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यूपी में 5 लाख किसानों को तगड़ा झटका, पीएम किसान की किस्त नहीं मिलेगी, उलटे पैसे लौटाने होंगे

लखनऊ  किसानों की आर्थिक मदद के लिए चलाई जा रही पीएम किसान सम्मान निधि योजना में लगातार फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। कुछ ही दिन पहले राजस्थान के जालोर में 33638 फर्जी किसानों के खाते में करोड़ों रुपये की राशि जाने का मामला सामने आया था। अब उत्तर प्रदेश से वेरिफिकेशन ड्राइव में पात्र नहीं होने के बावजूद पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने का मामला सामने आ आया है। यूपी में 5 लाख से ज्यादा ऐसे किसानों के नाम सामने आए हैं, जिनके नाम पीएम किसान सम्मान योजना से कटने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक इन अपात्र किसानों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 20वीं किस्त का पैसा नहीं आएगा। जांच में यह बात सामने आई है कि यूपी में 5 लाख से ज्यादा ऐसे परिवार हैं, जहां पति और पत्नी दोनों ही पीएम किसान सम्मान निधि का पैसा ले रहे थे। जबकि नियम के मुताबिक किसी एक को ही इस योजना का लाभ मिलना चाहिए। सबसे ज्यादा मामले प्रतापगढ़ से सामने आए हैं। जांच में ऐसे खुला मामला प्रशासन लगातार अपात्र किसानों के नाम हटाने के लिए वेरिफिकेशन करने में लगा हुआ है। इसी दौरान जब यूपी कृषि विभाग ने राशन कार्ड का डाटा आधार कार्ड और बैंकों से मिलान किया तो सच्चाई सामने आई। प्रतापगढ़ में 37 हजार से ज्यादा पति-पत्नी इस योजना का लाभ ले रहे थे। वहीं प्रयागराज में भी 29 हजार से ज्यादा मामले सामने आए। इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर सीतापुर और चौथे नंबर पर संभल है। सबसे कम अपात्र किसान गाजियाबाद जिले से मिले हैं। खाते में नहीं आएगी अगली किस्त, वसूली भी होगी इन अपात्र किसानों के खाते में अब पीएम किसान सममान योजना की अगली किस्त नहीं आएगी। यही नहीं प्रशासन इनसे वसूली की भी तैयारी में है। अगर कोई परिवार पहली किस्त से ही योजना का लाभ ले रहा है, तो उसे अब मोटा पैसा चुकाना पड़ सकता है। अगर सरकार 19 किस्तों की वसूली की तैयारी करती है तो 38000 रुपये लौटाने होंगे। पक्की नौकरी फिर भी ले रहे 2000 आधार कार्ड से वेरिफिकेशन करने के बाद और भी कई खुलासे हो रहे हैं। 3000 से ज्यादा मामले ऐसे हैं, जिनके पास पक्की नौकरी या खुद का बिजनेस है। फिर भी पीएम किसान सम्मान योजना का लाभ ले रहे थे। इन लोगों के नाम भी लिस्ट से हटा दिए गए हैं। फार्मर आईडी नहीं बनवाने वालों को भी नुकसान यूपी में अभी भी बड़ी संख्या में किसानों ने फार्मर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। ऐसे में उनके खाते में 20वीं किस्त आने की संभावना बहुत ही कम है। यूपी के कृषि विभाग की वेबसाइट upfr.agristack.gov.in के मुताबिक अभी तक महज 49.78 किसानों ने ही फार्मर रजिस्ट्रेशन कराया है। जबकि राज्य में करीब 2.88 किसान पीएम किसान योजना से जुड़े हुए हैं। पीएम किसान सम्मान योजना की 20वीं किस्त कब आएगी प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना की 20वीं किस्त का इंतजार सभी को है। अभी पीएम नरेंद्र मोदी विदेश दौरे पर हैं। 2 अगस्त को यूपी के वाराणसी में उनका कार्यक्रम है। माना जा रहा है कि इस दिन किसानों के खाते में 2000 रुपये आ सकते हैं। हालांकि PMO, PIB या कृषि मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई भी आधिकारिक जानकारी नहीं आई है।  

भर्ती के बाद मरीजों की सुध नहीं, हाई कोर्ट ने निजी अस्पतालों को बताया ‘ATM मशीन चलाने वाला

