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तिर्वा रियासत की जमीन पर बड़ा आदेश: अपर आयुक्त न्यायालय ने दिया अंतिम निर्णय

कन्नौज यूपी के कन्नौज में 50 साल पुराने भू-सीलिंग विवाद में अपर आयुक्त न्यायालय ने अंतिम आदेश जारी करते हुए तिर्वा रियासत की 67.29 एकड़ भूमि सरकारी घोषित कर दी है। उप्र अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम, 1960 के तहत अपर आयुक्त प्रशासन रेनू सिंह ने राजा शारदा नरायण सिंह के वारिसों की अपील पर यह फैसला दिया। उन्होंने कुल 112.60 एकड़ भूमि में से 67.29 एकड़ भूमि को अंतिम रूप से सीलिंग के तहत अतिरिक्त यानी सरप्लस घोषित किया है। 17.31 एकड़ भूमि को आबादी और बाग की श्रेणी में होने के कारण सीलिंग से अवमुक्त कर दिया गया है। राज्य सरकार का पक्ष रख रहे शासकीय अधिवक्ता कानपुर मंडल नीरज सिंह सेंगर के मुताबिक तिर्वा रियासत की कन्नौज एवं फर्रुखाबाद के कई गांवों में जमीन थी। जिसको लेकर न्यायालयों में वाद दायर था। जिसमें राजा शारदा नरायण सिंह की 44 एकड़ भूमि सीलिंग में घोषित की गई थी। जिसके विरुद्ध रियासत ने न्यायालय में वाद दायर किया था। जिस पर प्रशासन द्वारा जमीनों की बिक्री पर रोक लगा दी थी। तिर्वा खास की भूमि को लेकर उच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र की 37 एकड़ भूमि को रियासत ने छोड़ने का प्रार्थना पत्र दिया था। 1 जून को अपर आयुक्त कानपुर मंडल ने निर्णय लेते हुए कहा कि राजा शारदा नरायण सिंह की 112 एकड़ भूमि में से 67.29 एकड़ भूमि को सीलिंग में घोषित किया जाता है। एसडीएम की जांच में खुला खेल उच्च न्यायालय ने 27 जून 2023 को साल 1994 के पुराने आदेश को निरस्त करते हुए अपर आयुक्त को निर्देश दिया था कि सभी पक्षों को दोबारा सुनकर छह महीने के भीतर मामले का अंतिम निस्तारण करें। इस आदेश के अनुपालन में अदालत ने एसडीएम तिर्वा से रिपोर्ट मांगी। जिसमें खुलासा हुआ कि सीलिंग का मुकदमा लंबित रहने और क्रय-विक्रय पर रोक होने के बावजूद खातेदारों द्वारा जमीनों की लगातार खरीद-फरोख्त की गई। जमीन पर कोल्ड स्टोरेज बना लिया गया। सड़कें निकाल दी गई और बड़े हिस्से पर मकान बनाकर आबादी बसा दी गई।

12 वर्षों में बदला भारत का स्वरूप: आस्था और आर्थिकी के संगम से विकसित राष्ट्र बन रहा देश, बोले सीएम योगी

