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योगी सरकार में औद्योगिक क्रांति: 9 साल में 17 हजार से अधिक कारखाने पंजीकृत

योगी सरकार में औद्योगिक क्रांति, 9 साल में 17 हजार से अधिक कारखाने पंजीकृत पिछले 70 वर्षों में प्रदेश में पंजीकृत हुए थे केवल 14 हजार कारखाने 16 लाख से अधिक लोगों को रोजगार, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से सामाजिक-आर्थिक बदलाव के संकेत लखनऊ  योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में औद्योगिक विकास के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है। योगी सरकार के सुशासन, पारदर्शी नीतियों और दूरदर्शी नेतृत्व का ही असर है कि प्रदेश में अप्रैल 2017 से अब तक 17,841 नए कारखाने पंजीकृत किए गए हैं। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के स्वतंत्र होने के बाद वर्ष 1947 से मार्च 2017 तक लगभग 70 वर्षों में प्रदेश में कुल 14,178 कारखाने ही पंजीकृत हो पाए थे। वर्तमान समय में प्रदेश में कुल पंजीकृत कारखानों की संख्या 32,019 तक पहुंच चुकी है। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से प्रदेश में बना निवेश अनुकूल माहौल प्रमुख सचिव श्रम एवं रोजगार डॉ. एमके शनमुगा सुंदरम ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन प्रदेश को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला राज्य बनाना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से सुधार, निवेश अनुकूल माहौल और पारदर्शी प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान दिया। साथ ही निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम, ऑनलाइन क्लीयरेंस, भूमि बैंक, बेहतर कानून-व्यवस्था और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाएं विकसित कीं। यही वजह है कि देश-विदेश के निवेशकों का भरोसा उत्तर प्रदेश पर बढ़ा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 17,841 कारखाने अप्रैल 2017 के बाद पंजीकृत हुए हैं, जो राज्य में औद्योगिक गतिविधियों की तेज रफ्तार को दर्शाते हैं। सिर्फ सितंबर 2023 से अब तक ही 10,194 कारखानों का पंजीकरण हुआ है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 4,746 नए कारखाने जुड़े हैं। अप्रैल 2017 के बाद पंजीकृत इन कारखानों में वर्तमान में 16,53,179 लोग नौकरी कर रहे हैं। इनमें 15,29,907 पुरुष व 1,23,272 महिलाएं कार्यरत हैं। सबसे अधिक 10,895 कारखाने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पंजीकृत प्रमुख सचिव ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 10,895, मध्य उत्तर प्रदेश में 3,526, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 3,205 और बुंदेलखंड क्षेत्र में 215 कारखाने पंजीकृत किए गए हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि योगी सरकार ने क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करते हुए हर क्षेत्र में उद्योगों को बढ़ावा दिया, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हुए। इन कारखानों से प्रदेश में औद्योगिक विकास के साथ-साथ रोजगार सृजन भी तेजी से हुआ है। खास बात यह है कि कारखानों में कार्यरत महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है, जो प्रदेश में सामाजिक-आर्थिक बदलाव का संकेत है। कानून-व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा योगदान प्रदेश में 14,412 कारखाने ऐसे हैं, जिनमें 100 तक श्रमिक कार्यरत हैं जबकि 3,213 कारखानों में 101 से 1000 श्रमिक कार्यरत हैं। इसी तरह 118 बड़े कारखाने ऐसे हैं जिनमें 1000 से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं। यह संख्या दर्शाती है कि योगी सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई)के साथ-साथ बड़े उद्योगों को भी समान रूप से प्रोत्साहन दिया है। इससे प्रदेश की औद्योगिक संरचना मजबूत हुई है। बता दें कि औद्योगिक विकास में कानून-व्यवस्था की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। योगी सरकार ने इस क्षेत्र में सख्त कदम उठाते हुए प्रदेश में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ा। इसके साथ ही एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक हब जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने उद्योगों को नई गति दी। इन प्रयासों का परिणाम यह है कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ कृषि प्रधान राज्य नहीं रहा, बल्कि तेजी से औद्योगिक राज्य के रूप में उभर रहा है। नए कारखानों ने न केवल रोजगार दिया, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया है। इससे प्रदेश के लाखों परिवारों की आजीविका सुरक्षित हुई है।

