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पंत और राहुल ने किया निराश, इकाना स्टेडियम में क्रिकेट के रोमांच और नई जर्सी का दिखा क्रेज

लखनऊ आईपीएल के नए सत्र के लिए लखनऊ सुपरजायंट्स (एलएसजी) ने अपने लोगो में बड़ा बदलाव करते हुए हाथी को उसमें शामिल किया। खिलाड़ियों की ड्रेस भी बदल दी गई। नए लोगो और ड्रेस के साथ अपने घरेलू मैदान इकाना स्टेडियम में एलएसजी का पहला मुकाबला बुधवार को दिल्ली कैपिटल्स के साथ हुआ जिसके लोगो में बाघ है। हालांकि, इस मुकाबले में हाथी को बाघ की दहाड़ के आगे ठिठकना पड़ा। जीत-हार की फिक्र छोड़ खेल की दीवानगी में डूबे रहे खेल प्रेमी मैदान पर प्रतिद्वंद्विता की लकीरें खिंची थीं, लेकिन इकाना स्टेडियम की फिजा कुछ और ही बयां कर रही थी। बुधवार को लखनऊ सुपरजायंट्स (एलएसजी) और दिल्ली कैपिटल्स (डीसी) के बीच मुकाबला सिर्फ रनों और विकेटों का नहीं, बल्कि क्रिकेट प्रेम के उफान का बन गया। इकाना स्टेडियम के भीतर और बाहर का नजारा गवाह था कि क्रिकेट के प्रति दीवानगी जीत-हार के गणित से कहीं ऊपर है। गालों पर सजी तहजीब की तस्वीर लखनऊ की तमीज और तहजीब खेल के मैदान पर भी बखूबी निखरी। स्टेडियम के बाहर एक प्रशंसक ने अपने चेहरे पर एलएसजी और डीसी, दोनों के नाम लिखवा रखे थे। वहीं, तिरंगे के रंगों में रंगा एक नन्हा प्रशंसक भी आकर्षण का केंद्र बना रहा। इस छाेटे नवाब ने अपने एक गाल पर एलएसजी और दूसरे पर डीसी लिखवाकर मेहमान टीम का स्वागत किया। आईपीएल में लखनऊ सुपरजायंट्स व दिल्ली कैपिटल्स के बीच मैच। लखनऊ के कप्तान ऋषभ पंत और तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के प्रति लखनऊ का प्रेम देखते ही बना। दर्शक दीर्घा में सफेद कपड़ों में खड़े एक प्रशंसक ने सबका ध्यान खींचा। उसके हाथ में पंत के लिए एक भावुक पोस्टर था। पोस्टर पर लिखा था कि एक झलक देख लें तुझको, चले जाएंगे, यहां कौन उम्र बिताने आया है। पंत का विकेट जल्दी गिरने के बावजूद फैंस का उत्साह कम नहीं हुआ। हर चौके-छक्के पर दर्शक दीर्घा में थिरकते कदम और गूंजता संगीत यह बता रहा था कि दर्शक यहां सिर्फ नतीजा देखने नहीं, बल्कि क्रिकेट का जश्न मनाने आए हैं। एलएसजी के रंग में डूबा इकाना हुआ लाल लखनऊ सुपरजायंट्स (एलएसजी) और दिल्ली कैपिटल्स के बीच इस सत्र के पहले आईपीएल मुकाबले में ऋषभ पंत एंड कंपनी का जादू सिर चढ़कर बोला। पूरा स्टेडियम एलएसजी की नई लाल रंग की जर्सी से सराबोर दिखा। मानो लखनऊ की सड़कों से लेकर स्टैंड्स तक लाल रंग का सैलाब उमड़ पड़ा हो। हजारों प्रशंसकों ने नई जर्सी पहनकर सुपरजायंट्स के खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। इसमें पंत के नाम वाली जर्सी सर्वाधिक बिकीं। टॉस के बाद जैसे ही यह साफ हुआ कि एलएसजी पहले बल्लेबाजी करेगी, पूरा स्टेडियम ‘एलएसजी एलएसजी’ के शोर से गूंज उठा। चरम पर पहुंचा एलएसजी प्रशंसकों का रोमांच आईपीएल में लखनऊ सुपरजायंट्स व दिल्ली कैपिटल्स के बीच मैच। शाम ढलते-ढलते स्टेडियम खचाखच भर चुका था। मुकाबले का रोमांच तब चरम पर पहुंच गया जब दूसरी पारी की पहली ही गेंद पर मोहम्मद शमी ने केएल राहुल का विकेट चटकाया। शमी-शमी के नारों ने माहौल में अलग ही ऊर्जा भर दी। दिल्ली के कप्तान अक्षर पटेल का भी विकेट पहली गेंद पर ही प्रिंस यादव ने जैसे चटकाया पूरा स्टेडियम शोर से गूंज उठा। चीयर लीडर्स का डांस, नगाड़ों की धमक और हिंदी गीतों की धुन पर झूमते दर्शकों ने इस मुकाबले को यादगार बना दिया। पंत ने किया निराश, राहुल भी नहीं चले एलएसजी के कप्तान ऋभष पंत टीम के बदले हुए संयोजन की योजना के तहत सलामी बल्लेबाज के रूप में उतरे, लेकिन किस्मत उनके साथ नहीं रही। मार्श की स्ट्रेट ड्राइव पर गेंद मुकेश कुमार के हाथ से छूकर स्टंप से लग गई और पंत सात रन के योग पर दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से रन आउट हुए। एलएसजी के लिए पहले तीन सत्रों में कप्तानी करने वाले केएल राहुल भी दिल्ली कैपिटल्स के लिए खास योगदान नहीं दे सके और पारी की पहली गेंद पर आउट हो गए। छह ओवर पहले निकलने लगे दर्शक इकाना स्टेडियम में खेले गए लो-स्कोरिंग मुकाबले में दूसरी पारी में जब दिल्ली को आखिरी छह ओवर में 36 रन बनाने थे तभी दर्शक स्टेडियम से बाहर निकलने लगे। दरअसल, उस समय मेहमान टीम ने 14 ओवर में चार विकेट पर 106 रन बना लिए थे और लखनऊ सुपरजायंट्स की टीम हार की ओर बढ़ने लगी। ऐसे में एलएसजी का उत्साह बढ़ाने आए दर्शक धीरे-धीरे करके स्टेडियम से बाहर निकलने लगे।   आधी रात तक चली मेट्रो और 35 फीडर बसें आईपीएल के तहत बुधवार को इकाना स्टेडियम में हुए मैच में पहुंच खेल प्रेमियों की सहायता के लिए लखनऊ मेट्रो कां संचालन रात 12:30 बजे तक किया गया। ट्रांसपोर्ट नगर एवं इंदिरा नगर मेट्रो स्टेशनों से इकाना के करीब तक फीडर बसें भी चलाई गईं। इससे लोगों का स्टेडियम तक पहुंचना और लौटना आसान हुआ। तीन रूटों पर कुल 35 फीडर बसों का संचालन हुआ। यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रांसपोर्ट नगर और इंदिरा नगर मेट्रो स्टेशन से दोपहर तीन बजे से प्रत्येक 15 मिनट के अंतराल पर बसें उपलब्ध कराई गईं। मैच समाप्त होने के बाद स्टेडियम से मेट्रो स्टेशनों तक बस सेवा चालू रही। जिन रूटों पर बसों का संचालन किया गया उनमें अवध बस स्टेशन से स्कूटर इंडिया वाया ट्रांसपोर्ट नगर, उतरेटिया, अहिमामऊ व राजाजीपुरम बस स्टेशन और दुबग्गा से पुरसेनी वाया अवध चाैराहा आलमबाग, बंगला बाजार रूट पर बसें चलाई गईं।   यातायात के दबाव को किया नियंत्रित इकाना स्टेडियम में मैच खत्म होने पर शहीद पथ पर यातायात का दबाव बढ़ गया। इसके बावजूद पुलिस और यातायात कर्मियों ने हालात को नियंत्रित किए रखा। किसी को भी सड़क पर अपने वाहन पार्क नहीं करने दिया गया। इससे सड़क पर दबाव बढ़ने के बाद भी लंबा जाम जैसे हालात नहीं बने।    

योगी सरकार ने कौशल विकास मिशन की शुरुआत की, पहले दिन 99,075 प्रशिक्षण लक्ष्य तय किए गए

योगी सरकार में कौशल विकास मिशन का बड़ा कदम, पहले दिन 99,075 प्रशिक्षण लक्ष्य आवंटित पहली बार ग्रेडिंग नीति को सार्वजनिक कर प्रशिक्षण केंद्रों का मूल्यांकन किया गया प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना की समय सीमा 90 दिन से घटाकर 30 दिन कर दी गई डिजिटल इम्पैनलमेंट और ‘स्मार्ट टॉप-अप’ से बढ़ेगी गुणवत्ता व जवाबदेही एआई आधारित प्रशिक्षण और समावेशी प्राथमिकता से युवाओं को मिलेगा बेहतर रोजगार अवसर लखनऊ  योगी सरकार प्रदेश में कौशल विकास को नई गति देते हुए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने वित्तीय वर्ष के पहले ही दिन 99,075 प्रशिक्षण लक्ष्यों का आवंटन 957 ट्रेनिंग पार्टनर्स को जारी कर दिया। इस वर्ष पहली बार ग्रेडिंग नीति को सार्वजनिक कर प्रशिक्षण केंद्रों का मूल्यांकन किया गया। इसी आधार पर प्राइवेट, इंडस्ट्रियल और सरकारी पार्टनर्स को लक्ष्य आवंटित किए गए, जिससे जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित हुई है। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के निर्देशन में मिशन निदेशक पुलकित खरे की पहल पर इस प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाया गया है। प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना की समय सीमा 90 दिन से घटाकर 30 दिन कर दी गई है। साथ ही ‘स्मार्ट टॉप-अप’ व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले संस्थान बैच समाप्ति से पहले अतिरिक्त लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे। पूरी प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया गया है। अब इम्पैनलमेंट, लक्ष्य आवंटन और भुगतान पूरी तरह ऑनलाइन होंगे। 23 फरवरी 2026 के नए नियमों के तहत संस्थाओं को उनकी ग्रेडिंग और प्रशिक्षण गुणवत्ता के आधार पर भुगतान किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि होगी। मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि एआई सहित आधुनिक कौशल प्रशिक्षण, हर वर्ग को प्राथमिकता प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ‘एआई फॉर ऑल’, सॉफ्ट स्किल्स, लाइव क्लास और इंडस्ट्रियल विजिट को अनिवार्य किया गया है। साथ ही 33% महिलाओं, 5% दिव्यांगजनों और वंचित वर्ग के युवाओं को प्राथमिकता देना सुनिश्चित किया गया है, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा। मिशन अब ‘क्वांटिटी’ से ‘क्वालिटी’ की ओर बढ़ रहा है। डिजिटल पारदर्शिता और समयबद्ध रणनीति से युवाओं को विश्वस्तरीय कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।  विगत वर्ष जहां ट्रेनिंग पार्टनर्स को पूरे वर्ष के लिए 1.10 लाख प्रशिक्षणार्थियों का एकमुश्त लक्ष्य आवंटित किया गया था, वहीं इस वर्ष रणनीति में सुधार करते क्वार्टरली यानी कि तीन महीने में लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। प्रथम तीन माह के लिए 99,075 प्रशिक्षणार्थियों का लक्ष्य जारी किया गया है। इसके अंतर्गत अच्छा प्रदर्शन करने वाले ट्रेनिंग पार्टनर्स को उनकी क्षमता के अनुसार 'टॉप-अप' (अतिरिक्त लक्ष्य) की विशेष सुविधा भी प्रदान की जाएगी।

काम नहीं तो वेतन नहीं, आईएएस छोड़ वापस पीसीएस सेवा में लौटना चाहते हैं रिंकू सिंह राही

लखनऊ आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही का त्यागपत्र इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. उन्होंने काम न मिलने और जनता के हित में सक्रिय भूमिका न निभा पाने को इसकी वजह बताया है. आजतक से बातचीत में रिंकू सिंह ने अपने भविष्य को लेकर साफ किया कि उनका उद्देश्य केवल जनता की सेवा करना है और फिलहाल राजनीति में जाने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि वे ऐसे पद पर रहना चाहते हैं जहां काम करने का अवसर मिले और उसका सीधा असर आम लोगों तक पहुंचे. रिंकू सिंह राही ने अपनी सबसे बड़ी आपत्ति रखी. उनका कहना है कि प्रशासनिक सेवा का मूल उद्देश्य जनता के लिए काम करना होता है, लेकिन जब काम करने का अवसर ही न मिले तो उस पद पर बने रहने का कोई अर्थ नहीं रह जाता. उन्होंने कहा, हमें जो सैलरी मिलती है वह जनता के पैसे से आती है. जब जनता के लिए काम ही नहीं कर पा रहे हैं तो उस सैलरी को लेना सही नहीं है. इसी वजह से मैंने ‘नो वर्क, नो पे’ की बात उठाई थी. उनके मुताबिक, यह सिर्फ व्यक्तिगत निर्णय नहीं बल्कि एक सिद्धांत का सवाल है, जिस पर वे लगातार कायम रहे हैं. तकनीकी त्यागपत्र क्यों दिया रिंकू सिंह ने स्पष्ट किया कि उनका त्यागपत्र सामान्य इस्तीफा नहीं है, बल्कि तकनीकी त्यागपत्र है. इसका मतलब यह है कि वे पूरी तरह सेवा छोड़ने के बजाय अपनी पूर्ववर्ती सेवा में वापस जाना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि प्रशासनिक नियमों के तहत लीन पीरियड में अधिकारी तीन साल तक अपनी पुरानी सेवा में लौट सकते हैं. इसी प्रावधान का उपयोग करते हुए उन्होंने यह कदम उठाया है. उन्होंने कहा, मैं सेवा से बाहर नहीं जा रहा हूं. मैं सिर्फ उस जगह जाना चाहता हूं जहां मुझे काम करने का अवसर मिले. जहां काम मिलेगा, वहीं रहूंगा भविष्य की योजना पर बात करते हुए रिंकू सिंह ने कहा कि उनका फोकस सिर्फ काम पर है, न कि पद या सुविधा पर. उन्होंने कहा, मुझे कहीं भी पोस्ट कर दें, लेकिन काम दिया जाए. बिना काम के बैठना मेरे लिए संभव नहीं है. अगर आईएएस में रहते हुए काम नहीं मिल रहा, तो पीसीएस में जाकर जमीनी स्तर पर काम करना बेहतर रहेगा. उनका कहना है कि प्रशासनिक सेवा में सबसे महत्वपूर्ण चीज सक्रिय भूमिका निभाना है और वही वे करना चाहते हैं. राजनीति में जाने से साफ इनकार रिंकू सिंह राही ने उन अटकलों को भी खारिज किया जो उनके फैसले को राजनीति से जोड़कर देख रही थीं. उन्होंने कहा, मैं राजनीति में नहीं जा रहा हूं. मेरा ऐसा कोई प्लान नहीं है. मैं सिर्फ जनता की सेवा करना चाहता हूं और वह भी प्रशासनिक व्यवस्था के भीतर रहकर. उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक मंच पर जाना नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी निभाना है. रिंकू सिंह ने कहा कि उनकी प्राथमिकता हमेशा से जमीनी स्तर पर काम करने की रही है. उन्होंने कहा, मैदान में रहकर काम करने से ही असली समस्याओं की जानकारी मिलती है. वहीं पर योजनाओं का सही असर भी दिखता है. मैं ऐसी जगह काम करना चाहता हूं जहां सीधे लोगों से जुड़ सकूं. उनके मुताबिक, जमीनी स्तर पर काम करने से ही प्रशासनिक योजनाओं की वास्तविक स्थिति समझ में आती है. पारदर्शिता पर रहेगा फोकस रिंकू सिंह ने बातचीत में यह भी कहा कि वे आगे भी पारदर्शिता और जवाबदेही पर काम करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि लोगों को यह जानने का अधिकार है कि सरकार की योजनाओं का लाभ किसे मिल रहा है और किस मद में कितना पैसा खर्च हो रहा है. पारदर्शिता से ही व्यवस्था में सुधार आता है. उन्होंने बताया कि पहले भी वे इस दिशा में काम कर चुके हैं और आगे भी इसी तरह की पहल जारी रखना चाहते हैं. लीन पीरियड बढ़ाने के बाद लिया फैसला रिंकू सिंह ने बताया कि उन्होंने अक्टूबर 2025 में लीन पीरियड बढ़ाने के लिए पत्र लिखा था. इसका उद्देश्य यह था कि जरूरत पड़ने पर वे अपनी पुरानी सेवा में लौट सकें. अब उसी प्रक्रिया के तहत उन्होंने तकनीकी त्यागपत्र दिया है. उन्होंने कहा, यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है. मैंने पहले ही इस दिशा में प्रक्रिया शुरू कर दी थी. रिंकू सिंह ने कहा कि बिना किसी जिम्मेदारी के लंबे समय तक किसी पद पर बने रहना उनके लिए संभव नहीं है. उन्होंने कहा, अगर मुझे कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाती है, तो वहां रहकर क्या करूंगा. मैं ऐसी जगह रहना चाहता हूं जहां काम करने का मौका मिले और उसका सीधा असर जनता पर दिखे. उनके मुताबिक, निष्क्रिय रहना उनके काम करने के तरीके के खिलाफ है. जनता से सीधे जुड़ाव की बात रिंकू सिंह ने यह भी कहा कि वे आगे ऐसी भूमिका में काम करना चाहते हैं जहां जनता से सीधा जुड़ाव बना रहे. उन्होंने कहा, जब आप सीधे लोगों के बीच रहते हैं, तो उनकी समस्याएं समझ में आती हैं और समाधान भी जल्दी निकलता है. मैं उसी तरह की भूमिका चाहता हूं. उनका मानना है कि प्रशासनिक सेवा का सबसे अहम हिस्सा लोगों से संवाद है. वेतन और जवाबदेही पर स्पष्ट रुख बातचीत में उन्होंने एक बार फिर वेतन और जवाबदेही के मुद्दे को दोहराया. उन्होंने कहा, जनता के पैसे से वेतन मिलता है, इसलिए उसकी जवाबदेही भी जनता के प्रति ही होती है. अगर काम नहीं हो रहा, तो उस पैसे को लेना उचित नहीं है. उनका कहना है कि इसी सोच के कारण उन्होंने ‘नो वर्क, नो पे’ की बात कही और अब यह कदम उठाया है. सरकार के फैसले का इंतजार फिलहाल रिंकू सिंह राही का तकनीकी त्यागपत्र सरकार के पास विचाराधीन है. इस पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है. अगर उनका आवेदन स्वीकार होता है तो वे फिर से पीसीएस सेवा में लौट सकते हैं. वहीं, अगर आवेदन पर कोई अन्य निर्णय होता है तो आगे की स्थिति उसी के अनुसार तय होगी. उन्होंने कहा, अब फैसला सरकार को करना है. मैंने अपनी बात रख दी है.

कृष्ण जन्मभूमि विवाद, राम मंदिर के बाद अब मथुरा की बारी, स्वामी गोविंद देव गिरी का बड़ा बयान

मथुरा मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद को लेकर स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने हिंदू पक्ष की जीत की उम्मीद जताई है. उनका कहना है कि मथुरा में भी अयोध्या की तरह भव्य मंदिर का निर्माण होगा. इस दौरान उन्होंने देश की एकता में RSS की भूमिका की सराहना की और देश को बांटने की साजिशों पर चिंता जताई. अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद अब मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद का मामला भी चर्चा में आ गया है.स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने उम्मीद जताई कि अदालत में चल रहे मामले में हिंदू पक्ष की जीत होगी. उन्होंने दावा किया कि मथुरा में भी अयोध्या की तरह ही भव्य मंदिर का निर्माण होगा. स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष और श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के उपाध्यक्ष हैं. इंदौर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह राम मंदिर का सपना साकार हुआ है, उसी तरह कृष्ण मंदिर भी बनेगा. महाराज इंदौर की सामाजिक संस्था 'सार्थक' और आयोजित 'समर्पण के प्रतीक' थीम पर आधारित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे. इस दौरान उन्होंने देश के हालात पर भी अपनी राय दी. मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद पर अदालती कार्यवाही पर टिप्पणी करते हुए स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा, 'राम मंदिर बन गया है. कृष्ण मंदिर भी बनेगा. इसका निर्माण वैसा ही होगा जैसा पूरा देश चाहता है. मामला अदालत में चल रहा है और इसमें कुछ भी बहुत मुश्किल नहीं है.' देश को बांटने की साजिश का जिक्र स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि पिछले 150-200 सालों से भारत को खान-पान, जाति, भाषा, क्षेत्र और संप्रदायों के आधार पर बांटने की साजिश रची जा रही है. उनके मुताबिक, देश की जनता आज भी इन साजिशों का नतीजा झेल रही है. RSS की भूमिका की तारीफ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के योगदान पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि देश की एकता को बनाए रखने में संघ की बड़ी भूमिका रही है. महाराज ने कहा, 'मैं कभी-कभी सोचता हूं कि अगर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ न होता तो इस देश का क्या होता. इस देश का भूगोल बदल गया होता और देश टुकड़ों में बंट गया होता.' स्वामी जी ने विश्वास दिलाया कि भगवान जल्द ही लोगों की मनोकामनाएं पूरी करेंगेय उन्होंने अयोध्या का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां प्रभु राम के जन्मस्थान पर मंदिर का निर्माण एक मिसाल है और मथुरा में भी वैसा ही होगा.

औद्योगिक क्षेत्रों में पारदर्शिता और निगरानी के लिए ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली होगी लागू

औद्योगिक क्षेत्रों में पारदर्शिता एवं प्रभावी निगरानी के लिए ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली होगी लागू यूपीसीडा की 50वीं बोर्ड बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मिली मंजूरी, औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति ड्रोन मॉनिटरिंग, ई-ऑक्शन, भूमि बैंक विस्तार और तेज इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर अहम फैसले तृतीय पक्ष निरीक्षण और ड्रोन सिस्टम से गुणवत्ता व पारदर्शिता होगी सुनिश्चित 75% आवंटन के बाद 25% भूमि ई-ऑक्शन से, निवेशकों को मिलेगा अवसर सहारनपुर-बदायूं समेत कई जिलों में कनेक्टिविटी के साथ औद्योगिक विस्तार को स्वीकृति लखनऊ उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की 50वीं बोर्ड बैठक लोक भवन, लखनऊ में अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के अनुरूप आयोजित इस बैठक में औद्योगिक विकास, आधारभूत संरचना सुदृढ़ीकरण एवं निवेश प्रोत्साहन से जुड़े कुल 34 प्रस्तावों पर विस्तार से विचार-विमर्श कर प्रमुख प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में विकास एवं अनुरक्षण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु तृतीय पक्ष निरीक्षण (TPIA) एजेंसी के चयन को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में पारदर्शिता एवं प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया, जिसके माध्यम से सिविल, विद्युत एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कार्यों की नियमित निगरानी की जाएगी। कम्पिल कताई मिल, मऊ आइमा, बहादुरगंज, सलेमपुर एवं बाराबंकी के औद्योगिक क्षेत्रों के मानचित्रों को स्वीकृति प्रदान की गई। वहीं बलिया, हाथरस, फतेहपुर, बाराबंकी एवं चित्रकूट के औद्योगिक क्षेत्रों के प्रस्तावों पर विचार करते हुए संशोधन के निर्देश दिए गए तथा संशोधित तलपट (लेआउट) मानचित्र को स्वीकृति दी गई। भूमि बैंक को सुदृढ़ करने हेतु नीतिगत संशोधन के निर्देश दिए गए। साथ ही भूमि आवंटन की प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाने के लिए संशोधित योजना तैयार करते हुए प्राप्त आवेदनों पर नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा गया। एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत यह तय किया गया कि आवंटन योग्य भूमि का 75 प्रतिशत आवंटन पूर्ण होने के पश्चात शेष 25 प्रतिशत भूमि का आवंटन ई-ऑक्शन के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह भी निर्देशित किया गया कि प्रचलित परियोजनाओं में विकास कार्यों को जारी रखते हुए समानांतर रूप से आवंटन प्रक्रिया संचालित की जाए, ताकि निवेश में तेजी लाई जा सके। सहारनपुर एवं बदायूं में प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के संदर्भ में निर्देश दिए गए कि अधिग्रहण से पूर्व सड़क संपर्क (रोड कनेक्टिविटी) एवं लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को दुरुस्त किया जाए, जिससे औद्योगिक इकाइयों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके। बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि अवस्थापना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) विकास हेतु शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए वित्तपोषण का प्रभावी उपयोग करते हुए एक वर्ष के भीतर बुनियादी सुविधाओं का तीव्र विकास सुनिश्चित किया जाए। साथ ही निवेशकों की समस्याओं के समाधान के लिए विशेष कैंप आयोजित कर एक माह के भीतर उनका निस्तारण किया जाए। अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने कहा कि यूपीसीडा का लक्ष्य केवल औद्योगिक भूखंडों का आवंटन करना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में एक विश्वस्तरीय औद्योगिक ईकोसिस्टम का निर्माण करना है, जहां तकनीक, पारदर्शिता और दक्षता के आधार पर उद्यमियों को बेहतर वातावरण मिल सके। उन्होंने कहा कि ड्रोन आधारित निगरानी, डिजिटल सेवाएं और पारदर्शी आवंटन प्रक्रिया जैसे निर्णय प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में तेजी से अग्रसर करेंगे। अंत में अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि सहारनपुर और बदायूं जैसे क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण के दौरान कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि औद्योगिक विकास को दीर्घकालिक मजबूती मिल सके।

कोर्ट का आदेश, याचिका खारिज होने के बाद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हटा अवैध निर्माण

लखनऊ लखनऊ के बक्शी का तालाब (बीकेटी) क्षेत्र में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. यहां ग्राम सभा की जमीन पर बनी एक मस्जिद को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया. यह कार्रवाई देर रात भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में की गई. दरअसल, यह पूरा मामला बीकेटी तहसील के ग्राम अस्ती स्थित गाटा संख्या 648 की जमीन से जुड़ा है. आरोप था कि इस सरकारी जमीन पर अवैध रूप से मस्जिद का निर्माण किया गया था. इसको लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था और मामला कोर्ट तक पहुंचा. मस्जिद कमेटी की ओर से कोर्ट में याचिका दाखिल कर निर्माण को वैध ठहराने की कोशिश की गई, लेकिन अदालत में जमीन पर अपना वैध अधिकार साबित नहीं हो पाया. याचिका खारिज होने के बाद प्रशासन को अवैध कब्जा हटाने की अनुमति मिल गई. कोर्ट के आदेश पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बुलडोजर कार्रवाई का फैसला लिया. देर रात जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई, मस्जिद कमेटी के लोग और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में मौके पर इकट्ठा हो गए. संभावित विरोध और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात कर रखा था. कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों द्वारा नारेबाजी किए जाने और हल्की झड़प की कोशिश की खबरें भी सामने आईं, लेकिन पुलिस ने स्थिति को संभाला. मौके पर एसडीएम, नायब तहसीलदार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे और पूरी कार्रवाई की निगरानी करते रहे. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस मस्जिद में बाहरी लोगों का आना-जाना भी बढ़ गया था, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन रही थी. प्रशासन ने इसे भी गंभीरता से लिया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई को जरूरी बताया. प्रशासन का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई कोर्ट के आदेश के तहत की गई है और अवैध कब्जों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इस कार्रवाई के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई.

आसमान छूती कच्चे माल की कीमत,लखनऊ में दम तोड़ते उद्योग और रोजगार का संकट

लखनऊ ईरान-इस्त्राइल युद्ध के कारण मार्च से विभिन्न उद्योगों को एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। इसमें प्लास्टिक उद्योग सर्वाधिक प्रभावित हुआ है, जिसे 500 करोड़ रुपये से अधिक की हानि का अनुमान है। साबुन, गत्ता, बेकरी और रसायन जैसे अन्य उद्योग भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। लखनऊ में करीब चार हजार प्लास्टिक उद्योगों का उत्पादन घटकर 20 फीसदी रह गया है। कच्चे माल की कीमतें दोगुनी होने से यह स्थिति बनी है। प्लास्टिक दाना जो नब्बे-सौ रुपये प्रति किलो मिलता था, वह दो सौ रुपये के पार पहुंच गया है। निजी और सरकारी कंपनियों में भी कच्चे माल की उपलब्धता नहीं है। बाजार 80 फीसदी तक घटने से उद्यमियों को रोजी-रोटी का संकट सता रहा है। यूपी आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश प्रभारी अविनाश त्रिपाठी का कहना है कि मिठाई, रेस्टोरेंट, ढाबे और होटल कारोबार को एक महीने में दो सौ करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। लखनऊ में मिठाई की 2 बिक्री आधी रह गई है। गैस की किल्लत के कारण नाश्ता काउंटर भी नहीं चल पा रहे हैं। सरोजनीनगर के प्लास्टिक उद्यमी अशोक चावला का कहना है कि हर दिन कच्चे माल की कीमत बढ़ रही है। होली के बाद से कई श्रमिकों को बुलाया भी नहीं गया है। यह स्थिति कब तक रहेगी, पता नहीं। बैंकों को कर्ज की किश्तें चुकाने में भी मुश्किल महसूस कर रही है। आईआईए के चेयरमैन विकास खन्ना का कहना है कि पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ी कीमतें, गैस सिलिंडर की दिक्कतें, डीजल की कमी आदि से पूरे महीने उद्योग बेपटरी रहा। पैकेंजिंग कारोबार घटकर आधा रह गया। अभी भी स्थिति सुधरी नहीं है। लखनऊ प्लास्टिक ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश गोस्वामी का कहना है कि उद्यमी अपनी पूंजी का 25 फीसदी हिस्सा खर्च कर चुके हैं। लागत बढ़ने से व्यापारी माल लेने को तैयार नहीं हैं, जिससे श्रमिकों के रोजगार पर भी संकट गहराया है। सरोजनीनगर के उद्यमी रजत गुलाटी का कहना है कि साबुन उद्योग में पाम ऑयल, रसायन और पैकेजिंग सामग्री महंगी हुई है। इससे तैयार माल की लागत बढ़ी है और कारोबार पंद्रह-बीस फीसदी ही बचा है।  

मुख्यमंत्री का बड़ा बयान: जरूरतमंदों को आवास और बीमारों के इलाज की होगी व्यवस्था

जरूरतमंद को आवास और बीमार के इलाज की होगी व्यवस्था: मुख्यमंत्री जनता दर्शन: गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की करीब 100 लोगों से मुलाकात लोगों की समस्याएं सुनकर दिया भरोसा, हर समस्या का कराएंगे सन्तुष्टिपरक निस्तारण गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान गुरुवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने जरूरतमंद लोगों को आवास दिलाने और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के इलाज में भरपूर आर्थिक सहायता देने का आत्मीय संबल दिया। सीएम ने कहा कि सरकार हर जरूरतमंद और पात्र व्यक्ति को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तथा हर समस्या के प्रभावी निस्तारण के लिए संकल्पित है।  गुरुवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 100 लोगों से मुलाकात की। महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक पहुंचकर मुख्यमंत्री ने एक-एक कर उनकी समस्याएं सुनीं। उनके प्रार्थना पत्र लिए और निस्तारण के लिए संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को संदर्भित कर निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, निष्पक्ष और सन्तुष्टिपरक होना चाहिए। उन्होंने पुलिस से जुड़े मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। जनता दर्शन में एक महिला ने आवास की समस्या बताई। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि उन्हें सरकार की आवास योजना के तहत आवास दिलाया जाएगा। गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक मदद मांगने आए लोगों को मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्च स्तरीय इलाज का इस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए। जनता दर्शन में कुछ महिलाओं के साथ आए बच्चों को चॉकलेट देकर सीएम योगी ने उन्हें खूब पढ़ने के लिए भी प्रेरित किया।

मारकंडेय यादव को सीएम योगी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

मारकंडेय यादव को सीएम योगी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि गोरक्षपीठ के अनन्य भक्त थे मारकंडेय यादव, श्रद्धांजलि देने उनके गांव पहुंचे मुख्यमंत्री वरिष्ठ समाजसेवी के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किए मुख्यमंत्री ने, परिजनों को बंधाया ढांढस गोरखपुर  गोरक्षपीठ के अनन्य भक्त, वरिष्ठ समाजसेवी, पिपराइच के लुहसी गांव निवासी मारकंडेय यादव के निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने गुरुवार सुबह लुहसी स्थित उनके पैतृक आवास पहुंचकर पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किए और अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। मारकंडेय यादव का बुधवार सुबह गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था। उनकी गोरक्षपीठ के प्रति अगाध श्रद्धा थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार सुबह करीब सवा दस बजे लुहसी स्थित मारकंडेय यादव के आवास पर पहुंचे। उन्होंने स्मृतिशेष के पार्थिव शरीर व चित्र पर पुष्प अर्पित किए और भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की चिर शांति के लिए महायोगी गुरु गोरखनाथ से प्रार्थना की। सीएम योगी ने स्वर्गीय मारकंडेय यादव के परिजनों, पत्नी गुड्डी यादव, पुत्रद्वय संजीव यादव व विशाल यादव, भाई हरेंद्र यादव, पुत्री वंदना यादव, दामाद हिमांशु यादव आदि से आत्मीयता से बातचीत कर उन्हें ढांढस बंधाया। इस अवसर पर गोरखपुर के महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक महेंद्रपाल सिंह, विपिन सिंह, उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के सभापति संतराज यादव, भाजपा के जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, पिपराइच नगर पंचायत के चेयरमैन संजय मद्धेशिया, वरिष्ठ नेता राधेश्याम सिंह, आनंद शाही, रणविजय सिंह मुन्ना आदि भी मौजूद रहे।

पूर्व विधायक शीतल पांडेय के पुत्र को मुख्यमंत्री योगी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

पूर्व विधायक शीतल पांडेय के पुत्र को मुख्यमंत्री योगी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि मनु पांडेय के चित्र पर पुष्प चढ़ाये सीएम ने, परिजनों को बंधाया ढांढस  गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  सहजनवा के पूर्व विधायक शीतल पांडेय के रामगढ़ताल/तारामंडल क्षेत्र स्थित आवास पर जाकर उनके पुत्र मानवेंद्र पांडेय ‘मनु’ को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मानवेंद्र का मंगलवार को आकस्मिक निधन हो गया था।  बुधवार शाम मुख्यमंत्री लखनऊ से गोरखपुर आए। एयरपोर्ट से वह सीधे पूर्व विधायक शीतल पांडेय के आवास पर पहुंचे। उन्होंने पूर्व विधायक के पुत्र मानवेंद्र पांडेय के चित्र पर पुष्पांजलि और भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने दिवंगत की आत्मा की शांति के लिए महायोगी गुरु गोरखनाथ से प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने पूर्व विधायक शीतल पांडेय और अन्य परिजनों से आत्मीयता से बातचीत कर उन्हें ढांढस बंधाया। इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक विपिन सिंह, महानगर संयोजक राजेश गुप्ता, भाजपा नेता अश्विनी त्रिपाठी, डॉ. विभ्राट चंद कौशिक, पुष्पदंत जैन आदि भी मौजूद रहे।  गुरुवार सुबह पिपराइच के लुहसी जाएंगे सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार सुबह पिपराइच क्षेत्र के लुहसी गांव जाएंगे। वह यहां के निवासी और गोरक्षपीठ के अनन्य भक्त मारकंडेय यादव के आवास पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। मारकंडेय यादव का बुधवार को निधन हो गया।