12 वर्षों में बदला भारत का स्वरूप, आस्था व आर्थिकी के संगम से विकसित राष्ट्र की ओर बढ़ रहा भारत: सीएम योगी मीडिया संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने गिनाईं मोदी सरकार की उपलब्धियां, कहा- गरीब, महिला, युवा व किसान को केंद्र में रखकर हुआ अभूतपूर्व विकास कोविड प्रबंधन से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा, महिला सशक्तीकरण, किसान एवं युवा कल्याण, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और आत्मनिर्भर भारत तक की यात्रा को सीएम योगी ने बताया ऐतिहासिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोहराया उत्तर प्रदेश को 2030 तक वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में संचालित जन कल्याणकारी कार्यक्रमों का सर्वाधिक लाभ उत्तर प्रदेश को मिला: मुख्यमंत्री लखनऊ,   सेवा, सुशासन और समर्पण को समर्पित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 140 करोड़ भारतीयों की निरंतर सेवा के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लोकभवन में मीडिया संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश और उत्तर प्रदेश में हुए व्यापक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी शक्ति, सामर्थ्य और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है। कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री ने लोकभवन में आयोजित विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 10 जून को एनडीए द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पूरे देश और दुनिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबे कार्यकाल और उनकी सफल नेतृत्व यात्रा का उत्सव देखा। दुनिया के प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों ने प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और भारत की विकास यात्रा की सराहना करते हुए शुभकामनाएं दीं। पिछले 12 वर्षों में भारत ने अभूतपूर्व परिवर्तन देखा है और आज देश का प्रत्येक नागरिक नए भारत का हिस्सा होने पर गर्व महसूस कर रहा है। योजनाओं को मिला जन आंदोलन का रूप सीएम ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक योजनाएं बनती रहीं, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पहली बार योजनाओं को जन आंदोलन का स्वरूप मिला। जनधन योजना के माध्यम से करोड़ों बैंक खाते खोले गए, स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12 करोड़ शौचालय बने, 4 करोड़ गरीब परिवारों को पक्के मकान मिले और आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच प्राप्त हुआ। डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया और मुद्रा योजना जैसी पहलों ने देश को नई दिशा दी। 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने विकास की धुरी के रूप में गरीब, महिला, युवा व किसान को केंद्र में रखा। भारत ने पिछले 12 वर्षों में आस्था व आर्थिक विकास का अद्भुत संगम देखा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने में सफलता मिली, जो विश्व इतिहास की एक बड़ी उपलब्धि है। उत्तर प्रदेश को प्रधानमंत्री की योजनाओं का सर्वाधिक लाभ मिला है। राज्य में 65 लाख गरीबों को आवास, 3 करोड़ परिवारों को शौचालय, लगभग 2 करोड़ परिवारों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन तथा 15 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिला। कोविड काल में 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराया गया। गरीब अब केवल वोट बैंक नहीं रहा, बल्कि विकास प्रक्रिया का केंद्र बन चुका है। महिलाओं को मिली नई पहचान महिला सशक्तीकरण पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, मातृ वंदन योजना, नारी शक्ति वंदन अधिनियम और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं ने महिलाओं को नई पहचान दी है। उत्तर प्रदेश में भी बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, बैग, पुस्तकें और स्वेटर उपलब्ध कराए गए। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना तथा मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से बेटियों के जीवन को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने का कार्य किया गया। मिशन शक्ति अभियान और पुलिस बल में महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण ने महिलाओं को सुरक्षा व अवसर प्रदान किए हैं। युवाओं को नई ऊर्जा व अवसर दिए युवाओं के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा दिया। परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम, मुद्रा योजना, पीएम विश्वकर्मा योजना, आत्मनिर्भर भारत अभियान, फिट इंडिया और खेलो इंडिया जैसे कार्यक्रमों ने युवाओं को नई ऊर्जा और अवसर दिए हैं। पहली बार युवाओं को यह विश्वास मिला कि वे नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बन सकते हैं। योजनाओं से मजबूत बने किसान किसानों को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, फसल बीमा योजना और सॉइल हेल्थ कार्ड जैसी योजनाओं ने किसानों को मजबूत किया है। उत्तर प्रदेश में 3 करोड़ से अधिक किसान सम्मान निधि का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। गन्ना किसानों को 3.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है और 24 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा से जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री ने कोविड-19 महामारी के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने दुनिया के सामने सफल कोविड प्रबंधन का मॉडल प्रस्तुत किया। मुफ्त टेस्टिंग, मुफ्त वैक्सीन, मुफ्त राशन और मुफ्त उपचार जैसी व्यवस्थाओं ने करोड़ों लोगों को राहत दी। इसी दौरान ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के माध्यम से पूरे देश को राष्ट्रभक्ति के सूत्र में बांधा गया। पंच प्रण के माध्यम से विकसित भारत का आह्वान मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों के सामने ‘पंच प्रण’ का आह्वान किया, जो विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की आधारशिला हैं। इन पंच प्रणों में गुलामी की मानसिकता के अवशेषों को समाप्त करना, भारत की समृद्ध विरासत पर गर्व करना, राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना, प्रत्येक नागरिक द्वारा अपने कर्तव्यों का पालन करना तथा विकसित भारत के संकल्प को साकार करना शामिल है। प्रधानमंत्री ने देश को केवल अमृत महोत्सव के उत्सव तक सीमित नहीं रखा, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप भी प्रस्तुत किया। आस्था व सांस्कृतिक विरासत का सम्मान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत की आस्था व सांस्कृतिक विरासत को वह सम्मान प्राप्त हुआ, जिसकी लंबे समय से अपेक्षा थी। 500 वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्या … Read more

योगी सरकार का बड़ा फैसला: आउटसोर्स सेवा निगम का पोर्टल अगस्त तक तैयार, नई भर्ती भी शुरू

