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रायपुर में छत्तीसगढ़ की दोहरी सफलता, फाइलेरिया और मलेरिया नियंत्रण में राज्य मॉडल की देशभर में हुई सराहना

रायपुर : राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की दोहरी उपलब्धि फाइलेरिया व मलेरिया नियंत्रण में राज्य मॉडल की देशभर में सराहना फाइलेरिया उन्मूलन में BIHAN मॉडल और ‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ पहल को नवाचार व जनभागीदारी के लिए सराहना रायपुर जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। 30 अप्रैल और 01 मई 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित “National Summit on Innovation and Inclusivity – Best Practices Shaping India’s Future” में राज्य को फाइलेरिया और मलेरिया उन्मूलन के लिए अपनाई गई नवाचारी पहलों पर सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल राज्य की स्वास्थ्य रणनीतियों की प्रभावशीलता को रेखांकित करता है, बल्कि सामुदायिक भागीदारी आधारित मॉडल की सफलता का भी प्रमाण है। BIHAN मॉडल ने बदली तस्वीर, महिला समूह बने बदलाव की धुरी फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में BIHAN (स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन) से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। Mission Steering Group–Human Resource (MSG–HR) के अंतर्गत इस मॉडल को देश की सर्वश्रेष्ठ नवाचारी और समावेशी पहल के रूप में मान्यता मिली, जिसमें PCI India का तकनीकी सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) अभियान के दौरान महिलाओं ने घर-घर पहुंचकर न केवल दवा सेवन सुनिश्चित कराया, बल्कि समुदाय में व्याप्त भ्रांतियों को भी दूर किया। सामुदायिक बैठकों और जागरूकता गतिविधियों के जरिए लोगों में भरोसा कायम किया गया। इसका परिणाम यह रहा कि दवा सेवन से इनकार करने वाले लगभग 74% लोगों को सहमति के लिए तैयार किया गया-जो इस मॉडल की सबसे बड़ी सफलता के रूप में उभरकर सामने आया। ‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ ने दुर्गम क्षेत्रों में दिखाई प्रभावशीलता सम्मेलन में ‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ अभियान को भी एक प्रभावी और परिणामोन्मुख पहल के रूप में विशेष सराहना मिली। बस्तर के दूरस्थ और आदिवासी अंचलों में संचालित इस अभियान के तहत घर-घर स्क्रीनिंग, रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) से समय पर जांच, त्वरित उपचार और Day-7 व Day-14 फॉलो-अप के माध्यम से पूर्ण इलाज सुनिश्चित किया गया। इस अभियान की खास उपलब्धि लक्षणहीन (Asymptomatic) मरीजों की पहचान रही, जिससे संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में निर्णायक मदद मिली। इसके सकारात्मक परिणाम भी स्पष्ट रूप से सामने आए हैं- राज्य का API वर्ष 2019 में 1.97 से घटकर 2025 में 0.90 हो गया, जबकि बस्तर संभाग में यह 13.12 से घटकर 6.98 तक पहुंच गया। अन्य राज्यों के लिए प्रेरक मॉडल- राष्ट्रीय मंच पर उपस्थित विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं ने छत्तीसगढ़ के BIHAN आधारित सामुदायिक मॉडल और ‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ अभियान को अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय बताया। कम लागत में अधिक प्रभाव देने वाली ये पहलें यह साबित करती हैं कि जनभागीदारी और स्थानीय रणनीतियों के माध्यम से जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान संभव है। राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी समुदाय आधारित, नवाचारयुक्त और क्षेत्र विशेष रणनीतियों को प्राथमिकता देते हुए जनस्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा

छत्तीसगढ़ में RTO अधिकारियों के तबादलों से बढ़ी हलचल, सरकार ने दिया सख्त संदेश: लापरवाही नहीं चलेगी