 इलाहाबाद निजी अस्पताल मरीजों का एटीएम की तरह इस्तेमाल करते हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक केस की सुनवाई के दौरान गुरुवार को यह टिप्पणी की। अदालत ने लापरवाही के एक मामले में डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक केस हटाने की मांग को खारिज करते हुए यह बात कही। जस्टिस प्रशांत कुमार की बेंच ने पाया कि डॉ. अशोक कुमार ने एक गर्भवती महिला को सर्जरी के लिए एडमिट कर लिया था, जबकि उनके पास एनेस्थिटिस्ट की कमी थी। वह काफी देर से पहुंचा और तब तक गर्भ में पल रहे भ्रूण की मौत हो गई थी। अदालत ने कहा कि यह सामान्य हो गया है कि अस्पताल पहले मरीजों को भर्ती कर लेते हैं और फिर संबंधित डॉक्टर को बुलाया जाता है। अदालत ने कहा, 'यह एक सामान्य प्रैक्टिस देखी जा रही है कि निजी अस्पताल मरीजों को इलाज के लिए एडमिट कर लेते हैं। भले ही उनके पास संबंधित बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर न हो। मरीजों को भर्ती करने के बाद ही ये डॉक्टर को कॉल करते हैं। एक बार मरीज को एडमिट करने के बाद ये लोग डॉक्टरों को कॉल करना शुरू करते हैं। यह सामान्य धारणा बन गई है कि निजी अस्पतालों की ओर से मरीजों का इस्तेमाल एक एटीएम की तरह किया जाता है, जिनसे पैसों की उगाही होती है।' बेंच ने कहा कि ऐसे मेडिकल प्रोफेशनल्स को संरक्षण मिलना ही चाहिए, जो पूरी गंभीरता के साथ काम करते हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे लोगों पर ऐक्शन जरूरी है, जो बिना पर्याप्त सुविधा के ही अस्पताल खोल लेते हैं। ऐसा सिर्फ इसलिए ताकि वे मरीजों से मनमाने पैसे कमा सकें। अदालत ने सुनवाई के दौरान डॉक्टर के उस दावे को खारिज कर दिया कि उस समय महिला के परिजन ऑपरेशन के लिए तैयार ही नहीं थे। बेंच ने कहा कि यह मामला पूरी तरह से लापरवाही और अवैध कमाई करने का है। अदालत ने कहा कि डॉक्टर ने महिला को एडमिट कर लिया। परिवार से यह मंजूरी मिल गई कि ऑपरेशन किया जाए, लेकिन उसे टाला जाता रहा क्योंकि सर्जरी के लिए डॉक्टर ही उपलब्ध नहीं था। परिजनों से परमिशन के बाद भी ऑपरेशन में हुई लेट, क्योंकि डॉक्टर नहीं था बेंच ने कहा कि डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए 12 बजे अनुमति ले ली थी। इसके बाद भी सर्जरी नहीं हो सकी क्योंकि असप्ताल में डॉक्टर ही नहीं था। अदालत ने कहा कि एक डॉक्टर का संरक्षण उसी स्थिति में किया जाना जरूरी है, जब वह पूरे मन से काम कर रहा हो। फिर भी गलती हो तो उसे ह्यूमन फैक्टर मानकर नजरअंदाज किया जा सकता है। लेकिन लापरवाही के ऐसे मामलों में इस चीज को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

