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देशभर के चार्टर्ड अकाउंटेंट रायपुर में जुटे, बैंक ऑडिट के उच्च मानकों पर फोकस

रायपुर. इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) की सीआईआरसी रायपुर, बिलासपुर, भिलाई, रायगढ़ और कोरबा के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस “आरोहण” एलिवेटिंग स्टैंडर्ड्स ऑफ बैंक ऑडिट का आयोजन आज होटल बेबीलोन कैपिटल, VIP चौक, रायपुर में हुआ। इस कार्यक्रम में देशभर से 1500 से अधिक सीए ने भाग लिया है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विशिष्ट अतिथि के रूप में दिवाकर पी. सिंह, जनरल मैनेजर, बैंक ऑफ बड़ौदा, प्रोग्राम डायरेक्टर सीए पंकज शाह, सीए अभय छाजेड़ (सीसीएम), प्रोग्राम कन्वेनर सीए संजय बिल्थारे , प्रोग्राम को-कन्वेनर सीए सुरेश कुमार अग्रवाल उपस्थित थे। ये सभी सम्मानित व्यक्तित्व डिग्निटरीज़ के रूप में उपस्थित थे और उन्होंने अपने अनुभव, मार्गदर्शन तथा विचारों से आयोजन की गरिमा और महत्व को बढ़ाया। कार्यक्रम का उद्घाटन मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि बैंक ऑडिट सम्मेलन से सीए को नए नियम, RBI गाइडलाइन, काम करने का सही तरीका और नए टूल्स की आसान जानकारी मिलती है, जिससे उनका काम बेहतर और आसान हो जाता है। इसमें एक्सपर्ट्स अपने अनुभव साझा करते हैं, जिससे रियल लाइफ सिचुएशन समझ में आती हैं। नए नियमों और बदलावों की जानकारी समय पर मिलती है। नेटवर्किंग का मौका मिलता है, जिससे नए कॉन्टैक्ट्स बनते हैं। कुल मिलाकर, यह सीए के प्रोफेशनल ग्रोथ में बहुत मदद करता है। विशिष्ट अतिथि दिवाकर पी. सिंह, जनरल मैनेजर, बैंक ऑफ बड़ौदा ने राष्ट्रीय सम्मेलन में मजबूत ऑडिट प्रणाली के महत्व पर जोर दिया। बदलते RBI नियमों के पालन, प्रभावी जोखिम प्रबंधन और पारदर्शिता की आवश्यकता बताई। उन्होंने फ्रॉड पहचान, डिजिटल बैंकिंग के जोखिम और ऑडिट में AI की बढ़ती भूमिका पर भी चर्चा की। उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को नई तकनीक अपनाने और प्रोफेशनल एथिक्स बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। उनका भाषण ऑडिट की गुणवत्ता सुधारने, आंतरिक नियंत्रण मजबूत करने और बैंकिंग प्रणाली में विश्वास बनाए रखने पर केंद्रित था। रायपुर शाखा की चेयरपर्सन सीए रश्मि वर्मा ने अपने उद्बोधन में सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन के उद्देश्य, महत्व एवं सदस्यों के व्यावसायिक विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बैंक ऑडिट के बढ़ते महत्व, गुणवत्ता पूर्ण रिपोर्टिंग एवं बदलते नियामकीय परिदृश्य में अद्यतन रहने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। सचिव सीए ऋषिकेश यादव ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए सदस्यों के लिए प्रेरित किया तथा अंत में आभार प्रदर्शन करते हुए पहले दिन के सत्र का समापन किया। इस राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग क्षेत्रों के प्रोफेशनल सीए उपस्थित होंगे, जिनका मुख्य उद्देश्य आज के युग के सीए को सही मार्गदर्शन देना है। सीए लोकेश गुप्ता ने IRAC नियम और एडवांस की स्क्रूटनी पर कहा कि बैंकों को आय की सही पहचान, एसेट क्लासिफिकेशन और प्रोविजनिंग नियमों का पालन करना चाहिए। समय-समय पर loans की गहन जांच, NPA पर नियंत्रण और पारदर्शिता बनाए रखना बैंकिंग प्रणाली को मजबूत बनाता है। सीए अभय छाजेड़ ने बैंक ऑडिट में डॉक्यूमेंटेशन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सही और पूर्ण दस्तावेज ऑडिट की विश्वसनीयता बढ़ाते हैं। प्रैक्टिकल इश्यूज़ जैसे इनकम्प्लीट रिकॉर्ड्स, समय की कमी और कंप्लायंस चैलेंजेस को समझकर ऑडिटर्स को सतर्कता, सटीकता और पेशेवर दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। सीए डी प्रेमनाथ ने CBS ऑडिट में अपडेटेड AI टूल्स के उपयोग को और विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि AI टूल्स बड़े डेटा को जल्दी एनालाइज करके अनयूजुअल ट्रांजैक्शन, फ्रॉड पैटर्न्स और रिस्क एरियाज़ पहचानने में मदद करते हैं। इससे मैनुअल काम कम होता है और एक्यूरेसी बढ़ती है। रियल टाइम मॉनिटरिंग से ऑडिटर्स तुरंत इश्यूज़ पकड़ सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि AI के साथ ह्यूमन जजमेंट जरूरी है, ताकि फाइनल ऑडिट सही और बैलेंस्ड रहे। सीए नयन कोठारी ने अलएफएआर के तहत रिपोर्टिंग की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि सही, स्पष्ट और पूरी रिपोर्टिंग बहुत जरूरी है। इससे बैंक की स्थिति, रिस्क और कमियों का सही पता चलता है। अच्छी रिपोर्टिंग से मैनेजमेंट और रेगुलेटर को सही निर्णय लेने में मदद मिलती है और ट्रांसपेरेंसी बनी रहती है। इस कार्यक्रम में रायपुर आईसीएआई मैनेजिंग कमेटी की चेयरपर्सन सीए रश्मि वर्मा, वाइस चेयरमैन सीए रवि जैन, सेक्रेटरी सीए ऋषिकेश यादव, कोषाध्यक्ष सीए शीतल काला, सिकासा चेयरमैन सीए संस्कार अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष सीए विकास गोलछा, कार्यकारिणी सदस्य सीए आयुषि अग्रवाल, एक्स ऑफिसियो सीए पंकज शाह शामिल थे। कार्यक्रम में प्रायोजक के रूप में ITSA हॉस्पिटल, बैंक ऑफ बड़ौदा, श्री राम ज्वेलर्स एवं टैक्समैन का विशेष सहयोग रहा।

कर्नाटक का जलवा कायम! 8 गोल्ड समेत 12 मेडल जीतकर टॉप पर, मेजबान छत्तीसगढ़ पीछे

रायपुर. छत्तीसगढ़ की मेजबानी में रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन किया गया है। इसमें कर्नाटक की टीम ने शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए 8 गोल्ड, 3 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज मेडल के साथ मेडल टैली में टॉप पर जगह बना ली है। वहीं, ओडिशा की टीम 5 गोल्ड, एक सिल्वर और 8 ब्रॉन्ज के साथ दूसरे नंबर पर काबिज है। असम की टीम 2 गोल्ड और 3 सिल्वर के साथ तीसरे नंबर पर चल रही है। वहीं मेजबान छत्तीसगढ़ की टीम अब तक दो सिल्वर और ब्रॉन्ज लेकर 6वें नंबर पर चल रही है। गुरुवार को स्वीमिंग इवेंट में छत्तीसगढ़ की ओर से खेलते हुए अनुष्का भगत ने 200 मीटर इंडिविजुअल मेडली में सिल्वर हासिल किया। इसके पहले अनुष्का ने 100 मीटर ब्रेस्ट स्ट्रोक में सिल्वर जीता था। वहीं हॉकी में छत्तीसगढ़ को हार का सामना करना पड़ा, जबकि फुटबॉल का मैच ड्रॉ रहा। वेटलिफ्टिंग में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी खाता भी नहीं खोल सके। मैडल टेली – अब तक छत्तीसगढ़ को नहीं मिला कोई गोल्ड राज्य    गोल्ड    सिल्वर    ब्रॉन्ज    कुल कर्नाटक    8    3    1    12 ओडिशा    5    1    8    14 असम    2    3    0    5 मिजोरम    1    1    0    2 त्रिपुरा    0    2    2    4 छत्तीसगढ़    0    2    1    3

किसानों से अपील : भूमि धारिता एवं पात्रता अनुसार ही उर्वरक का करें भंडारण, ताकि सभी किसान हो सकें लाभान्वित

रायपुर कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री  रामविचार नेताम ने कहा है कि राज्य सरकार ने आगामी खरीफ सीजन के लिए रासायनिक उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इस तरह की जानकारी संज्ञान में आ रही है कि फास्फेटिक उर्वरक के प्रमुख स्रोत डी.ए.पी. का अनियमित उठाव कृषक भाइयों द्वारा किया जा रहा है, जिससे अन्य कृषकों में प्रतिकूल वातावरण निर्मित होने की संभावना है।  केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा समन्वय से किये जा रहे प्रयासों से राज्य के कृषकों का हित संरक्षण सुनिश्चित किया गया है। कृषक भाइयों से अनुरोध है कि भूमि धारिता एवं पात्रता अनुसार ही उर्वरकों का भंडारण करें ताकि समस्त कृषक अग्रिम भंडारण की योजना से लाभान्वित हो सकें। उन्होंने बताया कि वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने के लिए सरकार ने किसानों को शत-प्रतिशत पहचान पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि उर्वरकों की कालाबाजारी रुक सके और जरूरतमंदों तक मदद पहुंचे। मंत्री  नेताम ने यह भी कहा कि खरीफ मौसम में उर्वरकों का वितरण एग्रीस्टेक पोर्टल में दर्ज रकबे के आधार पर होगा। यदि इसमें किसी प्रकार की त्रुटि पायी जाती है तो अन्य कृषकों को पर्याप्त उपलब्धता के दृष्टिगत समस्त वैधानिक कार्यवाईयां सुनिश्चित करने के लिए शासन सजग है।  उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आवश्यक होने पर वैकल्पिक पौध पोषण स्रोतों की व्यवस्था के लिए आकस्मिक कार्य योजना भी तैयार कर ली गई है, ताकि पौध पोषण में किसी प्रकार की कमी ना हो। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा राज्य के लिए चिन्हित “नील हरित काई” के मदर कल्चर के उत्पादन की तैयारी प्रारंभ कर दी गई है तथा माह अप्रैल से इसका वृहद उत्पादन कृषि विज्ञान केंद्रों, शासकीय उद्यान रोपणियों एवं शासकीय  कृषि प्रक्षेत्रों में किया जाएगा।  उन्होंने बताया कि खरीफ मौसम में ज्यादा से ज्यादा कृषकों को इसका कल्चर उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि कृषक इनका उपयोग कर वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिर कर यूरिया के समरूप पोषक तत्व पौधों को उपलब्ध करा सकें। इसके अलावा, हरी खाद के रूप में वर्गीकृत ढेंचा तथा अन्य दलहनी फसलों के कृषक प्रक्षेत्र में अनुप्रयोग को बढ़ावा देने आवश्यक राशि की व्यवस्था मंडी निधि से की जा रही है। इस हेतु समस्त जिलों को कृषक एवं क्षेत्र चयन के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री  नेताम ने बताया कि प्रदेश में उर्वरकों के अवैध भंडारण, अधिक मूल्य पर विक्रय तथा समस्त अन्य गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण हेतु उड़न दस्ता तथा निरीक्षकों की नियुक्ति संबंधी आदेश भी जारी किए जा चुके हैं। नैनो उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता भी प्रदेश में होगी ताकि न्यूनतम कास्त लागत पर प्रति इकाई अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके। नैनो उर्वरक के प्रभावी उपयोग के संबंध में कृषकों को जागरूक करने एवं प्रशिक्षण हेतु सघन अभियान चलाया जाएगा।  कृषि मंत्री  नेताम ने बताया कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़, भारत के कृषि परिदृश्य में एक अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है, जहाँ धान खरीदी और किसान कल्याण की योजनाओं ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। विगत तीन वर्षों के धान खरीदी के आंकड़ों के अनुसार, राज्य ने न केवल धान खरीदी के अपने पिछले रिकॉर्ड तोड़े हैं, बल्कि किसानों को उनकी उपज का देश में सबसे अधिक मूल्य सुनिश्चित कर एक मिसाल पेश की है। खरीफ सीजन 2025-26 में 142 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी को मिलाते हुए पिछले तीन खरीफ सीजन में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की सरकार ने लगभग 437 लाख मीट्रिक टन धान खरीद कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जिससे किसानों के खाते में लगभग 1 लाख 40 हजार करोड़ से अधिक का भुगतान हुआ है।  गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण उपजे संकट के बीच प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान के मार्गदर्शन में आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए केन्द्र और राज्य सरकार अलर्ट मोड पर काम कर रही है। इसके लिए केंद्रीय स्तर पर निरंतर उच्चस्तरीय बैठक भी की जा रही है। केन्द्र और राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है, कि किसानों को खाद-बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता के लिए किसी प्रकार से दिक्कत की सामना न करना पड़े। 

श्रमिकों के लिए राहत की सौगात! CM साय जशपुर से 27.15 करोड़ सीधे खातों में करेंगे ट्रांसफर

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में शनिवार 28 मार्च को दोपहर 01 बजे जिला मुख्यालय जशपुर के वशिष्ठ कम्युनिटी हॉल में जिला स्तरीय श्रमिक सम्मेलन आयोजित होगा। मुख्यमंत्री द्वारा श्रम विभाग के अंतर्गत 12 विभिन्न श्रमिक कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत 79,340 निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिजनों को 27.15 करोड़ रुपए की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में अंतरित किया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश की श्रम मंत्री  लखन लाल देवांगन करेंगे। अति विशिष्ट अतिथि के रूप में वित्त मंत्री  ओपी चौधरी, विशिष्ट अतिथि लोकसभा सांसद  राधेश्याम राठिया, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. राम प्रताप सिंह सहित अन्य जन प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के सचिव  गिरीश रामटेके ने बताया कि दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत 14 हितग्राहियों को 14 लाख 32 हजार रुपए, मिनीमाता महतारी जतन योजना के अंतर्गत 1960 श्रमिकों को 3 करोड़ 92 लाख रुपए, मुख्यमंत्री निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना के तहत 297 श्रमिकों को 44 लाख 55 हजार रुपए, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के अंतर्गत 20 हितग्राहियों को 20 लाख रुपए, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत 325 श्रमिकों के बच्चों को 38 लाख 88 हजार 374 रुपए, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना के अंतर्गत 3040 श्रमिकों को 6 करोड़ 08 लाख रुपए, मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना के तहत 71220 श्रमिकों के बच्चों को 14 करोड़ 53 लाख 96 हजार 500 रुपए, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना के अंतर्गत 1142 श्रमिकों को 39 लाख 50 हजार 624 रुपए, मुख्यमंत्री श्रमिक सियान सहायता योजना के तहत 526 हितग्राहियों को 1 करोड़ 52 लाख रुपए, मुख्यमंत्री सायकल सहायता योजना के अंतर्गत 784 श्रमिकों को 29 लाख 04 हजार 082 रुपए, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के अंतर्गत 9 हितग्राहियों को 9 लाख रुपए, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक दीर्घायु सहायता योजना के अंतर्गत 3 श्रमिकों को 60 हजार रुपए अंतरित किए जाएंगे।

वायरल तस्वीरों के बाद बड़ा एक्शन, IPS रतन लाल डांगी सस्पेंड

रायपुर राज्य सरकार ने पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी आईजी IPS रतन लाल डांगी को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उनके आपत्तिजनक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद की गई है। इसका आदेश गृह (पुलिस) विभाग, छग शासन ने जारी किया है। प्रारंभिक तौर पर यह पाया गया है कि IPS रतन लाल डांगी ने अपने पद की गरिमा के अनुरूप आचरण नहीं किया और ऐसा व्यवहार किया जो नैतिकता और सेवा नियमों के खिलाफ है। उन पर पद के प्रभाव का दुरुपयोग करने और स्थापित सामाजिक मानकों का उल्लंघन करने के आरोप भी लगे हैं। आदेश में कहा गया है कि उनकी गतिविधियां सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुईं, जिससे पुलिस विभाग की छवि पर नकारात्मक असर पड़ा। इस आधार पर उनके खिलाफ अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968 के तहत कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। फिलहाल IPS रतन लाल डांगी को निलंबित कर विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। निलंबन अवधि के दौरान रतन लाल डांगी का मुख्यालय पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर निर्धारित किया गया है। जारी आदेश के अनुसार निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। साथ ही सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना वे मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। शासन की इस कार्रवाई को प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने की दिशा में सख्त कदम माना जा रहा है।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: अंजलि मुंडा बनीं पहली महिला गोल्ड मेडलिस्ट

रायपुर कभी-कभी जीवन की दिशा एक छोटे से निर्णय से बदल जाती है। ओडिशा की 15 वर्षीय अंजलि मुंडा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। वर्ष 2022 में कक्षा में खेल चयन के दौरान उन्होंने तैराकी को चुना। एक ऐसा खेल जिसे वे उस समय सिर्फ मनोरंजन के रूप में जानती थीं। आज, वही निर्णय उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर ऐतिहासिक उपलब्धि तक ले आया है। ओडिशा के जाजपुर जिले के गहिरागड़िया गांव की रहने वाली अंजलि ने रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में 200 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में 2:39.02 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही वे इस प्रतियोगिता की पहली महिला स्वर्ण पदक विजेता बन गईं। साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली अंजलि चार भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके पिता एक स्थानीय फैक्ट्री में वैन चालक हैं। 10 वर्ष की आयु में वे कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से जुड़ीं, जहां उन्हें निःशुल्क शिक्षा और प्रशिक्षण मिला। यहीं से उनके खेल करियर की नींव मजबूत हुई। शुरुआत में वे अपनी बड़ी बहन से प्रेरित थीं, जो तीरंदाजी में सक्रिय हैं, लेकिन अंजलि ने तैराकी को अपना मार्ग चुना। उनकी मेहनत जल्द ही रंग लाई और तैराकी शुरू करने के एक वर्ष के भीतर ही उन्होंने एक स्थानीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। अंजलि अपनी सफलता का श्रेय अपने कोचों और खेल मंत्रालय की ‘अस्मिता लीग’ पहल को देती हैं। वर्ष 2024 में संबलपुर में आयोजित इस लीग में उन्होंने दो रजत पदक जीते थे, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा। इसके बाद गुवाहाटी में आयोजित अस्मिता स्विमिंग लीग (ईस्ट जोन) में भी उन्होंने दो रजत पदक हासिल किए। हालांकि, इस उपलब्धि के बावजूद अंजलि संतुष्ट नहीं हैं। उनका लक्ष्य अपने 2:25 के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय को बेहतर करना है। लगातार यात्रा और थकान के बावजूद उन्होंने अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया। अब अंजलि की नजर आगामी स्पर्धाओं- 50 मीटर बैकस्ट्रोक, 100 मीटर बैकस्ट्रोक और 200 मीटर इंडिविजुअल मेडली पर है, जहां वे अपने प्रदर्शन को और बेहतर करने के इरादे से उतरेंगी। अंजलि मुंडा की यह सफलता न केवल उनकी मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर प्रतिभा किस तरह नई ऊंचाइयों को छू सकती है।

ओडिशा की अंजलि मुंडा ने महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में एक और स्वर्ण पदक जीता

रायपुर कर्नाटक के तैराक मणिकांता एल ने शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में अपना तीसरा लगातार स्वर्ण पदक जीतकर स्वर्ण पदकों की हैट्रिक पूरी की। वहीं ओडिशा की अंजलि मुंडा ने महिलाओं की स्पर्धा में अपना दूसरा स्वर्ण पदक हासिल किया। यह उपलब्धियां उन्होंने गुरुवार को यहां खेले जा रहे खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के दूसरे दिन हासिल कीं। मेजबान छत्तीसगढ़ के लिए भी खुशी की बात रही, जहां स्थानीय तैराक अनुष्का भगत ने महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में दूसरा स्थान हासिल कर अपना दूसरा रजत पदक जीता। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के इस पहले संस्करण में 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हिस्सा ले रहे हैं, जिसमें लगभग 3800 खिलाड़ी नौ खेलों में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती में कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर हैं, जबकि मल्लखंब और कबड्डी को प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल किया गया है। मणिकांता, जिन्होंने बुधवार को 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक और 50 मीटर बटरफ्लाई में स्वर्ण पदक जीते थे, ने अपना दबदबा जारी रखते हुए 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले 2ः25.93 सेकंड में जीत लिया। त्रिपुरा के रियाज त्रिपुरा (2ः34.04 सेकंड) ने रजत और ओडिशा के कान्हू सोरेन (2ः36.21 सेकंड) ने कांस्य पदक जीता। महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में अंजलि मुंडा ने 2ः53.82 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत (2ः59.33 सेकंड) ने रजत और ओडिशा की अंजलि मलिक (3ः06.13 सेकंड) ने कांस्य पदक जीता। पदक तालिका में कर्नाटक छह स्वर्ण और दो रजत पदकों के साथ शीर्ष पर है, जबकि ओडिशा तीन स्वर्ण, एक रजत और चार कांस्य पदकों के साथ दूसरे स्थान पर है। वेटलिफ्टिंग में असम की मोनिखा सोनोवाल और मिजोरम के इसाक मालसावम्तलुआंगा ने चोट से जूझते हुए शानदार प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक जीते। मोनिखा ने घुटने की चोट के बावजूद महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में 57 किग्रा स्नैच और 75 किग्रा क्लीन एंड जर्क के साथ कुल 132 किग्रा उठाकर स्वर्ण पदक जीता। ओडिशा की दीपा रानी मलिक (120 किग्रा) ने रजत और अंडमान-निकोबार की अलास्का अलीना (115 किग्रा) ने कांस्य पदक हासिल किया। मोनिखा, जो असम के धेमाजी जिले से हैं, ने बताया कि तीन महीने पहले अभ्यास के दौरान उनका घुटना मुड़ गया था और कोच उन्हें प्रतियोगिता से हटाने पर विचार कर रहे थे, लेकिन उन्होंने खेलने का फैसला किया। उन्नीस साल के खिलाड़ी ने कहा,” मैं इस प्रतियोगिता को मिस नहीं करना चाहती थी क्योंकि मैं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहती थी। मुझे खुशी है कि मैं दबाव में अच्छा प्रदर्शन कर सकी।” मिजोरम के इसाक मालसावम्तलुआंगा भी पीठ की चोट से जूझ रहे थे। स्नैच में 108 किग्रा उठाने में संघर्ष के कारण वह दूसरे स्थान पर थे, लेकिन क्लीन एंड जर्क में शानदार वापसी करते हुए 130 किग्रा उठाकर कुल 235 किग्रा के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। झारखंड के बाबूलाल हेम्ब्रम (230 किग्रा) ने रजत और ओडिशा के सुब्रत नाइक (228 किग्रा) ने कांस्य पदक जीता।

बस्तर में गृहमंत्री का अचानक दौरा: रात में CRPF कैंप पहुंचे विजय शर्मा, सुरक्षा बनी चुनौती

बस्तर. छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा ने बुधवार को बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित इलाकों का दौरा करते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। वे बस्तर से दंतेवाड़ा, बारसूर और माडुम घाटी होते हुए सड़क मार्ग से रात करीब 9 बजे सातधार स्थित CRPF कैंप पहुंचे। यह वही मार्ग है, जो कभी नक्सल गतिविधियों के कारण बेहद संवेदनशील और जोखिम भरा होता था। ऐसे इलाके में गृहमंत्री का सड़क मार्ग से सफर करना सुरक्षा व्यवस्था में आए बदलाव और सरकार के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है। बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहला मौका है, जब कोई गृहमंत्री इस तरह सड़क मार्ग से इन दुर्गम और पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से होते हुए सातधार कैंप तक पहुंचे हैं। गृहमंत्री विजय शर्मा के इस दौरे को बस्तर में शांति और विकास की दिशा में एक अहम संकेत माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर भी इस यात्रा को लेकर उत्साह देखा गया और इसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य हालात लौटने के रूप में देखा जा रहा है।

कांकेर में सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता, 33 लाख के इनामी 6 माओवादी हथियारों समेत आत्मसमर्पण

कांकेर कांकेर जिला अंतर्गत दो दिनों में राजनांदगांव-कांकेर बॉर्डर डिवीजन के 05 माओवादी कैडर एवं मिलिट्री कंपनी-05 के 01 कैडर ने हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा में शामिल हुए हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में स्वरूपा उसेंडी के ऊपर 8 लाख और शेष प्रत्येक माओवादी पर 5-5 लाख का इनाम घोषित था। कुल 33 लाख के इनामी माओवादियों ने पुलिस के सामने घुटने टेके हैं। हथियारों के साथ पहुंचे नक्सली, पुनर्वास नीति से हुए प्रभावित आत्मसमर्पित माओवादी कैडरों में एसीएम मंगेश पोडियमी, एसीएम गणेश वीके, एसीएम मंगती जुर्री, एसीएम हिडमे मरकाम उर्फ सुनीता, एसीएम राजे और पीपीसीएम स्वरूपा उसेंडी (पीएलजीए कंपनी-05) शामिल हैं। पुनर्वास हेतु आगे आए इन माओवादी कैडरों द्वारा कुल 03 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया गया है, जिसमें 01 नग एसएलआर तथा 02 नग .303 राइफल शामिल हैं। पुनर्वास हेतु आगे आए माओवादी कैडरों से प्राप्त जानकारी के आधार पर इलाके में सक्रिय अन्य माओवादी कैडरों से संपर्क स्थापित कर उन्हें भी मुख्यधारा में शामिल कराने के प्रयास जारी हैं। बस्तर आईजी की अपील, मुख्यधारा में लौटें शेष बचे माओवादी वे सभी 06 माओवादी कैडर जिन्होंने पुनर्वास का मार्ग चुना है, उनके सामाजिक मुख्यधारा में पुनः एकीकरण तथा हथियारों की औपचारिक सुपुर्दगी आदि की कार्रवाई संपूर्ण प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात आयोजित की जाएगी। पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज सुंदरराज पट्टलिंगम ने एक बार फिर शेष बचे कुछ माओवादी कैडरों से हिंसा त्यागकर मुख्यधारा में शामिल होने की अपील दोहराई। उन्होंने कहा कि जो कैडर शांतिपूर्ण एवं सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आगे आएंगे, उन्हें पुनर्वास नीति के अंतर्गत सभी प्रकार की सहायता प्रदान की जाएगी। यह उल्लेखनीय है कि सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर पिछले 26 महीनों में 2700 से अधिक माओवादी कैडर मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं।

महाअष्टमी विशेष: बंजारी मंदिर में नाग-नागिन के दर्शन की मान्यता, भक्तों का लगा तांता

रायपुर. नवरात्रि के आठवें दिन महाअष्टमी के अवसर पर राजधानी रायपुर के देवी मंदिरों में भक्तिमय माहौल देखने को मिल रहा है। आज मां महागौरी की पूजा की जा रही है और शहर के तमाम मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। अष्टमी के मौके पर रायपुर के विभिन्न देवी मंदिरों में सुबह से ही हवन, पूजन और आरती का दौर जारी है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए मंदिरों में पहुंच रहे हैं, जिससे हर जगह आस्था का सैलाब नजर आ रहा है। बंजारी मंदिर में उमड़ा जनसैलाब रावांभाठा स्थित बंजारी माता मंदिर में भी सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। श्रद्धालु माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। बंजारी माता मंदिर को लेकर मान्यता है कि इसे बंजारा समाज द्वारा खोजा गया था, जिसके कारण इसका नाम बंजारी माता मंदिर पड़ा। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित प्रतिमा को लेकर कहा जाता है कि यह मां बगलामुखी की मूर्ति है, जो पास के जंगल से प्राप्त हुई थी। नाग-नागिन की अनोखी मान्यता मां बंजारी मंदिर से जुड़ी एक खास मान्यता भी प्रचलित है। बताया जाता है कि यहां दर्शन के लिए नाग-नागिन के जोड़े आते हैं। पुजारियों के अनुसार पहले एक जोड़ा देखा जाता था, लेकिन अब समय के साथ कई जोड़े यहां नजर आने लगे हैं।