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मुख्यमंत्री ने जशपुर में मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम का किया शुभारंभ : खिलाड़ी बास्केटबॉल शतरंज कैरम और टेबल टेनिस खेल का करेंगे अभ्यास

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज जशपुर में 3 करोड़ 52 लाख रुपए की लागत से निर्मित मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि खेल अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के बेहतर अवसर प्रदान करता है और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। मुख्यमंत्री  साय ने स्टेडियम का अवलोकन किया और वहां उपस्थित खिलाड़ियों के साथ खेल का आनंद भी लिया।उन्होंने खिलाड़ियों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया और कहा कि सरकार प्रदेश में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भी उचित मंच मिल सके। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, टीमवर्क और आत्मविश्वास विकसित करने का सशक्त साधन है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का अवसर दिया जाए। मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम में खिलाड़ियों को बास्केटबॉल के साथ-साथ शतरंज, कैरम और टेबल टेनिस जैसे खेलों का अभ्यास करने की आधुनिक सुविधा उपलब्ध होगी। यह स्टेडियम न केवल खेल गतिविधियों को बढ़ावा देगा, बल्कि जशपुर क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को विकसित करने का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी बनेगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष  रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष  सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष  अरविन्द भगत,  कृष्णा राय, नगर पालिका उपाध्यक्ष  यश प्रताप सिंह जुदेव, जिला पंचायत अध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष  गंगाराम भगत,  विजय आदित्य सिंह जुदेव, सरगुजा कमिश्नर  नरेन्द्र दुग्गा, आईजी  दीपक कुमार झा, कलेक्टर  रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  लाल उमेद सिंह, डीएफओ  शशि कुमार, जिला पंचायत सीईओ  अभिषेक कुमार, खिलाड़ी और कोच उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर में क्रिकेट एकेडमी का किया शुभारंभ

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज जशपुर में क्रिकेट एकेडमी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में खेल सुविधाओं का विस्तार कर युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे भविष्य में राज्य और देश का नाम रोशन कर सकें। जशपुर में क्रिकेट खेल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नगर पालिका और ग्रीन क्रिकेट जशपुर के बीच एमओयू भी किया गया है, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों को संगठित प्रशिक्षण और बेहतर संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। मुख्यमंत्री  साय ने इस दौरान सरगुजा ओलंपिक की विजेता बास्केटबॉल टीम से मुलाकात की और खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन और उपलब्धियां प्रदेश के युवाओं में खेल के प्रति उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाती हैं। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष  राम प्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष  सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष  अरविन्द भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष  यश प्रताप सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष  गंगाराम भगत, कृष्णा राय,  विजय आदित्य सिंह जुदेव, सरगुजा कमिश्नर  नरेन्द्र कुमार दुग्गा, आईजी  दीपक कुमार झा, कलेक्टर  रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  लाल उमेद सिंह, डीएफओ  शशि कुमार सहित जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

मेहनतकश श्रमिकों का सशक्तिकरण ही विकसित छत्तीसगढ़ की नींव है — मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज जशपुर में आयोजित जिला स्तरीय श्रमिक सम्मेलन में 79,340 निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिजनों को 27.15 करोड़ रुपए की राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के श्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन ने की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बावजूद छत्तीसगढ़ में पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी गैस की उपलब्धता को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ईंधन आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर है, लेकिन केंद्र सरकार की प्रभावी विदेश नीति और विभिन्न देशों के साथ मजबूत संबंधों के कारण आपूर्ति पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें और अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जिससे लोगों में अनावश्यक भय और भ्रम का वातावरण बन रहा है।उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और पेट्रोल, डीज़ल या गैस का अनावश्यक भंडारण न करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैसे पहले ईंधन की उपलब्धता बनी रही है, वैसे ही आगे भी निर्बाध रूप से मिलती रहेगी। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने श्रमिकों के कल्याण के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा संचालित 12 विभिन्न योजनाओं का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंजीकृत श्रमिकों को बच्चे के जन्म पर 20,000 रुपए की सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा मकान निर्माण के लिए 1.5 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। श्रमिकों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ई-रिक्शा खरीदने में भी सहायता दी जा रही है, जिसे पहले 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपए कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। यदि किसी श्रमिक का बच्चा 10वीं या 12वीं बोर्ड परीक्षा में टॉप-10 में स्थान प्राप्त करता है, तो उसे 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके साथ ही मेधावी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पहले 100 बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर 200 सीट कर दिया गया है। मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए “दीनदयाल भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना” संचालित की जा रही है, जिसके तहत ऐसे मजदूरों को सालाना 10,000 रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाती है। उन्होंने जानकारी दी कि हाल ही में लाखों भूमिहीन मजदूरों के खातों में लगभग 495 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई है। मुख्यमंत्री  साय ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि जनधन खातों के माध्यम से अब योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि पहले भेजी गई राशि का बड़ा हिस्सा बीच में ही खत्म हो जाता था, लेकिन अब पूरी राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास दोनों मजबूत हुए हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रोविडेंट फंड (PF) प्रणाली को यूनिवर्सल बनाया गया है, जिससे श्रमिक देश के किसी भी हिस्से में काम करने पर अपना पीएफ लाभ जारी रख सकते हैं। इसके अलावा न्यूनतम पेंशन राशि को बढ़ाकर 1000 रुपए किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि ईएसआईसी अस्पतालों के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों को बेहतर और निःशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री  साय ने अपने संबोधन के अंत में श्रमिकों को प्रदेश के विकास की रीढ़ बताते हुए कहा कि उनके परिश्रम और योगदान से ही राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सभी श्रमिकों का सम्मान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रदेशभर में आयोजित हो रहे श्रमिक सम्मेलन—श्रम मंत्री श्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे प्रदेश में श्रमिक सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि श्रमिकों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचे और उन्हें अधिकतम लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों को प्रसूति सहायता के रूप में 20,000 रुपए, मकान निर्माण के लिए आर्थिक सहायता, छात्रवृत्ति सहित कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके साथ ही 10वीं और 12वीं में टॉप-10 में आने वाले श्रमिकों के बच्चों को 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले सवा दो वर्षों में 800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि श्रमिकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से सीधे ट्रांसफर की गई है। इसके अलावा “अटल शिक्षा योजना” के तहत श्रमिकों के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि श्रमिकों को योजनाओं का पूरा लाभ मिले और उनके जीवन स्तर में सुधार हो। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने भी राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी देते हुए श्रमिकों से इनका अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की। इस अवसर पर श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा, माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष  शंभूनाथ चक्रवर्ती, नगर पालिका जशपुर के अध्यक्ष  अरविंद भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष  यशप्रताप सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष जशपुर  गंगाराम भगत सहित अन्य जनप्रतिनिधि, श्रमिक बंधु एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया निर्माणाधीन जगदेव राम उरांव कल्याण आश्रम चिकित्सालय का अवलोकन

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज जशपुर में  निर्माणाधीन जगदेव राम उरांव कल्याण आश्रम चिकित्सालय का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने कार्य की गति और निर्धारित मानकों के अनुरूप हो रहे निर्माण पर संतोष जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पताल के पूर्ण होने के बाद यह क्षेत्र के लोगों के लिए जीवनरेखा साबित होगा और मरीजों को यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की बेहतर सेवाएं उपलब्ध होंगी।   इस अत्याधुनिक चिकित्सालय का निर्माण एनटीपीसी लारा के सीएसआर फंड से लगभग 35 करोड़ 53 लाख रुपये की लागत से किया जा रहा है। अस्पताल का भूमिपूजन 7 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री  साय द्वारा किया गया था। वर्तमान में इस अस्पताल का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। प्रस्तावित 6 मंजिला भवन में ग्राउंड फ्लोर सहित चार मंजिलों का ढलाई कार्य पूर्ण हो चुका है।  अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर में इमरजेंसी सेवाएं, प्रथम तल पर ओपीडी, द्वितीय एवं तृतीय तल पर वार्ड, चतुर्थ तल पर आईसीयू, पंचम तल पर ऑपरेशन थियेटर संचालित होगा। यह चिकित्सालय अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा। 100 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में 15 ओपीडी, 4 आईसीयू, 4 ऑपरेशन थियेटर, फिजियोथेरेपी, पैथोलॉजी लैब, सीटी स्कैन, डायलिसिस, एक्स-रे, इमरजेंसी वार्ड, एमआरआई, ईसीजी सहित अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष  रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष  यश प्रताप सिंह जूदेव,  भरत सिंह, कृष्ण कुमार राय,  विजय आदित्य प्रताप सिंह जूदेव सहित जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत का शानदार प्रदर्शन, राज्य को दिलाया लगातार चौथा रजत

रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 के अंतर्गत तैराकी प्रतियोगिताओं का आज समापन हो गया। प्रतियोगिता में देशभर के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिसमें पुरुष वर्ग में कर्नाटक ने 123 अंकों के साथ ओवरऑल टीम चौंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। वहीं असम 69 अंकों के साथ प्रथम रनरअप और ओडिशा 31 अंकों के साथ द्वितीय रनरअप रहा। महिला वर्ग में ओडिशा ने 102 अंकों के साथ शानदार प्रदर्शन करते हुए चौंपियन बनने का गौरव हासिल किया, जबकि कर्नाटक 50 अंकों के साथ प्रथम रनरअप और मेजबान छत्तीसगढ़ 38 अंकों के साथ द्वितीय रनरअप रहा। प्रतियोगिता के दौरान छत्तीसगढ़ की तैराक अनुष्का भगत ने लगातार चौथा रजत पदक जीतकर प्रदेश का मान बढ़ाया। उन्होंने महिला 50 मीटर ब्रेस्ट स्ट्रोक स्पर्धा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यह उपलब्धि हासिल की। उनके इस प्रदर्शन से छत्तीसगढ़ की पदक स्थिति मजबूत हुई है और राज्य के खिलाड़ियों में उत्साह का संचार हुआ है। आज आयोजित विभिन्न स्पर्धाओं में भी खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन किया। पुरुष 100 मीटर फ्रीस्टाइल में कर्नाटक के धोनिश ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि असम के फर्मिनो एमोन लालुंग ने रजत और कर्नाटक के कीर्थन शरथ ने कांस्य पदक प्राप्त किया। महिला 100 मीटर फ्रीस्टाइल में ओडिशा की रितिका मिन्ज ने स्वर्ण पदक जीता, वहीं उनकी ही राज्य की कृष्णा प्रिया नायक ने रजत और असम की वायोलिना क्रो ने कांस्य पदक हासिल किया। पुरुष 50 मीटर बैकस्ट्रोक में असम के निबिर निलिम क्रो ने स्वर्ण, कर्नाटक के धोनिश ने रजत और ओडिशा के राजेश सोरेन ने कांस्य पदक जीता। महिला 50 मीटर बैकस्ट्रोक में ओडिशा की अंजलि मुंडा ने स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत ने रजत और कर्नाटक की मेघांजली ने कांस्य पदक अपने नाम किया। रिले स्पर्धाओं में पुरुष 4Û100 मीटर मेडले में कर्नाटक ने स्वर्ण, असम ने रजत और त्रिपुरा ने कांस्य पदक जीता, वहीं महिला 4Û100 मीटर मेडले में ओडिशा ने स्वर्ण, त्रिपुरा ने रजत और गुजरात ने कांस्य पदक हासिल किया। खेलो इंडिया खेलो ट्राइबल प्रतियोगिता 2026 में अब तक छत्तीसगढ़ ने कुल 8 पदक 1 स्वर्ण, 4 रजत और 3 कांस्य अपने नाम किए हैं और इसी के साथ राज्य पदक तालिका में छठे स्थान पर बना हुआ है। प्रतियोगिता में कर्नाटक और ओडिशा का दबदबा देखने को मिला, जबकि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने भी शानदार प्रदर्शन कर भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं।

कांकेर ऑपरेशन में बड़ी सफलता, 3 नक्सलियों ने डाली हथियार, 14 की तलाश तेज

बड़गांव कांकेर जिले में माओवादियों के लगातार आत्मसमर्पण से संगठन को बड़ा झटका लगा है। शनिवार को पखांजूर क्षेत्र के परतापुर थाने में एरिया कमेटी सदस्य राधिका कुंजाम, संदीप कड़ियाम और रैनू पद्दा ने समर्पण कर दिया है। इनके पास से दो एसएलआर और एक 303 राइफल मिली है। बीते चार दिनों में नौ माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं। पुलिस के सामने शेष बचे 14 माओवादियों का समर्पण करवाना सबसे बड़ी चुनौती है। बड़े चेहरों का समर्पण पुलिस के लिए बड़ी चुनौती सूत्रों के अनुसार मिलिट्री कंपनी की सदस्य व आठ लाख की इनामी स्वरूपा व अन्य समर्पण ने संगठन को अंदर तक प्रभावित किया है। हालांकि स्टेट कमेटी सदस्य रूपी और डिविजनल कमेटी सदस्य चंदर के आत्मसमर्पण की चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं, लेकिन अब तक दोनों ने हथियार नहीं डाले हैं। जानकारी के मुताबिक रूपी राजनांदगांव-कांकेर-बैलाडीला डिवीजन के माओवादी विजय रेड्डी की पत्नी है और वह अब भी जंगलों में सक्रिय रहकर संगठन को संभाल रही है। प्रशासन की अपील और आत्मसमर्पण नीति का असर पखांजूर एडिशनल एसपी राकेश कुर्रे का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से मिली जानकारियों के आधार पर शेष माओवादियों से संपर्क साधने और उन्हें मुख्यधारा में लाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही शेष बचे माओवादी भी समर्पण कर देंगे। बस्तर रेंज के आइजी सुंदरराज पी. ने शेष माओवादियों से भी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की है। पूर्व माओवादी स्वरूपा के आत्मसमर्पण के बाद अब उनके हाथ से लिखा हुआ मार्मिक पत्र इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। यह पत्र गोंडी भाषा में लिखा गया है, जिसमें स्वरूपा ने अपने पूर्व साथियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। आंकड़ों में आत्मसमर्पण और माओवाद का इतिहास सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में सुरक्षा बल के लगातार अभियान और सरकार की आत्मसमर्पण नीति के दबाव के चलते माओवादी संगठन के सदस्य मुख्यधारा में लौट रहे हैं। कांकेर सहित बस्तर के सात जिलों में जनवरी 2024 से मार्च 2026 तक कुल 2,756 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। कांकेर जिले में माओवाद का प्रभाव 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में पड़ोस के आंध्र प्रदेश और गढ़चिरौली (महाराष्ट्र) से आए माओवादियों के माध्यम से शुरू हुआ। जिले की पहाड़ियां और घने जंगल माओवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह और प्रशिक्षण शिविर के रूप में इस्तेमाल होते रहे हैं। जिले में अब तक की प्रमुख मुठभेड़ें मार्च 2025 – बीजापुर-कांकेर सीमा पर हुई मुठभेड़ में 30 माओवादी ढेर। अप्रैल 2025 – कांकेर के छोटे बेठिया थाना क्षेत्र में 29 माओवादी मारे गए। अगस्त 2025 – कांकेर-बस्तर सीमा पर मंडा पहाड़ के पास मुठभेड़ में तीन माओवादी ढेर। सितंबर 2024 – कांकेर के छिंदखड़क जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में तीन माओवादी मारे गए। फरवरी 2026 – कांकेर के जंगलों में हुई मुठभेड़ में दो सक्रिय माओवादी मारे गए।

मुख्यमंत्री साय ने जशपुर सर्किट हाउस में मातृत्व वन का किया लोकार्पण

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज जशपुर सर्किट हाउस परिसर में विकसित मातृत्व वन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि मातृत्व वन न केवल हरित क्षेत्र के रूप में विकसित होगा, बल्कि यह प्रकृति के प्रति भावनात्मक जुड़ाव का एक सशक्त प्रतीक भी है और आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण एवं जागरूकता का केंद्र बनेगा। उल्लेखनीय है कि जशपुर मंडल द्वारा विकसित मातृत्व वन में लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में 400 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनाओं के अद्वितीय समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस अवसर पर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधरोपण किया गया, जिससे प्रकृति और परिवार के बीच भावनात्मक संबंध को और अधिक सुदृढ़ करने का संदेश दिया गया। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि माँ हमारे जीवन की प्रथम गुरु होती हैं और उनका स्थान सर्वोच्च होता है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से हम माँ के प्रति सम्मान को प्रकृति से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास कर रहे हैं। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि मातृत्व वन जैसी पहल न केवल हरित क्षेत्र के विस्तार में सहायक होगी, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करेंगी। मातृत्व वन के अंतर्गत पर्यावरणीय एवं औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का चयन कर उनका रोपण किया गया है। इनमें टिकोमा, झारुल, सीताअशोक, गुलमोहर, लक्ष्मीतरु, आंवला, बीजा, सिन्दूर, नागकेसरी, अर्जुन एवं जामुन जैसी प्रजातियाँ प्रमुख हैं। ये पौधे न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगे, बल्कि भविष्य में औषधीय उपयोग एवं जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मातृत्व वन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, माताओं के प्रति सम्मान को प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त करना तथा नई पीढ़ी में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यह पहल ‘हर घर एक पेड़, हर पेड़ में माँ की ममता’ के संदेश को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज और पर्यावरण के लिए प्रेरणादायक बताया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष  रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष  सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष  अरविंद भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष  यश प्रताप सिंह जूदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष  गंगाराम भगत,  विजय आदित्य सिंह जूदेव सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: निकिता ने रचा इतिहास, भारोत्तोलन में कुल 160 किलोग्राम उठाकर छत्तीसगढ़ को दिलाया पहला स्वर्ण

रायपुर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में छत्तीसगढ़ की बेटी निकिता ने राज्य को पहला स्वर्ण पदक दिलाकर इतिहास रच दिया है। राजधानी रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में निकिता ने महिला 77 किलोग्राम भारोत्तोलन वर्ग में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल 160 किलोग्राम वजन उठाकर प्रथम स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता में निकिता ने स्नैच में 70 किलोग्राम तथा क्लीन एंड जर्क में 90 किलोग्राम वजन उठाया। दोनों ही वर्गों में उन्होंने संतुलित और प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया। इस शानदार जीत के साथ उन्होंने न केवल स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि छत्तीसगढ़ को खेलों में मजबूत शुरुआत भी दिलाई। प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर ओडिशा की मती जानी रहीं, जिन्होंने कुल 126 किलोग्राम वजन उठाया, जबकि तीसरा स्थान असम की जॉय पाटिर को मिला, जिनका कुल प्रदर्शन 118 किलोग्राम रहा। निकिता की इस उपलब्धि से पूरे राज्य में खुशी की लहर दौड़ गई है। खेल प्रेमियों और अधिकारियों ने उनकी मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास की सराहना की है। यह जीत छत्तीसगढ़ के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और आने वाले मुकाबलों में राज्य के खिलाड़ियों का मनोबल और बढ़ाएगी। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में देशभर के जनजातीय प्रतिभागी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में निकिता का यह स्वर्ण पदक न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया है।

पेट्रोल-डीजल व गैस का पर्याप्त स्टॉक, घबराने की जरूरत नहीं: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की पर्याप्त उपलब्धता होने की बात कहते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने और अनावश्यक भंडारण न करने की अपील की है। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राज्य में ईंधन व गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, इसलिए किसी भी तरह की घबराहट की आवश्यकता नहीं है। साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन द्वारा पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों की नियमित निगरानी की जा रही है। कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने बताया कि अवैध भंडारण पर कार्रवाई जारी है और शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। प्रशासन ने उपभोक्ताओं से निर्धारित अंतराल पर ही गैस बुकिंग करने तथा आवश्यकतानुसार ही उपयोग करने की अपील की है, ताकि सभी को समय पर सुविधा मिल सके।

संघर्ष से सफलता तक! बाबूलाल हेम्ब्रम एक-एक पदक जीतकर चमक रहे ट्राइबल गेम्स में

रायपुर. जब पूर्व आर्मी कोच गुरविंदर सिंह ने बाबूलाल हेम्ब्रम को उनकी शारीरिक बनावट के आधार पर अन्य खेल छोड़कर वेटलिफ्टिंग अपनाने की सलाह दी, तब झारखंड के रामगढ़ जिले के केरिबांदा गांव के इस किशोर के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी, इस खेल को जारी रखने के लिए पैसे जुटाना. लेकिन हार मानने के बजाय बाबूलाल ने कंस्ट्रक्शन साइट्स पर बांस और रॉड से अभ्यास शुरू किया. बाद में उन्होंने झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी (JSPS) के कोचिंग सेंटर में दाखिला लिया, जिसके लिए उन्हें रोज़ 60 किलोमीटर का सफर तय कर कोच गुरविंदर के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेना पड़ता था. खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतने वाले बाबूलाल कहते हैं कि, “2018 में जब मैंने इस खेल को अपनाया, वह समय मेरे लिए बहुत कठिन था. हमारे पास ट्रेनिंग के लिए उपकरण और किट खरीदने के पैसे नहीं थे, इसलिए मैं बांस और लोहे की रॉड से ही अभ्यास करता था. फिर जीएसपीएस और अपने कोच का साथ मिला और आज मैं यहां हूं.” पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे 19 वर्षीय बाबूलाल ने बताया, “मेरी मां एक स्थानीय स्कूल में रसोइया हैं, और पिता छोटे-मोटे काम करते हैं. आर्थिक स्थिति हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है. लेकिन मुझे भरोसा है कि खेलो इंडिया जैसे आयोजनों में मिल रही सफलता से हमारी स्थिति बदलेगी.” बाबूलाल हेम्ब्रोम ने उम्र-आधारित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले ही अपनी छाप छोड़ी है. 2024 में उन्होंने चेन्नई में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स में 49 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता. इसके बाद उन्होंने आईडब्ल्यूएफ़ वर्ल्ड यूथ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप और एशियन जूनियर एवं यूथ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भी पदक हासिल किए. अब बाबूलाल सीनियर सर्किट में कदम रख रहे हैं और बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में भारतीय टीम में जगह बनाने का लक्ष्य रख रहे हैं. फिलहाल, वह पटियाला में राष्ट्रीय शिविर का हिस्सा हैं. बाबूलाल ने कहा, “खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में यह रजत पदक मेरे लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला है कि मैं सही दिशा में जा रहा हूं. राष्ट्रीय शिविर में लौटकर मैं अपने कोच से भविष्य के लक्ष्यों पर चर्चा करूंगा और उसी के अनुसार तैयारी करूंगा. मेरा सपना है कि मैं कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करूं.”