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आजमगढ़ बनेगा खास आम की खेती का केंद्र, दुनिया के सबसे महंगे आम का मदर प्लांट तैयार

आजमगढ़  यूपी के पूर्वांचल की धरती पर अब दुनिया का सबसे महंगा आम उगेगा। आजमगढ़ में जापान के प्रसिद्ध मियाजाकी आम का मदर प्लांट तैयार हो रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र लैदौरा इस आम के पेड़ से कलम तैयार करने में जुटा है। ऐसे में दो लाख रुपये किलो वाला मियाजाकी आम जिले की पहचान बनेगा। वहीं सोनभद्र में भी एक व्यक्ति ने अपने बाग में मियाजाकी आम का पौधा लगाया है। जापान का प्रसिद्ध मियाजाकी आम दुनिया का सबसे महंगा आम है। स्वाद और खुशबू में लाजवाब होने के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जापानी मियाजाकी आम की कीमत दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम है। स्थानीय बाजार में भी इसकी कीमत 70 हजार रुपये से दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक रहती है। कृषि विज्ञान केंद्र लैदौरा में मियाजाकी आम के पौधे तैयार किए गए हैं। इनका प्रयोग मदर प्लांट के रूप में किया जा रहा है। उद्यान वैज्ञानिक मदर प्लांट के पौधों से कलम तैयार कर मियाजाकी आम के पौधे लोगों को मुहैया कराएंगे। कलम से तैयार पौधे तीन से पांच साल में फल देने लगेंगे जबकि बीज वाले पौधे लगाने पर फल आने में करीब 10 साल का समय लग जाता है। लाल-जामुनी और हरे रंग का मिश्रण है खासियत मियाजाकी की पैदावार सोनभद्र के छपका गांव में भी हो रही है। गहरा लाल-जामुनी और हरे रंग का मिश्रण इस आम की खासियत होती है। वरिष्ठ अधिवक्ता उमेशधर दुबे ने पिछले साल 15 अगस्त को इसका पौधा लगाया था। इसका छिलका चमकदार होता है और स्वाद में बहुत मीठा होता है। कब लगा सकते हैं पौधे लैदौरा के प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. एलसी वर्मा ने बताया कि दुनिया के सबसे महंगे आम जापानी मियाजाकी का पौधा तैयार किया गया है। पुणे की नर्सरी से लाकर इसे लगाया गया है। इसका प्रयोग मदर प्लांट के तौर पर किया जाएगा। कलम से तैयार पौधों को लगाने का सही समय जुलाई से सितंबर तक होता है। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में है नर्सरी अभी तक पश्चिम बंगाल के कोलकाता की एग्रो नर्सरी, ग्रीनरी नर्सरी ठाकुरनगर और महाराष्ट्र के पुणे स्थित नर्सरी ही इस जापानी मियाजाकी आम के पौधे उपलब्ध कराती हैं। जापानी मियाजाकी आम का एक पौधा 1500 से 5000 रुपये तक में मिलता है। मध्य प्रदेश के जबलपुर और ओडिशा में भी इसकी खेती होने लगी है। आजमगढ़ के चार ब्लॉकों रानी की सराय, मिर्जापुर, अहरौला और पवई में प्रमुखता से आम की खेती होती है। इन चार ब्लॉकों के करीब 12 प्रतिशत क्षेत्रफल में आम के बाग मौजूद हैं।

तीन सदस्यीय दल करेगा आरोपों की गहन जांच

लखनऊ  योगी सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। यह दल तीर्थ क्षेत्र में दानपात्रों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की जांच कर शासन को अपनी रिपोर्ट देगा। लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरण एस. तथा विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार को एसआईटी का सदस्य बनाया गया है। गौरतलब है कि अयोध्या स्थित तीर्थ क्षेत्र में दान पात्रों को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को गंभीरता से लेते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष जांच दल गठित किए जाने का अनुरोध किया था। ट्रस्ट के अनुसार, अफवाहों पर रोक लगाने और मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए इसकी गहन जांच आवश्यक है। यह तीर्थ क्षेत्र की छवि और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुंचाने की गहरी साजिश है, जिसका पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्रस्ट के इस अनुरोध को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से तीन वरिष्ठ अधिकारियों के विशेष जांच दल का गठन किया है। यह टीम पूरे प्रकरण की गहन छानबीन कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।

चंद दिनों में ही लगभग 6.73 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा, 30 हजार दर्शकों के बैठने की होगी व्यवस्था