लखनऊ  प्रदेश के सरकारी विभागों में कार्यरत लगभग चार लाख आउटसोर्स कार्मिकों को बढ़ा मानदेय और अन्य सुविधाओं का लाभ सरकार सितंबर से दे सकती है। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकास) की सेवाओं को धरातल पर उतारने के लिए पोर्टल अगस्त तक तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। पोर्टल तैयार होने के बाद पहले से कार्यरत आउटसोर्स कार्मिकों को प्रस्तावित बढ़ा मानदेय व अन्य सुविधाओं का लाभ देने की प्रक्रिया शुरू होगी। नई भर्तियां भी शुरू की जाएंगी। पोर्टल विकसित करने का काम उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट सिस्टम कारपोरेशन (यूपी डेस्को) के माध्यम से एक निजी संस्था को दिया गया गई है। इस पोर्टल में आउटसोर्स कार्मिकों से संबंधित जानकारियों के साथ ही नई भर्तियों के लिए आवेदन, मानदेय की दर, कार्मिकों को दिए जाने वाले अन्य लाभ का पूरा विवरण होगा। सभी गतिविधियां पोर्टल से होंगी संचालित कुल मिलाकर निगम की समस्त गतिविधियां इसी पोर्टल के माध्यम से संचालित होंगी। सूत्रों के मुताबिक निगम का पोर्टल तैयार हो जाने पर बढ़ा मानदेय देने के साथ ही अन्य सभी लाभ कार्मिकों को दिया जाएगा। नई भर्तियां भी शुरू की जाएंगी। प्रदेश में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के गठना का शासनादेश 20 सितंबर 2025 को जारी किया गया था। निगम के लिए एमडी और अन्य पदाधिकारियों की तैनाती की जा चुकी है। निगम के माध्यम से प्रदेश सरकार आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और पारिश्रमिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और एकरूप बनाने का काम करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिए थे निर्देश हाल ही में समीक्षा बैठक कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आउटसोर्स व्यवस्था को तकनीक आधारित, जवाबदेह और कर्मचारी हितैषी बनाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि पोर्टल के माध्यम से नियुक्ति, सत्यापन, निगरानी तथा अन्य प्रक्रियाओं का केंद्रीकृत संचालन किया जाए, जिससे व्यवस्था अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बन सके। निगम का गठन होने से कार्मिकों को न्यूनतम 20 हजार व अधिकतम 40 हजार रुपये तक मासिक मानदेय मिलेगा। इसके साथ ही कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) आदि का भी लाभ कार्मिकों को मिलेगा। सरकार ने आउटसोर्सिंग भर्तियों के लिए चार श्रेणियां बनाई हैं। श्रेणी एक के लिए 40 हजार, दो के लिए 25 हजार, श्रेणी तीन के लिए 22 और चार के लिए 20 हजार पारिश्रमिक तय किया गया है।

जापानी मियाजाकी आम की खेती पूर्वांचल में, 2 लाख रुपये किलो तक पहुंची कीमत

लखनऊ  यूपी के पूर्वांचल की धरती पर अब दुनिया का सबसे महंगा आम उगेगा। आजमगढ़ में जापान के प्रसिद्ध मियाजाकी आम का मदर प्लांट तैयार हो रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र लैदौरा इस आम के पेड़ से कलम तैयार करने में जुटा है। ऐसे में दो लाख रुपये किलो वाला मियाजाकी आम जिले की पहचान बनेगा। वहीं सोनभद्र में भी एक व्यक्ति ने अपने बाग में मियाजाकी आम का पौधा लगाया है। जापान का प्रसिद्ध मियाजाकी आम दुनिया का सबसे महंगा आम है। स्वाद और खुशबू में लाजवाब होने के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जापानी मियाजाकी आम की कीमत दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम है। स्थानीय बाजार में भी इसकी कीमत 70 हजार रुपये से दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक रहती है। कृषि विज्ञान केंद्र लैदौरा में मियाजाकी आम के पौधे तैयार किए गए हैं। इनका प्रयोग मदर प्लांट के रूप में किया जा रहा है। उद्यान वैज्ञानिक मदर प्लांट के पौधों से कलम तैयार कर मियाजाकी आम के पौधे लोगों को मुहैया कराएंगे। कलम से तैयार पौधे तीन से पांच साल में फल देने लगेंगे जबकि बीज वाले पौधे लगाने पर फल आने में करीब 10 साल का समय लग जाता है। लाल-जामुनी और हरे रंग का मिश्रण है खासियत मियाजाकी की पैदावार सोनभद्र के छपका गांव में भी हो रही है। गहरा लाल-जामुनी और हरे रंग का मिश्रण इस आम की खासियत होती है। वरिष्ठ अधिवक्ता उमेशधर दुबे ने पिछले साल 15 अगस्त को इसका पौधा लगाया था। इसका छिलका चमकदार होता है और स्वाद में बहुत मीठा होता है। कब लगा सकते हैं पौधे लैदौरा के प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. एलसी वर्मा ने बताया कि दुनिया के सबसे महंगे आम जापानी मियाजाकी का पौधा तैयार किया गया है। पुणे की नर्सरी से लाकर इसे लगाया गया है। इसका प्रयोग मदर प्लांट के तौर पर किया जाएगा। कलम से तैयार पौधों को लगाने का सही समय जुलाई से सितंबर तक होता है। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में है नर्सरी अभी तक पश्चिम बंगाल के कोलकाता की एग्रो नर्सरी, ग्रीनरी नर्सरी ठाकुरनगर और महाराष्ट्र के पुणे स्थित नर्सरी ही इस जापानी मियाजाकी आम के पौधे उपलब्ध कराती हैं। जापानी मियाजाकी आम का एक पौधा 1500 से 5000 रुपये तक में मिलता है। मध्य प्रदेश के जबलपुर और ओडिशा में भी इसकी खेती होने लगी है। आजमगढ़ के चार ब्लॉकों रानी की सराय, मिर्जापुर, अहरौला और पवई में प्रमुखता से आम की खेती होती है। इन चार ब्लॉकों के करीब 12 प्रतिशत क्षेत्रफल में आम के बाग मौजूद हैं।