फतेहपुर विवाद: दिव्यांग के घर गिराने पर SDM पर गिरी गाज, सरकार ने किया सस्पेंड

फतेहपुर यूपी में फतेहपुर में दलित दिव्यांग परिवार का घर बुलडोजर से गिराने के मामले में कानूनगो जितेन्द्र सिंह और ट्रेनी लेखपाल पर ऐक्शन के बाद अब एसडीएम अर्चना अग्निहोत्री को भी सस्पेंड कर दिया। वह निलंबित रहने तक राजस्व परिषद से संबंध रहेंगी। उनके खिलाफ जांच लखनऊ कमिश्नर को दी गई है। नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज ने गुरुवार को यह आदेश जारी किया। आरोप हैं अर्चना ने मौके पर जाकर निरीक्षण नहीं किया और अपने पद के दायित्वों का शिथिलतापूर्वक पालन किया। अर्चना अग्निहोत्री के निलंबन के बाद महकमे में सनसनी फैल गई। ऐसा माना जा रहा है कि मामले में संलिप्त अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी जल्द कार्रवाई संभव है। बता दें कि बरमतपुर प्रकरण को लेते हुए शासन ने कडी कार्रवाई करने का भरोसा दिया था। डीएम स्तर पर कानून गो जितेन्द्र सिंह और ट्रेनी लेखपाल आराधना देवी के निलंबन के बाद से मामले में अफसरों व अन्य कर्मचारियों पर कार्रवाई होने की बात सामने आ रही थी। खास कर टीम गठित करने वाले तहसीलदार समेत उसमें शामिल अधिकारी कर्मचारी राडार पर थे। खास कर सदर एसडीएम व तहसीलदार पर कार्रवाई की तलवार लटक रही थी। एसडीएम के बाद अब तहसीलदार व अन्य लेखपाल जद में आ सकते है। वहीं नायब तहसीलदार कांधी के खिलाफ राजस्व परिषद को हुई लिखापढ़ी पर भी जल्द कार्रवाई का आदेश आने की उम्मीद है। वहीं विधायक जयकुमार जैकी का कहना है कि दलित परिवार को बेघर करने वालों के खिलाफ कार्रवाई सूबे में मिशाल बनेगी। शासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। प्रकरण में ढहाने का आदेश देने वाले अफसर भी खुद को बचा नहीं पाएंगे। दिया भरोसा हम साथ हैं: ब्लाक प्रमुख गुरुवार को अमौली ब्लाक प्रमुख सुशीला देवी बरमतपुर गांव पहुंच पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने ढहाए गए घर और मलबे के नीचे दबी गृहस्थी को देखते हुए अफसरों की कार्रवाई की निंदा की। पी़ड़ितों को भरोसा दिया कि वह मुसीबत की घड़ी में परिवार के साथ है। उन्होंने परिवार को राशन सामग्री समेत जरूरत का सामान सौंपते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होने का भरोसा दिया।

यूपी पंचायत चुनाव से पहले इटियाथोक को नगर पंचायत बनाने की प्रक्रिया तेज

गोंडा  यूपी के गोंडा जिले में इटियाथोक कस्बे को फिर नगर पंचायत का दर्जा देने की कवायद शुरू हुई है। जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने इटियाथोक को नगर पंचायत का दर्जा देने लिए इटियाथोक ब्लॉक को पत्र भेजकर सूचना मांगी गई है। डीएम के निर्देश पर ब्लॉक कार्यालय में इस सबंध में तेजी देखने को मिली है। सूत्रों की माने तो इटियाथोक को केन्द्र मानकर ग्राम पंचायत हरैया झूमन, तेलियानी कानूनगो, करुवापारा, आंशिक पारासराय सहित अन्य ग्राम पंचायतों को शामिल किया जा सकता है। इस संबंध में खण्ड विकास अधिकारी विजय कुमार मिश्रा ने बताया जिलास्तर से मांगी गई रिपोर्ट तैयार करवाई जा रही है। तहसील स्तर से भी नक्शा बनाने की भी प्रकिया शुरू हो चुकी है। बीडीओ ने बताया इटियाथोक को केन्द्र मानकर उसके परिधि में आने वाले अगल-बगल की ग्राम पंचायतों को इसमें शामिल किया जायेगा ताकि आबादी का मानक पूरा हो सके। नगर पंचायत का दर्जा मिलने के लिए आबादी 20 हजार होनी चाहिए। इटियाथोक नगर पंचायत गठन के लिए काफी दिनों से मांग चल रही थी। दो वर्ष बाद जिलास्तर से दूसरी बार शासन को प्रस्ताव भेजने की कवायद शुरू हुई है। तत्कालीन डीएम डॉ उज्जवल कुमार ने शासन को इटियाथोक, तरबगंज, धानेपुर और बेलसर को नगर पंचायत का दर्जा देने लिए प्रस्ताव भेजा गया था। नगरीय दर्जा पाने का मानक पूरा करता है इटियाथोक गोण्डा-बलरामपुर मार्ग पर स्थित कस्बा इटियाथोक नगरीय दर्जा पाने के लिए कई मानक पूरे करता है। कस्बे में रेलवे स्टेशन, विकास खण्ड कार्यालय, पशु चिकित्सालय, सीएचसी, कोतवाली, आंगनबाड़ी कार्यालय, कृषि विभाग, दो डिग्री कॉलेज, आधा दर्जन से अधिक इण्टर कालेज संचालित है। यहां की आबादी भी करीब 20 हजार के आसपास है।

