samacharsecretary.com

29,334 शिक्षक भर्ती: नौकरी की उम्मीद जगी, सुप्रीम कोर्ट ने 355 अभ्यर्थियों के मामलों पर लिया बड़ा फैसला

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में गणित एवं विज्ञान विषय की 29334 भर्ती से सैकड़ों अभ्यर्थियों को नौकरी की उम्मीद जगी है। इस भर्ती से जुड़े अवमानना मामले में उच्चतम न्यायालय ने 28 सितंबर को एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए कहा है कि 29 जनवरी 2025 के आदेश के बावजूद जिन 355 अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी पर विचार नहीं किया गया, उनके मामलों पर 12 सप्ताह के अंदर विचार किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि और अभ्यर्थी योग्य और उपयुक्त पाए जाते हैं तो उन्हें भी बिना देरी के नियुक्ति पत्र दिए जाएं। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की खंडपीठ के समक्ष तीन अलग-अलग आवेदन पेश किए गए थे, जिनमें क्रमशः 163, 190 और 2 अभ्यर्थियों ने पक्षकार बनाए जाने की मांग की थी। कुल 355 अभ्यर्थियों का आरोप है कि 29 जनवरी 2025 के आदेश के बावजूद उनकी उम्मीदवारी पर अभी तक विचार नहीं किया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इन 355 अभ्यर्थियों के मामलों पर 12 सप्ताह के अंदर विचार किया जाए। इसके अलावा यदि और अभ्यर्थी 29 जनवरी 2025 के आदेश के अनुसार योग्य पाए जाएंगे, उन्हें तुरंत नियुक्ति की पेशकश की जाए। यदि किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति नहीं दी जाती है, तो तर्कपूर्ण आदेश पारित कर उसे सूचित किया जाए। इस मामले को छह सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।

UP राज्यसभा चुनाव में बढ़ी सियासी हलचल, BJP-सपा के उम्मीदवारों का आज हो सकता है ऐलान

