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भिलाईनगर में मासूम पर बरसे लात-घूंसे, वीडियो सामने आते ही 6 नाबालिगों पर कार्रवाई

भिलाई नगर. नेवई थाना अंतर्गत कुछ नाबालिगों ने मिलकर 7 वर्ष के बच्चे की बेरहमी से पिटाई कर दी। पहले उसे नग्न कराया, फिर डांस करवाया। इसके बाद उससे ही अश्लील हरकतें कराई। बाद में लात- घूसों और डंडों से उसे जमकर पीटा। पुलिस के अनुसार यह वीडियो 7 दिन पुराना है, जो अब वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक नाबालिग गला दबाने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है, जबकि बाकी नाबालिग लात-घूसों और डंडों से उसे मारते नजर आ रहे हैं। पूरी घटना का वीडियो भी उन्होंने ही बनाकर वायरल किया है। सभी नाबालिग बच्चे एक ही गांव के रहने वाले हैं और एक-दूसरे को अच्छे से जानते हैं। फिलहाल मामले में पुलिस ने 6 नाबालिगों को हिरासत में लेकर बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया है।

दुर्ग को मिलेगा आधुनिक बहुद्देशीय स्टेडियम, निर्माण कार्य शुरू; जमीन का सीमांकन पूरा

दुर्ग. दुर्ग ब्लॉक के खेलगांव खम्हरिया में 15 करोड़ की लागत से संभागीय स्टेडियम निर्माण होगा। जिसकी स्वीकृति सरकार की ओर से की गई है। प्रथम किस्त 4 करोड़ लोकनिर्माण विभाग को मिल चुका है। स्टेडियम निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए राजस्व एवं लोक निर्माण अधिकारियों की उपस्थिति में स्टेडियम के सीमा रेखा का सीमांकन कार्य की आरआई व पटवारी के माध्यम से किया गया। ज्ञातव्य हो कि ग्राम खम्हरिया में 16 एकड़ शासकीय भूमि खेल अधोसंरचना निर्माण हेतु जिला खेल एवं युवा कल्याण विभाग दुर्ग के नाम से आवंटित किया जा चुका है। स्टेडियम निर्माण के अंतर्गत 400 मीटर का एथलेटिक्स सिंथेटिक टैंक विथ फुटबाल एवं सिटिंग गैलरी भी शामिल हैं। इसके साथ ही साथ 2 करोड़ की लागत से बैडमिंटन इंडोर स्टेडियम एवं 80 लाख का प्रशासनिक भवन का निर्माण होगा। चूंकि खेलगांव खम्हरिया दुर्ग भिलाई एवं रिसाली निगम से मात्र 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर है जिससे दुर्ग ग्रामीण, दुर्ग शहर भिलाई, रिसाली निगम सहित आस पास गांव के खिलाड़ी एथलेटिक्स फुटबाल एवं बैडमिंटन के खिलाड़ियों को इसका लाभ मिलेगा। संभाग का यह पहला स्टेडियम होगा। राजस्व विभाग से आरआई उतई सर्किल घनश्याम चंद्राकर, पटवारी विवेक देवांगन, लोकनिर्माण विभाग से सिविल इंजीनियर वाय के सोनवानी, सुष्मिता चंद्राकर सरपंच ग्राम पंचायत खम्हरिया श्रीमती दुलारी देशलहरे, हरीश कुर्रे (पंच) आशीष चंद्राकर एवं ग्रामवासियों में अनिल चतुर्वेदी, बालकदास, बी. आर. साहू सहित ग्रामवासियों की उपस्थिति में सीमांकन कार्य की प्रक्रिया शुरू हुई। स्टेडियम की जमीन का चिन्हांकन कर रहे सरकारी अधिकारियों को जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले ग्रामीणों व महिलाओं ने पत्थर से मारने की भी धमकी भी दे रहे थे। जिसके कारण अगला जमीन चिन्हांकन का कार्य पुलिस फोर्स की उपस्थित में होगा, क्योंकि इस स्टेडियम निर्माण को लेकर कई बार वाद विवाद व मारपीट जैसी बड़ी घटनाएं घट चुकी है।

छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस को जल्द मिलेगा नया मुखिया, प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में कई चेहरे चर्चा में

रायपुर  छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के नए मुखिया की खोज तेज हो गई है, जिसे लेकर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में दावेदारों के साक्षात्कार का दौर शुरू हो चुका है. अलग-अलग जिलों से आए 35 से अधिक युवा नेता इस रेस में शामिल होने के लिए देश की राजधानी पहुंचे हैं. इस इंटरव्यू प्रक्रिया के संपन्न होने के बाद चुनावी मैदान में उतरने वाले अंतिम प्रत्याशियों की सूची तय की जाएगी, जिसके बाद ही मतदान की रूपरेखा स्पष्ट होगी।  इस बार मुकाबले को केवल दो ध्रुवों तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि संगठन में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बिठाने के लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला और अल्पसंख्यक वर्ग के चेहरों को भी पूरा मौका दिया जा रहा है, जिससे अंतिम चरण में मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है।  इस पूरे चुनावी घमासान के बीच भिलाई नगर के विधायक देवेंद्र यादव और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के गुटों के बीच खींचतान की खबरें भी हवाओं में हैं।  हालांकि, इन अटकलों को खारिज करते हुए देवेंद्र यादव ने साफ किया कि वरिष्ठ नेता हमेशा युवाओं को रास्ता दिखाते हैं और वे चुनाव में सीधे तौर पर हस्तक्षेप नहीं करते।  उन्होंने इसे गुटबाजी के बजाय एक स्वस्थ पारिवारिक प्रतिस्पर्धा करार दिया और खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि वे भी एनएसयूआई की छात्र राजनीति से निकलकर ही आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं. उन्होंने सभी युवा कार्यकर्ताओं से आपसी मतभेद भुलाकर सदस्यता अभियान को गति देने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की अपील की है।  राजनीतिक गलियारों में इस समय दो नामों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चाएं गर्म हैं, जिनमें पहला नाम पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी माने जाने वाले विनयशील का है।  विनयशील के पक्ष में सबसे मजबूत कड़ी यह है कि उन्होंने वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह क्षेत्र कुनकुरी की नगर पंचायत में जीत दर्ज की थी, जिसे उनकी मजबूत सांगठनिक पकड़ के तौर पर देखा जा रहा है।  वहीं दूसरी ओर, विधायक देवेंद्र यादव के खेमे से बलौदाबाजार के शैलेंद्र बंजारे का नाम प्रमुखता से उछाला जा रहा है. शैलेंद्र को यादव का बेहद विश्वसनीय सिपहसालार माना जाता है और उनके समर्थकों में उनकी उम्मीदवारी को लेकर किसी प्रकार का संशय नहीं है. अब देखना यह होगा कि शीर्ष नेतृत्व अंततः किन दो-तीन नामों पर अपनी अंतिम मुहर लगाता है।   

भीषण गर्मी में रेलवे का खास इंतजाम, प्लेटफॉर्म पर फोगर-स्प्रिंकलर से मिल रही ठंडी फुहार

