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स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत 49.66 करोड़ के 50 कार्यों को मंजूरी

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत 49.66 करोड़ के 50 कार्यों को मंजूरी राज्य स्तरीय तकनीकी समिति ने 42 आकांक्षी शौचालयों सहित स्वच्छता व अपशिष्ट प्रबंधन की परियोजनाओं को दी स्वीकृति जीरो वेस्ट मॉडल को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रायपुर  शहरों को स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ बनाने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत 49 करोड़ 66 लाख रुपए के 50 कार्यों को मंजूरी दी गई है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में हुई स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय तकनीकी समिति (SLTC) की 13वीं बैठक में इन कार्यों की स्वीकृति प्रदान की गई। मंत्रालय में हुई बैठक में 42 आकांक्षी शौचालयों सहित सतत स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं अनुपचारित जल प्रबंधन से जुड़े कई कार्यों को मंजूरी दी गई। इन कार्यों से शहरों में नागरिक सुविधाओं का विस्तार होगा तथा स्वच्छता व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। राज्य स्तरीय तकनीकी समिति की बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की स्वीकृत परियोजनाओं के गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध क्रियान्वयन की निगरानी के लिए परियोजना पर्यवेक्षण सलाहकार (PMC) की नियुक्ति को स्वीकृति दी गई। साथ ही अनुपचारित जल प्रबंधन के अंतर्गत 5 नगरीय निकायों से प्राप्त निविदा दरों से संबंधित प्रस्तावों पर भी आवश्यक स्वीकृतियां जारी की गईं। इससे इन निकायों में जल प्रबंधन से जुड़े कार्यों को गति मिलेगी। स्रोत पर पृथक्करण से लेकर वैज्ञानिक प्रसंस्करण तक की कार्ययोजना बैठक में नगरीय क्षेत्रों में शून्य अपशिष्ट मॉडल को बढ़ावा देने और स्वच्छता प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने विभिन्न नवाचारों पर चर्चा की गई। कचरे के स्रोत स्तर पर पृथक्करण, पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करने के साथ स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नवाचार आधारित मॉडल विकसित करने तथा उन्हें व्यापक स्तर पर लागू करने के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। समिति ने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों को तय समय-सीमा में पूरा करने और शहरों में सतत स्वच्छता व्यवस्था स्थापित करने पर विशेष बल दिया, ताकि इन परियोजनाओं का लाभ शीघ्र आम नागरिकों तक पहुंच सके। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमीत अग्रवाल, वित्त विभाग एवं अन्य विभागों के प्रतिनिधि, भारत सरकार के प्रतिनिधि तथा विभागीय अधिकारी ऑनलाइन एवं भौतिक रूप से बैठक में शामिल हुए।

दाऊ मंदराजी की विरासत छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अनमोल धरोहर – राजेश अग्रवाल

दाऊ मंदराजी की विरासत छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अनमोल धरोहर – राजेश अग्रवाल   पुण्यतिथि पर संस्कृति मंत्री ने नाचा के पुरोधा को दी भावभीनी श्रद्धांजलि रायपुर छत्तीसगढ़ी लोकनाट्य ‘नाचा’ को नई पहचान और विशिष्ट स्वरूप प्रदान करने वाले महान लोक कलाकार दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की पुण्यतिथि पर संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने दाऊ मंदराजी के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और नाचा की परंपरा को समृद्ध करने में उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा। संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि दाऊ दुलार सिंह मंदराजी ने नाचा को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहने दिया, बल्कि उसे छत्तीसगढ़ के जनजीवन, लोकभाषा, सामाजिक सरोकारों और सांस्कृतिक भावनाओं को अभिव्यक्त करने वाले सशक्त लोकमंच के रूप में विकसित किया। उनका पूरा जीवन लोककला और कलाकारों के उत्थान के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कलाकारों को संगठित कर ‘रैली रिगनी साज’ नाचा दल बनाया, जो छत्तीसगढ़ की पहली नाचा पार्टी है। श्री अग्रवाल ने कहा कि दाऊ मंदराजी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की सहजता, हास्य, व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों को नाचा के माध्यम से प्रभावी अभिव्यक्ति दी। उनके प्रयासों से नाचा को गांवों की सीमाओं से आगे व्यापक पहचान मिली और अनेक प्रतिभाशाली लोक कलाकारों को अपनी कला प्रस्तुत करने का मंच प्राप्त हुआ। संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध लोक परंपराओं, लोककलाओं और लोक कलाकारों से है। दाऊ मंदराजी जैसे महान कलाकारों ने अपनी साधना से इन परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का कार्य किया। उनके योगदान से प्रेरणा लेकर नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की लोककला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी की स्मृति में राज्य सरकार द्वारा लोक नाट्य एवं लोक शिल्प के क्षेत्र में ‘दाऊ मंदराजी सम्मान’ प्रदान किया जाना भी उनके योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है। आज उनकी पुण्यतिथि पर हम दाऊ दुलार सिंह मंदराजी को नमन करते हुए छत्तीसगढ़ की लोककला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन तथा नई पीढ़ी तक उसके विस्तार का संकल्प लेते हैं। उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी का जीवन यह संदेश देता है कि अपनी मिट्टी, अपनी बोली और अपनी लोक परंपराओं से जुड़कर भी कला को व्यापक पहचान दिलाई जा सकती है। छत्तीसगढ़ी नाचा के इस महान साधक की कला-साधना और योगदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे।

छत्तीसगढ़ के आंगनबाड़ी केंद्रों में ‘आंगन मिलन सेवा’, पौष्टिक थाली का होगा प्रदर्शन

रायपुर. सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेशभर के आंगनबाड़ी केंद्रों में 25 सितंबर से 6 अक्टूबर तक ‘आंगन मिलन सेवा’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के समन्वय से आयोजित इस पहल का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़ी माताओं, बच्चों, महिलाओं और समुदाय को पोषण, स्वास्थ्य एवं महिला कल्याण योजनाओं की जानकारी से जोड़ना तथा जनभागीदारी को मजबूत करना है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों में सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक एक दिवसीय आयोजन होगा। इसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। कार्यक्रम में हितग्राही माताओं, स्वसहायता समूह की महिलाओं, बच्चों के अभिभावकों, मितानिनों तथा समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मितानिनों के योगदान को सम्मानित भी किया जाएगा। आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम में समुदाय के समक्ष ‘मेरी पौष्टिक थाली’ का प्रदर्शन कर संतुलित एवं पौष्टिक आहार के महत्व की जानकारी दी जाएगी। महिलाओं और बच्चों के लिए पौष्टिक व्यंजनों की विधि का प्रदर्शन, स्वास्थ्य एवं पोषण आधारित चित्रकला तथा स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता, माताओं एवं सुपोषित बच्चों का सम्मान और बच्चों के लिए खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। आंगनबाड़ी केंद्रों में सामुदायिक सहभागिता से ‘न्योता भोज’ भी कराया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान पोषण वाटिका के लिए पौधरोपण करते हुए ‘घर-घर मुनगा, हर घर मुनगा’ के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा। समुदाय से आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए खिलौने एवं खेल सामग्री उपलब्ध कराने की अपील भी की जाएगी। जिलेवार तिथियों में होंगे आयोजन- 25 सितंबर को रायपुर शहरी क्षेत्र, बस्तर, सरगुजा और बिलासपुर 26 सितंबर को रायपुर ग्रामीण, कोरबा, कवर्धा और सूरजपुर 28 सितंबर को महासमुंद, दंतेवाड़ा, राजनांदगांव और गरियाबंद 29 सितंबर को धमतरी, दुर्ग, बलौदाबाजार और मुंगेली 30 सितंबर को भिलाई क्षेत्र, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, बीजापुर और जांजगीर 1 अक्टूबर को बेमेतरा, कांकेर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और सुकमा 2 अक्टूबर को जशपुर, कोंडागांव और मानपुर-मोहला 3 अक्टूबर को बालोद, नारायणपुर और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही 5 अक्टूबर को सक्ती, रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ 6 अक्टूबर को बलरामपुर, बिलासपुर ग्रामीण और कोरिया जिले में कार्यक्रम आयोजित होंगे।

राजस्व अदालतों में रिकॉर्ड 81.35% मामलों का निपटारा, आम लोगों को राहत

छत्तीसगढ़ में गति पकड़ता राजस्व न्याय रिकॉर्ड 81.35 प्रतिशत प्रकरणों के निपटारे से राजस्व अदालतों में आई अभूतपूर्व तेज़ी ​प्रशासनिक इच्छाशक्ति से आम जन को सीधी राहत                    रायपुर छत्तीसगढ़ में राजस्व प्रशासन को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और जनोन्मुख बनाने की दिशा में राजस्व न्यायालयों के प्रदर्शन में एक नया अध्याय जुड़ गया है। दूरस्थ अंचलों से लेकर बड़े शहरों तक भूमि, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और स्वामित्व जैसे आम नागरिकों के जीवन से जुड़े अत्यंत संवेदनशील मामलों को समयबद्ध सीमा में सुलझाने के लिए प्रशासनिक प्राथमिकताओं में अभूतपूर्व बदलाव आया है। राज्यभर के राजस्व न्यायालयों में दर्ज कुल 4,67,415 प्रकरणों में से रिकॉर्ड 3,80,224 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण कर लिया गया है। इस प्रकार संपूर्ण राज्य में मामलों के निराकरण की दर 81.35 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जबकि शेष 87,191 प्रकरणों के निपटारे के लिए भी लक्षित एवं सुव्यवस्थित प्रयास जारी हैं। ​कोर्ट-कचहरी के चक्करों से मुक्ति, समय और धन की बचत         राजस्व मामलों का शीघ्र निपटारा केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव ज़मीन और आजीविका से जुड़े नागरिकों के रोज़मर्रा के जीवन पर पड़ता है। कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने से मुक्ति मिलने के साथ-साथ आम जन के समय और संसाधनों की बचत हो रही है, जिससे राज्य में पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित व्यवस्था सुदृढ़ हुई है। ​दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों का शानदार प्रदर्शन         राजस्व न्याय की इस तीव्र गति में सबसे प्रेरणादायक तस्वीर राज्य के दूरस्थ एवं आदिवासी बहुल जिलों से सामने आई है, जहाँ प्रशासनिक पहुंच और त्वरित निर्णय क्षमता मिसाल बनी है। सुकमा जिला 92.70 प्रतिशत निराकरण दर के साथ पूरे प्रदेश में शीर्ष पर है, जहाँ 7,224 मामलों में से 6,697 का निपटारा किया गया है। इसी तरह नारायणपुर में 92.28 प्रतिशत (5,780 में से 5,334 प्रकरण), दंतेवाड़ा में 91.50 प्रतिशत (5,614 में से 5,137 प्रकरण) और बीजापुर में 89.67 प्रतिशत की उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। ​बड़े ज़िलों में भी तेज़ी से सुलझ रहे ज़मीन-जायदाद के मामले         भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद दूरदराज के क्षेत्रों में मिली यह सफलता प्रशासनिक तंत्र की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वहीं, राज्य के अधिक केस भार वाले बड़े जिलों में भी प्रकरणों के निपटारे का सिलसिला पूरी तेज़ी से चल रहा है। बस्तर में 17,600 में से 15,745 प्रकरण, बलौदाबाजार-भाटापारा में 20,905 में से 18,494 प्रकरण, राजधानी रायपुर में 34,226 में से 29,824 प्रकरण, बिलासपुर में 29,495 में से 24,539 प्रकरण, जांजगीर-चांपा में 19,132 में से 16,109 प्रकरण तथा कोरबा में 19,705 में से 15,747 मामलों को हल कर नागरिकों को राहत दी गई है। ​'ई-धरती' और आधुनिक सर्वेक्षण से संवरते भू-अभिलेख        राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण के साथ-साथ राज्य सरकार 'ई-धरती' योजना और आधुनिक भू-सर्वेक्षण तकनीकों के ज़रिए भू-अभिलेखों के सुदृढ़ीकरण पर भी व्यापक काम कर रही है। राज्य में 431 वन ग्राम से परिवर्तित राजस्व ग्राम और 596 असर्वेक्षित या मसाहती ग्रामों को मिलाकर कुल 1,027 ग्रामों का सर्वे हेतु चिन्हांकन किया गया है। इनमें से 284 ग्रामों का सर्वेक्षण कार्य पूरा करके डाटा 'भुइयाँ पोर्टल' पर अपलोड भी कर दिया गया है, जबकि 196 ग्रामों में अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया चल रही है। ​अबूझमाड़ में ऐतिहासिक पहल और डिजिटल नक्शों का निर्माण       अति-संवेदनशील अबूझमाड़ क्षेत्र और नारायणपुर जिले में भी ग्राम सर्वेक्षण की शुरुआत एक ऐतिहासिक पहल है, जहाँ 6 ग्रामों का अंतिम प्रकाशन पूर्ण कर अभिलेखों एवं नक्शों को 'भुइयां' और 'भू-नक्शा' सॉफ्टवेयर पर अपलोड कर दिया गया है तथा 59 अन्य ग्रामों में अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया गतिमान है। इसके अतिरिक्त, ई-धरती योजना के तहत बंदोबस्त त्रुटियों को सुधारने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में कोंडागांव जिले को 1.10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट आवंटित किया गया है। नगरीय निकायों के कैडेस्ट्रल नक्शों को 1:500 के सूक्ष्म पैमाने पर बदलने की दिशा में भी काम तेज़ी से जारी है, जिसके तहत 22 जिलों के 396 गांवों को नए पैमाने के नक्शे प्रदान कर दिए गए हैं, जबकि नजूल व परिवर्तित अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का कार्य भी अंतिम चरणों में है। वर्ष 2025-26 के लिए पात्र हितग्राहियों के सत्यापन एवं e-KYC की प्रक्रिया को भी प्रगति पर रखा गया है। ​वर्षों पुराने लंबित मामलों के लिए वैज्ञानिक रणनीति       न्यायालयीन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए लंबित 87,191 प्रकरणों का समयावधि के अनुसार वैज्ञानिक वर्गीकरण किया गया है।               वर्तमान में 0 से 6 माह की अवधि के 51,401 मामले लंबित हैं, जबकि 6 माह से 1 वर्ष के 13,218 मामले, 1 से 3 वर्ष के 15,918 मामले, 3 से 5 वर्ष के 3,903 मामले और 5 वर्ष से अधिक अवधि के 2,751 प्रकरण लंबित सूची में हैं। इस वर्गीकरण का मुख्य उद्देश्य वर्षों पुराने प्रकरणों को चिन्हित कर उन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ हल करना है, ताकि लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवादों का स्थायी अंत हो सके। राज्यभर में 80% से अधिक सफलता दर और प्रभावी समीक्षा         प्रदेश के अन्य जिलों में भी 80 प्रतिशत या उससे अधिक निराकरण दर दर्ज की गई है, जिनमें राजनांदगांव 83.45 प्रतिशत, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई 83.42,कोरिया 81.87,सारंगढ़-बिलाईगढ़ 81.84,धमतरी 81.65 , बेमेतरा 81, जशपुर 80.67, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी 80.38, कबीरधाम 80.23 और कांकेर 80.21 प्रतिशत शामिल हैं। इसके अलावा सरगुजा, महासमुंद, रायगढ़, सूरजपुर, गरियाबंद, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और बलरामपुर-रामानुजगंज जैसे जिलों में भी निरंतर समीक्षा बैठकों, डिजिटल ट्रैकिंग और समयबद्ध सुनवाई के माध्यम से मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को गति दी जा रही है। ​पारदर्शी और त्वरित सुशासन की ओर बढ़ते कदम        डिजिटल गवर्नेंस, आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों और नियमित मॉनिटरिंग के इस सशक्त संगम से छत्तीसगढ़ का राजस्व प्रशासन आज अधिक त्वरित, पारदर्शी और पूरी तरह जन-कल्याणकारी स्वरूप धारण कर चुका है। विष्णु प्रसाद वर्मा  सहायक संचालक

छत्तीसगढ़ रोजगार मेले में हजारों युवाओं की भीड़, 230 पदों पर भर्ती

महासमुंद. जिले के युवाओं को उनकी योग्यता और कौशल के अनुसार रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र द्वारा 24 सितंबर 2026 को जिला स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है। रोजगार मेला ग्राम बरोडाबाजार स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर के लाइवलीहुड कॉलेज के द्वितीय तल पर आयोजित होगा। रोजगार मेले का समय सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक निर्धारित किया गया है। योग्य उम्मीदवार निर्धारित समय पर पहुंचकर साक्षात्कार प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। प्रशासन ने युवाओं से समय का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। 230 पदों पर होगी भर्ती उपसंचालक रोजगार डॉ. शशिकला अतुलकर के अनुसार मेले में निजी क्षेत्र की कई कंपनियां शामिल होंगी। स्वतंत्रा माइक्रोफिन प्राइवेट लिमिटेड, पुष्कल एग्रोटेक लिमिटेड, अलर्ट एसजीएस प्राइवेट लिमिटेड, रजत इक्विपमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड और श्रमिन टैलेंट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कुल 230 विभिन्न पदों पर भर्ती की जाएगी। 10वीं से स्नातक तक के युवा ले सकेंगे हिस्सा रोजगार मेले में 10वीं, 12वीं, बीएससी एग्रीकल्चर, स्नातक डिग्री और आईटीआई उत्तीर्ण युवा योग्यता के अनुसार आवेदन कर सकेंगे। अलग-अलग पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है। ऑनलाइन आवेदन जरूरी मेले में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों को पहले छत्तीसगढ़ रोजगार एप या आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है। इसके बाद ही साक्षात्कार प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। उम्मीदवारों को मेले में शैक्षणिक योग्यता के मूल दस्तावेज, रोजगार पंजीयन कार्ड, आधार कार्ड, बायोडाटा की छायाप्रति और पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो साथ लाने होंगे। रिक्त पदों और वेतनमान से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए जिला रोजगार कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।

CM साय करेंगे राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में शिरकत

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। CM साय सुबह 11:45 बजे पं. दीनदयाल उपाध्याय सभागार पहुंचेंगे, जहां आयोजित राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद दोपहर 2 बजे से आदिम जाति कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री शामिल होंगे। शाम 4:10 बजे मुख्यमंत्री एक निजी रिसॉर्ट में आयोजित Statescon 2026 – Building Viksit Chhattisgarh कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री शाम 5:40 बजे मुख्यमंत्री निवास लौटेंगे। बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सड़क, बिजली, पेयजल और खाद्य सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में व्यापक कार्य हुए। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को प्रभावी बनाकर जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाने की मजबूत व्यवस्था विकसित की गई, जिसके कारण डॉ. रमन सिंह को प्रदेश में ‘चाउंर वाले बाबा’ के नाम से भी पहचान मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रही हैं। गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।

वर्षों से पिता के नाम दर्ज थी जमीन, लोक सेवा गारंटी से किसान रतम राम को मिला हक

सेवा की कहानी वर्षों से पिता के नाम दर्ज थी जमीन, लोक सेवा गारंटी से किसान रतम राम को मिला हक फौती नामांतरण के बाद बी-1 में दर्ज हुआ नाम, किसान हितैषी योजनाओं से जुड़ने की राह हुई आसान समय-सीमा में राजस्व प्रकरण का निराकरण, किसान रतम राम ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का जताया आभार रायपुर  वर्षों से जिस कृषि भूमि पर खेती कर परिवार का जीवन चल रहा था, उसके राजस्व अभिलेख में अब भी दिवंगत पिता का ही नाम दर्ज था। इस वजह से जशपुर जिले के ग्राम कंडोरा निवासी किसान श्री रतम राम को अपनी जमीन से जुड़ी कई प्रक्रियाओं और किसान हितैषी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई आ रही थी। लोक सेवा गारंटी के माध्यम से उनका फौती नामांतरण होने और बी-1 में नाम दर्ज होने के बाद अब उनकी यह परेशानी दूर हो गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और समयबद्ध नागरिक सेवाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी व्यवस्था का लाभ कुनकुरी तहसील के ग्राम कंडोरा निवासी किसान श्री रतम राम को मिला। पिता के निधन के वर्षों बाद भी रिकॉर्ड में दर्ज था उनका नाम श्री रतम राम के पिता स्वर्गीय सुखरू के निधन के कई वर्ष बीत चुके थे, लेकिन कृषि भूमि के राजस्व अभिलेख बी-1 में अब भी उनके पिता का नाम दर्ज था। जीवित वारिस के रूप में श्री रतम राम का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने के कारण उन्हें जमीन से संबंधित कार्यों के साथ किसान हितैषी योजनाओं की प्रक्रियाओं में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। किसान के लिए जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उसकी आजीविका का आधार होती है। ऐसे में राजस्व रिकॉर्ड का अद्यतन होना किसान को उसकी भूमि से संबंधित अधिकारों और विभिन्न शासकीय प्रक्रियाओं से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण है। लोक सेवा गारंटी ने आसान की राह अपनी समस्या के समाधान के लिए श्री रतम राम ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन मिलने के बाद राजस्व विभाग ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रकरण पर कार्रवाई शुरू की। पटवारी जांच, मौका मुआयना तथा दावा-आपत्ति सहित आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनका फौती नामांतरण किया गया। नामांतरण पूरा होते ही राजस्व अभिलेख बी-1 में श्री रतम राम का नाम दर्ज हो गया। वर्षों से लंबित उनकी समस्या का समाधान होने से उन्हें बड़ी राहत मिली। अब किसान योजनाओं से जुड़ने की राह हुई आसान राजस्व अभिलेख अद्यतन होने से श्री रतम राम के लिए कृषि भूमि से संबंधित शासकीय प्रक्रियाएं आसान हुई हैं। अब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और एग्रीस्टैक के अंतर्गत डिजिटल किसान पहचान जैसी किसान हितैषी योजनाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं में उन्हें सुविधा मिल सकेगी। संबंधित योजनाओं का वास्तविक लाभ उनके निर्धारित पात्रता मानदंडों के अनुसार प्राप्त होगा। श्री रतम राम की कहानी यह बताती है कि समय पर राजस्व रिकॉर्ड में सुधार किसी किसान के लिए केवल दस्तावेजी प्रक्रिया नहीं है। यह उसकी भूमि से जुड़े अधिकारों को रिकॉर्ड में स्पष्ट करने और विभिन्न शासकीय सेवाओं तक उसकी पहुंच आसान बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। रतम राम बोले—समय पर हुआ काम, अब बी-1 में मेरा नाम अपनी समस्या का समाधान होने से प्रसन्न श्री रतम राम ने कहा, “मेरे पिता के नाम पर जमीन होने से मुझे लाभ नहीं मिल रहा था। लोक सेवा गारंटी से मेरा काम समय पर हो गया और बी-1 में मेरा नाम आ गया। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन को दिल से धन्यवाद देता हूं।” मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में नागरिकों को राजस्व सहित विभिन्न शासकीय सेवाएं निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का लाभ अब जमीनी स्तर पर हितग्राहियों तक पहुंच रहा है। किसान रतम राम का फौती नामांतरण इसी समयबद्ध सेवा व्यवस्था की एक सकारात्मक तस्वीर है।

दूध नदी पर पुल और पहुंच मार्ग के लिए 16.15 करोड़ स्वीकृत

दूध नदी पर पुल और पहुंच मार्ग के लिए 16.15 करोड़ स्वीकृत कोदाभाठ-माटवाड़ा मोदी मार्ग में बनेगा उच्च स्तरीय पुल उप मुख्यमंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राशि स्वीकृति का पत्र जारी रायपुर  राज्य शासन ने कांकेर जिले में दूध नदी पर पुल और पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए 16 करोड़ 14 लाख 71 हजार रुपए मंजूर किए हैं। इस राशि से कोदाभाठ-माटवाड़ा मोदी मार्ग पर दूध नदी पर उच्च स्तरीय पुल और पहुंच मार्ग बनाया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शासन ने मंत्रालय से राशि स्वीकृति का पत्र प्रमुख अभियंता को जारी कर दिया है।  लोक निर्माण विभाग ने प्रमुख अभियंता को निर्माण एजेंसी से अनुबंधित समय-सीमा में काम पूर्ण किया जाना सुनिश्चित कराने को कहा है। कार्य पूर्ण किये जाने के लिए अनावश्यक समय-सीमा वृद्धि नहीं किए जाने के भी निर्देश विभाग ने दिए हैं। अपरिहार्य एवं नियंत्रण से बाहर मान्य कारणों के आधार पर ही सक्षम अधिकारी द्वारा समय-सीमा में वृद्धि की जा सकेगी। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कार्य में प्रयुक्त की जाने वाली सामग्रियों एवं संपूर्ण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता में कमी पाये जाने पर उत्तरदायित्व का निर्धारण करते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। राज्य शासन ने प्रमुख अभियंता को कार्य की निविदा समय-सीमा में करने, निर्माण कार्य प्राक्कलन व कार्य संपादित करने में मितव्ययिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

अतिक्रमण जांच के दौरान हंगामा, ग्रामीणों और टीम में झूमाझटकी

गरियाबंद. करका के जंगल में अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई की जांच करने पहुंची वन विभाग की टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। विभाग के अनुसार करीब 50 से 60 ग्रामीणों ने टीम को सरकारी कार्रवाई से रोकने की कोशिश की, जिसके चलते मौके पर विवाद, धक्का-मुक्की और झूमाझटकी की स्थिति बन गई। हालांकि गनीमत रही कि घटनाक्रम में किसी वन अधिकारी या कर्मचारी के घायल होने की सूचना नहीं है और मामला किसी बड़ी घटना में तब्दील नहीं हुआ। जंगल का निरीक्षण करने पहुंची टीम, मौके पर गरमाया माहौल वन विभाग की टीम करका क्षेत्र में कथित अतिक्रमित वनभूमि का निरीक्षण और कार्रवाई के लिए पहुंची थी। विभाग के अनुसार टीम जब कथित अतिक्रमित क्षेत्र की ओर आगे बढ़ी तो बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और शासकीय कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने की कोशिश की गई। विभाग का आरोप है कि इस दौरान ग्रामीण मुकेश मरकाम को मौके से ले जाया गया। मुकेश की ओर से पूरी घटना की वीडियोग्राफी किए जाने की बात भी विभाग ने कही है। मामले में वीडियो साक्ष्य के साथ थाना खल्लारी में FIR के लिए आवेदन दिए जाने की जानकारी सामने आई है। जंगल की जमीन पर कब्जे का आरोप करका की मौजूदा कार्रवाई को समझने के लिए इसका पुराना इतिहास भी महत्वपूर्ण है। करका कभी एक वन ग्राम था और सोंढूर बांध के कैचमेंट क्षेत्र में तत्कालीन सीतानदी अभयारण्य के अंतर्गत आता था। सोंढूर बांध के निर्माण के बाद वर्ष 1980 के दशक में करका गांव का विस्थापन किया गया था। उपलब्ध विभागीय अभिलेखों के अनुसार करका के 55 व्यक्तियों को जल संसाधन विभाग द्वारा मुआवजा दिया गया था। इसके बावजूद वन विभाग के अनुसार बाद में इसी क्षेत्र की ऊंचाई पर स्थित वनभूमि पर फिर अतिक्रमण और वन कटाई की गतिविधियां सामने आईं। यानी गांव को हटाने और मुआवजा देने के दशकों बाद भी जंगल की जमीन को लेकर विवाद खत्म नहीं हुआ। 30 हजार पेड़ों की कटाई का प्रारंभिक अनुमान 22 सितंबर 2026 को किए गए मैदानी निरीक्षण में वन विभाग को 1,100 से ज्यादा पेड़ों पर गर्डलिंग और बड़ी संख्या में कटे हुए पेड़ों के ठूंठ मिले। विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार वर्ष 2016 से 2017 के बीच करीब 30 हजार पेड़-पौधे काटे जाने के संकेत मिले हैं। GPS आधारित आकलन में लगभग 35 हेक्टेयर वनभूमि पर अतिक्रमण के संकेत मिले हैं। हालांकि विभाग के अनुसार अंतिम क्षेत्रफल का निर्धारण DGPS आधारित ड्रोन मैपिंग पूरी होने के बाद किया जाएगा। 22 हेक्टेयर से शुरू हुआ मामला, अब 35 हेक्टेयर तक जांच वर्ष 2016 में भी करका से जुड़े 22 व्यक्तियों के खिलाफ करीब 22 हेक्टेयर घने वन क्षेत्र में कथित अतिक्रमण को लेकर POR दर्ज किया गया था। विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 में नगरी न्यायालय ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया था। अब वन विभाग सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन फुटेज, GPS/DGPS मैपिंग और मैदानी साक्ष्यों के आधार पर क्षेत्र की स्थिति का दोबारा आकलन कर रहा है। जंगल बचाने की कार्रवाई या फिर पुराना विवाद? करका का मामला सिर्फ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र वन्यजीवों और हाथियों के आवागमन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बताया गया है। विभाग के अनुसार जंगल का लगातार क्षरण होने से वन्यजीवों के आवागमन मार्ग प्रभावित हो सकते हैं और भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति बढ़ सकती है। USTR का दावा है कि पिछले चार वर्षों में करीब 1,050 हेक्टेयर अतिक्रमित वनभूमि मुक्त कराई गई है। अब करका में कार्रवाई के दौरान हुआ विवाद इस पुराने अतिक्रमण मामले को फिर चर्चा में ले आया है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि जंगल में कितने पेड़ कटे और कितनी जमीन पर कब्जा हुआ सवाल यह भी है कि जिस करका को दशकों पहले बांध के लिए मुआवजा देकर विस्थापित किया गया था, उसकी वनभूमि पर दोबारा कब्जे की कहानी आखिर इतनी लंबी कैसे हो गई?

नारंगी बैराज परियोजना के सर्वेक्षण कार्य के लिए 4.82 करोड़ रुपये स्वीकृत

नारंगी बैराज परियोजना के सर्वेक्षण कार्य के लिए 4.82 करोड़ रुपये स्वीकृत रायपुर छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के विकासखण्ड-बस्तर की नारंगी बहुउद्देशीय बैराज परियोजना के सर्वेक्षण कार्य के लिए 4 करोड़ 82 लाख 99 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। सर्वेक्षण कार्य कराने के लिए मुख्य अभियंता गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग जगदलपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।