  लखनऊ उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. नामांकन की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है और इससे पहले आज बीजेपी और एनडीए अपने राज्यसभा उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर सकते हैं. वहीं, समाजवादी पार्टी भी अपने तीसरे उम्मीदवार को लेकर पत्ते खोल सकती है।  राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों खेमों की तैयारियों का अंदाजा नामांकन पत्रों की खरीद से भी लगाया जा सकता है. समाजवादी पार्टी ने चार नामांकन पत्र खरीदे हैं, जबकि बीजेपी की तरफ से नौ पर्चे खरीदे गए हैं. ऐसे में अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में उतारे जाने की स्थिति में राज्यसभा चुनाव में मुकाबला देखने को मिल सकता है।  तीसरे उम्मीदवार को लेकर अभी भी स्थिति साफ नहीं समाजवादी पार्टी पहले ही रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी है और दोनों अपना नामांकन भी दाखिल कर चुके हैं. हालांकि, तीसरे उम्मीदवार को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं हुई है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले कह चुके हैं कि अगर पार्टी पर्याप्त संख्या का इंतजाम कर लेती है तो तीसरा उम्मीदवार भी मैदान में उतारा जाएगा।  तीसरे उम्मीदवार के लिए सपा को अपने मौजूदा संख्याबल से करीब आधा दर्जन अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है. ताजा रिपोर्टों में भी तीसरे उम्मीदवार को लेकर सपा की तैयारियों का जिक्र है।  दूसरी तरफ बीजेपी ने भी उत्तर प्रदेश से अपने उम्मीदवारों के नामों का अभी ऐलान नहीं किया है. पार्टी की तरफ से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम प्रमुखता से चर्चा में है. पुरी का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल भी समाप्त होने वाला है. उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है।  9 अक्टूबर तक नाम लिए जा सकेंगे वापस नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है, जबकि 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे. ऐसे में आज बीजेपी के उम्मीदवारों और सपा के संभावित तीसरे प्रत्याशी के नाम सामने आने के बाद यह तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है कि राज्यसभा की अतिरिक्त सीट के लिए सीधा मुकाबला होगा या नहीं।  बता दें कि विधानसभा में विधायकों के मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से बीजेपी सात सीटें आसानी से जीत लेगी और सपा की दो सीटों पर जीत तय मानी जा रही है. असली मुकाबला 10वीं राज्यसभा सीट को लेकर है, जिस पर काबिज होने के लिए सपा और बीजेपी के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है।  क्या है सीटों का गुणा-गणित? यूपी विधानसभा के कुल 403 सदस्यों में से वर्तमान में 397 विधायक हैं. ऐसे में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 38 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत है. बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास कुल 292 विधायक हैं, जबकि सपा गठबंधन के पास 103 विधायक हैं. एनडीए में बीजेपी के 256, अपना दल (एस) के 13, आरएलडी के 9, सुभासपा के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक हैं. दो विधायक राजा भैया की पार्टी के हैं. इन्हें मिलाकर यह आंकड़ा 291 विधायकों का होता है।  वहीं, सपा और कांग्रेस को मिलाकर कुल 103 विधायक हैं. राज्यसभा की एक सीट के लिए 38 विधायकों की जरूरत के आधार पर बीजेपी को सात सीटें जीतने के लिए 266 विधायक चाहिए होंगे, जिसके बाद उसके पास 26 सरप्लस (अतिरिक्त) वोट बचेंगे. इसके बाद बीजेपी को आठवीं सीट जीतने के लिए 12 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी।  वहीं, राज्यसभा की 2 सीटों को जिताने के लिए सपा को 76 वोटों की जरूरत है, जिसके बाद सपा के पास भी करीब 27 सरप्लस वोट बचते हैं. सपा को तीसरी सीट जीतने के लिए 11 एक्स्ट्रा वोटों की जरूरत है. यही 11-12 वोटों का अंतर इस चुनाव को बेहद दिलचस्प और कांटे की टक्कर बना रहा है।  

सुल्तानपुर हादसे में मृतकों के परिवारों को राहत, मुख्यमंत्री ने ₹2 लाख मुआवजे की घोषणा की

सुल्तानपुर हादसा: मुख्यमंत्री ने मुआवजे का किया ऐलान मृतकों के परिजनों को दी जाएगी 2-2 लाख रुपये की आर्थिक मदद मुख्यमंत्री ने सुल्तानपुर/देवरिया के अधिकारियों को दिया निर्देश- मृतकों के परिवारों से बात कर उन्हें हरसंभव मदद उपलब्ध कराएं  लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को पूर्वांचल एक्सप्रेस पर हुए एम्बुलेंस हादसे में शोक जताया। इस दुःखद घटना को लेकर मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन/पुलिस के आलाधिकारियों से समुचित जानकारी भी हासिल की। उन्होंने ईश्वर से चारों मृतकों के परिजनों के संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।  सड़क हादसे के उपरांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की। सीएम ने सुल्तानपुर/देवरिया के अधिकारियों से मृतकों के परिवारों से बात कर उन्हें हरसंभव मदद देने के भी निर्देश दिए हैं।  बता दें कि एम्बुलेंस चंडीगढ़ से शहीद सूबेदार का शव लेकर देवरिया जा रहा था। इसमें शहीद के परिजन भी मौजूद थे। पूर्वांचल एक्सप्रेस पर एम्बुलेंस की एक वाहन से टक्कर हो गई, जिसमें ड्राइवर समेत चार लोगों के मौत की सूचना प्राप्त हुई है।

सीतामढ़ी-धनतुलसी-डेंगुरपुर घाट पर 1.32 किमी लंबे सेतु का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया शिलान्यास

मुख्यमंत्री योगी ने पूरी की तीन दशक पुरानी मांग, गंगा पर सेतु से सीधे जुड़ेंगे भदोही-प्रयागराज   सीतामढ़ी-धनतुलसी-डेंगुरपुर घाट पर 1.32 किमी लंबे सेतु का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया शिलान्यास   ₹300 करोड़ से अधिक की परियोजना से पांच जिलों की राह होगी आसान, मध्य प्रदेश की ओर भी सफर होगा सुगम   पीपा पुल और नाव पर निर्भरता होगी खत्म, कोनिया और मांडा क्षेत्र की सवा लाख से अधिक आबादी को मिलेगी राहत   सीतामढ़ी आने वाले श्रद्धालुओं को होगी सहूलियत, कालीन कारोबार के लिए भी खुलेगा बेहतर रास्ता-मुख्यमंत्री योगी   संत रविदास नगर भदोही  गंगा पर पक्के पुल के लिए तीन दशक से अधिक समय से इंतजार कर रहे कोनिया क्षेत्र के लोगों की बड़ी मांग रविवार को पूरी हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीतामढ़ी-धनतुलसी-डेंगुरपुर घाट पर ₹300 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाले 1.32 किमी लंबे सेतु का शिलान्यास किया। इसके साथ पहुंच मार्ग और सुरक्षात्मक कार्य भी कराए जाएंगे। पुल तैयार होने पर भदोही के धनतुलसी से प्रयागराज के मांडा क्षेत्र स्थित डेंगुरपुर तक सीधा सड़क संपर्क हो जाएगा।   इस पुल से भदोही और प्रयागराज के साथ मिर्जापुर, वाराणसी और जौनपुर की राह भी आसान होगी। इस तरह उत्तर प्रदेश के पांच जिलों को इसका लाभ मिलेगा। मिर्जापुर के रास्ते मध्य प्रदेश की ओर जाने वालों को भी सहूलियत होगी।   बरसात में खत्म होगी बड़ी परेशानी धनतुलसी-डेंगुरपुर घाट पर अभी गंगा पार करने के लिए पीपा पुल और नाव का सहारा लेना पड़ता है। बरसात में गंगा का जलस्तर बढ़ते ही पीपा पुल हटा दिया जाता है। ऐसे में लोगों की मुश्किल बढ़ जाती है। पक्का पुल बनने के बाद कोनिया और मांडा क्षेत्र की सवा लाख से अधिक आबादी को पूरे साल गंगा पार करने का रास्ता मिलेगा। पढ़ाई, इलाज, बाजार और रोजमर्रा के दूसरे कामों के लिए भी लोगों को राहत मिलेगी।   सीतामढ़ी आने वाले श्रद्धालुओं को भी राहत गंगा किनारे स्थित सीता समाहित स्थल सीतामढ़ी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी पुल अहम होगा। प्रयागराज की ओर से आने वालों को सीधा रास्ता मिलेगा। इसका फायदा आसपास के बाजार और छोटे कारोबारियों को भी होगा।   कालीन कारोबार की राह भी होगी आसान भदोही के कालीन कारोबार के लिए भी यह पुल महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रयागराज की ओर सीधा सड़क संपर्क होने से माल लाने-ले जाने में आसानी होगी। कारोबारियों का कहना है कि पुल से व्यापार के लिए नए क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी।   अंजनी कारपेट, खमरिया के पीयूष कुमार बरनवाल ने कहा, “इस पुल का बहुत लंबे समय से इंतजार था। अब काम शुरू होने जा रहा है तो क्षेत्र के लोगों में खुशी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बहुत-बहुत धन्यवाद।”   त्रिवेणी रग इंडस्ट्रीज, छतमी गोपीगंज के शाश्वत पांडेय ने कहा, “पुल हमारे कालीन कारोबार के लिए काफी काम आएगा। प्रयागराज की तरफ संपर्क बेहतर होने से व्यापार को भी फायदा होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार।”   कालीन निर्यात संवर्धन परिषद की प्रशासनिक समिति के पूर्व सदस्य राजेंद्र कुमार मिश्र ने कहा, “भदोही का कालीन दुनिया भर में जाता है। यह पुल कारोबार के लिए नए रास्ते खोलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्षेत्र की बड़ी जरूरत पूरी की है।”   पुल बनने से परिवारों की परेशानी होगी कम गृहिणी एवं समाजसेवी सरिता गुप्ता ने कहा, “बरसात के दिनों में गंगा पार करना बड़ी परेशानी बन जाता है। पक्का पुल बनने से बच्चों की पढ़ाई से लेकर इलाज और रोजमर्रा के काम तक आसान होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद।”

