनीक और क्रू कंफर्ट पर विशेष ध्यान बरेका द्वारा निर्मित लोकोमोटिव में चालक दल की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसके तहत लोको कैब में वाटरलेस यूरिनल सीएलआई सीट सिग्नल एक्सचेंज लाइट डीपीडब्ल्यूसीएस ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का समावेश किया गया है। इन नवाचारों के परिणामस्वरूप बरेका को प्रोडक्शन यूनिट श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ लोको कैब का प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरता बरेका यूरोपियन स्टैंडर्ड की प्रतिष्ठित संस्था UNIFE द्वाराबरेका को इंटरनेशनल रेलवे इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (IRIS) के अंतर्गत आईएसओ 22163 का सिल्वर ग्रेड प्रमाण-पत्र लगातार दूसरी बार प्रदान किया गया है। यह सम्मान बरेका की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और वैश्विक मानकों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध उत्कृष्ट उत्पादन के साथ-साथ बरेका ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी निरंतर कार्य कर रहा है। वर्षा जल संचयन के लिए तालाबों एवं सोक पिट के माध्यम से हर वर्ष हजारों लीटर वर्षा जल का संचय किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बरेका में ग्रिड कनेक्टेड सोलर पावर प्लांट की स्थापित क्षमता 3874 किलोवाट-पीक है। इससे 41.76 लाख यूनिट सौर ऊर्जा का उत्पादन हुआ, जो बरेका की कुल वार्षिक ऊर्जा खपत का लगभग 19.87 प्रतिशत है। इस सौर ऊर्जा से लगभग 1.58 करोड़ रुपये की बचत हुई है। राजभाषा हिंदी के क्षेत्र में भी अग्रणी राजभाषा हिंदी के उत्कृष्ट प्रचार-प्रसार के लिए बरेका को रेलवे बोर्ड के राजभाषा निदेशालय द्वारा “रेल मंत्री राजभाषा शील्ड” से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान बरेका की हिंदी के प्रति प्रतिबद्धता और सतत प्रयासों का प्रमाण है। नए लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम रेल मंत्रालय ने बरेका को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 642 विद्युत रेल इंजनों के निर्माण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य सौंपा है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर महाप्रबंधक श्री आशुतोष पंत ने टीम बरेका के अधिकारियों, कर्मचारियों और महिला कर्मियों एवं उनके परिवार जनों  को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता बरेका के कर्मठ कर्मचारियों की मेहनत, तकनीकी दक्षता और रेलवे बोर्ड द्वारा दिए गए लक्ष्य को स्वीकार करने की दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बरेका आने वाले वित्तीय वर्ष में भी नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।

आईटी, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स और एआई जैसे आधुनिक कोर्स से छात्र होंगे सशक्त

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा और कौशल विकास को एकीकृत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा अब प्रदेश के 18 अटल आवासीय विद्यालयों में ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ लागू किया जाएगा, जिसके तहत 3447 विद्यार्थियों को आधुनिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।  यह कदम प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के निर्देशन में बढ़ाया जा रहा है। प्रोजेक्ट प्रवीण के अंतर्गत विद्यार्थियों को आईटी, आईटीईएस, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे आधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। अब तक यह कार्यक्रम केवल सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में संचालित था, लेकिन अटल आवासीय विद्यालयों को जोड़ने से इसका दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। मिशन निदेशक पुलकित खरे की पहल पर कराए गए सर्वे के आधार पर  विद्यालयों को चयनित किया गया है। सर्वे के अनुसार आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, आजमगढ़, बस्ती, बांदा, गोंडा, झांसी, कानपुर नगर, लखनऊ, बुलंदशहर, मिर्जापुर, प्रयागराज, गोरखपुर, मुजफ्फरनगर, वाराणसी, बरेली और मुरादाबाद स्थित 18 अटल आवासीय विद्यालयों के कुल 3447 छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण के लिए पात्र पाया गया है। विद्यार्थियों की विशेष रुचि आईटी, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स और अपैरल सेक्टर में देखी गई है। अटल आवासीय विद्यालय प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत संचालित हो रहे हैं, जिनका उद्देश्य श्रमिकों, प्रवासी कामगारों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के प्रतिभावान बच्चों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा प्रदान करना है। कक्षा 6 से 12 तक संचालित इन विद्यालयों में अब आधुनिक कौशल प्रशिक्षण भी जोड़ा जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को बल मिलेगा। मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ एक 210 घंटे का निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसमें आईटी, ब्यूटी, हेल्थकेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल्स और इंडस्ट्रियल विजिट भी शामिल हैं। अब इसमें ‘AI for All’ मॉड्यूल को भी जोड़ा गया है, जिससे विद्यार्थी तकनीकी रूप से सशक्त बन सकें। उन्होंने कहा कि अटल आवासीय विद्यालयों को इस परियोजना से जोड़ने से वंचित एवं दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी और “स्कूल से स्किल” मॉडल को मजबूती मिलेगी। इससे विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा और रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सिर्फ 50 किलोमीटर दूर होने के कारण बड़ी संख्या में अमेरिका और यूरोप से आ सकेंगे विदेशी पर्यटक

लखनऊ अलीगढ़ का ऐतिहासिक ताला उद्योग अब वैश्विक पहचान बनने जा रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अलीगढ़ में देश का पहला ‘लॉक म्यूजियम’ स्थापित करने का निर्णय लिया गया है, जो इस पारंपरिक उद्योग को संरक्षित करने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और नवाचार से जोड़ने का काम करेगा। इस पहल से ताला उद्योग का सालाना कारोबार 10 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंचने की संभावनाएं भी मजबूत हो गई हैं। सबसे खास बात यह है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से महज 50 किलोमीटर दूर होने के कारण बड़ी संख्या में अमेरिका और यूरोप से विदेशी पर्यटक यहां आ सकेंगे। मुख्यमंत्री के निर्देश पर तैयार की जा रही इस योजना का उद्देश्य अलीगढ़ के ताला उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। यह म्यूजियम न केवल एक प्रदर्शनी स्थल होगा, बल्कि एक व्यापक औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां पारंपरिक हस्तनिर्मित तालों से लेकर आधुनिक हाई-टेक सुरक्षा प्रणालियों तक की विकास यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे आने वाली पीढ़ियां इस उद्योग की तकनीकी, सामाजिक और आर्थिक यात्रा को समझ सकेंगी। म्यूजियम में प्रशिक्षण, शोध और तकनीकी विकास से जुड़े कार्यक्रम होंगे नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह पहल अलीगढ़ को उत्तर प्रदेश की वैश्विक औद्योगिक पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगी। म्यूजियम के माध्यम से युवाओं में कौशल विकास, डिजाइन, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा, जिससे उद्योग को नई दिशा प्राप्त होगी। साथ ही शिक्षा, शोध एवं तकनीकी जागरूकता के जरिए यह क्षेत्र नई आर्थिक ऊंचाइयों को छुएगा। सीएम योगी के निर्देश पर म्यूजियम को एक स्थायी ज्ञान केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा, जहां प्रशिक्षण, शोध और तकनीकी विकास से जुड़े कार्यक्रम आयोजित होंगे।  निर्यात और बाजार विस्तार को नई गति मिलेगी म्यूजियम बनने से पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के साथ-साथ उनकी उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार होगा। वहीं ताला बनाने वाली एमएसएमई इकाइयों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा, जिससे निर्यात और बाजार विस्तार को नई गति मिलेगी। बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे यह परियोजना पर्यटन, अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। लॉक म्यूजियम के विकसित होने से देश-विदेश के पर्यटकों का आकर्षण बढ़ेगा, जिससे स्थानीय व्यापार और सेवाओं को मजबूती मिलेगी। साथ ही बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिससे युवाओं को नई संभावनाएं मिलेंगी। उत्तर प्रदेश की औद्योगिक छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होगी सशक्त नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह पहल अलीगढ़ के ताला उद्योग को पारंपरिक पहचान से आगे बढ़ाकर आधुनिक और वैश्विक स्वरूप प्रदान करेगी। यह न केवल एक ऐतिहासिक उद्योग को संरक्षित करेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश की औद्योगिक छवि को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सशक्त बनाएगी।

चना, सरसों और मसूर की खरीद 2 अप्रैल से शुरू, सीधे बैंक खाते में आएगा पैसा

लखनऊ यूपी की योगी सरकार ने किसानों को सौगात देते हुए रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा कर दी है। चना, मसूर, सरसों और अरहर की खरीद के लिए रेट भी पिछली बार से बढ़ाकर घोषित किए गए हैं। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए दलहनी और तिलहनी फसलों की सरकारी खरीद की कार्ययोजना जारी कर दी है। मंगलवार को कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और खरीद लक्ष्यों का खुलासा किया। सरकार ने इस बार दालों और तिलहन के दामों में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिसे किसानों के लिए एक 'सुरक्षा कवच' बताया गया है। कृषि मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से इस वर्ष एमएसपी दरों में वृद्धि की गई है। चने का समर्थन मूल्य 5875 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 225 रुपये अधिक है। इसी तरह मसूर पर 300 रुपये की वृद्धि के साथ 7000 रुपये प्रति क्विंटल और सरसों पर 250 रुपये की वृद्धि के साथ 6200 रुपये प्रति क्विंटल का भाव निर्धारित किया गया है। अरहर के लिए किसानों को 8000 रुपये प्रति क्विंटल का लाभकारी मूल्य मिलेगा। खरीद लक्ष्य और अवधि प्रदेश में इस वर्ष रबी फसलों की खरीद 2 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 30 जून 2026 तक यानी कुल 90 दिनों तक चलेगी। सरकार ने इस बार खरीद के बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं।मसूर: 6.77 लाख मीट्रिक टन यानी कुल उत्पादन का 100% खरीदी होगी। सरसों 5.30 लाख मीट्रिक टन, चना 2.24 लाख मीट्रिक टन और अरहर 1.14 लाख मीट्रिक टन खरीद होगी। पारदर्शिता के लिए 'आधार इनेबल्ड' व्यवस्था सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि पिछली सरकारों में दलहन-तिलहन की खरीद पर ध्यान नहीं दिया जाता था, लेकिन योगी सरकार ने इसे प्राथमिकता दी है। वास्तविक किसानों की पहचान सुनिश्चित करने और बिचौलियों को बाहर रखने के लिए प्रत्येक क्रय केंद्र पर आधार-सक्षम पीओएस (PoS) मशीनें लगाई गई हैं। किसानों को उनकी उपज का भुगतान सीधे उनके आधार-लिंक्ड बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से किया जाएगा। 6 एजेंसियां और 190 से अधिक क्रय केंद्र खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए 02 केंद्रीय एजेंसियां (नैफेड और एनसीसीएफ) और 04 राज्य स्तरीय एजेंसियां (यूपीपीसीयू, यूपीपीसीएफ, जैफेड और यूपीएसएस) तैनात की गई हैं। इस वर्ष नैफेड और एनसीसीएफ द्वारा सीधी खरीद के लिए 190 केंद्र खोलने का प्रस्ताव है, जबकि राज्य एजेंसियां भी अपने केंद्र संचालित करेंगी। पिछले वर्ष इस योजना से 20 हजार से अधिक किसान लाभान्वित हुए थे, जिसे इस वर्ष और बढ़ाने का प्रयास है।