बरेली हादसा: तेज रफ्तार ट्रक ने ऑटो को मारी टक्कर, महिला व बच्चा मृत, मां समेत तीन घायल

बरेली बरेली के फरीदपुर थाना क्षेत्र में नवादावन गांव के समीप गलत दिशा से आ रही कार से बचने के लिए चालक ने अपना ऑटो को बचाया, तभी पीछे से आ रहे ट्रक की टक्कर लगने से ऑटो आगे वाले ट्रक में जा घुसा। हादसे में ऑटो चालक की पत्नी और मासूम बेटे की मौत हो गई। तीन लोग गंभीर घायल हुए हैं। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। जानकारी के मुताबिक शाहजहांपुर के कटरा थाना क्षेत्र के गांव कपूर नगला निवासी जसवीर ऑटो चलाते हैं। उनकी बहन के घर ढकिया तिवारी गांव में शनिवार को बच्चे का नामकरण कार्यक्रम है। जिसमें छोछक (एक रस्म) ले जाने के लिए जसवीर अपने गांव से फरीदपुर कपड़े खरीदने आ रहे थे। ऑटो में वह उनकी मां रामसनेही, पत्नी पिंकी (24 वर्ष), बेटा राघव (एक वर्ष) सवार थे। उन्होंने रास्ते में खुदागंज से दो अन्य सवारियां बैठा लीं।   नवादावन गांव के समीप हुआ हादसा नेशनल हाईवे पर फरीदपुर थाना क्षेत्र के नवादावन गांव के समीप गलत दिशा से कार आ रही थी। जसवीर ने कार से बचने के लिए ऑटो बचाया। इसी दौरान पीछे से आए ट्रक ने ऑटो को टक्कर मार दी। जिससे ऑटो आगे चल रहे ट्रक से जा टकराया। हादसे में जसवीर की पत्नी पिंकी और बेटे राघव की मौत मौके पर ही हो गई। मां रामसनेही समेत अन्य दो सवारियां गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसे के बाद दोनों ट्रक व कार चालक मौके से फरार हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को निजी एंबुलेंस से अस्पताल भिजवाया। मृतकों के शवों का पंचनामाभर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ऑटो चालक जसवीर को मामूली चोट आई है। हादसे में पत्नी-बेटे की मौत से उसका रो-रोकर बुरा हाल है।  

