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मानसिक प्रताड़ना तलाक का आधार, पत्नी के गुजारा भत्ते के अधिकार पर भी हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पति के प्रति पत्नी के व्यवहार को मानसिक क्रूरता मानते हुए एक पारिवारिक अदालत द्वारा मंजूर किए गए तलाक के फैसले को सही ठहराया है. अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया कि शादीशुदा जिंदगी में बार-बार के विवाद और बिना मजबूत सबूतों के लगाए गए गंभीर आरोप मानसिक क्रूरता के दायरे में आते हैं।  इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने यह भी व्यवस्था दी कि यदि पत्नी ने निचली अदालत में स्थायी गुजारा भत्ते (अल्मोनी) की मांग नहीं की थी, तो वह इसके लिए कानून के मुताबिक अलग से आवेदन दायर कर सकती है।  यह पूरा मामला 17 फरवरी 2016 को हुई एक शादी से जुड़ा है, जहां दंपत्ति विवाह के बाद महज छह से सात दिन ही साथ रहे. इसके बाद सरकारी कर्मचारी पति अपनी नौकरी के सिलसिले में दंतेवाड़ा चला गया, जबकि पत्नी नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के लिए हॉस्टल में रहने लगी. इसके बाद दोनों के रिश्तों में कड़वाहट आ गई।  पति ने आरोप लगाया कि पत्नी अक्सर उसके और उसके माता-पिता के साथ झगड़ा करती थी, बिना बताए मायके चली जाती थी और किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंधों में थी. पति का यह भी आरोप था कि पत्नी ने उसे परेशान करने के लिए उसके सरकारी विभाग में झूठी शिकायतें दर्ज कराई थीं।  दूसरी तरफ, पत्नी ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया था कि उसके ससुराल वाले उसे 4 लाख रुपये और पिता की जमीन ट्रांसफर करने के लिए प्रताड़ित करते थे. पत्नी का आरोप यह भी था कि पति के अन्य महिलाओं से संबंध हैं।  अंबिकापुर की पारिवारिक अदालत ने 11 नवंबर 2024 को पति के पक्ष में तलाक की मंजूरी दी थी, लेकिन गुजारा भत्ता तय नहीं किया था. इसी फैसले को चुनौती देने और तलाक रद्द कराने के साथ-साथ गुजारा भत्ता पाने के लिए पत्नी ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।  जस्टिस पार्थ प्रतीक साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों और सबूतों का गहन अध्ययन किया. हालांकि पति पत्नी के कथित अफेयर से जुड़े टेलीफोन रिकॉर्डिंग या चश्मदीद गवाह जैसे सीधे सबूत पेश नहीं कर सका, लेकिन जिरह के दौरान पत्नी के वकील द्वारा पूछे गए सवालों ने मामले का रुख बदल दिया. जिरह में पत्नी की ओर से यह सुझाव दिया गया था कि उसने विवादित घटना को लेकर माफी मांगी थी।   पीठ ने टिप्पणी की कि यदि कोई घटना घटी ही नहीं थी, तो माफी मांगने जैसा सुझाव देने का कोई औचित्य नहीं बनता. इसके अलावा, पत्नी की मां ने उसके समर्थन में हलफनामा तो दिया, लेकिन वे जिरह के लिए कटघरे में उपस्थित नहीं हुईं. अदालत ने इन परिस्थितियों को देखते हुए पति के पक्ष को अधिक विश्वसनीय माना और तलाक को बरकरार रखा।  जहां तक गुजारा भत्ते की बात है, उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत वित्तीय सहायता तय करने के लिए दोनों पक्षों की आय और संपत्ति की जांच जरूरी है. चूंकि पत्नी ने पारिवारिक अदालत में इस मांग को नहीं रखा था और न ही कोई साक्ष्य पेश किए थे, इसलिए अपीलीय स्तर पर पहली बार इस पर निर्णय नहीं लिया जा सकता. अदालत ने पत्नी की अपील खारिज करते हुए उसे सक्षम न्यायालय में गुजारा भत्ते के लिए अलग से नया आवेदन करने की स्वतंत्रता दी है। 

मां अंगारमोती मंदिर में नवरात्र की भव्य तैयारी, 7 हजार ज्योति कलश के साथ निभाई जाएगी आदिवासी परंपरा

