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रायपुर: कोरबा के बदलते रूप का हिस्सा, उद्योग मंत्री ने कहा- कोरबा रायफल शूटिंग रेंज है एक नई पहचान

रायपुर : बदलते कोरबा – संवरते कोरबा की एक और निशानी है कोरबा रायफल शूटिंग रेंज – उद्योग मंत्री उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन एवं महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने स्टेडियम के पीछे निगम द्वारा स्थापित कोरबा रायफल शूटिंग रेंज का किया शुभारंभ  रायपुर प्रदेश के वाणिज्य उद्योग,  श्रम, आबकारी व सार्वजनिक उपक्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने शानिवार को कहा कि हमारा कोरबा शहर तेजी के साथ बदल रहा है, तेजी के साथ संवर रहा है तथा शहर को नित नई उपलब्धियॉं प्राप्त हो रही है। उन्होने कहा कि नगर निगम द्वारा स्थापित कोरबा रायफल शूटिंग रेंज बदलते कोरबा – संवरते कोरबा की एक और निशानी है, एक और प्रमाण है, उन्होने कहा कि कोरबा के खिलाडि़यों, रायफल शूटिंग के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाने वाले यहॉं के युवाओं, बच्चों व शूटिंग प्रेमियों को रायफल शूटिंग रेंज की यह बड़ी सौगात देने के लिये मैं महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत, आयुक्त आशुतोष पाण्डेय व सभापति नूतन सिंह ठाकुर को बधाई एवं साधुवाद देता हूॅं।  बदलते कोरबा – संवरते कोरबा की एक और निशानी है कोरबा रायफल शूटिंग रेंज – उद्योग मंत्री     नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा टीपीनगर स्थित प्रियदर्शनी इंदिरा स्टेडियम के पीछे कोरबा रायफल शूटिंग रेंज की स्थापना की गई है, यहॉं उल्लेखनीय है कि निगम के सभापति नूतन सिंह ठाकुर जो कोरबा रायफल शूटिंग एकेडमी के सचिव भी हैं, के द्वारा आयुक्त आशुतोष पाण्डेय के समक्ष प्रस्ताव रखा कि कोरबा में रायफल शूटिंग रेंज स्थापित किया जाये, इस प्रस्ताव पर महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत व आयुक्त आशुतोष पाण्डेय ने सहर्ष सहमति दी तथा कोरबा में रायफल शूटिंग रेंज स्थापित किया। शनिवार को आयोजित एक गरिमापूर्ण कार्यक्रम में प्रदेश के उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के मुख्य आतिथ्य व महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत की अध्यक्षता में कोरबा रायफल शूटिंग रेंज का विधिवत शुभारंभ किया गया, उद्योग मंत्री देवांगन ने लोकार्पण पट्टिका का अनावरण किया एवं फीता काटा तथा रायफल्स की पूजा अर्चना की एवं रायफल से शूटिंग कर शूटिंग रंेज का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उद्योग मंत्री देवांगन ने दिये गये अपने उद्बोधन में आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय खेलों के विकास व खेल सुविधायें बढ़ाने के लिये विशेष रूचि ले रहे हैं तथा हमारा देश खेलों के क्षेत्र में नित नई उपलब्धियॉं अर्जित कर रहा है, उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मध्यक्षेत्र विकास प्राधिकरण की बैठक में जनजातीय बालक एवं बालिका क्रीड़ा परिषद के निर्माण हेतु 10-10 करोड़ रूपये की स्वीकृत दी है। उन्होने आगे कहा कि जहॉं तक नगर निगम कोरबा का प्रश्न है तो निगम ने अपने मूलभूत दायित्वों के सफल निर्वहन एवं निगम क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ कोरबा में खेल सुविधायें बढ़ाने के लिये व्यापक पैमाने पर कार्य किये हैं, जिससे हर कोई परिचित है। उन्हेाने कहा कि जब मैं महापौर था तो हाकी के जादूगर महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद जी की प्रतिमा स्थापित की गई है तथा उस चौक का नाम मेजर ध्यानचंद चौक किया गया था, स्टेडियम के समीप स्वीमिंग पूल निर्मित हुआ था तथा ओपन थियेटर घंटाघर मैदान को संरक्षित किया गया, जहॉं पर नित नई क्रीडा गतिविधियॉं आज संचालित हो रहा है। उन्होने कहा कि कोरबा रायफल शूटिंग रेंज की स्थापना से रायफल शूटिंग के खिलाडि़यों को एक बड़ी सुविधा मिल चुकी है, वे यहॉं पर प्रेक्टिस कर सकेंगे तथा नेशनल व इंटरनेशनल प्लेटफार्म पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुये कोरबा जिला व छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करेगे। उन्होने कहा कि कोरबा रायफल शूटिंग एकेडमी को शूटिंग रेंज के विकास के लिये, यहॉं पर आधुनिक सुविधाओं की उपलब्धता के लिये, जो भी आवश्यक होगा वह सहयोग निश्चित रूप से दिया जायेगा।  हम सबके लिये प्रसन्नता व गर्व का क्षण   इस अवसर पर महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि कोरबा में रायफल शूटिंग रेंज की स्थापना की गई, आज उद्योग मंत्री देवांगन ने इसका शुभारंभ किया, यह हम सबके लिये प्रसन्नता व गर्व का क्षण है, हमें इस बात की विशेष खुशी है कि हमारे आयुक्त आशुतोष पाण्डेय खेलों में विशेष रूचि रखते हैं तथा खेलों के विकास हेतु जो भी सुझाव उनके समक्ष रखें जाते हैं, उस पर वे पूरी इच्छाशक्ति के साथ कार्य करते हैं। महापौर श्रीमती राजपूत ने कहा कि कोरबा में खेल सुविधाओं की वृद्धि हेतु निगम ने उल्लेखनीय कार्य किये हैं, कोरबा रायफल शूटिंग रेंज के विकास हेतु एवं यहॉं पर बेहतर व अत्याधुनिक सुविधायें मुहैया कराने के लिये जो भी प्रस्ताव सामने लाया जायेगा, उस पर निश्चित रूप से काम होगा।  इस अवसर पर सभापति एवं कोरबा रायफल शूटिंग एकेडमी के सचिव नूतन सिंह ठाकुर  एवं आयुक्त आशुतोष पाण्डेय ने  भी अपने विचार व्यक्त किये. कोरबा शहर के खिलाडि़यों शूटिंग प्रेमियों के लिये बड़ा तोहफा  कोरबा में खेलों के विकास में निगम की महत्वपूर्ण भूमिका   इस अवसर पर जिला ओलंपिक संघ के अध्यक्ष नौशाद खान ने अपने उद्बोधन में कहा कि कोरबा में खेलों के विकास एवं खेल सुविधायें मुहैया कराने में नगर पालिक निगम कोरबा की सदैव महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इसी कड़ी में आज कोरबा रायफल शूटिंग रंेज की यह सौगात भी शहर को मिल चुकी है, जिसके लिये मैं उद्योग मंत्री देवांगन, महापौर श्रीमती राजपूत व आयुक्त पाण्डेय को साधुवाद देता हूॅं। उन्होने कहा कि रायफल शूटिंग के खिलाड़ी यहॉं पर प्रेक्टिस करेंगे. बर्षो से उपेक्षित स्थल आज सुव्यवस्थित शूटिंग रेंज से हुआ सुसज्जित   टी.पी.नगर स्थित इंदिरा प्रियदर्शनी इंदिरा स्टेडियम के पीछे जिस स्थल पर शूटिंग रेंज स्थापित किया गया, वह स्थान बर्षो से उपेक्षित पड़ा था, कचरे का ढेर लगा था, वहॉं पर असामाजिक गतिविधियों की संभावना भी रहती थी, वह उपेक्षित पड़ा स्थल निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय के प्रयास से आज सुव्यवस्थित रायफल शूटिंग रेंज के रूप में सुसज्जित हो चुका है, स्टेडियम के पीछे कबाड़ से भरा हाल कोरबा रायफल शूटिंग एकेडमी व इंडोर शूटिंग रेंज में तब्दील हो चुका है।  उत्कृष्ट खिलाडि़यों का हुआ सम्मान   इस मौके पर उद्योग मंत्री देवंागन, महापौर श्रीमती राजपूत व अन्य अतिथियों ने विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाडि़यों का सम्मान किया। रायफल शूटिंग में श्रुति यादव, यामिनी बोर्डे, पीयूष सिंह, अजीत आनंद, आकाश सराफ व कोच नीरज निखिल, बास्केट बाल में  आयुष्मान तनोजिया, … Read more