संत रविदास के नाम से दलित समाज को सम्मान, ‘भदोही’ बरकरार रख भार राज से जुड़ी ऐतिहासिक पहचान को भी दिया स्थान

‘संत रविदास नगर भदोही’ से दलित-राजभर दोनों को संदेश, योगी ने एक नाम में जोड़ी दो विरासत   संत रविदास के नाम से दलित समाज को सम्मान, ‘भदोही’ बरकरार रख भार राज से जुड़ी ऐतिहासिक पहचान को भी दिया स्थान   29 जुलाई को वाराणसी में पहली बार किया था नाम बदलने का ऐलान, अब भदोही की धरती से फिर बोले मुख्यमंत्री योगी   मुलायम ने 30 जून 1994 को वाराणसी से अलग कर बनाया भदोही जिला, मुख्यमंत्री मायावती ने 4 दिसंबर 1997 को किया संत रविदास नगर   अखिलेश ने 6 दिसंबर 2014 को कैबिनेट के जरिए फिर किया भदोही, योगी ने अब दोनों नामों को एक साथ जोड़ा   भदोही को अपनी राजधानी बनाने वाले भार राज्य से निकला जिले का नाम, सरकारी इतिहास में भी दर्ज है उल्लेख   2027 से पहले पूर्वांचल के अहम दलित और राजभर समाज तक जाएगा नामकरण का राजनीतिक संदेश भदोही  संत रविदास नगर भदोही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही को ‘संत रविदास नगर भदोही’ नाम देने की बात दोहराकर इतिहास के साथ राजनीतिक संदेश भी दिया है। संत रविदास का नाम जिले की पहचान में वापस लाने से दलित समाज की आस्था और सम्मान जुड़ा है, वहीं ‘भदोही’ को बरकरार रखने से भार राज से जुड़ी ऐतिहासिक पहचान भी कायम रहेगी। पूर्वांचल के सामाजिक समीकरण में अहम दलित और राजभर समाज के लिहाज से भी इस फैसले के मायने हैं।   मुख्यमंत्री योगी ने पहली बार 29 जुलाई 2026 को वाराणसी में भदोही का नाम बदलने की घोषणा की थी। रविवार को भदोही की धरती से उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट किया कि जनपद ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री ₹1,340 करोड़ से अधिक की 112 परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।   मुलायम ने बनाया जिला, मायावती ने बदला नाम तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 30 जून 1994 को वाराणसी से अलग कर भदोही को नया जनपद बनाया। इसके तीन साल बाद 4 दिसंबर 1997 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने संत शिरोमणि गुरु रविदास के सम्मान में भदोही का नाम बदलकर ‘संत रविदास नगर’ करने का नोटिफिकेशन जारी किया।   करीब 17 साल बाद 6 दिसंबर 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कैबिनेट की बैठक के माध्यम से ‘संत रविदास नगर’ का नाम बदलकर फिर ‘भदोही’ कर दिया। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘संत रविदास नगर’ और ‘भदोही’ दोनों को जिले के नाम में स्थान दिया है।   भार राज्य की राजधानी से जुड़ा भदोही भदोही का इतिहास जिला बनने से सदियों पुराना है। जिला प्रशासन के आधिकारिक इतिहास के अनुसार इसका नाम यहां के ‘भार राज्य’ से पड़ा, जिसने भदोही को अपनी राजधानी बनाया था। क्षेत्र में भार शासकों से जुड़े पुराने टीले और तालाब भी बताए गए हैं।   अकबर के शासनकाल में भदोही को दस्तुर बनाकर इलाहाबाद (प्रयागराज) सरकार में शामिल किया गया। बाद में यह अलग-अलग शासकों के अधीन रहा। वर्ष 1911 में बनारस रियासत का हिस्सा बना और आजादी के बाद वाराणसी जिले में शामिल रहा।   नामकरण में सामाजिक समीकरण का भी संदेश संत रविदास दलित समाज के बड़े आराध्य और सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। उनका नाम जिले से दोबारा जुड़ना दलित समाज के लिए सम्मान के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं भार राज से जुड़े ‘भदोही’ नाम को कायम रखना राजभर समाज की ऐतिहासिक विरासत को भी स्थान देता है।   मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में संत रविदास के उस संदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें सभी को अन्न मिलने और छोटे-बड़े के बिना भेदभाव साथ रहने की कल्पना की गई है। इसे उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार की बिना भेदभाव योजनाओं से जोड़ा।   इस तरह करीब तीन दशक में जिले के नाम की यह चौथी महत्वपूर्ण कड़ी है। मुलायम सिंह यादव ने भदोही को अलग जिला बनाया, मायावती ने इसे संत रविदास नगर किया और अखिलेश यादव ने फिर भदोही कर दिया। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोनों नामों को जोड़कर ‘संत रविदास नगर भदोही’ की पहचान सामने रखी है।

वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गो की आर्थिक सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य पर भी योगी सरकार का फोकस

लखनऊ, उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों के लिए सुरक्षित आश्रय के साथ इलाज की सुविधा तक पहुंच भी महत्वपूर्ण है। योगी सरकार में इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए समाज कल्याण विभाग वृद्धाश्रमों में रहने वाले पात्र बुजुर्गों को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़ रहा है। प्रदेश के 75 वृद्धाश्रमों में 6,607 बुजुर्ग निवास कर रहे हैं, जिनमें से पात्र 2,551 बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। सरकार की पहल का उद्देश्य वृद्धजनों को केवल रहने की सुविधा तक सीमित न रखकर उनकी सामाजिक सुरक्षा को व्यापक बनाना है। इसके तहत स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ आर्थिक सुरक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। वर्तमान में 4,901 पात्र वृद्धजनों को वृद्धावस्था पेंशन का लाभ मिल रहा है। वहीं पात्र महिलाओं को निराश्रित महिला पेंशन योजना से भी जोड़ा जा रहा है। सम्मानजनक जीवन सरकार की प्राथमिकता समाज कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण ने कहा कि वृद्धजनों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। उनका कहना है कि वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों को केवल आश्रय नहीं, बल्कि आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा भी मिले, इसके लिए विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाया जा रहा है। इलाज के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पात्र वृद्धाश्रम निवासियों को स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में लाने पर विभाग का जोर है। इसके लिए पात्र बुजुर्गों को योजना से जोड़ने की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ाई जा रही है। स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 4,901 पात्र बुजुर्गों को वृद्धावस्था पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। इससे वृद्धाश्रमों में रहने वाले पात्र बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा का अतिरिक्त सहारा मिल रहा है। योजनाओं तक पहुंच आसान बनाने की कवायद समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने बताया कि विभाग की ओर से पात्र बुजुर्गों को विभिन्न योजनाओं से जोड़ने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। आधार कार्ड समेत अन्य जरूरी दस्तावेज और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी विभागीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 में 1,073 नए बुजुर्गों को विभिन्न योजनाओं से जोड़ा गया है।

