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संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल: मुख्यमंत्री साय ने दिव्यांग चंदूलाल की सुनी पुकार, मिनटों में मिला समाधान

रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संवेदनशील और जनहितकारी शासन की एक भावुक झलक आज चंदखुरी में देखने को मिली, जब उन्होंने एक दिव्यांग ग्रामीण की समस्या को न केवल सुना, बल्कि मौके पर ही उसका समाधान सुनिश्चित कर मानवता और उत्तरदायी नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया। चंदखुरी निवासी दिव्यांग चंदूलाल वर्मा के लिए यह दिन जीवन का अविस्मरणीय क्षण बन गया। वे मुख्यमंत्री से मिलने की आशा लेकर कायस्थ मंगल भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम समाप्ति के बाद जब वे मुख्यमंत्री से मिलने के लिए आगे बढ़े, तो सुरक्षा कारणों से उन्हें रोक दिया गया।इसी दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि वर्मा को मंच पर बुलाया जाए। यह एक छोटा-सा निर्णय था, लेकिन चंदूलाल के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिलते ही चंदूलाल ने अपनी व्यथा साझा की। उन्होंने बताया कि वे पहले राजमिस्त्री का कार्य करते थे, लेकिन शुगर की बीमारी और डायबिटिक फुट के कारण उनके पैरों में गंभीर समस्या हो गई, जिससे चलना-फिरना कठिन हो गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अब कोई कार्य नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें बैटरी संचालित ट्राईसिकल की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री साय ने अत्यंत संवेदनशीलता के साथ उनकी पूरी बात सुनी और तत्काल सहायता राशि प्रदान करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि उन्हें शीघ्र मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देशों का त्वरित पालन सुनिश्चित किया गया। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतीक बैस ने तत्काल प्रक्रिया पूर्ण कर चंदूलाल वर्मा को मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया। अपनी खुशी व्यक्त करते हुए चंदूलाल भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि “मैंने सोचा भी नहीं था कि मुख्यमंत्री मुझसे मिलेंगे और मेरी समस्या का इतना जल्दी समाधान हो जाएगा। मैं उनका दिल से आभारी हूँ। धन्यवाद विष्णु भईया।” यह घटना केवल एक व्यक्ति की सहायता भर नहीं, बल्कि यह दर्शाती है कि राज्य सरकार का उद्देश्य हर नागरिक तक संवेदनशीलता, पहुंच और त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री का यह व्यवहार सुशासन के उस मॉडल को मजबूत करता है, जिसमें हर जरूरतमंद की आवाज सीधे शासन तक पहुंचती है और समाधान भी उतनी ही तेजी से मिलता है।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स: अरुणाचल की नेडी न्गी, महाराष्ट्र के गोविंद पाडेकर ने 5000 मीटर में जीते स्वर्ण पदक

रायपुर. अरुणाचल प्रदेश की मिडिल-डिस्टेंस धाविका नेडी न्गी ने महिलाओं की 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता, जबकि महाराष्ट्र ने पुरुष वर्ग में शानदार 1-2 स्थान हासिल किया। वहीं, बेमौसम बारिश के कारण सोमवार को खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के छठे दिन एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं के उद्घाटन दिन का शाम का सत्र रद्द करना पड़ा। नेडीन्गी ने अधिकांश दौड़ में खुद को संयमित रखा और अंतिम 200 मीटर में जोरदार स्प्रिंट लगाते हुए 18:24.66 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में महाराष्ट्र के गोविंद पाडेकर (15:11.35 सेकंड) और सूरज माशी (15:11.64 सेकंड) ने बेहतरीन तालमेल के साथ दौड़ते हुए क्रमशः स्वर्ण और रजत पदक जीते। नेडीन्गी ने दौड़ के बाद साई मीडिया से कहा, “मैं अकादमियों पर ध्यान देने के बाद वापसी कर रही हूं और यहां स्वर्ण पदक जीतकर बेहद खुश हूं। अब जब मेरी ग्रेजुएशन पूरी हो गई है, तो मैं नेशनल कैंप में जगह बनाने और आगे चलकर बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भारतीय टीम में चयनित होने पर ध्यान देना चाहती हूं।” अरुणाचल प्रदेश की नेडी न्गी के स्वर्ण पदक जीतने से राज्य ने पदक तालिका में अपना तीसरा स्थान मजबूत किया, जहां उसके खाते में अब छह स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदक हो गए हैं। अंबिकापुर में कुश्ती से मिले दो स्वर्ण पदकों के साथ कर्नाटक ने तालिका में अपनी बढ़त और मजबूत कर ली। रोहन डोड्डामनी ने स्विमिंग पूल के बाहर कर्नाटक का पहला स्वर्ण पदक दिलाया, जब उन्होंने 60 किग्रा ग्रीको-रोमन फाइनल में राजस्थान के दिनेश सोलंकी को तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हराया। इसके बाद मनीषा ने दिन का समापन करते हुए हिमाचल प्रदेश की मुस्कान को कड़े मुकाबले में 12-8 से हराकर कर्नाटक के लिए एक और स्वर्ण पदक जीता। कर्नाटक के अब कुल 17 स्वर्ण, छह रजत और पांच कांस्य पदक हो गए हैं। ओडिशा नौ स्वर्ण, चार रजत और 10 कांस्य पदकों के साथ दूसरे स्थान पर बना हुआ है। वहीं, मुलायम खरवार ने पुरुषों के 65 किग्रा फ्रीस्टाइल फाइनल में राजस्थान के राकेश मीणा को एकतरफा मुकाबले में हराकर बिहार को दिन का पहला स्वर्ण पदक दिलाया। कर्नाटक के केवी केम्प्पन्नावर ने इस वर्ग में कांस्य पदक जीता। रायपुर के अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में पसंदीदा टीम ओडिशा ने फाइनल में जगह बनाते हुए मिजोरम से मुकाबला तय किया। सेमीफाइनल में ओडिशा ने मध्य प्रदेश को 8-0 से हराया, जबकि मिजोरम ने झारखंड को 3-2 से मात दी। परिणाम एथलेटिक्स महिला 5000 मीटर: स्वर्ण – नेडी न्गी (अरुणाचल प्रदेश) 18:24.66 सेकंड; रजत – आरती दावर (मध्य प्रदेश) 18:29.28 सेकंड; कांस्य – त्सुचोई टी (नागालैंड) 18:35.60 सेकंड पुरुष 5000 मीटर: स्वर्ण – गोविंद पाडेकर (महाराष्ट्र) 15:11.35 सेकंड; रजत – सूरज माशी (महाराष्ट्र) 15:11.64 सेकंड; कांस्य – रंगलाल डोडियार (मध्य प्रदेश) 15:22.48 सेकंड हॉकी (सेमीफाइनल) महिला: मिजोरम ने झारखंड को 3-2 से हराया; ओडिशा ने मध्य प्रदेश को 8-0 से हराया कुश्ती महिला 53 किग्रा: स्वर्ण – नेहा उरांव (झारखंड); रजत – प्रीतीमा खाखलारी (असम); कांस्य – मैनारी खाखलारी (असम), लालवेनहिमी (मिजोरम) 76 किग्रा: स्वर्ण – मनीषा सिद्दी (कर्नाटक); रजत – मुस्कान (हिमाचल प्रदेश); कांस्य – लालहमंगाईहसांगी (मिजोरम) पुरुष 65 किग्रा फ्रीस्टाइल: स्वर्ण – मुलायम खरवार (बिहार); रजत – राकेश मीणा (राजस्थान); कांस्य – केवी केम्प्पन्नावर (कर्नाटक) 97 किग्रा फ्रीस्टाइल: स्वर्ण – हमाम हुसैन (जम्मू-कश्मीर); रजत – मोहित कुमार (हिमाचल प्रदेश); कांस्य – मोहम्मद वसीम चौधरी (जम्मू-कश्मीर) 60 किग्रा ग्रीको-रोमन: स्वर्ण – रोहन डोड्डामनी (कर्नाटक); रजत – दिनेश सोलंकी (राजस्थान); कांस्य – जुह पा यू जुह नोंगतडू (मेघालय) 87 किग्रा ग्रीको-रोमन: स्वर्ण – पियूष गुज्जर (हिमाचल प्रदेश); रजत – रियाज हुसैन (जम्मू-कश्मीर); कांस्य – टेक चंद (हिमाचल प्रदेश)

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: कुश्ती स्पर्धा के तीसरे दिन भी जारी रहा मुकाबले का रोमांच

रायपुर.  खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत सरगुजा जिले के अम्बिकापुर में आयोजित कुश्ती स्पर्धा के तीसरे दिन भी मुकाबले का रोमांच जारी रहा। खिलाड़ियों ने एक से बढ़कर एक दांवपेंच लगाकर जीत के लिए जोर लगाया। इस दौरान विजेता प्रतिभागियों को पदक प्रदान किया गया। कड़े मुकाबले के बीच विजेता पदक प्राप्त करने वालों में आज महिला सीनियर 53 किलोग्राम में झारखंड की नेहा ओराँव ने गोल्ड, असम की प्रतिमा खाखलरी ने सिलवर, असम की मैनारी खाखलरी एवं मिज़ोरम की लालवेनहीमी ने कांस्य पदक जीता। महिला सीनियर 76 किलोग्राम भारवर्ग में कर्नाटक की मनीषा जुवाव सिद्दी ने गोल्ड, हिमाचल प्रदेश की मुस्कान ने सिल्वर, मिजोरम की लालहमंगहिसँगी ने कांस्य पदक जीता।   इसी प्रकार पुरुष वर्ग में ग्रीको रोमन सीनियर 60 किलोग्राम भारवर्ग में कर्नाटक के रोहन एम दोद्दामनी  को गोल्ड, राजस्थान के दिनेश सोलंकी को सिल्वर, मेघालय के झु पा यू झु नोंगतडु ने कांस्य पदक अपने नाम किया। फ्रीस्टाइल 97 किलोग्राम भारवर्ग में जम्मू कश्मीर के हमाम हुसैन ने गोल्ड, हिमाचल प्रदेश के मोहित कुमार ने सिल्वर, जम्मू कश्मीर के मोहम्मद वसीम चौधरी ने कांस्य पदक जीता। ग्रीको रोमन सीनियर में 87 किलोग्राम भारवर्ग में हिमाचल प्रदेश के पीयूष गुज्जर को गोल्ड,जम्मू कश्मीर के रियाज़ हुसैन को सिल्वर एवं हिमाचल प्रदेश के टेकचंद ने कांस्य पदक जीता। फ्रीस्टाइल सीनियर में 65 किलोग्राम भारवर्ग में बिहार के मुलायम खरवार को गोल्ड, राजस्थान के राकेश कुमार मीना को सिल्वर एवं कर्नाटक के कैम्पानगौड़ा वी केम्प्पणवार ने कांस्य पदक जीता।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026: खेल के साथ पर्यटन का संगम, छत्तीसगढ़ की मेहमाननवाज़ी ने जीता दिल

रायपुर. खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 के रंग में इस समय पूरा छत्तीसगढ़ सराबोर नजर आ रहा है। खेल प्रतियोगिताओं के साथ-साथ राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य भी देशभर से आए खिलाड़ियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। अंडमान-निकोबार से आए वेटलिफ्टिंग के खिलाड़ियों के लिए सिरपुर और बारनवापारा के भ्रमण ने उनकी छत्तीसगढ़ की यात्रा को और यादगार बना दिया। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने आज खिलाड़ियों को ऐतिहासिक नगरी सिरपुर का भ्रमण कराया, जहां उन्होंने प्राचीन मंदिरों, बौद्ध विहारों और पुरातात्विक धरोहरों के माध्यम से राज्य के गौरवशाली इतिहास को करीब से जाना। सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत ने खिलाड़ियों को खासा प्रभावित किया और उन्होंने इसकी समृद्ध संस्कृति की सराहना की। बारनवापारा अभयारण्य के भ्रमण और प्रकृति की सुरम्य वादियों ने सभी खिलाड़ियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। घने जंगल, शांत वातावरण और हरियाली से भरपूर इस क्षेत्र में खिलाड़ियों ने सुकून के पल बिताए। बारनवापारा स्थित छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के हरेली इको रिसोर्ट में उन्होंने स्थानीय स्वादिष्ट व्यंजनों का भी आनंद लिया।  अंडमान-निकोबार के खिलाड़ियों की इस रोमांचक यात्रा का सबसे आकर्षक हिस्सा रहा बाँबू राफ्टिंग, जिसमें खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्राकृतिक जलधाराओं के बीच रोमांच का अनुभव किया। यह गतिविधि उनके लिए न केवल मनोरंजक रही, बल्कि टीम भावना को भी और मजबूत करने वाली साबित हुई।  छत्तीसगढ़ की आत्मीयता और मेहमाननवाज़ी ने सभी खिलाड़ियों का दिल जीत लिया। अंडमान-निकोबार से आए खिलाड़ियों ने राज्य सरकार एवं छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह अनुभव उनके जीवन की अविस्मरणीय स्मृतियों में शामिल रहेगा। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के माध्यम से छत्तीसगढ़ न केवल खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर रहा है, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन स्थलों और आतिथ्य की उत्कृष्टता को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला रहा है। यह आयोजन राज्य की बहुआयामी सकारात्मक छवि को और सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स: संघर्षों की भट्ठी में तपकर सोना बने झारखंड के अंजित मुंडा, कुश्ती में जीता गोल्ड मेडल

रायपुर.  कहते हैं कि यदि इरादे फौलादी हों और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो, तो अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। झारखंड के रामगढ़ जिले के एक छोटे से गाँव सुगिया के रहने वाले युवा पहलवान अंजित कुमार मुंडा ने इस बात को सच कर दिखाया है। अम्बिकापुर के गांधी स्टेडियम में आयोजित 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' के दौरान अंजित ने 67 किलोग्राम भार वर्ग की कुश्ती स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। संघर्ष से सफलता तक का सफर मात्र 20 वर्ष की आयु में सफलता के शिखर को छूने वाले अंजित का जीवन चुनौतियों से भरा रहा है। वर्ष 2009 में पिता के साये के उठ जाने के बाद, उनकी माता ने खेती-बारी और कठिन परिश्रम के बल पर परिवार को संभाला। अंजित ने वर्ष 2017-18 में कुश्ती की शुरुआत की और जेएसएसपीएस स्पोर्ट्स अकादमी में लगभग 6 वर्षों तक कड़ा अभ्यास किया। उनकी शारीरिक क्षमता और तकनीक को देखते हुए प्रशिक्षकों ने उन्हें कुश्ती के लिए तराशा। भारतीय सेना में 'अग्निवीर' के रूप में दे रहे हैं सेवाएं अंजित की खेल प्रतिभा और देश सेवा के जज्बे ने उन्हें भारतीय सेना तक पहुँचाया। पिछले वर्ष ही उनका चयन 'अग्निवीर जीडी' के पद पर हुआ है। अपनी इस सफलता का श्रेय वे अपने कोच को देते हैं। जनजातीय प्रतिभाओं के लिए बड़ा मंच अपनी जीत पर खुशी जाहिर करते हुए अंजित मुंडा ने कहा, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स हम जैसे जनजातीय बच्चों के लिए एक उत्कृष्ट मंच है, जो अक्सर मुख्यधारा से पीछे छूट जाते हैं। पहली बार आयोजित इस प्रतियोगिता में गोल्ड जीतना मेरे लिए गर्व की बात है। अब मेरा अगला लक्ष्य छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाली आगामी प्रतियोगिताओं में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है।" उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद पूर्व में कांस्य पदक जीतने के कारण छात्रवृत्ति से वंचित रहे अंजित को अब स्वर्ण पदक जीतने के बाद केंद्र सरकार से सहयोग और स्कॉलरशिप मिलने की पूरी उम्मीद है, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकें। अम्बिकापुर में चल रहे खेलों इंडिया ट्राइबल गेम्स में अंजित की यह उपलब्धि न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के जनजातीय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।

कोमालिका बारी का दमदार प्रदर्शन: एशियाई खेलों के चयन पर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में मिला आत्मविश्वास

एशियाई खेलों के चयन पर नजर, तीरंदाज कोमालिका बारी खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में दमदार प्रदर्शन को लेकर आश्वस्त कोमालिका विश्व कैडेट और विश्व जूनियर खिताब जीतने वाली भारत की दूसरी महिला रिकर्व तीरंदाज हैं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता  ने बेटी को तीरंदाजी अपनाने के लिए किया प्रेरित कोमालिका का मानना है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स से जनजातीय क्षेत्रों से कई प्रतिभाएं आ सकती हैं सामने रायपुर साल 2021 में जब कोमालिका बारी ने अपनी राज्य की साथी दीपिका कुमारी की बराबरी करते हुए विश्व कैडेट और विश्व जूनियर दोनों खिताब जीतने वाली भारत की दूसरी महिला रिकर्व तीरंदाज बनने का गौरव हासिल किया, तब जमशेदपुर की इस खिलाड़ी से काफी सारी उम्मीदें जुड़ गई थीं।           हालांकि, जूनियर स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद सीनियर सर्किट में उनका सफर उतना आसान नहीं रहा। कोमालिका एशियाई खेलों और 2028 ओलंपिक जैसे बड़े टूर्नामेंट्स के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अभी तक वह पूरी तरह अपनी जगह पक्की नहीं कर पाई हैं।            अब 2026 एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में चयन की दौड़ अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, ऐसे में कोमालिका ने अपनी तैयारियों को और तेज कर दिया है। पुणे में चल रहे प्रशिक्षण शिविर में वह अपनी तकनीक को निखारने के साथ-साथ मानसिक मजबूती और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने पर भी खास ध्यान दे रही हैं।          कोमालिका ने साई मीडिया को कहा कि, “मैं फिलहाल टॉप-16 में हूं और राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा हूं। एशियाई खेलों के चयन को लेकर मैं गंभीरता से तैयारी कर रही हूं। साथ ही, मैं ज्यादा से ज्यादा प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अनुभव हासिल करना चाहती हूं, जबकि अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम को भी बनाए रख रही हूं।”             झारखंड की यह प्रतिभाशाली तीरंदाज यहां जारी पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में तीरंदाजी प्रतियोगिता की प्रमुख आकर्षण हैं। कोमालिका ने आगे कहा कि, “मेरा अंतिम लक्ष्य (2028) ओलंपिक है। इस समय मेरा प्रशिक्षण काफी अच्छा चल रहा है और मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं। सबसे ज्यादा ध्यान मानसिक रूप से मजबूत रहने पर है, क्योंकि प्रदर्शन में इसकी बहुत बड़ी भूमिका होती है।” वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहती हैं, “मेरी यात्रा ने मुझे सिखाया है कि उतार- चढ़ाव आते रहेंगे, लेकिन कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से उन्हें पार कर आगे बढ़ा जा सकता है।”  उन्होंने यह भी बताया कि मैच अनुभव हासिल करने के अलावा वह अधिक से अधिक जनजातीय बच्चों को इस खेल को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं।               कोमालिका ने 12 साल की उम्र में पहली बार धनुष-बाण उठाया। उन्हें उनकी मां, जो एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं, का पूरा समर्थन मिला। उनकी मां ही उन्हें बिरसानगर में स्थानीय तीरंदाजी कोच के पास लेकर गईं, जहां से उनके करियर की शुरुआत हुई। साल 2012 में कोमालिका ने अपने शुरुआती संघर्षों का सामना करना शुरू किया। शुरुआती दिनों में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि वे अभ्यास के लिए धनुष खरीद सकें, इसलिए उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान बांस से बने अस्थायी धनुष का सहारा लिया।           प्रशिक्षण शुरू करने के चार साल बाद कोमालिका ने जमशेदपुर स्थित टाटा आर्चरी अकादमी में प्रवेश लिया और कोच धर्मेंद्र तिवारी तथा पूर्णिमा महतो के मार्गदर्शन में अभ्यास शुरू किया। लेकिन देश की इस प्रतिष्ठित अकादमी तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था, क्योंकि उन्हें अपने बिरसानगर स्थित घर से रोजाना 18 किलोमीटर साइकिल चलाकर वहां पहुंचना पड़ता था। वह कहती हैं, “जब मैंने तीरंदाजी शुरू की थी, तब मेरे कई सीनियर खिलाड़ी थे जिन्हें मैं रोल मॉडल मानती थी। हमें उन्हें आमतौर पर सिर्फ प्रतियोगिताओं के दौरान देखने का मौका मिलता था और इससे हमें काफी प्रेरणा मिलती थी।” उन्होंने आगे कहा कि , “यही एक बड़ा कारण है कि मैं खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में हिस्सा ले रही हूं। मैं चाहती हूं कि लोग मुझे खेलते हुए देखें और आगे आकर भाग लेने के लिए प्रेरित हों। अभी भी कई लोग भाग नहीं ले रहे हैं, लेकिन खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स एक बहुत अच्छा मंच है, जो प्रेरणा और अवसर दोनों प्रदान करता है।”             24 वर्षीय कोमालिका रायपुर में जारी प्रतियोगिता में व्यक्तिगत, टीम और मिश्रित टीम स्पर्धाओं में हिस्सा ले रही है। खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2020 में व्यक्तिगत रजत पदक जीत चुकी कोमालिका इस मंच के महत्व को भली-भांति समझती हैं और मानती हैं कि ट्राइबल गेम्स जनजातीय पृष्ठभूमि से आने वाले खिलाड़ियों के विकास को नई गति दे सकते हैं। वे कहती हैं कि, “ट्राइबल गेम्स पूरे खेल पारिस्थितिकी तंत्र को बदलने की क्षमता रखते हैं, खासकर जनजातीय खिलाड़ियों के लिए। खेलो इंडिया द्वारा उठाया गया यह कदम और इन खेलों का आयोजन बेहद प्रभावशाली है। आमतौर पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं एक ही खेल पर केंद्रित होती हैं, लेकिन यहां कई खेल एक साथ आयोजित किए जा रहे हैं, ठीक राष्ट्रीय खेलों की तरह।”

संपत्ति कर जमा करने का आखिरी मौका, चूक गए तो 17% अधिभार के साथ होगी सख्त कार्रवाई

रायपुर. रायपुर नगर पालिक निगम के राजस्व विभाग द्वारा शहर में लगातार अभियान चलाकर सभी 70 वार्डों के बड़े बकायादारों को चेतावनी दी जा रही है। निगम ने स्पष्ट किया है कि यदि बकाया राशि समय पर जमा नहीं की गई, तो संबंधित बकायादारों पर नियमानुसार कुर्की और सीलबंदी जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी। निगम प्रशासन ने अपील की है कि कार्रवाई की परेशानी और तनाव से बचने के लिए संबंधित सभी बड़े बकायादार नगर पालिक निगम रायपुर के राजस्व विभाग को तत्काल अपना सम्पूर्ण बकाया अदा कर दें। सभी सम्पत्तिकरदाता नागरिक अपना देय सम्पत्तिकर तत्काल नगर निगम रायपुर के राजस्व विभाग को अदा करें और अंतिम नियत तिथि दिनांक 31 मार्च 2026 तक करों की अदायगी नहीं किए जाने की स्थिति में नियमानुसार 17 प्रतिशत अधिभार सहित बकाया राजस्व की वसूली की सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिससे मानसिक परेशानी और तनाव से बचा जा सके। नगर पालिक निगम रायपुर के समस्त 10 जोन कार्यालयों के राजस्व विभाग और समस्त सदर काउंटर अंतिम देय तिथि 31 मार्च 2026 तक, महावीर जयंती के शासकीय अवकाश दिवस सहित, आम कार्य दिवस की तरह जनहित में जनसुविधा के लिए राजस्व वसूली के लिए सामान्य कार्यालयीन दिवस की भांति खुले रहेंगे। सभी सम्पत्तिकरदाता नागरिक जोन कार्यालय जाकर अपना देय सम्पत्तिकर तत्काल अदा कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त नगर पालिक निगम रायपुर के ‘मोर रायपुर’ ऐप को प्ले स्टोर से डाउनलोड करके तथा ऑनलाइन लिंक https://mcraipur.in/ के माध्यम से ऑनलाइन सम्पत्तिकर भुगतान की सुविधा निरंतर उपलब्ध रहेगी। इसके माध्यम से कोई भी सम्पत्तिकरदाता नागरिक अपने सम्पत्तिकर सहित समस्त निगम करों का भुगतान घर बैठे एक क्लिक पर आसानी से नगर पालिक निगम रायपुर के राजस्व विभाग को कर सकता है। रायपुर नगर पालिक निगम क्षेत्र के सभी 10 जोनों के समस्त 70 वार्डों के रहवासी सम्पत्तिकरदाता नागरिकों को इस सहज और सरल तरीके से प्राप्त हो रही प्रशासनिक जनसुविधा का अधिकाधिक लाभ ऑनलाइन सम्पत्तिकर भुगतान करके अवश्य उठाना चाहिए।

पल्लवी की बेटी महज छह महीने की थी जब उन्होंने दोबारा वेटलिफ्टिंग पर ध्यान देने का फैसला किया

रायपुर जब पल्लवी पायेंग की बेटी सिर्फ छह महीने की थी, तब असम की इस वेटलिफ्टर के सामने एक कठिन फैसला था। या तो वह अपने पसंदीदा खेल को छोड़ दें या फिर अपनी बेटी से दूर रहकर दोबारा ट्रेनिंग शुरू करें। ऐसे समय में उनके पति सुखावन थौमंग ने उन्हें अपने सपनों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया, जबकि उनकी मां ने बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी संभाली। पल्लवी ने इस त्याग को सार्थक करते हुए यहां आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में महिलाओं के 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता। असम की मिसिंग जनजाति से ताल्लुक रखने वाली पल्लवी ने 2018 में वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की थी और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई। लेकिन कोविड-19 लॉकडाउन ने उनके खेल जीवन की रफ्तार को रोक दिया। इसी दौरान वह मां बनीं, लेकिन वेटलिफ्टिंग मंच पर वापसी की इच्छा उनके भीतर हमेशा बनी रही। हालांकि, मां बनने के बाद खेल में लौटने का विचार जितना उत्साहजनक था, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। पल्लवी ने साई मीडिया से कहा, “यह आसान नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महिलाओं ने मां बनने के बाद शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन एक महिला ही समझ सकती है कि पूरी फिटनेस में लौटने के लिए उसे किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।” उन्होंने कहा, “मैंने अपनी बेटी को तब छोड़ा जब वह सिर्फ छह महीने की थी, ताकि मैं दोबारा ट्रेनिंग शुरू कर सकूं। यह भावनात्मक फैसला था, लेकिन मुझे लगा कि यही सही समय है।” अब चार साल की उनकी बेटी, पल्लवी के सरूपथार स्थित किराए के घर और गोलाघाट जिले के बोरपाथार स्थित नानी के घर के बीच समय बिताती है, जो करीब 20 किलोमीटर दूर है। यह फैसला आसान नहीं था बेटी से दूर लंबे समय तक रहना और कई बार अपने निर्णय पर सवाल उठाना, पल्लवी के सफर का हिस्सा रहा। लेकिन परिवार के सहयोग ने उन्हें कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया। उन्होंने कहा, “मेरे पति ने हमेशा मेरा साथ दिया है, जबकि मेरी मां यह सुनिश्चित करती हैं कि जब मैं प्रतियोगिताओं के लिए बाहर जाती हूं, तो मेरी बेटी का पूरा ख्याल रखा जाए।” पल्लवी के पति, जो राष्ट्रीय स्तर के पूर्व मुक्केबाजी पदक विजेता रह चुके हैं, वर्तमान में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में ड्राइवर के रूप में कार्यरत हैं और जम्मू में तैनात हैं। इसके बावजूद वापसी का रास्ता बिल्कुल आसान नहीं था। मां बनने के बाद 2023 में गोलाघाट में हुए राज्य चैंपियनशिप में पल्लवी छठे स्थान पर रहीं। अगले साल डिब्रूगढ़ में उन्हें निराशा हाथ लगी, जब प्रतियोगिता देर रात तक चली और वह अपनी लय नहीं बना सकीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2025 में उनकी मेहनत रंग लाने लगी। तेजपुर में हुए राज्य चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक जीता और उसी साल अस्मिता लीग में स्वर्ण पदक हासिल किया। इस वर्ष भी अस्मिता लीग में एक और स्वर्ण जीतकर उन्होंने अपनी वापसी को और मजबूत किया। रायपुर में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का यह रजत पदक उनके लिए खास रहा। उन्होंने कहा, “खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का यह रजत पदक मेरे करियर के लिए एक अहम उपलब्धि है। इससे मुझे आत्मविश्वास मिला है कि मैं इस स्तर की खिलाड़ी हूं।”

सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी: CG के जंगल से भारी मात्रा में हथियार बरामद

राजनांदगांव. राजनांदगांव रेंज के मोहला-मानपुर जिले के मदनवाड़ा के घने जंगलों में पुलिस को हथियारों का एक जखीरा मिला है। बताया जा रहा है कि पुलिस 31 मार्च की आखिरी तारीख  से पहले मिली यह कामयाबी नक्सल सफाए की आखिरी कील के रूप में देख रही है। आईजी बालाजी राव ने  जवानों को बधाई दी है। वहीं एसपी वाईपी सिंह ने भी मौके पर पहुंचकर सुरक्षाबलों का हौसला बढ़ाया। मिली जानकारी के मुताबिक मदनवाड़ा इलाके में पुलिस को एके-47, इंसास रायफल व अन्य घातक हथियारों के अलावा जिंदा कारतूस डंप होने की सूचना मिली थी। सुरक्षाबलों की टीम ने मदनवाड़ा इलाके के कलवर, कोवाचीटोला और उईकाटोला के बीच स्थित बीहड़ जंगल में सर्चिंग अभियान चलाया। सुरक्षाबलों ने कड़ी मशक्कत के बाद हथियारों का एक बड़ा जखीरा  बरामद किया। पुलिस का कहना है कि नक्सलियों ने हथियारों को सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने की नीयत से जमीन में छिपाकर रखा था। हथियार जब्त होने से नक्सल संगठन को एक तरह से झटका लगा है। हालांकि राजनांदगांव रेंज का सर्वाधिक नक्सलग्रस्त माने जाने वाला मोहला-मानपुर जिले में अब एक भी सक्रिय नक्सली नहीं है। सूत्रों का कहना है कि कांकेर में आत्मसर्पण करने वाले नक्सलियों की निशानदेही पर हथियारों को जब्त किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटना की जांच कर रही है। इस सफलता में डीआरजी और आईटीबीपी की संयुक्त टुकड़ी की अहम भूमिका रही। मदनवाड़ा क्षेत्र में हथियार मिलने के बाद पुलिस  पूरे क्षेत्र में सघन नक्सल ऑपरेशन चला रही है।

कबीरधाम में आग का कहर: SLRM केंद्र में लगी भीषण आग, फायर ब्रिगेड की मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा

कवर्धा. कवर्धा के कैलाश नगर वार्ड क्रमांक 3 स्थित एसएलआरएम (अपशिष्ट प्रबंधन) केंद्र में बीती रात भीषण आग लग गई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सरोवर तालाब के पास स्थित इस केंद्र में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया और सुबह तक उस पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका। जानकारी के अनुसार, आग अचानक भड़क उठी और देखते ही देखते पूरे केंद्र को अपनी चपेट में ले लिया। केंद्र में रखे कचरे और ज्वलनशील सामग्री के कारण आग तेजी से फैलती गई, जिससे नुकसान का दायरा बढ़ता चला गया। घटना की सूचना तत्काल फायर ब्रिगेड को दी गई, लेकिन आरोप है कि दमकल की गाड़ियां समय पर नहीं पहुंचीं, जिससे आग पर काबू पाने में देरी हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर फायर ब्रिगेड समय पर पहुंच जाती, तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था। आग की लपटें और धुएं का गुबार दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था, जिससे आसपास के क्षेत्रों में भी दहशत का माहौल बन गया। कई लोगों ने अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन संसाधनों की कमी के चलते वे ज्यादा सफल नहीं हो सके। इस बीच, फायर ब्रिगेड के देरी से पहुंचने को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली और उन्होंने प्रशासन के खिलाफ विरोध भी जताया। घटना के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आग लगने का कारण क्या था। साथ ही, फायर ब्रिगेड की प्रतिक्रिया में हुई देरी की भी जांच की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। यह घटना न केवल सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलती है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं की तत्परता पर भी सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि जांच के बाद क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी।