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पुलिस की बड़ी कार्रवाई: बिलासपुर में बाइक चोरी गैंग पकड़ा, कम उम्र का मास्टरमाइंड निकला सरगना

बिलासपुर. शहर में लगातार बाइक चोरी के मामलों में एसीसीयू को बड़ी सफलता मिली है. सीसीटीवी फुटेज खंगालते हुए टीम ने बिलासपुर, जांजगीर और दुर्ग में सक्रिय गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया. उनकी निशानदेही पर चोरी की 6 बाइक समेत तीन खरीददार भी पकड़े गए. पकड़े गए चोरों में 19 साल का मास्टर माइंड भी शामिल है. एसएसपी रजनेश सिंह ने लगातार बाइक चोरी के मामले बढ़ने के बाद एससीसीयू को जांच के निर्देश दिए थे. टीम ने शहर के अलग-अलग जगहों के करीब 300 सीसीटीवी फुटेज खंगाले और रूट चार्ट तैयार कर संदिग्धों की पहचान की. जांच में मस्तूरी के वेद वेदपरसदा में मुख्य आरोपी साहिल मरावी का होना पाया गया. टीम ने तुरंत वहां दबिश दी और साहिल को हिरासत में लिया. शुरू में साहिल टीम को गुमराह करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन कड़ी पूछताछ में उसने सारे राज उगल दिए. उसने बताया कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर अलग-अलग जिलों से बाइक चोरी करता था. साहिल की निशानदेही पर पुलिस ने गिरोह के अन्य सदस्यों और बाइक खरीददारों को भी गिरफ्तार किया. दुर्ग और जांजगीर तक फैले थे तार एएसपी पंकज पटेल ने बताया कि आरोपियों ने बिलासपुर के सरकंडा, सिविल लाइन और कोतवाली क्षेत्र से चार, दुर्ग के मोहन नगर से एक और जांजगीर जिले से एक बाइक चोरी की थी. पुलिस ने गिरोह से कुल करीब दो लाख रुपए कीमत की छह बाइक बरामद की हैं. एसएसपी ने टीम को कैश रिवार्ड देने की घोषणा की. चोरी की बाइक खरीदने वाले भी गिरफ्तार वेद वेदपरसदा का साहिल मरावी अपने साथियों निलेश शुक्ला, हिमांशु जगत और रायपुर निवासी रितेश सेन के साथ वारदात को अंजाम देता था. चोरी की बाइक गांव के रघुनंदन साहू, नंदकुमार रजक और सोनू केंवट को 20 से 25 हजार रुपए में बिना दस्तावेज के बेची जाती थीं. पुलिस ने खरीदारों को भी आरोपी बनाया है.

तीसरी बार बम धमकी का मेल, जिला कोर्ट परिसर में हाई अलर्ट

बिलासपुर जिला न्यायालय बिलासपुर को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया है। न्यायालय को धमकी भरा ईमेल मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया। सूचना मिलते ही बम स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड की टीम मौके पर पहुंची है और पूरे कोर्ट परिसर की सघन जांच शुरू कर दी है। बता दें कि जिला न्यायालय को तीसरी बार धमकी मिली है। पुलिस न्यायालय के अंदर और बाहर हर कोने की बारीकी से तलाशी ले रही है। साथ ही रूटीन चेकिंग प्रक्रिया के तहत भी अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर कोर्ट परिसर में आने-जाने वालों पर विशेष नजर रखी जा रही है। बताया जा रहा है कि यह लगातार तीसरी बार है जब न्यायालय को इस तरह का धमकी भरा मेल मिला है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। मेल भेजने वाले की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके।

IAS 2025 बैच की पहली पोस्टिंग: अलग-अलग जिलों में बने सहायक कलेक्टर

रायपुर मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में प्रथम दौर के प्रशिक्षण के बाद परिवीक्षाधीन 2025 बैच के आईएएस अधिकारियों को प्रदेश के विभिन्न जिलों में बतौर सहायक कलेक्टर पदस्थ किया गया है. छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय द्वारा संबंधित जिला कलेक्टरों जारी किया गया है. इसमें गोकुल आरके को रायगढ़, इशांत जयसवाल को कोरबा और वाध्यावथ यशवंत नायक को बस्तर जिले में पदस्थ किया गया है. अधिकारी अपने संबंधित जिलों में कार्यभार ग्रहण न कर निमोरा स्थित छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी में अपनी उपस्थिति देंगे. इनकी अकादमी में उपस्थिति तिथि को ही जिलों में उनका कार्यभार ग्रहण तिथि मानते हुए आगामी कार्यवाही की जाएगी.

वर्दी पर दाग, भरोसे पर सवाल

रायपुर छत्तीसगढ़ की धरती पर एक बार फिर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस वर्दी की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सिर्फ एक घटना का नहीं है, बल्कि उस भरोसे का है जो आम नागरिक इस वर्दी से जोड़कर देखता है। जब कानून की रक्षा का दायित्व निभाने वाले ही विवादों में घिरते हैं, तो यह मामला व्यक्तिगत दायरे से निकलकर व्यवस्था की विश्वसनीयता तक पहुंच जाता है। हालिया घटनाक्रम में पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी का नाम आना और निलंबन की कार्रवाई होना इस बात की ओर इशारा करते हैं कि समस्या सतही नहीं है। यह उन दरारों की ओर संकेत है, जो धीरे-धीरे सिस्टम के भीतर बनती जा रही हैं और समय-समय पर उजागर हो जाती हैं। पुलिस की वर्दी केवल एक पहचान नहीं, बल्कि भरोसे की सबसे मजबूत कड़ी मानी जाती है। यही वजह है कि जब इस पर दाग लगता है, तो असर दूर तक जाता है। आम आदमी के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर वह किस पर भरोसा करे। सुरक्षा देने वाली संस्था पर ही संदेह की स्थिति बनना किसी भी समाज के लिए चिंताजनक संकेत है। यह मानने में हिचक नहीं होनी चाहिए कि पुलिस सेवा की चुनौतियां असाधारण हैं। लगातार दबाव, लंबी ड्यूटी, निजी जीवन का अभाव—ये सभी कारक व्यक्ति को भीतर से प्रभावित करते हैं। लेकिन यह भी उतना ही स्पष्ट है कि जिम्मेदारी के इस पद पर रहते हुए आचरण की मर्यादा और अधिक सख्त हो जाती है। चूक की गुंजाइश न्यूनतम होनी चाहिए, क्योंकि इसका असर केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। मामलों के सामने आने के बाद जिस तरह की शुरुआती चुप्पी अक्सर देखने को मिलती है, वह भी चिंता का विषय है। कार्रवाई तब तेज होती है, जब मामला सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन जाता है। इससे यह संदेश जाता है कि व्यवस्था दबाव में प्रतिक्रिया देती है, स्वप्रेरणा से नहीं। यह प्रवृत्ति भरोसे को और कमजोर करती है। जरूरत इस बात की है कि पुलिस तंत्र अपने भीतर जवाबदेही की संस्कृति को और मजबूत करे। जांच प्रक्रियाएं पारदर्शी हों, समयबद्ध हों और निष्पक्ष भी। दोषी को दंड और निर्दोष को संरक्षण—दोनों ही समान रूप से जरूरी हैं। आधे-अधूरे कदम केवल समस्या को टालते हैं, सुलझाते नहीं। मीडिया और समाज की भूमिका भी इस पूरे परिदृश्य में अहम है। तथ्यों से परे जाकर बनाई गई धारणा कई बार स्थिति को और उलझा देती है। ऐसे मामलों में संयमित और जिम्मेदार दृष्टिकोण ही न्याय प्रक्रिया को सही दिशा दे सकता है। पुलिस सुधार की चर्चा नयी नहीं है, लेकिन अब इसे प्राथमिकता में लाने का समय है। प्रशिक्षण में नैतिकता, मानसिक संतुलन और व्यवहारिक अनुशासन पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। साथ ही, आंतरिक निगरानी तंत्र को मजबूत बनाना भी अनिवार्य है। वर्दी की गरिमा केवल कानून से नहीं, बल्कि उसे पहनने वाले के चरित्र से तय होती है। कुछ घटनाएं पूरी व्यवस्था का चेहरा नहीं होतीं, लेकिन वे यह जरूर बताती हैं कि भीतर कहीं सुधार की गुंजाइश बाकी है। सवाल यह है कि क्या हम इन संकेतों को समय रहते समझ पाएंगे, या फिर हर बार नई घटना के बाद वही चिंता दोहराते रहेंगे।

न्याय की जीत: मूक-बधिर पीड़िता की गवाही पर मुहर, आरोपी को उम्रकैद की सजा कायम

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल मूक-बधिर होने पर किसी गवाह की बात को खारिज नहीं किया जा सकता। संकेतों से दी गई जानकारी को भी कानूनी तौर पर मौखिक साक्ष्य माना जाता है। हाईकोर्ट ने इस प्रकरण में ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल ने डिवीजन बेंच ने मूक-बधिर युवती के साथ दुष्कर्म करने वाले को मरते दम तक उम्र कैद की सजा सुनाई है। आरोपी वर्तमान में जेल में बंद है और उसे अपनी पूरी सजा काटनी होगी। इस मामले में पीड़िता बोल और सुन नहीं सकती थी, इसलिए उसकी गवाही के लिए प्लास्टिक की गुड़िया का सहारा लिया गया। बता दें कि बालोद जिले के अर्जुंदा थाना क्षेत्र में रहने वाली 19 वर्षीय युवती 29 जुलाई 2020 को घर पर अकेली थी। उसके माता-पिता खेत में काम करने गए थे। तभी उसका रिश्तेदार नीलम कुमार देशमुख घर में घुस गया। उसने युवती के साथ रेप किया। शाम को जब मां घर लौटी तो मूक- बधिर बेटी ने अपनी मां को इशारों में अपने साथ हुई दरिंदगी की कहानी सुनाई और आरोपी की पहचान बताई। इसके बाद परिजन उसे लेकर थाना लेकर गए और रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने आईपीसी की धारा 450 और 376(2) के तहत केस दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया था। पीड़िता जन्म से ही बोलने और सुनने में अक्षम थी, इसलिए कोर्ट के सामने उसकी गवाही दर्ज कराना एक बड़ी चुनौती थी। सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट ने साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट की मदद ली। जब कुछ सवाल पूछने में दिक्कत आई तो कोर्ट ने प्लास्टिक की गुड़िया मंगवाई। पीड़िता ने गुड़िया के माध्यम से संकेतों और इशारों से प्रदर्शन करके दिखाया कि आरोपी ने उसके साथ किस तरह से गलत काम किया था। इस आधार पर ट्रॉयल कोर्ट ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई थी। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता की गवाही पूरी तरह से भरोसेमंद है। इसके अलावा मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने भी पुष्टि की। कोर्ट ने कहा कि केवल मूक-बधिर होने के आधार पर किसी गवाह की बात को खारिज नहीं किया जा सकता। संकेतों के माध्यम से दी गई जानकारी को भी कानूनी तौर पर मौखिक साक्ष्य माना जाता है। कोर्ट ने आरोपी को आईपीसी की धारा 376(2) के तहत मौत होने तक उम्रकैद और धारा 450 के तहत 5 साल जेल की सजा सुनाई है। साथ ही 21 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

सट्टेबाजों के लिए अलर्ट! IPL शुरू होने से पहले पुलिस का कड़ा संदेश, कार्रवाई तय

रायपुर. IPL शुरू होने से पहले रायपुर पुलिस कमिश्नरेट की सट्टेबाजों के लिए खास संदेश जारी की है. ‘कानून के साथ मत खेलना’, वरना मैच ही नहीं, जेल भी देखनी पड़ेगी. दरअसल, हर साल आईपीएल के मैच के दौरान सट्टेबाजी बड़े पैमाने पर होती है. पुलिस हर बार कार्रवाई करती है, लेकिन सट्टेबाजों का नेटवर्क इतना बड़ा है कि कारोबार चलता ही रहता है. अबकी बार आईपीएल शुरू होने से पहले रायपुर पुलिस कमिश्नरेट इस पर लगाम कसने के लिए सक्रिय है. इस दिशा में सोशल मीडिया में बाकायदा मैसेज जारी कर सट्टेबाजों को चेतावनी दी है. रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने क्रिकेट की भाषा में समझाया है कि बेटिंग करने वालों पर कड़ी कार्रवाई तय है. ‘चेज’ करने में माहिर है कानून की टीम. फर्जी सट्टा आईडी देने वालों से दूरी बनाने की अपील, नहीं माने तो ‘पार्टनरशिप’ नहीं टिकेगी… इसके साथ ही रायपुर पुलिस ने साफ संदेश दिया है. सट्टेबाजी छोड़िए, वरना सीधा जेल का रास्ता… बैंक खातों पर विशेष निगरानी कमिश्नरेट पुलिस ने सट्टेबाजों की आर्थिक गतिविधियों पर भी कड़ा शिकंजा कस दिया है। खासकर आईपीएल के दौरान खुलने वाले नए बैंक खातों और उनके ट्रांजेक्शन की जांच की जाएगी। प्राइवेट बैंकों के खातों पर विशेष नजर रखी जा रही है क्योंकि इन्हें खोलना आसान होता है। आईडी और कोड वर्ड के जरिये हो रही सट्टेबाजी सट्टेबाज अपने एजेंटों को विशेष आईडी और पॉइंट्स देकर सट्टे का खेल चला रहे हैं। एक-एक एजेंट को 50 लाख रुपये तक के पॉइंट और आईडी उपलब्ध कराई गई है। इसमें “लगाना” और “खाना” जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल होता है, जिससे सट्टेबाजी का संचालन किया जाता है। पुलिस की सख्त कार्रवाई की चेतावनी पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि सट्टेबाजी में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। एसओजी, सर्विलांस सेल और एलआईयू के सहयोग से भौतिक और तकनीकी रूप से सट्टेबाजों की निगरानी की जा रही है। सट्टेबाजों की जगह केवल जेल होगी। 

प्रशासनिक फेरबदल: रजत बंसल बने जनसंपर्क आयुक्त, रवि मित्तल की PMO में नियुक्ति

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए रजत बंसल को मुख्यमंत्री सचिवालय में पोस्टिंग के साथ जनसंपर्क आयुक्त का प्रभार सौंपा है, जबकि रवि मित्तल को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में उप सचिव पद के लिए रिलीव कर दिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार दोनों निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू किए गए हैं। वर्ष 2012 बैच के आईएएस अधिकारी रजत बंसल को अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक विशेष सचिव, मुख्यमंत्री सचिवालय के पद पर पदस्थ किया गया है। वे अपने वर्तमान दायित्वों के साथ-साथ आयुक्त जनसंपर्क, सीईओ ‘संवाद’, संचालक भौमिकी एवं खनिकर्म तथा प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। वहीं, वर्ष 2016 बैच के आईएएस अधिकारी रवि मित्तल को भारत सरकार के आदेश के परिपालन में प्रधानमंत्री कार्यालय, नई दिल्ली में उप सचिव के पद पर प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। इसके लिए उन्हें 31 मार्च 2026 की अपराह्न से कार्यमुक्त किया जाएगा। उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि चार वर्ष या आगामी आदेश तक निर्धारित की गई है। वर्ष 2012 बैच के अधिकारी रजत बंसल अपने वर्तमान कार्यों के साथ-साथ सीईओ ‘संवाद’, संचालक भौमिकी एवं खनिकर्म और प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम का अतिरिक्त दायित्व भी संभालेंगे। इधर, वर्ष 2016 बैच के आईएएस अधिकारी रवि मित्तल को 31 मार्च 2026 की अपराह्न से कार्यमुक्त किया जाएगा। उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि चार वर्ष या अगले आदेश तक निर्धारित की गई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि दोनों अधिकारियों से संबंधित ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: पेट्रोल पर ₹10 की कटौती और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी खत्म, CM साय ने की सराहना

डीजल पर एक्साइज ड्यूटी समाप्त, पेट्रोल पर ₹10 की कटौती—केंद्र सरकार के फैसले का CM साय ने किया स्वागत मुख्यमंत्री ने कहा—140 करोड़ नागरिकों को सीधी राहत देने वाला ऐतिहासिक निर्णय, प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता और दूरदर्शिता का परिचायक रायपुर   केंद्र सरकार द्वारा डीजल को एक्साइज ड्यूटी से मुक्त करने और पेट्रोल पर ₹10 प्रति लीटर की कटौती करते हुए एक्साइज ड्यूटी को मात्र ₹3 प्रति लीटर करने के निर्णय का मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वागत किया है। उन्होंने इसे देश के 140 करोड़ नागरिकों को सीधी राहत पहुंचाने वाला ऐतिहासिक और जनहितकारी कदम बताया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस निर्णय से देश के प्रत्येक परिवार, किसान, श्रमिक और मध्यमवर्ग को व्यापक राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकट के इस दौर में भी केंद्र सरकार द्वारा आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ न बढ़ने देना एक बड़ी संवेदनशील पहल है, जो आमजन के जीवन को सीधे प्रभावित करेगी। मुख्यमंत्री साय ने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए छत्तीसगढ़ की समस्त जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति हृदय से धन्यवाद और आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्णय ले रही है। यह फैसला प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता, संवेदनशीलता और देशवासियों के प्रति समर्पण का सशक्त उदाहरण है।

छात्र संघ चुनाव बहाली को लेकर एनएसयूआई का चरणबद्ध आंदोलन तेज, प्रेस वार्ता में दी रणनीति की जानकारी

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी मनेन्द्रगढ़ में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) द्वारा छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर चरणबद्ध आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। इसी कड़ी में आज आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन ने अपने आंदोलन की रूपरेखा और आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी साझा की। एनएसयूआई जिला अध्यक्ष कासिम शोधकर्ता ने कहा कि लंबे समय से छात्र संघ चुनाव नहीं होने के कारण छात्रों की आवाज दब रही है और उनका प्रतिनिधित्व लगभग समाप्त हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों के हितों की रक्षा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए छात्र संघ चुनाव अत्यंत आवश्यक है, और संगठन इस मुद्दे पर अंतिम लड़ाई लड़ने को तैयार है। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अशोक शास्त्री ने एनएसयूआई के आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा छात्रों और युवाओं के अधिकारों के साथ खड़ी रही है। उन्होंने सरकार से तत्काल छात्र संघ चुनाव कराकर छात्रों को उनका लोकतांत्रिक अधिकार वापस देने की मांग की। कांग्रेस कमेटी मनेन्द्रगढ़ शहर के अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने कहा कि छात्र संघ चुनाव नहीं होने से छात्रों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस संगठन एनएसयूआई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस आंदोलन में पूरी मजबूती से खड़ा है। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रफीक मेमन एवं एनएसयूआई महासचिव आशिष चौधरी ने कहा कि वर्तमान समय में महंगाई, संसाधनों की कमी और अन्य समस्याएं छात्रों को प्रभावित कर रही हैं। छात्र संघ चुनाव इन मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने का सशक्त माध्यम है, इसलिए आंदोलन को और तेज किया जाएगा। एनएसयूआई द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसारः 30 मार्च 2026 को प्रदेशभर के शिक्षण संस्थानों में राज्यपाल एवं सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा

IPL का बड़ा मुकाबला रायपुर में: KKR-RCB मैच में शाहरुख खान की एंट्री तय!

रायपुर. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने आईपीएल 2026 का दूसरा शेड्यूल जारी कर दिया है। शेड्यूल्ड के मुताबिक राजधानी रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में दो मुकाबले खेले जाएंगे। पहला मैच 10 मई को खेला जाएगा जो कि रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) और मुंबई इंडियंस (MI) के बीच होगा। वहीं दूसरा मैच 13 मई को कलकत्ता नाईट राइडर्स (KKR) और आरसीबी खेला जाएगा। छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ ने आईपीएल के दो मुकाबलों के लिए तैयारियां शुरू कर दी है। स्टेडियम में मैच और दर्शकों के लिए सुविधाओं के लिए जल्द ही बैठक की जाएगी। साथ ही टिकटों के दाम और अन्य सामानों के दर तय किये जाएंगे। रायपुर आ सकते हैं शाहरुख खान! राजधानी 13 मई को केकेआर vs आरसीबी के बीच मुकाबला खेला जाएगा। इसको देखने के लिए शाहरुख खान रायपुर आ सकते हैं । शाहरुख खान आम तौर पर केकेआर का हर मुकाबला देखने के लिए स्टेडियम पहुंचते हैं इसलिए ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि इस बार वह रायपुर आ सकते हैं । हालांकि अभी इसको लेकर अधिकृत पुष्टि नहीं हुई है। 10 साल बाद छत्तीसगढ़ में आईपीएल की वापसी छत्तीसगढ़ मे 10 साल बाद रायपुर में फिर से आईपीएल के मैच होने वाले हैं. आरसीबी ने इस बार रायपुर को अपना होम ग्राउंड बनाया है। जहां इस बार रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम अपने दो मुकाबले खेलेगी। क्रिकेट फैंस को विराट कोहली के साथ-साथ हार्दिक पंड्या, अजिंक्य रहाणे की बैटिंग देखने को मिलेगी। शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम की जानकारी शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, रायपुर, छत्तीसगढ़ (नवा रायपुर) में स्थित 65,000 दर्शकों की क्षमता वाला भारत का तीसरा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है। 2008 में स्थापित यह आधुनिक स्टेडियम, जो 2023 से अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की मेजबानी कर रहा है, IPL (आईपीएल) और रणजी ट्रॉफी के लिए मशहूर है। यह स्टेडियम अपनी तेज गेंदबाजों और बल्लेबाजों के अनुकूल पिच और बड़ी बाउंड्री के लिए जाना जाता है, जो 80 मीटर के औसत के साथ एक समान खेल का मैदान प्रदान करता है। रायपुर की पिच रिपोर्ट रायपुर में स्थित शहीद वीर नारायरण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम की सरफेस आमतौर पर बल्लेबाजों के अनुकूल मानी जाती है। हालांकि यहां अब तक कुछ ज्यादा इंटरनेशनल मैच नहीं खेले गए हैं। लेकिन इस ट्रैक पर स्पिनर्स और तेज गेंदबाज दोनों को मदद मिलती रही है। पिच का एक्जेक्ट आकलन करना थोड़ा मुश्किल जरूर है, लेकिन यहां लक्ष्य का पीछा करना आसान माना जा सकता है।