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश खेल अवसंरचना के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। इसी क्रम में गोरखपुर में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम तेजी से आकार ले रहा है। लगभग 392.94 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का करीब 6.73 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। आधुनिक सुविधाओं से लैस यह स्टेडियम न केवल पूर्वांचल बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।  करीब 46 एकड़ क्षेत्र में विकसित होगा, दर्शकों की क्षमता 30 हजार होगी योगी सरकार का यह ड्रीम प्रोजेक्ट गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला साबित होगा। स्टेडियम का 16 मई 2026 को भूमिपूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम हुआ था। इसके बाद से निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। मिट्टी भरने का काम पूरा हो गया है। पाइलिंग का काम चल रहा है। खेल निदेशालय के मुताबिक, वर्तमान में स्टेडियम का भौतिक निर्माण कार्य लगभग 6.73 प्रतिशत पूरा हो चुका है और कार्य निर्धारित समय सीमा के अनुसार आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य 23 दिसंबर 2027 तक इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूर्ण करना है। करीब 46 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाला यह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम 30 हजार दर्शकों की क्षमता वाला होगा। खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए होंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं गोरखपुर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण के लिए वित्तीय संसाधनों की भी मजबूत व्यवस्था की गई है। इस परियोजना हेतु पेट्रोलियम मंत्रालय, भारत सरकार ने अपने सीएसआर फंड से 100 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने पर सहमति दी है। शेष राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जा रही है। परियोजना को गति देने के लिए राज्य सरकार ने प्रथम किस्त के रूप में 63 करोड़ 39 लाख रुपये की धनराशि भी स्वीकृत कर दी है। इस खेल परिसर में खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी। स्टेडियम का निर्माण ग्राउंड प्लस टू फ्लोर मॉडल पर किया जा रहा है।  अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लगेंगी लाइट्स मुख्य मैदान में खिलाड़ियों के लिए सात प्लेइंग पिच और चार प्रैक्टिस पिच बनाई जाएंगी। रात्रिकालीन मुकाबलों के आयोजन को ध्यान में रखते हुए स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप चार हाई मास्ट फ्लड लाइट्स लगाई जाएंगी। इससे दिन-रात दोनों समय मैच आयोजित किए जा सकेंगे। स्टेडियम के निर्माण से क्षेत्र के युवाओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की मेजबानी का अवसर भी प्राप्त होगा। इससे गोरखपुर की पहचान केवल धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में ही नहीं, बल्कि एक प्रमुख खेल केंद्र के रूप में भी स्थापित होगी। क्रिकेट हब के रूप में तैयार हो रहा उत्तर प्रदेश- खेल सचिव खेल सचिव सुहास एल.वाई. ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश में क्रिकेट हब के रूप में डवलप हो रहा है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम वाराणसी का काम पूरा होने की स्टेज पर है। इसी तरह गोरखपुर में निर्माण कार्य तेजी पर है और अयोध्या का स्टेडियम बनकर तैयार है। लखनऊ के इकाना स्टेडियम में आईपीएल मैच हो रहे हैं। खेल निदेशक आरपी सिंह ने कहा कि गोरखपुर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण से पूर्वांचल में खेलों को नई दिशा मिलेगी। गोरखपुर और आसपास के जिलों में क्रिकेट समेत अन्य खेलों की सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय खिलाड़ियों को अब अपनी प्रतिभा निखारने के लिए बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

दलगत राजनीति से ऊपर उठते हुए योगी सरकार ने नियोजित विकास पर दिया ध्यान

आजमगढ़  विकास को समावेशी तभी बनाया जा सकता है, जब शासन-सत्ता दलगत राजनीति को महत्व न देते हुए सभी के विकास के लिए समान भाव से कार्य करे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को आजमगढ़ में लगभग एक हजार करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास कर ‘सबका साथ, सबका विकास’ की अवधारणा में मील का नया पत्थर जोड़ दिया है। कभी माफिया और अराजकता वाले माहौल के लिए बदनाम रहे इस जिले की सोच में आज शिक्षा, संस्कृति और अपनी विरासतों का गौरव बोध है तो इसलिए कि पिछले नौ सालों में उन्होंने जिले में अनवरत विकास के आयाम देखे, कानून व्यवस्था का शासन देखा और अपनी आर्थिक उन्नति की संभावनाएं भी देखीं। सेना और पुलिस में यहां के लोगों की बड़ी संख्या में भर्ती, लुप्त होने के कगार पर खड़े परंपरागत पॉटरी उद्योग को मिली संजीवनी ने यहां के लोगों की जिंदगी बदली है। विश्वविद्यालय, मेडिकल कालेज, एयरपोर्ट, संगीत महाविद्यालय, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे अब आजमगढ़ की पहचान हैं।  एक दशक पहले की बात करें तो आजमगढ़ की पहचान तब एक ऐसे जिले के रूप में थी जहां गुंडों, अपराधियों और माफिया का आतंक था। बेटियां दिन में भी घर से निकलते हुए डरतीं थीं। ब्लैक पॉटरी से जुड़े हस्तशिल्पियों का कोई भविष्य नहीं रह गया था और वे अपने परिवार चलाने के लिए मुंबई व अन्य महानगरों की ओर साधारण नौकरी करने जाने को मजबूर थे। इस जिले का विकास तभी संभव था जब कानून व्यवस्था का राज दिखाई दे। माफिया और अपराधियों के खिलाफ उठाए गए सख्त कदमों से अराजक तत्वों में भय उत्पन्न हुआ तो विकास के रास्ते भी दिखाई देने लगे। योगी सरकार की ओडीओपी योजना यहां के हस्तशिल्पियों के लिए वरदान साबित हुई। यहां के निजामाबाद कस्बे के ब्लैक पॉटरी उद्योग की अब अंतरराष्ट्रीय पहचान है। जिस काली मिट्टी के कलाकारों के लिए जीविका चलाना मुश्किल था, ओडीओपी योजना से उन्हें इतना बड़ा बाजार मिला कि आज डिमांड पूरी नहीं कर पा रहे हैं। सिंगापुर, सऊदी अरब से ब्लैक पॉटरी की डिमांड है और टर्नओवर करोड़ों तक पहुंच गया है। ब्लैक पॉटरी से जुड़े हस्तशिल्पी सोहित कुमार प्रजापति कहते हैं-‘अब हमारा भविष्य सुरक्षित है। हमारे बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल रही है।’ विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत 4,700 कारीगरों को आधुनिक टूलकिट और सामग्री वितरित किया जाना हमारी कला का सम्मान है। यह विडंबना ही है कि पूर्व की सरकारों ने सत्ता में रहते हुए भी इस जिले को उपेक्षित ही रखा लेकिन योगी सरकार का विश्वास राज्य के समावेशी विकास पर है, इसलिए यहां किन-किन चीजों का अभाव है, उन्हें चिह्नित कर परियोजनाएं बढ़ाई गईं। जिले में सत्ताधारी दल का कोई विधायक और सांसद न होने के बावजूद आजमगढ़ को बराबर का महत्व मिला। पूर्वांचल एक्सप्रेस ने कनेक्टिविटी ही नहीं निश्चित की, बल्कि निवेश का मार्ग भी प्रशस्त किया। औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में सवा दो सौ से अधिक निवेश एमओयू यहां हजारों लोगों के लिए रोजगार लाएंगे। इतना बड़ा जिला होने के बावजूद यहां कोई विश्वविद्यालय नहीं था। छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाना पड़ता था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से यहां बना महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय 60 एकड़ से ज्यादा की जमीन पर बना है। यहां विश्वस्तरीय क्लास रूम बनाए गए हैं। इसके अलावा जिले को सैनिक स्कूल भी मिला है। हरिहरपुर में संगीत महाविद्यालय की स्थापना कर योगी सरकार ने इस घराने की शास्त्रीय परंपरा को प्रतिष्ठा दी। आजमगढ़ के सपनों को उड़ान अब यहां का एयरपोर्ट दे रहा है।  इसके साथ ही सरकार की कई योजनाएं आजमगढ़ की महिलाओं में आत्मनिर्भरता लेकर आईं हैं। हुस्नआरा खातून जैसी कई मुस्लिम महिलाएं लखपति दीदी बन जिले का मान बढ़ा रहीं हैं। युवा उद्यमियों को भी नई राह मिली है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत युवाओं को मिले ऋण से वे अपने सपनों को मुकाम दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के शुभारंभ की तैयारियां अंतिम चरण में