धमतरी  गंगरेल में आदिशक्ति मां अंगारमोती मंदिर है. इस मंदिर में 11 अक्टूबर को शाम 5 बजे पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ ज्योत-जवारा का आयोजन किया जाएगा. इस बार घी और तेल की 7 हजार से ज्यादा ज्योत प्रज्ज्वलित होने की उम्मीद है।  ज्योत के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीयन सुविधा आदिशक्ति मां अंगारमोती ट्रस्ट के अध्यक्ष जीवराखन मरई ने बताया कि मन्नत की ज्योत के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीयन की सुविधा उपलब्ध है. अब तक करीब 40 प्रतिशत पंजीयन ऑनलाइन हुए हैं. नवरात्र के नौ दिनों तक मंदिर परिसर में लगभग 150 युवक-युवतियां सेवादार के रूप में अपनी सेवाएं देंगे. ये सभी आदिवासी समाज से हैं, जिन्हें श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था संभालने के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई है।  रूढ़ि परंपरा के अनुसार होगी जंवारा स्थापना जीवराखन मरई ने बताया कि आदिवासी समाज की परंपरा के मुताबिक मंदिर में जवारा लगाया जाएगा. 11 अक्टूबर को शाम 5 बजे पूजा के साथ आयोजन की शुरुआत होगी. इसके बाद नवरात्र के दौरान श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर ज्योत-जवारा के दर्शन कर सकेंगे।  52 गांवों के देवी-देवताओं के नाम से प्रज्वलित होगी अखंड ज्योत मां अंगारमोती मंदिर ट्रस्ट की खास परंपरा 52 गांवों के देवी-देवताओं के नाम से प्रथम ज्योत प्रज्ज्वलित करने की है. यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. इसे अखंड ज्योत के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है।  श्रद्धालुओं के लिए खास इंतजाम बाहर से आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में डॉरमेट्री हॉल है, जहां एक साथ 40 से 45 लोग ठहर सकते हैं. अलग कमरे में रुकने की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए चार कमरे आरक्षित रखे गए हैं. मंदिर परिसर की साज सज्जा में भी इस साल बदलाव किए गए हैं।  बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधा मंदिर में बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखा गया है. मुख्य द्वार पर दो ट्राइसाइकिल रहेंगी और वालंटियर तैनात रहेंगे. ये वालंटियर श्रद्धालुओं को प्रवेश द्वार से माताजी के दर्शन कराएंगे और दर्शन के बाद वापस मुख्य द्वार तक छोड़ेंगे. मंदिर परिसर में बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था भी की गई है।  25 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाने की पहल मंदिर परिसर में बिजली की उपलब्धता बेहतर बनाने के उद्देश्य से ट्रस्ट ने 25 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट भी लगाया है।  नवरात्र के बाद घर पहुंचेगी माता की प्रसादी मन्नत की ज्योत प्रज्वलित कराने वाले श्रद्धालुओं के लिए ट्रस्ट ने एक विशेष व्यवस्था भी की है. नवरात्र समाप्त होने के बाद पंजीयन कराने वाले भक्तों के घर माता की तस्वीर और प्रसादी भेजने का प्रावधान है. ट्रस्ट अध्यक्ष जीवराखन मरई ने बताया कि तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं. अब प्रयास यही है कि नवरात्र में मां के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। 

सौ रुपए की बचत से लिखी सफलता की इबारत

कभी परिवार की सीमित आमदनी और तंगहाली के बीच घर का खर्च चलाना और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना मती अहिल्या निषाद के लिए एक बड़ी चुनौती थी। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम बिलाईगढ़ (अ) की रहने वाली अहिल्या का जीवन सामान्य गृहिणियों की तरह ही आर्थिक संघर्षों से घिरा हुआ था। लेकिन कहते हैं कि मजबूत इरादे और सही दिशा में उठाया गया एक छोटा कदम भी तकदीर बदल सकता है।      अहिल्या की यह प्रेरक कहानी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान योजना) और उनकी खुद की कड़ी मेहनत का एक बेहतरीन उदाहरण है। ​बिहान योजना और लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बदली तकदीर अहिल्या निषाद के जीवन में वास्तविक बदलाव 15 मार्च 2018 को आया, जब वे बिहान योजना के अंतर्गत लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। इस जुड़ाव के साथ ही उन्होंने अपनी आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए हर महीने मात्र 100 रुपए की बचत करने की शुरुआत की।        ​समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल वित्तीय अनुशासन का पाठ मिला, बल्कि आगे बढ़ने का एक नया मंच भी प्राप्त हुआ। समूह की मदद से उन्होंने बैंक से 1 लाख रुपए का ऋण प्राप्त किया और अपने गांव की मुख्य सड़क पर 'निषाद होटल' के नाम से नाश्ते की दुकान की शुरुआत की। ​आत्मनिर्भरता की नई उड़ान: 'लखपति दीदी' तक का सफर पति  किर्तीलाल निषाद के सहयोग और अपनी अटूट मेहनत के बल पर अहिल्या का यह व्यवसाय धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ने लगा। आज स्थिति यह है कि उनके होटल से प्रतिदिन लगभग 500 से 800 रुपए की आमदनी हो रही है, जिससे उनकी मासिक आय 15,000 से 24,000 रुपए तक पहुंच चुकी है।  ​इस नियमित आय ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया है, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य और बेहतर शिक्षा की राह को भी आसान बना दिया है। आज वे क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं और गर्व से 'लखपति दीदी' के रूप में पहचानी जाती हैं।मती अहिल्या निषाद कहती है कि ​मैं बिहान योजना को दिल से धन्यवाद देती हूं, जिसकी बदौलत आज मैं आत्मनिर्भर बन पाई हूं और अपने परिवार को एक बेहतर जीवन दे रही हूं। यह कहानी राज्य स्तर पर ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण, महिला स्व-सहायता समूहों की ताकत और 'बिहान' योजना के जरिए आजीविका संवर्धन की सफलता का एक जीवंत प्रमाण है।  