उपमुख्यमंत्री अरुण साव जी के सहयोग से जूडो खिलाड़ी रंजीता को मिलेगी मदद

रायपुर उप मुख्यमंत्री अरुण साव से छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ वर्णिका शर्मा ने भेंट की । उन्होंने छत्तीसगढ़ के बाल गृह कोंडागांव की पूर्व छात्रा कु रंजीता कुरैठी के बारे में बताया कि उसने जूडो में राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड जीते हैं और भारतीय दल में शामिल रही है । डॉ वर्णिका शर्मा ने माननीय अरुण साव जी को बताया कि इस बच्ची को प्रशिक्षण हेतु जापान भेजने और मासिक रूप से अतिरिक्त पोषक आहार के लिए राशि की जरूरत है । अरुण साव उपमुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री ने फौरन अपनी संवेदनशीलता दिखाई और बच्ची से तुरंत वीडियो कॉल पर बात की । उन्होंने खेल विभाग के अधिकारियों को तत्काल आवश्यक सहायता देने की व्यवस्था के निर्देश दिए । डॉ वर्णिका शर्मा ने बताया कि आयोग द्वारा आरम्भ किए गए सार्थक अभियान के तहत पिछले बाल देखरेख संस्थाओं को छोड़कर जाने वाले अट्ठारह वर्ष की आयु के बालक बालिकाओं के भविष्य निर्माण के लिए आयोग द्वारा ठोस कदम उठाए जा रहे हैं । इसी कड़ी में ये प्रयास भी शामिल है ।  डॉ वर्णिका शर्मा ने आयोग की ओर से उपमुख्यमंत्री की इस सार्थक और संवेदनशील  पहल के लिए उनका हृदय से आभार व्यक्त किया है । इस अवसर पर डॉ वर्णिका शर्मा ने बच्चों के खेल मैदानों को सुरक्षित करने ,आवारा कुत्तों से बच्चों के बचाव और नगरीय क्षेत्र में खुले गड्ढे के चारों ओर बाड़ी लगाकर बच्चों को बचाने के संबंध में भी बातचीत की । उपमुख्यमंत्री जी ने इन विषयों को तत्काल आगामी विभागीय बैठक में शामिल करते हुए ठोस कार्यवाही का आश्वासन दिया ।