लखनऊ  प्रदेश के शिक्षकों और शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों के लिए बड़ी सुविधा देने की तैयारी चल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार जल्द ही "मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना" शुरू करने जा रही है। योजना के तहत पात्र शिक्षकों, कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। इसके लिए बनाए गए ऑनलाइन पोर्टल का बीटा वर्जन फिलहाल परीक्षण के दौर से गुजर रहा है।   पात्र कर्मचारियों का डेटा एकत्र किया जा रहा स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज़) की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि योजना के औपचारिक शुभारंभ से पहले विभाग पात्र कर्मचारियों का डेटा एकत्र करने और उसे त्रुटिरहित बनाने में जुटी है। पूर्व में कई मामलों में उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड में नाम, जन्मतिथि, आधार अथवा पारिवारिक विवरण में अंतर होने के कारण कार्ड जारी होने की प्रक्रिया प्रभावित होती थी। ऐसे मामलों में आवेदन लंबित रह जाते थे। इसी समस्या को दूर करने के लिए इस बार डेटा सैनेटाइजेशन पर विशेष जोर दिया गया है।  इलाज का खर्च निर्धारित सीमा तक सीधे योजना के माध्यम से वहन किया जाएगा साचीज़ द्वारा विकसित डेटा कलेक्शन पोर्टल के माध्यम से कर्मचारियों और उनके आश्रितों का विवरण एकरूप प्रारूप में जुटाया जा रहा है। अब तक 3.5 लाख से अधिक पात्र कर्मचारियों का डेटा संकलित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि डेटा शुद्ध होने से कार्ड निर्गत करने की प्रक्रिया तेज होगी और अधिक से अधिक लाभार्थियों को योजना का लाभ मिल सकेगा। योजना के तहत जारी होने वाले मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा कार्ड के माध्यम से लाभार्थी सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में उपचार करा सकेंगे। इलाज का खर्च निर्धारित सीमा तक सीधे योजना के माध्यम से वहन किया जाएगा, जिससे कर्मचारियों को गंभीर बीमारी या आकस्मिक चिकित्सा खर्च के समय आर्थिक दबाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।  इलाज पर होने वाले बड़े खर्च से मिलेगा छुटकारा साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि पोर्टल के परीक्षण के दौरान कार्ड निर्माण, लाभार्थी सत्यापन, अस्पतालों से समन्वय और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं की जांच की जा रही है। परीक्षण सफल होने के बाद योजना का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। योगी सरकार का मानना है कि योजना लागू होने के बाद प्रदेश के लाखों शिक्षक, कर्मचारी और उनके परिवार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं तक आसानी से पहुंच बना सकेंगे तथा इलाज पर होने वाले बड़े खर्च से उन्हें राहत मिलेगी।

सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की बेटी पर अभद्र टिप्पणी करने वालों को सीएम की कड़ी चेतावनी, मामला संज्ञान में आते ही कराई गई एफआईआर