स्वास्थ्य सेवाओं का नया आयाम: सारंगढ़ की ‘अटल आरोग्य लैब’ बनी मरीजों का सहारा

​रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार की जनहितैषी स्वास्थ्य नीतियों और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य के शासकीय अस्पतालों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल की पहल से आम नागरिकों को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के जिला चिकित्सालय में संचालित 'अटल आरोग्य लैब' आम जनता और विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस लैब ने महज चार महीनों के भीतर स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित करते हुए 23 हजार से अधिक मरीजों की विभिन्न प्रकार की 86 हजार 975 पैथोलॉजी जांचें पूरी तरह निःशुल्क की हैं।  जिला प्रशासन के सतत प्रयासों से जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। जिला चिकित्सालय में यह लैब बेहतरीन सेवाएं दे रही है। अत्याधुनिक जांच मशीनों से सुसज्जित इस प्रयोगशाला में वर्तमान में 134 प्रकार की उच्चस्तरीय पैथोलॉजी जांच सुविधाएं एक ही छत के नीचे पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध हैं। पैथोलॉजिस्ट और प्रयोगशाला में कार्यरत चिकित्सा प्रयोगशाला तकनीशियनों व कर्मचारियों की समर्पित टीम की बदौलत ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को अब छोटी-छोटी जांचों के लिए अन्यत्र भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है।  ​इस व्यवस्था से मरीजों को निजी प्रयोगशालाओं में अपनी गाढ़ी कमाई खर्च करने से भारी राहत मिली है। चार माह की इस अल्पावधि में इतनी बड़ी संख्या में मरीजों की जांच होना इस बात का प्रमाण है कि जिला चिकित्सालय में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ बड़े पैमाने पर लोग उठा रहे हैं। राज्य शासन की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन का यह प्रयास ग्रामीण अंचल के जरूरतमंदों के लिए बेहद राहतकारी साबित हो रहा है।  ​सिविल सर्जन ने नागरिकों से अपील की है कि आवश्यक जांच के लिए निजी प्रयोगशालाओं में अधिक राशि खर्च करने के बजाय जिला चिकित्सालय की इस निःशुल्क अटल आरोग्य लैब का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। साथ ही, मरीजों को और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस लैब में शीघ्र ही माइक्रोबायोलॉजी (सूक्ष्मजीव विज्ञान) जांच की सुविधा भी निःशुल्क प्रारंभ करने की तैयारी है, जिससे विभिन्न प्रकार के संक्रमण और जटिल बीमारियों की पहचान में और अधिक सहायता मिल सकेगी।

सरकार प्रदेश के प्रत्येक नगर और गांव के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध – मंत्री टंक राम वर्मा

