samacharsecretary.com

रायपुर बजट 2026: वर्किंग वूमन के लिए हॉस्टल, इलेक्ट्रॉनिक मार्केट और अन्य अहम घोषणाएं

रायपुर  शहर की सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। मेयर मीनल चौबे ने  रायपुर नगर निगम का करीब 2130 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। इस दौरान शहर के विकास को लेकर मेयर ने कई बड़ी घोषणा की। मेयर ने पंडरी और नरैया तालाब में वर्किंग वुमन हॉस्टल बनाने की घोषणा की है। इसके साथ ही शहर के 268 स्थानों पर सीसीटीवी लगवाने की घोषणा की गई है। बजट पेश होने से पहले कांग्रेस के पार्षदों ने जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस पार्षदों ने मेयर मीनल चौबे का विरोध किया और हाथों में तख्तियां लेकर खड़े थे। इन तख्तियों अलग-अलग स्लोगन लिखे थे। कई पार्षद हाथ में पोस्टर लेकर 'वादा तेरा वादा' गाना गाते हुए पहुंचे। कौन सी बड़ी घोषणाएं हुईं     नालंदा परिसर की तर्ज पर लाइब्रेरी और यूथ हॉस्टल बनाया जाएगा।     शंकर नगर और डूमरतराई में इलेक्ट्रॉनिक मार्केट बनेगा।     निगम 100 करोड़ का म्यूनिसिपल बांड जारी करेगा।     नगर निगम मुख्यालय और पंडरी में ऑटोमैटिक पार्किंग बनेगी।     5 करोड़ रुपए की लगत से महिला शांति गृह की होगी स्थापना।     शहर में खारुन महोत्सव का होगा शुभारंभ।     बूढ़ा तालाब धरना स्थल पर महिलाओं के लिए बनाया जाएगा वेंडिंग जोन।     शहीद स्मारक परिसर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए लगाई जाएगी लिफ्ट।     साफ सफाई के लिए 1 करोड़ 50 लाख की लगत से रोबोटिक सक्शन मशीन क्रय किया जाएगा।     राजधानी के सभी जोन में दो उद्यानों का होगा सौंदर्यीकरण।     हर वार्ड में होगी बर्तन बैंक की स्थापना। पिछले साल कितने का था बजट पिछले वित्तीय साल नगर निगम का बजट 1529.53 करोड़ रुपये था। इसमें 1528.73 करोड़ रुपए खर्च और करीब 79 लाख रुपए अधिशेष का अनुमान रखा गया था। किस मद में कितना खर्च होगा     जल कार्य विभाग के लिए लगभग 104.88 करोड़ रुपये।     स्वास्थ्य, सफाई और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए 76.97 करोड़ रुपये।     बिजली और यांत्रिकी विभाग के लिए करीब 89.99 करोड़ रुपये। सभापति के साथ हुई बहस मेयर के बजट पेश करने के दौरान कांग्रेस के पार्षदों ने जमकर हंगामा किया। जिसके बाद सभापति और एमआईसी सदस्य मनोज वर्मा के बीच तीखी बहस भी हुई। वहीं, विपक्ष के बार-बार टोकने से मेयर भी नाराज हुईं। पवन तिवारी

जगदलपुर निगम का 2.40 अरब रुपये का बजट: सड़कों, नालियों, पानी और सफाई पर होगा खर्च

जगदलपुर जगदलपुर नगर निगम के बजट सत्र में इस बार बजट पेश होने से पहले ही सदन में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। वर्ष 2026-27 के लिए 2 अरब 40 करोड़ 92 लाख 84 हजार रुपए का बजट अंतत: नारेबाजी और विरोध के बीच पेश किया गया, लेकिन इस दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव बना रहा। इस बजट में जहां शहरवासियों को पेयजल संकट से दूर करने के लिए 100 करोड़ का बजट रखा गया है। वहीं लोगों को शहर में ज्यादा झटके न लगें आवागमन सामान्य हो इसके लिए 35 करोड़ रुपए सड$क पर खर्च होंगे। वही इस बजट की खास बात यह रही कि आम जन के उपर कोई नए टैक्स का भार नहीं लगाया गया है। विपक्ष के नारों के बीच महापौर ने पेश किया बजट स्थगन के कुछ देर बाद जब सत्तापक्ष के सदस्य और महापौर संजय पांडे वापस सदन में लौटे, तब भी विपक्ष गर्भगृह में मौजूद रहा और नारेबाजी के बीच ही महापौर ने बजट पेश किया। बाद में अध्यक्ष ने शहर विकास को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए सभी पार्षदों से बजट का समर्थन करने को कहा। इस पर विपक्ष ने नैतिक समर्थन देते हुए अपनी सीट पर वापसी की। जलसंकट से राहत, पेयजल आपूर्ति होगी मजबूत नगर निगम ने बजट में सबसे अधिक प्राथमिकता जलप्रदाय व्यवस्था को दी है। शहर के कई इलाकों में लंबे समय से बनी जल समस्या को देखते हुए नई योजनाएं तैयार की गई हैं। पाइपलाइन विस्तार, जल स्रोतों के सुदृढ़ीकरण और नियमित सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, ताकि नागरिकों को सालभर पानी मिल सके। अधोसंरचना विकास, सड़कों और नालियों पर जोर शहर के विकास के लिए सड़क, नाली और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण और मरम्मत कार्यों को बजट में शामिल किया गया है। इससे न केवल यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि जलभराव और गंदगी की समस्या में भी कमी आएगी। नए विकास कार्यों से शहर की तस्वीर बदलने की तैयारी है। लाइटिंग और पार्किंग, सुविधा के साथ सुरक्षा भी नगर निगम ने शहर में स्ट्रीट लाइटिंग को और बेहतर करने का लक्ष्य रखा है। प्रमुख सड़कों और कॉलोनियों में नई लाइटें लगाई जाएंगी। साथ ही पार्किंग व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए भी प्लान तैयार किया गया है, जिससे ट्रैफिक दबाव कम होगा और सुरक्षा में सुधार होगा। स्वच्छता पर फोकस, साफ-सुथरा शहर बनाने की पहल स्वच्छता को लेकर निगम ने अतिरिक्त संसाधन और बजट प्रावधान किए हैं। नियमित कचरा उठाव, सफाई व्यवस्था में सुधार और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे शहर को साफ और व्यवस्थित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। कर्मचारियों को राहत, समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित नगर निगम ने अपने कर्मचारियों के वेतन और भत्तों के समय पर भुगतान को प्राथमिकता दी है। इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और वे बेहतर ढंग से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे। नागरिक सुविधाओं का विस्तार, हर वार्ड तक पहुंचेगी सुविधा बजट में शहर के सभी वार्डों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पेयजल, सड़क, लाइटिंग और स्वच्छता जैसी सेवाओं का दायरा बढ़ाकर नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। निगम का दावा, विकास को मिलेगी नई रफ्तार नगर निगम के मेयर संजय पांडेय का दावा है कि इस बजट के जरिए शहर की प्रमुख समस्याओं का समाधान होगा और विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। आने वाले समय में जगदलपुर को एक अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक शहर के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। भाजपा ने बताया विकास का रोडमैप महापौर ने कहा कि युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों को ध्यान में रखते हुए एक नई 'चौपाटी' (फूड स्ट्रीट) स्थापित करने का निर्णय लिया गया है. पहली बार, नगर निगम के अंतर्गत एक विशेष 'फूड जोन' बनाया जाएगा. इस पहल के लिए 4 करोड़ का बजट भी आवंटित किया गया है. यह परियोजना निश्चित रूप से पूरी की जाएगी. पिछले बजट में बताए गए लगभग 80 प्रतिशत काम पहले ही पूरे हो चुके हैं, और इसके लिए जरूरी धनराशि सरकार से प्राप्त कर ली गई है।  विपक्ष का आरोप  विपक्ष के नेता राजेश चौधरी ने आरोप लगाया कि BJP ने अपने बहुमत की ताकत पर भरोसा करते हुए बहस को दबा दिया और सीधे बजट पेश कर दिया. उन्होंने यह भी कहा कि इस बजट में कोई नई योजना शामिल नहीं है. इसके बजाय, उन्होंने इसे पूरी तरह से 'कॉपी-पेस्ट' दस्तावेज बताया, जिसमें केवल आंकड़ों में बदलाव किया गया है. कांग्रेस पार्टी ने आगे कहा कि जब बजट पर विस्तार से चर्चा करने का मौका आया, तो सत्ताधारी दल के सदस्य सदन से बाहर चले गए. इस कदम को उन्होंने जवाबदेही से बचने की कोशिश का संकेत बताया. उनका दावा है कि पिछले बजट में की गई घोषणाओं का जमीनी स्तर पर कोई ठोस असर देखने को नहीं मिला है. आज भी शहर के निवासी सड़क, पानी की आपूर्ति और साफ-सफाई जैसे बुनियादी मुद्दों से जूझ रहे हैं। 

छत्तीसगढ़ में ओलावृष्टि और अंधड़ का अलर्ट: 2-3 डिग्री तापमान गिरने की संभावना, बिजली गिरने का भी खतरा

रायपुर  छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज बदल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, आज प्रदेश के एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश और गरज-चमक की संभावना है। वहीं कुछ इलाकों में ओले गिरने और वज्रपात की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने बताया कि 4 अप्रैल तक ऐसा ही मौसम बना रहने की संभावना है। बारिश और बादलों के छाए रहने से दिन के तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी से राहत मिलेगी। प्रदेश में तापमान का हाल प्रदेश में सोमवार को रायपुर में अधिकतम तापमान 40.5°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 2.9°C अधिक है। न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 19.6°C रिकॉर्ड किया गया। वहीं बस्तर और बिलासपुर इलाकों में बारिश होने से लोगों को गर्मी से राहत मिली। कुछ इलाकों में ओले गिर सकते हैं, जिससे तापमान में 2-3 डिग्री की गिरावट आएगी। पश्चिम बंगाल से ओडिशा तक बने ट्रफ के असर से प्रदेश के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में 4 अप्रैल तक आंधी-बारिश की स्थिति बनी रहेगी। रायपुर सहित कई जिलों में बादल छाए हुए हैं और हवाएं चल रही हैं। इससे पहले बिलासपुर और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश हुई, वहीं दो जगह पेड़ गिरे और बिजली के तार टूटने से सप्लाई प्रभावित रही। प्रदेश में फिलहाल तापमान सामान्य से 2-3 डिग्री अधिक दर्ज किया जा रहा है। रायपुर में अधिकतम तापमान 40.5°C और अंबिकापुर में न्यूनतम 19.6°C रिकॉर्ड किया गया। रायपुर में बादल छाए हुए हैं। कुछ स्थानों पर बिजली चमकने के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। एक पश्चिमी विक्षोभ उत्तर ईरान और कैस्पियन सागर के ऊपर सक्रिय है, साथ ही एक द्रोणिका निम्न से ऊपरी क्षोभमंडल तक फैली हुई है। पंजाब और हरियाणा के आसपास एक प्रेरित चक्रीय परिसंचरण भी बना हुआ है। इसके अलावा एक प्रमुख द्रोणिका उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ होते हुए अंदरूनी ओडिशा तक विस्तारित है।  बारिश और ओले गिरने की संभावना पूर्वी भारत में भी सक्रियता बनी हुई है। एक पूर्व-पश्चिम द्रोणिका उत्तर-पूर्व बिहार से मणिपुर, बांग्लादेश, मेघालय और दक्षिण-पूर्व असम तक फैली है। इसके अलावा पश्चिमी विदर्भ से दक्षिण तमिलनाडु और बिहार से गंगेटिक पश्चिम बंगाल तक अन्य द्रोणिकाएं सक्रिय हैं। इन सभी मौसम प्रणालियों के प्रभाव से 31 मार्च को प्रदेश के एक-दो स्थानों पर हल्की वर्षा और कुछ स्थानों पर गरज-चमक, अंधड़, वज्रपात और ओलावृष्टि की संभावना है। अधिकतम तापमान में हल्की गिरावट हो सकती है, हालांकि कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।  

लक्ष्मी राजवाड़े का गुस्सा: सूरजपुर में इलाज में लापरवाही, गर्भस्थ शिशु की मौत के बावजूद इलाज नहीं हुआ

सूरजपुर  सूरजपुर जिला अस्पताल में भर्ती गर्भवती महिला के गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल में इलाज में लापरवाही की जानकारी मिलने पर महिला-बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अस्पताल पहुंचीं। लापरवाही और दुर्व्यवहार के मामले में उन्होंने सीएस और डॉक्टरों को  फटकार लगाई।  .जानकारी के अनुसार महिला को गंभीर हालत में शनिवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद रविवार को पता चला कि गर्भस्थ शिशु की मौत हो चुकी है और उसका ऑपरेशन कर मृत शिशु को निकालना आवश्यक था, लेकिन अस्पताल में ब्लड की कमी बताते हुए उसका इलाज शुरू नहीं किया गया। शिकायत मिली तो सीधे हॉस्पिटल पहुुंचीं मंत्री सोमवार को मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े को मरीज का इलाज शुरू न करने की शिकायत मिली, जिसके बाद वे शाम को सीधे अस्पताल पहुंचीं। मंत्री के पहुंचने पर सीएस डॉ. मरकाम सहित चिकित्सक भी मौके पर मौजूद हुए। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इलाज में लापरवाही पर सीएस को कड़ी फटकार लगाई। अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों के दुर्व्यवहार के मामले में भी उन्होंने खरी-खरी सुनाई और कहा कि पूरी चिकित्सा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। दरअसल, परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से मदद मांगी थी, लेकिन उन्हें दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। जब इसकी शिकायत भाजपा नेताओं से की गई, तो उन्होंने डॉक्टर से संपर्क किया। डॉक्टर ने कहा कि मंत्री या विधायक को बुला लो, कुछ नहीं होगा। मंत्री ने कहा-व्यवस्था सुधारें, यह बर्दाश्त नहीं लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि अस्पताल की व्यवस्था में सुधार किया जाए। पहले भी कई शिकायतें मिल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़े तो मेरा ब्लड निकाल लो, लेकिन मरीज का इलाज तुरंत होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने अस्पताल में फैली बदबू और गंदगी पर भी अपनी नाराजगी जताई। पहले भी सामने आ चुकी है लापरवाही सूरजपुर अस्पताल में इलाज में लापरवाही के आरोप पहले भी लग चुके हैं। इलाज न करने और हालत बिगड़ने पर अंबिकापुर रेफर करने की दो घटनाओं में प्रसूता और नवजात की मौत हो चुकी है। इन मामलों में केवल नर्सों पर कार्रवाई की गई, जबकि लापरवाही के बावजूद ड्यूटी डॉक्टर या सीएस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे हालात में सुधार नहीं हुआ है।

हाईकोर्ट का आदेश: घर में प्रेयर या मीटिंग करने वालों को परेशान नहीं किया जा सकता, पुलिस नोटिस रद्द

बिलासपुर   छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि किसी व्यक्ति को अपने निजी आवास में शांतिपूर्वक प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए पूर्व से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने पुलिस द्वारा जारी नोटिसों को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ताओं को अनावश्यक रूप से परेशान न करने के निर्देश दिए। प्रार्थना सभा का आयोजन यह मामला तब सामने आया जब याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर कर पुलिस थाना नवागढ़ द्वारा जारी नोटिसों को चुनौती दी। याचिका में यह भी कहा गया था कि उनके धार्मिक अधिकारों की रक्षा की जाए और 7 दिसंबर 2025 के एक आदेश को रद्द किया जाए।  याचिकाकर्ता, जो ग्राम गोधन, तहसील नवागढ़, जिला जांजगीर-चांपा के निवासी हैं, ने 2016 से अपने निजी मकान की पहली मंजिल पर प्रार्थना सभा आयोजित की थी। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इन प्रार्थना सभाओं में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या शांति भंग नहीं होती है। प्रार्थना सभा पर रोक  हालांकि, थाना नवागढ़ के प्रभारी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 94 के तहत बार-बार नोटिस जारी कर प्रार्थना सभा पर रोक लगाने का प्रयास किया था। साथ ही ग्राम पंचायत गोधन द्वारा पहले जारी ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ को भी दबाव में वापस ले लिया गया। राज्य सरकार के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं और वे जेल भी जा चुके हैं। इसके अलावा, प्रार्थना सभा के लिए किसी भी सक्षम प्राधिकारी से अनुमति नहीं ली गई थी, इसलिए पुलिस ने नोटिस जारी किए। निजी मकान में प्रार्थना सभा कानूनी उल्लंघन नहीं हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला दिया कि याचिकाकर्ता अपने निजी मकान में 2016 से प्रार्थना सभा आयोजित कर रहे हैं और यह कोई कानूनी उल्लंघन नहीं है। अदालत ने कहा कि यदि प्रार्थना सभा के दौरान कोई कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होती है, तो संबंधित प्राधिकरण विधि अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन सिर्फ सभा आयोजित करने पर हस्तक्षेप उचित नहीं है। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं के नागरिक अधिकारों में हस्तक्षेप न करें और उन्हें जांच के नाम पर परेशान न करें। अदालत ने 18 अक्टूबर 2025, 22 नवंबर 2025 और 1 फरवरी 2026 को जारी सभी नोटिसों को भी निरस्त कर दिया।

खारून नदी पुल बंद होने से दुर्ग-रायपुर मार्ग पर भारी जाम, पुलिस को रिहर्सल के दौरान करनी पड़ी कठिनाई

रायपुर भिलाई के कुम्हारी में खारून नदी पर बने पुल की मरम्मत का काम शुरू होने वाला है। इसके लिए आज रात 10:30 बजे से इस पुल को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। यह पुल 1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक यानी पूरे एक महीने के लिए बंद रहेगा। पुल बंद रहने के कारण रायपुर से दुर्ग और दुर्ग से रायपुर आने-जाने वाली सभी गाड़ियों को दूसरे रास्तों से होकर गुजरना पड़ेगा। इस बड़े डायवर्सन से पहले सोमवार शाम को पुलिस और प्रशासन ने एक ट्रायल, यानी ट्रैफिक रिहर्सल किया।  राजधानी रायपुर और दुर्ग जिले को जोड़ने वाला खारुन पुल करीब 1 महीने के लिए बंद रहेगा। खारून नदी पर बना यह पुल काफी पुराना है और जर्जर हो चुका है। पुल की मरम्मत के लिए इसे बंद करने का फैसला किया गया है। पुल के मरम्मत कार्य के दौरान लोगों को मुश्किलें नहीं हो इसके लिए प्रशासन ने डायवर्जन प्लान तैयार किया है। रायपुर-दुर्ग के लिए अहम पुल नेशनल हाईवे 53 कुम्हारी टोल के पास खारुन नदी पर बना यह पुल दुर्ग को रायपुर से जोड़ने वाला मुख्य रास्ता है। यहां से हर दिन करीब डेढ़ लाख वाहन गुजरते हैं। दुर्ग और अमलेश्वर जाने के लिए इसी रास्ते का उपयोग किया जाता है। पुल में कई जगह दरारे हैं। इसके साथ ही हैवी वाहन गुजरने से पुल में कंपन भी होती है जिसके बाद इसकी मरम्मत का फैसला किया गया है। मामले की जानकारी देते हुए प्रशासन ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 53 पर बने दुर्ग से रायपुर खारून ब्रिज पर 1 अप्रैल 2026 से मरम्मत कार्य प्रारंभ होगा। जिसमें करीब 1 महीने का समय लगेगा। करीब 35 साल पुराना है पुल जानकारी के अनुसार, यह पुल करीब 35 साल पुराना है। इसकी लंबाई 200 मीटर और चौड़ाई 7 मीटर है। पुराना पुल जर्जर हो चुका है। पुराने पुल में 10 स्लैब और 60 बेयरिंग लगी हैं। जानकारी के अनुसार, मरम्मत के लिए पहले डामर की परत हटाई जाएगी। इसके बाद स्लैब को जैक से उठाकर नई बेयरिंग की जाएगी। पुल की मरम्मत पर करीब 16 करोड़ रुपए खर्च होने की बात कही गई है। डायवर्जन प्लान भी तैयार पुल बंद होने के कारण यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन ने डायवर्जन प्लान तैयार किया है। 20 साल पहले इसी नदी पर एक और पुल का निर्माण किया गया था। जिसकी लंबाई 220 मीटर और चौड़ाई 7 मीटर है। खारुन नदी का पुराना पुल बंद होने से इस नए पुल का उपयोग रायपुर से दुर्ग जाने के लिए किया जाएगा। दिन की बजाय शाम को हुआ रिहर्सल पहले यह रिहर्सल सोमवार सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होना तय था, लेकिन किसी कारणवश इसे दिन में टाल दिया गया। बाद में इसे शाम 5 बजे से रात 8 बजे के बीच आयोजित किया गया। शाम के समय जब लोग अपने दफ्तरों और काम से घर लौट रहे होते हैं, उसी दौरान गाड़ियों को बदले हुए रास्तों से गुजारा गया। नया मार्ग होने के कारण लोग कन्फ्यूज हो गए। नतीजतन, रायपुर से दुर्ग की ओर आने वाले लोगों को भारी जाम का सामना करना पड़ा। गाड़ियां रेंगती हुई नजर आईं और लोगों को घर पहुंचने में काफी अधिक समय लग गया। गायब साइन बोर्ड ने बढ़ाई लोगों की मुसीबत रिहर्सल के दौरान सबसे बड़ी परेशानी रोशनी की कमी रही। कई जगहों पर इतना अंधेरा था कि वाहन चालकों को रास्ता समझ नहीं आ रहा था। इसके अलावा, मार्गों पर यह बताने के लिए पर्याप्त और स्पष्ट साइन बोर्ड भी नहीं लगाए गए थे कि किस गाड़ी को किस दिशा में मुड़ना है और कौन सा रास्ता कहां जाता है। पुलिसकर्मियों के ठहरने और ड्यूटी के लिए बनाए गए टेंट भी काफी कम थे। अचानक रास्ता बदले जाने और अधूरी तैयारियों के कारण आम जनता को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। SSP खुद पहुंचे मौके पर, सुधार करने के दिए निर्देश रूट डायवर्सन के रिहर्सल को देखने के लिए दुर्ग के एसएसपी विजय अग्रवाल खुद मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूरी व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान दुर्ग और रायपुर दोनों जिलों के ट्रैफिक पुलिस अधिकारी अलग-अलग स्थानों पर खड़े होकर यातायात को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे थे। कमियां देखकर उन्होंने अधिकारियों को तुरंत ट्रैफिक प्लान में आवश्यक सुधार करने का निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। ट्रैफिक संभालने के लिए 55 जवानों की लगाई गई है ड्यूटी इस पूरे एक महीने के लिए ट्रैफिक प्लान को अच्छे से लागू करने के लिए दुर्ग पुलिस ने 55 जवानों की ड्यूटी लगाई है। अधिकारियों का कहना है कि अगर सड़कों पर गाड़ियों का दबाव बढ़ा और जरूरत महसूस हुई, तो जवानों की संख्या और भी बढ़ा दी जाएगी। ट्रैफिक पुलिस ने ट्रकों और बसों जैसे भारी वाहनों, बीच की साइज वाली गाड़ियों और कार-बाइक जैसी छोटी गाड़ियों के लिए अलग-अलग रास्ते तय कर दिए हैं। कमियों को दूर करने तैयारी शरू पुलिस प्रशासन का कहना है कि रिहर्सल इसीलिए किया गया, ताकि असल में पुल बंद होने से पहले इन सभी कमियों को पहचाना जा सके। पुलिस का दावा है कि मंगलवार रात 10:30 बजे से जब पुल पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। सड़कों पर पर्याप्त रोशनी और दिशा बताने वाले साइन बोर्ड जैसी सभी कमियों को हर हाल में दूर कर लिया जाएगा, ताकि अगले एक महीने तक आम जनता को सफर में कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े। पुलिस ने लोगों से सफर में थोड़ा अतिरिक्त समय लेकर चलने की अपील भी की है।

अमित शाह का आरोप: कांग्रेस ने नक्सलवादियों को संरक्षण दिया, बघेल ने कहा- यह सरासर झूठ है

रायपुर  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 को नक्सलवाद के समूह खात्मे का लक्ष्य दिया था और एक दिन पहले संसद से उन्होंने कहा- ''पूरी प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी होने के बाद देश को सूचित किया जाएगा लेकिन मैं ऐसा बोल सकता हूं कि हम नक्सलमुक्त हो गए हैं।'' उन्होंने आगे कहा- मोदी सरकार की सबसे बडी उपलबद्धि नक्सलमुक्त भारत है। साथ ही आरोप लगाया कि यह काम दो साल पहले ही हो गया होता अगर कांग्रेस साथ देती। छत्तीसगढ़ की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने साथ दिया होता तो 2024 में नक्सलवाद का सफाया हो सकता था। लोकसभा में दिया जवाब सोमवार को लोकसभा में देश से नक्सलवाद पर चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इसके पीछे कांग्रेस की वामपंथी विचारधारा जिम्मेदार है। उन्होंने इस दौरान इंदिरा गांधी से लेकर सोनिया गांधी, राहुल गांधी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह व पूर्व गृह मंत्री पी चिंदबरम के नक्सलवादियों को किसी न किसी रूप में प्रश्रय देने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र किया। शाह के भाषण की 6 बड़ी बातें: 1.बस्तर से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म: बस्तर से नक्सलवाद लगभग पूरी तरह खत्म हो चुका है। हर एक गांव में स्कूल खोलने के लिए अभियान चलाया गया। हर गांव में राशन की दुकान, हर तहसील और पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) स्थापित किए गए हैं। लोगों को आधार कार्ड और राशन कार्ड जारी किए गए हैं। उन्हें पांच किलोग्राम अनाज मिल रहा है। 2. नक्सलवाद की वकालत करने वालों से सवाल: जो नक्सलवाद की वकालत कर रहे थे, उनसे पूछना चाहता हूं कि आदिवासियों के पास अब तक विकास क्यों नहीं पहुंचा। बस्तर के लोग इसलिए पीछे रह गए, क्योंकि इस क्षेत्र पर 'लाल आतंक' का साया मंडरा रहा था। आज वह साया हट गया है और बस्तर अब विकास के पथ पर अग्रसर है। 3. 60 साल तो कांग्रेस सरकार में रही: 70 में से 60 साल कांग्रेस की सरकार रही। आपने क्यों नहीं किया विकास। आज आप हिसाब मांग रहे हो। इंदिरा गांधी माओवादी विचारधारा की गिरफ्त में थीं। उनके कार्यकाल में नक्सलवाड़ी से शुरू हुआ आंदोलन 12 राज्यों, 17 प्रतिशत भू-भाग 10 प्रतिशत से ज्यादा आबादी में फैल गया। 4. मनमोहन ने कहा था- माओवादी देश की सबसे बड़ी समस्या : प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकारा था कि जम्मू-कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट की तुलना में देश की आंतरिक सुरक्षा में सबसे बड़ी समस्या माओवादी है। 2014 में बदलाव हुआ। धारा 370 हटी, 35-ए हटा, राम मंदिर बना, CAA कानून आ गया है, विधायी मंडलों में महिलाओं को 33% आरक्षण मिल गया है। 5. नक्सलियों की तुलना भगत सिंह की, ये क्या हिमाकत है : कुछ लोगों ने भगत सिंह और भगवान बिरसा मुंडा से तुलना कर दी। ये क्या हिमाकत है। भगत सिंह और बिरसा मुंडा अंग्रेजों से लड़े और आप इनकी तुलना संविधान तोड़कर हथियार हाथ में लेकर निर्दोषों की हत्या करने वालों से कर रहे हैं। इनको अपनों का भी खून बहाने से परहेज नहीं है। 6.कुछ लोगों की मानवता सिर्फ हथियार उठाने वालों के लिए: मैं उन ‘अर्बन नक्सलियों’ से एक सवाल पूछना चाहता हूं, जो इन लोगों के समर्थन में सामने आए हैं। वे कहते हैं कि नक्सली न्याय के लिए लड़ रहे हैं, इसलिए उन्हें मारा नहीं जाना चाहिए। उनसे सहानुभूति रखनी चाहिए। ऐसा लगता है कि आपकी मानवता सिर्फ संविधान का उल्लंघन करने वालों और हथियार उठाने वालों के लिए हैं। यह उन आम नागरिकों तक नहीं पहुंचती, जो इन्हीं हथियारों से मारे जा रहे हैं। चर्चा में कई सदस्यों ने भाग लिया सोमवार को लोकसभा में नियम 193 के तहत वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त कराने के विषय पर रखी गई चर्चा में कई सदस्यों ने भाग लिया था। करीब छह घंटे तक चली इस चर्चा के बाद केंद्रीय गृह मंत्री ने नक्सलवाद को लेकर जहां 1970 से 2026 तक उठाए गए एक-एक कदमों का जिक्र किया। वहीं बताया कि इनमें से अधिकांश समय कांग्रेस पार्टी ही सत्ता में रही, लेकिन इसके बाद भी यह समस्या खत्म होने के बजाय और बढ़ी है। उन्होंने यह भी साफ किया कि गरीबी के कारण नक्सलवाद इन क्षेत्रों में नहीं पहुंची थी, बल्कि नक्सलवाद के कारण इन क्षेत्रों में गरीबी रही। क्योंकि इन्होंने बैंक, अस्पताल, स्कूल जला दिए थे। हथियारबंद वामपंथियों ने इस क्षेत्रों को अपने सबसे सुरक्षित ठिकाने के लिए रूप में चुना गया था, क्योंकि इन क्षेत्रों में वह छुप सकते थे। जो लोग पिछडेपन का नरेटिव खड़ा कर रहे है, वह पूरी तरह से गलत है। कुछ लोग मारे जा रेह नक्सलियों के लिए लेख लिखते हैं लेकिन उनके बारे में एक शब्द नहीं कहते जो इनकी गोलियों से मारे जाते हैं। अब नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यदि ये आदिवासी विचारधारा को मानने वाले होते तो इनके आदर्श तिलका मांझी व भगवान बिरसा मुंडा होते, लेकिन इन्होंने अपना आदर्श माओ माना है। ये अपने आदर्श तय करने में भी विदेश से इंपोर्ट करते है। गृह मंत्री शाह ने दावा कि देश से अब नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म हो गया है, वैसे तो यह 2024 में ही खत्म हो गया होता, जो बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सिमट भी गया था लेकिन छत्तीसगढ़ की उस समय कांग्रेस और भूपेश बघेल सरकार नक्सलियों का समर्थन कर रही थी। कांग्रेस सांसदों की इस दौरान आपत्ति पर शाह ने कहा कि बघेल से पूछ लीजिएगा, हम इसके प्रमाण भी दे देंगे। शाह ने मौजूदा समय में नक्सलवादियों का सारा कैडर समाप्त हो चुका है। इनमें से अधिकांश ने सरेंडर कर दिया है, या पकड़े गए या मार दिए गए है। शाह बोले- जो कोई भी हथियार उठाएगा, उसे जवाबदेह ठहराया जाएगा शाह ने कहा कि जो लोग एक सशस्त्र आंदोलन के पैरोकार बनकर यह कहते हैं कि उन्होंने अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी। मैं उनसे पूछता हूं। क्या आप संविधान का सम्मान करेंगे या नहीं? यदि किसी के साथ अन्याय होता है, तो उसके लिए अदालतें स्थापित की गई हैं; विधानसभाएं, जिला परिषदें और तहसीलें गठित की गई हैं। मैं यह कहना चाहता हूं कि वह दौर अब खत्म हो चुका है। यह … Read more

मुख्यमंत्री साय की त्वरित कार्रवाई: दिव्यांग चंदूलाल को मिली मदद

संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल: मुख्यमंत्री साय ने दिव्यांग चंदूलाल की सुनी पुकार, मिनटों में मिला समाधान रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संवेदनशील और जनहितकारी शासन की एक भावुक झलक आज चंदखुरी में देखने को मिली, जब उन्होंने एक दिव्यांग ग्रामीण की समस्या को न केवल सुना, बल्कि मौके पर ही उसका समाधान सुनिश्चित कर मानवता और उत्तरदायी नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया। चंदखुरी निवासी दिव्यांग चंदूलाल वर्मा के लिए यह दिन जीवन का अविस्मरणीय क्षण बन गया। वे मुख्यमंत्री से मिलने की आशा लेकर कायस्थ मंगल भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम समाप्ति के बाद जब वे मुख्यमंत्री से मिलने के लिए आगे बढ़े, तो सुरक्षा कारणों से उन्हें रोक दिया गया।इसी दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि वर्मा को मंच पर बुलाया जाए। यह एक छोटा-सा निर्णय था, लेकिन चंदूलाल के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिलते ही चंदूलाल ने अपनी व्यथा साझा की। उन्होंने बताया कि वे पहले राजमिस्त्री का कार्य करते थे, लेकिन शुगर की बीमारी और डायबिटिक फुट के कारण उनके पैरों में गंभीर समस्या हो गई, जिससे चलना-फिरना कठिन हो गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अब कोई कार्य नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें बैटरी संचालित ट्राईसिकल की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री साय ने अत्यंत संवेदनशीलता के साथ उनकी पूरी बात सुनी और तत्काल सहायता राशि प्रदान करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि उन्हें शीघ्र मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देशों का त्वरित पालन सुनिश्चित किया गया। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतीक बैस ने तत्काल प्रक्रिया पूर्ण कर चंदूलाल वर्मा को मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया। अपनी खुशी व्यक्त करते हुए चंदूलाल भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि “मैंने सोचा भी नहीं था कि मुख्यमंत्री मुझसे मिलेंगे और मेरी समस्या का इतना जल्दी समाधान हो जाएगा। मैं उनका दिल से आभारी हूँ। धन्यवाद विष्णु भईया।” यह घटना केवल एक व्यक्ति की सहायता भर नहीं, बल्कि यह दर्शाती है कि राज्य सरकार का उद्देश्य हर नागरिक तक संवेदनशीलता, पहुंच और त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री का यह व्यवहार सुशासन के उस मॉडल को मजबूत करता है, जिसमें हर जरूरतमंद की आवाज सीधे शासन तक पहुंचती है और समाधान भी उतनी ही तेजी से मिलता है।

हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: शादीशुदा और बालिग महिला की सहमति से संबंध को रेप नहीं माना जाएगा

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के एक बड़े फैसले के चर्चे हो रहे हैं। दरअसल कोर्ट ने एक बालिग और शादीशुदा महिला की सहमति से बने शारीरिक संबंधों पर अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सहमति से बने शारीरिक संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया कि किसी बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्जी और सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध को रेप नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका खारिज करके बड़ा फैसला दिया । ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ पीड़िता की अपील पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्जी से बनाए शारीरिक संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जाएगा। इस फैसले को काफी अहम और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिला बेमेतरा से जुड़ा है ये मामला आपको बता दें कि यह मामला बेमेतरा जिले से जुड़ा है, जहां पीड़िता ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को दोषमुक्त किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की मंजूरी मांगी थी लेकिन हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट के निर्णय को ही सही माना और याचिका खारिज कर दी। आखिर क्या था पूरा मामला मामला कृषि महाविद्यालय में मजदूरी करने वाली महिला से जुड़ा है,वहीं पर आरोपी भी काम करता था। इसी दौरान आरोपी  ने उससे बात करना शुरू किया और शादी करने का वादा किया। आरोपी उसे अपने  घर ले गया और दुष्कर्म किया। लेकिन महिला पहले से ही तीन माह के गर्भ से थी। लोक लाज से किसी को  ये बात नहीं बताई लेकिन पति के पूछने पर सारी वारदात बताई और फिर थाने में रिपोर्ट लिखाई। ट्रायल कोर्ट ने गवाहों एवं मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपित को बरी कर दिया गया जिस पर पीड़िता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। लेकिन सुनवाई में पता चला कि महिला ने  सहमति से शारीरिक संबंध बनाया था। इसी पर  कोर्ट ने कहा कि एक बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्जी और सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध में दुष्कर्म का मामला नहीं बनता है। कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।

छत्तीसगढ़ ने रचा इतिहास: चालू वित्तीय वर्ष में 6 लाख से अधिक ग्रामीण आवास हुए पूर्ण

छत्तीसगढ़ ने रचा इतिहास: चालू वित्तीय वर्ष में  6 लाख से अधिक ग्रामीण आवास पूर्ण चालू वित्तीय वर्ष में देश में सर्वाधिक आवास निर्माण प्रदेश में योजना आरंभ से एक वित्तीय वर्ष में सर्वाधिक आवास निर्माण आवास से बदली तस्वीर: 9 हजार से ज्यादा महिलाएं बनीं “लखपति दीदी” तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही का मॉडल बना छत्तीसगढ़ रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ने ग्रामीण आवास निर्माण में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 6 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए हैं। यह इस वर्ष देश में सर्वाधिक आवास निर्माण का आंकड़ा है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, प्रधानमंत्री जनमन योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के सशक्त एवं समन्वित क्रियान्वयन से यह उपलब्धि संभव हो पाई है। इससे प्रदेश आवास निर्माण के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभरा है। “सबको आवास” के लक्ष्य को तेजी से साकार करने के लिए वर्तमान सरकार के प्रथम कैबिनेट निर्णय में 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए थे। वर्तमान में , सर्वे सूची में शामिल सभी पात्र हितग्राहियों को कवर कर लिया गया है, जिससे यह सुनिश्चित हुआ है कि कोई भी पात्र परिवार आवास से वंचित न रहे। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत 5.87 लाख, प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत 13 हजार तथा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 10 हजार से अधिक आवास पूर्ण किए गए हैं। योजनाओं के प्रभावी समन्वय से 6 लाख से अधिक आवासों का लक्ष्य पार किया गया है। यह उपलब्धि वर्ष 2016 में योजना प्रारंभ होने के बाद *प्रदेश में किसी एक वित्तीय वर्ष में सर्वाधिक आवास पूर्ण होने का रिकॉर्ड है, *जो तेज क्रियान्वयन और प्रभावी मॉनिटरिंग को दर्शाता है। आवास निर्माण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी नई गति आई है। “डीलर दीदी” मॉडल के तहत 9 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूह सदस्य आवास निर्माण की सामग्री आपूर्ति कर  “लखपति दीदी” बनकर आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं। इसके साथ ही हजारों महिला स्व-सहायता समूहों को आजीविका के अवसर प्राप्त हुए हैं। साथ ही, 6 हजार से अधिक राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें 1200 से अधिक “रानी मिस्त्री” शामिल हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों को भी इस पहल से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक आजीविका के अवसर प्रदान किए गए हैं। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए टोल-फ्री नंबर 18002331290 संचालित है। पिछले 10 महीनों में इस पर 1500 से अधिक शिकायतें एवं सुझाव प्राप्त हुए, जिनका त्वरित निराकरण किया गया है। हर माह की 7 तारीख को सभी ग्राम पंचायतों में “आवास दिवस” के माध्यम से जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।इसके साथ-साथ ग्राम पंचायत स्तर पर क्यू आर कोड आधारित सूचना प्रणाली से जानकारी सहज उपलब्ध हो रही है । छत्तीसगढ़ का यह मॉडल अब केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन , समावेशी विकास एवं पारदर्शिता की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में स्थापित हो रहा है।