आजमगढ़  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की बेटी पर टिप्पणी करने वालों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि पिछले दिनों कुछ लोगों ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री के खिलाफ गलत टिप्पणी की थी। जैसे ही यह मेरे संज्ञान में आया, मैंने तत्काल पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। बेटी के खिलाफ कोई भी अपमानजनक टिप्प्णी स्वीकार नहीं होनी चाहिए। हर बेटी का सम्मान होना चाहिए। हम उन संस्कार में पले-बढ़े हैं, जहां कहा जाता है कि गांव की बेटी-बहन, सबकी बेटी-बहन। अखिलेश यादव दूसरों को उपदेश देते हैं, वह अपने चेलों-चपाटों को भी उपदेश दें कि भाषा संयमित कर लें। उनके लोग बहन-बेटियों, बुजुर्गों, दिवंगत लोगों व वरिष्ठ नेताओं के प्रति कैसी टिप्पणी करते हैं, उन्हें अपने लोगों को संस्कारित करने की आवश्यकता है। अच्छा होगा कि उन्हें समझाएं, नहीं समझा सकते तो हमारे हवाले कर दें, हम समझा देंगे।  सीएम योगी शनिवार को आजमगढ़ में 955 करोड़ से अधिक लागत की 39 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के बाद जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। मंत्रियों व जनप्रतिनिधियों की मांग पर सीएम ने घोषणा की कि महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में उनकी भव्य अश्वारोही प्रतिमा लगेगी। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को पुरानी जेल को कन्वेंशन सेंटर के रूप में तैयार करने के लिए कार्ययोजना बनाने का भी निर्देश दिया।  बार-बार वोट पाने वाले भी आपके हितैषी नहीं  मुख्यमंत्री ने कहा कि आजमगढ़ का गौरवशाली इतिहास रहा है। ऋषि-मुनियों की साधना से पवित्र यह धरती साहित्यिक साधना का केंद्रबिंदु रही है। देश को स्वतंत्र कराने का जज्बा इस जनपद में रहा है। जिस जनपद में हस्तशिल्प, कारीगर, किसान, ऊर्जावान युवा हैं, वह जनपद पहचान के लिए क्यों मोहताज हुआ। यह प्रश्न/पीड़ा लेकर मैं बार-बार आजमगढ़ आता हूं। जिन्होंने हमें बांटा और विभाजित किया, वे लगातार आपका समर्थन पाते थे, लेकिन वे कभी आपके हितैषी नहीं थे। पहचान को मोहताज था आजमगढ़, आज सबका सम्मान सीएम ने कहा कि 2017 के पहले आजमगढ़ पहचान के लिए मोहताज था। तब यहां विश्वविद्यालय, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, हरिहरपुर में संगीत महाविद्यालय नहीं था। एयरपोर्ट भी ठीक से काम नहीं कर पा रहा था। आजमगढ़ की साड़ी और मुबारकपुर की ब्लैक पॉटरी को मंच नहीं मिल पा रहा था। अभी प्रदर्शनी में सबने अपने नई कहानी सुनाई। ब्लैक पॉटरी और साड़ी से जुड़े कारीगरों ने कहा कि जबसे यूपी में डबल इंजन की भाजपा सरकार आई,  तबसे हमारा कारोबार कई गुना बढ़ा है। हम भी पैसा कमा रहे हैं, परिवार और हमसे जुड़े लोग भी सम्मान का जीवनयापन कर रहे हैं। 2014 के पहले भ्रष्टाचार था भारत की पहचान  सीएम ने कहा कि नया भारत दुनिया को लोहा मनवा रहा है, जबकि 2014 के पहले भारत की पहचान भ्रष्टाचार के नाम पर होती थी। दुनिया में सम्मान नहीं था। लोग देश की सुरक्षा में सेंध लगाते थे, सरकार मौन रहती थी और दुश्मन आंख दिखाता था। नक्सलवाद था, गरीब की सुनवाई नहीं थी लेकिन आज पीएम मोदी के नेतृत्व में हमारी पीढ़ी नए भारत का दर्शन कर रही है। महाराजा सुहेलदेव ने आक्रांताओं को नाकों चने चबवाए सीएम ने कहा कि राष्ट्रनायक महाराजा सुहेलदेव ने विदेशी आक्रांताओं को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया था। भयभीत आक्रांता भारत की धरती पर नहीं आते थे,  लेकिन जब हम जाति, क्षेत्र, भाषा व परिवारवाद के नाम पर बंटने लगे तो मोहम्मद गोरी का हमला हुआ। महाराजा पृथ्वीराज चौहान ने उस कायर आक्रांता को 17 बार परास्त किया, वह हर बार माफी मांगता था। एक बार चूक हुई तो उसने धोखे से पृथ्वीराज चौहान को बंधक बना दिया, फिर उनके साथ जो व्यवहार किया, वह सबके सामने है। विश्वविद्यालय में महाराज सुहेलदेव की लगेगी अश्वारोही प्रतिमा  सीएम ने चेताया कि हम वह गलती बार-बार करते थे, जिसका परिमार्जन महाराज सुहेलदेव ने 1000 वर्ष पहले किया था, लेकिन बाद की पीढ़ी उनसे प्रेरणा नहीं ले पाई। बहराइच में आक्रांता सालार मसूद गाजी मियां के नाम पर आयोजन होता था, लेकिन हमने कहा कि किसी विदेशी आक्रांता को सम्मान नहीं मिलना चाहिए। आयोजन महाराजा सुहेलदेव के नाम पर होना चाहिए। नया भारत गुलामी के किसी भी प्रतीक को स्वीकार नहीं करेगा। अब बहराइच में महाराजा का भव्य स्मारक बन गया है। जब आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की बात आई तो मैंने कहा कि यह जरूर बनेगा। पीएम मोदी ने कहा कि आजमगढ़ में महाराज सुहेलदेव के नाम पर विश्वविद्यालय बने तो अति उत्तम होगा। मंत्रियों व जनप्रतिनिधियों की मांग पर सीएम ने कहा कि विश्वविद्यालय में महाराज सुहेलदेव की भव्य अश्वारोही प्रतिमा भी लगेगी।  जितनी तेज गति, उतनी तेज प्रगति सीएम योगी ने कहा कि आजमगढ़ में आज एयरपोर्ट, पूर्वांचल एक्सप्रेस है। लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज कहीं भी जाना हो फोरलेन की कनेक्टिविटी है। आज आजमगढ़ से एक घंटे में गोरखपुर, डेढ़ से दो घंटे में वाराणसी और ढाई घंटे में लखनऊ पहुंचते हैं। प्रगति का आधार गति होती है, जितनी तेज गति, उतनी तेज प्रगति। आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी व वाराणसी की साड़ी को एक जनपद-एक उत्पाद के माध्यम से मंच मिला है।  हरिहरपुर का संगीत घराना बढ़ा रहा शास्त्रीय संगीत की परंपरा मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिहरपुर का संगीत घराना शास्त्रीय संगीत की परंपरा को फिर से मंच प्रदान कर रहा है। निरहुआ जैसे कलाकार भोजपुरी की मिठास को दुनिया में पहुंचा रहे हैं। इस धरा पर वीर कुंवर सिंह ने 1857 में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए थे। यह साहित्यकार अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की धरती है।  हर गलत काम के लिए बदनाम किया जाता था आजमगढ़ सीएम ने पूछा कि हर आतंकी घटना में क्यों संजरपुर का नाम आता था। हर गलत काम के लिए आजमगढ़ को क्यों बदनाम किया जाता था, क्योंकि तब सरकार नकारात्मक सोच रखती थी, स्वार्थ के लिए युवाओं का दुरुपयोग करती थी। गरीब के लिए स्वास्थ्य, आवास, शौचालय, राशन की सुविधा नहीं थी। युवाओं की नौकरी को लेकर सौदेबाजी होती थी। बेटी की सुरक्षा, पढ़ाई, शादी के लिए सरकार की कोई स्कीम नहीं थी। निराश्रित महिलाओं, बुजुर्गों व दिव्यांगजनों को महज 300 रुपये पेंशन मिलती थी। वह भी छह महीने में एक बार आती थी और उसमें आधा पैसा कमीशनखोरी में चला जाता था। आज सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर स्नातक की … Read more

विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया आह्वान

वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवा वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों से नवाचार व अनुसंधान को राष्ट्र निर्माण तथा जनकल्याण से जोड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि भारत के पास विज्ञान, कृषि, चिकित्सा, उद्यम, आयुर्वेद और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। शनिवार को विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि कोई भी अनुसंधान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका उद्देश्य आर्थिक उन्नयन, लोककल्याण और भारत को शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित करना होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि विज्ञान भारती का सातवां राष्ट्रीय अधिवेशन ज्ञान की पावन धरा काशी में आयोजित हो रहा है, जिसमें 1300 से अधिक प्रतिनिधि पंजीकरण करा चुके हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय महामना मदन मोहन मालवीय की साधना का परिणाम है और इसकी स्थापना का उद्देश्य काशी को उसकी प्राचीन ज्ञान-विज्ञान की पहचान दिलाना था। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिक विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार का समन्वय भारत को विकसित राष्ट्र बनाने तथा विश्व मंच पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत हजारों वर्षों से ज्ञान, विज्ञान और नवाचार का केंद्र मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक विज्ञान की प्रभावी यात्रा लगभग 400-500 वर्षों की है, जबकि भारत हजारों वर्षों से ज्ञान, विज्ञान और नवाचार का केंद्र रहा है। 2000 वर्ष पूर्व वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44-45 प्रतिशत थी। विदेशी आक्रमणों के कठिन दौर में भी यह 24-25 प्रतिशत बनी रही, लेकिन स्वतंत्रता के समय घटकर 1.5 से 2 प्रतिशत रह गई। भारत का किसान केवल किसान नहीं था, बल्कि वह इन्वेंटर और नवाचारी भी था। प्राकृतिक खेती, पशुपालन और भूमि की उर्वरता बनाए रखने की पारंपरिक व्यवस्थाएं उसकी वैज्ञानिक सोच का प्रमाण थीं। उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि, गोरक्षा और वाणिज्य भारतीय अर्थव्यवस्था की परस्पर जुड़ी हुई व्यवस्थाएं थीं। लेकिन समय के साथ हम रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर अत्यधिक निर्भर हो गए और अपनी मूल परंपराओं से दूर होते चले गए। विदेशी आक्रांताओं, वामपंथियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा को कमतर दिखाया सीएम योगी ने कहा कि भारतीय व्यापारी केवल व्यापार नहीं करता था, बल्कि देश को जोड़ने का कार्य करता था। भारतीय कारीगर भी केवल शिल्पकार नहीं बल्कि उद्यमी था, जिसने भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाया। आज भी आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए वही मॉडल प्रासंगिक है। मुख्यमंत्री ने महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके प्रयोगों ने यह सिद्ध किया था कि पौधों में भी संवेदनशीलता और चेतना होती है। यदि एक पौधा सकारात्मक और नकारात्मक व्यवहार का प्रभाव समझ सकता है तो समाज पर नकारात्मक सोच के प्रभाव का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। विदेशी आक्रांताओं, वामपंथी विचारधाराओं और भारत-विरोधी प्रवृत्तियों ने लंबे समय तक भारतीय ज्ञान परंपरा और गौरव को कमतर दिखाने का प्रयास किया, जिससे समाज अपनी जड़ों से दूर होता गया। भारतीय जीवन पद्धति का हर पक्ष विज्ञान से जुड़ा हुआ मुख्यमंत्री ने अपने बचपन की स्मृतियां साझा करते हुए कहा कि उत्तराखंड के गांव में उनकी माता छोटी-छोटी क्यारियों में सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित करती थीं। भारतीय जीवन पद्धति का हर पक्ष विज्ञान से जुड़ा हुआ है। रसोई में हल्दी और मसालों के उपयोग से लेकर दैनिक जीवन की अनेक परंपराओं तक वैज्ञानिक दृष्टिकोण स्पष्ट दिखाई देता है। कोविड महामारी का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने 140 करोड़ की आबादी के बावजूद महामारी का प्रभावी मुकाबला किया। यह भारतीयों की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता और पारंपरिक जीवनशैली का परिणाम था। गांवों में मार्च से अक्टूबर तक पशुओं को खेतों में बांधने की परंपरा प्राकृतिक और गो-आधारित खेती का उत्कृष्ट उदाहरण थी। इस व्यवस्था के कमजोर होने के साथ खेती की लागत बढ़ी, भूमि की उर्वरता प्रभावित हुई और कृषि संकट गहराया। एमएसएमई के कारण घटी बेरोजगारी दर मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में परंपरागत उद्यमों को पुनर्जीवित करने का अभियान शुरू किया गया। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना के माध्यम से कारीगरों को तकनीक, डिजाइन, पैकेजिंग और मार्केटिंग से जोड़ा गया। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश का निर्यात 86 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर दो लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वर्तमान में प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं, जिनमें लगभग तीन करोड़ लोग कार्यरत हैं तथा बेरोजगारी दर तीन प्रतिशत से नीचे आ गई है। प्रकृति के प्रत्येक तत्व में उपयोगिता और अनुसंधान की संभावनाएं अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने तक्षशिला विश्वविद्यालय के आयुर्वेदाचार्य जीवक का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि शिक्षा पूर्ण होने के बाद गुरु ने जीवक को ऐसी वनस्पति खोजने का निर्देश दिया जिसमें औषधीय गुण न हों। लंबे समय तक खोज के बाद जीवक ने बताया कि उन्हें ऐसी कोई वनस्पति नहीं मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक दृष्टि का प्रमाण है, जिसमें प्रकृति के प्रत्येक तत्व में उपयोगिता और अनुसंधान की संभावनाएं देखी जाती हैं। विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार के अनगिनत अवसर युवा वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि, चिकित्सा, तकनीक, एमएसएमई, उद्यम और विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार के अनगिनत अवसर मौजूद हैं। उन्होंने विज्ञान भारती को सुझाव दिया कि प्रत्येक अधिवेशन के साथ नवाचार प्रदर्शनी आयोजित की जाए, अधिवेशन से पहले नवाचार प्रतियोगिताएं कराई जाएं और उत्कृष्ट शोधकर्ताओं एवं नवाचारकर्ताओं को मंच पर सम्मानित किया जाए। साथ ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालयों तथा अन्य सरकारी विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर शोधकर्ताओं को अपने नवाचारों का प्रस्तुतीकरण करने का अवसर उपलब्ध कराया जाए। इस अवसर पर विज्ञान भारती के अखिल भारतीय पालक अधिकारी सुनील आंबेडकर, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ शेखर सी माण्डे, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अजीत चतुर्वेदी, आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रोफेसर अमित पात्रा व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