रायपुर सरकार द्वारा प्रदेश के प्रत्येक नगर और गाँव के सर्वांगीण विकास तथा बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और ऐतिहासिक पहल की गई है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री  टंक राम वर्मा के विशेष प्रयासों से बलौदाबाजार विधानसभा को बुनियादी सुविधाओं, सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर तथा शैक्षणिक ढाँचे को नई मजबूती प्रदान करने के लिए लगभग पौने पांच करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी गई है। इस निर्णय से क्षेत्र के ग्रामीणों, व्यापारियों और विद्यार्थियों के बीच भारी उत्साह की लहर दौड़ गई है। ​ 2 करोड़ 15.24 लाख रूपए के 42 नए कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति ग्रामीण क्षेत्रों के चहुंमुखी विकास, शिक्षा के स्तर को सुधारने और मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए पूरी सरकार तरह संकल्पित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन विकास कार्यों के धरातल पर उतरने से ग्रामीण अंचलों में नागरिकों को आधुनिक एवं बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, जिससे बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में सुगमता होगी और विभिन्न सार्वजनिक आयोजनों व आवश्यकताओं के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार हो सकेगा। वर्ष 2026-27 के लिए बलौदाबाजार और सिमगा विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु 2 करोड़ 15 लाख 24 हजार रुपये की अनुमानित लागत से 42 नए विकास कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम संस्कार और धार्मिक आयोजनों को सुगम बनाने के उद्देश्य से मुडियाडीह, झोंका, बिटकुली, खैरवारी, बुड़गहन, कसहीडीह, खैरवारडीह, करमनडीह, खैराटा, गोडखपरी, पौंसरी, भांठागांव, रसेड़ा, सोनपुर, चरौटी, अचानकपुर, ढाबाडीह और भालेसुर जैसे अनेक गांवों के मुक्तिधामों में शेड, अहाता तथा प्रतीक्षालय निर्माण के कार्य संपन्न कराए जाएंगे। इसके साथ ही, शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में बालिकाओं की स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए केशडबरी, हलवाई खपरी, चापा, पुरान, छुईहा, सेमराडीह, पारागांव, बिलाईडबरी, मोहभट्ठा, भैंसा, भोथाडीह, जागडा, सिकारी केशली और मगरवाय में बालिका शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा। शिक्षा के ढांचे को और अधिक मजबूत करने की दिशा में सिमगा विकासखंड के ग्राम मानिपुर (आमाकोनी), नेवधा और टेकारी की शासकीय प्राथमिक शालाओं में दो-दो अतिरिक्त कक्षों का निर्माण भी इस स्वीकृति का प्रमुख हिस्सा है। इस अवसर पर राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ग्रामीण अंचलों में नागरिकों को आधुनिक सुविधाएं देने और शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। ​ 2.72 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की प्राविधिक स्वीकृति इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए तिल्दा-नेवरा विकासखंड के नगरीय व ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति देने के लिए 2.72 करोड़ रुपए से अधिक के प्रमुख विकास कार्यों की प्राविधिक स्वीकृति दी गई है। इसके अंतर्गत क्षेत्र के यातायात को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय चौक से साहू भवन तक रोड एवं डिवाइडर निर्माण के लिए 101.68 लाख रुपए तथा मंगलम पेट्रोल पंप से पं. दीनदयाल उपाध्याय चौक होते हुए ओवर ब्रिज तक रोड एवं डिवाइडर निर्माण के लिए 95.79 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न ग्रामों के चौतरफा विकास के लिए ग्राम तरपोंगी के बाजार चौक में नाली निर्माण के लिए 10 लाख रुपए, ग्राम टंडवा, ग्राम नकटी-तुलसी के महामाया मंदिर तथा ग्राम तुलसी-नेवरा के बालाजी मंदिर तक सीसी रोड निर्माण के लिए विभिन्न स्वीकृतियां प्रदान की गई हैं। शैक्षणिक और सामाजिक परिसरों के रखरखाव हेतु ग्राम मोहदी और ग्राम जोता की प्राथमिक शालाओं, ग्राम सरारीडीह के गौधाम तथा ग्राम तुलसी-मानपुर एवं खपरीकला व ग्राम सिरवे के पीएम  स्कूल में प्रार्थना शेड और अहाता निर्माण के कार्य भी शामिल हैं। ​गुणवत्ता और पारदर्शिता पर रहेगा विशेष ज़ोर राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की बात कहते हुए बताया कि ये सभी कार्य 'छत्तीसगढ़ वर्क्स डिपार्टमेंट मैनुअल' के नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएंगे। आधुनिक सड़कों और डिवाइडरों के निर्माण से जहां यातायात सुगम होगा और व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा, वहीं विद्यालयों में प्रार्थना शेड और बाउंड्री वॉल निर्माण से बच्चों को धूप और बारिश से सुरक्षा मिलेगी, जिससे उन्हें एक सुरक्षित व व्यवस्थित शैक्षणिक वातावरण प्राप्त हो सकेगा। शासन की इस सौगात के लिए बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र के वासियों ने राज्य सरकार और मंत्री  टंक राम वर्मा का सहृदय आभार व्यक्त किया है।

वन क्षेत्रों की 18 सड़कों के उन्नयन की अनुशंसा, गोमर्डा अभयारण्य में स्थानांतरित किए जाएंगे 50 काले हिरण