आजमगढ़ में सीएम योगी का हमला, विकास परियोजनाओं के साथ सियासी बयानबाज़ी तेज

लखनऊ उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की बेटी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी को लेकर प्रदेश में माहौल गर्म है। समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे को लेकर शुक्रवार को प्रदेश के अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन कर अपने गुस्से का इजहार किया। सपा प्रमुख की बेटी के खिलाफ की गई टिप्पणी पर सपा ही नहीं भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों के नेता-कार्यकर्ता भी मुखर विरोध जता रहे हैं। वहीं शनिवार को अखिलेश यादव के निर्वाचन क्षेत्र आजमगढ़ पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी पहली बार सार्वजनिक रूप से इसे लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया। सीएम योगी ने कहा कि बेटी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी कतई स्वीकार्य नहीं है। इसके साथ ही सीएम ने सपा प्रमुख को नसीहत भी दी। उन्होंने कहा कि जरूरत है कि सपा प्रमुख भी अपने लोगों को संस्कारित करें। उन्हें सोचना चाहिए कि उनके लोग दूसरों की बेटियों, बुजुर्गों, दिवंगत लोगों और वरिष्ठ नेताओं के प्रति किस प्रकार की भाषा का प्रयोग करते हैं। सीएम योगी ने कहा, ‘बेटी, बेटी होती है। बेटी का सम्मान होना चाहिए। मैं पिछले दिनों देख रहा था समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री के खिलाफ कुछ लोगों ने गलत टिप्पणियां की थीं जैसे मेरे संज्ञान में आया मैं तत्काल पुलिस के एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। बेटी के खिलाफ कोई भी अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। बेटी, बेटी होती है और हम तो उस संस्कार में पले-बढ़े हैं जहां कहा जाता है कि गांव की बेटी सबकी बेटी है और गांव की बहन सबकी बहन है। हमने तो कोई भेदभाव नहीं किया। लेकिन अखिलेश जी दूसरों को उपदेश देते हो अपने चेले-चपाटों को भी थोड़ा उपदेश दे दो कि अपनी भाषा को संयमित कर लें। दूसरों के प्रति टिप्पणी करने से पहले स्वयं भी सोचा करो कि उनके लोग किस प्रकार की भाषा का प्रयोग बहन और बेटियों के प्रति, बुजुर्गों के प्रति, दिवंगत हुए लोगों के प्रति और वरिष्ठ नेताओं के प्रति करते हैं। इसके बारे में उनको भी अपने लोगों को संस्कारित करने की आवश्यकता है। अच्छा होगा उनको समझाओ और नहीं समझ सकते तो हमारे हवाले कर दो हम उनको अच्छी तरह समझा देंगे सीएम योगी ने आजमगढ़ में 955 करोड़ रुपए से अधिक लागत की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस मौके पर उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2017 के पहले के आजमगढ़ को याद कीजिए जो अपनी पहचान के लिए मोहताज था। तब यहां न विश्वविद्यालय था, न पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे था, न एयरपोर्ट ठीक ढंग से काम कर पा रहा था, न हरिहरपुर में संगीत महाविद्यालय था, तब आजमगढ़ की साड़ी को भी कोई मंच नहीं मिल पा रहा था और मुबारकपुर की ब्लैक पॉटरी के लिए भी कोई स्थान नहीं था। आज ब्लैक पॉटरी से जुड़ा कारिगर मुझसे मिला और बहुत खुश होकर उसने मुझसे कहा कि जब से उत्तर प्रदेश में डबल इंजन की सरकार आई है, हमारा कारोबार कई गुना बढ़ा है। इस बार निरहुआ को जिताइए सीएम योगी ने कहा कि आजमगढ़ में 10 विधानसभा सीटें हैं। भाजपा ने एक भी नहीं जीतीं। इसके बावजूद हमारी सरकार ने आजमगढ़ के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले चुनाव में निरहुआ की जीत जरूर होगी। उन्होंने आजमगढ़ से सांसद रहे निरहुआ की चुटकी लेते हुए कहा कि मैं तो कहता हूं कि अपनी कुछ फिल्मों की शूटिंग यहां भी किया करो। आजमगढ़ के नौजवानों को भी अपनी कला के प्रदर्शन का मौका दो।

यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2026: लिखित परीक्षा के बाद फिजिकल टेस्ट की पूरी प्रक्रिया

