samacharsecretary.com

बिलासपुर प्रेस क्लब चुनाव अजीत के टीम की हुई जीत.. शासन ने अपील खारिज की, नई कार्यकारिणी बरकरार… विरोधियों को लगा तगड़ा झटका…

बिलासपुर  बिलासपुर प्रेस क्लब के चुनाव को लेकर चले विवाद में अंततः राज्य शासन ने दिलीप यादव की अपील खारिज कर दी है। वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के उप सचिव द्वारा पारित आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अपीलकर्ता दिलीप यादव ने चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी, और स्वयं चुनाव में भाग लिया था, इसलिए बाद में चुनाव प्रक्रिया को चुनौती देना विधिसम्मत नहीं है। प्रकरण के अनुसार, संस्था के तत्कालीन सचिव दिलीप यादव द्वारा 7 सितंबर 2025 को चुनाव कराने के लिए निर्वाचन अधिकारी अपने खासमखास महेश तिवारी को नियुक्त किया गया, और 9 सितंबर को आनन-फानन में चुनाव कार्यक्रम घोषित किया गया। इसी दौरान सहायक पंजीयक फर्म्स एवं संस्थाएं बिलासपुर ने संस्था के पदाधिकारियों को अधिनियम की धारा 27 व 28 के उल्लंघन के संबंध में नोटिस जारी किया था। 19 सितंबर 2025 को 563 सदस्यों की मतदाता सूची के आधार पर चुनाव संपन्न कराया गया, लेकिन मतदाता सूची पंजीयक कार्यालय से प्रमाणित नहीं होने के कारण विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई। इसके बाद सहायक पंजीयक की अनुशंसा पर रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं छत्तीसगढ़ ने 19 सितंबर को हुए चुनाव को अमान्य घोषित करते हुए 18 नवंबर 2025 को नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश दिया। रजिस्ट्रार के आदेश के पालन में जिला कलेक्टर ने सहायक पंजीयक बिलासपुर को निर्वाचन अधिकारी नामित किया। इसके बाद वर्ष 2023 की मतदाता सूची के आधार पर 447 वैध सदस्यों के बीच 28 दिसंबर 2025 को पुनः चुनाव कराया गया, जिसमें अपीलकर्ता दिलीप यादव सहित अन्य प्रत्याशियों ने भाग लिया। इस बीच दिलीप यादव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रजिस्ट्रार के आदेश को निरस्त करने और उस पर रोक लगाने की मांग की थी। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद शासन के समक्ष अपील प्रस्तुत की गई। 29 दिसंबर 2025 को हुई सुनवाई में अपीलकर्ता दिलीप यादव उपस्थित नहीं हुआ, जबकि अन्य पक्षों ने बताया कि 28 दिसंबर को चुनाव संपन्न हो चुका है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि अपीलकर्ता दिलीप यादव को चुनाव प्रक्रिया पर आपत्ति थी तो उसे चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ होने से पहले अपील करनी चाहिए थी। चूंकि अपीलकर्ता दिलीप यादव स्वयं चुनाव में शामिल हुआ और बाद में परिणाम को चुनौती दी, इसलिए यह विधि के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि कोई भी व्यक्ति किसी प्रक्रिया में स्वेच्छा से भाग लेने के बाद उसके परिणाम के विरुद्ध उसी प्रक्रिया की वैधता को चुनौती नहीं दे सकता। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए शासन ने अपील को अस्वीकार कर दिया है और सहायक पंजीयक बिलासपुर को निर्देश दिया है कि अधिनियम की धारा 27 व 28 के अंतर्गत संस्था से नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इस आदेश के साथ ही बिलासपुर प्रेस क्लब के 28 दिसंबर 2025 को संपन्न हुए चुनाव और नई कार्यकारिणी के गठन पर शासन की मुहर लग गई है।