रायपुर  छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण और वनांचल के ग्रामीणों की सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। वन मंत्री  केदार कश्यप की अध्यक्षता में शनिवार को नवा रायपुर स्थित उनके निवास कार्यालय में राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की पहली बैठक हुई। इसमें अंबिकापुर के संजय पार्क में आधुनिक वन्यजीव ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर स्थापित करने को मंजूरी दी गई। साथ ही संरक्षित वन क्षेत्रों की 18 ग्रामीण सड़कों के उन्नयन संबंधी प्रस्ताव भारत सरकार को भेजने की अनुशंसा की गई। वन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण के साथ वनांचल के ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम, घायल वन्यप्राणियों के त्वरित उपचार और वन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है।  अंबिकापुर में प्रस्तावित उपचार केंद्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष और दुर्घटनाओं में घायल वन्यप्राणियों के त्वरित बचाव, प्राथमिक उपचार और अल्पकालिक देखरेख की सुविधा उपलब्ध होगी। वहीं, पीएम जनमन योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत भोरमदेव अभयारण्य की 3, इंद्रावती टाइगर रिजर्व की 14 और जशपुर के बादलखोल अभयारण्य की एक सड़क के उन्नयन की अनुशंसा की गई। इन सड़कों के उन्नयन से बैगा सहित अन्य विशेष पिछड़ी जनजातीय समुदायों की बस्तियों तक शिक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं की पहुंच बेहतर हो सकेगी। बैठक में जनभागीदारी के आधार पर चयनित ‘ऑरेंज ओकलीफ’ को छत्तीसगढ़ की पहली राजकीय तितली घोषित करने के प्रस्ताव का परीक्षण पूर्ण कर आगे की कार्यवाही करने की मंजूरी दी गई। बारनवापारा अभयारण्य में काले हिरणों के सफल संरक्षण के बाद गोमर्डा अभयारण्य में 50 काले हिरणों के स्थानांतरण को भी स्वीकृति दी गई।  समिति ने हाथियों एवं अन्य वन्यजीवों से फसल क्षति के मुआवजे की दरों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जिलावार एवं फसलवार बीमित राशि के आधार पर अद्यतन करने के प्रस्ताव पर आगे विचार करने का निर्णय लिया। हाथी प्रभावित क्षेत्रों में कच्चे मकानों को पक्का करने के लिए विशेष मुख्यमंत्री आवास योजना के प्रस्ताव को उच्चस्तरीय बैठक में विचारार्थ रखने के निर्देश दिए गए। बैठक में विधायक  धर्मजीत सिंह,  गोमती साय और  चैतराम अटामी, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव  अमरनाथ प्रसाद, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक  ओ.पी. यादव सहित समिति के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव की मौजूदगी में चार नगर निगमों और चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के बीच होगा करार

रायपुर छत्तीसगढ़ के चार बड़े शहरों में 240 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए 11 अक्टूबर को कंसेशन एग्रीमेंट किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव की मौजूदगी में रायपुर, बिलासपुर, भिलाई और कोरबा नगर निगम का चयनित एजेंसी चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के साथ कंसेशन एग्रीमेंट होगा। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत होने वाले इस समझौते से चारों शहरों में आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन सेवा शुरू करने का रास्ता साफ होगा।  उप मुख्यमंत्री  अरुण साव के नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में आयोजित कंसेशन एग्रीमेंट कार्यक्रम में प्रदेश के आठ नगरीय निकायों के महापौर और आयुक्त शामिल होंगे। इनमें रायपुर की महापौर मती मीनल चौबे, बिलासपुर की महापौर मती पूजा विधानी, कोरबा की महापौर मती संजू देवी राजपूत, दुर्ग की महापौर मती अलका बाघमार, रिसाली की महापौर मती शशि सिन्हा, भिलाई के महापौर  नीरज पाल, बीरगांव के महापौर  नंदलाल देवांगन तथा भिलाई-चरोदा के महापौर  निर्मल कोसरे शामिल हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, संचालक  नीलेश क्षीरसागर और सूडा के सीईओ  सुमीत अग्रवाल भी इस दौरान मौजूद रहेंगे। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने बताया कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के पहले चरण में प्रदेश के चार नगर निगमों में कुल 240 इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने की योजना है। इनमें सबसे अधिक 100 बसें रायपुर में चलेंगी। दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर को 50-50 तथा कोरबा को 40 बसें मिलेंगी। बसों के संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां अंतिम चरण में हैं। बिलासपुर और भिलाई में 1 नवम्बर 2026 तक प्रतीकात्मक रूप से 20-20 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रमुख सचिव  बोरा ने बताया कि ई-बसों में यात्रियों की सुविधा के साथ सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। बसें आधुनिक और हाईटेक सुविधाओं से लैस होंगी। यात्रियों को मोबाइल स्कैनर के माध्यम से किराए का भुगतान करने और ऑनलाइन टिकट लेने की सुविधा मिलेगी। सुरक्षा के लिए प्रत्येक बस में छह कैमरे लगाए जाएंगे। यात्री मोबाइल एप से बसों के रूट की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे।  बोरा ने बताया कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना का उद्देश्य शहरी सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ, सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल बनाना है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने, वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलेगी। इससे नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के साथ शहरों की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के प्रयासों को भी गति मिलेगी।  