 यूपी पुलिस में सरकारी नौकरी के लिए लाखों युवाओं ने 32 हजार वाली भर्ती का पेपर दिया है। लिखित परीक्षा 8, 9 और 10 जून को ली जा चुकी है। अब कैंडिडेट्स आंसर-की और रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। इन सभी के बीच आपको भर्ती के अगले चरण के बारे में भी डिटेल में जानकारी होनी भी जरूरी है। तभी आप अभी से उसकी तैयारी शुरू कर सकते हैं। इस भर्ती में सेलेक्शन के लिए कॉम्पिटिशन तगड़ा है, ऐसे में अच्छी तैयारी ही आपको पुलिस की इस नौकरी के करीब ले जा सकती है। यूपी पुलिस सिपाही रिटन एग्जाम कटऑफ क्वालिफाई करने के अगले चरण में फिजिकल टेस्ट होता है। जिसके लिए भर्ती बोर्ड द्वारा पूरा शेड्यूल जारी किया जाता है। यह प्रक्रिया लिखित परीक्षा के रिजल्ट जारी के बाद शुरू होती है। लेकिन आमतौर पर अभ्यर्थी इसकी प्रिपरेशन एग्जाम देने के बाद से ही शुरू कर देते हैं। यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती 2026 यूपी पुलिस की इस भर्ती के जरिए आरक्षी नागरिक पुलिस (कॉन्स्टेबल) महिला/पुरुष, कॉन्स्टेबल पीएसीसी/सश्स्त्र पुलिस, विशेष सुरक्षा बल, महिला बटालियन, घुड़सवार और जेल वार्डर के पद भरे जाएंगे। सबसे ज्यादा पद इसमें कॉन्स्टेबल पीएससी/सशस्त्र पुलिस और कॉन्स्टेबल नागरिक पुलिस के हैं। इसके बाद अन्य पोस्ट में रिक्तियां हैं। इन पदों के लिए उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा, फिजिकल टेस्ट, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, मेडिकलट टेस्ट आदि चरणों के जरिए किया जाता है। रिटन एग्जाम में आपकी पढ़ाई और बौद्धिक क्षमता को देखा जाता है। वहीं फिजिकल टेस्ट में कैंडिडेट्स की शारीरिक क्षमता का परीक्षण लिया जाता है। यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल फिजिकल टेस्ट के चरण 1. डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन: लिखित परीक्षा में सफल पाए जाने वाले अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया जाता है। इसमें कैंडिडेट्स के आरक्षण, उम्र, शैक्षिक योग्यता संबंधित सभी डॉक्यूमेंट्स की जांच होती है। आवेदन पत्र और दस्तावेज दोनों में अंकित सूचनाएं समान होनी चाहिए। इसके लिए आप डॉक्यूमेंट्स आप अभी से तैयार कर सकते हैं।     आधार कार्ड     पैन कार्ड     10वीं की मार्कशीट     12वीं की मार्कशीट     जाति प्रमाण पत्र ओबीसी/ईडब्ल्यूएस/ एससी/ एसटी (जो भी लागू हो)     मूल निवास प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)     आय प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)     पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ     अन्य डॉक्यूमेंट्स (जिनका जिक्र आपने आवेदन के समय किया हो) 2. हाइट: महिला और पुरुष दोनों अभ्यर्थियों के लिए हाइट संबंधित नियम अलग-अलग तय किए गए हैं। लड़कों की हाइट- सामान्य/अन्य पिछड़े वर्गों और अनुसूचित जातियों के पुरुष अभ्यर्थियों की न्यूनतम लंबाई 168 सेमी होनी चाहिए। वहीं एसटी पुरुषों की हाइट 160 सेमी तक मान्य होगी। लड़कियों की हाइट- समान्य/ओबीसी/एससी महिला कैंडिडेट्स की लंबाई 152 सेमी होनी चाहिए। वहीं एसटी महिलाओं की हाइट 147 सेमी तक हो। 3. सीना: पुरुष अभ्यर्थियों की हाइट के साथ सीना का माप भी लिया जाएगा। जनरल/ओबीसी/एसटी अभ्यर्थियों का न्यूनतम सीना 79 सेमी बिना फुलाए और फूलने के बाद 84 सेमी होना चाहिए। वहीं एसटी कैंडिडेट्स की छाती 77 सेमी और फुलने के बाद 82 सेमी तक हो। 4. वजन: महिला अभ्यर्थियों का न्यूनतम वज 40 केजी तक होना जरूरी है। यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती में दौड़ कितनी होती है? डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और हाइट चेस्ट और वजन की मेजरमेंट के बाद कैंडिडेट्स को दौड़ लगानी होती है।     पुरुषों की रनिंग- लड़कों को 4.8 किमी दौड़ के लिए 25 मिनट दिया जाता है।     महिलाओं की दौड़- लड़कियों को 14 मिनट में 2.4 किमी की दौड़ पूरी करनी होती है। जो अभ्यर्थी दौड़ निश्चित समय में पूरी नहीं करते हैं, वो असफल हो जाते हैं और भर्ती के इसी चरण से बाहर हो जाते हैं। शारीरिक दक्षता परीक्षा में भी सफल होने वाले कैंडिडेट्स में से बोर्ड लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर चयन सूची तैयार करता है। जिसमें अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों की जानकारी होती है।

यूपी की पंचायतों में वित्तीय अनियमितता का खुलासा, नियमों को दरकिनार कर करोड़ों का भुगतान