रायपुर  छत्तीसगढ़ शासन के परिवहन विभाग ने प्रशासनिक कसावट लाने और कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्यभर में बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादले किए हैं। महानदी भवन से जारी आदेश के तहत क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO), सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (ARTO) समेत कई अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई पदस्थापना सौंपी गई है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी अधिकारी निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने नए पद पर कार्यभार ग्रहण करें।  प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में कदम परिवहन विभाग का यह निर्णय राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए लिया गया है। विभाग का मानना है कि समय-समय पर अधिकारियों के स्थानांतरण से कार्यक्षमता में सुधार होता है और स्थानीय स्तर पर लंबित मामलों के निराकरण में तेजी आती है। इन जिलों में हुआ बड़ा फेरबदल जारी आदेश के अनुसार, कोरबा, धमतरी, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, कांकेर, राजनांदगांव, बेमेतरा, सूरजपुर, गरियाबंद और जशपुर सहित कई जिलों में पदस्थ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इस व्यापक फेरबदल से साफ है कि विभाग ने पूरे राज्य स्तर पर प्रशासनिक संतुलन साधने की कोशिश की है। 10 दिन में जॉइनिंग के सख्त निर्देश परिवहन विभाग ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों को अधिकतम 10 दिनों के भीतर अपने नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि तय समय सीमा का पालन नहीं करने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कार्यप्रणाली में तेजी लाने की कवायद सूत्रों के अनुसार, यह तबादला सूची केवल औपचारिक बदलाव नहीं, बल्कि विभागीय कार्यों में गति लाने की रणनीति का हिस्सा है। लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों के स्थानांतरण से पारदर्शिता बढ़ने और जवाबदेही तय होने की उम्मीद जताई जा रही है। जनसेवा पर पड़ेगा सीधा असर परिवहन विभाग से जुड़े कार्य- जैसे वाहन पंजीयन, ड्राइविंग लाइसेंस, परमिट और प्रवर्तन—सीधे आम जनता से जुड़े होते हैं। ऐसे में अधिकारियों के इस फेरबदल का असर सेवाओं की गुणवत्ता और गति पर भी देखने को मिल सकता है। नई जिम्मेदारियों के साथ अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में व्यवस्था को और अधिक सुचारू बनाएं और लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण करें। सख्ती के साथ सुधार का संकेत राज्य सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही या ढिलाई को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समयबद्ध जॉइनिंग और व्यापक स्तर पर किए गए तबादले यह दर्शाते हैं कि शासन व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही तय करने के लिए गंभीर है।

धमतरी की मंदरौद ग्राम पंचायत ने पंचायत विकास सूचकांक में प्रदेश में मारी बाजी

​धमतरी का डंका: पंचायत विकास सूचकांक में मंदरौद ग्राम पंचायत प्रदेश में अव्वल ​रायपुर       ​छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास और सशक्तिकरण के क्षेत्र में धमतरी जिले ने एक नया इतिहास रचा है। राज्य सरकार द्वारा जारी पंचायत विकास सूचकांक (PDI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, धमतरी जिले की ग्राम पंचायतों ने शानदार प्रदर्शन किया है। इसमें सबसे बड़ी उपलब्धि कुरूद विकासखंड की मंदरौद ग्राम पंचायत के नाम रही है, जिसने 'गरीबी मुक्त एवं आजीविका संवर्धन' (थीम-1) में 94.4 अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। ​सतत विकास के मॉडर्न मॉडल के रूप में उभरा धमतरी     ​PDI रैंकिंग में केवल मंदरौद ही नहीं, बल्कि जिले की अन्य पंचायतों ने भी अपनी छाप छोड़ी है। 'स्वस्थ पंचायत', 'जल संपन्न पंचायत' और 'स्वच्छ एवं हरित पंचायत' जैसी श्रेणियों में जिले की कई पंचायतों ने A+ और A ग्रेड प्राप्त कर यह साबित किया है कि यहाँ शासन की योजनाएं केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर मजबूती से उतर रही हैं। ​ "पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा"     ​इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर राज्य के नेतृत्व और स्थानीय प्रशासन ने हर्ष व्यक्त किया है।उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री ​श्री विजय शर्मा  मंत्री ने मंदरौद पंचायत को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संकल्पित है। मंदरौद की सफलता प्रदेश की अन्य पंचायतों के लिए एक प्रेरणास्रोत और नवाचार का मॉडल बनेगी।विधायक ​श्री अजय चंद्राकर ने इस जीत का श्रेय सामूहिक प्रयासों को देते हुए कहा कि बयह स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायत अमले और जागरूक ग्रामीणों की मेहनत का फल है। धमतरी विकास के नए मानक स्थापित कर रहा है। कलेक्टर ने इस उपलब्धि को पारदर्शी प्रशासन की जीत बताया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है, और यह रैंकिंग उसी दिशा में एक मील का पत्थर है। ​सफलता के पीछे के मुख्य कारक     ​मंदरौद और धमतरी की अन्य पंचायतों की इस सफलता के पीछे तीन मुख्य स्तंभ रहे हैं। सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुँचाना। विकास कार्यों में ग्रामीणों की सक्रिय जनभागीदारी सुनिश्चित करना और ​आजीविका पर फोकस करते हुए गरीबी उन्मूलन के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के साधनों का संवर्धन करना रहा।​धमतरी जिले की यह गौरवपूर्ण उपलब्धि छत्तीसगढ़ में ग्रामीण सशक्तिकरण और समग्र विकास की एक नई इबारत लिख रही है।

न्याय को सरल बनाने सर्वाेच्च न्यायालय की पहल पर चलाया जा रहा समाधान समारोह 2026

न्याय को सरल बनाने सर्वाेच्च न्यायालय की पहल पर चलाया जा रहा समाधान समारोह 2026 सर्वाेच्च न्यायालय में लंबित मामलों का होगा सरल समाधान रायपुर  न्याय को आमजन के लिए सरल, सुलभ और त्वरित बनाने की दिशा में भारत का सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा समाधान समारोह (विशेष लोक अदालत) 2026 की अभिनव पहल शुरू की गई है। यह राष्ट्रीय स्तर का अभियान 21 अप्रैल 2026 से प्रारंभ हो चुका है, जिसका समापन 21, 22 एवं 23 अगस्त 2026 को विशेष लोक अदालत के आयोजन के साथ होगा।        इस विशेष लोक अदालत का आयोजन सर्वाेच्च न्यायालय परिसर में किया जाएगा, जिसमें सर्वाेच्च न्यायालय में लंबित उपयुक्त मामलों का आपसी सहमति एवं सुलह के माध्यम से निराकरण किया जाएगा। यह पहल न्यायिक प्रक्रिया को अधिक मानवीय, समयबद्ध और कम खर्चीला बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।        छत्तीसगढ़ में इस अभियान के अंतर्गत निर्देशानुसार सुलह बैठकों का आयोजन राज्य, जिला एवं जनपद स्तर पर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अंतर्गत संचालित मध्यस्थता केंद्रों में किया जा रहा है। इन केंद्रों में प्रशिक्षित मध्यस्थ एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी पक्षकारों को आपसी सहमति से समाधान तक पहुंचने में सहयोग प्रदान कर रहे हैं।          समाधान समारोह के तहत सुलह-वार्ताएं 21 अप्रैल 2026 से ही प्रारंभ हो चुकी हैं, जिनमें पक्षकार व्यक्तिगत रूप से या वर्चुअल माध्यम से भी भाग ले सकते हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सर्वाेच्च न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या को कम करना तथा विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए वैकल्पिक और सरल मंच उपलब्ध कराना है। सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा अधिवक्ताओं, वादकारियों एवं संबंधित सभी पक्षों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया गया है। छत्तीसगढ़ के नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे इस अवसर का लाभ उठाते हुए अपने मामलों का समाधान आपसी सहमति से कराने का प्रयास करें।         समाधान समारोह (विशेष लोक अदालत) में अपने सर्वाेच्च न्यायालय में लंबित मामलों को शामिल करने के लिए सर्वाेच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट  https://www.sci.gov.in⁠ पर उपलब्ध गूगल फॉर्म को 31 मई 2026 तक भरना होगा। यह प्रक्रिया सरल एवं सहज है, जिससे कोई भी इच्छुक पक्षकार अपने मामले को इस विशेष पहल में शामिल कर सकता है। इस संबंध में किसी सहायता एवं जानकारी हेतु वन स्‍टाप सेंटर (वार रूम) इन-चार्ज समाधान समारोह (स्‍पेशल लोक अदालत) के दूरभाष नं. 011-23115662, 011-23116464 अथवा सीआरपी निदेशक के दूरभाष नं. 011- 23115652, 011- 23116465 पर अथवा वन स्टॉप सेंटर कक्ष क्रमांक 806 एवं 808, बी ब्लॉक, अतिरिक्त भवन परिसर, सर्वोच्च न्यायालय दूरभाष नं. 011- 23116464 पर सम्पर्क किया जा सकता है। मेल आईडी – speciallokadalat2026@sci.nic.in पर मेल भी कर सकते हैं।