​लोकतंत्र के महापर्व में युवाओं की भागीदारी: शासकीय महाविद्यालय मरवाही में स्वीप व एनएसएस का मतदाता जागरूकता अभियान

रायपुर वीरांगना रानी दुर्गावती शासकीय महाविद्यालय मरवाही में आज मतदाता जागरूकता अभियान के तहत एक विशेष एवं प्रभावी कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला संगठक राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) एवं स्वीप (SVEEP) के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं को लोकतंत्र में मतदान के महत्त्व से अवगत कराना और युवाओं को मतदाता सूची में पंजीकृत करना था। ​स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन की दी गई जानकारी कार्यक्रम के दौरान उपस्थित छात्र-छात्राओं को भारतीय निर्वाचन प्रणाली, मतदान के अधिकार तथा "स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी निर्वाचन" की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। वक्ताओं ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि एक सशक्त और समृद्ध लोकतंत्र की नींव युवाओं के जागरूक हाथों में होती है। इसलिए प्रत्येक योग्य नागरिक को बिना किसी प्रलोभन या दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। ​18 वर्ष पूर्ण कर चुके 25 छात्र-छात्राओं का कराया गया ऑन-द-स्पॉट ऑनलाइन पंजीयन  ​कार्यक्रम की सबसे मुख्य विशेषता नवीन मतदाताओं का त्वरित पंजीयन रहा। ऐसे छात्र-छात्राएं जिन्होंने 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है, उन्हें 'वोटर हेल्पलाइन ऐप' तथा 'एनवीएसपी' पोर्टल के माध्यम से मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की संपूर्ण ऑनलाइन प्रक्रिया प्रयोगात्मक रूप से समझाई गई। जागरूकता के इस अभियान का तात्कालिक असर देखने को मिला, जहाँ कार्यक्रम के दौरान ही 25 पात्र छात्र-छात्राओं के मतदाता सूची में नाम जोड़ने हेतु ऑनलाइन आवेदन सफलता पूर्वक दर्ज कराए गए। नोडल अधिकारी (स्वीप) एवं जिला संगठक, राष्ट्रीय सेवा योजना ने कहा कि युवा वर्ग लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है। 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके प्रत्येक विद्यार्थी को मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराकर देश के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने में अपनी भागीदारी निभानी चाहिए।     ​युवाओं में दिखा भारी उत्साह  ​कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकों, एनएसएस स्वयंसेवकों एवं भारी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। युवाओं ने न केवल स्वयं पंजीयन कराने का संकल्प लिया, बल्कि अपने-अपने गांवों और आसपास के क्षेत्रों में भी लोगों को मतदान के प्रति जागरूक करने का जिम्मा उठाने की बात कही।

नया छत्तीसगढ़, नई उम्मीदें: पर्यटन से गांवों की तस्वीर बदलने वाले नायकों की अनकही कहानी

रायपुर  छत्तीसगढ़ उत्तर से दक्षिण तक नैसर्गिक विरासत की अमूल्य धरा है, जहां नदियां, पहाड़, घने जंगल, जलप्रपात, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और जनजातीय परंपराएं छत्तीसगढ़ को विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य दुनिया को छत्तीसगढ़ की वास्तविक सुंदरता, सांस्कृतिक समृद्धि और प्राकृतिक विविधता से परिचित कराना है। छत्तीसगढ़ का बस्तर, पर्यटन के नक्शे पर अपनी पहचान, संस्कृति और प्रकृति की अनुपम छटा वाले पर्यटन क्षेत्र के रूप में जाना जा रहा है। वास्तव में बस्तर का वन क्षेत्र बेहद निराला है। प्रकृति की हरियाली और स्वच्छता पर्यटकों को आकर्षित करता है। धीरे-धीरे बस्तर न केवल विकास की धारा से जुड़ रहा है बल्कि पयर्टन के हिसाब से भी तेजी से बदल रहा है। यहां का खूबसूरत इलाका अपनी अनोखी आदिवासी संस्कृति, घने जंगलों की छटा सबका ध्यान खींच रहा है। साथ ही, यहां के लोगों का भावपूर्ण और अतिथि सत्कार भी दुनिया भर के पर्यटकों को लुभा रहा है। जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए ‘छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति’ तैयार  छत्तीसगढ़ अब अपनी माटी की खुशबू, समृद्ध जनजातीय परंपराओं और गांवों के नैसर्गिक सौंदर्य के दम पर देश-दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर छाने को तैयार है। राज्य सरकार ने पर्यटन के विकास के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने के लिए नई औद्योगिक नीति (2024-2030) में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया है। साथ ही जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए ‘छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति’ तैयार की है। इसी कड़ी में अब ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ की शुरुआत की गई है। इन तीनों निर्णयों से गांवों में रोजगार, आजीविका और सांस्कृतिक संरक्षण का नया अध्याय शुरू होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार का यह त्रिआयामी मॉडल पर्यटन को स्थानीय लोगों के आर्थिक सशक्तिकरण की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत करेगा। विश्व प्रसिद्ध बस्तर का दशहरा  बारिश का मौसम बीतने के बाद से ही यहां हरे-भरे जंगल, पहाड़ और उनके उफनते पर्यटकों का मन मोह रहे हैं। इसलिए आज की तारीख में बस्तर भी देश के बेहतरीन पर्यटन स्थलों में एक साबित हो रहा है। हालांकि बस्तर का दशहरा बहुत पहले से प्रसिद्ध है, 75 दिनों तक चलने वाले बस्तर के दशहरा में कुछ खास होने वाला है, लेकिन हाल के दिनों में इस अवसर पर जुटने वाले सैलानियों की संख्या में खासा इजाफा दर्ज किया गया है। इस वर्ष भी यहां का दशहरा देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। नवरात्रि और दशहरा के अलावा यहां दीपावली पर भी दुनिया भर से भारी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं। बस्तर के सहज जीवन से वैश्विक पहचान तक बस्तर के बालक ‘चेन्दरू मंडावी’ की बाघ ‘टेंबू’ के साथ दोस्ती ने कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ के सहज ग्रामीण जीवन का डंका बजाया था।उसी नाम से राज्य सरकार ने ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ की शुरुआत की है। इसके लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार नियम 2025’ लागू किया गया हैजो पूरे छत्तीसगढ़ में प्रभावी होगा। इस पुरस्कार के तहत ग्रामीण पर्यटन, लोककला, हस्तशिल्प और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण में लगे जमीनी नायकों या संस्थाओं को 1 लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यीय ज्यूरी इसका चयन करेगी और विजेता को राज्योत्सव के मंच पर सम्मानित कर उन पर एक सचित्र स्मारिका जारी की जाएगी। बस्तर के 'टाइगर बॉय' के नाम से मशहूर चेन्दरू मंडावी की स्मृति में ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार की शुरुआत  छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 'चेन्दरू' राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार की शुरुआत की गई है। यह पुरस्कार बस्तर के 'टाइगर बॉय' के नाम से मशहूर चेन्दरू मंडावी की स्मृति में शुरू किया गया है, जिन्होंने स्वीडिश फिल्म 'जंगल सागा' से अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की थी। गांवों की संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय जीवनशैली को पर्यटन से जोड़ना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना। ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ उन लोगों और संस्थाओं को पहचान देने का प्रयास है, जो जमीनी स्तर पर पर्यटन के माध्यम से अपने गांव और क्षेत्र की तस्वीर बदल रहे हैं।  होमस्टे से पर्यटक गांव की जीवनशैली जानेंगे  पुरस्कार और प्रोत्साहन के साथ-साथ राज्य सरकार की होमस्टे नीति इस पूरे ढांचे को व्यावहारिक धरातल प्रदान कर रही है। अब पर्यटक महंगे होटलों की बजाय गांवों में पारंपरिक घरों का अनुभव कर सकेंगे। पर्यटक गांव के ही घरों में रुकेंगे। होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प, लोककला, लोकसंस्कृति, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर और समुदाय आधारित पर्यटन को प्रोत्साहित कर छत्तीसगढ़ देश में ग्रामीण पर्यटन का एक विशिष्ट मॉडल बन सकता है। पर्यटकों को ग्रामीणों के घरों में ठहरने, उनका पारंपरिक भोजन करने, चारपाई का उपयोग करने, खेत-खलिहान घूमने और कुएं का पानी आदि देखने-अनुभव करने का अवसर मिलता है। होमस्टे के जरिए पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा  होमस्टे नीति 2025-30 के माध्यम से ग्रामीण, जनजातीय और पर्यटन क्षेत्रों के परिवारों को अपने  घरों को पर्यटन सुविधा में बदलकर अतिरिक्त आय और स्वरोजगार का अवसर मिलेगा। वहीं, पर्यटकों को स्थानीय खान-पान, कला, परंपरा, जनजातीय संस्कृति और जीवनशैली से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे कम प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को भी नई पहचान मिलेगी। राज्य सरकार द्वारा नए होमस्टे की स्थापना तथा मौजूदा मकानों के उन्नयन के लिए वित्तीय सहायता के साथ संचालकों को आतिथ्य, स्वच्छता और व्यवसाय संचालन का प्रशिक्षण देने का प्रावधान भी इस नीति में किया गया है। इससे मिलने वाला पैसा सीधे ग्रामीण परिवार, महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों की जेब में जाएगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा मिलेगा। इस नीति से बस्तर और सरगुजा के अंचलों से लेकर मैदानी गांवों तक, होमस्टे के जरिए पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। छत्तीसगढ़ में पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर समृद्धि के नए द्वार खोले गए छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया है। छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति के तहत पर्यटन, मनोरंजन और अन्य सामाजिक सेवा सेक्टर को विशेष रूप से शामिल किया गया है। पर्यटन परियोजनाओं को सामान्य उद्योगों की तरह ही न्यूनतम पूंजी निवेश पर विभिन्न प्रकार की रियायतें और सुविधाएं दी जा रही … Read more

‘निगम के अफसर रोज सुबह फील्ड में उतरें, अधूरे निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश’

रायपुर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने भिलाई नगर निगम के अधिकारियों को नागरिकों को समय पर सेवाएं देने और शिकायतों का त्वरित निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नागरिक कस्टमर हैं, इसलिए सेवाओं में देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को रोज सुबह फील्ड निरीक्षण करने और दीपावली से पहले शहर को कचरामुक्त बनाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने 15वें वित्त आयोग के तहत चल रहे अधूरे निर्माण कार्यों की धीमी गति पर नाराजगी जताई। प्रमुख सचिव  बोरा ने नवा रायपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित समीक्षा बैठक में भिलाई नगर निगम में लंबित कार्यों और नागरिक सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कार्यप्रणाली में सुधार लाने और नागरिकों के प्रति संवेदनशील व्यवहार करने को कहा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक  नीलेश क्षीरसागर, सूडा के सीईओ  सुमीत अग्रवाल और भिलाई नगर निगम की आयुक्त सु सुरुचि सिंह भी बैठक में मौजूद थीं। 'रोज सुबह निरीक्षण कर भेजें रिपोर्ट' प्रमुख सचिव ने जोन कमिश्नरों, उपायुक्तों और अपर आयुक्तों को प्रतिदिन सुबह मॉर्निंग विजिट करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी अपने क्षेत्रों की व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर कमियों और कार्यों की प्रगति की रिपोर्ट निर्धारित ग्रुप में साझा करें, ताकि समय पर सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके। 'दीपावली से पहले शहर को करें कचरामुक्त' स्वच्छता व्यवस्था की समीक्षा के दौरान बोरा ने सभी जोन कमिश्नरों को दीपावली से पहले भिलाई को कचरामुक्त बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत कचरा प्रबंधन, प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना और संचालन से जुड़े कार्यों में तेजी लाने को कहा। उन्होंने कचरे के उचित प्रसंस्करण और स्वच्छता व्यवस्था की लगातार निगरानी पर भी जोर दिया। 'अधूरे निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश'  बोरा ने 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों की धीमी प्रगति पर प्रमुख नाराजगी जताई। उन्होंने लंबित निर्माण कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने, तकनीकी समस्याओं का तत्काल निराकरण करने और नियमित निगरानी के जरिए कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराने को कहा। 'आवास निर्माण में बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों की सुविधाओं का ध्यान रखें' प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 की समीक्षा के दौरान  बोरा ने आवास निर्माण में बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगजनों और बच्चों की जरूरतों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने आवासों को सुरक्षित, सुविधाजनक और सभी के अनुकूल बनाने तथा पात्र हितग्राहियों के लंबित प्रकरणों का जल्द निराकरण करने को कहा। उन्होंने ई-बस सेवा योजना शुरू करने की तैयारियों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। जल संरक्षण और राजस्व वसूली पर जोर प्रमुख सचिव  बोरा ने बैठक में जल प्रदाय, जल संरक्षण, मिशन अमृत और तालाबों के रखरखाव से जुड़े कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने जल स्रोतों के संरक्षण और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  बोरा ने संपत्ति कर वसूली, ग्रीन बॉन्ड, बिजली बिलों और अन्य वित्तीय विषयों की समीक्षा करते हुए राजस्व संग्रहण सुधारने को कहा। ऑनलाइन नागरिक सेवाओं, ई-ऑफिस और डिजिटल व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया। 'निदान-1100 की शिकायतों का समय पर करें निराकरण' प्रमुख सचिव ने निदान-1100 के माध्यम से प्राप्त शिकायतों की नियमित निगरानी और निर्धारित समय-सीमा में निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को आपसी समन्वय से काम करने और लंबित प्रकरणों का शीघ्र निपटारा करने को कहा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर संचालक  पुलक भट्टाचार्य, संयुक्त संचालक  मिथिलेश अवस्थी और मुख्य अभियंता  राजेश शर्मा सहित नगरीय प्रशासन विभाग, सूडा और भिलाई नगर निगम के अधिकारी तथा अभियंता भी बैठक में उपस्थित थे।