लखनऊ उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने से ठीक पहले ग्राम पंचायतों में सरकारी धन के भुगतान को लेकर बड़ा खेल सामने आया है। कानपुर की 35 ग्राम पंचायतों में नियमों को दरकिनार कर करीब 38.41 लाख रुपये का मनमाने तरीके से भुगतान कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद पंचायतीराज निदेशालय ने गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे। डीपीआरओ मनोज कुमार ने सभी ग्राम पंचायत सचिवों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। 26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होना था। इससे पहले पंचायत खातों में बची धनराशि को खर्च करने की होड़ मच गई। इसी जल्दबाजी में कई ग्राम पंचायतों में नियमों को ताक पर रखकर भुगतान कर दिए गए। कानपुर की 590 ग्राम पंचायतों में से 565 पंचायतों ने नियमों का पालन किया लेकिन घाटमपुर, सरसौल, भीतरगांव, चौबेपुर, कल्याणपुर, पतारा, शिवराजपुर और बिधनू ब्लॉकों की 35 ग्राम पंचायतों में एक अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच करीब 38.41 लाख रुपये का भुगतान मनमाने तरीके से कर दिया। मॉनीटरिंग हुई तो पता चला कि भुगतान निर्धारित गेट-वे पोर्टल के बजाय बाहरी कंप्यूटरों और अन्य स्थानों से किए गए। नियम 15वें वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग की धनराशि से होने वाले सभी विकास कार्यों का भुगतान केवल ग्राम सचिवालय में स्थापित कंप्यूटर से, निर्धारित आईपी एड्रेस से ही होंगे। प्रदेश के 74 जिले में 22.11 करोड़ का भुगतान मनमाने भुगतान का मामला सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं है। प्रदेश भर के 74 जिलों की 2542 ग्राम पंचायतों में करीब 22.11 करोड़ रुपये के भुगतान नियमों को दरकिनार कर करने का खुलासा हुआ है। इसके बाद पंचायती राज निदेशक ने सभी जिलों के डीपीआरओ से जवाब मांगा है और संबंधित सचिवों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है ग्राम प्रधान बनाए गए हैं प्रशासक यूपी में पहली बार ग्राम प्रधानों को प्रशासक पद की जिम्मेदारी दी गई है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देरी के कारण ग्राम पंचायतों की बागडोर ग्राम प्रधानों के हाथ में ही रखे जाने का निर्णय लिया गया है। 26 मई को ग्राम प्रधानों का पांच वर्ष का कार्यकाल खत्म हो रहा था। ऐसे में 27 मई से निर्वतमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में काम कर रहे हैं। छह महीने या पंचायत चुनाव होने के बाद नई ग्राम पंचायत की प्रथम बैठक की तिथि तक जो भी पहले हो प्रधानों को प्रशासक पद की जिम्मेदारी दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह फैसला किया गया है। यूपी में वर्ष 2021 में कुल 58195 ग्राम पंचायत प्रधान निर्वाचित हुए थे। उनकी पहली बैठक 27 मई 2021 को हुई थी। ऐसे में ग्राम प्रधानों का पांच वर्ष का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो गया था।

उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन और एनएसई के बीच हुआ एमओयू