गेहूं और सरसों की फसल पर बेमौसम मार, यूपी सरकार अलर्ट मोड पर, किसानों के खातों में सीधे पहुंचेगा राहत का पैसा

लखनऊ यूपी में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है. मार्च महीने का अंत और अप्रैल की शुरुआत में ही हुई बेमौसम बारिश ने खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसान चिंता में हैं. इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हालात का संज्ञान लेते हुए प्रशासन को अलर्ट मोड पर कर दिया है और सभी जिलों के जिलाधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. बुधवार को प्रदेश के कई जिलों में हुई तेज बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं. जिन खेतों में फसल कटाई के लिए तैयार खड़ी थी, वहां पानी भरने से नुकसान की आशंका जताई जा रही है. खासतौर पर गेहूं, सरसों और दलहन जैसी फसलों पर इसका असर देखा जा रहा है. गांवों से आ रही शुरुआती जानकारी में बताया जा रहा है कि कई जगहों पर फसलें गिर गई हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने का खतरा बढ़ गया है. मुख्यमंत्री ने मांगी जमीनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं. उन्होंने साफ कहा है कि अधिकारी फील्ड में जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें और प्रभावित क्षेत्रों की पूरी रिपोर्ट जल्द से जल्द शासन को भेजें. मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि रिपोर्ट केवल कागजी न हो, बल्कि जमीनी सच्चाई को दर्शाने वाली हो, ताकि राहत कार्य सही तरीके से संचालित किए जा सकें. सरकार ने फसल नुकसान के आकलन के लिए एक संयुक्त सर्वे कराने का फैसला लिया है. इसके तहत राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कंपनियों की टीम मिलकर प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करेगी. मुआवजा देने की तैयारी मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही नुकसान का आंकलन पूरा होगा, मुआवजा वितरण की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भुगतान में किसी भी तरह की देरी न हो और समयबद्ध तरीके से किसानों के खातों में पैसा पहुंचाया जाए. सरकार का कहना है कि किसान हित सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति में किसानों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा. अधिकारियों को संवेदनशील रहने के निर्देश मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को खासतौर पर संवेदनशीलता के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और उन्हें अनावश्यक दौड़भाग न करनी पड़े. जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे खुद फील्ड में जाकर स्थिति का जायजा लें और यह सुनिश्चित करें कि राहत कार्य तेजी से और पारदर्शिता के साथ पूरे हों. सीएम ने प्रमुख सचिव (कृषि) और राहत आयुक्त को भी निर्देश दिया गया है कि वे फील्ड अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें. सभी सूचनाओं का सही समय पर संकलन कर शासन तक पहुंचाया जाए, ताकि निर्णय लेने में देरी न हो. उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि प्रशासनिक मशीनरी एक टीम की तरह काम करे और किसानों को जल्द से जल्द राहत मिले.

गोरखपुर मंडल में 19 हजार परिवारों को मिली पक्की छत, मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत खर्च हुए 219 करोड़

गोरखपुर पीएम आवास योजना ग्रामीण को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने के साथ ही उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन से मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण भी संचालित है। ऐसे जरूरतमंद जिन्हें पीएम आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका, उन्हें सीएम आवास योजना में कवर किया जा रहा है।  जिन्हें तकनीकी वजहों से PM आवास नहीं मिला, वे इस योजना से पूरा कर रहे घर का सपना  उत्तर प्रदेश में रहने वाले ऐसे जरूरतमंद लोग जिन्हें किसी तकनीकी कारण से पीएम आवास नहीं मिल पाया उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण, उत्तर प्रदेश के गांवों में रहने वाले निर्धन और वंचित परिवारों के लिए अपने पक्के घर का सपना साकार कर रही है। सीएम योगी के मार्गदर्शन में यह योजना उन वर्गों के लिए बड़ा सहारा बनी है जो किन्हीं तकनीकी कारणों से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का लाभ नहीं ले पाए। गोरखपुर मंडल के ही चार जिलों में अब तक 19 हजार से अधिक जरूरतमंद इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। इनमें से 17 हजार से अधिक खुद के पक्के मकान में रहने लगे हैं। इन आवासों के लिए सरकार करीब 219 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के हर निराश्रित और पात्र परिवार को पक्की छत उपलब्ध कराने के लिए कई प्रयास किए हैं। इस क्रम प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण को जमीनी स्तर पर ठीक से लागू कराया गया है। गोरखपुर मंडल में ही 199984 जरूरतमंदों को पीएम आवास योजना ग्रामीण के तहत पक्के आवास स्वीकृत हुए और इनमें से 199103 के आवास बनकर पूरे भी हो गए। पीएम आवास योजना ग्रामीण को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने के साथ ही प्रदेश में सीएम योगी के विजन से मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण भी संचालित हो रही है। ऐसे जरूरतमंद जिन्हें पीएम आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका, उन्हें सीएम आवास योजना में कवर किया जा रहा है। इसमें दैवीय आपदा से प्रभावित परिवारों और वनटांगिया, मुसहर जैसे विशेष पिछड़े समुदायों को प्राथमिकता पर रखा गया। योजना के तहत मिलती हैं ये सुविधाएं मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत लाभार्थियों को न केवल आवास निर्माण के लिए धनराशि दी जा रही है, बल्कि उन्हें एक गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए आवश्यक अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं। आवास निर्माण के लिए प्रति लाभार्थी 1.20 लाख रुपये देने के अलावा उन्हें स्वच्छ भारत मिशन के तहत व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये दिए जाते हैं। साथ ही सौभाग्य योजना के तहत मुफ्त बिजली कनेक्शन और उज्ज्वला योजना के तहत निशुल्क रसोई गैस कनेक्शन भी दिया जाता है। क्या बोले अधिकारी गोरखपुर के मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने इस योजना के बारे में बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में हर जरूरतमंद को पीएम आवास योजना (PM Awas Yojna) और सीएम आवास योजना (CM Awas Yojna) के तहत पक्का मकान उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

मच्छरदानी, बिछावन और गैस की लाइन: यूपी के बस्ती में रसोई गैस की भारी किल्लत, महिलाओं और बुजुर्गों की फजीहत

बस्ती उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में गैस की भारी किल्लत ने लोगों को सड़कों पर सोने को मजबूर कर दिया है. सिलेंडर पाने की जद्दोजहद में ग्राहक रात 10 बजे से ही गैस एजेंसी के बाहर मच्छरदानी लगाकर अपना नंबर सुरक्षित कर रहे हैं. प्रशासन की अनदेखी और सप्लाई में कमी के कारण यह अजीबोगरीब वीडियो वायरल हो रहा है. बस्ती जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत स्टेशन रोड पर स्थित रत्नाकर गैस एजेंसी के बाहर ग्राहकों ने गैस किल्लत के कारण डेरा डाल दिया है. लोग सिलेंडर प्राप्त करने हेतु रात 10 बजे से ही कतारों में लगकर अपना नंबर सुरक्षित कर रहे हैं. भीषण किल्लत की वजह से एक युवक ने एजेंसी के सामने ही मच्छरदानी लगा ली ताकि वह रात भर सो सके और सुबह सबसे पहले गैस पा सके. नियमित आपूर्ति न होने के कारण स्थानीय निवासियों, बुजुर्गों और महिलाओं को पूरी रात फुटपाथ पर पहरा देना पड़ रहा है. प्रशासन से त्वरित समाधान की मांग के बीच लोग रात भर जागने को मजबूर हैं. मच्छरदानी लगाकर रात भर पहरा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो ने गैस वितरण व्यवस्था की पोल खोल दी है. रत्नाकर गैस एजेंसी के सामने लोग बिछावन और मच्छरदानी लेकर पहुंच रहे हैं. गैस सिलेंडर न मिलने के डर से उपभोक्ता घर जाने के बजाय फुटपाथ को ही अपना बसेरा बना चुके हैं. भीषण मच्छरों के प्रकोप से बचने के लिए लोग मच्छरदानी लगाकर वहीं सोने को मजबूर हैं ताकि सुबह एजेंसी खुलते ही उन्हें खाली हाथ न लौटना पड़े. बुजुर्ग और महिलाएं भी बेहाल इस किल्लत की सबसे ज्यादा मार बुजुर्गों और महिलाओं पर पड़ रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि गैस की सप्लाई नियमित न होने के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है. घंटों लाइन में लगने के बाद भी गैस न मिलने की हताशा अब नाराजगी में बदल रही है. नाराज ग्राहकों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि आमजन को इस अमानवीय स्थिति और असुरक्षित रातों से निजात मिल सके.

नए साइबर खतरों से निपटने में अत्यंत कारगर साबित होगा फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट : डॉ. अजय सिंह

लखनऊ बदलते साइबर अपराध के तौर-तरीकों पर लगाम कसने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजधानी लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में 500 से ज्यादा साइबर फॉरेंसिक वारियर तैयार किए जा रहे हैं, जो भविष्य में सीमापार हैकिंग, एआई जनित फिशिंग, डीपफेक और उभरते डिजिटल खतरों से मुकाबला करने में अहम भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर साइबर सुरक्षा को लेकर विशेष कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आयोजित मीट माई मेन्टोर कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा और क्वांटम तकनीक के विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में साइबर अपराध का स्वरूप और अधिक जटिल होगा, लेकिन यूपी की यह पहल इसे रोकने में निर्णायक साबित होगी। अब वॉइस क्लोनिंग, डीपफेक की समस्या से निपटना होगा आसान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, भारत सरकार के सदस्य डॉ. अजय सिंह ने संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान विश्वस्तरीय बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और नए साइबर खतरों से निपटने में अत्यंत कारगर साबित होगा। उन्होंने कहा कि आज साइबर खतरे केवल ईमेल या एसएमएस तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अब वॉइस क्लोनिंग, डीपफेक वीडियो और फर्जी वीडियो कॉल के जरिए भी बड़े पैमाने पर अपराध किए जा रहे हैं। यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस के जरिए इन खतरों से निपटना आसान हो जाएगा। फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण डॉ. अजय सिंह ने चेताया कि अब ऐसे मालवेयर सामने आ रहे हैं जो खुद सीख सकते हैं और अपने आप विकसित होकर सुरक्षा तंत्र को भी चकमा दे सकते हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग की सीमाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि डेटा पर हमला कई संगठनों को प्रभावित करता है। ऐसे में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाली हैं क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाली हैं और यही समय है जब युवाओं को इसके लिए तैयार किया जाए। उन्होंने छात्रों को कानूनी, फॉरेंसिक और तकनीकी ज्ञान को एक साथ जोड़कर आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान एक वन-स्टॉप सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे अत्याधुनिक विषयों का भी समाधान मिलेगा। आज की तैयारी ही भविष्य के नेतृत्व को तय करेगी। वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार डॉ. गोस्वामी ने यह भी कहा कि जटिल विषयों को समझने का तरीका ही उन्हें सरल बनाता है और यही संस्थान का उद्देश्य है। हम अपने छात्र-छात्राओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रहे हैं।  इस अवसर पर उप निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव, चिरंजीव मुखर्जी, अतुल यादव, पीआरओ संतोष तिवारी, फेकल्टी डॉ. सपना शर्मा, डॉ. श्रुतिदास गुप्ता, डॉ. प्रीती, डॉ. कमलेश दुबे, डॉ. नेहा, डॉ. पोरवी सिंह, डॉ. स्नेहा, डॉ. स्नेहिल सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

योगी सरकार के विजन ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ को साकार कर गांव में स्थापित किया वाशिंग पाउडर उद्योग

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही योजनाएं आज युवाओं के सपनों को पंख देने का काम कर रही हैं। सरकार का लक्ष्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार देने वाला बनाना है। योगी सरकार के इसी विजन को साकार करते हुए लखीमपुर खीरी के ग्राम पहाड़ापुर के रहने वाले अनिकेत वर्मा सरकारी योजना के लाभ से सफल युवा उद्यमी बने हैं। अनिकेत वर्मा के उद्यमी बनने के सफर में सबसे बड़ी भूमिका ‘मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना’ ने निभाई। इस योजना के तहत उन्हें दिसंबर 2025 में जिला उद्योग एवं उद्यमिता विकास केंद्र के माध्यम से 25 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस आर्थिक सहायता ने उनके सपनों को नई उड़ान दी और उन्होंने अपने छोटे स्तर के काम को एक संगठित उद्योग में बदल दिया। उन्होंने अपनी यूनिट में 6 ऑटोमेटिक मशीनें स्थापित की। आज उनकी यूनिट हर महीने ऑर्डर के अनुसार वाशिंग पाउडर का उत्पादन कर रही है। उत्पादों को आधा किलो, 1 किलो और 3 किलो की पैकिंग में तैयार किया जाता है, जिससे बाजार की अलग-अलग जरूरतों को पूरा किया जा सके। वे कानपुर से कच्चा माल मंगवाते हैं, उनका वाशिंग पाउडर स्थानीय बाजार में अपनी पहचान बना रहा है। अनिकेत वर्मा केवल खुद आत्मनिर्भर नहीं बने, बल्कि उन्होंने 7 लोगों को रोजगार भी दिया है। प्रोडक्ट की लागत और अन्य खर्चों के बाद अनिकेत की शुद्ध मासिक आमदनी 50 से 60 हजार रुपये है।  ‘मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना’ का उद्देश्य प्रदेश के युवाओ को उद्यमशीलता के लिए प्रोत्साहित करने और अन्य के लिए रोजगार का अवसर प्रदान करना है। इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकार युवाओं को वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने व्यवसाय का सफलतापूर्वक संचालन कर सकें। योजना के तहत विनिर्माण क्षेत्र में नए उद्योग लगाने के लिए अधिकतम ₹25 लाख तथा सेवा क्षेत्र आधारित व्यवसाय शुरू करने के लिए अधिकतम ₹10 लाख तक का ऋण दिया जाता है। यह ऋण रियायती ब्याज दरों पर उपलब्ध कराया जाता है जो बाज़ार दर से कम है। इस धनराशि का उपयोग प्लांट एवं मशीनरी, कच्चे माल के क्रय, कार्यशील पूंजी और अन्य सम्बंधित खर्चों के लिए किया जा सकता है। इच्छुक व्यक्ति जिला उद्योग एवं उद्यमिता विकास केंद्र के माध्यम से पूर्ण जानकारी लेकर आवेदन कर सकता है।

मुख्यमंत्री ने अफसरों को दिया निर्देशः किसानों से संवाद बनाएं, फसलों के नुकसान का आकलन कराएं और उन्हें मुआवजा दिलाएं

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के कई जनपदों में बुधवार को हुई बारिश से परेशान किसानों का हाल जाना। उन्होंने असमय बारिश के कारण किसानों को होने वाली परेशानी के बारे में जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी। अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम की मार झेलने वाले किसानों को परेशानी न हो, किसान हित सरकार की प्राथमिकता है। किसानों की बर्बाद हुई फसल के नुकसान का आकलन कर संपूर्ण जानकारी एकत्र करें और उन्हें जल्द से जल्द राहत दिलाएं। सीएम योगी ने निर्देश दिया कि राजस्व, कृषि विभाग व बीमा कंपनी फसल नुकसान का तत्काल संयुक्त सर्वे कराकर शासन को अवगत कराएं, जिससे किसानों को तत्काल मुआवजा दिलाया जा सके।  मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर आपदा-विपदा में प्रदेशवासियों के साथ निरंतर खड़ी है। विगत दिनों हुई बारिश से भी किसानों की फसल प्रभावित हुई थी, इससे नुकसान होने वाली फसल का मुआवजा दिलाया जा रहा है। बुधवार को होने वाली बारिश के कारण भी फसल को जो नुकसान हुआ है, उसका भी जल्द से जल्द आकलन करा लिया जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों के हित में संवेदनशीलता के साथ कार्य करें और सुनिश्चित करें कि किसानों को कोई परेशानी न हो। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि फील्ड में रहकर वस्तुस्थिति का जायजा लें और प्रभावित क्षेत्रों में फसलों को हुए नुकसान का वास्तविक आकलन कराएं, जिससे किसानों को समय पर उचित सहायता मिल सके। मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव (कृषि) व राहत आयुक्त से कहा कि फील्ड में कार्यरत अधिकारियों से सीधा संपर्क करें और समन्वय बनाएं। सभी सूचनाएं समय पर एकत्र कर शासन को उपलब्ध कराई जाए, जिससे राहत कार्य भी समय से हो सके।  मुख्यमंत्री ने कहा कि फसलों को हुई क्षति का आकलन प्राप्त होते ही मुआवजा वितरण की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए। भुगतान व्यवस्था समयबद्ध ढंग से हो, ताकि मौसम की मार से प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द राहत मिल सके।