निपुण भारत मिशन को नई धार देगी योगी सरकार, जुलाई में प्रदेशभर में होंगी ‘निपुण संकल्प कार्यशालाएं’

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार निपुण भारत मिशन को और अधिक प्रभावी तथा परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत करने के साथ-साथ विद्यालयों में सीखने के परिणामों में सुधार लाने के उद्देश्य से जुलाई में प्रदेश के सभी जनपदों में ‘निपुण संकल्प कार्यशालाओं’ का आयोजन किया जाएगा।  प्रदेश के 33 केंद्रों पर 6 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक आयोजित होने वाली इन कार्यशालाओं में विभिन्न जनपदों के शैक्षणिक अधिकारी और विशेषज्ञ प्रतिभाग करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शिक्षा क्षेत्र में चल रहे सुधारों की यह पहल निपुण भारत मिशन को जमीनी स्तर पर और मजबूत बनाने के साथ-साथ प्रदेश के लाखों बच्चों को बेहतर अधिगम अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इन कार्यशालाओं के माध्यम से शैक्षणिक सत्र 2026-27 की रणनीति, निपुण विद्यालय लक्ष्य, विद्यालय गुणवत्ता सुधार, निपुण 2.0, बालवाटिका संचालन तथा डेटा आधारित अनुश्रवण की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। शिक्षा सुधार का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देता है जब योजनाएं और नीतियां प्रभावी रूप से कक्षा-कक्ष तक पहुंचें। इसलिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों, डायट प्राचार्यों, एआरपी, एसआरजी, डायट मेंटरों तथा जिला समन्वयकों को एक साझा मंच पर लाकर शैक्षणिक गुणवत्ता संवर्धन की रणनीति तैयार की जाएगी। कार्यशालाओं में शैक्षणिक सत्र 2026-27 की अकादमिक रणनीति, निर्धारित शैक्षणिक कैलेंडर, विद्यालय स्तर पर संचालित गतिविधियों तथा निपुण विद्यालय लक्ष्यों पर विशेष मंथन होगा।  कार्यशालाओं में परख (PARAKH) राष्ट्रीय सर्वेक्षण से प्राप्त निष्कर्षों की समीक्षा करते हुए सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने की रणनीति तैयार की जाएगी। साथ ही जिला, ब्लॉक और विद्यालय स्तर पर वार्षिक लक्ष्य निर्धारण, उनकी नियमित समीक्षा तथा डेटा आधारित अनुश्रवण व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी जोर रहेगा। योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक विद्यालय में सीखने के परिणामों का सतत मूल्यांकन हो और समयबद्ध सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। निपुण भारत मिशन के विस्तार के अंतर्गत कक्षा 3 से 5 तक प्रस्तावित लक्ष्य आधारित शिक्षण, प्रभावी कक्षा-शिक्षण के लिए 10 प्वाइंट टूलकिट, कैच-अप शिक्षण तथा निपुण प्लस में प्रस्तावित सुधारों पर भी चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही बालवाटिका के प्रभावी संचालन तथा कक्षा 1 से 5 तक शिक्षक संदर्शिका आधारित संरचित शिक्षण पद्धति को विद्यालयों में लागू करने की रणनीति तैयार की जाएगी, जिससे बच्चों की सीखने की नींव और अधिक मजबूत हो सके। कार्यशालाओं में विभागीय प्राथमिकताओं की समीक्षा, एआईपीएफएसएसी पोर्टल के प्रभावी उपयोग, बीईओ और एआरपी के बीच बेहतर समन्वय, विद्यालय गुणवत्ता सुधार की कार्ययोजना तथा शिक्षकों को प्रभावी फीडबैक उपलब्ध कराने जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। इससे शैक्षणिक नेतृत्व को मजबूत करने और विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने 295 करोड़ से अधिक लागत वाली 319 परियोजनाओं का किया लोकार्पण/शिलान्यास

गोरखपुर मुख्यमंत्री ने गांधी इंटर कॉलेज, महुआपार बड़हलगंज में शनिवार को 295 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 319 परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह धरा मां सरयू के आंचल में है। यहां के नौजवानों ने हर जगह अपनी प्रतिभा व परिश्रम का लोहा मनवाया है। एक समय बाढ़ की त्रासदी और कनेक्टिविटी के अभाव में क्षेत्र के लोग पलायन करते थे। आजीविका के लिए विदेश जाना पड़ता था, लेकिन अब यहां के नौजवान को बाहर नहीं जाना होगा। उसे यहीं रोजगार के ढेर सारे अवसर मिलेंगे। अब आपके द्वारा चुने गए विधायक-सांसद डबल इंजन सरकार की ताकत का इस्तेमाल करते हुए विदेश के लोगों को चिल्लूपार में काम करने का अवसर देने जा रहे हैं। विदेशी लोग यहां आकर चाकरी करेंगे। सीएम ने विश्वास जताया कि विकास व विरासत की यात्रा के साथ चिल्लूपारवासी बिना रुके-बिना झुके निरंतर आगे बढ़ेंगे।  सीएनजी-एथेनॉल ने बंद नहीं होने दिया काम सीएम योगी ने कहा कि हम लोगों ने धुरियापार में बंद पड़ी चीनी मिल की खाली जमीन पर सीएनजी का प्लांट लगवाया। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण दुनिया में संकट है, लेकिन सीएनजी-एथेनॉल के कारण हमारे यहां काम बंद नहीं हुआ। ऊर्जा में आत्मनिर्भर अमेरिका में भी महंगाई चार गुना हो गई है। वहां 100 रुपये की वस्तु 400 रुपये में मिल रही है, लेकिन भारत में महंगाई नियंत्रित है। धुरियापार में लगने जा रही सीमेंट फैक्ट्री सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नया भारत गरीब कल्याण, विकास व सुरक्षा का बेहतरीन माहौल देते हुए माफिया को मिट्टी में भी मिलाता है। एक समय रामजानकी मार्ग पर आवागमन ठप होता था। उपचार के लिए लखनऊ जाने को मजबूर होना पड़ता था। कनेक्टिविटी, रोडवेज बस व अन्य साधन तक नहीं थे। जैसे-तैसे व्यवस्था चल पाती थी, लेकिन आज कनेक्टिविटी बेहतर हुई है। 2017 के पहले कोई सोच भी नहीं सकता था कि धुरियापार में इंडियन ऑयल का सीएनजी प्लांट लगेगा या सहजनवां का गीडा आ पाएगा। अब हम यहां ग्रेटर गीडा बनाने जा रहे हैं। अभी से हजारों करोड़ रुपये के प्रस्ताव आ गए हैं, जिन्हें हमें उद्योग के रूप में स्थापित करना है। इसमें सीमेंट की फैक्ट्री धुरियापार में लगने जा रही है। पावर प्लांट, आधुनिक पेंट व अत्याधुनिक डिस्टलरी भी स्थापित होगी, जहां मॉडर्न मेडिसिन, एलोपैथिक दवा भी बनेगी। यहां भारी पैमाने पर निवेश के प्रस्ताव आ रहे हैं।  राजेश त्रिपाठी जितने प्रस्ताव देंगे, सरकार स्वीकृत करेगी  सीएम ने कहा कि विधायक राजेश त्रिपाठी जितने भी प्रस्ताव देंगे, सरकार उन्हें स्वीकृत करेगी। राजेश त्रिपाठी ने यहां होमियोपैथिक कॉलेज स्वीकृत कराया था, उस समय काम बढ़ा, लेकिन सपा सरकार ने आते ही काम रोक दिया। उस समय चुने गए लोगों ने कान में तेल डालकर इसे अनसुना कर दिया था। 2017 में सरकार आने पर राजेश जी इस काम के लिए रोज मिलते थे। आज इस विधानसभा क्षेत्र में आयुष के डॉक्टर बन रहे हैं। चिल्लूपार ट्रेडिशनल मेडिसिन का नया केंद्र बन रहा है। जितनी फास्ट कनेक्टिविटी-उतनी तेज प्रगति सीएम योगी ने बताया कि मैंने जलशक्ति मंत्री से कहा है कि बाढ़ बचाव के लिए जो भी प्रस्ताव आएंगे, उन समस्याओं का समाधान होना चाहिए। सीएम ने कनेक्टिविटी पर जोर देते हुए कहा कि यह जितनी फास्ट होगी, प्रगति उतनी तेज गति से बढ़ेगी। प्रगति होगी तो नौजवान को पलायन नहीं करना पड़ेगा। उन्हें अपने क्षेत्र में नौकरी व रोजगार मिलेगा, यही देश में डबल इंजन सरकार के कार्यों की पहचान है। गीडा यहीं आ रहा है, यहां के नागरिकों के लिए रोजगार के ढेर सारे अवसर बढ़ेंगे। नौजवानों को बाहर नहीं जाना होगा। चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से अब बेहतर कनेक्टिविटी सीएम योगी ने कहा कि चिल्लूपार अब विकास की प्रक्रिया से जुड़ा है। एक तरफ लखनऊ को जोड़ने के लिए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का लिंक एक्सप्रेसवे तो दूसरी तरफ गोरखपुर-वाराणसी को जोड़ने वाला फोरलेन का नेशनल हाइवे है। इस विधानसभा क्षेत्र से कनेक्टिविटी बहुत अच्छी है। यहां से तीन घंटे में लखनऊ, दो घंटे में वाराणसी, आधे-पौने घंटे में गोरखपुर पहुंच जाएंगे।  सांसद कमलेश पासवान व विधायक राजेश त्रिपाठी ने तेज की विकास प्रक्रिया मुख्यमंत्री ने विपरीत मौसम के बावजूद कार्यक्रम में आए आमजन के हौसले को सलाम किया और कहा कि आपके उत्साह को देखते हुए आंधी-तूफान भी थम गया। कल्याण चाहने वालों को डबल इंजन सरकार के साथ चलना होगा। सांसद कमलेश पासवान व विधायक राजेश त्रिपाठी ने मिलकर विकास की प्रक्रिया को तेज किया। विकास की हर योजना चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में आ रही है। यह क्षेत्र अब विकास से वंचित नहीं रहेगा। विकास की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़े, यही यूपी की पहचान है।  कमल पर वोट देते हैं तो तर जाती है पीढ़ी दर पीढ़ी सीएम ने कहा कि आप कमल पर वोट देते हैं तो पीढ़ी दर पीढ़ी तर जाती है। 500 वर्ष पहले जिस अयोध्या धाम में हम सभी अपमानित हुए थे, वहां लगातार आंदोलन चलता रहा। संघर्ष का सिलसिला थमा नहीं, लेकिन जब मोदी जी पीएम बने और यूपी में डबल इंजन सरकार आई तो अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बन गया। यह काम कांग्रेस या सपा नहीं कर पाती।  जब विधायक ही ठेका-पट्टा करेगा तो क्या होगा  सीएम ने कहा कि जो लोग आस्था-महापुरुषों को सम्मान, विकास की योजनाएं, नौजवान को रोजगार, उद्योग-धंधे नहीं ला सकते, बेटी-बहन को सुरक्षा, बाढ़ की समस्या का समाधान और सड़कों का निर्माण नहीं कर सकते, ऐसे लोगों को नहीं चुनना चाहिए। जब गलत व्यक्ति को चुनते हैं तो अपने ऊपर बोझ व कलंक का ठप्पा लगाते हैं। उत्तर प्रदेश के साथ यही होता था, गलत लोग चुनकर जाते थे तो जनता का पैसा कुछ लोगों के ही विकास में लगता था। नौकरी में सेंध लगती थी। नौजवानों को नौकरी नहीं मिलती थी। पैसे का लेनदेन शुरू हो जाता था। ठेके पट्टे के लिए मारपीट होने लगती थी। जब विधायक स्वयं ठेका करेगा तो क्या होगा, यह बताने की आवश्यकता नहीं। गोरखपुर के 800 से अधिक नौजवान पुलिस में भर्ती सीएम ने कहा कि पुलिस भर्ती में चिल्लूपार और गोरखपुर के भी लगभग 800 से अधिक नौजवान शामिल थे। आज सरकारी सेवाओं में गोला, बड़हलगंज, गगहा, बांसगांव, खजनी, सिकरीगंज, चौरीचौरा, पिपरौली, सहजनवा, पाली से भी नौजवानों … Read more