बिलासपुर  भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच यात्रियों को राहत देने के लिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने बिलासपुर जंक्शन पर विशेष व्यवस्था की है। स्टेशन के प्लेटफॉर्मों पर रूफ-टॉप वॉटर स्प्रिंकलर और हाई-प्रेशर मिस्टिंग सिस्टम (फोगर) लगाए गए हैं, जिनसे लगातार पानी की बारीक फुहारें छोड़ी जा रही हैं। इससे प्लेटफॉर्म का तापमान कम हो रहा है और यात्रियों को गर्मी से काफी राहत मिल रही है। बिलासपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 सहित अन्य प्रमुख प्लेटफॉर्मों की छतों पर पाइपलाइन के जरिए मिस्टिंग सिस्टम स्थापित किया गया है। फोगर से निकलने वाली पानी की बेहद महीन बूंदें आसपास के गर्म वातावरण को ठंडा करती हैं, जिससे यात्रियों को चिलचिलाती धूप के बीच भी अपेक्षाकृत ठंडक का एहसास होता है। गर्मी से परेशान यात्रियों ने रेलवे की इस पहल की सराहना की है। यात्री प्लेटफॉर्म पर पड़ रही फुहारों का आनंद लेते दिखाई दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह व्यवस्था गर्मी के दौरान सफर को अधिक आरामदायक बना रही है। रेलवे ने सिर्फ फोगर सिस्टम ही नहीं लगाया है, बल्कि यात्रियों के लिए ठंडे पेयजल और शरबत की व्यवस्था भी की है। अधिकारियों के अनुसार गर्मी के मौसम में यात्रियों को अधिकतम राहत पहुंचाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। प्रदेश के इन रेलवे स्टेशनों पर भी व्यवस्था लागू दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा बिलासपुर के अलावा रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और गोंदिया रेलवे स्टेशनों पर भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की गई है। रेलवे का मानना है कि बढ़ते तापमान और हीटवेव के प्रभाव को देखते हुए इस तरह की सुविधाएं यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही हैं।     बिलासपुर स्टेशन पर यात्रियों के लिए किए गए विशेष इंतजाम     प्लेटफॉर्म पर रूफ-टॉप वॉटर स्प्रिंकलर सिस्टम लगाया गया।     हाई-प्रेशर मिस्टिंग और फोगर सिस्टम से ठंडी फुहारें छोड़ी जा रही हैं।     यात्रियों के लिए ठंडे पानी और शरबत की व्यवस्था।     हीटवेव के दौरान प्लेटफॉर्म का तापमान कम करने का प्रयास।     सोशल मीडिया पर रेलवे की इस पहल की जमकर तारीफ। भीषण गर्मी में काफी मिल रही राहत सोशल मीडिया पर भी बिलासपुर स्टेशन के फोगर सिस्टम के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। लोग इसे रेलवे का यात्री हित में उठाया गया अभिनव और सराहनीय कदम बता रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच प्लेटफॉर्म पर मिल रही यह ठंडी फुहारें यात्रियों के लिए किसी राहत भरी बारिश से कम नहीं हैं। प्रमुख प्लेटफॉर्मो पर लगाए गए हैं हाई प्रेशर मिस्ट शावर रेलवे अधिकारियों के अनुसार बिलासपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 समेत प्रमुख प्लेटफॉर्मों की छतों पर पाइपलाइन बिछाकर हाई-प्रेशर मिस्ट शावर लगाए गए हैं। इनसे निकलने वाली पानी की बेहद बारीक बूंदें आसपास के गर्म वातावरण को तेजी से ठंडा करती हैं, जिससे प्लेटफॉर्म पर तापमान में उल्लेखनीय कमी महसूस होती है। गौरतलब है कि इस बार देश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार चल रहा है। ऐसे में रेलवे द्वारा अपनाया गया यह ‘कूलिंग मॉडल’ यात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस अनोखी व्यवस्था के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं और लोग इसे रेलवे का स्मार्ट व यात्री हितैषी कदम बता रहे हैं।

केंद्र सरकार ने परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में किया अधिसूचित

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को केंद्र सरकार द्वारा विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किए जाने पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय जशपुर सहित पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ के विकास के लिए ऐतिहासिक साबित होगा। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से जशपुर के विकास में एक नया अध्याय जुड़ रहा है। लंबे समय से रेल संपर्क की प्रतीक्षा कर रहे जशपुर जिले को इस परियोजना के माध्यम से पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इससे क्षेत्र की जनता को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलने के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों, पर्यटन संभावनाओं और सांस्कृतिक वैभव से समृद्ध जशपुर इस रेल परियोजना के माध्यम से देश के प्रमुख आर्थिक एवं औद्योगिक केंद्रों से बेहतर रूप से जुड़ सकेगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, व्यापार, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर सृजित होंगे तथा वनांचल क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के विकास को निरंतर प्राथमिकता दी जा रही है। रेल, सड़क, ऊर्जा और अन्य आधारभूत अधोसंरचना परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना इसी संकल्प का सशक्त उदाहरण है। मुख्यमंत्री  साय ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव का समस्त प्रदेशवासियों की ओर से हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना जशपुर और आसपास के क्षेत्रों की प्रगति, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला सिद्ध होगी।

नैनो उर्वरकों से बढ़ रहा उत्पादन, मिट्टी संरक्षण को भी मिल रही मजबूती

रायपुर कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों के बढ़ते उपयोग से किसानों को उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिल रही है। नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरक किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रहे हैं, जो कम मात्रा में अधिक दक्षता के साथ फसलों को आवश्यक पोषण उपलब्ध करा रहे हैं। सरगुजा जिले के ग्राम भगवानपुर के प्रगतिशील किसान  सत्यनारायण ने नैनो उर्वरकों के उपयोग से प्राप्त अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों से वे अपनी लगभग तीन एकड़ कृषि भूमि में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का उपयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार इस तकनीक से फसलों की वृद्धि बेहतर हुई है तथा उत्पादन में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं।  सत्यनारायण ने बताया कि नैनो उर्वरकों का उपयोग पर्णीय छिड़काव (फोलियर स्प्रे) के रूप में किया जाता है, जिससे पोषक तत्व सीधे पौधों तक पहुंचते हैं और उनका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होता है। इससे फसलों को आवश्यक पोषण समय पर प्राप्त होता है तथा उत्पादन क्षमता में वृद्धि देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से समय के साथ मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जबकि नैनो उर्वरकों के उपयोग से पोषक तत्वों का अनावश्यक अपव्यय कम होता है। इससे मिट्टी की उर्वरता और उत्पादक क्षमता को बनाए रखने में सहायता मिलती है, जो टिकाऊ कृषि के लिए महत्वपूर्ण है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो उर्वरकों की उपयोग दक्षता अधिक होने के कारण किसानों को कम मात्रा में बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। इससे खेती की लागत में कमी आने के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभाव भी कम होता है। यही कारण है कि प्रदेश में किसानों का रुझान नैनो उर्वरकों की ओर लगातार बढ़ रहा है। राज्य सरकार और कृषि विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण, प्रदर्शन और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। किसानों को नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी देकर उन्हें कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।  सत्यनारायण ने अन्य किसानों से भी नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी अपनाने की अपील करते हुए कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग कर किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के साथ-साथ अपनी कृषि भूमि की उर्वरता को भी लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं। इससे खेती अधिक लाभकारी, टिकाऊ और भविष्य के लिए सुरक्षित बन सकती है।  

देवपुर में औषधीय वनस्पतियों पर एक दिवसीय बॉटनाइजेशन कार्यशाला

रायपुर बलौदाबाजार- भाटापारा जिले के वनमंडल बलौदाबाजार के देवपुर परिक्षेत्र में शुक्रवार को औषधीय वनस्पतियों की पहचान और महत्व पर केंद्रित एक दिवसीय बॉटनाइजेशन कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पांडेय के मार्गदर्शन में आयोजित की गई।             कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वन क्षेत्र में उपलब्ध औषधीय पौधों की पहचान कराना, छाल, पत्ती, तना, जड़, फल एवं फूल के आधार पर वर्गीकरण सिखाना तथा उनके औषधीय महत्व की जानकारी देना था। 80 से अधिक प्रजातियों की पहचान           कार्यक्रम में अर्जुन, आंवला, बहेड़ा, बेल, काली मुसली, हाथीपांव, दूधी, भुईनीम, सतावर, खरहर, ठेलका, नरनारी, गरुड़ सहित लगभग 80 औषधीय वनस्पति प्रजातियों की पहचान कराई गई। विशेषज्ञों ने इन प्रजातियों के पर्यावरणीय व्यवहार, संरक्षण की आवश्यकता और फल, फूल, पत्ती, जड़ आदि के माध्यम से विभिन्न रोगों के उपचार में उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। स्वस्थ, निरोग और दीर्घायु जीवनशैली के लिए प्रकृति आधारित ज्ञान के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। वैद्यों से लेकर छात्रों तक की भागीदारी               कार्यशाला में वनमंडल बलौदाबाजार, वनमंडल कवर्धा और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही पारंपरिक वनौषधीय ज्ञान रखने वाले वैद्यगण, वन प्रबंधन समिति के सदस्य, बारनवापारा के गाइड्स और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।            वन मंडल अधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने कहा कि कार्यशाला का मकसद केवल औषधीय ज्ञान का प्रसार नहीं था, इसका उद्देश्य इस ज्ञान को समाज के अधिक लोगों तक पहुंचाकर वृक्षों एवं वनस्पतियों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण में जनसहभागिता को प्रोत्साहित करना भी है।

16 जून 2026 से ही प्रारंभ होगा शैक्षणिक सत्र 2026-27

रायपुर संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी पत्र  दिनांक 12 जून 2026 के अनुसार राज्य की समस्त शासकीय एवं अशासकीय शालाओं में शैक्षणिक सत्र 2026-27 का विधिवत संचालन 16 जून 2026 (मंगलवार) से प्रारंभ किया जाएगा। इस संबंध में सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर प्रसारित की जा रही यह सूचना कि शैक्षणिक सत्र 01 जुलाई 2026 से प्रारंभ होगा, पूर्णतः असत्य, भ्रामक तथ्यों से परे एवं फर्जी है।           लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा स्पष्ट किया गया है कि विद्यालयों के संचालन की अधिकृत तिथि 16 जून 2026 ही है। अतः विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं आम नागरिकों से अपील की जाती है कि वे केवल विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट एवं भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से बढ़ रही किसानों की आय, आत्मनिर्भर बन रहे मत्स्यपालक

रायपुर  छत्तीसगढ़ में कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने मत्स्य क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खोली हैं। आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, आधारभूत सुविधाओं और अनुदान आधारित योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के हजारों मत्स्यपालक आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहे हैं। मत्स्य पालन आज केवल परंपरागत व्यवसाय नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीण परिवारों के लिए आय और रोजगार का एक सशक्त साधन बन चुका है। शासन की योजनाओं से छोटे और सीमांत किसानों को भी मत्स्य व्यवसाय अपनाने का अवसर मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया है। जशपुर में मत्स्य उत्पादन का नया कीर्तिमान मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर में मत्स्य क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल हुई हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले ने पिछले 22 महीनों में 22 हजार 805 मीट्रिक टन मछली उत्पादन का नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। इससे न केवल मत्स्य उत्पादन में वृद्धि हुई है, बल्कि हजारों किसानों और मत्स्यपालकों की आय में भी महत्वपूर्ण बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मत्स्य विभाग के अनुसार जिले में 18.50 करोड़ स्पॉन, 2.55 करोड़ स्टेज फ्राय तथा 2.94 करोड़ मत्स्य बीजों का संचयन किया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है और उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है। सात हजार से अधिक हितग्राहियों को मिला लाभ जिले में ग्रामीण स्तर पर 77.67 हेक्टेयर तालाबों तथा 295.27 हेक्टेयर जलाशयों का पट्टा आवंटित किया गया है। इसके साथ ही नाव, जाल, फिंगरलिंग, मत्स्य बीमा तथा विपणन सहायता जैसी सुविधाओं के माध्यम से सात हजार से अधिक हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। इन प्रयासों से मत्स्यपालकों को व्यवसाय विस्तार और बेहतर आय अर्जित करने में सहायता मिल रही है। आधुनिक तकनीक से बढ़ रही उत्पादकता प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत तालाब निर्माण, पौंड लाइनर, बायोफ्लॉक इकाइयों की स्थापना और अन्य आधुनिक मत्स्य संरचनाओं के लिए 60 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इससे मत्स्य उत्पादन की वैज्ञानिक पद्धतियों को बढ़ावा मिला है और उत्पादन लागत कम होने के साथ उत्पादकता में भी वृद्धि हुई है। प्रशिक्षण और एक्सपोजर विजिट से मिल रहा नया ज्ञान मत्स्यपालकों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के लिए उन्हें देश के विभिन्न राज्यों में एक्सपोजर विजिट पर भेजा जा रहा है। इन भ्रमण कार्यक्रमों के माध्यम से किसान और स्वयं सहायता समूहों के सदस्य वैज्ञानिक मत्स्य पालन, तालाब एवं बीज प्रबंधन, संतुलित आहार, रोग नियंत्रण तथा विपणन की उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इससे मत्स्य व्यवसाय अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन रहा है। आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में मजबूत कदम प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से मत्स्य उत्पादन, रोजगार सृजन और किसानों की आय बढ़ाने के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में मत्स्य क्षेत्र का निरंतर विस्तार हो रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है।