बीजेपी कार्यकर्ता की निर्मम हत्या: हमलावरों ने मारीं 8 गोलियां, चेहरा छलनी

अलीगढ़ तालानगरी क्षेत्र के गांव कोंडरा निवासी पेशे से प्रॉपर्टी डीलर तथा भाजपा कार्यकर्ता की गांव 200 मीटर आगे निकलते ही ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। हत्यारे मृतक के खास परिचित थे जिन्होंने हत्या से पूर्व कई मिनट तक बातचीत की थी। परिजन शव को लेकर अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एसएसपी ने घटना स्थल का निरीक्षण कर थाना पुलिस समेत एसओजी की आवश्यक दिशा निर्देश दिए हैं। कोंडरा गांव निवासी 45 वर्षीय सोनू चौधरी पुत्र सरदार सिंह प्रॉपर्टी डीलर का काम करते थे साथ ही भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता थे। इनके बड़े भाई देवेंद्र चौधरी ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे वह अपनी क्रेटा कार लेकर घर से अकेले निकले थे, गांव से करीब 200 मीटर आगे निकलते ही बाइक सवार दो लोगों ने मृतक सोनू को रोक लिया, एक अंदर जाकर सोनू की बगल वाली सीट पर बैठ गया जबकि दूसरा ड्राइवर साइड में खड़ा रहा। इस दौरान मृतक का पारिवारिक भतीजा सुमित वहां से गुजरा जिसने दोनों को देखा और सामान्य बातचीत समझकर गांव की ओर बढ़ गया। वहीं, कुछ देर बाद ही मौका देखकर बाहर खड़े व्यक्ति ने सोनू को निशाना बनाकर चार गोलियां दाग दी, साथ ही अंदर बैठे हमलावर ने भी करीब 7-9 गोलियां दागी और बाहर निकलकर बाइक लेकर फरार हो गए। इधर, गोलियों की तड़तड़ाहट सुनकर निकटवर्ती लोग घटना स्थल की ओर दौड़े, पहचानकर सोनू के घर सूचना दी। आनन-फानन में परिजन निजी वाहन से मृतक सोनू को लेकर क्वार्सी क्षेत्र के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने सोनू को मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने फील्ड यूनिट की टीम को मौके पर बुला लिया तथा साक्ष्य संकलित कराए। एसएसपी संजीव सुमन भी मौके पर पहुंचे तथा लगभग आधा घंटे तक जानकारी लेने व कार का परीक्षण करने के बाद थाना पुलिस समेत एसओजी की टीम को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।  घटना स्थल पर पुलिस कारवाई के दौरान मृतक के सबसे बड़े भाई देवेंद्र चौधरी मौजूद रहे लेकिन हत्याकांड की वजह को लेकर वह कुछ बता नहीं सके। गांव के सीसीटीवी कैमरे खंगालने में जुटी पुलिस… घटना के बाद मौके पर पहुंचे एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि घटना के बाद गोलियों की आवाज सुनकर जब वह कार की ओर गया तो देखा दो लोग बाइक लेकर गांव की ओर भाग रहे थे। इस जानकारी के आधार पर पुलिस की एक टीम गांव में लगे सीसीटीवी कैमरे खंगालकर घटना की जांच पड़ताल में जुट गई है। हत्याकांड में किसी खास परिचित का हाथ मान रहा परिवार… जिस तरह से सोनू की हत्या की गई उस परिस्थिति को देखकर परिवारीजन हत्याकांड में किसी खास परिचित की भूमिका मान रहे हैं। गांव से कुछ दूरी पर ही बाइक सवार युवक को मृतक सोनू ने कार में बैठाया, कार को न्यूटल (बिना गियर के) में खड़ा करके गाड़ी और एसी भी चालू रखा, जबकि सोनू काफी तेज तर्रार था। यदि कोई अपरिचित हत्यारा होता तो शायद वह उसे कार में नहीं बैठाता। हालांकि, घटना के पीछे किसी से पुरानी रंजिश को परिवार फिलहाल नहीं मान रहा है। बाकी पुलिस को भी तहरीर का इंतजार है।

ऊर्जा विभाग की कार्यशैली पर मंथन, सीएम योगी करेंगे बिजली कटौती की समीक्षा

लखनऊ राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऊर्जा विभाग की बैठक बुलाई है। वह अपने आवास पर दोपहर 3:30 बजे ऊर्जा विभाग की समीक्षा करेंगे। बैठक में विभाग के सभी बड़े अधिकारी बुलाए गए हैं। सीएम को बिजली कटौती की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इसको लेकर वह समीक्षा करेंगे। बताते चलें कि एक दिन पहले ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का एक वीडियो सामने आया था, इसमें वह बिजली विभाग के अफसरों से नाराज दिख रहे हैं। दरअसल, प्रदेश में बिजली कटौती की समस्या कम होते नहीं दिख रही है।

रामपुर: कांवड़ खंडित होने पर बवाल, स्टेशन के पास रास्ता जाम

 मुरादाबाद हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे रामपुर मिलक के भक्तों की कांवड़ एक बस से टक्कर लगने के बाद खंडित हो गई। मुरादाबाद रेलवे स्टेशन के पास हुई इस घटना के बाद आक्रोशित कांवड़ियों ने सड़क पर जाम लगा दिया। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइंस और थाना कटघर की पुलिस माैके पर पहुंची। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कांवड़ियों को शांत कराया और उन्हें समझा-बुझाकर जाम खुलवाया। स्थिति को नियंत्रण में लेने के बाद पुलिस ने कांवड़ियों को दूसरी बस की व्यवस्था कर आगे रवाना कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है। कांवड़ियों की आवाजाही लगातार जारी है।