राज्यसभा चुनाव में फूलो देवी नेताम और लक्ष्मी वर्मा सहित कई निर्विरोध निर्वाचित

रायपुर. देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान है। हालांकि न उससे पहले ही राजनीतिक तस्वीर साफ हो चुकी है। 37 सीटों के लिए हो रहे राज्यसभा चुनाव में सात राज्यों के 26 उम्मीदवार बिना मुकाबले के ही निर्वाचित हो गए हैं। इनमें एनसीपी (शरद) प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar), कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी (Abhishek Singhvi ), केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले (Athawale Ramdas Bandu), फूलो देवी नेताम (phoolo devi netam) और लक्ष्मी वर्मा (lakshmi verma) जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। कई राज्यों में विपक्षी दलों ने उम्मीदवार नहीं उतारे, जिसके कारण ये नेता बिना मतदान के ही राज्यसभा पहुंच गए हैं। वहीं बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर मुकाबला होना तय है। इन राज्यों में अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में होने के कारण चुनाव कराया जाएगा। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि के बाद बिहार की 5, ओडिशा की 4 और हरियाणा की 2 सीटों पर चुनाव 16 मार्च को होंगे। इन चुनावों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। कुल 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए 40 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। अब 11 सीटों के लिए 14 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसके कारण बिहार, ओडिशा और हरियाणा में एक-एक सीट पर मुकाबला होगा। बीजेपी ने हरियाणा, ओडिशा और बिहार के राज्यसभा चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया बीजेपी ने हरियाणा, ओडिशा और बिहार के राज्यसभा चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिए हैं। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने बिहार के लिए दो जबकि ओडिशा और हरियाणा के लिए एक-एक नेताओं की नियुक्ति की है। इससे साफ है कि इन तीनों राज्यों में राज्यसभा चुनाव के लिए सियासी मुकाबला होगा। वहीं, सात राज्यों के 26 सीटों पर शाम तीन बजे तक राज्यसभा के निर्विरोध सदस्यों के नाम का ऐलान कर दिया जाएगा। बिहार की पांचवी सीट पर होगा मुकाबला बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए 6 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। बीजेपी की तरफ से नितिन नबीन और शिवेश कुमार मैदान में है तो जेडीयू से रामनाथ ठाकुर और नीतीश कुमार किस्मत आजमा रहे हैं। एनडीए की तरफ से पांचवें उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा हैं। आरजेडी ने अमरेंद्र धारी सिंह को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाकर मुकाबले को रोचक बना दिया है। बिहार में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों की जरूरत है. एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं जबकि विपक्ष के पास 35 विधायक हैं। इसके अलावा छह विधायक अन्य हैं। बीजेपी और जेडीयू के दो-दो उम्मीदवार आसानी से जीत जाएंगे, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा को अपनी जीत के लिए आरजेडी से दो-दो हाथ करना होगा। कुशवाह को तीन अतरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए तो आरजेडी के अमरेंद्र सिंह को 6 विधायकों का समर्थन चाहिए। आरजेडी ने ओवैसी की पार्टी का समर्थन मांगा है। अब देखना है कि कौन सियासी बाजी मारता है?  हरियाणा में रोचक हुआ राज्यसभा का मुकाबला हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। बीजेपी से संजय भाटिया और कांग्रेस से कर्मवीर बौद्ध मैदान में है। सतीश नांदल ने निर्दलीय पर्चा भरकर मुकाबले को रोचक बना दिया है, जिन्हें बीजेपी का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में एक सीट पर बीजेपी की जीत तय है, लेकिन दूसरी सीट के लिए कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच मुकाबला होगा। हरियाणा में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 31 विधायकों का समर्थन चाहिए। राज्य की विधानसभा में 90 सदस्य हैं, जिनमें से बीजेपी के 48 विधायक हैं तो कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। इसके अलावा दो विधायक इनेलो और तीन निर्दलीय विधायक हैं। इस लिहाज से बीजेपी और कांग्रेस के लिए एक-एक राज्यसभा सीट जीत सकती हैं। बीजेपी की एक सीट तय मानी जा रही है, लेकिन पहले देखा गया है कि कांग्रेस के पास संख्याबल होने के बावजूद उसके प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा था। यही वजह है कि दूसरी सीट पर सियासी संग्राम होगा। ओडिशा में चौथी सीट के लिए होगी फाइट ओडिशा की चार राज्यसभा सीट के लिए 5 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। बीजेपी से दो प्रत्याशी- मनमहोन सामल और सुजीत कुमार उतार रखे हैं तो दिलीप रे को पार्टी ने अपना समर्थन दिया है। इसके अलावा बीजेडी से संतृप्त मिश्रा और कांग्रेस ने डॉ दत्तेश्वर मिश्रा को अपना समर्थन दे रखा है। बीजेपी के दोनों और बीजेडी के एक उम्मीदवार की जीत तय है, लेकिन चौथी सीट के लिए बीजेपी समर्पित दिलीप रे और कांग्रेस के समर्पित दत्तेश्वर मिश्र के बीच फाइट होगी। छत्तीसगढ़ के निर्विरोध निर्वाचित होने वाले नेताओं की सूची – लक्ष्मी वर्मा (भाजपा) – फूलो देवी नेताम (कांग्रेस)

अफीम की खेती वाले ‘दाऊजी’ से शमशान जाने की भी लेते थे परमिशन

भिलाई नगर. निलंबित भाजपा नेता विनायक ताम्रकर के समोदा गांव के 5 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में 8 करोड़ कीमत के अफीम के पौधे जब्त मामले में कई नए खुलासे हो रहे हैं. अब ग्रामीण अलग-अलग तरह के आरोप लगा रहे हैं. गांव की महिलाएं बताती है कि विनायक का इतना दहशत है कि गांव में अगर किसी की मौत हो जाती है तो श्मशान ले जाने के लिए भी दाऊजी (विनायक ताम्रकर) की परमिशन लेनी पड़ती है. जब तक वे नहीं कहते, तब तक लाश को अंतिम संस्कार के लिए नहीं ले जाया जाता. यहां तक कि गांव के सरकारी शौचालय पर भी उनका कब्जा है, बिना उनकी मर्जी के हम वहां तक नहीं जा सकते. निलंबित भाजपा नेता विनायक ताम्रकार पिछले 5 वर्षों से अफीम की खेती कर रहे थे. लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी. एक दिन गांव के बच्चों के हाथ अजीब सा कुछ पौधा लगा. गूगल में सर्च करने पर पता चला कि यह अफीम है. बस फिर यही से पूरे गांव में हल्ला मच गया और 6 मार्च को मामला सामने आया. बताते हैं कि फार्म हाउस के चारों ओर गेट लगाए गए थे, जिससे आम लोगों का अंदर जाना लगभग असंभव था. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए विनायक ताम्रकर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और करीब 8 करोड़ कीमत के पौधे जब्त किए हैं. इसके बाद गांव का माहौल पूरी तरह बदला हुआ था. महिलाएं समूह बनाकर विनायक ताम्रकर के खिलाफ नारे लगाते हुए विरोध के लिए निकल पड़ी थी. ग्रामीणों का आरोप है कि सिर्फ कुआं ही नहीं, बल्कि आसपास के तालाब और वहां तक जाने वाली सड़क पर भी ताम्रकार का दबदबा रहा. गांव वालों का कहना है कि इन जगहों का इस्तेमाल करने में भी उन्हें धमकाकर रोक दिया जाता था. वहीं दूसरा दिलचस्प मामला यह है कि अफीम के पौधों की सिंचाई के लिए शिवनाथ नदी से पानी चोरी करने की बात सामने आई है. मौके पर निरीक्षण के दौरान संयुक्त टीम को शिवनाथ नदी पर मोटर पंप लगाए जाने का प्रमाण मिला है. जिस जगह पर पंप लगाया गया है, वहां विनायक ताम्रकार के खेत तक पाइप लाइन का विस्तार किया गया है . इसके लिए किसी तरह की अनुमति नहीं लिए जाने की बात सामने आ रही है. लिहाजा इसे पानी की चोरी करार दिया जा रहा है.

16 लाख किसानों ने किया 2 लाख 16 हजार हेक्टेयर रकबा समर्पण: मंत्री बघेल

रायपुर. विधानसभा के बजट सत्र में आज खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री दयाल दास बघेल ने सवालों का जवाब दिया. धान खरीदी के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया है कि 16 लाख 55 हजार से अधिक किसानों ने दो लाख 16 हजार हेक्टेयर रकबा समर्पण किया है. इस संबंध में कांग्रेस विधायक दिलीप लहरिया ने सवाल पूछा था. दिलीप लहरिया ने सवाल पूछा था कि खरीफ विपणन वर्ष2025–26 में प्रदेश में तकनीकी कारणों, एग्रीस्टेक पोर्टल और खरीदी की समय सीमा समाप्त होने के कारण अनेक किसान पंजीयन एवं टोकन होने के बावजूद धान नहीं बेच पाए हैं? यदि हां तो ऐसे किसानों की संख्या कितनी है. एग्रीस्टेक पोर्टल में रकबा/ शून्य कम अथवा त्रुटिपूर्ण दर्शाए जाने के कारण धान विक्रय से वंचित किसानों की आर्थिक क्षति का आकलन किया गया है या नहीं? यदि हां तो क्षतिपूर्ति के लिए शासन ने क्या किया है. इसके अलावा यह भी पूछा गया था कि किसानों से रकबा समर्पण किन परिस्थितियों में तथा शासन की किस नीति या आदेश के तहत कराया गया है ? अब तक कितने किसानों ने रकबा खसरा समर्पित किया है. ऋण वसूली के संबंध में भी सवाल पूछते हुए कांग्रेस विधायक दिलीप लहरिया ने पूछा कि जिन ऋणी किसानों का धान नहीं खरीदा जा सकता है. उनके अल्पकालीन कृषि ऋण के संबंध में शासन की क्या नीति है? खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने अपने जवाब में बताया है कि धान खरीदी अवधि के दौरान किसानों द्वारा लाये गये मानक धान का पूर्ण खरीदी किया गया है. जिन किसानों के द्वारा धान विक्रय का कार्य पूर्ण किया जा चुका है, उनसे रकबा समर्पण कराया जा सकता है. संबंधी निर्देश थे. खरीफ वर्ष 2025-26 में 1655149 किसानों ने 2.16 लाख हेक्टेयर रकबा का समर्पण किया. मंत्री ने बताया है कि जिन ऋणी कृषकों के द्वारा धान उपार्जन अवधि के दौरान अपना धान उपार्जन केन्द्रों विक्रय के लिए नहीं लाया गया है. उनके शेष ऋणों की वसूली देय तिथि के पूर्व कृषकों से व्यक्तिगत संपर्क कर नगद राशि वसूली की कार्यवाही की जाती है.

लक्ष्मी वर्मा और फूलोदेवी नेताम निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुनी गईं, विधानसभा में मिला प्रमाण पत्र

रायपुर  छत्तीसगढ़ से भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस प्रत्याशी फूलोदेवी नेताम निर्विरोध राज्यसभा सांसद निर्वाचित हुई हैं। सोमवार को दोनों नेत्री प्रमाण पत्र लेने विधानसभा पहुंचीं। प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद दोनों सांसदों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की खुशी साझा की और गले मिलकर बधाई दी। इस मौके पर कई जनप्रतिनिधि और समर्थक भी मौजूद रहे, जिन्होंने दोनों नेताओं को शुभकामनाएं दीं। बता दें कि राज्यसभा चुनाव में नामांकन वापसी के बाद दोनों उम्मीदवार निर्विरोध चुनी गईं। इसके बाद आज उन्होंने विधानसभा पहुंचकर आधिकारिक तौर पर अपना निर्वाचन प्रमाण पत्र प्राप्त किया। दोनों सांसदों ने इस अवसर पर पार्टी नेतृत्व और प्रदेश की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे राज्य और जनता के हितों को राज्यसभा में मजबूती से उठाने का काम करेंगी। पहली बार दोनों पार्टी से महिला उम्मीदवार ऐसा पहला संयोग बना है जब राज्यसभा चुनाव के लिए पहली बार दोनों पार्टियों ने महिला को उम्मीदवार बनाया। छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की पांच सीटें आती हैं। फिलहाल पांच से अब तीन सांसद महिला होंगी। हालांकि कांग्रेस की रंजीता रंजन का कार्यकाल मई में खत्म हो जाएगा। वहीं छत्तीसगढ़ में अब तक पांच में से चार सांसद कांग्रेस के थे, लेकिन अब बीजेपी की संख्या बढ़ेगी। बीजेपी के सदन में दो सदस्य हो जाएंगे, जबकि कांग्रेस के तीन सदस्य रहेंगे। दोनों ही पार्टियों ने इस बार जातिगत और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशी बनाए हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी ने दोनों को नहीं दिया था मौका छत्तीसगढ़ में अनोखा समीकरण बना है कि दोनों ही महिला नेता जिन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया है वह 2023 के विधानसभा चुनाव में टिकट की दावेदार थी, लेकिन पार्टी ने दोनों को मौका नहीं दिया था। अब राज्यसभा के लिए भेजकर उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी है। फूलोदेवी नेताम बस्तर से आती हैं और कांग्रेस का बड़ा महिला चेहरा मानी जाती हैं। वह लगातार दूसरी बार राज्यसभा के लिए भेजी जा रही हैं। वह छत्तीसगढ़ में महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। वहीं बीजेपी की लक्ष्मी वर्मा पार्टी में लंबे समय से प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रही थी। वह रायपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष भी रही हैं, जबकि अब पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के लिए भेजा है।

ई-मेल से मिली बम धमकी: बालोद-बेमेतरा कोर्ट में हाई अलर्ट

बालोद/बेमेतरा छत्तीसगढ़ के हाईकोर्ट और विभिन्न जिला कोर्टों को लगातार बम से उड़ाने की धमकियां मिल रही है। इसी बीच आज बालोद कोर्ट और बेमेतरा जिला न्यायालय परिसर को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली है, जिससे हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि यह धमकी ईमेल के जरिए मिली है। धमकी मिलने के बाद कोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। वहीं पुलिस ने कोर्ट परिसर से सभी मजिस्ट्रेटों को सुरक्षित सर्किट हाउस लेकर पहुंची और सभी अधिवक्ताओं को भी बाहर निकाला गया है। फिलहाल, कोर्ट परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और बम स्क्वॉड की टीम जांच में जुट गई है। बता दें कि 25 फरवरी को छत्तीसगढ़ के हाईकोर्ट को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली थी, जिससे हाईकोर्ट परिसर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। इसके अलावा, इससे पहले प्रदेश के अन्य जिलों जैसे राजनांदगांव, जांजगीर-चांपा और जगदलपुर के न्यायालयों को भी इसी तरह की धमकियां मिल चुकी हैं। हालांकि, जांच में यह बात सिर्फ अफवाह निकली थी।

दुर्ग में अफीम की खेती पर सदन में हंगामा, विपक्ष का स्थगन प्रस्ताव; ‘धान का कटोरा’ पर उठे सवाल

रायपुर विधानसभा बजट सत्र के दौरान सोमवार को शून्य काल के दौरान विपक्ष ने दुर्ग में सामने आई भाजपा नेता के खेत में अफीम की खेती का मुद्दा उठाया. नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मामले पर स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए सरकार पर दोषियों को बचाने का प्रयास करने का आरोप लगाया. इसके साथ ही कांग्रेस ने सरकार पर ‘धान के कटोरा’ को ‘अफीम का कटोरा’ बनाने की बात कही. पूरे मामले पर सदन में सत्ता पक्ष ओर विपक्ष के बीच जोरदार हंगामा हुआ. इसके साथ सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई. नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने कहा कि राजधानी से 50 किलोमीटर की दूरी पर विनायक ताम्रकार नाम का व्यक्ति अपनी निजी भूमि पर अफीम की खेती करने में लगा हुआ है. पूरा छत्तीसगढ़ सुलझे नशे से बर्बाद हो रहा है, और जिस ट्रैक से दूसरे तरफ किसानों के धान की खरीदी नहीं की जा रही ऐसे में हमे यह लगता है कि शायद आप लोग यही चाहते हैं कि पूरे छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती हो. छत्तीसगढ़ जो धान का कटोरा है. उसे आप लोग अफीम का कटोरा बनान चाहते है. इसमें पूरे शासन के लोग शामिल हैं. यह सामूहिक संरक्षण में किया जा रहा है. इस पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि मै तो यही कहूंगा कि इसमें कांग्रेस शामिल है. नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री का नाम लिया. इसका असली तथ्य कहां है? यह खेती आज से नहीं चालू है. यह खेती 4 साल से हो रही है. वहां की दूरी पाटन से 40 किलोमीटर है. भूपेश बघेल ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह होली के ठीक पहले की घटना है. गांव के लोग लकड़ी इकट्ठा करने गये थे, वहां चने के खेत से होते हुए उन लोगों ने यह खेती देखी. कलेक्टर का कहना है कि विनायक ताम्रकार के खेत में अफीम की खेती हो रही है, पर एफआईआर में नौकर को मुख्य आरोपी बताया गया है. जो मुख्य आरोपी है, उसका नाम तीसरे नंबर पर है. इसे सबका संरक्षण है, इसलिए दूसरी बात इसमें रकबा नहीं है. कुल मिलाकर लीपापोती करने की कोशिश की जा रही है. एफआईआर आखिर इतना लाचार क्यों बनाया गया है. इसे ग्राहय कर इसमें चर्चा कराएं. पहले तो पंजाब जैसे जगहों से केवल नशे के पदार्थ का आना-जाना चलता था, पर अब तो अफीम की यानी नशे की खेती हो रही है. उप मुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने अपने जवाब में कहा कि दुर्ग पुलिस को 6 मार्च को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई थी. किसी सरपंच से ऐसी सूचना नहीं मिली थी. सूचना मिली थी कि अवैध रूप से समोद गांव के फॉर्म हाउस में अफीम की खेती की जा रही है. तत्काल वाहन टीम पहुंची. एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्यवाई की गई. दूसरे दिन न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की मौजूदगी में जप्ती की कार्रवाई की गई. दोषियों को मौके से ही गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया. 6 हज़ार 242 किलोग्राम अफीम जप्त की गई थी. उन्होंने कहा कि बीते दो साल में दो हज़ार से ज़्यादा प्रकरण में से पाँच हज़ार से ज़्यादा आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है. शासन ने सभी जिलों में टास्क फ़ोर्स का गठन किया है. आरोपी और सप्लायरों के ख़िलाफ़ फाइनेशियल इन्वेस्टिगेशन अलग से किया जा रहा है. आरोपियों की 16 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति जप्त की गई है. 2024-25 में ड्रग्स डिपॉस्जल कमेटी का गठन कर बड़े पैमाने पर ड्रग्स डिस्पोज किया गया है. मानस पोर्टल नम्बर 1933 का व्यापक प्रचार प्रसार किया जा रहा है. नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर चरणदास महंत ने कहा कि गृहमंत्री ने कहा कि मुखबिर ने इसकी सूचना दी थी. अजय चंद्राकर ने कहा कि 4 साल से खेती हो रही थी. राज्य के कई हिस्सों में अफ़ीम की खेती की सूचना आती रही है. मैं 1993 में इस विभाग का मंत्री रहा हूँ. कैसे अफ़ीम बनता है ये सब मुझे पता है. अफ़ीम की खेती जो शुरू हुई है, ये बड़ा ख़तरनाक हो सकता है. छत्तीसगढ़ के गांवों में यदि इस तरह का नशा पैदा करेंगे, तो हमारे बच्चों का क्या होगा.

नवरात्रि मेले में स्वास्थ्य सेवा: निजी अस्पताल लगाएगा फ्री मेडिकल कैंप, तुरंत इलाज की सुविधा

डोंगरगढ़ चैत्र नवरात्रि के दौरान मां बम्लेश्वरी मंदिर में उमड़ने वाली भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर विशेष पहल की है। पहली बार मेले में निजी चिकित्सालयों की सहभागिता से नि:शुल्क चिकित्सा शिविर लगाए जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं और पदयात्रियों को तत्काल प्राथमिक उपचार की सुविधा मिल सकेगी। कलेक्टर जितेन्द्र यादव की अध्यक्षता में कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में निजी अस्पतालों के संचालकों और प्रतिनिधियों के साथ मेला अवधि के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। कलेक्टर ने कहा कि 19 मार्च 2026 से प्रारंभ होने वाले चैत्र नवरात्रि मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु डोंगरगढ़ पहुंचते हैं, ऐसे में शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों के साथ निजी चिकित्सालयों की सक्रिय भागीदारी से स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा। बैठक में तय किया गया कि प्रमुख सेवा पंडालों और मार्गों पर अस्थायी मेडिकल कैम्प स्थापित किए जाएंगे, जहां निजी चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ रोटेशन के आधार पर ड्यूटी देंगे। इन शिविरों में श्रद्धालुओं को नि:शुल्क प्राथमिक उपचार और दवाई वितरण की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए निजी अस्पतालों की एम्बुलेंस सेवाएं भी मेला क्षेत्र के आसपास तैनात रहेंगी। इसके अलावा भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में त्वरित सहायता के लिए बाईक एम्बुलेंस की व्यवस्था भी की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से शासकीय और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के बीच समन्वय बनाए रखा जाएगा। बताया गया कि इस व्यवस्था में करीब 48 चिकित्सा संस्थान अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे। बैठक में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सदस्यों ने प्रशासन को पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया। इस अवसर पर जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुरूचि सिंह, संयुक्त कलेक्टर शीतल बंसल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरत्न, जिला आरसीएच नोडल अधिकारी डॉ. अल्पना लूनिया, जिला कार्यक्रम प्रबंधक संदीप ताम्रकार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

विधानसभा में लखमा का सवाल- ‘जिन किसानों का धान नहीं खरीदा, कौन पटाएगा उनका कर्ज?

रायपुर. धान खरीदी के विषय पर कांग्रेस विधायकों ने मंत्री दयालदास बघेल को घेरा. विपक्ष ने कहा कि सरकार धान खरीदी के लिए सिर्फ दिखावा करती है. इसके साथ ही विपक्ष ने मंत्री से स्पष्ट जवाब नहीं मिलने पर नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट किया. विधानसभा में आज प्रश्नकाल के दौरान विधायक लखेश्वर बघेल ने वर्ष 2025-26 में हुई धान खरीदी और उसके उठाव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि धान खरीदी के संबंध में जो जानकारी दी है, उसमें धान खरीदी कब शुरू हुई और किस्त का भी उल्लेख करेंगे? इस पर मंत्री दयालदास बघेल ने बताया कि बस्तर संभाग में कुल 46846.86, बीजापुर में 21888.59, दंतेवाड़ा में 9757, कांकेर में 147528.3, कोंडागांव में 58911.78, नारायणपुर में 17383.06 और सुकमा में 16608.14 मीट्रिक टन धान का कुल उठाव हुआ है. विधायक बघेल लखेश्वर ने कहा कि किसान लगातार एसडीएम कार्यालय और हर जगह चक्कर काटता रहा. सबसे बड़ा घोटाला धान खरीदी में हो रहा है, कोई पानी डाल रहा है, तो कोई ईंट खरीद रहा है. इसे गंभीरता से लेना जरूरी है. कितने किसानों को वनाधिकार संख्या जारी है, और कितने ऋणधारी है? इस पर मंत्री ने बताया कि जितना धान अभी बिका है, वह किसी भी वर्ष नहीं बिका है. पूर्व सीएम ने भूपेश बघेल ने सवाल किया कि बस्तर के कितने किसान हैं, जिनका दूसरा टोकन कटा लेकिन धान नहीं बेच सके? ऐसे कितनी ऋणी किसान हैं, जिनका टोकन कटा फिर भी धान नहीं बेच सके? जो किसान ऋणी है उनका धान खरीदेंगे क्या या उनका कर्जा माफ करेंगे? धान खरीदी के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सवालों के जवाब में मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि कांग्रेस सरकार में भी ऋणी किसानों का धान नहीं खरीदा गया था. पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने बजट सत्र के दौरान पहला प्रश्न खाद्य मंत्री से पूछा कि बस्तर संभाग के आदिवासी 32200 से ज्यादा किसानों से धान खरीदी क्यों नहीं हुई? उन्होंने कहा कि किसानों का धान खरीदा जाएगा या किसानों का कर्जा चुकाया जाएगा. खाद्य मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि जो किसानों धान खरीदी केंद्र तक धान लेकर पहुंचे थे, उनका धान हमने खरीदा है, जो नहीं पहुंचे उनका धान नहीं खरीदा गया. इस पर कवासी लखमा ने कहा कि किसानों का पंजीयन हुआ, टोकन कटा, लेकिन उसके बाद भी किसान से धान नहीं खरीदा गया. बस्तर के किसानों को धान का 206 करोड़ रुपया मिलना था, उन किसानों का अब क्या होगा? किसानों ने कर्जा लिया है, उसको कौन पटाएगा. खाद्य मंत्री ने कहा कि जो भी किसान ऋण लेता है, उसका धान खरीदा जाता है. लेकिन धान खरीदा उनका जाता है, जो खरीदी केंद्र तक आते है. इस पर लखमा ने कहा कि जिन किसानों का धान नहीं खरीदा गया है, उनका कर्जा कौन पटाएगा?

होली ब्रेक खत्म, आज से विधानसभा सत्र; अफीम की खेती बनेगा बड़ा मुद्दा

रायपुर होली के अवकाश के बाद आज से छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्रवाई एक बार फिर शुरू होगी. दुर्ग में भाजपा नेता के खेत में अफीम की खेती पर आज सदन गरमाएगा. विपक्ष मुद्दे पर चर्चा के लिए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भी ला सकता है. तय कार्यक्रम के अनुसार, आज सदन में मंत्री दयालदास बघेल और मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के विभागों को लेकर चर्चा होगी. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्री केदार कश्यप, मंत्री दयालदास बघेल और मंत्री रामविचार नेताम सदन के पटल पर विभिन्न पत्र रखेंगे. सदन में आज दो ध्यानाकर्षण भी लगाए गए हैं, जिन्हें विधायक भावना बोहरा और ब्यास कश्यप द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा. इसके अलावा सभापति गोमती साय द्वारा प्रतिवेदनों की प्रस्तुति भी की जाएगी. आज से विधानसभा में अनुदान मांगों पर चर्चा की शुरुआत होगी, जिसमें डिप्टी सीएम अरुण साव और विजय शर्मा शामिल होंगे.