लैपटॉप से लेकर निःशुल्क शिक्षा तक, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) बनी बच्चों का मजबूत सहारा

लखनऊ कोविड महामारी में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के लिए योगी सरकार अभिभावक की भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) के तहत अनाथ और बेसहारा बच्चों को न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, बल्कि उनके बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। महिला कल्याण विभाग के द्वारा सरकार 8085 बच्चों को लैपटॉप वितरित कर उन्हें डिजिटल शिक्षा से जोड़ चुकी है। डिजिटल युग में यह पहल बच्चों के लिए ज्ञान और अवसरों के नए द्वार खोल रही है। इससे वो ऑनलाइन अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और तकनीकी दक्षता हासिल करने में सक्षम हो रहे हैं। वहीं 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा 12 तक निःशुल्क प्रदान कर रही हैं। योजना के अंतर्गत प्रत्येक बच्चे को प्रतिमाह उसकी शिक्षा जारी रखने के लिए 14 हजार रुपये प्रतिमाह की सहायता भी दी जा रही है। यह पहल बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम बन रही है। निःशुल्क शिक्षा के साथ आर्थिक संबल योगी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि संसाधनों के अभाव में कोई भी बच्चा अपनी पढ़ाई अधूरी न छोड़े। योजना के अंतर्गत 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा 12 तक निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही प्रत्येक पात्र बच्चे को 14 हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है। यह सहायता बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इससे किताबें, स्टेशनरी और अन्य जरूरी शैक्षिक संसाधन जुटाने में मदद मिलती है। सरकार का यह प्रयास सामाजिक सुरक्षा और शिक्षा के समन्वित मॉडल के रूप में सामने आया है। प्रतिस्पर्धी माहौल से जुड़ रहे बच्चे लैपटॉप वितरण और आधुनिक शैक्षिक सुविधाओं के माध्यम से बच्चों को प्रतिस्पर्धी माहौल से जोड़ने की दिशा में भी प्रभावी कार्य किया जा रहा है। शिक्षा आधारित यह मॉडल बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार कर रहा है। योगी सरकार का प्रयास है कि ये बच्चे आत्मनिर्भर बनेः निदेशक योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महामारी से प्रभावित कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। निःशुल्क शिक्षा, आर्थिक सहायता और डिजिटल संसाधनों के माध्यम से बच्चों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योगी सरकार का प्रयास है कि ये बच्चे आत्मनिर्भर बनें और अपने सपनों को साकार कर सकें। इसलिए प्रदेश के सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के पात्र बच्चों को समय पर लाभ प्रदान करने तथा ऐसे बच्चों का नियमित फॉलोअप लेकर उनके सम्पूर्ण विकास सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सी. इंदुमती, निदेशक, महिला कल्याण विभाग