महिला आरक्षण पर सियासत गरम: Vishnu Deo Sai का बड़ा बयान, ‘नारी शक्ति वंदन’ पर BJP आक्रामक

रायपुर. नारी शक्ति वंदन अधिनियम को देश के गृहमंत्री अमित शाह ने सरल भाषा में तर्कपूर्वक समझाया, लेकिन विपक्ष को 70 करोड़ महिलाओं का सम्मान नहीं करना था. आज उनका चेहरा सबके सामने उजागर हो चुका है. आने वाले समय में कांग्रेस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. हमारा संघर्ष जारी रहेगा. महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत का हक दिलाकर रहेंगे. यह बात मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लोकसभा में पारित नहीं हो पाने पर कही. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, रायपुर महापौर मीनल चौबे, सांसद कमलेश जांगड़े, सांसद लक्ष्मी वर्मा के साथ नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लोकसभा में पारित नहीं हो पाने पर प्रेस वार्ता के जरिए भाजपा का पक्ष रखा. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्राचीन काल से नारियों का सम्मान हुआ है. हम लोग अपने देश में नारियों को दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी का अवतार मानते हैं. और उसी दिशा में उनका नेतृत्व सुनिश्चित करने का काम होने जा रहा था, लेकिन जिस तरह से इंडी गठबंधन ने, खासतौर से कांग्रेस, टीएमसी और सपा ने जिस तरह से अधिनियम का विरोध किया. और अधिनियम को पास नहीं होने दिया, उससे देश की आधी आबादी के उम्मीदों पर पानी फेरने का काम किया. इसकी जितनी निंदा की जाए कम है. मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नारियों के विकास हुआ है. शौचालय निर्माण का काम, उज्ज्वला योजना में काम हुआ है. महतारी वंदन योजना के जरिए 70 लाख महिलाओं को राशि भेजने का काम हम कर रहे हैं. लेकिन कांग्रेस अग्रेजों की चाल चलती है. 3 दशकों से महिला आरक्षण की बात कर रहे हैं, लेकिन हर बार जब इसको पास कराने की बात आती है, तो मुंह फेर लेते हैं. इस बार भी वही हुआ है. यह देश के 70 करोड़ माता-बहनों के साथ धोखा है. आने वाले समय में इंडी गठबंधन की इसका खामियाजा सहना पड़ेगा. भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लोकसभा में पारित नहीं हो पाने पर विपक्ष पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि 17 अप्रैल का दिन स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाना था. कांग्रेस और विपक्ष ने महिलाओं के अधिकार का हनन किया. कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों ने बिल को पास होने नहीं दिया. महिला अधिकार की बात जब भी आई कांग्रेस ने महिलाओं के अधिकार के साथ गद्दारी की है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं के हितों की उपेक्षा की. समाजवादी पार्टी और आरजेडी ने हमेशा महिलाओं को गाली देने का काम किया. बिल पास नहीं के बाद विपक्ष के लोगों ने तालियां बजाई और खुशियां मनाई, जबकि हमारे आंखों में आंसू थे. कांग्रेस के लोग चालबाज हैं. कांग्रेस ने बहुत बड़ा पाप किया है. इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा.