यूपी के 1.5 लाख से अधिक युवाओं को मिलेगी निशुल्क फाइनेंशियल स्किल्स की ट्रेनिंग उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन और एनएसई के बीच हुआ एमओयू यूपीएसडीएमयू और डीडीयू-जीकेवाई के 1000 से अधिक केन्द्रों में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवा होंगे लाभांवित  रोजगार के साथ-साथ युवाओं को ‘स्किल + फाइनेंशियल इंटेलीजेंस’ मॉडल पर आत्मनिर्भर बनाएगा मिशन   मिशन मुख्यालय में वर्कशॉप का आयोजन, अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी जानें फाइनेंस मैनेजमेंट के 12 मूल मंत्र  लखनऊ,  प्रदेश के युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार से जोड़ना ही अब योगी सरकार का लक्ष्य नहीं है, बल्कि अपनी प्राथमिकताओं का दायरा बढ़ाते हुए युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त, जागरूक और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार नागरिक बनाना भी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री योगी के इसी विजन को धरातल पर उतारते हुए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के बीच शुक्रवार को एमओयू हुआ। मिशन निदेशक पुलकित खरे की पहल पर पहली बार कौशल प्रशिक्षण को वित्तीय शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। इस साझेदारी के तहत यूपीएसडीएम तथा दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू जीकेवाई) के अंतर्गत प्रदेश भर में 1000 से अधिक ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे 1.5 लाख से अधिक युवाओं को अगले हफ्ते से फाइनेंशियल स्किलिंग की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। मिलेगी फाइनेंशियल स्किलिंग की ट्रेनिंग एमओयू से पहले मिशन मुख्यालय स्थित सभागार में फाइनेंशियल लिटरेसी एंड अवेयरनेस वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसमें विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों को वित्तीय जागरूकता एवं आर्थिक निर्णय क्षमता का महत्व बताया गया। मिशन निदेशक भी वर्कशॉप में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि आज के समय में ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाओं और वित्तीय अनिश्चितताओं के दौर में युवाओं को वित्तीय शिक्षा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने फाइनेंशियल स्किलिंग की ट्रेनिंग देने का निर्णय लिया है ।  एक्सपर्ट्स ने बताए वित्तीय सफलता के 12 मूल मंत्र प्रेसेंटेशन के माध्यम से एनएसई के अधिकारियों ने फाइनेंशियल सक्सेस के 12 मूल मंत्र बताए। उन्होंने बताया पहले खुद के भविष्य के लिए बचत करें। इनकम से कम खर्च करें। आपातकालीन फंड तैयार रखें। हाई इंटरेस्ट पर ऋण लेने से बचें, रेगुलर इन्वेस्टमेंट करें। इन्वेस्टमेंट में विविधता रखें। रिस्क और रिटर्न की समझ रखें। टैक्स को देखते हुए निवेश करें। आवश्यक बीमा करवाएं। लॉन्ग टर्म एसेट्स लें और समय-समय पर इन्वेस्टमेंट की समीक्षा करें। ‘सारथी एप’ बनेगा युवाओं का डिजिटल वित्तीय मार्गदर्शक वर्कशॉप  में कर्मचारियों को सारथी एप (SaaRthi App) के बारे में भी विस्तार से बताया गया। यह इन्वेस्टमेंट एजुकेशन के लिए बनाया गया एक उपयोगी डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो उपयोगकर्ताओं को इन्वेस्टमेंट संबंधी शैक्षणिक वीडियो, वित्तीय योजना के टूल्स, कैलकुलेटर और फाइनेंशियल हेल्थ चेकअप जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। कौशल के साथ आर्थिक समझ भी जरूरी  यह एमओयू प्रदेश के युवाओं के जीवन में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आएगा। कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार पाने वाले युवा अब केवल आय अर्जित नहीं करेंगे, बल्कि यह भी समझेंगे कि पहली सैलरी का सही उपयोग कैसे करें, बजट और बचत कैसे शुरू करें, इन्वेस्टमेंट कब और कहां करना चाहिए, अनावश्यक ऋण से कैसे बचना है, भविष्य की आर्थिक सुरक्षा कैसे तैयार करनी है। यह ट्रेनिंग युवाओं को घर खरीदने, व्यवसाय शुरू करने, परिवार की आर्थिक सुरक्षा, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवानिवृत्ति जैसे जीवन के बड़े निर्णय लेने में भी सक्षम बनाएगी। साथ ही वित्तीय जागरूकता उन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी निवेश योजनाओं और आर्थिक जोखिमों से सुरक्षित रहने में भी मदद करेगी। युवाओं को “स्किल + फाइनेंशियल इंटेलीजेंस” के माध्यम से रोजगार से आगे बढ़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने वाला एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। वर्कशॉप में अपर मिशन निदेशक पूजा मिश्रा, जॉइंट डायरेक्टर मयंक गंगवार, वित्त नियंत्रक संदीप कुमार, असिस्टेंट डायरेक्टर एम के सिंह, असिस्टेंट डायरेक्टर पवित्रा टंडन व मिशन के अन्य कर्मचारी मौजूद रहें। वहीं, एनएसई से चीफ रेग्युलेटरी ऑफिसर अंकित शर्मा, वाइस प्रेसिडेंट जोगिंदर सिंह और यूपी रीजन की सीनियर इंचार्ज श्रुति शर्मा भी वर्कशॉप में मौजूद रहीं । वर्जन कौशल विकास का वास्तविक उद्देश्य तब तक अधूरा है, जब तक हमारे युवा अपनी कमाई का सही उपयोग और मैनेजमेंट करना न सीखें। आज रोजगार पाना जरूरी है, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक है वित्तीय रूप से समझदार बनना। एनएसई के साथ यह साझेदारी युवाओं को स्किल + फाइनेंशियल इंटेलीजेंस के मॉडल पर तैयार करेगी, जिससे वे केवल नौकरी पाने वाले नहीं बल्कि आर्थिक रूप से सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे।  – पुलकित खरे, मिशन निदेशक, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन

योगी सरकार की हरित पहल: उत्तर प्रदेश की सड़कों पर जल्द दौड़ेंगी हाइड्रोजन बसें

योगी सरकार की हरित पहल: उत्तर प्रदेश की सड़कों पर दौड़ेंगी हाइड्रोजन बसें डीजल से हाइड्रोजन तक: भविष्य के परिवहन मॉडल का नेतृत्व कर रहा यूपी प्रत्येक हाइड्रोजन बस में होंगी 42 सीटें, एक बार में 750 किमी. की यात्रा, प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन भी लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों के साथ 3 हाइड्रोजन बसों को भी हरी झंडी दिखाई। यह पहल प्रदेश को हरित परिवहन की दिशा में आगे ले जाएगी। इससे प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन होगा। एनटीपीसी दादरी द्वारा विकसित ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी परियोजना के तहत इन बसों का निर्माण किया गया है। ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है। डीजल व पेट्रोल आधारित वाहनों की तुलना में हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसें पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल हैं। इन बसों से उत्सर्जन के रूप में केवल पानी निकलता है, जिससे वायु प्रदूषण की समस्या नहीं होती। यही कारण है कि दुनिया के विकसित देश भी हाइड्रोजन आधारित परिवहन को बढ़ावा दे रहे हैं और अब उत्तर प्रदेश भी इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाता दिखाई देगा। हर साल एक हजार टन कार्बन उत्सर्जन होगा कम इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के जल का उपयोग किया जा रहा है। इससे प्राकृतिक जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा। साथ ही प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन होगा, जो लगभग 1750 पेड़ लगाने के बराबर है। इसके अलावा इस परियोजना से प्रति वर्ष करीब 1000 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। एक बार में 750 किमी तक यात्रा संभव 42 यात्रियों की क्षमता वाली प्रत्येक बस में एक बार में 56 किलोग्राम हाइड्रोजन भरी जा सकेगी, जिससे लगभग 750 किलोमीटर तक की यात्रा संभव होगी। ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी परियोजना स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यह परियोजना न केवल प्रदूषण कम करेगी, बल्कि भविष्य के हरित परिवहन मॉडल का भी मार्ग प्रशस्त करेगी।

विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ, मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे सीएम योगी

विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री योगी मुख्य अतिथि के रूप में होंगे शामिल देश के सबसे बड़े विज्ञान आंदोलन का राष्ट्रीय अधिवेशन 13 -14 जून को काशी हिंदू विश्वविद्यालय में  राष्ट्रीय अधिवेशन में देश-विदेश के लगभग 1200 प्रतिनिधि हो रहे शामिल  विज्ञान भारती के सदस्य, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि एवं विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ हो रहे शामिल  अधिवेशन का उद्देश्य वैज्ञानिक एवं सामाजिक चुनौतियों पर चर्चा कर वैज्ञानिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर भारत के लिए कार्ययोजना तैयार करना   वन हेल्थ, विकसित भारत हेतु नेट ज़ीरो तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं नैतिकता जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर भी होगी विशेष चर्चा  वाराणसी,   काशी हिन्दू विश्वविद्यालय और वैदिक विज्ञान केंद्र के संयुक्त  तत्वावधान में आयोजित  विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में 13 जून की सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह सत्र विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार एवं राष्ट्रीय विकास से संबंधित विचार-विमर्श की दिशा निर्धारित करेगा। भारत के सबसे बड़े विज्ञान आंदोलन विज्ञान भारती का 7 वां राष्ट्रीय अधिवेशन 13 एवं 14 जून को काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में आयोजित किया जा रहा है।  इस दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में देश-विदेश से लगभग 1200 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।  इनमें विज्ञान भारती के सदस्य, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि एवं विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ सहभागिता करेंगे। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा उद्घाटन सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी,नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. शेखर सी. मांडे भी उद्घाटन सत्र में सहभागिता करेंगे। अधिवेशन में देश के प्रमुख संस्थानों एवं सरकारी संगठनों से जुड़े प्रतिष्ठित वक्ता एवं विचारक अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। वन हेल्थ विषयक सत्र का नेतृत्व राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग  के अध्यक्ष डॉ. बी. एन. गंगाधर करेंगे, जिसमें शिक्षण, स्वास्थ्य एवं अनुसंधान संस्थानों से जुड़े विशिष्ट विशेषज्ञ भाग लेंगे।  विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. शिवकुमार शर्मा ने जानकारी दी कि इस अधिवेशन का उद्देश्य समसामयिक वैज्ञानिक एवं सामाजिक चुनौतियों पर सार्थक विमर्श करते हुए वैज्ञानिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर भारत के लिए एक कार्ययोजना तैयार करना है। इस वर्ष के अधिवेशन में वन हेल्थ, विकसित भारत हेतु नेट ज़ीरो तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं नैतिकता जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर विशेष चर्चा की जाएगी। विकसित भारत हेतु नेट ज़ीरो विषयक सत्र का नेतृत्व मध्य प्रदेश शासन के ऊर्जा तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव मनु श्रीवास्तव करेंगे। इस सत्र में सतत विकास एवं ऊर्जा संक्रमण से जुड़े विभिन्न आयामों पर चर्चा होगी।  राष्ट्रीय महासचिव विवेकानन्द पाई ने बताया कि अधिवेशन के दूसरे दिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं नैतिकता विषयक विशेष सत्र का नेतृत्व भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व सचिव तथा इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी के पूर्व अध्यक्ष और पद्मश्री पुरस्कृत प्रो. आशुतोष शर्मा करेंगे। इस सत्र में शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं तथा तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा समाज हित में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उत्तरदायी एवं नैतिक उपयोग पर विचार-विमर्श किया जाएगा। अधिवेशन में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार का सार्वजनिक व्याख्यान भी आयोजित किया गया है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल विशेष उद्बोधन देंगे तथा अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर विशेष व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे।  संचालक समिति सदस्य ,प्रो रामनारायण द्विवेदी  ने बताया विज्ञान भारती द्वारा इस अवसर पर “भारत के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार  नीति” संबंधी प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। 14 जून को आयोजित समापन सत्र में भारत सरकार के रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर तथा प्रो. गोवर्धन दास विशिष्ट अतिथि के रूप में समारोह में शामिल होंगे।   विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन विज्ञान भारती  के क्षेत्र संगठन मंत्री अंकित राय ने जानकारी दी कि यह राष्ट्रीय अधिवेशन संवाद, सहयोग एवं नीति-निर्माण के लिए एक प्रभावी मंच सिद्ध होगा जो भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को सुदृढ़ करने तथा “विकसित भारत” के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।