योगी सरकार में बिजली आपूर्ति को मिली रफ्तार, 24779 मेगावाट की मांग पूरी

लखनऊ, योगी सरकार प्रदेश में निर्बाध, सुलभ और सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। बढ़ती बिजली मांग के बीच सरकार ने आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के साथ ही उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया है। तीन अक्टूबर को प्रदेश में 24,779 मेगावाट की मांग के अनुरूप बिजली आपूर्ति की गई। जबकि दो अक्टूबर को 23,939 मेगावाट और एक अक्टूबर को 23,445 मेगावाट की मांग पूरी की गई। मांग के अनुरूप बिजली आपूर्ति के मामले में उत्तर प्रदेश तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक और पंजाब जैसे राज्यों से आगे रहा। सितंबर के अंतिम सप्ताह में कई वर्षों की सर्वाधिक तेज आंधी-तूफान के कारण प्रदेश में बड़े पैमाने पर विद्युत ब्रेकडाउन हुए। पूर्वांचल और मध्यांचल में विशेष रूप से  100 से अधिक 33 केवी सबस्टेशन और 500 से अधिक 11 केवी फीडर प्रभावित हुए। यूपीपीसीएल के अधिकारियों और कर्मचारियों ने युद्धस्तर पर दिन-रात मेहनत कर फाल्ट दूर किए और प्रभावित क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति को तेजी से सामान्य किया। विद्युत लाइनों और संबंधित ढांचे का लगातार मेंटेनेंस सेवा संकल्प अभियान 2026 के तहत अनुरक्षण माह में प्रदेशभर में बिजली व्यवस्था को बेहतर और सुचारु बनाए रखने के लिए विभिन्न अनुरक्षण कार्य कराए जा रहे हैं। पीपीसीएल की फील्ड टीमें विद्युत लाइनों और संबंधित ढांचे का आवश्यक मेंटेनेंस कर रही हैं। बिजली लाइनों के संपर्क में आने वाली पेड़ों की डालियों की छंटाई, आसपास की साफ-सफाई और अन्य जरूरी कार्य किए जा रहे हैं, ताकि मौसम खराब होने की स्थिति में विद्युत व्यवधान को कम किया जा सके। उपभोक्ता सेवा है योगी सरकार की प्राथमिकता योगी सरकार का जोर केवल बिजली आपूर्ति बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को बेहतर और संवेदनशील सेवा उपलब्ध कराने पर भी है। बिजली चोरी की समस्या से निपटने के साथ उपभोक्ताओं को विभाग का विरोधी मानने के बजाय उनकी जरूरतों को समझकर उन्हें व्यवस्था का सहयोगी बनाने पर बल दिया जा रहा है। फाल्ट की सूचना से लेकर बहाली तक निगरानी निर्देश दिए गए हैं कि कहीं भी विद्युत आपूर्ति प्रभावित होने पर इसकी सूचना तत्काल काल सेंटर पर दर्ज की जाए। उपभोक्ता को आपूर्ति बाधित होने का कारण बताया जाए और बिजली बहाल होने के बाद मैसेज के माध्यम से इसकी जानकारी दी जाए। इस पूरी व्यवस्था की नियमित समीक्षा करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि अनुरक्षण, त्वरित शिकायत निस्तारण और बेहतर निगरानी के जरिए प्रदेशवासियों को सुरक्षित, विश्वसनीय और निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई जाए।

सिल्क क्लस्टर के रूप में विकसित होंगे संत रविदास नगर, मीरजापुर और वाराणसी: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

संत रविदास नगर सिल्क क्लस्टर के रूप में संत रविदास नगर, मीरजापुर और वाराणसी को विकसित किया जाएगा। वाराणसी-विंध्य रीजनल डेवलपमेंट प्लान भी जल्द लागू होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती संस्करण में कालीन उद्योग के निर्यातकों, विक्रेताओं और प्रमुख उद्यमियों से सीधे संवाद के दौरान यह बात कही। उद्यमियों ने कालीन उद्योग के लिए अलग नीति, कारोबार की जरूरतों और महिला उद्यमियों की भागीदारी से जुड़े विषय रखे। मुख्यमंत्री ने एक-एक कर उनकी बात सुनी और उठाए गए मुद्दों पर सरकार की ओर से संज्ञान लेने का भरोसा दिया।   बेहतर कनेक्टिविटी से कारोबार को मिला लाभ मीरजापुर के कालीन कारोबारी अनिल कुमार ने बेहतर कनेक्टिविटी का जिक्र करते हुए योगी सरकार के कार्यों की सराहना की। उन्होंने प्राचीन शहर मीरजापुर और वहां के कालीन व्यवसाय से जुड़े विषय भी रखे। मुख्यमंत्री ने उनकी बात सुनकर उठाए गए मुद्दों पर संज्ञान लेने का आश्वासन दिया।   ओडीओपी से मिला लाभ, अब कालीन नीति की मांग इम्तियाज अहमद ने कहा कि ओडीओपी योजना से उद्यमियों को बहुत लाभ मिला है। इसी तर्ज पर कालीन उद्योग के लिए नीति बनाई जाए तो कारोबार को और फायदा होगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि तीसरी बार उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आशीर्वाद मिला है।   हस्तनिर्मित कालीन के लिए अलग व्यवस्था का सुझाव पीयूष कुमार बरनवाल ने कहा कि हस्तनिर्मित कालीन में भारत नंबर वन है। कालीन तैयार होने में अधिक समय लगता है, इसलिए इसे मैन्युफैक्चरिंग श्रेणी से थोड़ा अलग रखते हुए उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखकर नीति बनाई जाए। मुख्यमंत्री ने इसे अच्छा सुझाव बताते हुए कहा कि उन बुनकरों का अभिनंदन है, जिन्होंने अपने पूर्वजों की धरोहर को जीवित रखा है। उन्होंने भरोसा दिया कि इस सुझाव पर सरकार जरूर संज्ञान लेगी।   महिलाओं को सीईपीसी से जोड़ने की उठी बात आदर्श पूर्णिमा ने कहा कि पहले इंडिया कारपेट एक्सपो दिल्ली में लगता था। तब यह कल्पना भी नहीं की गई थी कि इसका आयोजन भदोही में होगा। अब इतना बड़ा मेला अपने ही जनपद में हो रहा है और मुख्यमंत्री लगातार दूसरी बार कालीन उद्योग का उत्साह बढ़ाने पहुंचे हैं। कालीन उद्योग में बड़ी संख्या में महिला उद्यमी और वर्कर्स हैं, लेकिन कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (सीईपीसी) का मौजूदा ढांचा महिलाओं को अपने साथ नहीं जोड़ पाया है। महिलाओं के लिए ऐसा प्रावधान होना चाहिए, जिससे उनकी भागीदारी बढ़े और मनोबल मजबूत हो।   इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आए हैं। नारी अब केवल सरकार या सरकारी भरोसे नहीं रहेगी, बल्कि अपने लिए कानून भी बनाएगी। उन्होंने सीईपीसी से महिला उद्यमियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और उनके लिए स्थान आरक्षित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने इस दिशा में परिवर्तन का भी भरोसा दिया।

सीएम योगी ने गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को प्राथमिकता से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के दिए निर्देश

लखनऊ गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद लखनऊ में जिला प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। रविवार को जिलाधिकारी विशाख जी. और संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार ने बरावन कला, सैथा, जेहटा, माल रोड और फैजुल्लागंज समेत प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय और नाव से निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राहत एवं बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर संचालित करने के निर्देश दिए। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षित शिफ्टिंग पर जोर ग्राम सैथा में निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने नगर मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि गर्भवती महिलाओं, बच्चों और वृद्धजनों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक ले जाने के लिए तत्काल 10 नावों की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। राहत शिविरों में स्वास्थ्य सेवाओं की भी जानकारी ली गई और जरूरतमंदों को पर्याप्त दवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। घर-घर पहुंच रही राहत किट, भोजन और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था जिलाधिकारी विशाख जी. अय्यर ने बताया कि सुबह से ही प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारियों और कर्मचारियों की टीमें सक्रिय हैं। नावों के माध्यम से घर-घर राहत किट पहुंचाई जा रही है। प्रभावित परिवारों के लिए भोजन और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने के साथ ही पशुओं के लिए पर्याप्त भूसा एवं चारे की व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक दवाओं की पर्याप्त किट तैयार कर प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने को कहा गया है। रात में भी निगरानी, दाऊद नगर में बनेगा अतिरिक्त कंट्रोल रूम फैजुल्लागंज में जिलाधिकारी और संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार ने नाव से प्रभावित बस्तियों का निरीक्षण किया और स्थानीय लोगों से संवाद कर राहत व्यवस्था की जानकारी ली। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रभावित इलाकों में रात्रिकालीन पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए गए। दाऊद नगर में अतिरिक्त कंट्रोल रूम स्थापित करने को कहा गया है, ताकि नागरिकों की शिकायतों और जरूरतों पर तत्काल कार्रवाई हो सके। अधिकारियों को गोमती के जलस्तर और संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखने तथा मौके पर मौजूद रहकर राहत-बचाव कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

सपा के 34 साल पूरे होने पर ऋचा राजपूत लोध का हमला, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य ने कहा- यूपी के लिए आज काला दिवस

लखनऊ, उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य और भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता डॉ. ऋचा राजपूत लोध ने समाजवादी पार्टी की स्थापना के 34 वर्ष पूरे होने पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सपा के इतिहास को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि पूरे प्रदेश के लिए आज काला दिवस है। डॉ. ऋचा राजपूत ने कहा कि सपा के इतिहास की परतें खोली जाएं तो छेड़खानी और बलात्कार जैसे मामले स्पष्ट रूप से सामने आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 34 साल के इतिहास में आम जनता की बात छोड़िए, एके-47 से विधायकों की हत्याएं तक कराई गईं। गाजीपुर हॉस्टल और मऊ दंगों पर सपा को घेरा डॉ. ऋचा राजपूत ने गाजीपुर की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि दिनदहाड़े लड़कियों के हॉस्टल से अंसारी जैसे लोग लड़कियां उठाकर ले जाते थे। उन्होंने मथुरा के जवाहर बाग कांड, बदायूं कांड और मुजफ्फरनगर के दंगों का उल्लेख करते हुए तंज कसा कि ये समाजवादी पार्टी के मुकुट में चमकते हुए हीरे हैं। उन्होंने पार्टी संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा लड़कियों की इज्जत पर हाथ डालने वाले लड़कों के लिए “गलती हो जाती है” जैसे शब्दों के इस्तेमाल की भी निंदा की। ऋचा राजपूत ने सवाल उठाया कि दुष्कर्मियों को ऐसे शब्दों से सुशोभित करने वाले समाज में नेता कहलाने लायक नहीं हैं। लव जिहाद और धर्मांतरण पर मौन दर्शाता है मानसिकता ऋचा राजपूत ने लव जिहाद और धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर भी सपा को घेरा। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर मौन रहने वाले और आतंकवादियों के मुकदमे वापस लेने वाले नेता बनने के लायक नहीं हैं। उन्होंने मऊ दंगों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सपा राज में वहां हिंदुओं की दुकानें चुन-चुनकर जलाई गईं। ब्राह्मणों और कारसेवकों के मुद्दे पर उठाए सवाल ऋचा राजपूत ने कन्नौज के नीरज मिश्रा हत्याकांड को याद करते हुए कहा कि ऐसी निर्मम हत्या करने वाले ब्राह्मणों को मुंह दिखाने लायक नहीं हैं। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर की अवहेलना का आरोप लगाया कि “कारसेवकों को मारने वाले, राम मंदिर की अवहेलना करने वाले हिंदू नहीं हो सकते।”