नई गाइडलाइन से बदलेगा सामाजिक ढांचा: धर्मांतरण और फिजूल खर्च पर कड़ा रुख

वाराणसी काशी विद्वत परिषद ने हिंदू परंपराओं और सामाजिक व्यवहार में सुधार के लिए एक नई हिंदू आचार संहिता जारी की है। 400 पन्नों के इस दस्तावेज को देश भर के विद्वानों, शंकराचार्यों, महामंडलेश्वरों और संतों के साथ लंबे विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। नई संहिता में दहेज पर पूर्ण प्रतिबंध, शादियों में फिजूलखर्ची पर रोक और दिन में वैदिक तरीके से विवाह करने की सलाह दी गई है। ब्रह्मभोज में शामिल होंगे केवल 13 लोग अंतिम संस्कार के बाद होने वाले भोज में केवल 13 लोगों को शामिल करने की सीमा तय की गई है। इसके साथ ही प्री-वेडिंग शूट और सगाई जैसी आधुनिक प्रथाओं को भी हतोत्साहित किया गया है। संहिता में हिंदू धर्म में वापसी की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। जिन लोगों ने किसी दबाव में धर्म परिवर्तन कर लिया था, वे लोग अपने गोत्र और नाम सहित हिंदू धर्म में वापस लौट सकेंगे। इसके साथ ही मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए मंदिरों के गर्भगृह में केवल पुजारियों और संतों के प्रवेश की अनुमति होगी। अक्तूबर 2025 में आधिकारिक तौर पर होगी लागू काशी विद्वत परिषद के महासचिव राम नारायण द्विवेदी ने बताया कि इस संहिता को 70 विद्वानों द्वारा विकसित किया गया है। ये विद्वान 11 टीमों और तीन उप-टीमों में विभाजित थे। प्रत्येक टीम में उत्तरी और दक्षिणी भारत के पांच विद्वान शामिल थे। संहिता को अंतिम रूप देने के लिए 40 से ज्यादा बैठकें आयोजित की गईं। उन्होंने बताया कि इस संहिता की 5 लाख प्रतियां पूरे देश में बांटी जाएंगी। इस संहिता को तैयार करने में मनुस्मृति, पराशर स्मृति, देवल स्मृति के साथ-साथ गीता, रामायण, महाभारत और पुराणों के अंशों को शामिल किया गया है। अक्टूबर 2025 में शंकराचार्यों, रामानुजाचार्यों और प्रमुख संतों की स्वीकृति के बाद इस संहिता को आधिकारिक तौर पर लागू किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में कृषि श्रमिकों को मिलेगा नियमित भत्ता, सरकार देगी ₹6552 प्रति माह

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कृषि श्रमिकों को लेकर ऐतिहासिक फैसला लिया है. राज्य सरकार ने कृषि से जुड़े श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी की है, जिससे लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा. अब कृषि श्रमिकों को प्रतिदिन 252 रुपये या मासिक 6552 रुपये का वेतन मिलेगा. सरकार के इस फैसले की खास बात यह है कि अब पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन जैसे कार्यों को भी कृषि श्रम की कैटेगरी में रखा गया है. इससे ऐसे श्रमिकों को भी न्यूनतम मजदूरी के तहत सुरक्षा और लाभ मिल सकेगा, जो पहले असंगठित क्षेत्र में आते थे. मजदूरी का भुगतान अब सिर्फ कैश तक सीमित नहीं रहेगा. सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डिजिटल माध्यम में भी मजदूरी भुगतान करने का फैसला लिया है. इससे लेनदेन पारदर्शी होगा और श्रमिकों को समय पर मजदूरी मिल सकेगी. अब श्रमिकों को प्रति घंटे के हिसाब से भी न्यूनतम मजदूरी दी जाएगी. यह व्यवस्था खास तौर से उन लोगों के लिए लाभकारी है, जो पूरे दिन की बजाय कुछ घंटों के लिए काम करते हैं. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो श्रमिक पहले से इस नई दर से अधिक मजदूरी पा रहे हैं, उन्हें उनका पुराना लाभ मिलता रहेगा. ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल सरकार का मानना है कि इस ऐतिहासिक फैसले से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. सरकार ने इसे सिर्फ आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि श्रमिकों को सम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करने वाला कदम बताया है. प्रदेशभर में सभी प्रकार की खेती, बागवानी, सिंचाई, फसल कटाई और कृषि सहायक कार्यों पर ये नई मजदूरी दरें लागू होंगी. माना जा रहा है कि यह फैसला श्रमिकों के कल्याण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा.