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सपा सरकार में हुआ बाबा साहब के सम्मान के साथ खिलवाड़- अखिलेश यादव पर मंत्री दयाशंकर सिंह का निशाना

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर योगी सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने अखिलेश यादव को पूरी तरह बौखलाया हुआ बताते हुए कहा कि मीडिया के सवालों का जवाब देने के बजाय पत्रकारों की जाति पूछना उनकी बौखलाहट को दिखाता है। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की मूर्तियों को तोड़े जाने के मुद्दे पर भी दयाशंकर सिंह ने सपा के पुराने शासनकाल याद दिलाते हुए गंभीर आरोप लगाए। अंबेडकर की मूर्तियों के मुद्दे पर सपा पर हमला प्रेस कांफ्रेंस में अखिलेश यादव की ओर से बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की मूर्तियां तोड़े जाने का मुद्दा उठाए जाने पर दयाशंकर सिंह ने समाजवादी पार्टी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सपा अपने शासनकाल में बाबा साहब का लगातार अपमान करती रही है। दयाशंकर सिंह के मुताबिक, लखनऊ के अंबेडकर मैदान में स्थापित मूर्ति को भी सपाइयों ने खंडित करने का काम किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान बाबा साहब के सम्मान के साथ खिलवाड़ किया गया। पत्रकारों की जाति पूछने पर अखिलेश पर निशाना दयाशंकर सिंह ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में उनकी जाति पूछने के मुद्दे पर भी अखिलेश यादव को घेरा। उन्होंने कहा कि जब मीडिया सपा शासनकाल में अपराध और बलात्कार के आरोपियों को संरक्षण दिए जाने को लेकर सवाल करती है, तो पत्रकारों के सवालों का जवाब देने के बजाय उनकी जाति पूछी जाने लगती है। ‘अपराधियों को संरक्षण के आरोप मंत्री दयाशंकर सिंह ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान बलात्कारियों और अपराधियों को संरक्षण दिया जाता था। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर मीडिया सवाल उठाती है तो अखिलेश यादव बौखलाहट में पत्रकारों की जाति पूछने लगते हैं। इस तरह का व्यवहार अखिलेश यादव की राजनीतिक बौखलाहट को सामने लाता है। मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने भी बोला हमला वहीं योगी सरकार में मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। सपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने 2012 से 2017 के बीच रहे सपा शासन को भ्रष्टाचार और खराब कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सपा शासन में लोगों के बीच सुरक्षा का अभाव था और कानून व्यवस्था की स्थिति भी ठीक नहीं थी। सपा शासन में भ्रष्टाचार का लगाया आरोप हंसराज विश्वकर्मा ने कहा कि वर्ष 2012 से 2017 के बीच अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उनके कार्यकाल में यूपी में भ्रष्टाचार का बोलबाला था और कानून व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक थी। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों में खुद को सुरक्षित महसूस करने की स्थिति नहीं थी।

अखिलेश को गाय के गोबर में बदबू आती है, योगी के लिए चंदन की तरह पवित्र… धर्मपाल सिंह का बड़ा हमला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार में पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सपा सरकार और योगी सरकार के कार्यकाल में गौ संरक्षण की व्यवस्था का अंतर बताते हुए कहा कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते गाय कसाई को देखकर कांपती थी, जबकि 2017 के बाद स्थिति बदल गई है और अब 'कसाई गाय को देखकर कांपता है। धर्मपाल सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में अवैध स्लॉटर हाउस बंद किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के कार्यकाल में किसान उनकी प्राथमिकता नहीं थे, जबकि योगी सरकार की प्राथमिकता गाय और किसान दोनों हैं। अखिलेश को गोबर में बदबू, योगी के लिए चंदन जैसा पवित्र पशुधन मंत्री ने गाय को लेकर अखिलेश यादव पर भी तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि 'अखिलेश जी को तो गाय के गोबर में बदबू आती है,' जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए गाय का गोबर चंदन की तरह पवित्र है। धर्मपाल सिंह ने गाय की धार्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा कि देसी गाय का दूध अमृत के समान माना गया है और इसी भावना के साथ योगी सरकार गौ संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है। यूपी में 7,500 गौ आश्रय केंद्र, 13 लाख गायें संरक्षित गौ आश्रय स्थलों को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए धर्मपाल सिंह ने कहा कि इस समय उत्तर प्रदेश में छोटे-बड़े मिलाकर करीब 7,500 गौ आश्रय केंद्र हैं, जहां करीब 13 लाख गोवंश संरक्षित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के दौरान निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण के लिए प्रतिदिन 30 रुपये दिए जाते थे, जिसे योगी सरकार ने बढ़ाकर 50 रुपये प्रतिदिन कर दिया है। हर जिले में हरे चारे की व्यवस्था मंत्री ने बताया कि गौ संरक्षण केंद्रों में चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर जिले में एक हेक्टेयर भूमि पर हरा चारा उगाने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि गौचर भूमि को कब्जामुक्त कराकर वहां चारा बोने का काम किया गया है। उन्होंने बताया कि निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए छह विभागों की संयुक्त कमेटी बनाई गई है। इसमें ग्राम विकास, पंचायती राज, राजस्व, पुलिस, पशुधन और नगर विकास विभाग शामिल हैं। जिलाधिकारी को कमेटी का अध्यक्ष और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को संयोजक बनाया गया है। गौ तस्करों पर कार्रवाई, निराश्रित गोवंश को संरक्षण धर्मपाल सिंह ने कहा कि सभी विभाग मिलकर निराश्रित गोवंश के संरक्षण का काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि गौ तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और उन्हें जेल भेजा जा रहा है। पशुधन मंत्री ने कहा कि योगी सरकार की प्राथमिकता गौ संरक्षण है और प्रदेश में निराश्रित गोवंश को संरक्षण देने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का मूल सिद्धांत 'पशु सेवा अस्माकं धर्मः' है और इसी भावना के साथ गौ संरक्षण की व्यवस्था को आगे बढ़ाया जा रहा है।

JPNIC, गोमती रिवर फ्रंट से खनन तक… अखिलेश के आरोपों पर अनिल राजभर ने गिनाए सपा राज के मामले

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री अनिल राजभर ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार पर आरोप लगाने से पहले समाजवादी पार्टी को अपने कार्यकाल के कामकाज का हिसाब देना चाहिए। अनिल राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि हल्का आदमी ही अखिलेश यादव की तरह रोज-रोज बयानबाजी करता है। इसीलिए सपा प्रमुख की उपयोगिता खत्म हो गई है। सपा भ्रष्टाचार की बात करे, यह अजूबा है अनिल राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी का भ्रष्टाचार की बात करना ही अपने आप में अजूबा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा नेता लगातार सरकार को लेकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्री ने कहा कि जनता राजनीतिक दलों के दावों के साथ-साथ सपा के पुराने रिकॉर्ड को भी समझती है। उन्होंने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी मौजूदा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रही है, तो उसे अपने शासनकाल से जुड़े सवालों का भी जवाब देना चाहिए। अनिल राजभर ने इसी सिलसिले में JPNIC, गोमती रिवर फ्रंट, आगरा एक्सप्रेसवे, सरकारी नौकरियों और खनन जैसे मामलों का जिक्र किया। JPNIC से खनन तक के मुद्दे पर सपा को घेरा मंत्री ने कहा कि सपा राज में JPNIC और गोमती रिवर फ्रंट समेत कई परियोजनाओं को लेकर सवाल उठे थे। उन्होंने खनन को लेकर भी सपा सरकार पर निशाना साधते हुए अनियमितताओं के आरोप लगाए। अनिल राजभर ने यह भी कहा कि पिछली सरकार के दौरान खनन से जुड़े मामलों में मंत्रियों को जेल जाना पड़ा। उन्होंने इन मामलों का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी से जवाब मांगा। मंत्री ने कहा कि विपक्ष को मौजूदा सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है, लेकिन उसे अपने कार्यकाल से जुड़े सवालों का भी जवाब देना चाहिए। अखिलेश को सच्चाई सुनने की हिम्मत रखनी चाहिए मीडिया के सवालों को लेकर भी अनिल राजभर ने अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पत्रकार सपा सरकार के कार्यकाल या उत्तर प्रदेश के विकास से जुड़े सवाल पूछते हैं, तो पार्टी के नेता असहज हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के सवाल लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और राजनीतिक दलों को कठिन सवालों का भी जवाब देने की हिम्मत रखनी चाहिए। अनिल राजभर ने आरोप लगाया कि सपा नेता मीडिया के सवालों का जवाब देने के बजाय पत्रकारों को ही निशाना बनाने लगते हैं।

लखनऊ। प्रदेश की योगी सरकार शिक्षा के विस्तार और गुणवत्ता सुधार के साथ-साथ महापुरुषों के गौरवशाली योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में भी निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में मेरठ के फलावदा स्थित जनता पीजी कॉलेज का नाम परिवर्तित कर चौधरी चरण सिंह पीजी कॉलेज, फलावदा, मवाना किए जाने की कार्रवाई की गई है। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक बनाने के साथ ही विद्यार्थियों को देश और समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले महापुरुषों के विचारों एवं जीवन मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रही है। शिक्षण संस्थानों का महापुरुषों के नाम से जुड़ाव विद्यार्थियों को उनके संघर्ष, विचार और योगदान से परिचित कराने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने बताया कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा जनता पीजी कॉलेज, फलावदा के नाम परिवर्तन के संबंध में शासन को प्रस्ताव उपलब्ध कराया गया था। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा प्रस्ताव पर विचार करते हुए नाम परिवर्तन की संस्तुति की गई। इसी क्रम में शासन स्तर से नियमानुसार आवश्यक कार्रवाही करते हुए महाविद्यालय का नाम चौधरी चरण सिंह पीजी कॉलेज, फलावदा, मवाना किए जाने का निर्णय लिया गया है। चौधरी चरण सिंह का देश और प्रदेश के सामाजिक, शैक्षिक एवं कृषि क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। किसानों, ग्रामीण समाज और शिक्षा के प्रति उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। ऐसे महापुरुषों के नाम से शिक्षण संस्थानों का जुड़ना विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का माध्यम बनेगा और उन्हें राष्ट्र निर्माण के प्रति अपने दायित्वों को समझने में मदद करेगा। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि योगी सरकार महापुरुषों के सम्मान को केवल स्मरण तक सीमित रखने के बजाय उनके विचारों और योगदान को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए संस्थागत प्रयास कर रही है। प्रदेश में शिक्षण संस्थानों की पहचान, गौरव और गुणवत्ता को मजबूत करने के साथ-साथ विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाओं, शोध, नवाचार और रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उच्च शिक्षा को नई दिशा देते हुए ऐसे वातावरण का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें युवा ज्ञान, कौशल और संस्कारों के साथ आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह पीजी कॉलेज, फलावदा का नया नाम विद्यार्थियों को चौधरी चरण सिंह के जीवन, विचारों और राष्ट्रहित में उनके योगदान से जोड़ने के साथ ही उन्हें समाज और देश के प्रति जिम्मेदार भूमिका निभाने की प्रेरणा देगा।

योगी सरकार में होगी निपुण लक्ष्य, कैच-अप शिक्षण, होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड और विद्यार्थियों के अधिगम स्तर की समीक्षा

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था में कक्षा-कक्ष की गुणवत्ता से लेकर योजनाओं के क्रियान्वयन और विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग तक नियमित निगरानी को मजबूत किया जाएगा। इसी क्रम में खंड शिक्षा अधिकारी प्रत्येक माह के चतुर्थ शनिवार को प्रधानाध्यापकों के साथ मासिक समीक्षा बैठक करेंगे। बैठक में निपुण भारत मिशन, प्री-प्राइमरी शिक्षा, डिजिटल संसाधन, पीएम पोषण, ऑपरेशन कायाकल्प, बालिका शिक्षा, समावेशी शिक्षा, नामांकन-उपस्थिति और वित्तीय प्रगति समेत विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा की जाएगी।  इस मासिक समीक्षा व्यवस्था के माध्यम से कक्षा-कक्ष की गुणवत्ता, विद्यार्थियों के अधिगम, डिजिटल संसाधनों, नामांकन-उपस्थिति, विद्यालयी सुविधाओं और योजनाओं के क्रियान्वयन को एक नियमित समीक्षा तंत्र से जोड़ा जाएगा। इससे विद्यालय स्तर पर प्रगति की निरंतर निगरानी और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई के लिए निर्धारित व्यवस्था सुनिश्चित होगी। निपुण लक्ष्य से अधिगम अंतर तक होगी समीक्षा बैठक में निपुण भारत मिशन एवं गुणवत्ता शिक्षा संवर्धन को प्रमुखता दी जाएगी। शैक्षिक कैलेंडर एवं मासिक पाठ्यक्रम के लक्ष्यों की प्राप्ति, कक्षा संचालन, निपुण लक्ष्य एवं आईसीटी शिक्षण सामग्री के प्रदर्शन तथा संदर्शिका-टीएलएम के प्रभावी उपयोग की समीक्षा होगी। विद्यार्थियों के अधिगम अंतर को कम करने के लिए कैच-अप शिक्षण, पढ़ने की संस्कृति विकसित करने और पुस्तकालय में पुस्तकों के उपयोग को भी परखा जाएगा। निपुण तालिका में दक्षताओं के अंकन, निपुण एप के नियमित आकलन तथा परख एवं निपुण आकलन के परिणामों की समीक्षा की जाएगी।  होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड और प्री-प्राइमरी पर जोर विद्यार्थियों की समग्र प्रगति के आकलन के लिए होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड से संबंधित निर्देशों एवं प्रशिक्षण के अनुपालन की समीक्षा होगी। प्रत्येक बैठक में दो प्रधानाध्यापकों द्वारा होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड साझा किए जाएंगे और उनका अभिलेखीकरण किया जाएगा। प्री-प्राइमरी शिक्षा के अंतर्गत विद्यालय परिसर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों, यू-डायस मॉड्यूल में गतिविधियों की प्रविष्टि, बालवाटिका की उपलब्ध सामग्री के उपयोग तथा 3-6 वर्ष आयु के बच्चों के नामांकन एवं उपस्थिति की भी समीक्षा होगी।  स्मार्ट क्लास से डिजिटल पुस्तकालय तक उपयोग की होगी पड़ताल विद्यालयों में उपलब्ध स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब एवं डिजिटल पुस्तकालय के प्रभावी उपयोग की समीक्षा की जाएगी। एनबीडीयूपी पोर्टल की मोबाइल डिवाइस मैनेजमेंट रिपोर्ट के आधार पर इन संसाधनों के उपयोग, उपकरणों की कार्यशीलता और तकनीकी समस्याओं की स्थिति देखी जाएगी। साथ ही यू-डायस+ डेटा, अपार आईडी और डिजिटल रजिस्टर को अद्यतन रखने की स्थिति भी परखी जाएगी।  नामांकन, उपस्थिति और विद्यालयी सुविधाओं की भी निगरानी ‘स्कूल चलो अभियान’, हाउसहोल्ड सर्वे, आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों की पहचान एवं नामांकन तथा विद्यार्थियों की उपस्थिति की समीक्षा की जाएगी। पीएम पोषण योजना के अंतर्गत मध्याह्न भोजन के मेन्यू, वितरण, फल एवं दूध की नियमितता को भी देखा जाएगा। ऑपरेशन कायाकल्प एवं निर्माण कार्यों के अंतर्गत लंबित कार्य, विद्यालय परिसर में अतिक्रमण तथा सीडब्ल्यूएसएन और बालिका शौचालयों की क्रियाशीलता की समीक्षा होगी।  बालिका शिक्षा से समावेशी शिक्षा तक बालिका शिक्षा एवं केजीबीवी के अंतर्गत मीना मंच, रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण और बालिकाओं से संबंधित गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का नियमित भ्रमण कर व्यवस्थाओं और शैक्षिक गतिविधियों का अनुश्रवण किया जाएगा। समावेशी शिक्षा के अंतर्गत प्रशस्त एप के माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की स्क्रीनिंग की स्थिति भी देखी जाएगी।  एजेंडे में खेल, इको क्लब और वित्तीय प्रगति भी खेलकूद गतिविधियों के नियमित आयोजन एवं उनकी फोटो प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड करने की स्थिति की समीक्षा होगी। इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ, ‘एक पेड़ मां के नाम’, एसएचवीआर और ‘स्पेशल कैंपेन 6.0’ जैसी गतिविधियों के संचालन को भी देखा जाएगा। इसके साथ समग्र शिक्षा, पीएम श्री और पीएम पोषण के अंतर्गत वित्तीय व्यय की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी।  योगी सरकार में बीईओ-प्रधानाध्यापक की मासिक बैठकों के माध्यम से शैक्षिक गुणवत्ता की नियमित समीक्षा की जाएगी। स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब और डिजिटल पुस्तकालय जैसे संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए शिक्षकों को आवश्यक मार्गदर्शन और प्रशिक्षण दिया जाएगा। संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा बीईओ-प्रधानाध्यापक की मासिक बैठक को प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, स्मार्ट क्लासरूम, आईसीटी लैब, डिजिटल पुस्तकालय और इंटरएक्टिव पैनल के प्रभावी उपयोग से जुड़े प्रशिक्षण वीडियो के माध्यम से विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। मोनिका रानी, महानिदेशक स्कूल शिक्षा

फिंगरप्रिंट और रेटिना समान होने से अटका था आधार, योगी सरकार की पहल से जुड़वा बहन को मिली पहचान

लखनऊ। योगी सरकार की संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था में जनसमस्याओं के समाधान के साथ मानवीय सरोकारों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। रामपुर में इसका एक उदाहरण उस समय सामने आया, जब बायोमीट्रिक समानता के कारण पिछले कई वर्षों से पहचान के संकट से जूझ रहीं जुड़वा बहनों को जिला प्रशासन की पहल पर अपनी अलग-अलग पहचान मिली। मोहल्ला खारी कुआं निवासी जुबैर इलियास की जुड़वा बेटियों तुबा जुबैर व खिजरा जुबैर के फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतलियों (रेटिना) की बायोमीट्रिक समानता के चलते आधार पंजीकरण में तकनीकी अड़चन आ रही थी। एक बच्ची का कार्ड बनने के बाद दूसरी बच्ची का डेटा डुप्लीकेट बताकर खारिज कर दिया जाता था। योगी सरकार के संवेदनशील प्रशासन ने दिलाई पहचान समस्या का समाधान न होने से परिवार कई वर्षों से परेशान था। दूसरी बेटी का पहचान पत्र नहीं बनने से उसके स्कूल दाखिले, सरकारी योजनाओं और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी भविष्य की जरूरतों को लेकर पिता चिंतित थे। ऐसे में अपनी समस्या लेकर जुबैर इलियास रामपुर जिला प्रशासन के जनता दर्शन पहुंचे, जहां डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने योगी सरकार की जनता के प्रति संवेदनशील नीति का परिचय देते हुए दिल्ली स्थित भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) मुख्यालय में संपर्क किया। तीन माह के प्रयास के बाद एक जैसे फिंगरप्रिंट व रेटिना की बायोमेट्रिक समानता के बावजूद दोनों जुड़वा बहनों को आखिरकार अपनी अलग पहचान मिल गई।  जनता दर्शन में डीएम ने लिया तत्काल संज्ञान रामपुर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आमजन की समस्याओं के निस्तारण के लिए रोजाना सुबह दस बजे कलेक्ट्रेट परिसर में जनता दर्शन का आयोजन किया जाता है। करीब तीन माह पहले जनता दर्शन में जब जुबैर इलियास ने अपनी बेटियों की इस समस्या के बारे में बताया तो उन्होंने तुरंत इसका संज्ञान लेते हुए एक्शन लिया। उन्होंने यूआईडीएआई, नई दिल्ली के सचिव से दूरभाष पर सीधा संपर्क साधा और इस दुर्लभ बायोमीट्रिक समस्या से अवगत कराते हुए विशेष तकनीकी समाधान की पैरवी की। इसके बाद मुख्यालय ने अपवाद के तहत दोनों बच्चियों के दस्तावेज जारी करने की प्रक्रिया पूरी की। संवेदनशील सरकार का उदाहरण वर्षों से पहचान के संकट से जूझ रहे परिवार के लिए यह बड़ी राहत रही। आधुनिक व्यवस्था में स्कूल दाखिले, सरकारी योजनाओं और विभिन्न नागरिक सुविधाओं तक पहुंच के लिए आधार एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बन चुका है। ऐसे में दूसरी बेटी की पहचान सुनिश्चित होने से उसके भविष्य को लेकर परिवार की चिंता भी दूर हुई। सीएम योगी के विजन को साकार करते हुए जिला प्रशासन ने तकनीकी अड़चन को पात्र नागरिक के अधिकार और जरूरी दस्तावेज हासिल करने की राह में बाधा नहीं बनने दिया। डीएम से मिलकर जताया आभार पहचान पत्र मिलने के बाद जुबैर दोनों बेटियों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और डीएम का व्यक्तिगत आभार व्यक्त किया। इस मौके पर जिलाधिकारी ने कहा कि सीएम योगी की मंशा के अनुरूप जनता दर्शन में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की समस्या का समाधान और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र नागरिकों तक पहुंचाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मथुरा से अलीगढ़ तक पुलिस इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूती, हॉस्टल, बैरक, विवेचना कक्ष और कार्यालय बनेंगे

लखनऊ। योगी सरकार ने प्रदेश में पुलिस विभाग के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए विभिन्न जिलों में पुलिस के अनावासीय भवनों के निर्माण और जरूरी सुविधाओं के विकास के लिए 18.41 करोड़ रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में स्वीकृत यह पूरी धनराशि संबंधित निर्माण कार्यों पर खर्च की जाएगी। योगी सरकार ने कुल 18 करोड़ 41 लाख 3 हजार रुपये की स्वीकृति दी हैं।  मथुरा में पुलिस लाइन से लेकर चौकी तक काम मथुरा की पुलिस लाइन परिसर में पानी की निकासी के लिए नाला और 50 मीटर बाउंड्रीवाल समेत अन्य निर्माण कार्यों के लिए 2.08 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं मथुरा के थाना बलदेव के अंतर्गत पुलिस चौकी बरौली के अनावासीय भवनों के निर्माण पर 1.25 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मथुरा के दोनों कार्यों की कार्यदायी संस्था आवास एवं विकास परिषद व सीएंडडीएस जल निगम निर्धारित की गई है।  बागपत, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर में नए भवन बागपत के थाना छपरौली परिसर में 32 क्षमता वाले हॉस्टल/बैरक और एक विवेचना कक्ष के निर्माण के लिए 1.76 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। प्रतापगढ़ में क्षेत्राधिकारी रानीगंज कार्यालय के निर्माण के लिए 89.59 लाख रुपये की मंजूरी मिली है। सुल्तानपुर के थाना कादीपुर और कोतवाली नगर में 48-48 क्षमता के हॉस्टल/बैरक व एक-एक विवेचना कक्ष के निर्माण के लिए क्रमशः 2.89 करोड़ और 2.84 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इन दोनों कार्यों की कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम है।  मुरादाबाद, फतेहपुर, गाजियाबाद और अलीगढ़ को भी बजट मुरादाबाद के थाना कोतवाली नगर में 48 क्षमता वाले हॉस्टल/बैरक और एक विवेचना कक्ष के लिए 2.70 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। फतेहपुर की 12वीं वाहिनी पीएसी में 200 जवानों के लिए बहुउद्देशीय हॉल के निर्माण पर 2.39 करोड़ रुपये खर्च होंगे। गाजियाबाद की रिजर्व पुलिस लाइन में जर्जर विद्युत तारों को बदलने के लिए 1.04 करोड़ रुपये और अलीगढ़ पुलिस लाइन में जीपी स्टोर के सामान के लिए दो हॉल बनाने के लिए 57.69 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों की कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम लिमिटेड रहेगी। यह सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ तय समयसीमा में पूरे किए करने के भी निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्वीकृत धनराशि का उपयोग 31 मार्च 2027 तक करना होगा।

‘झूठ और भ्रम फैलाना सपा का प्राइमरी एजेंडा’… दानिश आजाद अंसारी ने साधा निशाना

‘2027 में सपा को अपनी हार साफ दिख रही’… दानिश आजाद अंसारी का अखिलेश पर तीखा हमला ‘झूठ और भ्रम फैलाना सपा का प्राइमरी एजेंडा’… दानिश आजाद अंसारी ने साधा निशाना ‘2012 से 2017 तक अपराध बढ़े, तब कहां थे सपा नेता?’… दानिश आजाद अंसारी का सवाल ‘यूपी को बदनाम करने के लिए अपराध बढ़वा रही सपा’… दानिश आजाद अंसारी का गंभीर आरोप लखनऊ, समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए योगी सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि सपा बौखला गई है, क्योंकि उसे 2027 के विधानसभा चुनाव में अपनी हार साफ और स्पष्ट दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सिर्फ झूठ और भ्रम फैलाना आज समाजवादी पार्टी का प्राथमिक एजेंडा बन गया है। ‘2012 से 2017 तक अपराधों के समय कहां थे सपा नेता?’ दानिश आजाद अंसारी ने सपा पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी पहले इस बात का जवाब दे कि 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में अपराधों का ग्राफ बढ़ रहा था और महिलाओं के खिलाफ अपराध हो रहे थे, तब उसके नेता कहां थे? उन्होंने कहा कि उस समय अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उत्तर प्रदेश में दिनदहाड़े लूट-खसोट, चोरी और दूसरी आपराधिक घटनाएं हुआ करती थीं। दानिश आजाद ने सवाल किया कि तब समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश की भलाई की याद क्यों नहीं आई? ‘योगी के नेतृत्व में यूपी की इमेज बेहतर हो रही’ मंत्री ने कहा कि आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार उत्तर प्रदेश के विकास के लिए काम कर रही है और प्रदेश की छवि बेहतर हो रही है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से समाजवादी पार्टी के नेता बौखलाए हुए हैं। दानिश आजाद अंसारी ने सपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के नेता रिपोर्टरों का अपमान करने का काम कर रहे हैं। ‘यूपी को बदनाम करने के लिए अपराध बढ़वा रही सपा’ दानिश आजाद अंसारी ने समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से आम और गरीब लोगों पर जानबूझकर अत्याचार करा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश को बदनाम करने के लिए जानबूझकर आपराधिक घटनाएं बढ़वाने की कोशिश की जा रही है। मंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी का यह “चाल-चरित्र” अब नहीं चलेगा। उन्होंने दावा किया कि जनता समाजवादी पार्टी की असलियत जानती है और उसके किसी भी बहकावे में आने वाली नहीं है।

विवाह प्रोत्साहन योजना: 9 वर्षों में 6698 दिव्यांग दंपत्तियों को मिला लाभ, 2026-27 में अब तक 18 जोड़ों को सहायता

लखनऊ। योगी सरकार दिव्यांगजनों को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना के तहत दिव्यांग दंपत्तियों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक योजना के अंतर्गत 18 दिव्यांग दंपत्तियों को लाभान्वित किया गया है। योजना के लिए 2.64 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसके सापेक्ष 4.55 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।  सरकार की यह पहल दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उनके वैवाहिक जीवन को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। ऑनलाइन संचालित योजना के माध्यम से पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित की जा रही है। योजना के तहत न्यूनतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता वाले दिव्यांग दंपत्तियों को उनकी दिव्यांगता की स्थिति के आधार पर 15 हजार से 35 हजार रुपये तक की सहायता दी जाती है। योजना के अंतर्गत यदि दंपत्ति में युवक दिव्यांग है तो 15 हजार रुपये, युवती दिव्यांग है तो 20 हजार रुपये तथा युवक और युवती दोनों दिव्यांग हैं तो 35 हजार रुपये की धनराशि प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान की जाती है। योजना का संचालन ऑनलाइन किया जा रहा है और लाभार्थियों को पीएफएमएस के माध्यम से ई-पेमेंट द्वारा सीधे लाभान्वित किया जाता है। अबतक 6698 दिव्यांग दंपत्तियों को मिला लाभ योगी सरकार की इस संवेदनशील पहल का लाभ बड़ी संख्या में दिव्यांग दंपत्तियों तक पहुंच रहा है। वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक कुल 6698 दिव्यांग दंपत्तियों को योजना के तहत लाभान्वित किया गया है। अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 में 805 दिव्यांग दंपत्तियों को आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान किया गया। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक है योजना दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के उप निदेशक डॉ. अमित कुमार राय ने कहा कि शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना दिव्यांगजनों को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को सम्मानजनक जीवन के साथ उनके वैवाहिक जीवन में भी आर्थिक संबल उपलब्ध कराना है। डॉ. राय ने कहा कि योजना से बड़ी संख्या में दिव्यांग दंपत्तियों को लाभ मिल रहा है।

ग्रेटर नोएडा के ‘उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो’ में लगेंगे टेराकोटा के चार स्टॉल

वैश्विक पटल पर चमक बिखेरेगा गोरखपुर की माटी का शिल्प ‘टेराकोटा’ ग्रेटर नोएडा के ‘उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो’ में लगेंगे टेराकोटा के चार स्टॉल ओडीओपी में शामिल किए जाने के बाद टेराकोटा शिल्पियों और कारोबारियों के जीवन में आई समृद्धि गोरखपुर गोरखपुर की तमाम विशिष्टताओं में से एक माटी का हस्तशिल्प ‘टेराकोटा’ वैश्विक पटल पर एक बार फिर अपनी चमक बिखेरने के लिए तैयार है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने जा रहे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) के चौथे संस्करण में गोरखपुर के टेराकोटा उत्पादों के चार विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। इस अंतरराष्ट्रीय मंच के माध्यम से स्थानीय टेराकोटा शिल्पियों और कारोबारियों को सीधे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, निर्यातकों और बड़े व्यापारिक घरानों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल होने के बाद से इस पारंपारिक शिल्प को नया जीवन मिला है, जिससे शिल्पियों और कारोबारियों के जीवन में आर्थिक समृद्धि और सामाजिक सम्मान का नया दौर शुरू हुआ है। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में इस बार गोरखपुर के टेराकोटा के चार स्टॉल आकर्षण का प्रमुख केंद्र होंगे। ट्रेड शो में आने वाले विदेशी प्रतिनिधियों और बड़े कॉरपोरेट खरीदारों के सामने इन उत्पादों की सीधी ब्रांडिंग से निर्यात की संभावनाओं के नए द्वार खुलने की भी पूरी उम्मीद है। उद्योग विभाग ने जिन शिल्पियों और कारोबारियों को यूपीआईटीएस में स्टाल लगाने के लिए चयनित किया है, उनमें मेसर्स अतरंगी कलाकारी के बैनर तले टेराकोटा ज्वेलरी व होम डेकोरेशन प्रोडक्ट बनाने वाली दीपिका सिंह, रीतिका कृतिका क्रिएशन से सुनीता मौर्या, गिफ्ट सिटी से कमलेश तिवारी और मेसर्स रोशनी एक उम्मीद ट्रस्ट की कोमल मद्देशिया शामिल हैं। उद्योग उपायुक्त उज्ज्वल सिंह का कहना है कि इंटरनेशनल ट्रेड शो में लगने वाले टेराकोटा के स्टाल न केवल गोरखपुर के शिल्पियों की मेहनत और हुनर का प्रदर्शन करेंगे, बल्कि यह साबित करेंगे कि यदि पारंपरिक हुनर को सही नीति, तकनीक और बाजार का सहारा मिले तो मिट्टी भी सोना उगल सकती है। यूपीआईटीएस में मिलने वाला अवसर गोरखपुर के टेराकोटा के निर्यात की दिशा में भी काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। योगी सरकार ने की ब्रांडिंग तो खूब बढ़ा कारोबार भटहट ब्लॉक के औरंगाबाद गांव को टेराकोटा शिल्प का मूल गांव माना जाता है। औरंगाबाद और इसके आसपास के गांवों में पीढ़ियों से टेराकोटा का काम किया जाता रहा है। वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री ने एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना शुरू की और टेराकोटा को गोरखपुर का ओडीओपी उत्पाद घोषित किया गया। इसके तहत शिल्पकारों को विद्युत चालित चाक, पगमिल, अनुदान पर ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ी तो दूसरी तरफ योगी सरकार ने बड़े-बड़े मंचों से टेराकोटा की ब्रांडिंग की। परिणामस्वरूप इसकी मांग में लगातार वृद्धि होती गई। कारोबार में वृद्धि होने से टेराकोटा शिल्पकारों के जीवन स्तर में व्यापक सुधार हुआ है। कच्ची झोपड़ियों में काम करने वाले कई शिल्पियों ने पक्के वर्कशॉप और पक्के मकान बना लिए हैं। नई पीढ़ी, जो कभी मिट्टी के इस काम से दूरी बना रही थी, अब आधुनिक डिजाइनिंग सीखकर अपने पुश्तैनी कारोबार में सक्रिय रूप से हाथ बंटा रही है।