सुशासन तिहार: गांवों में शिकायतों का खात्मा, अब हर समस्या का होगा समाधान

सुशासन तिहार: गांवों में खत्म हो रहा शिकायतों का दौर  बलौदाबाजार जिले में जनसमस्या निवारण का महाभियान शुरू 10 जून तक चलेंगे शिविर,ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में कुल 49 स्थानों पर पहुंचेंगी 'समाधान की चौपाल पहले शिविर में उमड़ा जनसैलाब, राजस्व मंत्री ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश- 'समय सीमा में हो हर आवेदन का निराकरण' ​रायपुर        छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के साथ ही 'सुशासन' को धरातल पर उतारने की कवायद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में 'सुशासन तिहार' के जरिए प्रशासन सीधे ग्रामीणों के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। शुक्रवार को ग्राम रिसदा से शुरू हुए इस अभियान ने पहले ही दिन सफलता के नए मानक स्थापित किए हैं। ​मौके पर न्याय: 47% आवेदकों को तत्काल राहत     इस अवसर पर राजस्व मंत्री ने  कहा कि हमारी सरकार की प्राथमिकता अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को मुस्कुराते हुए देखना है।उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिविर के बाद भी आवेदकों से फीडबैक लिया जाए कि वे समाधान से संतुष्ट हैं या नहीं।     ​रिसदा के हाई स्कूल प्रांगण में लगे शिविर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी संवेदनशीलता रही। शिविर में आए 573 आवेदनों में से लगभग आधे  का निराकरण राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा की मौजूदगी में अधिकारियों ने तुरंत किया। यह इस बात का प्रमाण है कि सरकारी मशीनरी अब फाइलों को अटकाने के बजाय सुलझाने पर ध्यान दे रही है। जिन आवेदनों में तकनीकी पेच हैं, उनके लिए कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने समय-सीमा (Timeline) निर्धारित कर दी है। ​विकास का 'वन-स्टॉप' डेस्टिनेशन बने विभागीय स्टॉल     ​शिविर में केवल शिकायतें ही नहीं सुनी गईं, बल्कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का 'डिलीवरी सेंटर' भी बनाया गया। पुलिस विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा हेतु हेलमेट वितरण और भारत माता वाहिनी को संसाधन भेंट किए गए। इसी तरह युवाओं को कौशल विकास का सम्मान पत्र और टीबी मुक्त गांव के सरपंचों को महात्मा गांधी की प्रतिमा भेंट कर सामाजिक सहभागिता को सराहा गया। शिविर में स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल पर डिजिटल एक्स-रे और तत्काल आयुष्मान कार्ड बनाने की सुविधा ने बुजुर्गों और मरीजों को बड़ी राहत दी। 10 जून तक हर घर तक पहुंच         ​कलेक्टर  ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक दिवसीय आयोजन नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित अभियान है। जिले के 30 ग्रामीण केंद्रों और 19 नगरीय निकायों में सुशासन तिहार के जरिए प्रत्येक नागरिक की पहुंच प्रशासन तक सुनिश्चित की जाएगी। ​       बलौदाबाजार से शुरू हुआ यह 'सुशासन का रथ' अब जिले के अन्य हिस्सों की ओर बढ़ रहा है। रिसदा शिविर की सफलता ने यह साफ कर दिया है कि यदि प्रशासन जन-प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बिठाकर गांव की चौपाल तक पहुंचे, तो बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान चुटकियों में संभव है।

33% महिला आरक्षण पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में शासकीय संकल्प, एक दिवसीय सत्र में विपक्ष का जोरदार विरोध

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधानसभा में एक शासकीय संकल्प पेश किया। इस शासकीय संकल्प में परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोकसभा और सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण को तत्काल लागू करने का आग्रह किया गया है। इस संकल्प पर चर्चा के लिए विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है। संकल्प पेश करते हुए साय ने कहा कि इस सदन का मत है कि नारी शक्ति के सम्मान तथा महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तीकरण के उद्देश्य से देश की संसद तथा सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण, परिसीमन की प्रक्रिया पूर्ण करते हुए तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने संकल्प पर चर्चा के लिए चार घंटे का समय तय किया है। विपक्ष का आरोप- हमारे संकल्प पर विचार नहीं इस बीच, विपक्ष के नेता चरण दास महंत ने कहा कि उन्होंने भी इसी तरह का एक संकल्प पेश किया था, जिसमें केंद्र से आग्रह किया गया था कि लोकसभा और विधानसभा में मौजूदा सीटों की संख्या के भीतर ही महिलाओं को जल्द से जल्द 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए, लेकिन उनके संकल्प पर विचार नहीं किया गया। क्या कहा विधानसभा अध्यक्ष ने इसके जवाब में विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने कहा- नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत का संकल्प एक अशासकीय संकल्प था जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता था, क्योंकि विशेष सत्र का एजेंडा पहले से ही तय था। उन्होंने कहा कि यह सत्र सरकारी कामकाज के लिए बुलाया गया था और उन्होंने विपक्ष के संकल्प को अस्वीकार कर दिया।     छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र     सीएम ने पेश किया शासकीय संकल्प     नारी शक्ति वंदन से जुड़ा है अधिनियम     विपक्ष के संकल्प को विधानसभा अध्यक्ष ने किया अस्वीकार नेता प्रतिपक्ष ने कहा- जल्दबाजी में पेश किया गया संकल्प हालांकि, चरणदास महंत ने तर्क दिया कि मुख्यमंत्री ने जो पढ़ा, वह शासकीय संकल्प की श्रेणी में नहीं आता है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने पहले ही कहा था कि उनकी सरकार कांग्रेस के खिलाफ एक निंदा प्रस्ताव लाएगी। महंत ने आरोप लगाया कि मौजूदा संकल्प जल्दबाजी में पेश किया गया है और इसका शुरू में बताए गए विषय से कोई लेना-देना नहीं है। कुछ देर तक सदन में हुई नोंकझोंक भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि चर्चा के विषयों का निर्णय करना सदन के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने यह भी कहा कि सदन के बाहर दिए गए बयानों पर सदन के भीतर चर्चा नहीं की जा सकती। इस नोंकझोंक के कारण सदन में कुछ देर तक हंगामा भी हुआ। इस पर अध्यक्ष ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सभी सदस्यों को अपने विचार व्यक्त करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। पवन तिवारी

‘गूगल बॉय’ रुद्र को, लोक भवन में मिला सम्मान

रायपुर राज्यपाल  रमेन डेका से आज लोक भवन में जिला दुर्ग के 6 वर्षीय 'गूगल बॉय ' रुद्र शर्मा ने अपने पालकों के साथ मुलाकात की।अपनी अद्भुत स्मरण शक्ति से उसने हैरान कर दिया। राज्यपाल श्री डेका से मुलाकात के दौरान रुद्र ने सामान्य ज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सवालों के सटीक उत्तर देकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।          कक्षा पहली के छात्र रुद्र को यूपीएससी और पीएससी स्तर के प्रश्नों के उत्तर भी याद हैं। मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने उससे छत्तीसगढ़ के गठन, राज्य की विशेषताओं और भारतीय संविधान से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका रुद्र ने बिना झिझक तुरंत सही जवाब दिया।          रुद्र की तेज स्मरण शक्ति और आत्मविश्वास से प्रभावित होकर राज्यपाल ने उसकी सराहना की। उन्होंने लोक भवन की ओर से रुद्र को प्रमाण पत्र प्रदान किया और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।            इस अवसर पर रुद्र के माता श्रीमती पायल शर्मा के साथ उसके नाना श्री विनोद शर्मा भी उपस्थित थे, जिन्होंने उसकी उपलब्धि पर खुशी जाहिर की।

छत्तीसगढ़ 12वीं रिजल्ट: 72% टॉपर्स गवर्नमेंट स्कूल से, लड़कियां फिर सबसे आगे

रायपुर  छत्तीसगढ़ बोर्ड 12वीं की टॉप-10 मेरिट लिस्ट में इस बार 43 स्टूडेंट्स ने जगह बनाई है। इनमें 31 टॉपर सरकारी स्कूलों से हैं। यानी 72% स्टूडेंट गवर्नमेंट स्कूलों से हैं। टॉप करने वालों में 32 लड़कियां शामिल हैं। यानी टॉप करने वाले हर 10 में से 7 से 8 लड़कियां आई  टॉप। 15 जिलों के स्टूडेंट्स ने टॉप 10 में जगह बनाई। इनमें 7 जिले ऐसे हैं, जहां से किसी भी लड़के ने टॉप नहीं किया। रायपुर 8 टॉपर्स के साथ सबसे आगे रहा। दसवीं के उलट 12वीं में वैराइटी है। किसी एक स्कूल का दबदबा नहीं है। सिर्फ पेन्ड्रा-मरवाही का स्वामी आत्मनानंद इंग्लिश स्कूल ही एक ऐसा है, जहां से दो टॉपर निकले हैं। टॉप-10 की पूरी सूची महज 2.20% के दायरे में हैं सिमट गई है। यानी रैंक 1 से रैंक 10 के बीच 11 नंबर का ही अंतर है। वहीं 41 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स फेल हुए हैं। विषयवार रिजल्ट में साइंस के छात्रों का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा। साइंस स्ट्रीम का पास प्रतिशत 87.52 फीसदी दर्ज किया गया। वहीं कॉमर्स संकाय का रिजल्ट 82.76 फीसदी रहा, जबकि आर्ट संकाय 78.69 के साथ सबसे पीछे रहा।   15 जिलों के स्टूडेंट्स ने मेरिट लिस्ट में बनाई जगह टॉपर्स लिस्ट में इस बार रायपुर से सबसे ज्यादा 8 टॉपर्स हैं। इसके बाद रायगढ़ ने 6 टॉपर्स के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। तीसरे स्थान पर महासमुंद और गरियाबंद रहे। यहां से 4-4 टॉपर्स मेरिट लिस्ट में शामिल हुए। वहीं जशपुर, पेंड्रा-मरवाही, बालौदाबाजार और कांकेर जिलों ने भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए 3-3 टॉपर्स दिए। बेमेतरा और दुर्ग से 2-2 टॉपर्स सामने आए हैं। जबकि धमतरी, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, सक्ती और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई से 1-1 छात्र मेरिट लिस्ट में जगह बनाने में सफल रहे। लड़कियों का दबदबा कायम मेरिट सूची में लड़कियों ने एक बार फिर बाजी मारी है। कुल 43 टॉपर्स में से 31 लड़कियां हैं, जो 72.09 प्रतिशत है, जबकि लड़कों की संख्या 12 यानी 27.91 प्रतिशत ही रही। सिर्फ 12 छात्र निजी स्कूलों से इस बार सरकारी स्कूलों ने निजी स्कूलों को पीछे छोड़ दिया। कुल 43 टॉपर्स में से 31 छात्र सरकारी स्कूलों से हैं, जो 72 प्रतिशत है, जबकि 12 छात्र निजी स्कूलों से हैं, जो 28 प्रतिशत है। विशेष रूप से स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा, जहां से 14 टॉपर्स आए हैं। मेरिट में बेहद कड़ी टक्कर इस वर्ष मेरिट सूची का अंतर बेहद कम रहा। रैंक 1 से रैंक 10 के बीच सिर्फ 2.20 प्रतिशत यानी लगभग 11 अंकों का अंतर है। रैंक 1 और 2 के बीच 2 अंक, रैंक 2 और 3 के बीच भी 2 अंक का अंतर रहा। ओवरऑल रिजल्ट- 83.04% छात्र पास इस वर्ष कुल 2,46,166 विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया था, जिनमें से 2,44,453 परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से 2,02,549 छात्र-छात्राएं पास हुए। कुल पास प्रतिशत 83.04 रहा। लड़कियों का पास प्रतिशत 86.04 रहा, जबकि लड़कों का 78.86 प्रतिशत रहा। इस प्रकार लड़कियां 7.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ आगे रहीं। जबकि रैंक 4 से आगे लगभग हर स्थान पर केवल 1 अंक का अंतर देखने को मिला। यही कारण है कि रैंक 9 और 10 में सबसे ज्यादा छात्र शामिल हुए। संकायवार प्रदर्शन में साइंस आगे संकायवार विश्लेषण में साइंस वर्ग का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा, जहां 87.52 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए। कॉमर्स संकाय का पास प्रतिशत 82.76 रहा, जबकि आर्ट संकाय 78.69 प्रतिशत के साथ सबसे पीछे रहा। हर संकाय में लड़कियों ने लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया, जो इस बार के रिजल्ट की सबसे बड़ी विशेषता है। 63 प्रतिशत फर्स्ट डिविजन पास परिणाम के अनुसार लगभग 1.27 लाख विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी प्राप्त की, जो कुल उत्तीर्ण छात्रों का करीब 63 प्रतिशत है। वहीं करीब 9.8 प्रतिशत छात्र एक या दो विषय में फेल रहे और लगभग 7.2 प्रतिशत छात्र पूरी से फेल घोषित किए गए।

लोगों की सुनें, लोगों को सुनाएं नहीं – मुख्यमंत्री का अधिकारियों को दो टूक निर्देश

आम जनता से शालीनता से पेश आएं अधिकारी – मुख्यमंत्री लोगों की सुनें, लोगों को सुनाएं नहीं – मुख्यमंत्री का अधिकारियों को दो टूक निर्देश शालीनता और संवेदनशीलता – यही हो प्रशासनिक अधिकारी की पहचान: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रशासनिक व्यवस्था को जनकेंद्रित और संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से  शासकीय अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं कि वे आमजन के साथ शालीनता, धैर्य और सम्मान के साथ व्यवहार करें। उन्होंने दो टूक कहा कि मुख्यालय और फील्ड स्तर पर शासकीय अधिकारी ही शासन का चेहरा होते हैं, इसलिए उनका आचरण शासन की छवि को प्रभावित करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को सुनना प्रशासनिक अधिकारियों  का पहला कर्तव्य है। उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि वे जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समाधान पर केंद्रित रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवाद तभी सार्थक है, जब उसमें संवेदना और समस्याओं का समाधान करने की नीयत हो। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विभागों में जनसमस्याओं के निराकरण को प्रभावी, सरल और भरोसेमंद बनाया जाए। जब कोई आम नागरिक किसी शासकीय कार्यालय पहुंचे, तो उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सकारात्मक अनुभव ही जनता के मन में विश्वास पैदा करता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों के अनुभव से मापी जाती है। इसलिए अधिकारी फील्ड में सक्रिय रहें, लोगों से सीधे संवाद करें और उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप कार्य करें। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता और तत्परता ही प्रशासन की असली ताकत है। उन्होंने अधिकारियों से पारदर्शिता और जवाबदेही को अपने कार्य का मूल आधार बनाने की अपेक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे बनाए रखने के लिए ईमानदारी के साथ-साथ व्यवहार में शालीनता और विनम्रता भी जरूरी है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सुशासन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि व्यवहार से स्थापित होता है। यदि अधिकारी जनता के साथ सरल, सहज,  सहयोगात्मक और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण का तरीका हर समय अपनाते हैं, तो प्रशासन स्वयमेव अधिक प्रभावी हो जाता है और शिकायतों की संख्या स्वतः कम होने लगती है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना तभी साकार होगा, जब प्रशासन हर नागरिक के लिए सुलभ, संवेदनशील और सम्मानजनक बने। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे इस भावना को अपने कार्य का मूल मंत्र बनाकर आगे बढ़ें और हर व्यक्ति को यह अहसास दिलाएं कि सरकार उसके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार के दौरान वे स्वयं विभिन्न क्षेत्रों में आकस्मिक निरीक्षण करेंगे और अधिकारियों के कार्य के साथ-साथ उनके व्यवहार पक्ष का भी अवलोकन करेंगे।उन्होंने कहा कि जनसंपर्क के दौरान अधिकारियों की संवेदनशीलता, शालीनता और जवाबदेही को प्राथमिकता के साथ परखा जाएगा। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए “सुशासन तिहार 2026” का आयोजन 1 मई से 10 जून तक प्रदेशभर में किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर समाधान शिविर लगाए जाएंगे।इस दौरान पंचायत एवं वार्ड स्तर पर शिविरों में आवेदन स्वीकार कर जनसमस्याओं का निराकरण किया जाएगा। सुशासन तिहार में  जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रहेगी तथा स्वयं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा औचक निरीक्षण और जनसमस्याओं के निराकरण और शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी।

छत्तीसगढ़ 10वीं रिजल्ट: सरकारी स्कूलों से 81% टॉपर्स, टॉप 10 में सिर्फ 1.5% का फर्क

रायपुर  छत्तीसगढ़ बोर्ड 10वीं की टॉप-10 मेरिट लिस्ट में इस बार 42 विद्यार्थियों ने जगह बनाई है। इनमें 34 टॉपर सरकारी स्कूलों से हैं। यानी 81% से ज्यादा स्टूडेंट गवर्नमेंट स्कूलों से आते हैं। टॉप करने वालों में 27 लड़कियां शामिल हैं। यानी टॉप करने वाले हर 10 में से 6 से 7 लड़कियां हैं। 13 जिलों के स्टूडेंट्स ने टॉप 10 में जगह बनाई। इनमें 5 जिले ऐसे हैं, जहां से किसी भी लड़के ने टॉप नहीं किया। रायपुर 10 टॉपर्स के साथ सबसे आगे रहा, जबकि महासमुंद ने 8 टॉपर्स दिए। टॉप 2 में महासमुंद के 4 स्टूडेंट हैं। टॉप-10 की पूरी सूची महज डेढ़ प्रतिशत के दायरे में सिमट गई है। इसका मतलब टॉप 1 से टॉप 10 तक सिर्फ 1.5% का फर्क रहा, यानी 1-2 नंबर से ही रैंक बदल गई। 13 जिलों के स्टूडेंट्स ने मेरिट लिस्ट में बनाई जगह मेरिट सूची में कुल 13 जिलों के स्टूडेंट्स ने जगह बनाई। सबसे ज्यादा टॉपर रायपुर (10) से रहे। इसके बाद महासमुंद (8), बिलासपुर (5) और दुर्ग (4) का नंबर रहा। मुंगेली से 3, रायगढ़, जशपुर और कोरिया से 2-2 छात्र मेरिट में पहुंचे। यह बताता है कि छोटे जिलों के विद्यार्थियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया।जिलेवार टॉपर्स का एनालिसिस करें तो महासमुंद के 8 टॉपर्स हैं, सभी टॉपर्स लड़कियां हैं। टॉप 2 पोजिशन महासमुंद के 4 स्टूडेंट्स हैं। रायपुर से सबसे ज्यादा 10 टॉपर्स हैं, इनमें छह लड़के और 4 लड़कियां हैं। रायपुर के स्टूडेंट्स हर रैंक में मौजूद हैं। लेकिन 9th-10th पोजिशन में सबसे ज्यादा 5 स्टूडेंट्स शामिल हैं।बिलासपुर से 5 स्टूडेंट्स ने टॉप 10 में जगह बनाई है, सभी लड़कियां हैं। मिड-लोअर रैंक्स यानी 7वें से 10वें पोजिशन में बिलासपुर मजबूत स्थिति में हैं।दुर्ग से कुल चार स्टूडेंट्स ने टॉप 10 में जगह बनाई हैं। इनमें दो लड़के और दो लड़कियां शामिल हैं। मिश्रित रैंक है, लेकिन कोई टॉप-3 में नहीं हैं।मुंगेली से 3 टॉपर्स निकले हैं, इनमें दो लड़कियां हैं। टॉप 2 पोजिशन में दो स्टूडेंट हैं। यानी कुल टॉपर्स कम हैं, लेकिन टॉप पोजिशन पर अच्छा रिजल्ट रहा रहा। कबीरधाम, गरियाबंद, कांकेर और सारंगढ़ इन चार जिलों से कुल चार टॉपर निकले हैं। इनमें दो लड़के और दो लड़कियां हैं। कबीरधाम टॉप 2 में मौजूद हैं। अन्य ने 8th से 10th पोजिशन में जगह बनाई है। प्राइवेट स्कूल पिछड़े, सरकारी स्कूलों का दबदबा कुल टॉपर्स की संख्या 42 है। इनमें सरकारी स्कूल के 34 यानी 81% बच्चे हैं। जबकि प्राइवेट स्कूल के सिर्फ 8 (19%) बच्चे ही इस लिस्ट में शामिल हैं। सरकारी संस्थाओं में प्रयास से सबसे अधिक 13 स्टूडेंट्स ने टॉप किया है। टॉप-10 में महज 1.5% का अंतर, 0.17% के मामूली अंतर से बदली रैंकिंग दसवीं में टॉप-1 से लेकर टॉप-10 तक के स्टूडेंट्स के बीच कुल अंतर सिर्फ 1.50 प्रतिशत का रहा। टॉप रैंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों ने 99.00 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जबकि दसवें स्थान पर रहने वाले विद्यार्थियों का प्रतिशत 97.50 रहा। हर रैंक के बीच का अंतर बेहद कम, लगभग 0.16 से 0.17 प्रतिशत के बीच रहा। यानी सिर्फ एक-दो अंकों के फर्क से छात्रों की रैंकिंग ऊपर-नीचे हो रही है। उदाहरण के तौर पर, 99.00 प्रतिशत से 98.83 प्रतिशत पर आते ही रैंक सीधे पहले से दूसरे स्थान पर पहुंच गई। 10वीं में तीन और 12वीं में जिज्ञासु वर्मा ने किया टॉप हाई स्कूल (10वीं) की परीक्षा में इस बार जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला। संध्या नायक, परी रानी प्रधान और अंशुल शर्मा ने संयुक्त रूप से 99 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। वहीं, हायर सेकेंडरी (12वीं) की परीक्षा में जिज्ञासु वर्मा ने प्रदेश में टॉप किया है। 12वीं की ही मेरिट लिस्ट में जिज्ञासु वर्मा ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर शीर्ष स्थान हासिल किया। छत्तीसगढ़ बोर्ड 10वीं टॉपर्स लिस्ट संध्या नायक (रैंक 1) परी रानी प्रधान (रैंक 1) अंशुल शर्मा (रैंक 1) रिया केशवानी (रैंक 2) रानु सिद्धमयी साहू (रैंक 2) रेणुका प्रधान (रैंक 2) दीपांशी बौद्ध (रैंक 2) नंदिता देवगन (रैंक 2) छत्तीसगढ़ बोर्ड 12वीं की टॉपर लिस्ट जिज्ञासु वर्मा (रैंक 1) ओमनी (रैंक 2) कृष महंत (रैंक 3) शानदार रहा पास प्रतिशत छत्तीसगढ़ बोर्ड 10वीं का रिजल्ट 77.15 प्रतिशत रहा। यह पिछले साल से 5 फीसदी अधिक रहा। लड़कों का रिजल्ट 72 फीसदी और लड़कियों का 81 फीसदी रिजल्ट रहा। वहीं छत्तीसगढ़ बोर्ड 12वीं का रिजल्ट कुल 83.04 फीसदी रहा। 12वीं में बालक 78.8 प्रतिशत पास हुए जबकि बालिकाएं 86.4 प्रतिशत पास हुईं। सीजीबीएसई छत्तीसगढ़ बोर्ड 10वीं रिजल्ट 2026 में दो छात्राओं और एक छात्र ने 99 प्रतिशत अंक लाकर रैंक 1 हासिल की है। तीनो संयुक्त रूप से पहले स्थान पर रहे। टॉपर्स के लिए इनामों की बौछार मेधावी छात्रों का उत्साह बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़े पुरस्कारों की घोषणा की है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश के टॉपर्स को 1.50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि पुरस्कार के रूप में दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के बेहतर प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि सुविधाओं के अभाव में भी प्रतिभा निखर सकती है।