रायपुर: उप मुख्यमंत्री साव ने मावा मोदोल लाइब्रेरी चारामा का शुभारंभ किया

रायपुर  प्रदेश के उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन एवं विकास, खेलकूल और युवा कल्याण एवं  उत्तर बस्तर (कांकेर) जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव ने आज  रविवार को कांकेर जिले के चारामा में मावा मोदोल लाइब्रेरी का लोकार्पण किया। लोकार्पण पश्चात उन्होंने लाईब्रेरी का अवलोकन कर वहां अध्ययनरत युवाओं से संवाद किया तथा  उनसे अपने विद्यार्थी जीवन को साझा करते हुए कहा कि लगन से पढ़ाई करें, सरकार जो सुविधाएं उपलब्ध करा रहीं है, उसका लाभ उठाए और सफल होकर अपने देश-प्रदेश व क्षेत्र का नाम रौशन करें। देश के प्रति हमेशा निष्ठावान रहें। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए अपनी शुभकामनाएं भी दी। कुल 43 लाख रूपए की लागत से निर्मित इस सर्वसुविधायुक्त लाईब्रेरी में एक साथ 75 विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंंगे।  इस मौके पर छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प बोर्ड के अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत तथा जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण नरेटी विशेष रूप से उपस्थित थी। लाईब्रेरी के शुभारंभ अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा लगातार बच्चों के भविष्य को गढ़ने का कार्य किया जा रहा है। चाहे दिल्ली मे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराना हो, अथवा प्रदेश में लाईब्रेरी व नालंदा परिसरों की स्थापना, विधार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए समूचित सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। कांकेर जिले में भी जिला प्रशासन द्वारा लगातार बच्चों के लिए अच्छी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है, इसी कड़ी में आज मावा मोदोल लाईब्रेरी चारामा का शुभारंभ हो रहा है। पूरे क्षेत्र के बच्चे यहां अच्छे वातावरण में पढ़ाई कर अपना भविष्य गढ़ सकते हैं। उन्होंने क्षेत्रवासियों सहित प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे सभी युवाओं एवं उनके पालकों को अपनी शुभकामनाएं भी दी। समारोह को स्थानीय विधायक श्रीमती सावित्री मंडावी ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मावा मोदोल लाइब्रेरी की स्थापना से इस क्षेत्र के बच्चों को लाइब्रेरी का लाभ मिलेगा। मावा मोदोल लाईब्रेरी में अच्छी तैयारी कर बच्चे अपना भविष्य संवार सकते हैं। कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसार ने अपने उद्बोधन में बताया कि जिले के सभी 11 तहसील मुख्यालय में मावा मोदोल लाईब्रेरी की स्थापना की जाएगी, ताकि उस क्षेत्र के बच्चे लाईब्रेरी में पढ़ाई कर उच्च पदों पर आसीन हो सके। कांकेर जिले का यह छंटवा लाईब्रेरी है, इससे पूर्व कांकेर, भानुप्रतापपुर, कोरर, दुर्गूकोंदल और अंतागढ़ में मावा मोदोल निःशुल्क लाईब्रेरी संचालित की जा रही है। कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद कांकेर के अध्यक्ष अरुण कौशिक, नगर पंचायत चारामा के अक्ष्यक्ष भुनेश्वर नाग, पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा, सीईओ जिला पंचायत हरेश मंडावी, जिला शिक्षा अधिकारी रमेश निषाद, महेश जैन, उमादेवी शर्मा सहित गणमान्य नागरिक और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर विद्यार्थी एवं शिक्षकगण उपस्थित थे ।

रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर से बस्तर को मिलेगा वैश्विक कनेक्शन

रायपुर.  बस्तर की प्रगति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-130 CD) एक क्रांतिकारी कदम साबित होने जा रहा है। भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा यह 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर न केवल दूरियों को कम करेगा, बल्कि बस्तर के स्थानीय उत्पादों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों तक पहुँच प्रदान कर लैंड-लॉक्ड क्षेत्र की बाधाओं को समाप्त करेगा। दुर्गम घाटों से मुक्ति और समय की बड़ी बचत वर्तमान में जगदलपुर से विशाखापट्टनम की यात्रा ओडिशा के कोरापुट और जयपुर के कठिन घाटों से होकर गुजरती है, जिसमें 7 से 9 घंटे का समय लगता है। भारी वाहनों के लिए यह मार्ग न केवल थकाऊ है, बल्कि डीजल की खपत और मेंटेनेंस के लिहाज से भी खर्चीला है। नया कॉरिडोर इस यात्रा को मात्र 3.5 से 4 घंटे में समेट देगा। सीधा और घाट-मुक्त रास्ता होने के कारण वाहनों का परिचालन खर्च काफी कम हो जाएगा, जिससे परिवहन क्षेत्र को बड़ी राहत मिलेगी। नबरंगपुर इंटरचेंज: बस्तर का प्रवेश द्वार रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-130 CD) छत्तीसगढ़ के रायपुर, धमतरी, कांकेर और कोंडागांव जिलों से गुजर रहा है। जगदलपुर मुख्यालय को इस कॉरिडोर से जोड़ने के लिए ओडिशा के नबरंगपुर का दासपुर इंटरचेंज महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। जगदलपुर का ट्रैफिक मात्र 50-60 किमी का सफर तय कर नबरंगपुर इंटरचेंज के माध्यम से रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर में शामिल हो सकेगा, जिससे बस्तर सीधे विशाखापट्टनम पोर्ट और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक नेटवर्क से जुड़ जाएगा। बस्तरिया ब्रांड का अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश इस कॉरिडोर का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव बस्तर की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। अब बस्तर की अरेबिका कॉफी, जैविक इमली, महुआ उत्पाद और प्रसिद्ध ढोकरा शिल्प को विशाखापट्टनम पोर्ट तक पहुँचाना सुगम होगा। कम लॉजिस्टिक लागत के कारण ये उत्पाद वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्ध होंगे, जिससे स्थानीय किसानों, संग्रहकर्ताओं और शिल्पकारों को उनकी उपज का बेहतर अंतरराष्ट्रीय मूल्य मिल सकेगा। सामाजिक और आर्थिक उत्थान बस्तर, कांकेर और कोंडागांव जैसे आकांक्षी जिलों को इस परियोजना से सीधा लाभ मिलेगा। बेहतर सड़क संपर्क से शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाएं इन सुदूर क्षेत्रों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेंगी। इस राजमार्ग के माध्यम से बस्तर का कृषि उत्पाद और इस्पात सीधे रायपुर, दुर्ग-भिलाई और विशाखापट्टनम जैसे औद्योगिक केंद्रों से जुड़ जाएगा। इससे स्थानीय युवाओं के लिए तकनीकी, प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट और सर्विस सेक्टर में हजारों नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। यह कॉरिडोर बस्तर में औद्योगिक विकास की एक नई लहर लाने के लिए तैयार है। औद्योगिक और खनिज विकास बस्तर क्षेत्र लौह अयस्क और अन्य खनिजों से समृद्ध है। यह कॉरिडोर इन खनिजों को विशाखापत्तनम पोर्ट तक तेजी से पहुंचाने में मदद करेगा, जिससे निर्यात और व्यापार में भारी उछाल आएगा। कॉरिडोर के किनारे नए औद्योगिक क्लस्टर विकसित होने की संभावना है, जिससे स्थानीय स्तर पर विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान का विस्तार कनेक्टिविटी में सुधार होने से अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की आमद बढ़ेगी। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा, दंतेश्वरी मंदिर, ढोलकल गणेश, कुतुमसर गुफा और चित्रकोट-तीरथगढ़ जैसे जलप्रपातों तक पहुंच आसान होगी। इससे न केवल पर्यटन राजस्व बढ़ेगा, बल्कि आदिम संस्कृति और लोक कलाओं को भी वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलेगी। पर्यावरण और इंजीनियरिंग का तालमेल कांकेर जिले के बासनवाही के मंझिनगढ़ पहाड़ी (केशकाल) को चीरकर 2.79 किमी लंबी छत्तीसगढ़ की पहली ट्विन-ट्यूब टनल बनाई जा रही है। यह टनल उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के इको-सेंसिटिव जोन से गुजरती है, जिसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि वन्यजीवों का आवागमन बाधित न हो। साथ ही पूरे राजमार्ग में मंकी कैनोपी, एनिमल अंडरपास और ओवरपास बनाए जा रहे हैं ताकि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बना रहे। रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH 130CD) बस्तर संभाग और पूरे छत्तीसगढ़ के आर्थिक परिदृश्य को बदलने वाली एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। लगभग 16,491 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह 464 किमी लंबा ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल  कॉरिडोर न केवल दूरी कम करेगा, बल्कि बस्तर जैसे जनजातीय क्षेत्रों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में सेतु का काम करेगा। यह कॉरिडोर बस्तर को विश्व व्यापार की मुख्यधारा से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करेगा। यह परियोजना सही मायने में बस्तर की आत्मनिर्भरता और वैश्विक पहचान का आधार बनेगी। "रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के लिए विकास का नया द्वार खोलने जा रहा है। केंद्र सरकार के सहयोग से हम राज्य में आधुनिक और मजबूत अधोसंरचना का तेजी से विस्तार कर रहे हैं। इससे न केवल यात्रा समय कम होगा, बल्कि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी। हमारी सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर जैसे क्षेत्रों को मुख्य धारा की अर्थव्यवस्था से जोड़कर समावेशी और संतुलित विकास सुनिश्चित किया जाए। यह परियोजना आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में एक मजबूत कदम है।" – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय "रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रदेश में कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास को नई गति देगा। विश्वस्तरीय सड़क नेटवर्क तैयार कर नागरिकों और माल परिवहन को सुगम, सुरक्षित और तेज बनाया जा रहा है। इस कॉरिडोर से बस्तर सीधे बंदरगाह से जुड़कर व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। हमारी प्राथमिकता है कि हर क्षेत्र तक बेहतर सड़क और बुनियादी सुविधाएं पहुंचें, जिससे प्रदेश का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।" – उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव

देवखोल-भालूमाड़ा में अवैध कोयला माफिया पर वार, ब्लास्टिंग से बंद होंगी 150 मीटर लंबी सुरंगें

रायपुर. कोरिया जिला में अवैध कोयला खनन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए लगातार दूसरे दिन व्यापक कार्रवाई की। रायपुर से पहुंची सेंट्रल प्लाइंग स्क्वॉड की टीम ने रविवार को देवखोल और भालूमाड़ा क्षेत्रों का निरीक्षण कर अवैध खनन स्थलों का चिन्हांकन किया और उन्हें ब्लास्टिंग कर स्थायी रूप से बंद करने के निर्देश दिए। इस दौरान जिला स्तर पर गठित टास्क फोर्स, जिसमें खनिज, वन, राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल थे, ने संयुक्त रूप से पूरे क्षेत्र का जायजा लिया। टीम ने बताया कि निरीक्षण के समय मौके पर कोई कोयला या खनन सामग्री नहीं मिली, लेकिन पूर्व में यहां बड़े पैमाने पर अवैध गतिविधियां संचालित हो रही थीं। इस कार्रवाई से एक दिन पहले, शनिवार को संयुक्त टीम ने पटना तहसील अंतर्गत देवखोल जंगल में सघन अभियान चलाया था। इस दौरान अवैध खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 6 टन से अधिक कोयला जब्त किया गया। साथ ही कई अवैध सुरंगों को ध्वस्त किया गया, जिनका उपयोग लंबे समय से कोयला निकालने के लिए किया जा रहा था। अभियान के दौरान टीम ने करीब 150 लंबी सुरंगों के भीतर प्रवेश कर न केवल कोयला बरामद किया था, बल्कि खनन में उपयोग होने वाले उपकरण जैसे फावड़ा, गेती, विद्युत पंप, फुटबॉल पाइप और बड़ी मात्रा में बिजली के तार भी जब्त किए थे।   रविवार को की गई कार्रवाई में कोरिया के अलावा सूरजपुर, मनेंद्रगढ़- चिरमिरी-भरतपुर और गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही जिलों के खनिज अधिकारी, स्थानीय पुलिस, वन एवं राजस्व विभाग के कर्मचारी भी मौजूद रहे।  अधिकारियों ने बताया कि वन एवं खनिज विभाग के साथ-साथ एसईसीएल के समन्वय से इन क्षेत्रों की निगरानी और सख्त की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध कोयला खनन पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए चिन्हित स्थानों को ब्लास्टिंग कर बंद किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों की पुनरावृत्ति न हो सके। साथ ही क्षेत्र में लगातार निगरानी और संयुक्त अभियान जारी रखने की भी बात कही गई है। इस सख्त कार्रवाई से अवैध खनन में लगे लोगों में हड़कंप मच गया है, वहीं प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस तरह के अभियानों को और तेज किया जाएगा।

वनोपज से सशक्तिकरण: तेंदूपत्ता संग्रहण से 31,000 परिवारों को मिलेगा सहारा, तैयारियां पूरी

कोंडागांव. वनमंडल कोंडागांव में तेंदूपत्ता संग्रहण की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस वर्ष 19,200 मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य तय किया गया है। संग्राहकों को 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा भुगतान मिलेगा। करीब 31 हजार परिवार इस कार्य से जुड़े हुए हैं। मौसम अनुकूल रहा तो 25 अप्रैल से खरीदी शुरू हो सकती है। पत्तों की गुणवत्ता को देखते हुए तिथि तय की जाएगी। व्यवस्था संभालने 3 गुणवत्ता नियंत्रण अधिकारी लगाए गए हैं। 7 जोनल अधिकारी और 13 प्रबंधक भी तैनात किए गए हैं। 245 फड़ अभिरक्षक और 245 फड़ मुंशी मैदान में रहेंगे। वन विभाग समेत अन्य विभागों के कर्मचारी ड्यूटी पर लगाए गए हैं। गोदाम प्रभारी और उड़नदस्ता दल भी सक्रिय रहेंगे। तेंदूपत्ता सीजन से हजारों परिवारों की आय में राहत आने वाली है। बस्तर में “हरा सोना” कहे जाने वाले तेंदूपत्ता का संग्रहण कार्य अप्रैल से शुरू होने जा रहा है, वन विभाग ने इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं, वन विभाग के अनुसार इस वर्ष बस्तर वृत्त को कुल 2 लाख 70 हजार 600 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य दिया गया है, संग्रहण कार्य अप्रैल से शुरू होकर मई तक चलेगा. एक अरब से ज्यादा भुगतान की संभावना अगर मौसम अनुकूल रहा और लक्ष्य पूरा हुआ, तो इस साल संग्राहकों को 1 अरब रुपये से अधिक भुगतान होने की संभावना है, पिछले वर्ष खराब मौसम के कारण संग्रहण कम हुआ था और लगभग 61 करोड़ रुपये का ही भुगतान हो पाया था, तेंदूपत्ता संग्रहण दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा सहित पूरे बस्तर क्षेत्र में हजारों आदिवासी परिवारों की आय का मुख्य स्रोत है, इस दौरान पूरा परिवार इस कार्य में जुटता है. संग्रहण की व्यवस्था संग्रहण प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए 75 समितियां बनाई गई हैं और 1710 खरीदी केंद्र तैयार किए गए हैं, इससे संग्राहकों को आसानी से तेंदूपत्ता बेचने की सुविधा मिलेगी, राज्य सरकार द्वारा प्रति मानक बोरा 5500 रुपये का भुगतान किया जा रहा है, इसके साथ बोनस भी दिया जाता है, जिससे ग्रामीणों की आय और बढ़ती है. विभाग का बयान मुख्य वन संरक्षक आलोक तिवारी ने बताया कि, संग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, उन्होंने कहा कि, संग्राहकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता है.

रायपुर: जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तब राज्य होता है मजबूत – मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

रायपुर : जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तब राज्य होता है मजबूत – मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ‘लक्ष्मी सखी मिलेट्स कार्ट’ से आत्मनिर्भरता को मिली नई रफ्तार हितग्राहियों को मिलेट कार्ट एवं चैक का किया गया वितरण रायपुर महिला सशक्तिकरण को राज्य के समग्र विकास की आधारशिला बताते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो परिवार, समाज और पूरा राज्य मजबूत होता है। उन्होंने अपने निवास, नया रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय ‘लक्ष्मी सखी मिलेट्स कार्ट’ वितरण कार्यक्रम में यह उद्बोधन देते हुए कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। कार्यक्रम के दौरान मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने विभिन्न स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को ‘लक्ष्मी सखी मिलेट्स कार्ट’ वितरित किए। इस अवसर पर श्रीमती शैलेन्द्री कुर्रे, श्रीमती डिगेश्वरी निषाद, श्रीमती अनिता ताण्डी, श्रीमती सुमन वर्मा, श्रीमती दीपाली राजपूत, श्रीमती दीपा सोनी, श्रीमती कामिनी बोथरा, श्रीमती सुभद्रा निर्मलकर, श्रीमती गीता साहू एवं श्रीमती प्रीति साहू सहित कई हितग्राही उपस्थित रहीं। मंत्री ने बताया कि ‘मिलेट्स कार्ट’ अभियान महिलाओं के लिए स्वरोजगार का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।  कांकेर जिला के नरहरपुर ग्राम की श्रीमती लोकेश्वरी रसिया और अन्य महिलाये प्रतिदिन 2 से 3 हजार रुपये तक तथा प्रतिमाह 25 से 30 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।  उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाना है, जिससे उनका आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास, क्षमता और समान अवसर विकसित करने की सतत प्रक्रिया है। जब महिलाएं शिक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर होती हैं, तो परिवार और समाज दोनों का समग्र विकास होता है तथा राज्य की अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ होती है। इस दिशा में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित महिला कोष योजना और सक्षम योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। महिला कोष योजना के तहत वर्ष 2003 से स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को मात्र 3 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। पहली बार 2 लाख रुपये तक तथा समय पर पुनर्भुगतान करने पर दूसरी बार 6 लाख रुपये तक का ऋण दिया जाता है। वर्ष 2021 में राज्य सरकार द्वारा 12.77 करोड़ रुपये के पुराने ऋण माफ किए गए, जिससे लगभग 1 लाख महिलाएं पुनः ऋण लेने के लिए पात्र हुईं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022-23 में 10,500 महिलाओं को 10.70 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया, वहीं 2023-24 में 2500 समूहों को 31 करोड़ रुपये ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है। इसी प्रकार सक्षम योजना के अंतर्गत वर्ष 2022-23 में 2.63 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत कर महिलाओं को व्यक्तिगत स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया गया। इन योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव से महिलाएं पापड़ निर्माण, श्रृंगार सामग्री, किराना व्यवसाय सहित विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर प्रतिमाह 1,000 से 5,000 रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (08 मार्च 2026) के अवसर पर बस्तर में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े द्वारा ‘लक्ष्मी मिलेट्स कार्ट’ अभियान का शुभारंभ किया गया था। इस पहल के तहत राज्यभर में महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। विशेष रूप से नरहरपुर और कांकेर क्षेत्र की महिलाएं इस योजना से उल्लेखनीय आय अर्जित कर रही हैं। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ‘लखपति दीदी’ जैसी अवधारणाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार की योजनाएं इस दिशा में ठोस परिणाम दे रही हैं। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ गिरीश चंदेल, जिला कार्यक्रम अधिकारी सुश्री शैल ठाकुर, साथी परियोजना के राष्ट्रीय समन्वयक श्री मनीष साहू, साथी परियोजना के नोडल अधिकारी प्रोफेसर गजेंद्र चंद्राकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं हितग्राही उपस्थित रहे।

BJYM ने जारी की पदाधिकारियों की लिस्ट, युवा चेहरों को दिया मौका, बोले- हम दिल से काम करेंगे

रायपुर  छतीसगढ़ में बीजेपी ने पार्टी की मजबूति के लिए नई नियुक्तियां की है। दरअसल भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा (BJYM) के पदाधिकारियों की लिस्ट जारी की गई। लिस्ट में बलौदाबाजार-भाटापारा के जिला मंत्री का दायित्व गगन शर्मा को सौंपा गया है।  गगन शर्मा सिमगा के रहने वाले हैं और हिंदुवादी नेता के तौर पर उनकी पहचान है। वहीं गगन की क्षेत्र के साथ ही  आसपास में भी पकड़ है। इन्हीं  खूबियो के कारण उन्हें अब पार्टी ने जिला मंत्री युवा मोर्चा का जिम्मा सौंपा है। रमेश ठाकुर को रायपुर शहर अध्यक्ष की जिम्मेदारी जहां रमेश ठाकुर रायपुर शहर का जिला अध्यक्ष बनाए गए हैं वही श्याम नारंग को रायपुर ग्रामीण का जिला अध्यक्ष बनाया गया है। भिलाई में पुरुषोत्तम देवांगन को जिला अध्यक्ष बनाया गया है तो सूरजपुर जिले में मुरली सोनी को जिला अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है। पदाधिकारियों ने जताया आभार भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा में पद मिलने पर पदाधिकारियों ने पार्टी का आभार जताया है।उन्होंने कहा है कि वे पार्टी को नए मुकाम पर ले जाने के लिए दिल से काम करेंगे और कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। पार्टी के लिए काम करते हुए इनको काफी समय हो गया है औऱ अब पार्टी ने भरोसा जताकर इनको जिम्मेदारी सौंपी है। 

बस्तर को मिली बड़ी सौगात: रावघाट-Jagdalpur रेल प्रोजेक्ट से विकास को मिलेगा नया ट्रैक

नारायणपुर. रावघाट-जगदलपुर नई रेल लाइन परियोजना निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। करीब 140 किलोमीटर लंबी लाइन बस्तर को नए नेटवर्क से जोड़ेगी। इस कॉरिडोर में जगदलपुर, कोंडागांव, नारायणपुर और दल्लीराजहरा शामिल हैं। नारायणपुर इस परियोजना का अहम केंद्र बनकर उभर रहा है। अब तक सड़क पर निर्भर इलाका रेल सुविधा की ओर बढ़ रहा है। खनिज, वन उत्पाद और व्यापारिक परिवहन को सीधा लाभ मिलेगा। यात्रियों के लिए सफर आसान और समय कम होने की उम्मीद है। परियोजना की अनुमानित लागत 3513 करोड़ रुपये बताई गई है। रेल कॉरिडोर में 12 नए स्टेशन विकसित किए जाएंगे। भूमि अधिग्रहण और निर्माण प्रक्रिया को तेजी दी जा रही है। वर्ष 2028 तक काम पूरा होने की संभावना जताई गई है। यह परियोजना बस्तर की विकास पटरी पर बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। बस्तर की बहुप्रतीक्षित रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन परियोजना अब जमीन पर आकार लेने लगी है। भारतीय रेल ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत दूसरा टेंडर जारी कर दिया है, जिससे निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। लंबे समय से प्रतीक्षित इस रेल लाइन के शुरू होने से बस्तर क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा और यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। बस्तर के विकास की ‘लाइफलाइन’ बनेगी रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन को बस्तर के विकास की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस परियोजना के पूरा होने से न केवल क्षेत्र में यात्री परिवहन आसान होगा, बल्कि खनिज संपदा के परिवहन, व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक विकास को भी नई दिशा मिलेगी। रेल कनेक्टिविटी मजबूत होने से बस्तर के दूरस्थ इलाकों को मुख्यधारा से जोडऩे में मदद मिलेगी। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और पर्यटन गतिविधियों में भी वृद्धि होने की उम्मीद है। 3513 करोड़ की मंजूरी बस्तर की बहुप्रतीक्षित रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन परियोजना अब निर्णायक चरण में पहुंचती नजर आ रही है। भारतीय रेल द्वारा एक ओर जहां इस प्रोजेक्ट के तहत दूसरा टेंडर जारी कर निर्माण कार्य को गति दी गई है, वहीं केंद्र सरकार से 3513.11 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिलने से यह परियोजना और तेज हो गई है। लगभग 140 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन बस्तर के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों को देश के मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ेगी, जिससे क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी। इस टेंडर की अनुमानित लागत करीब 98.49 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है। निविदा प्रक्रिया के तहत इच्छुक एजेंसियों को 8 मई 2026 तक आवेदन करने का अवसर दिया गया है। समयसीमा तय होने से अब परियोजना के कार्यों में गति आने की संभावना बढ़ गई है। पुल और ओवरब्रिज निर्माण से जुड़े अहम काम जारी निविदा के अनुसार रावघाट से जगदलपुर तक प्रस्तावित लगभग 140 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के एक महत्वपूर्ण हिस्से में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किए जाएंगे। इसके तहत एक प्रमुख बड़ा पुल, छह छोटे पुल और दो रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण किया जाना है। इसके अलावा अन्य सहायक संरचनाओं का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिससे पूरी लाइन को सुचारू रूप से संचालित किया जा सके।