मुख्यमंत्री का निर्देश फार्मर रजिस्ट्री के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर लगेंगे विशेष शिविर

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री को व्यापक स्तर पर लागू करने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी किसानों का पंजीकरण प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि यथाशीघ्र प्रत्येक ग्राम पंचायत में विशेष शिविर आयोजित कर किसानों को फार्मर रजिस्ट्री से जोड़ा जाए, ताकि कोई भी पात्र किसान इस व्यवस्था से वंचित न रहे।  मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार फार्मर रजिस्ट्री को कृषि क्षेत्र में एकीकृत लाभ वितरण प्रणाली के रूप में विकसित कर रही है। इसके अंतर्गत कृषि विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों की सभी लाभार्थीपरक योजनाओं को फार्मर रजिस्ट्री से जोड़ा जा रहा है, जिससे किसान को विभिन्न योजनाओं का लाभ एक ही पहचान के आधार पर सरल और व्यवस्थित तरीके से प्राप्त हो सके। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना सहित अन्य योजनाओं में यदि लाभार्थियों के नाम या अभिलेखों में कोई त्रुटि अथवा असंगति है तो उसे आधार से लिंक कर प्राथमिकता के आधार पर संशोधित किया जाए। साथ ही प्रत्येक पात्र किसान का किसान पहचान पत्र बनवाना सुनिश्चित किया जाए, जिससे योजनाओं के लाभ वितरण में किसी प्रकार की बाधा न आए और पात्रता का सत्यापन सुगम हो सके।  मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि विभाग अपनी सभी योजनाओं को फार्मर रजिस्ट्री से जोड़ने के लिए आवश्यक तकनीकी व्यवस्था निर्धारित समयसीमा में तैयार करे और विभागीय पोर्टल को 01 मई 2026 तक पूर्ण रूप से क्रियाशील बनाया जाए। इसके माध्यम से लाभार्थियों के चयन और लाभ वितरण की प्रक्रिया को डिजिटल एवं एकीकृत रूप में संचालित किया जा सकेगा।  उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता एवं लघु सिंचाई जैसे सहयोगी विभाग भी अपनी योजनाओं में किसान पहचान पत्र के उपयोग के लिए कृषि विभाग के साथ समन्वय स्थापित करें और 31 मई 2026 तक आवश्यक तैयारियां पूरी कर लें, ताकि सभी विभागों में एक समान व्यवस्था लागू हो सके।  मुख्यमंत्री ने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों को योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी और लाभ प्राप्त करने में अनावश्यक जटिलताएं समाप्त होंगी। इससे संसाधनों का लक्षित उपयोग संभव होगा तथा विशेष परिस्थितियों में आवश्यक कृषि इनपुट का वितरण अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।  उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के लागू होने से योजनाओं का लाभ पारदर्शी ढंग से किसानों तक पहुंचेगा और एक ही लाभार्थी को बार-बार लाभ मिलने की स्थिति की समीक्षा भी सहज रूप से की जा सकेगी। मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि इस कार्य को गंभीरता से लेते हुए समयसीमा के भीतर पूर्ण करें और इसकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करें।

राजधानी लखनऊ में हरित ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा, 110 वार्डों में शत-प्रतिशत कूड़ा संग्रहण व सस्टेनेबल सिटी मॉडल की दिशा में बड़ा कदम

लखनऊ राजधानी लखनऊ में कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बुधवार 1 अप्रैल को अहम पहल होने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रातः 11 बजे अपने सरकारी आवास 5 कालिदास मार्ग से 250 इलेक्ट्रिक एवं सीएनजी वाहनों का लोकार्पण (फ्लैग ऑफ) करेंगे। यह पहल हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 110 वार्डों में शत-प्रतिशत कूड़ा प्रबंधन का लक्ष्य नगर निगम लखनऊ द्वारा शहर के सभी 110 वार्डों में घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों एवं कार्यालयों से निकलने वाले कूड़े का शत-प्रतिशत एकत्रीकरण, परिवहन और प्रोसेसिंग सुनिश्चित करने के लिए व्यापक व्यवस्था लागू की गई है। इस कार्य का संचालन चयनित संस्थाओं के माध्यम से किया जा रहा है, जिसकी प्रतिदिन निगरानी भी सुनिश्चित की जाती है। नगर निगम के कमांड एवं कंट्रोल रूम से कूड़ा उठान कार्य का सीधा प्रसारण देखा जा सकता है। साथ ही नागरिकों की सुविधा के लिए कंट्रोल रूम नंबर 1533 एवं टोल फ्री नंबर 18001234999 और 1800206172 पर शिकायत दर्ज कराकर त्वरित समाधान भी सुनिश्चित किया जा रहा है। हरित ऊर्जा से प्रदूषण नियंत्रण पर फोकस नगर निगम द्वारा कूड़ा एकत्रीकरण में डीजल चालित वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर इलेक्ट्रिक एवं सीएनजी वाहनों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे न केवल वायु प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि शहर में स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण भी सुनिश्चित होगा। यह नीति सतत विकास के सिद्धांतों के अनुरूप है और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाने की दिशा में प्रभावी कदम मानी जा रही है। ई-वाहनों का बढ़ता बेड़ा और आधुनिक सफाई व्यवस्था वर्तमान में लखनऊ में 981 इलेक्ट्रिक एवं 169 सीएनजी वाहनों के माध्यम से कूड़ा एकत्रीकरण कार्य किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, शहर की प्रमुख सड़कों की सफाई 50 से अधिक मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग मशीनों (ई-वाहनों) के माध्यम से प्रतिदिन कराई जा रही है। नए 250 वाहनों के जुड़ने से कूड़ा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक गति और मजबूती मिलने की उम्मीद है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से मिलेगा संचालन को बल ई-वाहनों के सुचारु संचालन के लिए शहर में 13 स्थानों पर 520 चार्जिंग प्वाइंट स्थापित किए गए हैं। इससे न केवल वाहनों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में और अधिक ई-वाहनों के संचालन के लिए भी आधार तैयार होगा। रोजगार सृजन और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ को बढ़ावा इस पूरी व्यवस्था से प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से लगभग 10,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही सर्कुलर इकोनॉमी को ध्यान में रखते हुए ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा को भी मजबूती मिल रही है, जिससे कूड़े को संसाधन के रूप में उपयोग करने की दिशा में कार्य हो रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद नगर निगम द्वारा उठाए जा रहे इन कदमों से न केवल शहर को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि आगामी स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन की संभावना भी बढ़ेगी। यह पहल लखनऊ को एक आदर्श ‘सस्टेनेबल अर्बन मॉडल’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

विकसित यूपी@2047 के लिए मिले 98 लाख से अधिक सुझाव, अब शीघ्र जारी होगी सेक्टरवार विस्तृत कार्ययोजना

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को ‘विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ की कार्ययोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि यह दस्तावेज केवल एक विजन नहीं, बल्कि प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और संरचनात्मक रूपांतरण का स्पष्ट रोडमैप है। उन्होंने निर्देश दिए कि इसे व्यापक और सहभागी बनाते हुए प्रदेशभर से प्राप्त 98 लाख से अधिक जन-सुझावों, विशेषज्ञों, उद्योग संगठनों तथा अन्य हितधारकों के विचारों का विश्लेषण करते हुए समाहित किया जाए और उसी आधार पर सेक्टरवार अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक कार्ययोजना शीघ्र जारी की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विजन डॉक्यूमेंट व्यवहारिक, परिणामोन्मुख और समयबद्ध होना चाहिए, जो प्रदेश को 2047 तक विकसित राज्य बनाने का ठोस आधार प्रस्तुत करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे केवल सैद्धांतिक दस्तावेज न रखकर सेक्टरवार मिशनों, 2030, 2036 और 2047 के स्पष्ट लक्ष्यों तथा क्रियान्वयन योग्य कार्ययोजनाओं में विभाजित किया जाए। साथ ही सभी विभाग त्रैमासिक एवं वार्षिक लक्ष्यों के अनुरूप विभागवार और अंतर-क्षेत्रीय कार्ययोजना तैयार करें, जिसमें जिम्मेदारियों, अपेक्षित परिणामों और समन्वय की व्यवस्था स्पष्ट रूप से निर्धारित हो। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि राज्य स्तर पर तैयार विजन को जिला, शहर और पंचायत स्तर तक प्रभावी रूप से लागू किया जाए। इसके लिए ‘जिला विजन 2047’ तैयार कर स्थानीय आवश्यकताओं और संसाधनों के अनुरूप योजनाएं बनाई जाएं। साथ ही प्रमुख परियोजनाओं की सुव्यवस्थित पाइपलाइन तैयार कर उनकी सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि विकास कार्यों का प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो।  मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश का पूरा ढांचा तीन प्रमुख स्तंभों 'अर्थशक्ति, जनशक्ति और जीवनशक्ति' पर आधारित है, जिन्हें मजबूत करने के लिए कृषि, उद्योग, सेवाएं, बुनियादी ढांचा, सामाजिक क्षेत्र और सुशासन को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाना होगा। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि विजन डॉक्यूमेंट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए रीयल-टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से नियमित समीक्षा व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि प्रगति की सतत निगरानी हो और आवश्यक सुधार समय पर सुनिश्चित किए जा सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दस्तावेज स्थिर नहीं, बल्कि एक डायनामिक और एक्शन-ओरिएंटेड मार्गदर्शिका होनी चाहिए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश ने 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा है, जबकि 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर और 2036 तक 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का मध्यवर्ती लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगभग 16 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर आवश्यक आंकी गई है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था लगभग 356 बिलियन डॉलर के स्तर पर है और भारत की जीडीपी में इसका योगदान करीब 9 प्रतिशत से अधिक है।  मुख्यमंत्री ने सेक्टर आधारित रणनीति पर विशेष जोर देते हुए कहा कि कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र में संतुलित और उच्च उत्पादकता आधारित विकास सुनिश्चित किया जाए। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों को लेकर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि स्मार्ट कृषि, वैल्यू चेन आधारित मॉडल, निर्यातोन्मुख उत्पादन और डिजिटल प्लेटफॉर्म को बढ़ावा दिया जाए। पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बताते हुए मुख्यमंत्री ने इनके वैज्ञानिक विकास, प्रोसेसिंग और बाजार संपर्क को सुदृढ़ करने पर जोर दिया।  औद्योगिक विकास के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को टेक्नोलॉजी आधारित, निर्यातोन्मुख और वैश्विक प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित किया जाना है। बैठक में बताया गया कि राज्य के मैन्युफैक्चरिंग GVA में MSME का योगदान लगभग 46 प्रतिशत है तथा निवेश आकर्षित करने के लिए 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू हस्ताक्षरित किए गए हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में परियोजनाएं क्रियान्वयन की अवस्था में हैं।  सेवा क्षेत्र और डिजिटल अर्थव्यवस्था को विकास का प्रमुख इंजन बताते हुए मुख्यमंत्री ने आईटी, आईटीईएस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पर्यटन और नवाचार आधारित क्षेत्रों में तेजी से विस्तार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को ज्ञान और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप इकोसिस्टम और कौशल विकास को प्राथमिकता दी जाए।  बैठक में यह भी बताया गया कि लगभग 24 करोड़ की जनसंख्या के साथ उत्तर प्रदेश देश का एक विशाल उपभोक्ता बाजार है और कार्यशील आयु वर्ग की बड़ी हिस्सेदारी इसे विकास के लिए विशेष अवसर प्रदान करती है। अनुमान है कि 2047 तक शहरीकरण दर 60 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।  मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सुशासन, कानून व्यवस्था, डिजिटल सेवाओं और मजबूत आधारभूत ढांचे को इस पूरी कार्ययोजना की रीढ़ बनाया जाए। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक कॉरिडोर के माध्यम से कनेक्टिविटी को और सुदृढ़ किया जाए, जिससे निवेश और रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ें। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि ‘विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ एक समग्र परिवर्तन का अभियान है, जिसमें आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक न्याय, समावेशिता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार को समान महत्व दिया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यह विजन प्रदेश की विकास यात्रा का ऐसा प्रभावी दस्तावेज बने, जो उत्तर प्रदेश को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में अग्रणी स्थान दिलाए।